आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 112

दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर

धारा

धारा संख्या

112

अध्याय शीर्षक

अध्याय XII - कुछ विशेष मामलों में कर का निर्धारण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2013

दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर

दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर

12[दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर

13112. (1) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ ऐसी आय सम्मिलित है जो "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है वहां निर्धारिती द्वारा कुल आय पर संदेय कर निम्नलिखित का योग होगा, अर्थात् :–

() किसी व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुम्ब 14[जो निवासी है] की दशा में,–

(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और

(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

परन्तु जहां ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों को घटाकर आर्इ कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से कम है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है वहां ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों में से ऐसी रकम घटा दी जाएगी जिससे इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से कम पड़ जाती है, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है और ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के अतिशेष पर कर की संगणना बीस प्रतिशत की दर से की जाएगी;

() किसी 14क[देशी] कंपनी की दशा में,–

(i) कुल आय पर संदेय आय-कर, की रकम जैसी कि वह ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो उस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय, उसकी कुल आय हो; और

(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर 15[बीस] प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम :

16[* * *]

17[() किसी अनिवासी (जो कंपनी नहीं है) या किसी विदेशी कंपनी की दशा में–

(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और

17क[(ii) दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर [सिवाय वहां के, जहां ऐसा अभिलाभ उपखंड (iii) में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है] बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम; और

(iii) ऐसी किसी पूंजी आस्ति के, जो असूचीबद्ध प्रतिभूतियां हैं, अंतरण से, धारा 48 के पहले और दूसरे परंतुक को प्रभावी किए बिना यथासंगणित ऐसी आस्ति की बाबत पूंजी अभिलाभों के संबंध में उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर दस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम।]

18[()] 19[किसी निवासी से संबंधित] किसी अन्य दशा में,–

(i) कुल आय पर संदेय आय-कर की रकम जैसी कि वह ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की रकम को घटाकर आए, मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय उसकी कुल आय हो; और

(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर 20[बीस] प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम।

स्पष्टीकरण21[* * *]

22[परन्तु जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो सूचीबद्ध प्रतिभूतियां 23[या यूनिटें] 24[या जीरो कूपन बंधपत्र] हैं, अंतरण से उद्भूत होने वाली किसी आय की बाबत संदेय कर धारा 48 के दूसरे परंतुक के उपबंधों को प्रभावी करने के पूर्व पूंजी अभिलाभों की रकम के दस प्रतिशत से अधिक हो जाता है वहां ऐसे आधिक्य को निर्धारिती द्वारा संदेय कर की संगणना करने के प्रयोजन के लिए छोड़ दिया जाएगा।

25[स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए–

26[(क) "प्रतिभूति" पद का वही अर्थ है, जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 32) की धारा 2 के खंड (ज) में उसका है;26क

(कक) "सूचीबद्ध प्रतिभूतियां" से ऐसी प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं, जो भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं;

(कख) "असूचीबद्ध प्रतिभूतियां" से सूचीबद्ध प्रतिभूतियों से भिन्न प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं;]

() "यूनिट" का वही अर्थ है जो उसका धारा 115कख के स्पष्टीकरण के खंड () में है।]]

(2) जहां किसी निर्धारिती की सकल कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ आय सम्मिलित है वहां उस सकल कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और अध्याय 6क के अधीन कटौती अनुज्ञात की जाएगी मानो इस प्रकार घटाकर आर्इ सकल कुल आय निर्धारिती की कुल आय हो।

(3) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत कोर्इ आय सम्मिलित है वहां उस कुल आय में से ऐसी आय की रकम घटा दी जाएगी और इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय पर आय-कर में से धारा 88 के अधीन रिबेट दी जाएगी।]

 

12. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से धारा 112 का लोप किया गया था और उसके स्थान पर धारा 80ध रखी गर्इ थी। लोप से पूर्व इस धारा का पहले वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से और फिर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1965 द्वारा 11.9.1965 से संशोधन किया गया था।

13. परिपत्र सं. 721, तारीख 13.9.1995 भी देखिए।

14. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

14क. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

15. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से 'तीस' के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से 'चालीस' के स्थान पर 'तीस' प्रतिस्थापित किया गया था।

16. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से परन्तुक का लोप किया गया। इससे पूर्व वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से यथा संशोधित परन्तुक निम्न प्रकार था :

'परन्तु जोखिम पूंजी उपक्रमों के साधारण शेयरों के अंतरण से जोखिम पूंजी कम्पनी के लिए उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के संबंध में उपखंड (ii) के उपबंधों का वही प्रभाव होगा मानो "तीस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "बीस प्रतिशत" शब्द रखे गए हों;'

17. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से अंत:स्थापित।

17क. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से उपखंड (ii) के स्थान पर उपखंड (ii) और उपखंड (iii) प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, उपखंड (ii) इस प्रकार था :

"(ii) ऐसे दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों पर बीस प्रतिशत की दर से परिकलित आय-कर की रकम;"

18. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से विद्यमान खंड () को खण्ड () के रूप में पुनर्अक्षरांकित किया गया।

19. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

20. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से "तीस" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

21. वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से स्पष्टीकरण का लोप किया गया। लोप से पूर्व स्पष्टीकरण इस प्रकार था :

'स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए–

() "जोखिम पूंजी कंपनी" से अभिप्रेत है ऐसी कंपनी, जो जोखिम पूंजी उपक्रमों के साधारण शेयरों का अर्जन करके या, यदि परिस्थितियों से ऐसा अपेक्षित हो तो, ऐसे उपक्रमों को उधार देकर, उनका वित्तपोषण करने के काम में मुख्यत: लगी हुर्इ है और जो इस निमित्त केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है;

() "जोखिम पूंजी उपक्रम" से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसे विहित प्राधिकारी, निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित करे, अर्थात् :–

(1) कंपनी में कुल विनिधान दस करोड़ रुपए या ऐसी अन्य ऊंची रकम से जो विहित की जाए अधिक नहीं है,

(2) कंपनी के पास ऐसी परियोजनाओं को प्रारंभ करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं जिनके लिए वह वृत्तिक या तकनीकी दृष्टि से अन्यथा समर्थ है;

(3) कंपनी ऐसी प्रौद्योगिकी का उपयोग करना चाहती है, जिसका परिणाम भारत में किसी क्षेत्र में विद्यमान प्रौद्योगिकी में महत्त्वपूर्ण सुधार करना होगा और ऐसी प्रौद्योगिकी में विनिधान करने में बहुत जोखिम है।'

22. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

23. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

24. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से अंत:स्थापित।

25. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से यथा अंत:स्थापित स्पष्टीकरण निम्न प्रकार था :

'स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "सूचीबद्ध प्रतिभूतियों" से ऐसी प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं जो–

() प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 32) की धारा 2 के खंड () में परिभाषित है; और

() भारत में किसी मान्यता प्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है।'

26. वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से खंड () के स्थान पर खंड (), (कक) और खंड (कख) प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, खंड () इस प्रकार था :

'() "सूचीबद्ध प्रतिभूतियों" से ऐसी प्रतिभूतियां अभिप्रेत हैं, जो,–

(i) प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 32) की धारा 2 के खंड () में परिभाषित हैं; और

(ii) भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं।'

26क. "प्रतिभूतियों" की परिभाषा के लिए देखिये, पूर्व पृष्ठ 1.33 पर पाद-टिप्पण 6.

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