वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया।
कंपनियों की दशा में पूंजी अभिलाभ पर कर
115. 97[वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया।]
97. धारा 115 का लोप किया गया। इससे पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1962 द्वारा 1.4.1962 से, वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से, वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से और वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से यथा संशोधित धारा 115 इस प्रकार थी :
'115. कंपनियों की दशा में पूंजी अभिलाभ पर कर–जहां कंपनी की कुल आय में ऐसी कोर्इ आय भी शामिल है जो अल्पकालिक पूंजी आस्तियों से भिन्न पूंजी आस्तियों से संबंधित "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है (ऐसी आय को इसमें आगे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ कहा गया है) वहां संदेय आय-कर निम्नलिखित का योग होगा–
(i) कुल आय में शामिल दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ की राशि पर परिकलित आय-कर की राशि–
(क) ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ की उतनी राशि पर जितनी भवन या भूमि या भवन या भूमि में किन्हीं अधिकारों से सम्बद्ध है, पचास प्रतिशत की दर से; और
(ख) ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के अतिशेष पर, यदि कोर्इ है, चालीस प्रतिशत की दर से; और
(ii) वह आय-कर की राशि जिससे वह प्रभार्य होती यदि उसकी कुल आय में से खंड (i) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ की राशि घटा दी जाती।'
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

