आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 115कघ

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

धारा

धारा संख्या

115कघ

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2014

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

66[विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की प्रतिभूतियों से अथवा उनके अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से आय पर कर

115कघ. (1) जहां किसी विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की कुल आय में,–

67[() 68[धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में आय से भिन्न आय] जो (धारा 115कख में निर्दिष्ट यूनिटों से भिन्न) प्रतिभूतियों की बाबत प्राप्त हुर्इ हो; या]

() ऐसी प्रतिभूतियों के अंतरण से उद्भूत अल्पकालिक या दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय,

सम्मिलित है वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–

(i) खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की बाबत आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

68क[परन्तु धारा 194ठघ में निर्दिष्ट ब्याज के रूप में आय पर परिकलित आय-कर की रकम पांच प्रतिशत की दर पर होगी;]

(ii) खंड () में निर्दिष्ट अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, तीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

69[परंतु धारा 111क में उल्लिखित अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर परिकलित आय-कर की रकम 69क[पंद्रह] प्रतिशत की दर से होगी;]

(iii) खंड () में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और

(iv) आय-कर की वह रकम जो विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता की दशा में प्रभार्य होती है यदि उसकी कुल आय में से खंड (क) और (ख) में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।

(2) जहां विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता की,–

() सकल कुल आय केवल उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों की बाबत आय से मिलकर बनती है वहां उसे धारा 28 से धारा 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

() सकल कुल आय में उपधारा (1) के खंड () या खंड () में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ सकल कुल आय विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता की सकल कुल आय हो।

(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोर्इ बात उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट प्रतिभूतियों के अंतरण से उत्पन्न पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजन के लिए,–

() ‘‘विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ता’’ पद से ऐसा विनिधानकर्ता अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र70 में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;

() ‘‘प्रतिभूति’’71 पद का वही अर्थ है जो उसका प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड () में है।]

 

66. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।

67. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से यथा संशोधित खंड () निम्न प्रकार था :

‘‘() प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) और उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के उपबंधों अनुसार भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज मं3 सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के संबंध में (धारा 115कख में निर्दिष्ट यूनिटों से भिन्न) धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में आय से भिन्न आय; या’’

68. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से "आय" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.1999 से "धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में आय से भिन्न" शब्द अंत:स्थापित किए गए थे और बाद में वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से उनका लोप किया गया था।

68क. वित्त अधिनियम, 2013 द्वारा 1.4.2014 से अंत:स्थापित।

69. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।

69क. वित्त अधिनियम, 2008 द्वारा 1.4.2009 से ‘‘दस’’ के स्थान पर प्रतिस्थापित।

70. अधिसूचित विदेशी संस्थागत विनिधानकर्ताओं की सूची के लिए सम्बंधित अधिसूचना देखिए

71. ‘‘प्रतिभूति’’ पद की परिभाषा के लिए देखिए पूर्व पृष्ठ 1.35 पर पाद टिप्पण 6.

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2014 द्वारा संशोधित रूप में]

© कॉपीराइट. टैक्समैन पब्लिकेशन प्राइवेट लिमिटेड

फ़ुटनोट