कतिपय नर्इ देशी विनिर्माण कंपनियों की आय पर कर
कतिपय नर्इ देशी विनिर्माण कंपनियों की आय पर कर
115खकख. (1) इस अधिनियम में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी किंतु धारा 115खक और धारा 115खकक के अधीन उल्लिखित उपबंधों से भिन्न इस अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी ऐसे व्यक्ति की, जो एक देशी कंपनी है, 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के लिए कुल आय की बाबत संदेय आय-कर की संगणना ऐसे व्यक्ति के विकल्पानुसार, यदि उपधारा (2) में अंतर्विष्ट शर्तें पूरी हो जाती हैं, पन्द्रह प्रतिशत की दर पर की जाएगी।
(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित शर्तें लागू होंगी, अर्थात्:-
(क) कंपनी 1 अक्टूबर, 2019 को या उसके पश्चात् स्थापित और रजिस्ट्रीकृत की गर्इ है और उसने 31 मार्च, 2023 को या इससे पूर्व विनिर्माण प्रारंभ कर दिया है, और,-
(i) उसका गठन पहले से विद्यमान किसी कारबार का विभाजन या पुनर्गठन करके नहीं किया गया है:
परंतु यह शर्त ऐसे किसी उपक्रम की बाबत लागू नहीं होगी, जिसका गठन व्यक्ति द्वारा धारा 33ख में यथा-निर्दिष्ट ऐसे किसी उपक्रम के कारबार की उक्त धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर पुन:स्थापना, पुनर्गठन या पुन:प्रवर्तन के परिणामस्वरूप किया गया है;
(ii) वह किसी ऐसी मशीनरी या संयंत्र का प्रयोग नहीं करती है, जिसका प्रयोग इससे पूर्व किसी प्रयोजन के लिए किया गया था।
स्पष्टीकरण 1 - उपखंड (ii) के प्रयोजनों के लिए, ऐसी किसी मशीनरी या संयंत्र को, जिसका प्रयोग किसी अन्य व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर किया गया था, तब किसी अन्य प्रयोजन के लिए पूर्व में प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के रूप में नहीं समझा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाती हैं, अर्थात्:-
(क) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का, व्यक्ति द्वारा प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख से पूर्व किसी समय भारत में प्रयोग नहीं किया गया था;
(ख) ऐसी मशीनरी या संयंत्र का भारत के बाहर किसी देश से भारत में आयात किया गया है; और
(ग) व्यक्ति द्वारा मशीनरी या संयंत्र प्रतिष्ठापित किए जाने की तारीख से पूर्व किसी अवधि के लिए किसी व्यक्ति की कुल आय की संगणना करने में इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन ऐसी मशीनरी या संयंत्र की बाबत अवक्षयण मद्धे कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ है या अनुज्ञात-योग्य नहीं है।
स्पष्टीकरण 2 - जहां किसी व्यक्ति की दशा में, कंपनी द्वारा इससे पूर्व किसी प्रयोजन के लिए प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र या उसके किसी भाग का प्रयोग किया जाता है और ऐसी मशीनरी या संयंत्र या उसके भाग का कुल मूल्य, कंपनी द्वारा प्रयुक्त मशीनरी या संयंत्र के कुल मूल्य के बीस प्रतिशत से अधिक नहीं हैं तब इस खंड के उपखंड (ii) के प्रयोजनों के लिए उसमें विनिर्दिष्ट शर्त के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका अनुपालन हो गया है;
(iii) वह ऐसे किसी भवन का प्रयोग नहीं करती है जिसका इससे पूर्व, यथास्थिति, किसी होटल या किसी कन्वेंशन केंद्र के रूप में प्रयोग किया गया था।
स्पष्टीकरण - इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, "कन्वेंशन केंद्र" और "होटल" अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे जो धारा 80झघ की उपधारा (6) के क्रमश: खंड (क) और खंड (ख) में उनके हैं;
(ख) कंपनी किसी वस्तु या चीज के विनिर्माण या उत्पादन या उसके द्वारा विनिर्मित या उत्पादित ऐसी वस्तु या चीज के संबंध में अनुसंधान या वितरण के कारबार से भिन्न किसी कारबार में नहीं लगी हुर्इ है; और
(ग) कंपनी की कुल आय की संगणना,-
(i) धारा 10कक या धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (iiक) या धारा 32कघ या धारा 33कख या धारा 33कखक या धारा 35 की उपधारा (1) के उपखंड (ii) या उपखंड (iiक) या उपखंड (iii) या उपधारा (2कक) या उपधारा (2कख) या धारा 35कघ या धारा 35गगग या धारा 35गगघ के उपबंधों के अधीन या धारा 80ञञकक के उपबंधों से भिन्न, अध्याय 6क के "ग-कतिपय आय की बाबत कटौतियां" शीर्षक के अधीन आने वाले किन्हीं उपबंधों के अधीन किसी कटौती के बिना की गर्इ है;
(ii) किसी पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष से अग्रनीत किसी हानि का, यदि ऐसी हानि उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी कटौती के कारण हुर्इ मानी जा सकती है, मुजरा किए बिना की गर्इ है; और
(iii) धारा 32 की उपधारा (1) के खंड (iiक) से भिन्न, उक्त धारा के अधीन ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अवधारित अवक्षयण का दावा करते हुए की गर्इ है।
(3) उपधारा (2) के खंड (ग) के उपखंड (ii) में निर्दिष्ट हानि के बारे में यह समझा जाएगा कि उसे पहले ही प्रभावी किया जा चुका है और किसी पश्चात्वर्ती वर्ष के लिए ऐसी हानि के लिए कोर्इ और कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(4) जहां निर्धारण अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि कंपनी और किसी अन्य व्यक्ति के बीच निकट संबंध के कारण या किसी अन्य कारणवश, उनके बीच कारबार के अनुक्रम की व्यवस्था इस प्रकार की गर्इ है कि उनके बीच किए गए कारबार से कंपनी को उस साधारण लाभ से, जो उद्भूत होना प्रत्याशित हो सकता था, अधिक लाभ उत्पन्न होता है वहां निर्धारण अधिकारी, इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसी कंपनी के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने में लाभ की वह रकम लेगा जो उससे युक्तियुक्त रूप से व्युत्पन्न हुर्इ समझी जा सकती है:
परन्तु यदि पूर्वोक्त व्यवस्था में धारा 92खक में निर्दिष्ट कोर्इ विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार अंतर्वलित है तो ऐसे संव्यवहार से हुए लाभों की रकम का अवधारण धारा 92च के खंड (ii) में यथा-परिभाषित असन्निकट कीमत को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
(5) इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात तब तक लागू नहीं होगी जब तक व्यक्ति द्वारा 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष के लिए आय-कर की पहली विवरणी देने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन नियत तारीख को या उससे पूर्व विहित रीति में विकल्प का प्रयोग नहीं किया जाता है और ऐसा विकल्प, एक बार प्रयोग किए जाने पर, पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों को लागू होगा:
परंतु जब किसी पूर्ववर्ष के लिए विकल्प का प्रयोग कर लिया जाता है तब उसी या किसी अन्य पूर्ववर्ष के लिए उसे बाद में वापस नहीं लिया जा सकता है।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

