आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 10क

मुक्त व्यापार क्षेत्र में नवस्थापित औद्योगिक उपक्रमों आदि के बारे में विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

10क

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - आय जो कुल आय का हिस्सा नहीं है

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2018

मुक्त व्यापार क्षेत्र में नवस्थापित औद्योगिक उपक्रमों आदि के बारे में विशेष उपबंध

मुक्त व्यापार क्षेत्र में नवस्थापित औद्योगिक उपक्रमों आदि के बारे में विशेष उपबंध

मुक्त व्यापार क्षेत्र में नवस्थापित औद्योगिक उपक्रमों आदि के बारे में विशेष उपबंध

10क. (1) इस धारा के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी निर्धारिती द्वारा किसी पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए, जिसमें उपक्रम ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, यथास्थिति, का निर्माण या उत्पादन करना आरंभ करता है वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से उपक्रम द्वारा प्राप्त ऐसे लाभ और अभिलाभ की कटौती ऐसे निर्धारिती की कुल आय में सम्मिलित करने के लिए अनुज्ञात की जाएगी :

परन्तु जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपक्रम की कुल आय संगणित करने में इस धारा, जैसी यह वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा इसके प्रतिस्थापन से ठीक पहले थी, के उपबंधों को लागू किए जाने से इसके लाभ और अभिलाभ सम्मिलित नहीं किए गए थे वह उपक्रम पूर्वोक्त दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अनावसित अवधि के लिए ही इस उपधारा में निर्दिष्ट कटौतियों के लिए हकदार होगा :

परन्तु यह और कि जहां कोर्इ उपक्रम आरंभिक रूप से कोर्इ मुक्त व्यापार क्षेत्र में अवस्थित है या निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र तत्पश्चात् अवस्थित ऐसे मुक्त व्यापार क्षेत्र या निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र को विशेष आर्थिक क्षेत्र में परिवर्तन के कारण किसी आर्थिक क्षेत्र में अवस्थित हो जाता है तो इस उपधारा में निर्दिष्ट दस क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि उस पूर्ववर्ती से सुसंगत निर्धारण वर्ष से गिनी जाएगी जिसमें उपक्रम ने ऐसे मुक्त व्यापार क्षेत्र या निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र में ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का निर्माण या उत्पादन शुरू किया था :

परन्तु यह भी कि 1 अप्रैल, 2003 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए इस उपधारा के अधीन कटौती किसी उपक्रम द्वारा ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त किए गए लाभों और अभिलाभों का नब्बे प्रतिशत होगी :

परन्तु यह भी कि इस धारा के अधीन किसी उपक्रम के 1 अप्रैल, 2012 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती वर्षों के लिए कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(1क) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी उपक्रम की, जो 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी विशेष आर्थिक जोन में किसी वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर सॅाफ्टवेयर का निर्माण या उत्पादन प्रारंभ करता है, कुल आय की संगणना करने में कटौती,–

(i) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें उपक्रम, यथास्थिति, ऐसी वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का निर्माण या उत्पादन प्रारंभ करता है सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए ऐसी वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त लाभों और अभिलाभों का शतप्रतिशत होगी और उसके पश्चात् अगले दो ऐसे लाभों या अभिलाभों की पचास प्रतिशत होगी और उसके पश्चात् ;

(ii) अगले तीन क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों के लिए उतनी रकम के बराबर होगी जो ऐसे लाभों के पचास प्रतिशत से अधिक नहीं होगी जो उस पूर्ववर्ष के लाभ और हानि लेखा में नामे डाल दी गर्इ है जिसकी बाबत कटौती अनुज्ञात की जानी है और निर्धारिती के कारबार के प्रयोजनों के लिए उपधारा (1ख) में अधिकथित रीति से सृजित और उपयोग किए जाने वाले आरक्षित खाते में (जिसे विशेष आर्थिक जोन पुन:विनिधान मोक आरक्षित खाता कहा जाएगा) जमा की जानी है :

परन्तु इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती ऐसे किसी निर्धारिती का अनुज्ञात नहीं की जाएगी जो धारा 139 की उपधारा (1) क अधीन विनिर्दष्ट नियत तारीख को या उससे पूर्व आय की कोर्इ विवरणी नहीं देता है।

(1ख) उपधारा (1क) के खंड (ii) के अधीन कटौती तभी अनुज्ञात की जाएगी जब निम्नलिखित शर्तें पूरी कर दी जाती हैं, अर्थात् :–

() विशेष आर्थिक जोन पुन: विनिधान मोक आरक्षित खाते में जमा की गर्इ रकम का उपयोग–

(i) ऐसी नर्इ मशीनरी या संयंत्र अर्जित करने के प्रयोजनों के लिए किया जाता होगा जिसका उस पूर्ववर्ष के, जिसमें आरक्षित निधि सृजित की गर्इ थी, अगले तीन वर्षों की अवधि की समाप्ति से पूर्व पहली बार उपयोग किया जाता है ; और

(ii) तब तक किया जाता होगा जब तक लाभांशों या लाभों के रूप में वितरण या भारत से बाहर लाभों के रूप में प्रेषण या भारत से बाहर किसी आस्ति के सृजन से भिन्न उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए पूर्वोक्त रूप में नर्इ मशीनरी या संयंत्र का अर्जन नहीं किया जाता है ;

() उस पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए, जिसमें ऐसे संयंत्र या मशीनरी का उपयोग पहली बार किया गया था, आय की विवरणी के साथ निर्धारिती द्वारा नर्इ मशीनरी या संयंत्र की बाबत वे विशिष्टियां, जो इस निमित्त विहित की जाएं, दी गर्इ है।

(1ग) जहां उपधारा (1क) के खंड (ii) के अधीन विशेष आर्थिक जोन पुन: विनिधान मोक आरक्षित खाते में जमा की गर्इ किसी रकम का–

() उपधारा (1ख) में निर्दिष्ट प्रयोजनों से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए उपयोग किया गया है वहाँ इस प्रकार उपयोग की गर्इ रकम ; या

() उपधारा (1ख) के खंड () के उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व उपयोग नहीं किया गया है, वहां इस प्रकार उपयोग न की गर्इ रकम–

(i) खंड () में निर्दिष्ट दशा में उस वर्ष में जिसमें रकम का इस प्रकार उपयोग किया गया था ; या

(ii) खंड () में निर्दिष्ट दशा में, उपधारा (1ख) के खंड () के उपखंड (i) में विनिर्दिष्ट तीन वर्षों की अवधि के ठीक बाद के वर्ष में,

लाभ समझे जाएंगे और तद्नुसार कर से प्रभारित होंगे।

(2) यह ऐसे किसी उपक्रम को लागू होती है जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता है, अर्थात्:–

(i) जिसने निम्नलिखित निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर का निर्माण या उत्पादन आरंभ कर दिया है या निर्माण या उत्पादन आरंभ करती है–

() जो किसी मुक्त व्यापार क्षेत्र में 1 अप्रैल, 1981 को या इसके पश्चात् आरंभ होता है; या

() जो यथास्थिति, किसी इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क या सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क में 1 अप्रैल, 1994 को या इसके पश्चात् आरंभ होता है;

() जो किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र में 1 अप्रैल, 2001 को या इसके पश्चात् आरंभ होता है;

(ii) इसे पहले से ही अस्तित्व में किसी कारबार के विखंडन या पुनर्निर्माण द्वारा बनाया गया है:

परन्तु यह शर्त किसी ऐसे उपक्रम के संबंध में लागू नहीं होगी जो उस धारा में विनिर्दिष्ट परिस्थितियों और अवधि के भीतर, किसी ऐसे उपक्रम, जो धारा 33ख में उल्लिखित हैं, के कारबार के निर्धारती द्वारा पुनस्र्थापन, पुनर्गठन या पुन:चालन के परिणामस्वरूप बनी है;

(iii) यह किसी प्रयोजन के लिए पूर्व में उपयोग किए गए किसी मशीनरी या संयंत्र के किसी नए कारबार को अंतरित करके नहीं बना है।

स्पष्टीकरण.धारा 80झ की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 के उपबंध इस उपधारा के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे इस उपखंड के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

(3) यह धारा उस उपक्रम को लागू होती है यदि भारत से बाहर निर्यात की गर्इ वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के विक्रय आगम पूर्ववर्ती वर्ष की समाप्ति से छह माह के भीतर या ऐसी और अवधि के भीतर जैसा सक्षम प्राधिकारी इस निमित्त अनुज्ञात करे, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में निर्धारिती द्वारा भारत में प्राप्त किया या लाया जाता है।

स्पष्टीकरण 1.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए ''सक्षम प्राधिकारी'' पद से भारतीय रिजर्व बैंक या ऐसा अन्य प्राधिकारी अभिप्रेत है जो विदेशी मुद्रा में संदायों और संव्यवहारों को विनियमित करने के लिए तत्समय किसी विधि के अधीन प्राधिकृत है।

स्पष्टीकरण 2.–इस उपधारा में उल्लिखित विक्रय आगम भारत में वहां प्राप्त किए गए समझे जाएंगे जहां ऐसे विक्रय आगम भारतीय रिज़र्व बैंक के अनुमोदन से भारत से बाहर किसी बैंक में निर्धारिती द्वारा इस प्रयोजन के लिए रखे गए किसी पृथक लेखे में जमा किए जाते हैं।

(4) उपधारा (1) और उपधारा (1क) के प्रयोजनों के लिए वस्तु या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के निर्यात से प्राप्त लाभ वह रकम होगी जो उपक्रम के कारबार में लाभों के उसी अनुपात में है जो ऐसी वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर की बाबत निर्यात आवर्त का उपक्रम द्वारा किए गए कारबार के कुल आवर्त से है।

(5) इस धारा के अधीन कटौती 1 अप्रैल, 2001 को या इसके पश्चात् आरम्भ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए तब तक अनुज्ञात नहीं होगी जब तक कि निर्धारिती धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित आय विवरणी के साथ लेखाकार की रिपोर्ट विहित फार्म में यह प्रमाणित करते हुए कि इस उपधारा के उपबंधों के अनुसार कटौती का ठीक प्रकार से दावा कर लिया है, प्रस्तुत नहीं करता है।

(6) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी सुसंगत निर्धारण वर्षों के अंतिम वर्ष के ठीक उत्तरवर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ती वर्ष या किसी पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ती वर्ष की निर्धारिती की कुल आय की संगणना करने में–

(i) धारा 32, धारा 32क, धारा 33, धारा 35 और धारा 36 की उपधारा (1) का खण्ड (ix) वैसे ही लागू होगा जैसे मानो उसमें निर्दिष्ट और 1 अप्रैल, 2001 से पूर्व समाप्त होने वाले सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी वर्ष से संबंधित या उसके लिए अनुज्ञेय, ऐसे निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ती वर्ष में उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किसी भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर के संबंध में प्रत्येक भत्ता या कटौती ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष में ऐसे कारबार के प्रयोजनों के लिए उपगत कोर्इ व्यय उस वर्ष के लिए पूर्ण रूप से प्रभावी किया गया हो और तदनुसार धारा 32 की उपधारा (2), धारा 32क की उपधारा (3) का खण्ड (ii), धारा 33 की उपधारा (2) का खण्ड (ii), धारा 35 की उपधारा (4), धारा 36 की उपधारा (1) का खंड (ix) का दूसरा परन्तुक, यथास्थिति, ऐसे किसी भत्ते या कटौती के संबंध में लागू नहीं होंगे;

(ii) धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 74 की उपधारा (1) या उपधारा (3) में निर्दिष्ट कोर्इ हानि, जहां तक ऐसी हानि उपक्रम के कारबार से संबंधित है, वहां अग्रनीत या मुजरा कर दी जाएगी जहां ऐसी हानि 1 अप्रैल, 2001 से पूर्व समाप्त होने वाले सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी वर्ष से संबंधित हैं;

(iii) उपक्रम के लाभों या अभिलाभों से संबंधित धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80झ या धारा 80झक या धारा 80झख के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

(iv) धारा 32 के अधीन अवक्षयण मोक संगणित करने में उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए उपयोग की गर्इ किसी आस्ति को अवलिखित मूल्य उस प्रकार संगणित किया जाएगा मानो निर्धारिती ने प्रत्येक सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौतियों का दावा किया था और वास्तव में यह अनुज्ञात की गर्इ थी।

(7) धारा 80झक की उपधारा (8) और उपधारा (10) के उपबंध, जहां तक हो सके, इस धारा में निर्दिष्ट उपक्रमों के संबंध में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे धारा 80झक में निर्दिष्ट उपक्रमों के प्रयोजनों के लिए लागू होते हैं।

(7क) जहां किसी भारतीय कंपनी के किसी उपक्रम को, जो इस धारा के अधीन कटौती के लिए हकदार है, इस धारा में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति से पूर्व समामेलन या अविलयन की किसी स्कीम में किसी दूसरी भारतीय कंपनी को अंतरित किया जाता है वहां,–

() समामेलक या अविलयित कंपनी को उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन या अविलयन होता है, इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय नहीं होगी ; और

() इस धारा के उपबंध समामेलित या परिणामी कंपनी को, जहां तक हो सके, इस प्रकार लागू होंगे जैसे वे समामेलक या अविलयित कंपनी को लागू होते यदि समामेलन या अविलयन नहीं हुआ होता।

(7ख) इस धारा के उपबंध किसी ऐसे उपक्रम को लागू नहीं होंगे, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (यग) में निर्दिष्ट यूनिट है, जिसने 1 अप्रैल, 2006 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान किसी विशेष आर्थिक जोन में वस्तुओं या चीजों या कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का विनिर्माण या उत्पादन आरंभ किया है या करता है।

(8) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारती, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए देय तारीख से पहले लिखित में एक घोषणा निर्धारण अधिकारी को प्रस्तुत करता है कि इस धारा के उपबंध उसके लिए लागू न किए जाएं, वहां इस धारा के उपबंध सुसंगत निर्धारण वर्षों में से किसी वर्ष के लिए उसे लागू नहीं होंगे।

(9) [वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से लोप किया गया।]

(9क) [वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से लोप किया गया।]

[स्पष्टीकरण 1.वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से लोप किया गया।]

स्पष्टीकरण 2.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

(i) ''कम्प्यूटर साफ्टवेयर'' से निम्नलिखित अभिप्रेत है–

() किसी डिस्क, टेप, छिद्रित माध्यम या अन्य सूचना भंडारण युक्ति पर अभिलिखित कोर्इ कंप्यूटर प्रोग्राम, या

() कोर्इ ग्राहक अपेक्षित इलैक्ट्रानिक डाटा या समान प्रकृति की सेवा जो बोर्ड द्वारा अधिसूचित की जाए,

जिसे किसी साधन द्वारा भारत से बाहर किसी स्थान में भारत से पारेषित या निर्यात किया गया है;

(ii) ''संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा'' से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) या तदधीन बनाए गए किसी नियम या तत्समय प्रवृत किसी अन्य तत्समान विधि के प्रयोजनों के लिए तत्समय संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा माना जाता है;

(iii) ''इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क'' से ऐसा पार्क अभिप्रेत है जिसे भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित इलैक्ट्रानिक हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (र्इएचटीपी) स्कीम के अनुसार स्थापित किया गया है;

(iv) ''निर्यात आवर्त'' से उपधारा (3) के अनुसार संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में निर्धारिती द्वारा प्राप्त या लार्इ गर्इ वस्तुओं या चीजों या कम्प्यूटर साफ्टवेयर के उपक्रम द्वारा निर्यात की बाबत प्रतिफल अभिप्रेत है किंतु जिसमें भारत से बाहर वस्तुओं या चीजों का कम्प्यूटर साफ्टवेयर के परिदान के कारण भाड़ा, दूरसंचार प्रभार और बीमा या भारत से बाहर तकनीकी सेवाएं प्रदान करने के लिए विदेशी मुद्रा में उपगत कोर्इ व्यय, यदि कोर्इ हो, सम्मिलित नहीं है;

(v) ''मुक्त व्यापार क्षेत्र'' से काण्डला मुक्त व्यापार क्षेत्र और सान्ताक्रुज इलैक्ट्रानिक निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र अभिप्रेत हैं और जिसके अंतर्गत कोर्इ अन्य मुक्त व्यापार क्षेत्र भी है, जिसे केन्द्रीय सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिसूचित करे;

(vi) ''सुसंगत निर्धारण वर्ष'' से इस धारा में निर्दिष्ट दस क्रमवर्ती वर्षों की किसी अवधि के भीतर आने वाला कोर्इ निर्धारण वर्ष अभिप्रेत है;

(vii) ''साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क'' से ऐसा कोर्इ पार्क अभिप्रेत है जो भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क स्कीम के अनुसार स्थापित किया गया है;

(viii) ''विशेष आर्थिक क्षेत्र'' से ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे केन्द्रीय सरकार इस धारा के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र विनिर्दिष्ट करे।

स्पष्टीकरण 3.–शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषणा की जाती है कि भारत के बाहर कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के स्थल पर विकास (जिसके अंतर्गत सॉफ्टवेयर की विकास संबंधी सेवाएं भी हैं) से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ भारत से बाहर कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के निर्यात से व्युत्पन्न लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे।

स्पष्टीकरण 4.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "निर्माण या उत्पादन" के अंतर्गत बहुमूल्य और कम मूल्य के रत्नों को तराशना और पॉलिश करना भी है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

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