आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 102

परिभाषाएं

धारा

धारा संख्या

102

अध्याय शीर्षक

अध्याय X क - सामान्य परिवर्जनरोधी नियम

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

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102. इस अध्याय में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–

(1) "ठहराव" से किसी संपूर्ण संव्यवहार, प्रचालन, स्कीम, करार या समझौते या उसके किसी भाग के संबंध में, चाहे वह प्रवर्तनीय हो या नहीं, कोर्इ उपाय अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत ऐसे संव्यवहार, प्रचालन स्कीम, करार या समझौते में किसी संपत्ति का अन्य संक्रामण भी है;

(2) "आस्ति" के अंतर्गत किसी प्रकार की संपत्ति या अधिकार है;

(3) "फायदे" के अंतर्गत किसी प्रकार का, चाहे मूर्त रूप में हो या अमूर्त रूप में, कोर्इ संदाय भी है;

(4) "संबद्ध व्यक्ति" से ऐसा कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी अन्य व्यक्ति से संबद्ध है और इसके अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं,–

() व्यक्ति का कोर्इ नातेदार, यदि ऐसा व्यक्ति कोर्इ व्यष्टि है;

() यदि व्यक्ति कोर्इ कंपनी है तो कंपनी का कोर्इ निदेशक या ऐसे निदेशक का कोर्इ नातेदार;

() यदि व्यक्ति कोर्इ फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय है तो ऐसी किसी फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय का कोर्इ भागीदार या सदस्य या ऐसे भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;

() यदि व्यक्ति कोर्इ हिन्दू अविभक्त कुटुंब है तो हिन्दू अविभक्त कुटुंब का कोर्इ सदस्य या ऐसे सदस्य का कोर्इ नातेदार;

() ऐसा कोर्इ व्यष्टि, जिसका व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या ऐसे व्यष्टि का कोर्इ नातेदार;

() कोर्इ कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसका व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय या कुटुंब का कोर्इ निदेशक, भागीदार या सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;

() ऐसी कोर्इ कंपनी, फर्म या व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या हिन्दू अविभक्त कुटुंब, जिसके निदेशक, भागीदार या सदस्य का व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कुटुंब या कोर्इ नातेदार;

() ऐसा कोर्इ अन्य व्यक्ति, जो कोर्इ कारबार करता है, यदि–

(i) उस व्यक्ति का, जो व्यष्टि है या ऐसे व्यक्ति के किसी नातेदार का उस अन्य व्यक्ति के कारबार में कोर्इ सारवान् हित है; या

(ii) उस व्यक्ति का, जो कोर्इ कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, चाहे वह निगमित हो या नहीं, या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है या ऐसी कंपनी, फर्म, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय या कुटुंब के किसी निदेशक, भागीदार या सदस्य या ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य के किसी नातेदार का उस अन्य व्यक्ति के कारबार मंि कोर्इ सारवान् हित है;

(5) "निधि" के अंतर्गत निम्नलिखित भी हैं–

() कोर्इ नकदी;

() नकदी के समतुल्य; और

() नकदी या नकदी के समतुल्य को प्राप्त करने या उसका संदाय करने का कोर्इ अधिकार या बाध्यता;

(6) "पक्षकार" के अंतर्गत ऐसा कोर्इ व्यक्ति या स्थायी स्थापन भी है, जो किसी ठहराव में सम्मिलित होता है या भाग लेता है;

(7) "नातेदार" का वही अर्थ होगा जो धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण में उसका है;

(8) ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका कारबार में सारवान् हित है, यदि–

() ऐसे किसी मामले में, जहां कारबार किसी कंपनी द्वारा किया जाता है, ऐसा व्यक्ति, वित्तीय वर्ष के दौरान किसी समय, बीस प्रतिशत या अधिक मतदान शक्ति वाले साधारण शेयरों का फायदाग्राही स्वामी है; या

() किसी अन्य मामले में, ऐसा व्यक्ति, वित्तीय वर्ष के दौरान किसी समय, ऐसे कारबार के लाभों के बीस प्रतिशत या अधिक का फायदाप्रद रूप से हकदार है;

(9) "उपाय" के अंतर्गत कोर्इ उपाय या कोर्इ कार्रवाही, विशिष्टतया ठहराव में कोर्इ विशिष्ट चीज या वस्तु का व्यवहार करने या उसे प्राप्त करने की दृष्टि से की गर्इ कोर्इ श्रृंखला भी है;

(10) "कर फायदे" में सुसंगत पूर्ववर्ष या किसी अन्य पूर्ववर्ष में निम्नलिखित सम्मिलित हैं,–

() इस अधिनियम के अधीन संदेय कर या अन्य रकम में कमी या उसका परिवर्जन या आस्थगन; या

() इस अधिनियम के अधीन कर या अन्य रकम के प्रतिदाय में कोर्इ बढ़ोतरी; या

() कर या अन्य रकम में ऐसी कमी या परिवर्जन या आस्थगन, जो किसी कर संधि के परिणामस्वरूप इस अधिनियम के अधीन संदेय होती; या

() कर संधि के परिणामस्वरूप इस अधिनियम के अधीन कर या अन्य रकम के प्रतिदाय में कोर्इ बढ़ोतरी; या

() कुल आय में कमी; या

() हानि में बढ़ोतरी;

(11) "कर संधि" से धारा 90 की उपधारा (1) या धारा 90क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट कोर्इ करार अभिप्रेत है।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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