कतिपय मामलों में अनाम संदानों पर कर लगाया जाना
81[कतिपय मामलों में अनाम संदानों पर कर लगाया जाना
115खखग. (1) जहां किसी निर्धारिती की, जो धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iiiकघ) या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या उपखंड (iiiकड़) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अस्पताल या अन्य संस्था या उपखंड (iv) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था या धारा 11 में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था की ओर से आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति है, कुल आय में अनाम संदान के रूप में कोर्इ आय सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा :–
(i) किसी अनाम संदान के रूप में आय पर तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(ii) आय-कर की वह रकम, जिसके लिए निर्धारिती प्रभार्य होता, यदि उसकी कुल आय में से खंड (i) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी जाती।
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा 1.4.2010 से धारा 115खखग की उपधारा (1) के विद्यमान खंड (i) और खंड (ii) के स्थान पर निम्नलिखित खंड (i) और खंड (ii) रखे जाएंगे:
(i) निम्नलिखित रकमों से अधिक रकम के प्राप्त अनाम संदानों के उस योग पर तीस प्रतिशत की दर से संगणित आय-कर की रकम, अर्थात्:–
(अ) निर्धारिती को प्राप्त कुल संदानों का पांच प्रतिशत; या
(आ) एक लाख रुपए; और
(ii) आय-कर की वह रकम, जिसके लिए निर्धारिती प्रभार्य होता, यदि उसकी कुल आय में से प्राप्त अनाम संदानों की सकल रकम घटा दी जाती।
(2) उपधारा (1) के उपबंध ऐसे किसी अनाम संदान को लागू नहीं होंगे जो–
(क) पूर्णतया धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए सृजित या स्थापित किसी न्यास या संस्था द्वारा प्राप्त किया गया है;
(ख) पूर्णतया धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए सृजित या स्थापित किसी न्यास या संस्था द्वारा प्राप्त किया गया है, जो ऐसे किसी अनाम संदान से भिन्न हो जो इस विनिर्दिष्ट निदेश के साथ किया गया है कि ऐसा संदान किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था के लिए है, जो ऐसे न्यास या संस्था द्वारा चलार्इ जा रही हो।
(3) इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "अनाम संदान" से धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (iiक) में निर्दिष्ट कोर्इ स्वैच्छिक अभिदाय अभिप्रेत है, जहां ऐसा अभिदाय प्राप्त करने वाला व्यक्ति ऐसा अभिदाय करने वाले व्यक्ति का नाम और पता दर्शाने वाली पहचान का तथा ऐसी अन्य विशिष्टियों का, जो विहित की जाएं, कोर्इ अभिलेख नहीं रखता है।]
81. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

