कुछ मामलों में अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर टैक्स
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा 1.4.2005 से धारा 111 के पश्चात् निम्नलिखित धारा 111क अंत:स्थापित की जाएगी:
कतिपय मामलों में अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों पर कर
111क. जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में, ऐसी किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से होने वाली कोर्इ ऐसी आय भी है, जो "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है और जो किसी कंपनी में साधारण शेयर या किसी साधारण शेयरोन्मुख निधि की यूनिट है और–
(क) ऐसे साधारण शेयर या यूनिट के विक्रय का संव्यवहार उस तारीख को या उसके पश्चात्, जिसको वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 का अध्याय 7 प्रवृत्त होता है, किया गया है; और
(ख) ऐसा संव्यवहार उस अध्याय के अधीन प्रतिभूति संव्यवहार कर से प्रभार्य है,
वहां निर्धारिती द्वारा कुल आय पर संदेय कर निम्नलिखित का योग होगा–
(i) ऐसे अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों पर दस प्रतिशत की दर से संगणित आय-कर की रकम; और
(ii) कुल आय की अतिशेष रकम पर संदेय आय-कर की रकम, मानो ऐसी अतिशेष रकम निर्धारिती की कुल आय थी:
परंतु किसी व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब की दशा में, जो निवासी है, जहां ऐसे अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों से घटाकर आर्इ कुल आय उस अधिकतम रकम से कम है, जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, वहां ऐसे अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों में से वह रकम घटा दी जाएगी जो इस प्रकार घटाकर आर्इ कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से कम पड़ जाती है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है और ऐसे अल्पकालिक पूंजी अभिलाभों के अतिशेष पर कर दस प्रतिशत की दर से संगणित किया जाएगा।
(2) जहां किसी निर्धारिती की सकल कुल आय में उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ अल्पकालिक पूंजी अभिलाभ सम्मिलित हैं वहां अध्याय 6क के अधीन कटौती ऐसे पूंजी अभिलाभों से घटा कर आर्इ सकल कुल आय पर अनुज्ञात की जाएगी।
(3) जहां किसी निर्धारिती की कुल आय में उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ अल्पकालिक पूंजी अभिलाभ सम्मिलित हैं वहां ऐसी पूंजी अभिलाभों से घटा कर आर्इ कुल आय पर आय-कर से धारा 88 के अधीन रिबेट अनुज्ञात किया जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "कोर्इ साधारण शेयरोन्मुख निधि" पद का वही अर्थ है जो उसका धारा 10 के खंड (38) के स्पष्टीकरण में है।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

