आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 115ण

देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर

धारा

धारा संख्या

115ण

अध्याय शीर्षक

अध्याय XIIघ - घरेलू कंपनियों की वितरित लाभ पर कर से संबंधित विशेष प्रावधान

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2018

देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर

देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर

अध्याय 12घ

देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर संबंधी विशेष उपबंध

देशी कंपनियों के वितरित लाभों पर कर

115ण. (1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी और इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी देशी कंपनी की कुल आय की बाबत प्रभार्य आय-कर के अतिरिक्त, ऐसी कंपनी द्वारा 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् लाभांशों के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा), चाहे वे चालू लाभ या संचित लाभ हों, घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर पंद्रह प्रतिशत की दर से अतिरिक्त आय-कर (जिसे इसमें इसके पश्चात् वितरित लाभों पर कर कहा गया है) प्रभारित किया जाएगा :

43[परंतु धारा 2 के खंड (22) के उपखंड () में निर्दिष्ट लाभांश के संबंध में यह उपधारा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो ''पन्द्रह प्रतिशत'' शब्दों के स्थान पर ''तीस प्रतिशत'' शब्द रख दिए गए हो]

(1क) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकम को,–

(i) वित्तीय वर्ष के दौरान देशी कंपनी द्वारा प्राप्त लाभांश की रकम को, यदि कोर्इ हो, घटा दिया जाएगा, यदि ऐसा लाभांश उसकी समनुषंगी से प्राप्त होता है और,–

() जहां ऐसी समनुषंगी कोर्इ देशी कंपनी है, समनुषंगी ने ऐसे कर का, जो इस धारा के अधीन ऐसे लाभांश पर संदेय है, संदाय किया है; या

() जहां ऐसी समनुषंगी कोर्इ विदेशी कंपनी है वहां ऐसे लाभांश पर कर धारा 115खखघ के अधीन देशी कंपनी द्वारा संदेय है :

परंतु लाभांश की वही रकम एक से अधिक बार घटाने के लिए गणना में नहीं ली जाएगी ;

(ii) धारा 10 के खंड (44) में निर्दिष्ट नर्इ पेंशन प्रणाली न्यास के लिए या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को संदत्त लाभांश की रकम, यदि कोर्इ हो।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, कोर्इ कंपनी किसी अन्य कंपनी की समनुषंगी तब समझी जाएगी यदि ऐसी अन्य कंपनी उस कंपनी की साधारण शेयर पूंजी के अभिहित मूल्य के आधे से अधिक धारण करती है।

(1ख) इस धारा के अनुसार संदेय वितरित लाभों पर कर के अवधारण के प्रयोजनों के लिए, उपधारा (1) में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में कोर्इ रकम, जो उपधारा (1क) में निर्दिष्ट रकम को घटाकर आए [जिसे इसके पश्चात् शुद्ध वितरित लाभ कहा गया है], उतनी रकम तक बढ़ा दी जाएगी, जो उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट दर पर ऐसी बढ़ार्इ गर्इ रकम पर कर को घटाने के पश्चात् शुद्ध वितरित लाभों के बराबर हो:

44[परंतु यह कि धारा 2 के खंड (22) के उपखंड () में निर्दिष्ट लाभांश के संबंध में यह उपधारा लागू नहीं होगी।]

(2) इस बात के होते हुए भी कि देशी कंपनी द्वारा इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित अपनी कुल आय पर कोर्इ आय-कर संदेय नहीं है, उपधारा (1) के अधीन वितरित लाभों पर कर ऐसी कंपनी द्वारा संदेय होगा।

(3) देशी कंपनी का प्रधान अधिकारी और कंपनी, केन्द्रीय सरकार के जमाखाते वितरित लाभों पर कर–

() किसी लाभांश की घोषणा; या

() किसी लाभांश के वितरण; या

() किसी लाभांश के संदाय;

की तारीख से, इनमें से जो भी पहले हो, चौदह दिन के भीतर देने के लिए दायी होगी।

(4) कंपनी द्वारा इस प्रकार संदत्त वितरित लाभों पर कर लाभांश के रूप में घोषित, वितरित या संदत्त रकम की बाबत कर का अंतिम संदाय माना जाएगा और इस प्रकार संदत्त रकम की बाबत कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसका कोर्इ और क्रेडिट नहीं मांगा जाएगा।

(5) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन कोर्इ कटौती उस रकम की बाबत जिस पर उपधारा (1) के अधीन कर या उस पर कर प्रभारित किया गया है, कंपनी या शेयरधारक को अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(6) इस धारा में की किसी बात के होते हुए भी विकासकर्ता या उद्यम की याऐसे लाभांश को प्राप्त करने वाले व्यक्ति की वर्तमान आय में से 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् लाभांश के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा) ऐसे विकासकर्ता या उद्यम द्वारा घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए किसी विशेष आर्थिक जोन के विकास, या विकास तथा प्रचालन या विकास, प्रचालन और अनुरक्षण में लगे किसी उपक्रम या उद्यम की कुल आय की बाबत वितरित लाभ पर कोर्इ कर प्रभार्य नहीं होगा:

परंतु इस उपधारा के उपबंध 1 जून, 2011 से प्रभावी नहीं रहेंगे।

(7) विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पश्चात्, चालू आय में से किसी कारबार न्यास को लाभांशों (चाहे अंतरिम हों या अन्यथा) के माध्यम से विनिर्दिष्ट देशी कंपनी द्वारा घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम के संबंध में इस धारा के अधीन वितरित लाभों पर कोर्इ कर प्रभार्य नहीं होगा :

परंतु इस उपधारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात विनिर्दिष्ट तारीख तक संचित लाभों और चालू लाभों में से लाभांशों (चाहे अंतरिम हों या अन्यथा) के माध्यम से विनिर्दिष्ट देशी कंपनी द्वारा किसी भी समय घोषित, वितरित या संदत्त किसी रकम के संबंध में लागू नहीं होगी ।

स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "विनिर्दिष्ट देशी कंपनी" से ऐसी कोर्इ देशी कंपनी अभिप्रेत है जिसमें कोर्इ कारबार न्यास, कंपनी की साधारण अंश पूंजी के पूर्ण अभिहित मूल्य का धारक हो जाता है (तत्समय प्रवृत्त किसी विधि या सरकार अथवा किसी विनियामक प्राधिकारी के किसी अनुदेश के अनुसरण में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आवश्यक रूप से धारित किए जाने के लिए अपेक्षित साधारण अंश पूंजी या सरकार या किसी सरकारी निकाय द्वारा धारित साधारण अंश पूंजी को अपवर्जित करते हुए);

() "विनिर्दिष्ट तारीख" से ऐसी धृति के कारबार न्यास द्वारा अर्जन की तारीख अभिप्रेत है जैसा कि खंड () में विनिर्दिष्ट की जाए ।

(8) इस धारा में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसी कंपनी द्वारा, जो किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की इकार्इ है, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में व्युत्पन्न एकमात्र आय के रूप में ऐसे लाभांश को प्राप्त करने वाली कंपनी या व्यक्ति के हाथों में वर्तमान आय में से 1 अप्रैल, 2017 को या उसके पश्चात् लाभांश के रूप में (चाहे अंतरिम हो या अन्यथा) ऐसी कंपनी द्वारा घोषित वितरित या संदत्त किसी रकम पर किसी निर्धारण वर्ष के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में एकमात्र आय से व्युत्पन्न कुल आय की बाबत वितरित लाभ पर कोर्इ कर प्रभार्य नहीं होगा।

स्पष्टीकरण– इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–

() "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड () में उसका है;

() "इकार्इ" से 1 अप्रैल, 2016 को या उसके पश्चात् किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में स्थापित कोर्इ इकार्इ अभिप्रेत है;

() "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में समझा गया है।

 

43. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

44. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट