आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 115कग

विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर

धारा

धारा संख्या

115कग

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2018

विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर

विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर

विदेशी करेंसी में क्रय किए गए बंधपत्रों या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से आय पर अथवा उनके अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों से उद्भूत आय पर कर

115कग. (1) जहां किसी निर्धारिती की, जो अनिवासी है, कुल आय में,–

() किसी भारतीय कंपनी के ऐसे बंधपत्रों पर, जो ऐसी स्कीम के अनुसार जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, विदेशी करेंसी में जारी किए जाते हैं या पब्लिक सेक्टर कंपनी के ऐसे बंधपत्रों पर जो सरकार द्वारा बेचे जाते हैं और जो विदेशी करेंसी में उसके द्वारा खरीदे जाते हैं ब्याज के रूप में आय; या

() ऐसी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों पर, धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय,–

(i) जो ऐसी स्कीम के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार, किसी भारतीय कंपनी के शेयरों के आरंभिक रूप में जारी किए जाने के संबंध में, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, जारी की जाती है और किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से उसके द्वारा विदेशी करेंसी में क्रय की जाती है;

(ii) जो किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी के ऐसे शेयरों के संबंध में, जिनका सरकार द्वारा विक्रय किया जाता है, जारी की जाती हैं और किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से उसके द्वारा विदेशी करेंसी में क्रय किए जाते हैं; या

(iii) जो ऐसी स्कीम के अनुसार जो केंद्रीय सरकार किसी अनुमोदित मध्यवर्ती के माध्यम से विदेशी करेंसी में उसके द्वारा क्रय किए गए किसी भारतीय कंपनी के विद्यमान शेयरों के संबंध में, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, जारी या पुन: जारी की जाती हैं; या

(iv) [***]

() यथास्थिति, खंड () में निर्दिष्ट बंधपत्रों के अंतरण या खंड () में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में आय,

सम्मिलित है, वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा,–

(i) खंड () में निर्दिष्ट बंधपत्रों या खंड () में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत, यथास्थिति, ब्याज या धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, जो कुल आय में सम्मिलित है, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;

(ii) खंड () में निर्दिष्ट दीर्घकालिक अभिलाभों के रूप में आय पर, यदि कोर्इ हो, दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और

(iii) आय-कर की वह रकम, जो अनिवासी पर प्रभार्य होती, यदि उसकी कुल आय में से खंड (), खंड () और खंड () में निर्दिष्ट आय की रकम घटा दी गर्इ होती।

(2) जहां अनिवासी की सकल कुल आय में,–

() यथास्थिति, उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट, बंधपत्रों या उस उपधारा के खंड (ख) में निर्दिष्ट ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों की बाबत केवल ब्याज या धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों के रूप में आय सम्मिलित है वहां धारा 28 से धारा 44ग या धारा 57 के खंड (i) या खंड (iii) के अधीन या अध्याय 6क के अधीन उसे कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

() उपधारा (1) के खंड () या खंड () या खंड () में निर्दिष्ट कोर्इ आय सम्मिलित है वहां सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती इस प्रकार अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटा कर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की सकल कुल आय हो।

(3) धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुकों की कोर्इ बात, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो उपधारा (1) के खंड () में निर्दिष्ट बंधपत्र या ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें हैं, अंतरण से होने वाले दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की संगणना करने के लिए लागू नहीं होगी।

(4) किसी अनिवासी के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन अपनी आय की विवरणी देना आवश्यक नहीं होगा, यदि–

() उसकी कुल आय में, जिसकी बाबत वह पूर्ववर्ष के दौरान इस अधिनियम के अधीन निर्धारणीय है, केवल उपधारा (1) के खंड () और खंड () में निर्दिष्ट आय सम्मिलित है; और

() अध्याय 17ख के उपबंधों के अधीन स्रोत पर कटौती योग्य कर की ऐसी आय से कटौती की गर्इ है।

(5) जहां निर्धारिती ने उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार, यथास्थिति, समामेलक या अविलयित कंपनी में अपनी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें या बंधपत्र धारण करने के आधार पर समामेलित या परिणामी कंपनी में ग्लोबल निक्षेपागार रसीदें या बंधपत्र अर्जित किए हैं, वहां उस उपधारा के उपबंध ऐसी ग्लोबल निक्षेपागार रसीदों या बंधपत्रों को लागू होंगे।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() ''अनुमोदित मध्यवर्ती'' से ऐसा मध्यवर्ती अभिप्रेत है, जो ऐसी स्कीम के अनुसार अनुमोदित है, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचित करे;

() ''ग्लोबल निक्षेपागार रसीद'' का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 115कगक के स्पष्टीकरण के खंड () में है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

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