दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर
दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर
112. (1) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ ऐसी आय सम्मिलित है जो ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है वहां निर्धारिती द्वारा कुल आय पर संदेय कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–
(क) किसी व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुम्ब जो निवासी है की दशा में,–
(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और
(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :
परन्तु जहां ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों को घटाकर आर्इ कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से कम है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है वहां ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों में से ऐसी रकम घटा दी जाएगी जिससे इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से कम पड़ जाती है, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है और ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के अतिशेष पर कर की संगणना बीस प्रतिशत की दर से की जाएगी;
(ख) किसी देशी कंपनी की दशा में,–
(i) कुल आय पर संदेय आय-कर, की रकम जैसी कि वह ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो उस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय, उसकी कुल आय हो; और
(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :
(ग) किसी अनिवासी (जो कंपनी नहीं है) या किसी विदेशी कंपनी की दशा में–
(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और
(ii) दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर [सिवाय वहां के, जहां ऐसा अभिलाभ उपखंड (iii) में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है] बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और
(iii) ऐसी किसी पूंजी आस्ति के, जो असूचीबद्ध प्रतिभूतियां या किसी कंपनी, जो ऐसी कंपनी न हो, जिसमें जनता सारवान रूप से हितबद्ध हो, के शेयरहैं, अंतरण से, धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुक को प्रभावी किए बिना यथासंगणित ऐसी आस्ति की बाबत पूंजी अभिलाभों के संबंध में उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम।
(घ) किसी निवासी से संबंधित किसी अन्य दशा में,–
(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और
(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम।
स्पष्टीकरण–[* * *]
परन्तु जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो सूचीबद्ध प्रतिभूतियां (किसी यूनिट से भिन्न) या जीरो कूपन बंधपत्र हैं, अंतरण से उद्भूत होने वाली किसी आय की बाबत संदेय कर धारा 48 के दूसरे परंतुक के उपबंधों को प्रभावी करने के पूर्व पूंजी अभिलाभों की रकम के दस प्रतिशत से अधिक हो जाता है वहां ऐसे आधिक्य को निर्धारिती द्वारा संदेय कर की संगणना करने के प्रयोजन के लिए छोड़ दिया जाएगा।
परंतु यह और कि जहां ऐसी किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो धारा 10 के खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की यूनिट है, अंतरण से उद्भूत होने वाली किसी आय की बाबत संदेय कर, 1 अप्रैल, 2014 से प्रारम्भ होने वाली और 10 जुलार्इ, 2014 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, धारा 48 के दूसरे परंतुक के उपबंधों को प्रभावी करने से पूर्व, पूंजी अभिलाभों की रकम के 10 प्रतिशत से अधिक है, वहां ऐसे आधिक्य को निर्धारिती द्वारा संदेय कर की संगणना करने के प्रयोजन के लिए छोड़ दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "प्रतिभूति" पद का वही अर्थ है, जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 32) की धारा 2 के खंड (ज) में उसका है;
(कक) "सूचीबद्ध प्रतिभूतियां" से ऐसी प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं, जो भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं;
(कख) "असूचीबद्ध प्रतिभूतियां" से सूचीबद्ध प्रतिभूतियों से भिन्न प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं;
(ख) [***]
(2) जहां किसी निर्धारिती की सकल कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ आय सम्मिलित है वहां उस सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की कुल आय हो।
(3) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ आय सम्मिलित है वहां उस कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय पर आय-कर में से धारा 88 के अधीन रिबेट दी जाएगी।
[वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधित रूप में]

