आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115कघ

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

धारा

धारा संख्या

115कघ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2020

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

115कघ. (1) जहां किसी 11क[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं] की कुल आय में,–

() 11कक[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में आय से भिन्न आय] जो (धारा 115कख में निर्दिष्ट यूनिटों से भिन्न) प्रतिभूतियों की बाबत प्राप्त हुर्इ हो; या

() ऐसी प्रतिभूतियों के अंतरण से उद्भूत अल्पकालिक या दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय,

सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–

(i) खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की बाबत आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

परन्तु धारा 194ठघ में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय पर परिकलित आय-कर की रकम पांच प्रतिशत की दर पर होगी;

कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 115कघ की उपधारा (1) के विनियमन खंड (i) के स्थान पर निम्नलिखित खंड (i) अंत:स्थापित किया जाएगा

(i) खंड (क) में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के संबंध आय पर संगणित आय कर की रकम, यदि कोई हो, कुल आय मे—

() विदेशी संस्थागत विविधता की दशा में बीस प्रतिशत की दर से सम्मिलित की जाएंगी ;

() विनिर्दिष्ट निधि के मामले में दस प्रतिशत की दर से सम्मिलित की जाएगी ;

(ii) खंड() में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

परंतु धारा 111क में उल्लिखित अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर परिकलित आय-कर की रकम पंद्रह प्रतिशत की दर से होगी;

(iii) खंड() में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; 12[***]

12क[परंतु धारा 112क में निर्दिष्ट किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से होने वाली आय की दशा में, एक लाख रुपए से अधिक की ऐसी आय पर दस प्रतिशत की दर से आय-कर की संगणना की जाएगी;]

(iv) आय-कर की वह रकम जो 11कख[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की दशा में प्रभार्य होती है यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।

कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 115कघ की उपधारा (1) के पश्चात् उपधारा (1क) अंत:स्थापित की जाएगी

(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, विनिर्दिष्ट निधि की दशा में इस धारा का उपबंध केवल आय की उस सीमा तक लागू होगा, जो विहित रीति में संगणित अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन नहीं है) द्वारा धारित यूनिटें मानी जा सकती है।]

(2) जहां 11कख[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की,–

() सकल कुल आय केवल उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की बाबत आय से मिलकर बनती है वहां उसे धारा 28 से धारा 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

() सकल कुल आय में उपधारा (1) के खंड ()या खंड () में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ सकल कुल आय 11कख[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता] की सकल कुल आय हो।

(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोर्इ बात उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के अंतरण से उत्पन्न पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजन के लिए,–

() ''विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता'' पद से ऐसा विनिधानकर्ता अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;

() ''प्रतिभूति'' पद का वही अर्थ है जो उसका प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड () में है।]

कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से धारा 115कघ के स्पष्टीकरण के खंड (ख) के स्थान पर खंड (ख) (ग)(घ) अंत:स्थापित किए जाएंगे

() "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 92च के खंड (iiiक) में है ;

() "प्रतिभूतियां" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 4), की धारा 2 के खंड (ज) में है ;

() "विनिर्दिष्ट निधि" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में है।

 

11क. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से "विदेशी संस्थागत विधानकर्ता" शब्दों के स्थान पर "विनिर्दिष्ट निधि या विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे

11कक. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशो के रूप में आय से भिन्न आय" शब्दों के स्थान पर "प्रतिभूतियों (धारा 115कख में निर्दिष्ट यूनिटों से भिन्न) के संबंध में प्राप्त आय" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे

11कख. कराधान और अन्‍य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से "विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता" "शब्दों के स्थान पर " "विनिर्दिष्ट निधि या विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता " शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे

12. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से "और" शब्द का लोप किया गया।

12क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

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