नव स्थापित सौ फीसदी निर्यात उन्मुख उपक्रमों के संबंध में विशेष उपबंध
71[नवस्थापित शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रमों की बाबत विशेष उपबंध
10ख. (1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए उस पूर्ववर्ती वर्ष से, जिसमें उपक्रम, यथास्थिति, वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर का विनिर्माण या उत्पादन करना आरंभ करता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाली दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम द्वारा व्युत्पन्न ऐसे लाभ और अभिलाभों की कटौती निर्धारिती की कुल आय से अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपक्रम की कुल आय संगणित करने में इसके लाभ और अभिलाभों को, इस धारा के, जैसी कि यह वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने से ठीक पहले थी, उपबंधों को लागू किए जाने से सम्मिलित नहीं किया गया था, वहां उपक्रम पूर्वोक्त दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अनावसित अवधि के लिए ही इस धारा में निर्दिष्ट कटौती के लिए हकदार होगा :
71क[***]
वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से धारा 10ख की उपधारा (1) में निम्नलिखित दूसरा परन्तुक अंत:स्थापित किया जाएगा :
परन्तु यह भी* कि 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए इस उपधारा के अधीन कटौती ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त किए गए लाभों और अभिलाभों का नब्बे प्रतिशत होगी :
परन्तु यह भी कि इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती, किसी उपक्रम को 1 अप्रैल, 2010 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या इसके पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(2) यह धारा ऐसे उपक्रम को लागू होती है जो निम्नलिखित सभी शर्तों को पूरा करता है, अर्थात् :–
(i) यह किसी वस्तु या चीज या साफ्टवेयर का विनिर्माण या उत्पादन करता है;
(ii) यह पहले से विद्यमान किसी कारबार को खण्डित या पुनर्गठित करके नहीं बना है :
परन्तु यह शर्त उस उपक्रम की बाबत लागू नहीं होगी, जो धारा 33ख में निर्दिष्ट किसी उपक्रम के कारबार के, उस धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों में और अवधि के भीतर निर्धारिती द्वारा पुन:स्थापन, पुनर्गठन या पुन: चालन के परिणामस्वरूप बना है;
(iii) वह किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण करके नहीं बना है।
स्पष्टीकरण.–धारा 80झ की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध इस उपधारा के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।
(3) यह धारा ऐसे उपक्रम को लागू होती है यदि भारत से बाहर निर्यात की गर्इ वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर साफ्टवेयर के विक्रय आगम निर्धारिती द्वारा पूर्ववर्ष की समाप्ति के छह मास या ऐसी और अवधि के भीतर, जो सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त किए जाते हैं या भारत में लाए जाते हैं।
स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ''सक्षम प्राधिकारी'' पद से भारतीय रिजर्व बैंक का विदेशी मुद्रा में भुगतान और व्यवहार करने के लिए तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन प्राधिकृत कोर्इ प्राधिकारी अभिप्रेत है ।
स्पष्टीकरण 2.–इस उपधारा में निर्दिष्ट विक्रय आगम भारत में प्राप्त किए गए समझे जाएंगे यदि वे विक्रय आगम इस प्रयोजन के लिए निर्धारिती द्वारा रिज़र्व बैंक के अनुमोदन से भारत के बाहर किसी बैंक में खोले गए पृथक् खाते में जमा किए जाते हैं।
71ख[(4) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वस्तुओं या चीज़ों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त लाभ वह रकम होगी जो उपक्रम के कारबार के लाभों के उसी अनुपात में है जो ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर की बाबत निर्यात आवर्त का उपक्रम द्वारा किए गए कारबार के कुल आवर्त से है।]
(5) 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात् प्रारम्भ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (1) के अधीन कटौती तब तक ग्राह्य नहीं होगी जब तक कि निर्धारिती आय की विवरणी के साथ धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखाकार की रिपोर्ट विहित फार्म71खख में यह प्रमाणित करते हुए प्रस्तुत नहीं कर देता कि कटौती का दावा इस धारा के उपबंधों के अनुसार उचित रूप में किया गया है।
(6) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, सुसंगत निर्धारण वर्षों में से अंतिम निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में या पश्चात्वर्ती किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में,–
(i) धारा 32, धारा 32क, धारा 33, धारा 35 और धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) उसी प्रकार लागू होंगे मानो उनमें निर्दिष्ट प्रत्येक मोक या कटौती, जो किसी ऐसे भवन, मशीनरी, प्लांट या फर्नीचर के संबंध में जो ऐसे निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त है, सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी से संबंधित या उसके लिए अनुज्ञेय है या ऐसे पूर्ववर्ष में ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए उपगत कोर्इ व्यय उसी निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ण रूप से प्रभावी किया गया है और तदनुसार, यथास्थिति, धारा 32 की उपधारा (2), धारा 32क की उपधारा (3) के खंड (ii), धारा 35 की उपधारा (4) या धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) के दूसरे परन्तुक के उपबंध ऐसे मोक या कटौती के संबंध में लागू नहीं होंगे ;
(ii) धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) के निर्दिष्ट कोर्इ हानि, जहां तक ऐसी हानि का संबंध उपक्रम के कारबार से है, अग्रनीत या मुजरा नहीं की जाएगी यदि ऐसी हानि सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी के संबंध में है;
(iii) धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80झ या धारा 80झक या धारा 80झख के अधीन उपक्रम के लाभ और अभिलाभ के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी; और
(iv) धारा 32 के अधीन अवक्षयण मोक की संगणना करने में, किसी ऐसी आस्ति का, जो उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त है, अवलिखित मूल्य इस प्रकार संगणित किया जाएगा मानो निर्धारिती ने प्रत्येक सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया हो और वह उसे अनुज्ञात की गर्इ हो।
(7) धारा 80झक की उपधारा (8) और उपधारा (10) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में निर्दिष्ट उपक्रम के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे धारा 80झक में निर्दिष्ट उपक्रम के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।
(8) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारिती धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए नियत तारीख से पूर्व निर्धारण अधिकारी को लिखित रूप में यह घोषणा प्रस्तुत करता है कि इस धारा के उपबंध उसे लागू नहीं किए जाने चाहिए, वहां इस धारा के उपबंध किसी सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए उसे लागू नहीं होंगे।
(9) जहां किसी पूर्ववर्ष के दौरान उपक्रम में स्वामित्व या फायदाप्रद हित किसी साधन द्वारा अंतरित किया जाता है वहां ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए निर्धारिती को उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से धारा 10क की उपधारा (9) के पश्चात् निम्नलिखित उपधारा (9क) अंत:स्थापित की जाएगी :
(9क) उपधारा (9) में की किसी बात के होते हुए भी, जहां कारबार के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप, कोर्इ कंपनी किसी फर्म या एकल स्वत्वधारी समुत्थान की उत्तराधिकारी बन जाती है और फर्म या एकल स्वत्वधारी समुत्थान के उपक्रम का स्वामित्व या फायदाग्राही हित कंपनी को अंतरित हो जाता है, वहां ऐसे उपक्रम के संबंध में उपधारा (1) के अधीन कटौती कंपनी को उसी प्रकार अनुज्ञात की जाएगी जैसे कि वह, यदि ऐसा पुनर्गठन न होता, यथास्थिति, ऐसी फर्म या एकल स्वत्वधारी समुत्थान को अनुज्ञात की गर्इ होती।
परन्तु यह कि–
(क) किसी फर्म की दशा में, फर्म के भागीदारों की कंपनी में कुल शेयरधारिता कंपनी में कुल मतदान शक्ति के इक्यावन प्रतिशत से कम नहीं है और उनकी शेयरधारिता उस अवधि के लिए, जिसके लिए कंपनी इस धारा के अधीन कटौती के लिए पात्र है, उस रूप में बनी रहेगी;
(ख) किसी एकल स्वत्वधारी समुत्थान की दशा में, एकल स्वत्वधारी की कंपनी में शेयरधारिता कंपनी में कुल मतदान के इक्यावन प्रतिशत से कम नहीं है और उसकी शेयरधारिता, उस अवधि के लिए, जिसके लिए कंपनी इस धारा के अधीन कटौती के लिए पात्र है, उस रूप में बनी रहेगी।
स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसी कंपनी की दशा में, जहां किसी पूर्ववर्ष के अंतिम दिन, उस कंपनी में, जिसके पास इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति है, शेयर ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप में धारित नहीं है, जो उस कंपनी के शेयर धारित करते हैं, जिसके पास उस वर्ष के अंतिम दिन इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति है, जिसमें उपक्रम की स्थापना की गर्इ थी वहां उस कंपनी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने उपक्रम में अपना स्वामित्व या फायदाप्रद हित अंतरित कर दिया है :
71ग[परन्तु इस स्पष्टीकरण की कोर्इ बात कंपनी के शेयर धारण में,–
(क) उसके ऐसी कंपनी हो जाने के परिणामस्वरूप, जिसमें जनता सारभूत रूप से हितबद्ध है; या
(ख) किसी जोखिम पूंजी कंपनी या जोखिम पूंजी निधि द्वारा उसके साधारण शेयरों के विनिवेश के परिणामस्वरूप,
किसी परिवर्तन के संबंध में लागू नहीं होगी।]
स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) ''कम्प्यूटर साफ्टवेयर'' से अभिप्रेत है,–
(क) किसी डिस्क, टेप, छिद्रित माध्यम या अन्य सूचना संग्रह युक्ति पर किसी कम्प्यूटर प्रोग्राम की रिकार्डिंग; या
(ख) बोर्ड द्वारा अधिसूचित71घ कोर्इ ग्राहक अपेक्षित इलैक्ट्रानिक डाटा या समान प्रकृति का ऐसा कोर्इ उत्पाद या सेवा,
जिसे किसी साधन द्वारा भारत से बाहर किसी स्थान में भारत से पारेषित या निर्यात किया गया है;
(ii) ''संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा'' से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1973 (1973 का 46) और तदधीन बनाए गए किन्हीं नियमों या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य तत्स्थानी विधि के प्रयोजनों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा तत्समय संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा समझा गया है;
(iii) ''निर्यात आवर्त'' से निर्धारिती द्वारा उपधारा (3) के अनुसरण में संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में भारत में प्राप्त की गर्इ या लार्इ गर्इ चीजों या वस्तुओं या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के 72[उपक्रम द्वारा] निर्यात की बाबत प्रतिफल अभिप्रेत है किंतु इसके अंतर्गत भारत के बाहर चीज या वस्तु या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के परिदान के लिए माना जा सकने वाला भाड़ा-प्रभार, दूरसंचार प्रभार या बीमा अथवा भारत के बाहर तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने में विदेशी मुद्रा में उपगत व्यय, यदि कोर्इ हो, नहीं है;
(iv) ''शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम'' से ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जिसे उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 1472क और उस अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त नियुक्त बोर्ड द्वारा शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम के रूप में अनुमोदित किया गया है;
(v) ''सुसंगत निर्धारण वर्ष'' से इस धारा में निर्दिष्ट दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि के भीतर आने वाला कोर्इ निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है।
72[स्पष्टीकरण 3.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि भारत के बाहर कम्प्यूटर साफ्टवेयर के स्थलीय विकास से (जिसके अंतर्गत साफ्टवेयर के विकास के संबंधी सेवाएं भी हैं) प्राप्त लाभ और अभिलाभ भारत के बाहर कम्प्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे।]
71. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से यथा अन्त:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1991 से भूतलक्षी प्रभाव से, वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994/1.4.1995 से, आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से तथा वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से यथा संशोधित धारा 10ख निम्नानुसार थी :
'10ख. नवस्थापित शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रमों की बाबत विशेष उपबंध–(1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी निर्धारिती द्वारा किसी ऐसे शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम से (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् 'उपक्रम' कहा गया है) जिसको यह धारा लागू होती है, प्राप्त लाभ या अभिलाभ निर्धारिती की कुल आय में सम्मिलित नहीं किए जाएंगे।
(2) यह धारा ऐसे उपक्रम को लागू होती है जो निम्नलिखित सभी शर्तें पूरा करता है, अर्थात्–
(i) यह किसी चीज या वस्तु का विनिर्माण या उत्पादन करता है;
(iक) ऐसे उपक्रम की बाबत, जिसने किसी वस्तु या चीज़ को विनिर्माण या उत्पादन 1 अप्रैल या उसके पश्चात् किया हैे और पूर्व वर्ष के दौरान ऐसी चीज या वस्तु का निर्यात उसकी पूरी बिक्री के पचहत्तर प्रतिशत से कम न हो;
(ii) यह पहले से विद्यमान किसी कारबार को खंडित या पुनर्गठित करके नहीं बना है :
परन्तु यह शर्त उस उपक्रम के बारे में लागू नहीं होगी जो धारा 33ख में, यथा उल्लिखित किसी औद्योगिक उपक्रम के कारबार की उस धारा में विशेष रूप से उल्लिखित परिस्थितियों में और कालावधि के अन्दर निर्धारिती द्वारा पुन: स्थापना, पुनर्गठन या पुन: चालन के फलस्वरूप बना है;
(iii) वह किसी प्रयोजन के लिए तत्पूर्व प्रयुक्त किसी मशीनरी या संयंत्र का नए कारबार को अंतरण कर नहीं बना है।
स्पष्टीकरण.–धारा 80झ की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध, इस उपधारा के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उक्त उपधारा के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट लाभ और अभिलाभ उस पूर्ववर्ष से, जिसमें वह उपक्रम वस्तुओं या चीजों का विनिर्माण या उत्पादन प्रारम्भ करता है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले किन्हीं क्रमवर्ती दस निर्धारण वर्षों के बारे में निर्धारिती की कुल आय में सम्मिलित नहीं किए जाएंगे।
(4) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, सुसंगत निर्धारण वर्षों में से अंतिम निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में या पश्चात्वर्ती किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष की निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में,–
(i) धारा 32, धारा 32क, धारा 33 और धारा 36 की उपधारा (1) का खंड (ix) उसी प्रकार लागू होगा मानो उसमें उल्लिखित प्रत्येक मोक या कटौती, जो किसी भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के संबंध में, जो निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त है, सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी से संबंधित या उसके लिए अनुज्ञेय है या ऐसे पूर्ववर्ष में ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए उपगत कोर्इ व्यय उसी निर्धारण वर्ष के लिए पूर्ण रूप से प्रभावी किया गया है और तद्नुसार, यथास्थिति, द्वारा 32 की उपधारा (2), धारा 32क की उपधारा (3) के खंड (ii), धारा 33 की उपधारा (2) के खंड (ii) या धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) के दूसरे परन्तुक के उपबंध ऐसे मोक या कटौती से संबंध में लागू नहीं होंगे;
(ii) धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) में उल्लिखित कोर्इ हानि, जहां तक ऐसी हानि उस उपक्रम के कारबार से संबंधित है, अग्रनीत या मुजरा नहीं की जाएगी, जहां ऐसी हानि सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी के संबंध में है;
(iii) धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80झ या धारा 80झक या धारा 80झख के अधीन उपक्रम के लाभ और अभिलाभ के संबंध में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी; और
(iv) धारा 32 के अन्तर्गत अवक्षयण मोक की संगणना करने में किसी आस्ति का जो उपक्रम के कारबार में प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त है अवलिखित मूल्य की इस प्रकार से गणना की जाएगी मानो निर्धारिती ने प्रत्येक सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया है और वह उसे अनुज्ञात की गर्इ हो।
(5) जहां किसी उपक्रम ने 1 अप्रैल, 1989 के पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष में वस्तुओं या चीजों का निर्माण या उत्पादन प्रारम्भ कर दिया है, वहां निर्धारिती अपने विकल्प पर धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन 1 अप्रैल, 1989 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी देने के लिए नियत समय की समाप्ति के पहले निर्धारण अधिकारी को एक लिखित घोषणा देगा कि उपधारा (1) के उपबंध उसे 1 अप्रैल, 1989 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष में से आठ वर्ष की अवधि के भीतर आने वाले किन्हीं पांच क्रमवर्ती वर्षों के लिए लागू कर दिए जाएं तथा यदि वह ऐसा करता है तो, उपधारा (1) के उपबंध उसे ऐसे सुसंगत निर्धारण वर्षों में से प्रत्येक के लिए लागू होंगे और अंतिम सुसंगत निर्धारण वर्ष के ठीक बाद के निर्धारण वर्ष के लिए तथा किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में उपधारा (4) के उपबंध भी लागू होंगे।
(6) धारा 80झ की उपधारा (8) और उपधारा (9) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में उल्लिखित उपक्रम के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे धारा 80झ में उल्लिखित औद्योगिक उपक्रम के प्रयोजनार्थ लागू होते हैं।
(7) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारिती धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी देने के लिए निश्चित तारीख से पूर्व निर्धारण अधिकारी को लिखित रूप में यह घोषणा देता है कि इस धारा के उपबंध उसे लागू न किए जाएं तो इस धारा के उपबंध किन्हीं भी सुसंगत निर्धारण वर्षों के लिए उसे लागू न होंगे।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(i) "शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम" से ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जिसे उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65) की धारा 14 और उसके अधीन बनाए गए नियमों द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, इस संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड द्वारा शत-प्रतिशत निर्यातोन्मुख उपक्रम के रूप में अनुमोदित किया गया है;
(ii) "सुसंगत निर्धारण वर्ष" से उपधारा (3) में विशेष रूप से उल्लिखित दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्ष अभिप्रेत हैं;
(iii) "विनिर्माण" के अन्तर्गत है,
(क) कोर्इ प्रसंस्करण, या
(ख) समंजन, या
(ग) किसी डिस्क, टेप, छिद्रित माध्यम या अन्य सूचना संग्रह युक्ति पर प्रोग्राम की रिकार्डिंग;
(iv) "उत्पादन" के अन्तर्गत, उपधारा (2) के खंड (i) में उल्लिखित वस्तुओं या चीजों के संबंध में कम्प्यूटर प्रोग्राम का उत्पादन भी है।'
71क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से दूसरे परन्तुक का लोप किया गया । लोप किए जाने से पूर्व दूसरा परन्तुक इस प्रकार था :
"परन्तु यह और कि वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के ऐसे घरेलु विक्रयों से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ, जो कुल विक्रयों के पच्चीस प्रतिशत से अधिक नहीं हैं वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे :"
*"यह भी" के स्थान पर "यह और" शब्द पढ़े जाने चाहिए।
71ख. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन के पूर्व, उपधारा (4) निम्नानुसार थी :
"(4) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त लाभ वह रकम होगी जो कारबार के लाभों के उसी अनुपात में है जो ऐसी वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर साफ्टवेयर की बाबत निर्यात आवर्त का निर्धारिती द्वारा किए गए कारबार के कुल आवर्त से है।"
71खख. देखिए नियम 16ड़ और फार्म सं. 56छ.
71ग. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
71घ. अधिसूचित सूचना प्रौद्योगिकी समर्थ उत्पादों या सेवाओं के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
72. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
72क. उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 की धारा 14 के पाठ के लिए देखिए परिशिष्ट एक।
[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

