पेटेंट से आय पर कर
पेटेंट से आय पर कर
115खखच. (1) जहां किसी पात्र निर्धारिती की कुल आय में भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत पेटेंट में स्वामिस्व के रूप में कोर्इ आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर,
(क) पेटेंट के संबंध में स्वामिस्व के रूप में आय पर दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(ख) आय-कर की ऐसी रकम जो निर्धारिती से उस दशा में प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय की रकम में से खंड (क) में निर्दिष्ट आय घटा दी जाती,
का योग होगा ।
(2) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी व्यय या मोक की बाबत पात्र निर्धारिती को उपधारा (1) के खंड (क) में निर्दिष्ट उसकी आय की संगणना करने में इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ।
(3) पात्र निर्धारिती इस धारा के उपबंधों के अनुसार भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत किसी पेटेंट की बाबत स्वामित्व द्वारा आय के कराधान के लिए विकल्प का प्रयोग सुसंगत पूर्ववर्ष के लिए आय की विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट देय तारीख को या उससे पहले विहित रीति में कर सकेगा।
(4) जहां कोर्इ पात्र निर्धारिती इस धारा के उपबंधों के अनुसार किसी पूर्ववर्ष के लिए भारत में विकसित और रजिस्ट्रीकृत किसी पेटेंट की बाबत स्वामित्व द्वारा आय के कराधान का विकल्प चुनता है और निर्धारिती ऐसे पूर्ववर्ष के उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष के सुसंगत पांच निर्धारण वर्षों में से किसी के कराधान के लिए ऐसी आय का प्रस्ताव करता है, जो उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार नहीं है, तो निर्धारिती उस पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष के पश्चात्वर्ती पांच निर्धारण वर्षों के लिए, जिसमें ऐसी आय पर कर का प्रस्ताव उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है, इस धारा के उपबंधों के फायदे का दावा करने का पात्र नहीं होगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "विकसित" से किसी ऐसे आविष्कार, जिसके संबंध में पेटेंट अधिनियम, 1970 (1970 का 39) (जिसे इसमें इसके पश्चात् पेटेंट अधिनियम कहा गया है), के अधीन पेटेंट मंजूर किया गया है, के लिए पात्र निर्धारिती द्वारा भारत में उपगत व्यय का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत अभिप्रेत है;
(ख) "पात्र निर्धारिती" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसका भारत में निवास है और जो पेटेंटी है;
(ग) "आविष्कार" का वही अर्थ होगा जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ञ) में उसका है;
(घ) "एकमुश्त" के अंतर्गत ऐसे स्वामिस्वों के कारण कोर्इ ऐसा अग्रिम संदाय, जो वापस करने योग्य नहीं है, आता है;
(ड़) "पेटेंट" का वही अर्थ होगा जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ड) में उसका है;
(च) "पेटेंटी" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो आविष्कार का वास्तविक और प्रथम आविष्कारक है, जिसका नाम पेटेंट अधिनियम के अनुसार पेटेंटी के रूप में पेटेंट रजिस्टर में प्रविष्ट किया गया है और इसके अंतर्गत ऐसा व्यक्ति भी है जो आविष्कार का वास्तविक और प्रथम आविष्कारक वहां है जहां एक व्यक्ति से अधिक व्यक्ति उस पेटेंट की बाबत उस अधिनियम के अधीन पेटेंटी के रूप में रजिस्ट्रीकृत हैं;
(छ) "पेटेंटीकृत वस्तु" और "पेटेंटकृत प्रक्रिया" के वही अर्थ होंगे जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ण) में क्रमश: उनके हैं;
(ज) पेटेंट के संबंध में "स्वामिस्व" से निम्नलिखित के लिए ऐसा प्रतिफल (जिसके अंतर्गत एकमुश्त प्रतिफल है किंतु कोर्इ ऐसा प्रतिफल नहीं है जो "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य प्राप्तिकर्ता की आय या पेटेंटीकृत प्रक्रिया के उपयोग या वाणिज्यिक उपयोग के लिए पेटेंटीकृत वस्तु के साथ विनिर्मित उत्पाद के विक्रय के लिए प्रतिफल होगा) अभिप्रेत है,–
(i) पेटेंट के संबंध में सभी या किन्हीं अधिकारों (जिनमें अनुज्ञप्ति का मंजूर किया जाना भी है) का अंतरण; या
(ii) पेटेंट के कार्यकरण या उसके उपयोग से संबंधित कोर्इ सूचना प्रदान करना; या
(iii) किसी पेटेंट का उपयोग; या
(iv) उपखंड (i) से उपखंड (iii) में निर्दिष्ट क्रियाकलापों के संबंध में कोर्इ सेवा प्रदान करना;
(झ) "वास्तविक और प्रथम आविष्कारक" के वही अर्थ होंगे जो पेटेंट अधिनियम की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (म) में उनके हैं ।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

