आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 112क

राष्ट्रीय बचत पत्रों (प्रथम निर्गम) पर ब्याज पर कर

धारा

धारा संख्या

112क

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

राष्ट्रीय बचत पत्रों (प्रथम निर्गम) पर ब्याज पर कर

राष्ट्रीय बचत पत्रों (प्रथम निर्गम) पर ब्याज पर कर

11क[कतिपय मामलों में दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर।

112क. (1) धारा 112 में किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती द्वारा उसकी कुल आय पर संदेय कर उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार अवधारित किया जाएगा यदि,–

(i) कुल आय के अंतर्गत ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य कोई आय भी है;

(ii) ऐसा पूंजी अभिलाभ ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से होता है, जो किसी कंपनी में साधारण अंश है या साधारण शेयरोन्मुख निधि की कोई यूनिट है या किसी कारबार न्यास की कोई यूनिट है;

(iii) वित्त (सं0 2) अधिनियम, 2004 (2004 का 23) के अध्याय 7 के अधीन प्रतिभूति संव्यवहार कर,–

(क) किसी ऐसे मामले में, जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो किसी कंपनी में साधारण शेयर की प्रकृति की है, के अर्जन पर और ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण पर संदत्त किया गया है;

(ख) किसी ऐसे मामले में, जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति का, जो किसी साधारण शेयरोन्मुख निधि यूनिट की प्रकृति की है या किसी कारबार न्यास की यूनिट की ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण पर संदत्त किया गया है।

(2) उपधारा (1) निर्दिष्ट कुल आय पर निर्धारिती द्वारा संदेय कर निम्नलिखित का योग होगा–

(i) एक लाख रुपए से अधिक के ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर दस प्रतिशत की दर से संगणित आय-कर की रकम; और

(ii) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम, जिसमें से उपधारा (1) में निर्दिष्ट दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को इस प्रकार घटा दिया गया हो, मानो जैसे कि इस प्रकार घटाने के पश्चात् प्राप्त हुई कुल आय निर्धारित की कुल आय थी:

परंतु किसी व्यष्टि या किसी हिन्दू अविभक्त कुटुंब की दशा में, जो निवासी है, जहां ऐसे दीर्घकालिक पूंजी आस्ति को घटाने के पश्चात् प्राप्त हुई कुल आय, उस अधिकतम रकम से कम है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, तो खंड (i) के प्रयोजनों के लिए दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों में से उतनी रकम घटा दी जाएगी जितनी इस प्रकार घटाई गई कुल आय उस अधिकतम रकम से कम है, जो आय कर से प्रभार्य नहीं है।

(3) उपधारा (1) के खंड (iii) में विनिर्दिष्ट शर्त किसी भी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में स्थित मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज पर अंतरण को और जहां ऐसे अंतरण का प्रतिफल विदेशी मुद्रा में प्राप्त किया जाता है या प्राप्य है, को लागू नहीं होगी।

(4) केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, अर्जन की ऐसी प्रकृति को विनिर्दिष्ट कर सकेगी जिसके संबंध में उपधारा (1) के खंड (iii) के उपखंड (क) के उपबंध लागू नहीं होंगे।

(5) जहां किसी निर्धारिती की सकल कुल आय के अंतर्गत उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई भी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ सम्मिलित है, वहां अध्याय 6क के अधीन कटौती, सकल कुल आय में ऐसे पूंजी अभिलाभ घटाने के पश्चात् अनुज्ञात की जाएगी।

(6) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोई दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ सम्मिलित है, वहां धारा 87क के अधीन रिबेट, ऐसी कुल आय पर जिसमें से ऐसी पूंजी आस्ति पर संदेय कर को घटा दिया गया है, आय-कर पर अनुज्ञात किया जाएगा।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,

() ''साधारण शेयरोन्मुख निधि'' से धारा 10 के खंड (23घ) 11कख[या किसी बीमा कंपनी के अधीन, जो धारा 2 के खंड (47क) के अधीन यथा परिभाषित यूनिट सहबद्ध बीमा पालिसियों से मिलकर बनी हैं] के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की किसी स्कीम के अधीन स्थापित निधि अभिप्रेत है और,

(i) उस दशा में जहां निधि किसी ऐसी दूसरी निधि की यूनिटों में विनिधान करती है जिसका व्यापार मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में किया जाता है,

() ऐसी निधि के कुल आगमों का कम से कम नब्बे प्रतिशत ऐसी अन्य निधि की यूनिटों में विनिधान किया जाता है; और

() ऐसी अन्य निधि द्वारा भी किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज मंड सूचीबद्ध देशी कंपनियों के साधारण शेयरों में अपने कुल आगमों का कम से कम नब्बे प्रतिशत विनिधान किया जाता है; और

(ii) किसी अन्य दशा में, ऐसी निधि के कुल आगमों का कम से कम साठ प्रतिशत किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध देशी कंपनियों के साधारण शेयरों में विनिधान किया जाता है:

परंतु निधि की बाबत, यथास्थिति, साधारण शेयर धारण या धारित यूनिट की प्रतिशतता की संगणना आरंभिक और अंतिम मासिक औसतों की वार्षिक औसत के संदर्भ में की जाएगी;

11कख[परंतु यह और कि किसी बीमा कंपनी की किसी स्कीम के मामले में, जो यूनिट सहबद्ध बीमा पालिसियों से मिलकर बनी हैं जिसे धारा 10 के खंड (10घ) के अधीन छूट उसके चौथे और पांचवें परंतुक की अनुप्रयोज्यता के कारण लागू नहीं होते हैं, यथास्थिति, नब्बे प्रतिशत या पैंसठ प्रतिशत की न्यूनतक अपेक्षा ऐसी बीमा पालिसी की संपूर्ण अवधि के दौरान समाधान करना अपेक्षित है;।]

(ख) ''अंर्तराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र'' का वही अर्थ होगा जो विशेष व्यापार जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (थ) में उसका है;

(ग) ''मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज'' का वही अर्थ होगा जो धारा 43 के खंड (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में उसका है।]

 

 

11क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया मूल धारा 112क, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1965 द्वारा 11.9.1965 से अंत:स्थापित की गई थी और बाद में वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1968/1969 से भूतलक्षी प्रभाव से और वित्त अधिनियम, 1973 द्वारा 1.4.1972 से भूतलक्षी प्रभाव से संशोधित की गई थी।

11कख. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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