आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 10

आय जो कुल आय के अंतर्गत नहीं आती है

धारा

धारा संख्या

10

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - आय जो कुल आय का हिस्सा नहीं है

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2023

आय जो कुल आय के अंतर्गत नहीं आती है

आय जो कुल आय के अंतर्गत नहीं आती है

अध्याय 3

आय जो कुल आय का भाग नहीं है

आय जो कुल आय के अंतर्गत नहीं आती है

10. किसी व्यक्ति की किसी पूर्ववर्ष की कुल आय संगणित करने में निम्नलिखित खंडों में से किसी में आने वाली कोई आय सम्मिलित नहीं की जाएगी–

(1) कृषि आय;

(2) धारा 64 की उपधारा (2) के उपबंधों के अंतर्गत रहते हुए, हिंदू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य के रूप में किसी व्यष्टि द्वारा प्राप्त कोई राशि जहां ऐसी कोई राशि का कुटुम्ब की आय में से भुगतान किया गया हो या किसी अविभाज्य संपदा की दशा में, जहां ऐसी राशि का कुटुम्ब की संपदा की आय में से भुगतान किया गया हो;

(2क) किसी ऐसे व्यक्ति की दशा में, जो किसी ऐसी फर्म का भागीदार है जिसका उस रूप में पृथक्त: निर्धारण किया जाता है, फर्म की कुल आय में उसका अंश।

स्पष्टीकरण.– इस खंड के प्रयोजनों के लिए, उस रूप में पृथक्त: निर्धारित किसी फर्म की कुल आय में किसी भागीदार का अंश किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, वह रकम होगा जिसका फर्म की कुल आय से वही अनुपात है जो भागीदारी विलेख के अनुसार, फर्म के लाभों में उसके अंश की रकम का ऐसे लाभों से है;

(3) [***]

(4) (i) किसी अनिवासी की दशा में, कोई ऐसी आय, जो उन प्रतिभूतियों या बंधपत्रों पर ब्याज के रूप में हुई हो, जिन्हें केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे, जिसके अंतर्गत ऐसे बंधपत्रों के मोचन पर प्रीमियम के रूप में होने वाली आय है:

परन्तु केन्द्रीय सरकार इस उपखंड के प्रयोजनार्थ 1 जून, 2002 को या उसके पश्चात् ऐसी प्रतिभूतियों या बंधपत्रों को उल्लिखित नहीं करेगी;

(ii) किसी व्यष्टि की दशा में, कोई ऐसी आय, जो भारत में किसी बैंक में अनिवासी (विदेशी) खाते में विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और उसके अधीन बनाए गए नियमों के अनुसार, उसके खाते में जमा धन पर ब्याज के रूप में हुई हो :

परन्तु यह तब जब कि ऐसा व्यष्टि, उक्त अधिनियम की धारा 2 के 1[खंड ()] में परिभाषित भारत के बाहर निवासी व्यक्ति है, अथवा वह व्यक्ति है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक ने पूर्वोक्त खाता रखने की अनुमति दी है;

(4ख) भारत के ऐसे नागरिक या भारतीय उद्भव के ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो अनिवासी है, कोई ऐसी आय, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा 1 जून, 2002 से पहले पुरोधृत ऐसे बचत-पत्रों पर ब्याज से हुई हो, जो वह सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे :

परन्तु यह तब जब कि उस व्यष्टि ने ऐसे बचत-पत्रों के लिए भारत में बाहर के किसी देश से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के उपबंधों के अनुसार, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अभिदाय भेजा है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() कोई व्यक्ति भारतीय उद्भव का समझा जाएगा यदि वह या उसके माता-पिता या पितामह-पितामही, मातामह-मातामही में से कोई अविभाजित भारत में जन्मा था;

() ''संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा'' का अर्थ है ऐसी विदेशी मुद्रा जो उस समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा मानी जाती है;

2[(4ग) 17 सितंबर, 2018 से प्रारंभ होने वाली और 31 मार्च, 2019 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान, धारा 194ठग की उपधारा (2) के खंड (iक) में यथानिर्दिष्ट रुपए में अंकित मूल्य के बंधपत्र के निर्गमन द्वारा भारत के बाहर किसी स्रोत से उधार ली गई धनराशियों के संबंध में किसी ऐसे अनिवासी को, जो कोई कंपनी नहीं है या भारतीय कंपनी या कारबार न्यास द्वारा किसी विदेशी कंपनी को ब्याज के रूप में संदेय कोई आय।]

3[(4घ) किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में अवस्थित किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में धारा 47 के खंड (viiकख) में निर्दिष्ट किसी पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप किसी विनिर्दिष्ट निधि को व्युत्पन्न या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त की गई कोई आय और जहां 4 [ऐसे संव्यवहार के लिए प्रतिफल को या किसी अनिवासी द्वारा (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन नहीं है) जारी प्रतिभूतियों के (भारत में निवासी कंपनी में के शेयरों से भिन्न) अंतरण के परिणामस्वरूप या उसके द्वारा जारी प्रतिभूति से कोई आय या जहां ऐसी आय भारत में अन्यथा व्युत्पन्न या उद्भूत नहीं हुई है या प्रतिभूतिकरण न्यास से कोई आय, जो "कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है, उस सीमा तक ऐसी आय या व्युत्पन्न या उद्भूत होती है या प्राप्त होती है, विहित रीति में संगणित (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन नहीं है) अनिवासी द्वारा धारित यूनिटों से मानी जा सकती है, संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में, किसी अनिवासी द्वारा धारित यूनिटों के संबंध में व्युत्पन्न जो भारत मे किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन नही है 5[या, यथास्थिती, किसी अपतटीय बैंककारी यूनिट के विनिधान प्रभाग के संबंध में व्युत्पन्न]  या उद्भूत या प्राप्त ऐसी आय की सीमा तक संदत्त किया गया है या संदेय है।]

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() "संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा" पद से ऐसी विदेशी मुद्रा अभिप्रेत है, जिसे तत्समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) और तद्धीन बनाए गए नियमों में प्रयोजनों के लिए संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा के रूप में माना जाता है;

5क [(कक) "अपतटीय बैंककारी यूनिट का विनिधान प्रभाग" से धारा 80ठक की उपधारा (1क) में यथानिर्दिष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित अनिवासी की बैंककारी यूनिट का विनिधान प्रभाग अभिप्रेत है और जिसने 31 मार्च, 2024 को या उससे पूर्व प्रचालन आरंभ कर दिया है;]

() "प्रबंधक" पद का वही अर्थ होगा, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (वैकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 के विनियम (2) के उपविनियम (1) के खंड (थ) में उसका है;

6[(खक) "स्थायी स्थापन" का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 92च के खंड (iiiक) में है;

(खख) "प्रतिभूतियों" का वही अर्थ होगा, जो उसका प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42), की धारा 2 के खंड (ज) में है और इसके अंतर्गत ऐसी अन्य प्रतिभूतियां या लिखतें भी हैं, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचित किया जाए;

(खग) "प्रतिभूतिकरण न्यास" का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 115नगक के नीचे स्पष्टीकरण के खंड (घ) में है;]

6क[(ग) "विनिर्दिष्ट निधि" से,

(i) किसी न्यास या कंपनी या सीमित दायित्व भागीदारी या निगमित निकाय के रूप में भारत में स्थापित या निगमित निधि अभिप्रेत है,

(I) किसी प्रवर्ग 3 की वैकल्पिक विनिधान निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है और 6कखख[जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (वैकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 या अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) के अधीन बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (निधि प्रबंध) विनियम, 2022 के अधीन विनियमित] है;

(II) जो किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित है; और

(III) जिसकी सभी यूनिटों को किसी प्रायोजक या प्रबंधक द्वारा धारण की गई यूनिट से भिन्न 6ककक[अनिवासियों द्वारा धारण किया जाता है;

परन्तु इस मद में विनिर्दिष्ट शर्त वहां लागू नहीं होगी, जहां कोई ऐसा इकाई धारक या ऐसे धारकों, जो पूर्ववर्ष के दौरान, उस समय वह अनिवासी है, जब ऐसी इकाई या इकाइयां 'जारी की गई थी, उस वर्ष के पश्चात्वर्ती किसी पूर्ववर्ष में धारा 6 के खंड (1) या खंड (1क) के अधीन निवासी बन जाता है या बंन जाते है, यदि ऐसे निवासी इकाई धारक या धारकों द्वारा धारित इकाइयों का सकल मूल्य और संख्या जारी की गयी कुल इकाइयों के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं है और ऐसी अन्य शर्तो को पूरा करते है, जो विहित की जाएं ; या]

 (ii) किसी अपतटीय बैंककारी यूनिट का विनिधान प्रभाग, जिसे,—

  (I) जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता) विनियम, 2019 के अधीन प्रवर्ग-1 विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र अनुदत्त किया गया है; और जिसने 31मार्च 2024 को या उससे पहले अपना परिचालन शुरू कर दिया है

(II) ऐसी शर्तों को पूरा करता है, जिसके अंतर्गत उसके विनिधान प्रभाग के लिए पृथक् लेखाओं को रखना सम्मिलित है, जैसा कि विहित किया जाए।

() "प्रायोजक" पद का वही अर्थ होगा, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (वैकल्पित विनिधान निधि) विनियम, 2012 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (ब) में उसका है;

(ड.) "न्यास" पद से भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन स्थापित कोई न्यास अभिप्रेत है;

() "यूनिट" पद से किसी विनिधानकर्ता का किसी निधि में कोई फायदाग्राही हित अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत शेयर या भागीदारी हित भी है;]

10क[(4ड़) किसी अपतटीय बैंककारी यूनिट के साथ की गई अपरिदेय अग्रिम संविदा 11ककक[या अपतटीय परिदेय लिखित या कॉउंटर-पर-परिदेय] अंतरण के परिणामस्वरूप किसी अनिवासी को उद्भूत या हुई या प्राप्त कोई आय जिसे धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र से लिया गया है जो ऐसी शर्तों को पूरा करती है जो विहित की जाए;

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (4ड़) के स्थान पर खंड (4ड़) प्रतिस्थापित किया जाएगा

(4ङ) निम्नलिखित के परिणामस्वरूप किसी अनिवासी भारतीय को उद्भूत या हुई या प्राप्त कोई आय,—

 (i)  अपरिदेय अग्रिम संविदाओं या अपतटीय व्युत्पन्न लिखतों या ओवर--द--काउंटर व्युत्पन्नीय के अंतरण ; या

(ii)  अपतटीय व्युत्पन्न लिखतों के वितरण,

जो किसी धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की अपतटीय बैंककारी यूनिट के साथ किया गया है, जो यथाविहित शर्तों को पूरा करता है :

(4च) किसी पूर्व वर्ष में किसी वायुयान 6गग[या पोत] को पट्टे पर देने के मद्दे स्वामिस्व या ब्याज के माध्यम से अनिवासी की कोई आय जिसको धारा 80ठक की उपधारा (1क) में यथानिर्दिष्ट किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र की यूनिट दवारा संदत्त किया गया है, यदि यूनिट 31 मार्च, 2024 को या उससे पूर्व अपने प्रचालन आरंभ कर देती है। 

6गगकक[स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजनों के लिए,-

(i) "वायुयान" से कोई वायुयान या कोई हैलीकॉप्टर या वायुयान या हैलीकॉप्टर का कोई इंजन या उसका कोई भाग अभिप्रेत है

(ii) "पोत" से कोई पोत या समुद्री जलयान, किसी पोत या समुद्री जलयान का कोई इंजन या उसका कोई भाग अभिप्रेत है;]

6गगकख[(4छ) किसी अनिवासी द्वारा धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट किसी अंतर्राष्ट्रीय वितीय सेवा केंद्र की अपतटीय बैंककारी इकाई के साथ अनुरक्षित खाते में, ऐसे अनिवासी की निमित्त किसी पोर्टफोलियो प्रबंधक द्वारा प्रबंधित या प्रशासित, प्रतिभूति पोर्टफोलियो या वित्तीय उत्पादों या निधियों से प्राप्त किसी आय को, उस सीमा तक, जिस तक ऐसी आय भारत से बाहर उदभूत या उत्पन्न होती है, भारत से उद्भूत या हुई नहीं समझा जाएगा।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए "पोर्टफोलियो प्रबंधक" का वही अर्थ होगा, जो उसका अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) के अधीन बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (पूंजी बाजार मध्यवर्ती) विनियम, 2021 के विनियम (2) के उपविनियम (1) के खंड (य) में है।]

वित्त अधिनियम 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (4छ़) के स्थान पर खंड (4छ़) और खंड (4ज) प्रतिस्थापित किए जाएंगे

(4छ) किसी अनिवासी द्वारा निम्नलिखित से प्राप्त कोई आय,—

 (i)  प्रतिभूति पोर्टफोलियो या वित्तीय उत्पाद या ऐसे अनिवासी के निमित्त किसी पोर्टफोलियो प्रबंधक द्वारा प्रबंध की गई या प्रशासित निधियों ; या

(ii)  ऐसे व्यक्ति द्वारा किए जा रहे ऐसे कार्यकलापों, जो केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किए जांए,

के किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, जैसा कि धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट है, द्वारा किसी अपतटीय बैंककारी इकाई के पास रखे गए लेखे, उस सीमा तक, जिस तक ऐसी आय भारत से बाहर उदभूत या उत्पन्न होती है और जिसे भारत में उदभूत या उत्पन्न हुई नहीं समझा गया है ।

स्पष्टीकरणइस खंड के प्रयोजनों के लिए, "पोर्टफोलियो प्रबंधक" का वही अर्थ होगा, जो उसका अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) के अधीन बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (पूंजी बाजार मध्यवर्ती) विनियम, 2021 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (य) में है ;

(4ज) किसी अनिवासी या धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र, जो किसी वायुयान को पट्टे पर देने के मुख्य कारबार में लगा हुआ है, जो धारा 80ठक की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की किसी इकाई की देशी कंपनी है, जो मुख्यत: किसी वायुयान को पट्टे पर देने के कारबार में लगी हुई है, जिसने 31 मार्च, 2026 को या उससे पूर्व अपने प्रचालन प्रारंभ किए हैं, के साम्य शेयरों के अंतरण से उद्भूत पूंजी लाभ के माध्यम से कोई आय :

परंतु इस खंड के उपबंध ऐसी देशी कंपनी के निम्नलिखित के भीतर आने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्व वर्ष में साम्या शेयरों के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ को लागू होंगे,—

(क) उस पूर्व वर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले दस निर्धारण वर्ष की अवधि, जिसमें देशी कंपनी ने अपने प्रचालन आरंभ किए हैं ; या

(ख) 1 अप्रैल, 2024 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले दस निर्धारण वर्ष, जहां खंड (क) में निर्दिष्ट अवधि 1 अप्रैल, 2034 से पूर्व समाप्त हो जाती है ।

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "वायुयान" से कोई वायुयान या हैलीकाप्टर या किसी वायुयान या हैलीकाप्टर का कोई इंजन या उसका कोई भाग, अभिप्रेत है;

(5) किसी व्यष्टि की दशा में–

() उसे भारत में किसी स्थान के लिए छुट्टी पर जाने के संबंध में अपने और अपने कुटुम्ब के लिए अपने नियोजक से;

() उसे सेवानिवृत्त होने के बाद या सेवा की समाप्ति के बाद भारत में किसी स्थान पर जाने के संबंध में अपने और अपने कुटुम्ब के लिए अपने नियोजक या पूर्व नियोजक से,

ऐसी शर्तों के (जिनके अंतर्गत यात्राओं की संख्या और उस रकम के बारे में जो प्रति व्यक्ति छूट प्राप्त होगी, शर्तें भी हैं) अधीन रहते हुए जो केन्द्रीय सरकार के कर्मचारियों को मंजूर की गई यात्रा रियायत या सहायता को ध्यान में रखते हुए, विहित की जाएं, प्राप्त या उसे देय किसी यात्रा रियायत या सहायता का मूल्य:

6[परन्तु इस खंड के अधीन छूट प्राप्त रकम किसी भी मामले में, ऐसी यात्रा के प्रयोजन के लिए वास्तव में उपगत व्यय की रकम से अधिक नहीं होगी।

6ग[परन्तु यह और कि 1 अप्रैल, 2021 से आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे व्यष्टि द्वारा प्राप्त या उसको प्राप्य किसी यात्रा रियायत या सहायता के बदले में मूल्य को भी ऐसी शर्तों को, जो विहित की जाए, पूरा करने के अध्यधीन रहते हुए इस खंड के अधीन छूट प्रदान की जाएगी (जिसके अंतर्गत ऐसी अवधि के भीतर ऐसे व्यय की ऐसी रकम उपगत करने की शर्त भी है)।]

स्पष्टीकरण.– 7[1] इस खंड के प्रयोजनों के लिए किसी व्यष्टि के संबंध में, ''कुटुम्ब'' का अर्थ है :–

 (i)  व्यष्टि का पति या पत्नी और संतान; और

 (ii) व्यष्टि के माता-पिता, भाई और बहन या उनमें से कोई जो व्यष्टि पर पूरी तरह या मुख्य रूप से आश्रित है;

8[स्पष्टीकरण 2- शंकाओं को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि जहां कोई व्यष्टि छूट का दावा करता है और विहित व्यय के संबंध में दूसरे परन्तुक के अधीन छूट अनुज्ञात की जाती है, तो किसी अन्य व्यष्टि को ऐसे विहित व्यय के संबंध में इस खंड के अधीन कोई छूट अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]

(5क) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया।]

(5ख) [वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से लोप किया गया।]

(6) ऐसे व्यष्टि की दशा में, जो भारत का नागरिक नहीं है–

(i) [* * *]

(ii) ऐसा पारिश्रमिक, जो उसे किसी विदेशी राज्य के राजदूतावास, उच्चायोग, दूतावास, आयोग, वाणिज्यिक दूतावास या व्यापार प्रतिनिधि के पदधारी के रूप में, चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो, या किसी पदधारी के कर्मचारिवृंद के सदस्य के रूप में, उसके द्वारा ऐसी हैसियत से सेवा के लिए प्राप्त हो :

परन्तु ऐसे पारिश्रमिक को, जो उसे भारत में किसी विदेशी राज्य की सरकार के व्यापार आयुक्त या अन्य शासकीय प्रतिनिधि के रूप में (जो उस पद को उस हैसियत में अवैतनिक रूप में धारण न करता हो) या उन पदधारियों में से किसी के कर्मचारिवृंद के सदस्य के रूप में प्राप्त हो वैसी ही छूट प्राप्त होगी जैसी कि यथास्थिति सरकार के तत्समान पदधारियों के या उनके कर्मचारिवृंद के सदस्यों, यदि कोई हों, को संबंधित देश में वैसे प्रयोजनों के लिए निवासी है, और जिसे उस देश में उसी प्रकार की छूट प्राप्त है:

परन्तु यह और कि ऐसे कर्मचारिवृंद के सदस्य उस देश की जनता है जिसका प्रतिनिधित्व किया जा रहा है और ऐसे कर्मचारिवृंद के सदस्य से अन्यथा किसी रूप में किसी कारबार या वृत्ति या नियोजन में नहीं लगे हुए हैं;

(iii) से (v) [उपखंड (ii) को उपखंड (ii) से (v) के स्थान पर वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से प्रतिस्थापित किया गया;]

(vi) ऐसा पारिश्रमिक, जो उसे किसी विदेशी उद्यम के कर्मचारी के रूप में भारत में उसके रहने के दौरान उसके द्वारा की गई सेवाओं के लिए प्राप्त हो किन्तु यह तब जब कि निम्नलिखित शर्तें पूरी हों,–

() ऐसा विदेशी उद्यम भारत में किसी व्यापार या कारबार में नहीं लगा हुआ है;

() भारत में उसका रहना उस पूर्ववर्ष में कुल मिलाकर नब्बे दिन की कालावधि से अधिक नहीं है; और

() ऐसे पारिश्रमिक की, नियोजक की ऐसी आय में से जो इस अधिनियम के अधीन प्रभार्य हो, कटौती नहीं की जा सकती;

(viक) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(vii) [वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया;]

(viiक) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(viii) ''वेतन'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य कोई आय, जो किसी ऐसे व्यष्टि को जो अनिवासी है किसी विदेशी पोत में अपने नियोजन के संबंध में की गई सेवाओं के लिए पारिश्रमिक के रूप में उसे प्राप्त या देय हो जबकि भारत में उसका रहना पूर्ववर्ष में कुल मिलाकर नब्बे दिन की अवधि से अधिक नहीं;

(ix) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(x) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(xi) ऐसा पारिश्रमिक, जो उसे भारत में अपने रहने के दौरान किसी विदेशी राज्य की सरकार के कर्मचारी के रूप में निम्नलिखित के किसी स्थापन कार्यालय में या निम्नलिखित के स्वामित्वाधीन किसी उपक्रम में अपने प्रशिक्षण के संबंध में प्राप्त हो,–

(i) सरकार; या

(ii) कोई कंपनी जिसकी सारी समादत्त शेयर पूंजी केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किन्हीं राज्य सरकारों द्वारा या भागत: केन्द्रीय सरकार और भागत: एक या अधिक राज्य सरकारों द्वारा धारित है; या

(iii) कोई कंपनी जो मद (ii) में उल्लिखित किसी कंपनी की समनुषंगी है; या

(iv) कोई निगम जो केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अंतर्गत स्थापित किया गया है; या

(v) कोई सोसाइटी जो सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 14) या तत्समय प्रवृत्त किसी तत्समान विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत है और जिसका वित्त पोषण पूरी तरह से केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किन्हीं राज्य सरकारों द्वारा या भागत: केन्द्रीय सरकार और भागत:, एक या अधिक राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है;

(6क) जहां किसी विदेशी कंपनी की दशा में जिसे उस विदेशी कंपनी द्वारा सरकार या किसी भारतीय समुत्थान से 31 मार्च, 1976 के पश्चात् किन्तु 1 जून, 2002 से पूर्व किए गए किसी करार के अनुसरण में, सरकार या भारतीय समुत्थान के स्वामिस्व या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में आय व्युत्पन्न होती है और–

() जहां ऐसा करार भारत सरकार की तत्समय प्रवृत्त औद्योगिक नीति में सम्मिलित किसी विषय से संबंधित है वहां ऐसा करार उस नीति के अनुसार है; और

() किसी अन्य दशा में, ऐसा करार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है,

ऐसी आय पर कर, करार के निबंधनों के अधीन, सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा केन्द्रीय सरकार को संदेय है इस प्रकार संदत्त कर।

स्पष्टीकरण.–इस खंड और खंड (6ख) के प्रयोजनों के लिए–

() ''तकनीकी सेवाओं के लिए फीस'' का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vii) के स्पष्टीकरण 2 में है;

() ''विदेशी कंपनी'' का वही अर्थ है जो धारा 80ख में है;

() ''स्वामिस्व'' का वही अर्थ है जो धारा 9 की उपधारा (1) के खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 में है;

(6ख) जहां किसी अनिवासी को (जो कंपनी नहीं है) या किसी विदेशी कंपनी की दशा में, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा किसी विदेशी राज्य की सरकार या किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन से 1 जून, 2002 से पूर्व किए गए करार के अनुसरण में, सरकार या भारतीय समुत्थान से कोई ऐसी आय व्युत्पन्न होती है (जो वेतन, स्वामिस्व या तकनीकी सेवाओं के लिए फीस के रूप में नहीं है), ऐसी आय पर कर सरकार या भारतीय समुत्थान द्वारा उस करार के या केन्द्रीय सरकार द्वारा उस तारीख से पूर्व अनुमोदित किसी अन्य संबंधित करार के निबंधनों के अधीन केन्द्रीय सरकार को संदेय है, इस प्रकार संदत्त कर;

(6खख) जहां किसी विदेशी राज्य की सरकार या किसी विदेशी उद्यम की दशा में, जिसे किसी ऐसी भारतीय कंपनी के, जो वायुयान के प्रचालन के कारबार में लगी हुई है, 31 मार्च, 1997 के बाद किंतु 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व या 31 मार्च, 2007 के बाद किए गए और इस संबंध में केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार के अधीन वायुयान या वायुयान इंजन के पट्टे पर अर्जित किए जाने के प्रतिफल के रूप में आय व्युत्पन्न होती है (जो पट्टे पर लिए गए वायुयान के प्रचालन के संबंध में फालतू पुर्जे, सुविधाएं या सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए संदाय से भिन्न है) तथा ऐसी आय पर कर ऐसी भारतीय कंपनी द्वारा उस करार के निबंधनों के अधीन केन्द्रीय सरकार को संदेय है, वहां इस प्रकार संदत्त कर।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''विदेशी उद्यम'' पद से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो अनिवासी है;

(6ग) ऐसी विदेशी कंपनी को, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में उल्लिखित करे भारत की सुरक्षा से संबंधित परियोजनाओं में भारत में या भारत से बाहर सेवाएं प्रदान करने के लिए उस सरकार के साथ हुए किसी करार के अनुसरण में, प्राप्त तकनीकी सेवाओं के लिए स्वामिस्व या फीस के रूप में उत्पन्न कोई आय;

9[(6घ) किसी अनिवासी को, जो कोई कंपनी या कोई विदेशी कंपनी नहीं है, भारत में या भारत से बाहर राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन को प्रदान की जाने वाली तकनीकी सेवाओं से रायल्टी या उनके लिए फीस के माध्यम से उद्भूत होने वाली कोई आय;]

(7) कोई भी ऐसे भत्ते या परिलब्धियां, जो भारत के बाहर सेवा करने के लिए सरकार द्वारा भारत के किसी नागरिक को भारत के बाहर भुगतान या इस प्रकार अनुज्ञात की गई हों;

(8) ऐसे व्यष्टि की दशा में, जिसको केन्द्रीय सरकार और किसी विदेशी राज्य की सरकार द्वारा किए गए करार के अनुसार (जिसके निबंधनों में इस खंड द्वारा दी गई छूट के लिए उपबंध है) किन्हीं सहकारी तकनीकी सहायता कार्यक्रमों और परियोजनाओं के संबंध में भारत में कर्तव्य सौंपे गए हैं–

() ऐसा पारिश्रमिक, जो उसे ऐसे कर्तव्यों के लिए उस विदेशी राज्य की सरकार से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्राप्त हो; और

() ऐसे व्यष्टि की अन्य आय जो भारत के बाहर प्रोद्भूत या उत्पन्न हो और भारत में प्रोद्भूत या उत्पन्न हुई न समझी जाए और जिसकी बाबत ऐसे व्यष्टि से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने उद्भव देश की सरकार को कोई आय-कर या सामाजिक सुरक्षा कर का संदाय करे;

9घक[परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष के ऐसे पारिश्रमिक और आय को लागू नहीं होगी।]

(8क) किसी परामर्शी के मामले में–

() अभिकरण और विदेशी सरकार के बीच तकनीकी सहायता अनुदान करार के अधीन किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन [जिसे इस खंड में और खंड (8ख) में अभिकरण कहा गया है] को उपलब्ध कराई गई निधियों में से उसके द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त कोई पारिश्रमिक या फीस; और

() कोई अन्य रकम जो उसे भारत के बाहर उद्भूत या उत्पन्न हो और भारत में उद्भूत या उत्पन्न न समझी जाए, जिसके संबंध में ऐसे परामर्शी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने उद्भव देश की सरकार को कोई आय-कर या सामाजिक सुरक्षा कर का संदाय करे।

9घक[परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष के ऐसे पारिश्रमिक और आय को लागू नहीं होगी।]

स्पष्टीकरण.–इस खंड में, ''परामर्शी'' का अर्थ है,–

(i) कोई व्यष्टि जो भारत का नागरिक नहीं है या जो भारत का नागरिक है किंतु भारत में साधारणत: निवासी नहीं है; या

(ii) कोई अन्य व्यक्ति जो अनिवासी है,

और जिसे किसी तकनीकी सहायता कार्यक्रम या परियोजना के संबंध में भारत में तकनीकी सेवाएं देने के लिए अभिकरण द्वारा लगाया गया है, परंतु यह तब जबकि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाएं, अर्थात् :–

(1) तकनीकी सहायता ऐसे करार के अनुसार है जो केन्द्रीय सरकार या अभिकरण द्वारा किया गया है, और

(2) परामर्शी को लगाए जाने से संबंधित करार का विहित प्राधिकारी ने इस खंड के प्रयोजनों के लिए अनुमोदन कर दिया है;

(8ख) किसी व्यष्टि की दशा में, जिसको केन्द्रीय सरकार और अभिकरण द्वारा किए गए किसी करार के अनुसार किसी तकनीकी सहायता कार्यक्रम और परियोजना के संबंध में भारत में कर्तव्य सौंपे जाते हैं,–

() ऐसा पारिश्रमिक जो उसे ऐसे कर्तव्यों के लिए खंड (8क) में निर्दिष्ट किसी परामर्शी से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: प्राप्त हो; और

() ऐसे व्यष्टि की कोई अन्य आय जो भारत के बाहर प्रोद्भूत या उत्पन्न हो और भारत में प्रोद्भूत या उत्पन्न हुई न समझी जाए और जिसके संबंध में ऐसे व्यष्टि से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने उद्भव देश को कोई आयकर या सामाजिक सुरक्षा कर का संदाय करे परंतु यह तब जब कि निम्नलिखित शर्तें पूरी हो जाएं अर्थात् :–

(i) ऐसा व्यष्टि खंड (8क) में निर्दिष्ट परामर्शी का कर्मचारी है और जो भारत का नागरिक नहीं है या जो भारत का नागरिक तो है किंतु भारत में साधारणत: निवासी नहीं है; और

(ii) ऐसे व्यष्टि की सेवा की संविदा का विहित प्राधिकारी ने उसकी सेवा के आरंभ के पूर्व अनुमोदन कर दिया है;

9घक[परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष के ऐसे पारिश्रमिक, फीस और आय को लागू नहीं होगी]

(9) किसी ऐसे व्यष्टि के जैसा, यथास्थिति, खंड (8) या खंड (8क) या (8ख) में निर्दिष्ट है कुटुम्ब के किसी सदस्य की जो उसके साथ भारत में आया हो, ऐसी आय जो भारत के बाहर प्रोद्भूत या उत्पन्न हो और भारत में प्रोद्भूत या उत्पन्न हुई न समझी जाए और जिसकी बाबत ऐसे सदस्य से यह अपेक्षा की जाती है कि यथास्थिति, उस विदेशी राज्य की सरकार या ऐसे सदस्य के उद्भव देश को कोई आय-कर या सामाजिक सुरक्षा कर का संदाय करे;

9घक[परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्व वर्ष के किसी ऐसी आय को लागू नहीं होगी]

(10) (i) कोई ऐसा मृत्यु तथा निवृत्ति उपदान जो, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार के संशोधित पेंशन नियमों के या केन्द्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के अधीन या संघ की सिविल सेवाओं के सदस्यों को या संघ के अधीन रक्षा से संबंधित पदों या सिविल पदों के धारकों को (जो सदस्य या धारक ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो उक्त नियमों से शासित होते हैं) या अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों को या राज्य की सिविल सेवाओं के सदस्यों को या राज्य के अंतर्गत सिविल पदों के धारण करने वालों या किसी स्थानीय प्राधिकारी के कर्मचारियों को लागू किसी समरूप स्कीम के अधीन प्राप्त किया गया हो या निवृत्ति उपदान का संदाय, जो रक्षा सेवाओं के सदस्यों को लागू पेंशन संहिता या विनियमों के अधीन प्राप्त किया गया हो;

(ii) कोई ऐसा उपदान जो उपदान संदाय अधिनियम, 1972 (1972 का 39) के अधीन प्राप्त किया गया हो उस परिभाषा तक जहां तक वह उस अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (2) और (3) के उपबंधों के अनुसार, परिकलित रकम से अधिक नहीं है;

(iii) कोई अन्य उपदान जो किसी कर्मचारी द्वारा अपने सेवानिवृत्त होने पर या ऐसे सेवानिवृत्त होने के पूर्व असमर्थ हो जाने पर या अपने नियोजन के पर्यवसान पर प्राप्त किया गया हो या कोई ऐसा उपदान जो उसकी विधवा बच्चों या आश्रितों द्वारा उसकी मृत्यु पर प्राप्त किया गया हो, दोनों दशाओं में, उस मात्रा तक जहां तक वह संपूरित सेवा के हर एक वर्ष के लिए आठ मास के वेतन से अधिक हो जिसका परिकलन उस मास के, जिसमें ऐसी घटना घटती है, ठीक पूर्ववर्ती दस मास के औसत वेतन के आधार पर, ऐसी सीमा के अधीन रहते हुए किया जाए, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के कर्मचारियों को इस निमित्त लागू सीमा को ध्यान में रखते हुए, विनिर्दिष्ट करे :

परन्तु जहां इस खंड के उल्लिखित उपदान किसी कर्मचारी द्वारा एक से अधिक नियोजक से एक ही पूर्ववर्ष में प्राप्त किए जाते हैं वहां इस खंड के अंतर्गत आय-कर की छूट प्राप्त कुल रकम इस प्रकार विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं होगी :

परन्तु यह और कि जहां ऐसा एक या अधिक उपदान किसी एक या अधिक पूर्ववर्ती वर्षों में प्राप्त किया गया था और ऐसे एक या अधिक उपदान की रकम को पूरी तरह से भागत: ऐसे पूर्ववर्ष या वर्षों की निर्धारिती की कुल आय में शामिल नहीं किया गया था, वहां इस खंड के अंतर्गत आय-कर से छूट प्राप्त रकम इस प्रकार विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं होगी जो ऐसे पूर्ववर्ष या वर्षों की कुल आय में शामिल न की गई, यथास्थिति, रकम या कुल रकम को घटाने पर आती है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड में और खंड (10कक) में ''वेतन'' का वही अर्थ है जो चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 2 के खण्ड () में है;

(10क) (i) कोई ऐसा संदाय जो केन्द्रीय सरकार के सिविल पेंशन (संराशीकरण) नियम के अंतर्गत या संघ की सिविल सेवाओं के सदस्यों को या संघ के अंतर्गत रक्षा से संबंधित पदों या सिविल पदों को धारण करने वालों को (जो सदस्य या धारक ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो उक्त नियमों से शासित होते हैं) या अखिल भारतीय सेवा के सदस्यों को या रक्षा सेवाओं के सदस्यों को या किसी राज्य की सिविल सेवाओं के सदस्यों को या राज्य के अंतर्गत सिविल पदों के धारकों को या किसी स्थानीय प्राधिकारी के कर्मचारियों को या किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित निगम के कर्मचारियों को लागू किसी समरूप स्कीम के अधीन;

(ii) कोई ऐसा भुगतान, जो किसी अन्य नियोजक की किसी स्कीम के अंतर्गत प्राप्त पेंशन के संराशीकरण के रूप में किया गया हो उस परिमाण तक जो निम्नलिखित से अधिक न हो–

() उस स्थिति में, जिसमें कर्मचारी कोई उपदान प्राप्त करता है उस पेंशन के, जिसे प्राप्त करने का वह सामान्यत: हकदार है, एक तिहाई का संराशित मूल्य; और

() किसी अन्य स्थिति में, ऐसी पेंशन का आधा संराशित मूल्य,

और ऐसे संराशित मूल्य का अवधारण प्राप्तिकर्ता की आयु, उसके स्वास्थ्य की स्थिति, ब्याज की दर तथा शासकीय मान्यताप्राप्त मरण सारणियों को ध्यान में रखकर किया गया हो;

(iii) कोई ऐसा भुगतान, जो खंड (23ककख) के अधीन निधि में से प्राप्त पेंशन के संराशीकरण के रूप में किया गया है;

(10कक) (i) कोई ऐसा भुगतान, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति चाहे अधिवर्षिता पर या अन्यथा के समय उसके खाते में जमा अर्जित छुट्टी की अवधि के संबंध में छुट्टी वेतन के समतुल्य नकद के रूप में प्राप्त किया गया हो;

(ii) उपखंड (i) में उल्लिखित प्रकृति का कोई ऐसा संदाय जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के कर्मचारी से भिन्न किसी कर्मचारी को चाहे अधिवर्षिता पर या अन्यथा उसके सेवानिवृत्त होने के समय उसके खाते में जमा अर्जित छुट्टी की दस मास से अनधिक अवधि के संबंध में प्राप्त किया गया हो, उस कर्मचारी द्वारा अपनी चाहे अधिवर्षिता पर या अन्यथा अपनी सेवानिवृत्ति के ठीक पहले दस माह की अवधि के दौरान लिए गए औसत वेतन के आधार पर ऐसी सीमा के अध्यधीन परिकलित किया गया हो, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, उस सरकार के कर्मचारियों को इस संबंध में लागू सीमा को ध्यान में रखते हुए, इस बाबत विनिर्दिष्ट करे :

परन्तु जहां ऐसे कोई भुगतान किसी कर्मचारी द्वारा एक ही पूर्ववर्ष में एक से अधिक नियोजक द्वारा प्राप्त किए जाते हैं वहां इस उपखंड के अंतर्गत आय-कर से छूट की कुल रकम इस प्रकार विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं होगी :

परन्तु यह और कि जहां ऐसा भुगतान या ऐसे भुगतान किन्हीं एक या अधिक पूर्ववर्ती पूर्ववर्षों में भी प्राप्त किए गए हों और ऐसे भुगतान या भुगतानों की संपूर्ण रकम या उसका कोई भाग ऐसे पूर्ववर्ष या पूर्ववर्षों की निर्धारिती की कुल आय में शामिल नहीं किया गया हो, वहां इस उपखंड के अधीन आयकर से छूट की कुल रकम इस प्रकार विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं होगी जो यथास्थिति, वह रकम या उन रकमों का योग घटा कर आए, जो किसी पूर्ववर्ष या पूर्ववर्षों की कुल आय में सम्मिलित नहीं है।

स्पष्टीकरण.–उपखंड (ii) के प्रयोजनों के लिए–

किसी कर्मचारी की अर्जित छुट्टी का हक उस नियोजक की जिसकी सेवा से वह सेवानिवृत्त हुआ है, की गई वास्तविक सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए तीस दिन से अधिक नहीं होगा।

(10ख) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) या किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत या तदधीन जारी किए गए नियमों, आदेशों या अधिसूचनाओं के अंतर्गत या किन्हीं स्थायी आदेशों के अंतर्गत या किसी अधिनिर्णय या सेवा की संविदा के अंतर्गत या अन्यथा किसी कर्मकार द्वारा उसकी छंटनी के समय प्राप्त प्रतिकर :

परन्तु इस खंड के अंतर्गत छूट प्राप्त रकम,–

(i) वह रकम, जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) की धारा 25च के खंड () के उपबंधों के अनुसार परिकलित की गई है; या

(ii) पचास हजार रुपए से अन्यून ऐसी रकम, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे,

इनमें से जो भी कम हो, से अधिक नहीं होगी :

परन्तु यह और कि पूर्ववर्ती परंतुक किसी कर्मकार द्वारा किसी ऐसी स्कीम के अंतर्गत प्राप्त किसी प्रतिकार के संबंध में लागू नहीं होगा जो केन्द्रीय सरकार जिन उपक्रमों में ऐसी स्कीम लागू होती है के कर्मकारों को विशेष संरक्षण देने की आवश्यकता को और अन्य सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, इस संबंध में अनुमोदित करे।

स्पष्टीकरण.इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() किसी कर्मकार द्वारा उस उपक्रम के जिसमें वह नियोजित है बंद किए जाने के समय प्राप्त प्रतिकर उसकी छंटनी के समय प्राप्त होने वाला प्रतिकर समझा जाएगा;

() किसी कर्मचारी द्वारा उस उपक्रम के जिसमें वह नियोजित है के संबंध में नियोजक से नए नियोजक को उस उपक्रम के स्वामित्व या प्रबंध के अंतरण के समय (चाहे करार द्वारा या किसी विधि के लागू होने से) प्राप्त प्रतिकर उसकी छंटनी के समय प्राप्त प्रतिकर समझा जाएगा, यदि,–

(i) कर्मकार की सेवा ऐसे अंतरण के कारण विच्छिन्न हुई है; या

(ii) ऐसे अंतरण के पश्चात् उस कर्मकार को लागू होने वाली सेवा की शर्तें और निबंधन अंतरण के ठीक पहले उसको लागू शर्तों और निबंधनों की अपेक्षा किसी बात में कम अनुकूल हैं; या

(iii) ऐसे अंतरण के निबंधनों के अधीन या अन्यथा नया नियोजक उस कर्मकार को उसकी छंटनी के मामले में, इस आधार पर प्रतिकर संदाय करने के लिए विधिक रूप से दायी नहीं है कि उसकी सेवा निरन्तर है और अंतरण से विच्छिन्न नहीं हुई है;

() ''नियोजक'' और ''कर्मकार'' शब्दों के वही अर्थ हैं जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (1947 का 14) में उनके हैं;

(10खख) भोपाल गैस विभीषिका (दावा कार्यवाही) अधिनियम, 1985 (1985 का 21) और उसके अंतर्गत बनाई किसी स्कीम के अंतर्गत किया गया कोई भुगतान, भोपाल गैस विभीषिका के संबंध में, किसी निर्धारिती को किए गए भुगतान को छोड़कर, उस विस्तार तक जिस तक ऐसे निर्धारिती को ऐसी विभीषिका से हुई हानि या नुकसान के कारण इस अधिनियम के अंतर्गत कटौती अनुज्ञात की गई है;

(10खग) किसी व्यष्टि या उसके विधिक वारिस को किसी आपदा के संबंध में प्रतिकर के रूप में केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी से प्राप्त या प्राप्य कोई राशि, उस सीमा तक, प्राप्त या प्राप्य राशि को छोड़कर, जिसकी ऐसे व्यष्टि या उसके विधिक वारिस को ऐसी आपदा से हुई हानि या नुकसान के मद्दे इस अधिनियम के अधीन कोई कटौती अनुज्ञात की गई है।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "आपदा" पद का वही अर्थ है, जो उसका आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (2005 का 53) की धारा 2 के खंड () में है;

(10ग) (i) किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी; या

(ii) किसी अन्य कंपनी; या

(iii) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम के अंतर्गत स्थापित किसी प्राधिकरण; या

(iv) किसी स्थानीय प्राधिकारी; या

(v) किसी सहकारी सोसाइटी; या

(vi) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अंतर्गत स्थापित या निगमित किसी विश्वविद्यालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, 1956 (1956 का 3) की धारा 3 के अंतर्गत विश्वविद्यालय घोषित की गई किसी संस्था; या

(vii) प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 (1961 का 59) की धारा 3 के खंड (छ) के अर्थ में किसी भारतीय प्रौद्यौगिकी संस्थान; या

(viiक) किसी राज्य सरकार; या

(viiख) केन्द्रीय सरकार; या

(viiग) पूरे भारत या किसी राज्य या किन्हीं राज्यों में महत्व रखने वाली ऐसी संस्था, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे;

(viii) ऐसे प्रबंध संस्थान, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे,

के किसी कर्मचारी द्वारा अपनी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या अपनी सेवा की समाप्ति पर, स्वेच्छया सेवानिवृत्ति की किसी स्कीम या स्कीमों का उपखंड (i) में निर्दिष्ट पब्लिक सैक्टर कंपनी के मामले में, स्वेच्छया पृथक्करण स्कीम के अनुसार प्राप्त या प्राप्य कोई रकम उस परिमाण तक जो पांच लाख रुपए से अधिक नहीं है :

परन्तु यथास्थिति, उक्त कंपनियों या प्राधिकारियों या सोसाइटियों या विश्वविद्यालयों, अथवा उपखंड (vii) और उपखंड (viii) में निर्दिष्ट संस्थानों की, ऐसी रकम के भुगतान को शासित करने वाली स्कीमें ऐसे मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार, (जिनके अंतर्गत, अन्य बातों के साथ-साथ, आर्थिक सुदृढ़ता का मापदंड भी सम्मिलित है) बनाई जाएंगी, जो विहित किए जाएं :

परन्तु यह और कि जहां किसी कर्मचारी को किसी निर्धारण वर्ष के लिए इस खंड के अंतर्गत छूट दी गई है, वहां उसे उसके अधीन किसी अन्य निर्धारण वर्ष के संबंध में छूट नहीं दी जाएगी:

परंतु यह भी कि जहां निर्धारिती को उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या सेवा की समाप्ति या स्वैच्छिक पृथक्करण पर प्राप्त की गई या प्राप्य किसी राशि की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 89 के अधीन कोई राहत अनुज्ञात की गई है, वहां इस खंड के अधीन ऐसे, या किसी अन्य, निर्धारण वर्ष के संबंध में उसे कोई छूट अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

(10गग) ऐसे कर्मचारी की दशा में, जो ऐसा कोई व्यष्टि है जो परिलब्धि की प्रकृति की ऐसी आय प्राप्त कर रहा है जिसका कि धारा 17 के खंड (2) के अर्थांतर्गत धन संबंधी संदाय किए जाने के रूप में उपबंध नहीं है, कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 200 में किसी बात के होते हुए भी ऐसे कर्मचारी की ओर से नियोजक के विकल्प पर उसके नियोजक द्वारा ऐसी आय पर वास्तव में संदत्त कर;

(10घ) जीवन बीमा पालिसी के अधीन प्राप्त कोई राशि, जिसके अंतर्गत ऐसी पालिसी पर बोनस के रूप में आबंटित राशि भी है, जो,–

() धारा 80घघ की उपधारा (3) या धारा 80घघक की उपधारा (3) के अधीन प्राप्त किसी राशि से भिन्न है; या

() किसी की-मैन बीमा पालिसी के अधीन प्राप्त किसी राशि से भिन्न है; या

() ऐसी किसी बीमा पालिसी, जो 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् किंतु 31 मार्च, 2012 को या उसके पूर्व जारी की गई हो, जिसके लिए पालिसी की अवधि के दौरान किसी वर्ष में संदेय प्रीमियम, वास्तविक बीमा पूंजी राशि के बीस प्रतिशत से अधिक है, के अधीन प्राप्त किसी राशि से भिन्न है; या

() 1 अप्रैल, 2012 को या उसके पश्चात् जारी की गई किसी ऐसी बीमा पालिसी के अधीन प्राप्त कोई राशि, जिसकी बाबत पालिसी की अवधि के दौरान किन्हीं वर्षों के लिए संदेय प्रीमियम वास्तविक बीमा पूंजी राशि के दस प्रतिशत से अधिक है;

परंतु उपखंड () और () के उपबंध किसी व्यक्ति की मृत्यु पर प्राप्त की गई किसी राशि के संबंध में लागू नहीं होंगे :

परंतु यह और कि उपखंड () के अधीन वास्तविक बीमा पूंजी राशि की संगणना करने के प्रयोजन के लिए 70[धारा 80ग की उपधारा (3)] के स्पष्टीकरण को प्रभावी बनाया जाएगा :

परंतु यह भी कि जहां 1 अप्रैल, 2013 को या उसके पश्चात् जारी की गई पालिसी ऐसे किसी व्यक्ति के जीवन बीमा के लिए है, जो,–

(i) धारा 80प में यथानिर्दिष्ट नि:शक्त व्यक्ति या गंभीर नि:शक्त व्यक्ति है; या

(ii) धारा 80घघख के अधीन बनाए गए नियमों में यथा विनिर्दिष्ट रोग या व्याधि से पीड़ित है,

वहां इस उपखंड के उपबंधों का प्रभाव यह होगा मानो "दस प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, "पन्द्रह प्रतिशत" शब्द रख दिए गए हैं।

10[परंतु यह भी कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात 1 फरवरी, 2021 को या उसके पश्चात् जारी किसी यूनिट संबद्ध बीमा पालिसी के संबंध में, यदि ऐसी पालिसी की अवधि के दौरान किसी भी पूर्ववर्ती वर्ष के लिए संदेय प्रीमियम की रकम दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक है, लागू नहीं होगी:

परन्तु यह भी कि यदि व्यक्ति द्वारा प्रीमियम 1 फरवरी, 2021 को या उसके पश्चात् जारी एक से अधिक यूनिट संबद्ध बीमा पालिसी के लिए संदेय है तो इस खंड के उपबंध उन यूनिट संबद्ध बीमा पालिसियों के संबंध में ही लागू होंगे, जिसके प्रीमियम की कुल रकम इनमें से किन्हीं पालिसियों की अवधि के दौरान किसी भी पूर्ववर्ती वर्ष में चौथे परन्तुक में निर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं है:

परन्तु यह भी कि चौथे और पांचवे परन्तुक के उपबंध किसी व्यक्ति की मृत्यु पर प्राप्त किसी राशि को लागू नहीं होंगे:

वित्त अधिनियम 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (10घ़) के छठवें परंतुक के स्थान पर परन्तुक प्रतिस्थापित किया जाएगा

परंतु यह भी कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् जारी किसी यूनिट संबद्ध बीमा पालिसी से भिन्न किसी जीवन बीमा पालिसी के संबंध में लागू नहीं होगी, यदि ऐसी पालिसी की अवधि के दौरान किसी पूर्ववर्ष के लिए संदेय प्रीमियम की रकम पांच लाख रुपए से अधिक है :

परंतु यह भी कि यदि 1 अप्रैल, 2023 को या उसके पश्चात् जारी यूनिट संबद्ध बीमा पालिसी से भिन्न एक से अधिक जीवन बीमा पालिसी के लिए किसी व्यक्ति द्वारा प्रीमियम संदेय है, तो इस खंड के उपबंध यूनिट संबद्ध बीमा पालिसियों से भिन्न केवल उन जीवन बीमा पालिसियों के संबंध में लागू होंगे, जहां प्रीमियम की समग्र रकम उन पालिसियों में से किसी की अवधि के दौरान किन्हीं पूर्ववर्षों में छठवें परंतुक में निर्दिष्ट रकम से अधिक नहीं होती है :

परंतु यह भी कि चौथे, पांचवें, छठवें और सातवें परंतुकों के उपबंध किसी व्यक्ति की मृत्यु पर प्राप्त किसी राशि को लागू नहीं होंगे:

परन्तु यह भी कि यदि इस खंड के उपबंधों को प्रभावी करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो बोर्ड, केंद्रीय सरकार के अनुमोदन से कठिनाई दूूर करने के प्रयोजन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत जारी कर सकेगा और इस परन्तुक के अधीन बोर्ड द्वारा जारी प्रत्येक मार्गदर्शक सिद्धांत संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा और आय-कर प्राधिकारियों तथा निर्धारिती पर आबद्धकर होगा।]

स्पष्टीकरण 1–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "की-मैन बीमा पालिसी" से ऐसी जीवन बीमा पालिसी अभिप्रेत है, जो किसी व्यक्ति द्वारा, किसी ऐसे दूसरे व्यक्ति के जीवन पर, जो प्रथम वर्णित व्यक्ति का कर्मचारी है या था या प्रथम वर्णित व्यक्ति के कारबार से किसी भी रीति से संबंधित है या था, कोई जीवन बीमा पालिसी अभिप्रेत है; और इसके अंतर्गत ऐसी पालिसी भी है जो ऐसे किसी व्यष्टि को पालिसी की अवधि के दौरान किसी समय प्रतिफल सहित या उसके बिना, समनुदिष्ट की गई है

स्पष्टीकरण 2.–उपखंड () के प्रयोजनों के लिए, "वास्तविक बीमा पूंजी राशि" पद का वही अर्थ है, जो धारा 80ग की उपधारा (3क) के स्पष्टीकरण में उसका है;

10[स्पष्टीकरण 3— इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "यूनिट संबद्ध बीमा पालिसी" से कोई जीवन बीमा पालिसी अभिप्रेत है, जिसमें विनिधान और बीमा, दोनों के घटक हैं और वह बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) के अधीन बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा जारी भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (यूनिट संबद्ध बीमा उत्पाद) विनियम, 2019 के विनियम 3 के खंड (ड़ड़) में यथा परिभाषित यूनिट से संबद्ध है।]

(11) कोई संदाय जो ऐसी किसी भविष्य निधि में से किया गया हो जिसे भविष्य निधि अधिनियम, 1925 (1925 का 19) लागू होता है अथवा केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित और उसके द्वारा राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचित किसी अन्य भविष्य निधि में से किया गया हो;

10क[परंतु इस खंड के उपबंध किसी व्यक्ति के खाते में पूर्ववर्ष के दौरान उद्भूत ब्याज आय को उस सीमा तक लागू नहीं होंगे, जहां तक वह आय उस व्यक्ति द्वारा 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् उस निधि में किसी पूर्ववर्ष में दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक के अभिदाय की रकम या रकमों के कुल योग से संबंधित है और जिसे ऐसी रीति में संगणित किया गया है, जो विहित की जाए:

परंतु यह और कि यदि ऐसे व्यक्ति द्वारा अभिदाय किसी ऐसी निधि में है, जिसमें ऐसे व्यक्ति के नियोजक द्वारा कोई अभिदाय नहीं है, तो पहले परंतुक का उपबंध का वैसा ही प्रभाव होगा, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों;]

(11क) सरकारी बचत बैंक अधिनियम, 1873 (1873 का 5) के अधीन बनाया गया सुकन्या समृद्धि खाता नियम, 2014 के अनुसार खोले गए खाते से कोई संदाय;

(12) कोई ऐसा संचित अतिशेष जो किसी मान्यताप्राप्त भविष्य निधि में भाग लेने वाले कर्मचारी को देय हो तथा संदेय हो जाए, उस परिमाण तक जो चौथी अनुसूची के भाग क के नियम 8में उपबंधित है;

10क[परंतु इस खंड के उपबंध, किसी व्यक्ति के खाते में पूर्ववर्ष के दौरान ब्याज के माध्यम से उद्भूत आय को, उस सीमा तक लागू नहीं होंगे, जहां तक वह आय उस व्यक्ति द्वारा 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् उस निधि में किसी पूर्ववर्ष में दो लाख पचास हजार रुपए से अधिक के अभिदाय की रकम या रकमों के कुल योग से संबंधित है, जिसे ऐसी रीति में संगणित किया गया है, जो विहित की जाए:

परंतु यह और कि यदि ऐसे व्यक्ति द्वारा अभिदाय किसी ऐसी निधि में है, जिसमें ऐसे व्यक्ति के नियोजक द्वारा कोई अभिदाय नहीं है, तो पहले परंतुक का उपबंध का वैसा ही प्रभाव होगा, मानो "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर, "पांच लाख रुपए" शब्द रखे गए हों;]

(12क) धारा 80गगघ में निर्दिष्ट पेंशन स्कीम से अपना खाता बंद करने या उससे बाहर निकलने का विकल्प देने पर किसी 11[निर्धारिती] को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली न्यास उस परिमाण तक, जहां तक यह उसके खाता बंद करने या स्कीम छोड़ने के विकल्प के समय उसे संदेय कुल रकम के 12[साठ] प्रतिशत से अधिक नहीं है;

13[(12ख) राष्ट्रीय पेंशन स्कीम न्यास से किसी कर्मचारी को धारा 80गगघ में निर्दिष्ट पेंशन स्कीम के अधीन, पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013 और उसके अधीन बनाए गए विनियमों के अधीन विनिर्दिष्ट निबंधनों और शर्तों के अनुसार उसके खाते से आंशिक रूप से रकम निकाले जाने पर कोई संदाय, उस परिमाण तक, जो उसके द्वारा किए गए अभिदायों की रकम के पच्चीस प्रतिशत से अधिक न हो;]

13कक[(12ग) अग्निपथ स्कीम के अधीन अभ्यावेशित किसी व्यक्ति या उसके नामनिर्देशिती को अग्निवीर समग्र निधि से कोई संदाय ।

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "अग्निवीर समग्र निधि" और "अग्निपथ स्कीम" का वही अर्थ होगा, जो धारा 80गगज में क्रमश: उनका है;]

(13) किसी अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि में से ऐसा संदाय जो–

(i) किसी हिताधिकारी की मृत्यु पर किया गया हो; अथवा

(ii) किसी कर्मचारी को, उल्लिखित आयु का हो जाने पर या उसके पश्चात् निवृत्ति पर या ऐसी निवृत्ति से पूर्व अशक्त हो जाने पर, वार्षिकी के बदले में उसके संराशीकरण के रूप में किया गया हो; अथवा

(iii) किसी हिताधिकारी की मृत्यु पर अभिदायों के प्रतिदाय के तौर पर किया गया हो, अथवा

(iv) किसी कर्मचारी को, उस दशा में, जिसमें उसने वह सेवा, जिसके संबंध में निधि स्थापित की है, उल्लिखित आयु का हो जाने या उसके पश्चात् निवृत्त होने या ऐसे निवृत्त होने से पूर्व अशक्त हो जाने से छोड़ी है, अभिदायों के प्रतिदाय के तौर पर किया गया हो, उस परिमाण तक जिस तक कि ऐसा भुगतान इस अधिनियम के प्रारंभ के पूर्व किए गए अभिदायों और उन पर के ब्याज से अधिक नहीं होता है; अथवा

(v) धारा 80गगघ में विनिर्दिष्ट और केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के अधीन कर्मचारी के खाते में अंतरण के माध्यम से;

(13क) कोई ऐसा विशेष भत्ता जो किसी निर्धारिती द्वारा उसके अधिभोग में निवास-स्थान के संबंध में किराए के (चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो) भुगतान पर वास्तव में हुए व्यय की पूर्ति के लिए उस निर्धारिती को उसके नियोजक द्वारा उल्लिखित रूप से दिया गया हो उस परिमाण तक जिस तक कि वह उस क्षेत्र या स्थान को, जिसमें ऐसी जगह स्थित है और अन्य सुसंगत बातों को ध्यान में रखते हुए विहित किया जाए।

स्पष्टीकरण.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि इस खंड की कोई बात किसी दशा में लागू नहीं होगी जिसमें–

() निर्धारिती के अधिभोग में के निवास स्थान का वह स्वामी है; या

() निर्धारिती ने अपने अधिभोग में निवास स्थान की बाबत किराए के (चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो) भुगतान पर वास्तव में व्यय उपगत नहीं किया है;

(14) (i) उन व्ययों की, जो लाभ के पद या नियोजन के कर्तव्यों के पालन में संपूर्णत:, आवश्यकत: और अनन्यत: उपगत किए गए हों, पूर्ति के लिए विनिर्दिष्ट रूप से दिया गया कोई विशेष भत्ता या फायदा, जो धारा 17 के खंड (2) के अर्थ में परिलब्धि की प्रकृति का नहीं है और जो विहित किया जाए उस परिमाण तक जिस तक ऐसे व्यय उस प्रयोजन के लिए वास्तव में उपगत किए जाते हैं;

(ii) निर्धारिती को, उस स्थान पर जहां वह लाभ के पद या नियोजन के कर्तव्य सामान्यतया करता है या जहां वह सामान्यतया निवास करता है, उसके व्यक्तिगत खर्चे को चुकाने के लिए या बढ़े हुए निर्वाह व्यय को पूरा करने के लिए दिया गया कोई ऐसा भत्ता, उस मात्रा तक जो विहित किया जाए:

परन्तु उपखंड (ii) की कोई बात, निर्धारिती को उसके पद या नियोजन से संबंधित विशेष प्रकृति के कर्तव्यों का पालन करने के लिए उसे पारिश्रमिक देने या प्रतिकर देने के लिए मंजूर व्यक्तिगत भत्ते की प्रकृति के किसी भत्ते को तब तक लागू नहीं होगी जब तक ऐसा भत्ता उसकी तैनाती के स्थान या निवास-स्थान से संबंधित न हो;

(14क) [***]

(15) (i) ऐसी प्रतिभूतियों, बंधपत्रों, वार्षिकी पत्रों, बचत पत्रों, केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी किए गए अन्य पत्रों और निक्षेपों पर ब्याज के रूप में आय उनके मोचन पर प्रीमियम या उन पर अन्य भुगतान, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और निबंधनों के अध्यधीन, जो उक्त अधिसूचना में उल्लिखित किए जाएं, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;

(iiख) व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुम्ब की दशा में, ऐसे पूंजी विनिधान बंधपत्र पर ब्याज जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे:

परन्तु केन्द्रीय सरकार इस उपखंड के प्रयोजनार्थ 1 जून, 2002 को या उसके बाद ऐसे पूंजी विनिधान बंधपत्रों को विनिर्दिष्ट नहीं करेगी;

(iiग) व्यष्टि या हिंदू अविभक्त कुटुम्ब की दशा में, ऐसे राहत बंधपत्र पर ब्याज, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे;

(iiघ) ऐसे बंधपत्रों पर ब्याज, जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा उल्लिखित करे, जो निम्नलिखित से उत्पन्न हो–

() अनिवासी भारतीय, जो बंधपत्रों का स्वामी व्यष्टि है; या

() कोई व्यष्टि जो किसी अनिवासी भारतीय के नामनिर्देशिती या उत्तरजीवी होने के आधार पर बंधपत्रों का स्वामी है; या

() कोई व्यष्टि, जिसे अनिवासी भारतीय द्वारा बंधपत्र का दान किया गया है :

परन्तु यह तब जबकि पूर्वोक्त बंधपत्र अनिवासी भारतीय द्वारा विदेशी मुद्रा में क्रय किए गए हों और ऐसे बंधपत्रों के संबंध में प्राप्त ब्याज और मूलधन को, चाहे उनकी परिपक्वता पर या अन्यथा, भारत के बाहर ले जाने की अनुमति नहीं है :

परन्तु यह और कि जहां कोई व्यष्टि, जो किसी ऐसे पूर्ववर्ष में, जिसमें बंधपत्रों को अर्जित किया गया है, अनिवासी भारतीय है, किसी पश्चात्वर्ती वर्ष में भारत का निवासी बन जाता है, वहां इस उपबंध के उपखंड ऐसे व्यष्टि के संबंध में लागू होते रहेंगे :

परन्तु यह भी कि ऐसे मामलों में जहां बंधपत्रों के परिपक्व होने के पहले किसी पूर्ववर्ष में बंधपत्रों को ऐसे व्यष्टि द्वारा भुना लिया जाता है, जो ऐसा करने का हकदार है, वहां इस उपखंड के उपबंध ऐसे पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष के संबंध में ऐसे व्यष्टि को लागू नहीं होंगे :

परन्तु यह भी कि केन्द्रीय सरकार इस उपखंड के प्रयोजनार्थ 1 जून, 2002 को या उसके बाद ऐसे बंधपत्रों को विनिर्दिष्ट नहीं करेगी।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''अनिवासी भारतीय'' अभिव्यक्ति का वही अर्थ है जो उसका धारा 115ग के खंड () में है;

(iii) सीलोन मानेटरी लॉ ऐक्ट, 1949 के अधीन गठित सेंट्रल बैंक ऑफ सीलोन के निर्गमन विभाग द्वारा धारित प्रतिभूतियों पर ब्याज;

(iiiक) भारत के बाहर किसी देश में निगमित और उस देश में केन्द्रीय बैंककारी कृत्य करने के लिए प्राधिकृत बैंक द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमोदन से किसी अनुसूचित बैंक में किए गए जमा पर उस बैंक को देय ब्याज।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''अनुसूचित बैंक'' का वही अर्थ है जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है;

(iiiख) नोर्डिक इन्वेस्टमेंट बैंक को, जो डेनमार्क, फिनलैंड, आईसलैंड, नोर्वे तथा स्वीडन की सरकारों द्वारा गठित एक बहुआयामी वित्तीय संस्था है, केन्द्रीय सरकार द्वारा उस बैंक के साथ तारीख 25 नवंबर, 1986 को किए गए समझौता ज्ञापन के निबंधनों के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित परियोजना के लिए इसके द्वारा दिए गए उधार पर देय ब्याज;

(iiiग) यूरोपीयन इन्वेस्टमेंट बैंक को, 25 नवंबर, 1993 को केंद्रीय सरकार द्वारा उस बैंक के साथ किए गए वित्तीय सहयोग संबंधी आधारभूत करार के अनुसरण में उसके द्वारा दिए गए उधार पर संदेय ब्याज;

(iv) ऐसा ब्याज जो–

() सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उन धनराशियों के लिए, जो उसने 1 जून, 2001 से पूर्व भारत के बाहर स्रोतों से उधार ली हों या उन ऋणों पर जिनकी उस पर 1 जून, 2001 से पूर्व भारत के बाहर स्रोतों की देनदारी हो, देय हो;

() भारत में किसी औद्योगिक उपक्रम द्वारा उन धनराशियों पर देय हो, जो उसने विदेश में ही किसी ऐसी वित्तीय संस्था के साथ, जैसी केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस संबंध में अनुमोदित की जाए, 1 जून, 2001 से पूर्व किए गए किसी उधार करार के अधीन उधार ली हो;

() भारत में किसी औद्योगिक उपक्रम द्वारा किसी ऐसी धनराशियों या ऋण पर संदेय हो जो उसने भारत के बाहर कच्चे माल या संघटक या पूंजी संयंत्र और मशीनरी के क्रय के संबंध में विदेश में 1 जून, 2001 से पहले उधार ली है या प्राप्त की है जो उस सीमा तक जिस तक ऐसा ब्याज, जो उस रकम से अधिक नहीं है जो उधार या ऋण के और इसके प्रतिसंदाय की शर्तों को ध्यान में रखकर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अनुमोदित दर पर संगणित किया गया हो।

स्पष्टीकरण 1–इस मद के प्रयोजनों के लिए ''पूंजी संयंत्र और मशीनरी के क्रय'' के अंतर्गत किसी भाड़े पर क्रय करने के लिए किसी करार के अंतर्गत ऐसे पूंजी संयंत्र और मशीनरी के क्रय के विक्रय के साथ पट्टा करार भी है।

स्पष्टीकरण 2 - शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषणा की जाती है कि भारत के बाहर से किसी पोत के क्रय की बाबत पोत विघटन के कारबार में लगे किसी उपक्रम द्वारा भारत के बाहर संदेय आवधिक ब्याज, भारत के बाहर किसी क्रय की बाबत विदेश में उपगत ऋण पर संदेय ब्याज समझा जाएगा;

(घ) औद्योगिक वित्त निगम अधिनियम, 1948 (1948 का 15) द्वारा स्थापित भारतीय औद्योगिक वित्त निगम, या भारतीय औद्योगिक विकास बैंक अधिनियम, 1964 (1964 का 18) के अंतर्गत स्थापित भारतीय औद्योगिक विकास बैंक या भारतीय निर्यात-आयात बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 28) के अंतर्गत स्थापित भारतीय निर्यात-आयात बैंक या राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक या भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 (1989 का 39) की धारा 3 के अंतर्गत स्थापित भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक या भारतीय औद्योगिक प्रत्यय और निवेश निगम [जो भारतीय कंपनी अधिनियम, 1913 (1913 का 7) के अंतर्गत बनाया गया है और पंजीकृत कम्पनी है] द्वारा किन्हीं ऐसी रकमों पर संदेय है जो उसने भारत के बाहर स्रोतों से 1 जून, 2001 से पूर्व उधार ली हो, उस सीमा तक जिस तक कि ऐसा ब्याज, ब्याज की उस रकम से अधिक नहीं है जो उधार और उसके प्रतिसंदाय की शर्तों को ध्यान में रखकर केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित दर पर संगणित किया गया हो;

(ड़) भारत में स्थापित किसी अन्य वित्त संस्था द्वारा या किसी बैंकिंग कम्पनी द्वारा जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसमें वह बैंक या बैंकिंग संस्था भी है जिसके लिए उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लेख किया गया है) उन रकमों पर संदेय हो जिन्हें उसने भारत के बाहर स्रोतों से 1 जून, 2001 से पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित उधार करार के अंतर्गत उधार लिया हो जहां रकम या तो भारत में औद्योगिक उपक्रमों को भारत के बाहर कच्चा माल या पूंजी संयंत्र और मशीनरी के क्रय के अथवा ऐसे किसी माल के आयात करने के प्रयोजन के लिए जिसका आयात करना केन्द्रीय सरकार लोकहित में आवश्यक समझे, उधार ली हो, उसी सीमा तक, जिस तक ऐसा ब्याज, ब्याज की उस रकम से अधिक नहीं है जिसको उधार और इसके प्रतिसंदाय की शर्तों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित दर पर संगणित की गई है;

() भारत में के किसी औद्योगिक उपक्रम द्वारा उन रकमों पर संदेय हो जो भारत के बाहर के स्रोतों से 1 जून, 2001 से पूर्व केन्द्रीय सरकार द्वारा औद्योगिक विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अनुमोदित उधार करार के अंतर्गत विदेशी करेन्सी में उधार ली हो, उस सीमा तक जिस तक ऐसा ब्याज, ब्याज की उस रकम से अधिक नहीं है जिनका आधार और उसके प्रतिसंदाय की शर्तों को देखते हुए, केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित दर पर संगणित किया गया हो;

(चक) किसी अनुसूचित बैंक द्वारा किसी अनिवासी को या किसी ऐसे व्यक्ति को जो धारा 6 की उपधारा (6) के अर्थ में साधारण रूप से निवासी नहीं है विदेशी मुद्रा में निक्षेपों पर वहां प्रतिसंदेय हो, जहां बैंक द्वारा किए गए ऐसे निक्षेपों को स्वीकार करना भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित किया गया हो।

स्पष्टीकरण.–इस मद के प्रयोजनों के लिए "अनुसूचित बैंक" पद से, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में यथापरिभाषित कोई समनुषंगी बैंक, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित कोई तत्स्थानी नया बैंक या ऐसा कोई अन्य बैंक अभिप्रेत है, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित बैंक है, किंतु इसके अंतर्गत कोई सहकारी बैंक नहीं है;

() भारत में बनाई गई और पंजीकृत किसी पब्लिक कंपनी द्वारा जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए गृहों के निर्माण के या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करना है, और जो ऐसी कंपनी है जो धारा 36 की उपधारा (1) के उपखंड (viii) के अंतर्गत कटौती के लिए पात्रा है, उन रकमों पर प्रतिसंदेय है जिन्हें उसने भारत के बाहर के स्रोतों से केन्द्रीय सरकार द्वारा 1 जून, 2003 से पूर्व अनुमोदित उधार करार के अंतर्गत, विदेशी करेन्सी में उधार लिया हो, उस सीमा तक जिस तक कि ऐसा ब्याज, ब्याज की उस रकम से अधिक नहीं है जिसकी उधार और उसके प्रतिसंदाय की शर्तों को देखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित दर पर संगणना की गई हो।

स्पष्टीकरण.–मद (), (चक) और () के प्रयोजनों के लिए ''विदेशी करेन्सी'' पद का वही अर्थ है जो उसका विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) में है;

() किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी द्वारा बंध पत्रा या डिबेंचरों के संबंध में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए प्रतिसंदेय हो, जिनमें यह शर्त सम्मिलित है कि ऐसे बंधपत्रों या डिबेंचरों का धारक अपना नाम और धृति उस कंपनी में पंजीकृत कराएगा जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे;

() सरकार द्वारा ऐसे निक्षेपों पर संदेय हो, जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार या पब्लिक सेक्टर कंपनी के किसी कर्मचारी द्वारा जैसी केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त बनाए, स्कीम के अनुसार अपनी सेवानिवृत्ति पर चाहे, अधिवर्षिता पर हो या अन्यथा, अपने शोध्य धन से किए गए हों।

स्पष्टीकरण 1.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''औद्योगिक उपक्रम'' पद से कोई ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जो निम्नलिखित में लगा हुआ है, अर्थात् :

() माल का विनिर्माण या, प्रसंस्करण; अथवा

(कक) कम्प्यूटर साफ्टवेयर का विनिर्माण या किसी डिस्क, टेप, विछिद्रित मीडिया या किसी अन्य सूचना युक्ति पर कार्यक्रम की रिकार्डिंग; अथवा

() विद्युत या किसी अन्य प्रकार की शक्ति का उत्पादन या वितरण का कारबार; अथवा

(खक) दूर संचार सेवाएं उपलब्ध कराने का कारबार; अथवा

() खनन; अथवा

() पोतों का सन्निर्माण; अथवा

(घक) पोत विघटन का कारबार, या

() पोतों या विमानों का प्रचालन या रेल प्रणालियों का सन्निर्माण या प्रचालन।

स्पष्टीकरण 1क.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''ब्याज'' पद के अंतर्गत उधार के विलंबित संदाय पर या व्यतिक्रम पर संदत्त किया गया ब्याज सम्मिलित नहीं होगा यदि ऐसा ब्याज, ऐसे ऋण की शर्तों के अनुसार संदेय ब्याज की दर से दो प्रतिशत वार्षिक अधिक है।

स्पष्टीकरण 2.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''ब्याज'' पद के अंतर्गत करेन्सी के उतार चढ़ाव के मद्दे हैजिंग लेन-देन प्रभार सम्मिलित हैं;

(v) () कल्याण आयुक्त, भोपाल गैस पीड़ित, भोपाल द्वारा रिजर्व बैंक के एस जी एल खाता सं. एस एल/डी एच 048 में धारित प्रतिभूतियों पर ब्याज;

() भारतीय रिजर्व बैंक या किसी पब्लिक सेक्टर बैंक में, जैसा केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा विशेष रूप से विनिर्दिष्ट करे, भोपाल गैस रिसाव आपदा के पीड़ितों के फायदों के लिए ऐसे खाते में धारित निक्षेप पर ब्याज चाहे वे भूतलक्षी रूप में हो या भविष्यलक्षी रूप में हो किन्तु इस संबंध में किसी भी दशा में 1 अप्रैल, 1994 से पहले न हो।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, ''पब्लिक सेक्टर बैंक'' पद का वही अर्थ होगा जो इसका खंड (23घ) के स्पष्टीकरण  में है;

(vi) केन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित स्वर्ण जमा स्कीम, 1999 के अधीन जारी किए गए स्वर्ण जमा बंधपत्रों या स्वर्ण मुद्रीकरण स्कीम, 2015 के अधीन जारी निक्षेप प्रमाणपत्रों पर ब्याज;

(vii) ऐसे बंधपत्रों पर ब्याज–

() जिन्हें किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा या किसी राज्य पूलकृत वित्त इकाई (स्टेट पूल्ड फाइनेंस एन्टिटी) द्वारा जारी किया जाए; और

() जिन्हें केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए।

स्पष्टीकरण–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए, "राज्य पूलकृत वित्त इकाई" पद से ऐसी इकाई अभिप्रेत है, जो केन्द्रीय सरकार के शहरी विकास मंत्रालय द्वारा अधिसूचित पूलकृत वित्त विकास स्कीम संबंधी दिशानिर्देशों के अनुसार स्थापित की जाती है;

(viii) किसी अनिवासी द्वारा या किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा, जो मामूली तौर पर भारत में निवासी नहीं है, विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खण्ड () में निर्दिष्ट अपतट बैंककारी यूनिट में 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् किए गए निक्षेप पर प्राप्त ब्याज के रूप में कोई आय;

14[(ix) किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में अवस्थित किसी इकाई द्वारा किसी अनिवासी को, उसके द्वारा 1 सितंबर, 2019 को या उसके पश्चात् उधार ली गई रकम के संबंध में संदेय ब्याज के रूप में कोई आय:

स्पष्टीकरण—इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए,—

() "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र" का वही अर्थ होगा, जो उसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड () में है;

() "इकाई" का वही अर्थ होगा, जो उसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (यग) में है;]

(15क) ऐसा कोई संदाय जो वायुयान के प्रचालन के कारबार में लगी किसी भारतीय कम्पनी द्वारा किसी विदेशी राज्य की सरकार या विदेशी उद्यम से जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित करार और जो 1 अप्रैल, 1997 और 31 मार्च, 1999 के बीच किया गया करार नहीं है के अधीन पट्टे पर वायुयान या वायुयान इंजन (पट्टे पर दिए गए वायुयान के प्रचालन के संबंध में पुर्जे, सुविधाएं या सेवाएं प्रदान करने के लिए संदाय से भिन्न) अर्जित करने के लिए किया गया है :

परन्तु इस खंड की कोई बात 1 अप्रैल, 2007 को या उसके पश्चात् किए गए ऐसे किसी करार को लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''विदेशी उद्यम'' पद से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो अनिवासी है;

(16) शिक्षा खर्च को पूरा करने के लिए प्रदान की गई छात्रावृत्तियां;

(17) निम्नलिखित के रूप में कोई आय अर्थात्–

(i) कोई ऐसा दैनिक भत्ता जो किसी व्यक्ति द्वारा संसद या किसी विधानमंडल की या उसकी किसी समिति की सदस्यता के कारण प्राप्त किया गया है;

(ii) कोई ऐसा भत्ता जो किसी व्यक्ति द्वारा संसद की सदस्यता के कारण संसद सदस्य (निर्वाचन क्षेत्रा भत्ता) नियम, 1986 के अंतर्गत प्राप्त किया गया है;

(iii) कोई निर्वाचन क्षेत्रा भत्ता, जो किसी व्यक्ति द्वारा किसी राज्य विधान-मंडल द्वारा बनाए गए किसी अधिनियम या नियम के अधीन उस राज्य विधान-मंडल की उसकी सदस्यता के कारण प्राप्त किया गया है;

(17क) निम्नलिखित रूप में किया गया कोई संदाय चाहे वह नकदी रूप में हो या वस्तु के रूप में–

(i) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा लोक हित में संस्थित अथवा किसी अन्य निकाय द्वारा संस्थित और केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अनुमोदित पुरस्कार के अनुसरण में; या

(ii) केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा ऐसे प्रयोजनों के लिए जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में लोक हित में अनुमोदित किए जाएं, पारितोषिक रूप में किया गया संदाय;

(18) निम्नलिखित रूप में कोई आय–

(i) ऐसे व्यक्ति द्वारा प्राप्त पेंशन जो केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार की सेवा में रहा है और ''परमवीर चक्र'' या ''महावीर चक्र'' या "वीर चक्र" अथवा अन्य कोई वीरता पुरस्कार जो केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विशेष रूप से विनिर्दिष्ट करे;

(ii) उपखंड (i) में उल्लिखित किसी व्यक्ति के परिवार के सदस्य द्वारा प्राप्त कुटुम्ब पेंशन।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''कुटुम्ब'' पद का वही अर्थ होगा जो इसके खंड (5) के स्पष्टीकरण में है;

(18क) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(19) संघ के सशस्त्रा बलों के (जिसके अंतर्गत अर्द्धसैनिक बल भी हैं), किसी सदस्य की यथास्थिति विधवा या उसके बच्चों या नामनिर्दिष्ट वारिसों द्वारा प्राप्त कुटुंब पेंशन, जहां ऐसे सदस्य की मृत्यु युद्ध संबंधी कर्तव्यों के दौरान ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए हुई हो, जो विहित की जाएं;

(19क) किसी शासक के अधिभोगाधीन किसी महल का वार्षिक मूल्य जो ऐसा महल है जिसके वार्षिक मूल्य को, संविधान (छब्बीसवां संशोधन) अधिनियम, 1971 के प्रारंभ के पहले, यथास्थिति, विलयित राज्य (कराधान रियायत) आदेश, 1949 के या भाग ख राज्य (कराधान रियायत) आदेश, 1950 के या जम्मू-कश्मीर (कराधान रियायत) आदेश, 1958 के उपबंधों के आधार पर आयकर से छूट प्राप्त थी:

परन्तु एक अप्रैल, 1972 से आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे शासक के अधिभोगाधीन प्रत्येक महल का वार्षिक मूल्य, सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान आयकर से छूट प्राप्त होगा;

(20) किसी स्थानीय प्राधिकारी की ऐसी आय जो ''गृह सम्पत्ति से आय'', ''पूंजी अभिलाभ'' या ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है या उसके द्वारा चलाए गए व्यापार या कारबार से होने वाली ऐसी आय जो किसी वस्तु के प्रदाय या सेवा से (जो जल या विद्युत नहीं है) अपनी ही अधिकारिता वाले क्षेत्रा के भीतर या अपनी अधिकारिता वाले क्षेत्रा के भीतर या बाहर जल या विद्युत के प्रदाय से प्रोद्भूत या उद्भूत होता है।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनार्थ, ''स्थानीय प्राधिकारी'' पद से अभिप्रेत है–

(i) ऐसी पंचायत जो संविधान के अनुच्छेद 243 के खंड () में निर्दिष्ट है; या

(ii) ऐसी नगरपालिका जो संविधान के अनुच्छेद 243त के खंड () में निर्दिष्ट है; या

(iii) नगरपालिका समिति और जिला बोर्ड,

जो नगरपालिका या स्थानीय निधि के नियंत्राण या प्रबंध के लिए विधिक रूप से हकदार है या जिसे सरकार द्वारा ऐसा कार्य सौंपा गया है; या

(iv) छावनी बोर्ड जो छावनी अधिनियम, 1924 (1924 का 2) की धारा 3 में परिभाषित है;

(20क) [* * *]

(21) धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (ii) या खंड (iii) के प्रयोजन के लिए तत्समय अनुमोदित किसी अनुसंधान संगम की कोई आय :

परन्तु यह तब जबकि अनुसंधान संगम–

() अपनी आय का, उन उद्देश्यों के लिए जिनके लिए उसकी स्थापना की गई है, पूर्णतया और अनन्य रूप से उपयोग करता है या उपयोग करने के लिए संचय करता है और धारा 11 की उपधारा (2) और उपधारा (3) के उपबंध, ऐसे संचय के संबंध में निम्नलिखित उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होंगे, अर्थात् :–

(i) उपधारा (2) में,–

(1) ''उपधारा (1) के स्पष्टीकरण के साथ पठित उस उपधारा के खंड () या खंड () में उल्लिखित'' शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों का लोप किया जाएगा;

(2) ''पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों में'' शब्दों के स्थान पर ''वैज्ञानिक अनुसंधान या सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान या सांख्यिकीय अनुसंधान के प्रयोजनों के लिए'' शब्द रखे जाएंगे;

(3) उसके खंड () में ''निर्धारण अधिकारी'' के संदर्भ में यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (ii) या खंड (iii) में उल्लिखित ''विहित प्राधिकारी'' के संदर्भ में है;

(ii) उपधारा (3) में, खंड (क) में, ''पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों'' शब्दों के स्थान पर ''वैज्ञानिक अनुसंधान या सामाजिक विज्ञान में अनुसंधान या सांख्यिकीय अनुसंधान के प्रयोजनों'' शब्द रखे जाएंगे; और

() अपनी निधियों का जो निम्नलिखित से भिन्न है, अर्थात् :–

(i) अनुसंधान संगम द्वारा धारित कोई आस्तियां जहां ऐसी आस्तियां 1 जून, 1973 को संगम की निधि की सम्पत्ति का भाग थीं;

(ii) 1 मार्च, 1983 के पूर्व अनुसंधान संगम द्वारा अर्जित कोई आस्तियां (जो किसी कम्पनी या निगम द्वारा या उसकी पुरोधृत डिबेंचर हैं);

(iii) अनुसंधान संगम को आबंटित बोनस शेयरों के रूप में ऐसे शेयरों की कोई अनुवृद्धि जो उपखंड (i) में उल्लिखित निधि की सम्पत्ति का भाग है;

(iv) आभूषण, फर्नीचर या ऐसी किसी अन्य वस्तु के रूप में जो बोर्ड राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा विशेष रूप से विनिर्दिष्ट करे, प्राप्त किए गए और रखे गए स्वैच्छिक अंशदान,

पूर्ववर्ष के दौरान किसी अवधि के लिए धारा 11 की उपधारा (5) में विशेष रूप से उल्लिखित एक या अधिक रूपों या पद्धतियों से अन्यथा निवेश या निक्षेप नहीं करता है:

परन्तु यह और कि नकद रूप में स्वैच्छिक अंशदान या इस खंड के पहले परन्तुक के खंड () में उल्लिखित प्रकृति के स्वैच्छिक अंशदान से भिन्न स्वैच्छिक अंशदान के संबंध में इस खंड के अधीन छूट से इंकार नहीं किया जाएगा किंतु यह इस शर्त के अधीन होगा कि ऐसा स्वैच्छिक अंशदान अनुसंधान संगम द्वारा पूर्ववर्ष के अंत से, जिसमें ऐसी आस्ति अर्जित की जाती है या 31 मार्च, 1992 से, इनमें जो भी पश्चात्वर्ती हो, एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात्, धारा 11 की उपधारा (5) में विशेषत: उल्लिखित रूप या पद्धतियों से अन्यथा किसी रूप या पद्धतियों से धारित नहीं किया जाता:

परन्तु यह भी कि इस खंड की कोई बात, अनुसंधान संगम की ऐसी किसी आय के बारे में, जो कारबार के लाभ या अभिलाभ है, तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि वह कारबार उसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आनुषंगिक न हो और उसके द्वारा ऐसे कारबार के बारे में पृथक् लेखा बहियां नहीं रखी जातीं:

परन्तु यह भी कि जहां अनुसंधान संगम केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है और तत्पश्चात् सरकार का यह समाधान हो जाता है कि–

(i) अनुसंधान संगम ने अपनी आय का उपयोग पहले परन्तुक के खंड () में के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है; या

(ii) अनुसंधान संगम ने अपनी निधियों का पहले परन्तुक के खंड (ख) में के उपबंधों के अनुसार निवेश या निक्षेप नहीं किया है; या

(iii) अनुसंधान संगम के क्रियाकलाप प्रामाणिक नहीं हैं; या

(iv) अनुसंधान संगम के क्रियाकलाप ऐसी सभी या किन्हीं शर्तों के अनुसार नहीं किए जा रहे हैं जिनके अधीन ऐसा संगम अनुमोदित किया गया था,

वहां वह, संबंधित संगम को प्रस्तावित अनुमोदन वापस लेने के लिए कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद किसी भी समय आदेश द्वारा अनुमोदन वापस ले सकेगी और ऐसा अनुमोदन वापस लेने संबंधी आदेश की प्रति ऐसे संगम को और निर्धारण अधिकारी को भेज सकेगी;

(22) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(22क) [वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से लोप किया गया;]

(22ख) केवल समाचारों के संग्रहण और वितरण के लिए भारत में स्थापित किसी ऐसी समाचार एजेंसी की आय जिसे केन्द्रीय सरकार, राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विशेषत: उल्लिखित करे:

परन्तु यह तब जबकि समाचार एजेंसी केवल समाचारों के संग्रहण और वितरण के लिए अपनी आय का उपयोग करती है या उपयोग करने के लिए संचय करती है और अपनी आय का किसी भी रीति से अपने सदस्यों को वितरण नहीं करती है:

परन्तु यह और कि इस खंड के अधीन केन्द्रीय सरकार द्वारा जारी की गई कोई अधिसूचना, किसी एक समय पर, ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए जो तीन निर्धारण वर्षों से (जिनमें उस तारीख के, जिसको ऐसी अधिसूचना जारी की जाती है, पूर्व प्रारंभ होने वाला निर्धारण वर्ष या होने वाले निर्धारण वर्ष सम्मिलित हैं) अधिक न हों, जैसा अधिसूचना में विशेषत: विनिर्दिष्ट किया जाए, प्रभावी होगी:

परन्तु यह भी कि जहां समाचार एजेंसी को केन्द्रीय सरकार द्वारा, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट कर दिया गया है और तत्पश्चात् उस सरकार का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी समाचार एजेंसी ने अपनी आय का उपयोग या संचयन या वितरण पहले परन्तुक के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है तो वह, कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् किसी भी समय, अधिसूचना विखंडित कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना को विखंडित करने संबंधी आदेश की एक प्रति ऐसी एजेंसी और निर्धारण अधिकारी को भेज सकेगी;

वित्त अधिनियम 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (22ख़) के तीसरे परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित किया जाएगा

परन्तु यह भी कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, 1 अप्रैल , 2024 को या उसके पश्चात प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की समाचार एजेंसी की किसी आय को लागू नहीं होगी।

(23) [वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से लोप किया गया।]

(23क) भारत में स्थापित ऐसे संगम या संस्था की आय जिसका उद्देश्य, विधि, चिकित्सा, लेखाकर्म, इंजीनियरी या स्थापत्यकला की वृत्ति या ऐसी अन्य वृत्ति का जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा समय-समय पर इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे, नियंत्रण पर्यवेक्षण, विनियमन या प्रोत्साहन हो, (जो ''गृह संपत्ति से आय'' शीर्ष के अंतर्गत प्रभार्य आय का किन्हीं उल्लिखित सेवाओं को करने से प्राप्त आय या उसके निवेश से उत्पन्न ब्याज या लाभों के रूप में आय से भिन्न हों) :

परन्तु यह तब जबकि–

(i) वह संगम या संस्था अपनी आय को केवल उन उद्देश्यों में ही जिनके लिए वह स्थापित की गई है, प्रयुक्त करती है या प्रयुक्त करने के लिए उसे संचित करती है; और

(ii) वह संगम या संस्था केन्द्रीय सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस खंड के प्रयोजन के लिए तत्समय अनुमोदित है:

परन्तु यह और कि जहां संगम या संस्था केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित कर दी गई है और तत्पश्चात् उस सरकार का यह समाधान हो जाता है कि–

(i) ऐसे संगम या संस्था ने अपनी आय का उपयोग या संचयन पहले परन्तुक के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है; या

(ii) ऐसे संगम या संस्था के क्रियाकलाप उन सभी या किन्हीं शर्तों के अनुसार नहीं किए जा रहे हैं, जिनके अधीन ऐसे संगम या संस्था का अनुमोदन किया गया था,

वहां वह, संबंधित संगम या संस्था को प्रस्तावित अनुमोदन वापस लेने के संबंध में कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद किसी भी समय आदेश द्वारा अनुमोदन वापस ले सकेगी और अनुमोदन वापस लेने संबंधी आदेश की प्रति ऐसे संगम या संस्था और निर्धारण अधिकारी को भेज सकेगी;

(23कक) संघ के सशस्त्रा बलों द्वारा ऐसे बलों के भूतपूर्व और वर्तमान सदस्यों के या उनके आश्रितों के कल्याण के लिए स्थापित रेजिमेंट निधि के या असार्वजनिक निधि के संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त कोई आय;

(23ककक) कर्मचारियों या उनके आश्रितों के कल्याण के लिए ऐसे प्रयोजनों के लिए, जो राजपत्रा में बोर्ड द्वारा अधिसूचित किए जाएं, स्थापित निधि की ओर से किसी व्यक्ति द्वारा प्राप्त कोई आय और जिस निधि के ऐसे कर्मचारी सदस्य हैं, यदि ऐसी निधि निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात्:–

() निधि–

(i) अपनी आय का पूर्णत: या अनन्यत: केवल उन उद्देश्यों के लिए प्रयुक्त करती है या प्रयुक्त करने के लिए उसे संचित करती है; और

(ii) धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूप या पद्धतियों में अपनी निधियों तथा अभिदायों तथा इसके द्वारा प्राप्त राशियों का निवेश करती है;

() इस संबंध में बनाए गए नियमों के अनुसार निधि प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा अनुमोदित की जाती है:

परन्तु ऐसे किसी अनुमोदन का किसी एक समय ज्यादा से ज्यादा तीन निर्धारण वर्षों के लिए, जो अनुमोदन आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, प्रभाव होगा;

(23ककख) किसी पेंशन स्कीम के अधीन 1 अगस्त, 1996 को या उसके पश्चात् भारतीय जीवन बीमा निगम या किसी अन्य बीमाकर्ता द्वारा स्थापित किसी निधि चाहे, वह किसी भी नाम से ज्ञात हो, की कोई आय–

(i) जिसमें ऐसी निधि से पेंशन प्राप्त करने के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति द्वारा अभिदाय किया जाता है;

(ii) जिसे यथास्थिति, बीमा नियंत्राक या बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया जाता है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''बीमा नियंत्राक'' का वही अर्थ है जो बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 2 के खंड (5ख) में है;

(23ख) सार्वजनिक पूर्त न्यास के रूप में या सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) या भारत के किसी भाग में, प्रवृत्त इस अधिनियम के तत्समान किसी विधि के अधीन और केवल खादी या ग्रामोद्योग या दोनों के विकास के लिए अस्तित्व में है और जो लाभ के प्रयोजनार्थ नहीं है, गठित किसी संस्था की आय उस विस्तार तक जहां तक ऐसी आय खादी के उत्पादन, विक्रय या विपणन या ग्रामोद्योग के उत्पादों से मानी जा सकती है:

परन्तु यह तब जबकि–

(i) वह संस्था अपनी आय को केवल खादी या ग्रामोद्योग या दोनों के विकास के लिए ही प्रयुक्त करती है या प्रयुक्त किए जाने के लिए संचित करती है; और

(ii) वह संस्था इस खंड के प्रयोजन के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा तत्समय अनुमोदित है:

परन्तु यह और कि आयोग एक बार में उस वित्तीय वर्ष से, जिसमें अनुमोदन किया जाता है, ठीक बाद के निर्धारण वर्ष से प्रारंभ होने वाले तीन निर्धारण वर्षों से अधिक के लिए अनुमोदन नहीं देगा :

परन्तु यह भी कि जहां संस्था खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा अनुमोदित कर दी गई है और तत्पश्चात् उस आयोग का यह समाधान हो जाता है कि–

(i) संस्था ने अपनी आय का उपयोग या संचयन पहले परन्तुक के उपबंधों के अनुसार नहीं किया है; या

(ii) ऐसी संस्था के क्रियाकलाप ऐसी सभी या किन्हीं शर्तों के अनुसार नहीं किए जा रहे हैं, जिनके अधीन ऐसी संस्था का अनुमोदन किया गया था,

वहां वह, संबंधित संस्था को प्रस्तावित अनुमोदन वापस लेने के संबंध में कारण बताने का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद किसी भी समय आदेश द्वारा अनुमोदन वापस ले सकेगा और अनुमोदन वापस लेने संबंधी आदेश की प्रति ऐसी संस्था और निर्धारण अधिकारी को भेज सकेगा।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए–

(i) ''खादी और ग्रामोद्योग आयोग'' से खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 61) के अधीन स्थापित खादी और ग्रामोद्योग आयोग अभिप्रेत है;

(ii) ''खादी'' और ''ग्रामोद्योग'' के वही अर्थ हैं जो उनके उस अधिनियम में हैं;

(23खख) किसी राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन किसी राज्य में, खादी या ग्रामोद्योग के विकास के लिए उस राज्य में स्थापित प्राधिकरण (चाहे खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड के नाम से ज्ञात हो या किसी अन्य नाम से की आय)।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''खादी'' और ''ग्रामोद्योग'' का क्रमश: वही अर्थ है जो उनका खादी और ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 61) में है;

(23खखक) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित, गठित या नियुक्त किसी निकाय या प्राधिकरण की आय (चाहे वह निगम निकाय या एकल निगम हो या नहीं) जिसमें निम्नलिखित में से एक या अधिक के प्रशासन के लिए उपबंध किया गया है, अर्थात् सार्वजनिक धार्मिक या पूर्त न्यास या विन्यास (जिसके अन्तर्गत मठ, मन्दिर, गुरुद्वारा, वक्फ, गिरजाघर, सेनेगाग, अगियारी या सार्वजनिक धार्मिक उपासना के अन्य स्थान हैं) या सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन इस प्रकार धार्मिक या पूर्त प्रयोजनों के लिए पंजीकृत सोसाइटी :

परन्तु इस खंड की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह उसमें उल्लिखित किसी न्यास, विन्यास या सोसायटी की आय को कर से छूट देती है;

(23खखख) यूरोपीय आर्थिक समुदाय की कोई आय, जो ऐसी स्कीम के अंतर्गत, जिसे केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे, उसकी निधियों में से किए गए विनिधानों से ब्याज, लाभांश, या पूंजी अभिलाभों के रूप में भारत में प्राप्त हुई है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''यूरोपीय आर्थिक समुदाय'' से 25 मार्च, 1957 की रोम संधि द्वारा स्थापित यूरोपीय आर्थिक समुदाय अभिप्रेत है;

(23खखग) दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगम के चार्टर द्वारा 8 दिसम्बर, 1985 को स्थापित दक्षिण एशियाई क्षेत्राीय सहयोग संगम के सदस्य देशों के राज्य या सरकार के अध्यक्षों द्वारा 21 दिसम्बर, 1991 को जारी कोलम्बो घोषणा द्वारा स्थापित क्षेत्रीय परियोजनाओं के लिए सार्क निधि की कोई आय;

(23खखघ) 1 अप्रैल, 2001 को प्रारंभ होकर और 31 मार्च, 2011 को समाप्त होने वाले निर्धारण वर्षों से सुसंगत दस पूर्ववर्षों के लिए सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन ''एसोसाई सचिवालय'' के रूप में रजिस्ट्रीकृत सर्वोच्च संपरीक्षा संस्थाओं के एशियाई संगठन के सचिवालय की कोई आय;

(23खखड़) बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 (1999 का 41) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण की आय;

(23खखच) 14गगग[***]

(23खखछ) विद्युत अधिनियम, 2003 (2003 का 36) की धारा 76 की उपधारा (1) के अधीन गठित केन्द्रीय विद्युत विनियामक आयोग की कोई आय;

(23खखज) प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) अधिनियम, 1990 (1990 का 25) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित प्रसार भारती (भारतीय प्रसारण निगम) की कोई आय;

(23ग) किसी व्यक्ति द्वारा निम्नलिखित की ओर से प्राप्त कोई आय–

(i) प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष 15[या आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)]; या

(ii) प्रधानमंत्री कोष (लोक कला विकास); या

(iii) प्रधानमंत्री विद्यार्थी सहायता कोष; या

(iiiक) राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भाव प्रतिष्ठान; या

(iiiकक) केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ भारत कोष; या

(iiiककक) केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित स्वच्छ गंगा निधि; या;

16[(iiiकककक) धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड (क) के उपखंड (iiiजच) में यथानिर्दिष्ट किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्रा में मुख्यमंत्री सहायता निधि या उप राज्यपाल सहायता निधि; या]

(iiiकख) केवल शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए न कि लाभ के प्रयोजनों के लिए, विद्यमान कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था जो पूर्णत: या अंशत: सरकार द्वारा पोषित है; या

(iiiकग) बीमारी या मानसिक दोष से ग्रस्त व्यक्तियों के दाखिले और उपचार के लिए या आरोग्य स्थापन के दौरान व्यक्तियों के या चिकित्सीय देखभाल या पुनर्वासन की अपेक्षा करने वाले व्यक्तियों के दाखिले और उपचार करने वाला अस्पताल या अन्य संस्था, जो केवल परोपकार के प्रयोजनार्थ विद्यमान है न कि लाभ के प्रयोजन के लिए है और जो पूर्णत: या सारत: सरकार द्वारा वित्तपोषित है; या

स्पष्टीकरण–उपखंड (iiiकख) और उपखंड (iiiकग) के प्रयोजनों के लिए, उनमें निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था, अस्पताल या अन्य संस्था को किसी पूर्ववर्ष के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित समझा जाएगा, यदि ऐसे विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था, अस्पताल या अन्य संस्था को, सरकारी अनुदान उस सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान, यथास्थिति, उस विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था, अस्पताल या अन्य संस्था की कुल प्राप्तियों की, जिनके अंतर्गत कोई स्वैच्छिक अभिदाय भी हैं, ऐसी प्रतिशतता से, जो विहित की जाए, अधिक है।

(iiiकघ) कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था जो केवल शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए विद्यमान है न कि लाभ के प्रयोजनों के लिए है 17[यदि किसी व्यक्ति की ऐसे विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालयों या शैक्षिक संस्था या शैक्षिक संस्थाओं से कुल वार्षिक प्राप्तियों पांच करोड़ रूपए से अधिक नहीं है] ; या

(iiiकड़) बीमारी या मानसिक दोष से ग्रस्त व्यक्तियों के दाखिले और उपचार के लिए या आरोग्य स्थापन के दौरान व्यक्तियों के या चिकित्सीय देखभाल या पुनर्वासन की अपेक्षा करने वाले व्यक्तियों के दाखिले और उपचार करने वाला अस्पताल या अन्य संस्था, जो केवल परोपकार के प्रयोजनार्थ विद्यमान है न कि लाभ के प्रयोजन के लिए, 18[यदि किसी व्यक्ति की ऐसे अस्पताल या अस्पतालों या संस्था या संस्थाओं से कुल वार्षिक प्राप्तियां पांच करोड़ रुपए से अधिक नही है।]

18क[स्पष्टीकरण— उपखंड (iiiकघ) और उपखंड (iiiकड़) के प्रयोजनों के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि किसी व्यक्ति के पास उपखंड (iiiकघ) विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालयों या शैक्षिक संस्था या शैक्षिक संस्थाओं से और साथ की उपखंड (iiiकड़) में यथा निर्दिष्ट अस्पताल या अस्पतालों या संस्था या संस्थाओं से कोई प्राप्तियां हैं तो इन खंडों के अधीन उपबंधित छूट उस समय लागू नहीं होगी, यदि ऐसे व्यक्ति की ऐसे विश्वविद्यालय या विश्वविद्यालयों या शैक्षिक संस्था या शैक्षिक संस्थाओं या अस्पताल या अस्पतालों या संस्था या संस्थाओं से वार्षिक प्राप्तियों का कुल योग पांच करोड़ रुपए से अधिक है; या]

(iv) पूर्त प्रयोजनों के लिए स्थापित कोई अन्य निधि या संस्था, जिसे 18ककख[प्रधान आयुक्त या आयुक्त] उस निधि या संस्था के उद्देश्य को और संपूर्ण भारत में या किसी संपूर्ण राज्य या राज्यों में उसके महत्व को ध्यान में रखते हुए अनुमोदित करे; या

(v) कोई न्यास (जिसके अन्तर्गत कोई विधिक बाध्यता भी है) या संस्था जो पूर्णत: सार्वजनिक धार्मिक प्रयोजनों के लिए है अथवा पूर्णत: सार्वजनिक धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए है, जिसे 18ककख[प्रधान आयुक्त या आयुक्त] उस रीति को ध्यान में रखते हुए अनुमोदित करे जिससे उस न्यास या संस्था के कामकाज का प्रशासन या पर्यवेक्षण यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि उसको प्रोद्भूत होने वाली आय उसके उद्देश्यों के लिए उचित रूप से प्रयोग की जाती है;

(vi) केवल शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए न कि लाभ के प्रयोजनों के लिए विद्यमान कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्थान जो उनसे भिन्न है जिन्हें उपखंड (iiiकख) या उपखंड (iiiकघ) में वर्णित किया गया है और जिसे 18ककख[प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा अनुमोदित किया जाए; या

(viक) बीमारी या मानसिक दोष से ग्रस्त व्यक्तियों के दाखिले और उपचार के लिए अस्पताल या अन्य संस्था या आरोग्य स्थापन के दौरान व्यक्तियों के या चिकित्सीय देखभाल या पुनर्वासन की अपेक्षा करने वाले व्यक्तियों के दाखिले और उपचार करने के लिए है जो केवल परोपकार के प्रयोजनार्थ विद्यमान है न कि लाभ के प्रयोजन के लिए, जो उनसे भिन्न है जिन्हें उपखंड (iiiकग) या उपखंड (iiiकड़) में वर्णित किया गया है और 18ककख[प्रधान आयुक्त या आयुक्त] द्वारा अनुमोदित किया जाए:

19[परंतु उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था को संबंधित उपखंडों के अधीन छूट तब तक उपलब्ध नहीं होगी जब तक निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्थाविहित प्ररूप और रीति में प्रधान आयुक्त या आयुक्त को अनुमोदन अनुदत्त करने के लिए आवेदन नहीं करते हैं, —

(i) जहां निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था को दूसरे परंतुक के अधीन [जैसा वह उसके कराधान और अन्य विधियां (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा संशोधन से पूर्व था] 1 अप्रैल, 2021 से तीन मास के भीतर आवेदन नहीं कर देता है ।

(ii) जहां ऐसी निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था अनुमोदित है और ऐसे अनुमोदन की अवधि का अवसान होने को है, उक्त अवधि के अवसान के कम से कम छह मास पूर्व ;

(iii) हां ऐसी निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था को अनंतिम रूप से अनुमोदन प्रदान किया गया है, ऐसे अनंतिम अनुमोदन की अवधि के अवसान से कम से कम छह मास पूर्व या उसके कार्यकलापों के प्रारंभ होने के छह मास के भीतर, इनमें जो भी पूर्वत्तर हो ;

18खख[(iv) किसी अन्य दशा में, जहां किसी निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था के क्रियाकलाप,—

(अ) ऐसे निर्धारण वर्ष से, जिसमें उक्त अनुमोदन की ईप्सा की गई है, सुसंगत पूर्ववर्ष के प्रारंभ के कम से कम एक मास पूर्व आरंभ नहीं हुए है ;

(आ) आरंभ हो गए हैं और ऐसे क्रियाकलापों के प्रारंभ के पश्चात् किसी भी समय ऐसे लागू होने की तारीख को या उसके पूर्व समाप्त होने वाले किसी पूर्ववर्ष के लिए उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) अथवा उपखंड (viक) या धारा 11 या धारा 12 के लागू होने के कारण कुल आय से उक्त निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की कोई आय या उसका भाग अपवर्जित नहीं किया गया है,]

और उक्त निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था दूसरे परंतुक के अधीन अनुमोदित है :

परंतु यह और कि प्रधान आयुक्त या आयुक्त पहले परंतुक के अधीन किए गए किसी आवेदन पर,—

(i) जहां आवेदन उक्‍त परन्‍तुक के खंड (i) के अधीन किया गया है वहां उसे पांच वर्ष की अवधि का अनुमोदन देते हुए लिखित आदेश पारित करेगा;

(ii) जहां आवेदन उक्‍त परन्‍तुक के खंड (ii) या खंड (iii) 18गग[या खंड (iv) का उपखंड (आ)] के अधीन किया गया है, वहां वह, —

() निम्‍नलिखित के बारे में स्‍वयं का समाधान करने के लिए उससे ऐसे दस्‍तावेज या जानकारी की मांग करेगा या ऐसी जांच करेगा जो वह आवश्‍यक समझे—

() ऐसी निधि या न्‍यास या संस्‍था अथवा विश्‍वविद्यालय या अन्‍य शैक्षणिक संस्‍था या चिकित्‍सालय अथवा अन्‍य चिकित्‍सा संस्‍था के क्रियाकलापों की वास्‍तविकता; और

() इसके द्वारा तत्‍समय प्रवृत्‍त किसी अन्‍य विधि की ऐसी अपेक्षाओं का अनुपालन जो इसके उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने के प्रयोजन के लिए महत्‍वपूर्ण हों; और

() उपखण्‍ड (क) की मद (अ) के अधीन क्रियाकलापों की वास्‍तविकता की उद्देश्‍यों तथा मद (आ) के अधीन अपेक्षाओं के अनुपालन के बारे में स्‍वयं का समाधान करने के पश्‍चात्,—

() पांच वर्ष की अवधि के लिए इसका अनुमोदन अनुदत्‍त करते हुए लिखित में आदेश पारित करेगा ;

19खख[(आ) यदि उसका समाधान नहीं होता है तो वह,—

 (I)  पहले परंतुक के खंड (ii) या खंड (iii) में निर्दिष्ट दशा में ऐसे आवेदन को नामंजूर करते हुए तथा अपना अनुमोदन भी रद्द करते हुए ;

(II) पहले परंतुक के खंड (iv) के उपखंड (आ) में निर्दिष्ट दशा में, ऐसा आवेदन नामंजूर करते हुए,

उसे सुनवाई का एक युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् लिखित में आदेश पारित करेगा ;]

19गगग[(iii) जहां आवेदन उक्त परंतुक के खंड (iv) के उपखंड (अ) या आवेदन उक्त परंतुक के खंड (iv) के अधीन, जैसा वह वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था, किया जाता है, तो वह उस निर्धारण वर्ष के, जिससे अनुमोदन की ईप्सा की गई है, तीन वर्ष की अवधि के लिए अनंतिम रूप से इसका अनुमोदन करते हुए लिखित में आदेश पारित करेगा, और ऐसे आदेश की एक प्रति निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था को भेजेगा :]

परन्तु यह भी कि उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में उल्लिखित निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था–

() अपनी आय का उन उद्देश्यों के लिए, जिनके लिए उसकी स्थापना की गई है, पूर्णत: और अनन्यत: उपयोग करती है या उपयोग करने के लिए संचयन करती है और उस दशा में जहां 1 अप्रैल, 2002 को या उसके पश्चात् उसकी आय का पंद्रह प्रतिशत या उससे अधिक का संचयन हो जाता है, वहां उसकी आय के पंद्रह प्रतिशत से अधिक रकम के संचयन की अवधि किसी भी दशा में पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी; और

() अपनी निधियों का, जो निम्नलिखित से भिन्न हैं, अर्थात्:–

(i) निधि, न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा धारित कोई आस्तियां, जहां ऐसी आस्तियां 1 जून, 1973 को निधि, न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था की संपत्ति का भाग थी;

(iक) कोई आस्ति, किसी पब्लिक कंपनी के साधारण शेयर होने के कारण किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा धारित है, जहां ऐसी आस्तियां किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था की सम्पत्ति का 1 जून, 1998 को भाग थी;

(ii) निधि, न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा 1 मार्च, 1983 के पूर्व अर्जित कोई आस्तियां (जो किसी कंपनी या निगम द्वारा या उसकी ओर से पुरोधृत डिबेंचर हैं);

(iii) निधि, न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था को आबंटित बोनस शेयरों के रूप में ऐसे शेयरों की कोई अनुवृद्धि जो उपखंड (i) और उपखंड (iक) में उल्लिखित सम्पत्ति का भाग है;

(iv) आभूषण, फर्नीचर या ऐसी किसी वस्तु के रूप में जो बोर्ड, राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, प्राप्त किए गए और रखे गए स्वैच्छिक अभिदाय,

पूर्ववर्ष के दौरान किसी अवधि के लिए धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूप या पद्धतियों से अन्यथा निवेश या निक्षेप नहीं करती है:

20[स्पष्टीकरण 21[1]]शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था की आय, इस विशिष्टि निदेश के साथ, कि वे ऐसी निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था के कार्पस का भाग नहीं होगी, किए गए स्वैच्छिक अभिदाय के रूप में आय में सम्मिलित नहीं होगी।] 22[इस शर्त के अध्यधीन कि ऐसे स्वैच्छिक अभिदायों को ऐसे कार्पस के लिए निर्दिष्ट रूप से बनाई रखी गई धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूपों या पद्धतियों में विनिधानित या जमा किया जाएगा]

22ककख[स्पष्टीकरण 1क - इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए, जहां उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था के अधीन धारित संपत्ति के अंतर्गत, धारा 80छ की उपधारा (2) के खंड (ख) के अधीन अधिसूचित कोई मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या कोई अन्य स्थान है, तो ऐसे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या किसी अन्य स्थान के नवीकरण या मरम्मत के विनिर्दिष्ट प्रयोजन के लिए, ऐसे न्यास या संस्था द्वारा स्वैच्छिक अभिदाय के रूप में प्राप्त कोई राशि, निम्नलिखित शर्त के अधीन रहते हुए ऐसे न्यास या संस्था द्वारा न्यास या संस्था की काय का भाग मानी जा सकेगी, कि निधि या न्यास या संस्था,-

() ऐसे काय का केवल उस प्रयोजन के लिए उपयोजन करता है, जिसके लिए स्वैच्छिक अंशदान किया गया था;

() ऐसे काय का किसी व्यक्ति को अंशदान या संदान करने के लिए उपयोग नहीं करता है;

() ऐसे काय को पृथकत: पहचाने जा सकने के रूप में रखता है; और

() ऐसे काय का ऐसे रूप और ढंग में विनिधान या जमा करता है, जो धारा 11 की उपधारा (5) के अधीन विनिर्दिष्ट है।

स्पष्टीकरण 1ख-स्पष्टीकरण 1क के प्रयोजनों के लिए, जहां उपखंड (v) में निर्दिष्ट किसी न्यास या संस्था ने उसके द्वारा प्राप्त किसी राशि को काय का भाग बनने वाली माना है, और तत्पश्चात्, उक्त स्पष्टीकरण के खंड (क) या खंड (ख) या खंड (ग) या खंड (घ) में विनिर्दिष्ट किन्हीं शर्तों का अतिक्रमण किया है, ऐसी राशि, ऐसे न्यास या संस्था की पूर्व वर्ष की आय समझी जाएगी, जिसके दौरान ऐसा अतिक्रमण होता है।]

22क[स्पष्टीकरण 2- इस परन्तुक के अधीन उपयोजन की रकम को अवधारित करने के प्रयोजनों के लिए,—

  (i) स्पष्टीकरण 1 में यथा निर्दिष्ट कार्पस से पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए किए गए उपयोजन को पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए आय के उपयोजन के रूप में नहीं माना जाएगा:

परन्तु इस प्रकार यथा अनुयोज्य ना मानी गई रकम या उसके किसी भाग को, उस पूर्व वर्ष में, जिसमें ऐसी रकम या उसके किसी भाग को उस वर्ष की आय से ऐसे कार्पस के लिए विनिर्दिष्ट रूप से बनाई रखी गई धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूपों या पद्धतियों में वापस विनिधानित या जमा किया जाता है और इस प्रकार जमा किए जाने की सीमा तक पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोजन के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा; और 22खख[***]

22खखक[परंतु यह और कि पहले परंतुक के उपबंध केवल तभी लागू होंगे, यदि समग्र निधि से उपयोजन के समय इस खंड के बारहवें, तेरहवें और इक्कीसवें परंतुकों तथा स्पष्टीकरण 2 और स्पष्टीकरण 3 में विनिर्दिष्ट शर्तों का कोई अतिक्रमण न हुआ हो :

परंतु यह भी कि पहले परंतुक के अधीन विनिधान की गई या वापस जमा की गई रकम को पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोजन नहीं माना जाएगा यदि ऐसा विनिधान या जमा, ऐसे पूर्ववर्ष के अंत से, जिसके दौरान समग्र निधि से ऐसा उपयोजन के रूप में किया गया था, पांच वर्ष की अवधि के भीतर नहीं किया जाता :

परंतु यह भी कि पहले परंतुक में अंतर्विष्ट कोई बात लागू नहीं होगी जहां 31 मार्च, 2021 को या उसके पूर्व ऐसी समग्र निधि से उपयोजन किया जाता है;]

 (ii) किसी ऋण या उधार से पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों से लिए किए गए उपयोजन को पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए आय के उपयोजन के रूप में नहीं माना जाएगा :

परन्तु इस प्रकार यथा अनुयोज्य ना मानी गई रकम या उसके किसी भाग को, उस पूर्व वर्ष में, जिसमें ऋण या उधार या उसके किसी भाग को उस वर्ष की आय से प्रति संदत्त किया जाता है और इस प्रकार प्रति संदत्त किए जाने की सीमा तक पूर्व या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोजन के रूप में अनुज्ञात किया जाएगा:

22खखक[परंतु यह और कि पहले परंतुक के उपबंध केवल तभी लागू होंगे यदि ऋण या उधार से ऐसे उपयोजन के दौरान इस खंड के बारहवें, तेरहवें और इक्कीसवें परंतुकों तथा स्पष्टीकरण 2 और स्पष्टीकरण 3 में विनिर्दिष्ट शर्तों का कोई अतिक्रमण न हुआ हो :

परंतु यह भी कि पहले परंतुक के अधीन पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए पुनः संदत्त रकम को उपयोजन नहीं माना जाएगा यदि ऐसा पुनः संदाय ऐसे पूर्ववर्ष के अंत से, जिसके दौरान ऐसा उपयोजन ऋण या उधार से किया गया था, पांच वर्ष की अवधि के भीतर नहीं किया जाता :

परंतु यह भी कि पहले परंतुक में अंतर्विष्ट कोई बात वहां लागू नहीं होगी, जहां ऐसी समग्र निधि से उपयोजन 31 मार्च, 2021 को या उसके पूर्व किया जाता है ; और]

वित्त अधिनियम 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (23ग) के स्पष्टीकरण 2 के खंड (ii) के पश्चात् खंड (iii) अंत:स्थापित किया जाएगा

(iii) यथास्थिति, उपखंड (iv), उपखंड (v) या उपखंड (vi) अथवा उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था अथवा धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास या संस्था को, बारहवें परंतुक में निर्दिष्ट रकम से भिन्न, उपखंड (iv), उपखंड (v) या उपखंड (vi) अथवा उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था अथवा अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की आय से प्रत्यय की गई या संदत्त कोई रकम, ऐसी प्रत्यय की गई या संदत्त रकम के केवल पचासी प्रतिशत की सीमा तक केवल पूर्त या धार्मिक प्रयोजनों के लिए उपयोजन मानी जाएगी।

22ककख[स्पष्टीकरण 3 - इस परंतुक के अधीन उपयोजन की रकम अवधारित करने के प्रयोजनों के लिए, जहां इस पंरतुक के खंड (क) में निर्दिष्ट आय का पचासी प्रतिशत, पूर्णत: और अन्य रूप से उन उद्देश्यों के लिए पूर्व वर्ष के दौरान उपयोजित नहीं किया जाता है, जिनके लिए उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था की स्थापना की जाती है, किंतु ऐसे उद्देश्यों के उपयोजन के लिए पूर्णत: या भागत: संचयित या पृथक् रखी जाती है, इस प्रकार संचयित या पृथक् रखी गई ऐसी आय, आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति की पूर्व वर्ष की कुल आय में सम्मिलित नहीं की जाएगी, परंतु निम्नलिखित शर्तों का अनुपालन किया गया हो, अर्थात्:-

() ऐसा व्यक्ति, निर्धारण अधिकारी को उस प्रयोजन का कथन करते हुए, विहित प्ररूप और विहित रीति में, विवरणी प्रस्तुत करता है, जिसके लिए आय संचयित की या पृथक रखी जा रही है और वह अवधि, जिसके लिए आय संचयित या पृथक रखी जा रही है, किसी भी दशा में पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी;

() इस प्रकार संचयित या पृथक रखे गये धन का, धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट प्ररूपों या ढंगों में विनिधान या निक्षेप किया जाता है; और

() पूर्व वर्ष के लिए आय की विवरणी प्रस्तुत करने के लिए धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट नियत तारीख 22गग[से कम से कम दो मास पूर्व] खंड (क) में निर्दिष्ट विवरण प्रस्तुत किया जाता है:

परंतु उपखंड (क) में निर्दिष्ट पांच वर्ष की अवधि की संगणना करने में वह अवधि, जिसके दौरान आय का उस प्रयोजन के लिए किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश के कारण उपयोजन नहीं किया जा सका, जिसके लिए इसे इस प्रकार संचयित या पृथक रखा गया है, अपवर्जित कर दी जाएगी।

स्पष्टीकरण 4- स्पष्टीकरण 3 में निर्दिष्ट कोई आय, जो,-

() पूर्णत: और अन्य रूप से उन उद्देश्यों से भिन्न, प्रयोजनों के लिए उपयोजित की जाती है, जिनके लिए उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था की स्थापन की जाती है, या उस संबंध में उपयोजन के लिए वह संचयित या पृथक नहीं रह जाती है; या

() धारा 11 की उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्ररूपों या ढंगों में विनिधानित या निक्षिप्त नहीं रह जाती है; या

() स्पष्टीकरण 3 के खंड (क) में निर्दिष्ट अवधि के दौरान उस प्रयोजन के लिए, जिसके लिए वह इस प्रकार संचयित या पृथक रखी गई है, उपयोग नहीं की जाती है; या

() धारा 12कक या धारा 12कख के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था को अथवा उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था को जमा या संदत्त की जाती है,

ऐसे व्यक्ति की पूर्व वर्ष की आय समझी जाएगी,-

(i) जिसमें खंड (क) के अधीन इसे इस प्रकार उपयोजित किया जाता है या उसे इस प्रकार संचयित या पृथक रखना बंद कर दिया जाता है; या

(ii) जिसमें खंड (ख) के अधीन यह इस प्रकार विनिधानित या निक्षिप्त नहीं रह जाती है; या

(iii) जो उस अवधि का अंतिम पूर्व वर्ष है, जिसके लिए स्पष्टीकरण 3 के उपखंड (क) के अधीन आय संचयित या पृथक रखी जाती है, किंतु उस प्रयोजन के लिए उपयोग नही की जाती है, जिसके लिए खंड (ग) के अधीन इसे इस प्रकार संचयित या पृथक रखा गया है; या

(iv) जिसमें खंड (घ) के अधीन इसे किसी निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था को जमा या संदत्त किया जाता है, जैसा खंड (घ) में निर्दिष्ट है।

स्पष्टीकरण 5- स्पष्टीकरण 4 में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, जहां आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति के नियंत्रण के बाहर की परिस्थितियों के कारण स्पष्टीकरण 3 के खंड (ख) के उपबंधों के अनुसार विनिधान या निक्षेप की गई कोई आय उस प्रयोजन के लिए उपयोजित नहीं की जा सकती है, जिसके लिए यह संचयित या पृथक् रखी गई थी, वहां निर्धारण अधिकारी, इस निमित्त उसे किए गए आवेदन पर ऐसे व्यक्ति को, भारत में ऐसे अन्य प्रयोजन के लिए ऐसी आय उपयोजित करना अनुज्ञात कर सकेगा, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा आवेदन में विनिर्दिष्ट किया जाए और जो उन उद्देश्यों के अनुरूप है, जिनके लिए उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था को स्थापित किया गया है; और तदुपरि, स्पष्टीकरण 4 के उपबंध लागू होंगे, मानो इस स्पष्टीकरण के अधीन आवेदन में ऐसे व्यक्ति द्वारा विनिर्दिष्ट प्रयोजन स्पष्टीकरण 3 के खंड (क) के अधीन निर्धारण अधिकारी को दी गई सूचना में विनिर्दिष्ट प्रयोजन हो:

परंतु निर्धारण अधिकारी, स्पष्टीकरण 4 के खंड (घ) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए किए गए संदाय या जमा के माध्यम से ऐसी आय का उपयोजन अनुज्ञात नहीं करेगा ]

परन्तु यह भी कि उपखंड (iv) या उपखंड (v) के अंतर्गत कोई निधियों के 1 अप्रैल, 1989 के पूर्व धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूप या पद्धतियों से अन्यथा किए गए निवेशों और निक्षेपों के संबंध में छूट से इंकार नहीं किया जाएगा, यदि ऐसी निधियां 30 मार्च, 1993 के पश्चात् इस प्रकार निवेश की हुई या निक्षिप्त नहीं बनी रहती हैं:

परन्तु यह भी कि उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अंतर्गत, निधियों के 1 जून, 1998 के पूर्व धारा 11 की उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट एक या अधिक रूप या पद्धतियों से अन्यथा किए गए निवेशों और निक्षेपों के संबंध में छूट से इंकार नहीं किया जाएगा, यदि ऐसी निधियां 30 मार्च, 2001 के पश्चात् इस प्रकार निवेश की हुई और निक्षिप्त नहीं बनी रहती है:

परन्तु यह भी कि नकद रूप में स्वैच्छिक अभिदाय या इस उपखंड के तीसरे परंतुक में खंड () में उल्लिखित प्रकृति के स्वैच्छिक अभिदाय से भिन्न स्वैच्छिक अभिदाय के संबंध में उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के अंतर्गत छूट से इंकार नहीं किया जाएगा किंतु यह इस शर्त के अधीन होगा कि ऐसा स्वैच्छिक अभिदाय न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी अन्य चिकित्सीय संस्था द्वारा उस पूर्ववर्ष के अंत से जिसमें ऐसी आस्ति अर्जित की जाती है या 31 मार्च, 1992 से, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, एक वर्ष की समाप्ति के पश्चात् धारा 11 की उपधारा (5) में विशेष रूप से उल्लिखित रूप या पद्धतियों से भिन्न किसी रूप या पद्धति से धारित नहीं किया जाता है:

परन्तु यह भी कि उपखण्ड (iv) या उपखण्ड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) की कोई बात, निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था की किसी ऐसी आय के बारे में, जो कारबार के लाभ या अभिलाभ हैं; तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि यह कारबार उसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आनुषंगिक नहीं है और इसके द्वारा ऐसे कारबार के बारे में पृथक् लेखा बहियां नहीं रखी जाती:

23[परन्‍तु यह भी कि दूसरे परन्‍तुक के अधीन अनुदत्‍त कोई अनुमोदन निधि या न्‍यास या संस्‍था अथवा विश्‍वविद्यालय या अन्‍य शैक्षणिक संस्‍था या चिकित्‍सालय अथवा अन्‍य चिकित्‍सा संस्‍था की आय के संबंध में लागू होगा,—

(i) जहां आवेदन, उस निर्धारण वर्ष से जिससे इसे पूर्व मे अनुमोदन अनुदत्‍त किया गया था, पहले परन्‍तुक के खण्‍ड (i) के अधीन किया जाता है;

(ii) जहां आवेदन, पहले निर्धारण वर्षों से जिनके लिए इसे पूर्व मे अनंतिम अनुमोदन किया गया था, पहले परन्‍तुक के खण्‍ड (iii) के अधीन किया जाता है;

(iii) किसी अन्‍य मामले में उस वित्‍तीय वर्ष जिसमें ऐसा आवेदन किया जाता है, के तुरंत पश्‍चातवर्ती निर्धारण वर्ष से :

परन्‍तु यह भी कि दूसरे परन्‍तुक के खण्‍ड (i), खण्‍ड (ii) के उपखण्‍ड (ख) और खण्‍ड (iii) के अधीन आदेश ऐसे प्ररूप और रीति में जो विहित किया जाए, उस मास के अंत से संगणित जिसमें आवेदन प्राप्‍त हुआ था, क्रमश: तीन मास, छह मास और एक मास की अवधि के अवसान के पूर्व पारित किया जाएगा:

24[परंतु यह भी कि जहां उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था की कुल आय, उक्त उपखंडों के उपबंधों को प्रभावी किए बिना, उस अधिकतम, रकम से अधिक हो जाती है, जो पूर्व वर्ष में कर से प्रभार्य नहीं है, तो ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था,-

() लेखा बहियों और अन्य दस्तावेजों को ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसे स्थान पर, जो विहित किया जाए, रखेगी और बनाए रखेगी; और

() धारा 44कख में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट तारीख से पूर्व, धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित लेखापाल से उस वर्ष के संबंध में अपने लेखाओं की लेखापरीक्षा करवाएगी और उस तारीख तक, ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यक् रूप से हस्ताक्षरित और सत्यापित विहित प्ररूप में तथा ऐसी विशिष्टियां, जो विहित की जाएं, उपवर्णित करते हुए, ऐसी लेखापरीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी]

परन्तु यह भी कि धारा 80छ की उपधारा (2) के खण्ड () के निबंधनों के अनुसार निधि या संस्था द्वारा प्राप्त दान की कोई रकम जिसके संबंध में आय और व्यय के लेखे उस धारा की उपधारा (5ग) के खंड (v) के अधीन विहित प्राधिकारी को उस खंड में विनिर्दिष्ट रीति में नहीं दिए गए हैं, या जिसे गुजरात में भूकम्प पीड़ितों को राहत देने से भिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग किया गया है और जो धारा 80छ की उपधारा (5ग) के निबंधनों के अनुसार अनुपयोगी बनी रहती है और 31 मार्च, 2004 को या इससे पूर्व प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत निधियों को अन्तरित नहीं की जाती है तो वह पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी तदनुसार कर से प्रभारित होगी:

25[परंतु यह भी कि 26 [उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था की आय में से 27[धारा 12कक या धारा 12 कख] में रजिस्ट्रीकृत किसी अन्य निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था के पास जमा की गई या संदत्त किसी रकम को,] जो ऐसा स्वैच्छिक अभिदाय है जिसे इस विनिर्दिष्ट निदेश के साथ किया गया है कि वह न्यास या संस्था की समग्र निधि का भाग बनेगा, उन उद्देश्यों के प्रति आय के उपयोग के रूप में नहीं समझा जाएगा, जिनके लिए, यथास्थिति, ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सीय संस्था को स्थापित किया गया है:]

28[परंतु यह भी कि तीसरे परंतुक की मद (क) के अधीन आवेदन की रकम का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए धारा 40 के खंड (क) के उपखंड (iक) और धारा 40क की उपधारा (3) और उपधारा (3क) के उपबंध, आवश्यक परिवर्तनों सहित ऐसे लागू होंगे जैसे वे ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में लागू होते हैं:]

परन्तु यह भी कि जहां उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या न्यास या संस्था या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या कोई अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था अपनी आय का प्राप्त होने वाले वर्ष के दौरान उपयोग नहीं करती और उसका संचय करती है, वहां ऐसे संचय में से धारा 12कक 29[या धारा 12कख] के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी न्यास या संस्था को अथवा उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था को किया गया कोई संदाय या क्रेडिट उन उद्देश्यों के लिए आय का उपयोग नहीं माना जाएगा जिनके लिए, यथास्थिति, ऐसी निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्था या अस्पताल या अन्य चिकित्सा संस्था स्थापित की गई है :

31[परंतु यह भी कि जहां उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अस्पताल या किसी अन्य आयुर्विज्ञान संस्था को उक्त खंड के अधीन अनंतिम रूप से अनुमोदित किया जाता है और उसके पश्चात्-

() प्रधान आयुक्त या आयुक्त ने किसी पूर्व वर्ष के दौरान एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमणों को देखा है; या

() प्रधान आयुक्त या आयुक्त ने धारा 143 की उपधारा (3) के तीसरे परंतुक के अधीन किसी पूर्ववर्ष के लिए निर्धारण अधिकारी से कोई निर्देश प्राप्त किया है; या

() समय-समय पर, बोर्ड द्वारा किसी पूर्ववर्ष के लिए विरचित ऐसे मामले का जोखिम प्रबंधन रणनीति के अनुसार चयन किया है,

वहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त,-

(i) निधि या न्यास या संस्था या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था से ऐसे दस्तावेजों या सूचना की मांग कर सकेगा या ऐसी जांच कर सकेगा, जो वह किसी विनिर्दिष्ट अतिक्रमण होने या अन्यथा के संबंध में, स्वयं का समाधान करने के लिए आवश्यक समझता है;

(ii) निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था को सुने जाने का उचित अवसर प्रदान करने के पश्चात्, विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पूर्व ऐसे पूर्ववर्ष और पश्चातवर्ती वर्ष के लिए उसके अनुमोदन को रद्द करते हुए लिखित आदेश पारित करेगा, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमण हुए हैं;

(iii) यदि एक या अधिक विनिर्दिष्ट अतिक्रमण होने के संबंध में उसका समाधान नहीं होता है तो ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था के अनुमोदन को रद्द करने से इंकार करते हुए विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पूर्व लिखित आदेश पारित करेगा;

(iv) यथास्थिति, खंड (ii) या खंड (iii) के अधीन किए गए आदेश की प्रति, निर्धारण अधिकारी और ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था को अग्रेषित करेगा।

स्पष्टीकरण 1- इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट तारीख" से वह दिन अभिप्रेत है, जिसको उस तिमाही के अंत से, जिसमें प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा, 1 अप्रैल, 2022 को या उसके पश्चात्, किसी दस्तावेज या जानकारी मंगाने या कोई जांच करने के लिए पहली सूचना जारी की जाती है, संगणित छह मास की अवधि खंड (i) के अधीन समाप्त हो जाती है।

स्पष्टीकरण 2- इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट अतिक्रमण" से निम्नलिखित अभिप्रेत होगा,-

(क) जहां ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्विद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था की स्थापना करने के उद्देश्यों से भिन्न के लिए उपयोजित की गई कोई आय; या

(ख) निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था की, कारबार के लाभ और अभिलाभ से आय है, जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति से आनुषंगिक नहीं है या कारबार के संबंध में, जो उसके उद्देश्यों की पूर्ति से आनुषंगिक है, उसने पृथक् लेखा बहियां नहीं रखी हैं; या

(ग) ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था द्वारा किया जा रहा कोई क्रियाकलाप,-

(अ) वास्तविक नहीं है; या

(आ) सभी या किन्हीं शर्तों, जिनके अनुसार उसे अधिसूचित या अनुमोदित किया गया था, नहीं चलाए जा रहे हैं; या

(घ) निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था ने तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि की अपेक्षा का अनुपालन नहीं किया है और आदेश, निदेश या डिक्री में, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात, यह अभिनिर्धारित किया गया है कि ऐसा अनुपालन हुआ है, जो या तो विवादित नहीं किया गया है या उसे 31कक[अंतिम रूप प्रदान कर दिया गया हैं ; या]

31खख[(ङ) इस खंड के पहले परंतुक में निर्दिष्ट आवेदन पूर्ण नहीं है या इसमें मिथ्या या असत्य सूचना अंतर्विष्ट है।]

स्पष्टीकरण 3- इस परंतुक के खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए, जहां निर्धारण अधिकारी ने केंद्रीय सरकार या विहित प्राधिकारी को धारा 143 की उपधारा (3) के पहले परंतुक के अधीन किसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था द्वारा किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में इस खंड के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) के उपबंधों के अतिक्रमण के संबंध में संसूचित किया है और 31 मार्च, 2022 को या उससे पूर्व ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था को मंजूर किए गए अनुमोदन को वापस नहीं लिया गया है या उसकी दशा में जारी अधिसूचना को विखंडित नहीं किया गया है, वहां ऐसी संसूचना को 1 अप्रैल, 2022 को प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किए गए प्रतिनिर्देश के रूप में समझा जाएगा और धारा 143 की उपधारा (3) के दूसरे परंतुक के खंड (ख) के उपबंध तद्नुसार ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए लागू होंगे;]

32[xxx]

परंतु यह भी कि धारा 115खखग में निर्दिष्ट किसी अनाम संदान को, जिस पर उक्त धारा के उपबंधों के अनुसार कर संदेय है, कुल आय में सम्मिलित किया जाएगा:

33[परन्तु यह भी कि प्रधान आयक्त या आयुक्त के समक्ष लंबित पहले परन्तुक [जैसा वह कराधान और अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का शिथिलीकरण और संशोधन) अधिनियम, 2020 द्वारा इसके संशोधन के पूर्व था] के अधीन किए गए सभी आवेदन, जिन पर 1 अप्रैल, 2021 के पूर्व कोई आदेश पारित नही किया गया है, उस तारीख को पहले परन्तुक के खण्ड (iv) के अधीन किए गए समझे जाएंगे:]

परंतु यह भी कि उपखंड (iv) या उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था की आय को पूर्ववर्ष की उसकी कुल आय में सम्मिलित किया जाएगा, यदि धारा 2 के खंड (15) के पहले परंतुक के उपबंध ऐसे न्यास या संस्था को उक्त पूर्ववर्ष में लागू हो जाते हैं, चाहे ऐसे न्यास या संस्था के संबंध में किया गया अनुमोदन वापस ले लिया गया हो या नहीं अथवा जारी की गई अधिसूचना विखंडित कर दी गई हो या नहीं :

33कक[परंतु यह भी कि जहां उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा अनुमोदित की गई है, तथा अनुमोदन किसी पूर्व वर्ष के लिए प्रवर्तन में है, वहां इस धारा के खंड (1) से भिन्न, उसके किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट कोई बात, उस पूर्ववर्ष के लिए आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति की कुल आय से, यथास्थिति, ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था के निमित्त प्राप्त किसी आय को अपवर्जित करने के लिए प्रचालित नहीं होगी:

स्पष्टीकरण- जहां 1 अप्रैल, 2022 को या उसके पश्चात् उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था या उपखंड (vi) में निर्दिष्ट विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था धारा 10 के खंड (46 ) 32खख[या खंड (46क)] के अधीन अधिसूचित की जाती है, ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था का अनुमोदन या अनंतिम अनुमोदन उक्त धारा के खंड (46) 32खख[या खंड (46क)] के अधीन, यथास्थिति, ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की अधिसूचना की तारीख से अप्रवर्तनीय हो जाएगा।]

33घक[परंतु यह भी कि उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या कोई आयुर्विज्ञान संस्था धारा 139 की उपधारा (4ग) के उपबंधों के अनुसार 32गगग[उस धारा की उपधारा (1) या उपधारा (4) के अधीन अनुज्ञात समय के भीतर] पूर्व वर्ष के लिए आय की विवरणी प्रस्तुत करेगी:

पंरतु यह भी कि जहां उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या कोई विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या कोई अस्पताल या कोई आयुर्विज्ञान संस्था की आय या आय का भाग या संपत्ति, या ऐसी आय का कोई भाग, धारा 13 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति के फायदे के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपयोजित किया गया है, वहां उक्त धारा की उपधारा (2), उपधारा (4) और उपधारा (6 ) के उपबंधों के अतिरिक्त, ऐसी निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें वह इस प्रकार उपयोजित की जाती है:

परंतु यह भी कि जहां उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था, दसवें या बारहवें परंतुक के अधीन विहित शर्तों का अतिक्रमण करती है या जहां अठारहवें परंतुक के उपबंध लागू हैं, वहां उसकी कर से प्रभार्य आय निम्नलिखित शर्तों को पूर्ण करने के अधीन रहते हुए, निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या किसी आयुर्विज्ञान संस्था के उद्देश्यों के लिए भारत में उपगत (पूंजी व्यय से भिन्न) व्यय के लिए कटौती अनुज्ञात करने के पश्चात् संगणित की जाएगी, अर्थात्:-

() ऐसा व्यय, उस निर्धारण वर्ष, जिसके लिए आय संगणित की जा रही है, से सुसंगत पूर्व वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के अंत को निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या आयुर्विज्ञान संस्था के आय जमा काय से नहीं है;

() ऐसा व्यय, किसी ऋण या उधार से नहीं है;

() अवक्षयण का दावा उस आस्ति के संबंध में नहीं है, जिसका अर्जन उसी या किसी अन्य पूर्व वर्ष में धारा 11 के अधीन आय के उपयोजन के रूप में दावा किया गया है; और

() ऐसा व्यय, किसी व्यक्ति से अभिदाय या संदान के रूप में नहीं हैं।

स्पष्टीकरण- इस परंतुक के अधीन व्यय की रकम अवधारित करने के प्रयोजनों के लिए, धारा 40 के खंड (क) के उपखंड (iक) और धारा 40क की उपधारा (3) और उपधारा (3क) के उपबंध, यथावश्यक परिवर्तनों सहित, वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे "कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में लागू होते हैं:

परंतु यह भी कि बाईसवें परंतुक के अधीन कर से प्रभार्य आय की संगणना करने के प्रयोजनों के लिए, उक्त धारा के अधीन कर से प्रभार्य आय की संगणना करने में, इस अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन निर्धारिती को कोई व्यय या मोक या किसी हानि के मुजरे के संबंध में कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी ]

34[स्पष्टीकरण 1] इस खंड में, जहां किसी आय को उपयोजित किया जाना या संचित किया जाना अपेक्षित है, वहां ऐसे प्रयोजन के लिए आय का अवधारण ऐसी किसी आस्ति की बाबत, जिसके अर्जन का दावा इस खंड के अधीन उसी या किसी अन्य पूर्ववर्ष में आय के उपयोजन के रूप में किया गया है, किसी कटौती या मोक के बिना अवक्षयण के रूप में या अन्यथा किया जाएगा;

34क[स्पष्टीकरण 2- इस खंड के प्रयोजनों के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि पूर्व वर्ष के दौरान उपयोजित या संचयित किए जाने के लिए अपेक्षित आय की संगणना करते समय पूर्व वर्ष से पूर्ववर्ती किसी वर्ष के किसी आधिक्य उपयोजन के प्रति कोई मुजरा या कटौती या मोक को गणना में नहीं लिया जाएगा;]

34ककक[स्पष्टीकरण 3- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था द्वारा संदेय किसी राशि को, उस पूर्व वर्ष के दौरान आय के उपयोजन के रूप में समझा जाएगा, जिसमें उसके द्वारा वस्तुत: ऐसी राशि का संदाय किया गया है (उस पूर्ववर्ष पर ध्यान न देते हुए, जिसमें निधि या संस्था या न्यास या किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था द्वारा, उसके द्वारा नियमित रूप से उपयोग में लाई जा रही लेखांकन पद्धति के अनुसार ऐसी राशि का संदाय करने का दायित्व उपगत हुआ था):

परंतु जहां किसी पूर्ववर्ष के दौरान किसी राशि के संबंध में यह दावा किया गया है कि उसे निधि या संस्था या न्यास या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था द्वारा उपयोजित किया गया है, वहां ऐसी राशि को पश्चातवर्ती पूर्ववर्ष में उपयोजित राशि के रूप में अनुज्ञात नहीं किया जाएगा]

(23घ) 35[अध्याय 12ङ के उपबंधों के अधीन रहते हुए] निम्नलिखित की कोई आय–

(i) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन या तद्धीन बनाए गए विनियमों के अधीन रजिस्ट्रीकृत पारस्परिक निधि;

(ii) किसी पब्लिक सेक्टर बैंक या किसी लोक वित्तीय संस्था द्वारा स्थापित या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्राधिकृत और जो ऐसी शर्तों के अधीन है जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, ऐसी अन्य पारस्परिक निधि।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए–

() ''पब्लिक सेक्टर बैंक'' पद से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित समनुषंगी बैंक, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 'अन्य पब्लिक सेक्टर बैंक' के प्रवर्ग में सम्मिलित कोई बैंक अभिप्रेत है;

() ''लोक वित्तीय संस्था'' पद का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में है;

() ''भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड'' पद का वही अर्थ है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड () में है;

(23घक) प्रतिभूतिकरण के क्रियाकलाप से किसी प्रतिभूतिकरण न्यास की कोई आय।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() "प्रतिभूतिकरण" का वही अर्थ होगा, जो–

(i) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (लोक प्रस्थापना और प्रतिभूतिकृत ऋण लिखतों का सूचीबद्धकरण) विनियम, 2008 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड () में उसका है; या

(iक) वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (2002 का 54) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड () में उसका है; या

(ii) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मानक आस्ति प्रतिभूतिकरण संबंधी मार्गदर्शक सिद्धांतों के अधीन उसका है;

() "प्रतिभूतिकरण न्यास" का वही अर्थ होगा जो धारा 115नगक के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में उसका है;

(23ड़) [वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से लोप किया गया]

(23ड़क) भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज द्वारा संयुक्त रूप से या पृथक् रूप से स्थापित ऐसे विनिधानकर्ता संरक्षण निधि की मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंजों और उनके सदस्यों से प्राप्त अभिदायों के रूप में कोई आय जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे :

परन्तु जहां ऐसी कोई रकम जो निधि में जमा है और किसी पूर्ववर्ष के दौरान आय-कर से प्रभारित नहीं की गई है किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज के साथ पूर्णत: या भागत: बांटी जाती है वहां इस प्रकार बांटी गई सम्पूर्ण रकम ऐसे पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी जिसमें ऐसी रकम इस प्रकार बांटी जाती है और तदनुसार आय-कर से प्रभार्य होगी;

(23ड़ख) 35कक[***]

(23ड़ग) भारत में वस्तु एक्सचेन्जों द्वारा, संयुक्त रूप से या पृथक रूप से, स्थापित ऐसा निवेशक संरक्षा निधि के जिसे केन्द्रीय सरकार इस निमित्त राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, वस्तु एक्सचेन्जों और उसके सदस्यों से अभिदाय के रूप में प्राप्त कोई आय :

परन्तु जहां कोई ऐसी रकम जो निधि में जमा है और किसी पूर्ववर्ष के दौरान आय-कर से प्रभारित नहीं की गई है, किसी वस्तु एक्सचेन्ज के साथ पूर्णत: या भागत: बांटी जाती है, वहां इस प्रकार बांटी गई संपूर्ण रकम ऐसे पूर्ववर्ष की आय समझी जायेगी जिसमें ऐसी रकम इस प्रकार बांटी जाती है और तदनुसार वह आय-कर से प्रभार्य होगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "वस्तु एक्सचेन्ज" से अग्रिम संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1952 (1952 का 74) की धारा 2 के खंड (ञञ) में यथा परिभाषित "रजिस्ट्रीकृत संगम" अभिप्रेत है;

(23ड़घ) किसी निक्षेपागार द्वारा विनियमों के अनुसार गठित ऐसी विनिधानकर्ता संरक्षण निधि के, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, निक्षेपागार से प्राप्त अभिदायों के रूप में कोई आय :

परंतु जहां निधि के जमा खाते में पड़ी और जिस पर किसी पूर्ववर्ष के दौरान आय-कर प्रभारित नहीं किया गया है, किसी रकम को पूर्णत: या भागत: किसी निक्षेपागार के साथ बांटा जाता है तो इस प्रकार बांटी गई संपूर्ण रकम को उस पूर्ववर्ष की आय समझा जाएगा जिसमें ऐसी रकम को इस प्रकार बांटा जाता है और तदनुसार वह आय-कर से प्रभार्य होगी।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

(i) "निक्षेपागार" का वही अर्थ होगा जो निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड () में उसका है;

(ii) "विनियम" से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और निक्षेपागार अधिनियम, 1996 (1996 का 22) के अधीन बनाए गए विनियम अभिप्रेत हैं;

(23ड़ड़) मान्यताप्राप्त समाशोधन निगम द्वारा ऐसे विनियमों के अनुसार, जो केंद्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी स्थापित ऐसी आंतरिक समझौता प्रत्याभूति निधि की कोई विनिर्दिष्ट आय:

परंतु जहां निधि के जमा खाते में पड़ी और किसी पूर्ववर्ष के दौरान आय-कर प्रभारित न की गई किसी रकम को पूर्णत: या भागत: किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति के साथ बांटा जाता है, वहां इस प्रकार बांटी गई संपूर्ण रकम को उस पूर्ववर्ष की आय समझा जाएगा जिसमें ऐसी रकम को इस प्रकार बांटा जाता है और तद्नुसार वह आय-कर से प्रभार्य होगी।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

(i) ''मान्यताप्राप्त समाशोधन निगम'' का वही अर्थ होगा जो उसका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए प्रतिभूति संविदा (विनियमन) (स्टाक एक्सचेंज और समाशोधन निगम) विनियम, 2012 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड () में है;

(ii) '' विनियमों'' से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) और प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) के अधीन बनाए गए प्रतिभूति संविदा (विनियमन) (स्टाक एक्सचेंज और समाशोधन निगम) विनियम, 2012 अभिप्रेत है;

(iii) ''विनिर्दिष्ट आय'' से,–

() विनिर्दिष्ट व्यक्तियों से प्राप्त अभिदाय द्वारा आय अभिप्रेत है;

() मान्यताप्राप्त समाशोधन निगम द्वारा अधिरोपित और आंतरिक समझौता प्रत्याभूति निधि जमा शास्तियों के रूप में आय अभिप्रेत है;

() निधि द्वारा किए गए विनिधान से आय;

(iv) ''विनिर्दिष्ट व्यक्ति'' से,-

() कोई ऐसा मान्यताप्राप्त समाशोधन निगम अभिप्रेत है जो आंतरिक समझौता प्रत्याभूति निधि स्थापित और अनुरक्षित करता है; और

() कोई ऐसा मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज अभिप्रेत है, जो ऐसे मान्यताप्राप्त समाशोधन निगम में एक शेयरधारक है या आंतरिक समझौता प्रत्याभूति निधि में अभिदाता है; और

() आंतरिक समझौता प्रत्याभूति निधि में अभिदाय करने वाला कोई समाशोधन सदस्य अभिप्रेत है;

(23च) किसी जोखिम पूंजी निधि या जोखिम पूंजी कंपनी द्वारा किसी जोखिम पूंजी उपक्रम में साधारण शेयरों के रूप में किए गए निवेश से लाभांश या दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में आय :

परंतु यह तब जबकि ऐसी जोखिम पूंजी निधि या जोखिम पूंजी कम्पनी इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार विहित प्राधिकारी द्वारा इस खंड के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित की जाती है और विहित शर्तों को पूरी करती है :

परन्तु यह और कि विहित प्राधिकारी द्वारा कोई अनुमोदन किसी एक बार में, ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए प्रभावी होगा, जो तीन निर्धारण वर्षों से अधिक नहीं है, जो अनुमोदन आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए :

परन्तु यह भी कि इस खंड की कोई बात 31 मार्च, 1999 के पश्चात् किए गए किसी निवेश के संबंध में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() ''जोखिम पूंजी निधि'' से ऐसी निधि अभिप्रेत है जो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास विलेख के अधीन कार्य कर रही है जो मुख्यत: विहित मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार किसी जोखिम पूंजी उपक्रम के साधारण शेयरों को अर्जित करने के रूप में निवेशों के लिए न्यासियों द्वारा धन एकित्रात करने के लिए स्थापित किया गया है;

() ''जोखिम पूंजी कंपनी'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसने विहित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार जोखिम पूंजी उपक्रम की साधारण शेयरों को अर्जित करने के रूप में निवेश किया है;

() ''जोखिम पूंजी उपक्रम'' से ऐसी देशी कंपनी अभिप्रेत है जिसके शेयर भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हैं और जो विद्युत या किसी अन्य प्रकार की शक्ति के उत्पादन या वितरण करने के कारबार में लगी हुई है या किसी अवसंरचना सुविधा को विकसित करने, बनाए रखने और दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के कारबार में लगी हुई हैं या ऐसी वस्तुओं या चीजों के (जिसके अंतर्गत कम्प्यूटर साफ्टवेयर भी है) जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित की जाएं, निर्माण या उत्पादन में लगी हुई हैं; और

() ''अवसंरचनात्मक सुविधा'' से कोई सड़क, राजमार्ग, पुल, विमानपत्तन, पत्तन, रेल प्रणाली, जल प्रदाय परियोजना, सिंचाई परियोजना, सफाई या मलव्ययन प्रणाली या उसी प्रकार की कोई अन्य सार्वजनिक सुविधा अभिप्रेत है जो राजपत्रा में इस संबंध में बोर्ड द्वारा अधिसूचित की जाए और जिससे धारा 80झक की उपधारा (4क) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करती है;

(23चक) धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों या किसी जोखिम पूंजी निधि के या किसी जोखिम पूंजी उपक्रम में साधारण शेयरों के माध्यम से किए गए निवेशों से किसी जोखिम पूंजी कंपनी दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के माध्यम से आय :

परन्तु ऐसी जोखिम पूंजी निधि या जोखिम पूंजी कंपनी इस संबंध में बनाए गए नियमों के अनुसार केन्द्रीय सरकार द्वारा इसे किए गए आवेदन पर, इस खंड के प्रयोजनों के लिए अनुमोदित की जाती है और जो विहित शर्तों को पूरा करती है :

परन्तु यह और कि केन्द्रीय सरकार द्वारा दिया गया कोई अनुमोदन एक ही बार में ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए प्रभावी होगा जो तीन निर्धारण वर्षों से अधिक नहीं होंगे, जो अनुमोदन आदेश में विशेष रूप से उल्लिखित किया जाए :

परन्तु यह भी कि इस खंड में की कोई बात 31 मार्च, 2000 के पश्चात् किए गए किसी विनिधान की बाबत लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए–

() ''जोखिम पूंजी निधि'' से ऐसी निधि अभिप्रेत है जो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास विलेख के अधीन कार्य कर रही है जो मुख्यत: विहित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार जोखिम पूंजी को साधारण शेयर अर्जित करने के रूप में निवेशों के लिए न्यासियों द्वारा धन एकित्रात करने के लिए स्थापित की गई है;

() ''जोखिम पूंजी कंपनी'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है जिसने विहित मार्गदर्शक सिद्धान्तों के अनुसार जोखिम पूंजी उपक्रम के साधारण शेयरों को अर्जित करने के रूप में निवेश किया है; और

() ''जोखिम पूंजी उपक्रम'' से ऐसी देशी कंपनी अभिप्रेत है जिसके शेयर भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है और जो–

(i) () सॉफ्टवेयर;

() सूचना प्रौद्योगिकी;

() फार्मास्यूटिकल सेक्टर में मूल औषधियों के उत्पादन;

() जैव-प्रौद्योगिकी;

() कृषि या सहबद्ध सेक्टर; या

() ऐसे अन्य सेक्टर, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इन निमित्त अधिसूचित किया जाए; या

के कारबार में लगी हुई है; या

(ii) किसी वस्तु या पदार्थ के उत्पादन या विनिर्माण जिसके लिए पेटेंट, राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला या विज्ञान या प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अनुमोदित किसी अन्य वैज्ञानिक अनुसंधान संस्था को दिया गया है;

(23चख) किसी जोखिम पूंजी उपक्रम में निवेश से जोखिम पूंजी कंपनी या जोखिम पूंजी निधि की आय।

परंतु यह कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, किसी जोखिम पूंजी कंपनी या जोखिम पूंजी निधि की किसी आय के संबंध में, जो 1 अप्रैल, 2016 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की, धारा 115पख के स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) में विनिर्दिष्ट एक विनिधान निधि है, लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए–

() ''जोखिम पूंजी कंपनी'' से ऐसी कोई कंपनी अभिप्रेत है जिसे–

(अ) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (जोखिम पूंजी निधि) विनियम, 1996 (जिसे इसमें इसके पश्चात् जोखिम पूंजी निधि विनियम कहा गया है) के अधीन जोखिम पूंजी निधि के रूप में तारीख 21 मई, 2012 के पूर्व रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्रा दिया गया है और विनियमित किया जाता है; या

() भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (आनुकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 (जिसे इसमें इसके पश्चात् आनुकल्पिक विनिधान निधि विनियम कहा गया है) के अधीन आनुकल्पिक विनिधान निधि के प्रवर्ग 1 के उपप्रवर्ग के रूप में जोखिम पूंजी निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया गया है और विनियमित किया जाता है और जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करती है, अर्थात् :–

(i) यह किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है;

(ii) इसने अपनी विनिधानयोग्य निधिओं के कम से कम दो-तिहाई का असूचीबद्ध साधारण शेयरों या जोखिम पूंजी उपक्रम की साधारण सहबद्ध लिखतों में विनिधान किया है; और

(iii) इसने ऐसे किसी जोखिम पूंजी उपक्रम में विनिधान नहीं किया है, जिसमें उसका निदेशक या कोई सारवान् शेयर धारक (जो उसकी साधारण शेयर पूंजी के दस प्रतिशत से अधिक साधारण शेयरों का हिताधिकारी स्वामी है) व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से ऐसे जोखिम पूंजी उपक्रम की समादत्त साधारण शेयर पूंजी के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक के साधारण शेयर धारण करता है;

() ''जोखिम पूंजी निधि'' से ऐसी कोई निधि अभिप्रेत है,–

() जो रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के उपबंधों के अधीन ऐसे रजिस्ट्रीकृत न्यास विलेख के अधीन चलाई जा रही है, जिसे–

(I) तारीख 21 मई, 2012 के पूर्व जोखिम पूंजी निधि विनियम के अधीन जोखिम पूंजी निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्रा दिया गया है और विनियमित किया जाता है; या

(II) जोखिम पूंजी निधि विनियम के अधीन प्रवर्ग 1 के आनुकल्पिक विनिधान निधि के उपप्रवर्ग के रूप में जोखिम पूंजी निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र दिया गया है और जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करती है, अर्थात् :–

(i) इसने अपनी विनिधानयोग्य निधिओं के कम से कम दो-तिहाई का असूचीबद्ध साधारण शेयरों या जोखिम पूंजी उपक्रम की साधारण सहबद्ध लिखतों में विनिधान किया है;

(ii) इसने ऐसे किसी जोखिम पूंजी उपक्रम में विनिधान नहीं किया है, जिसमें उसका न्यासी या व्यवस्थापक व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से ऐसे जोखिम पूंजी उपक्रम की समादत्त साधारण शेयर पूंजी के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक के साधारण शेयर धारण करता है; और

(iii) उसके द्वारा निर्गमित यूनिटें, यदि कोई हैं, किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हैं; या

() भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट द्वारा बनाई गई जोखिम पूंजी स्कीम के रूप में चलाई जा रही है;

() ''जोखिम पूंजी उपक्रम'' से–

(i) जोखिम पूंजी निधि विनियम के विनियम 2 के खंड (ढ) में यथापरिभाषित कोई जोखिम पूंजी उपक्रम; या

(ii) आनुकल्पिक विनिधान निधि विनियम के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (कक) में यथापरिभाषित कोई जोखिम पूंजी उपक्रम,

अभिप्रेत है।

(23चखक) शीर्ष ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' के अधीन प्रभार्य आय से भिन्न किसी विनिधान निधि की कोई आय;

(23चखख) धारा 115पख में निर्दिष्ट किसी यूनिट धारक को प्रोद्भूत या उद्भूत या उसके द्वारा प्राप्त कोई आय, जो उस आय का वह अनुपात है, जो उसी प्रकृति का है जैसी ''कारबार या वृत्ति के लाभों और अभिलाभों'' के शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय है।

स्पष्टीकरण - खंड (23चखक) और (23चखख) के प्रयोजनों के लिए ''विनिधान निधि'' पद का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 115पख के स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) में है;

36[(23चखग) किसी विनिर्दिष्ट निधि से या किसी विनिर्दिष्ट निधि में यूनिटों के अंतरण पर, किसी यूनिटधारक द्वारा प्राप्त की गई या उसे प्रोद्भूत या उद्भूत कोई आय ।

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() "विनिर्दिष्ट निधि" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका खंड (4घ) के स्पष्टीकरण में है ;

() "यूनिट" पद से निधि में किसी विनिधानकर्ता का फायदाप्रद हित अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत शेयर या भागीदारी हित भी है ;]

(23चग) किसी कारबार न्यास की कोई आय–

() किसी विशेष प्रयोजन एकक से प्राप्त या प्राप्य ब्याज;

() 37[किसी विशेष प्रयोजन एकक से प्राप्त या प्राप्य] लाभांश,

के रूप में

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विशेष प्रयोजन एकक" पद से ऐसी कोई भारतीय कंपनी अभिप्रेत है, जिसमें कारबार न्यास नियंत्राणकारी हित और शेयरधारिता या हित की ऐसी कोई विनिर्दिष्ट प्रतिशतता धारण करता है, जो उन विनियमों द्वारा, जिनके अधीन ऐसे न्यास को रजिस्ट्रीकरण मंजूर किया गया है, अपेक्षित किया जाए;

(23चगक) किसी ऐसे कारबार न्यास, जो एक भू-संपदा विनिधान न्यास है, की ऐसे कारबार न्यास के प्रत्यक्षत: स्वामित्वाधीन किसी भू-संपदा आस्ति को किराए या पट्टे या भाटक पर देने से प्राप्त कोई आय।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''भू-संपदा आस्ति'' पद का वही अर्थ होगा, जो उसका भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (भू-संपदा विनिधान न्यास) विनियम, 2014 के विनियम 2 के उपविनियम (1) के खंड (यञ) में है;

(23चघ) धारा 115पक में निर्दिष्ट ऐसी कोई वितरित आय, जो किसी यूनिट धारक द्वारा कारबार न्यास से प्राप्त की गई हो, जो आय का वह अनुपात नहीं है, जो उसी प्रकृति की है, 38[खंड (23चग) के उपखंड (क) या उक्त खंड के उपखंड (ख) में उस दशा में, जहां विशेष प्रयोजन यान ने धारा 115खकक के अधीन विकल्प का प्रयोग नही किया है] या खंड (23चगक) में निर्दिष्ट की गई है;

39[(23चड़) किसी विनिर्दिष्ट व्यक्ति की भारत में उसके द्वारा किए गए विनिधान से उदभूत होने वाले लाभांश, ब्याज 38खख[धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (xii) में निर्दिष्ट कोई राशि] या दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों की प्रकृति की कोई आय, चाहे वह ऋण के रूप में हो या शेयर पूंजी या यूनिट के रूप में हो, यदि विनिधान—

(i) 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात्, किन्तु 31 मार्च, 2024 से पहले किया गया है; और

(ii) कम से कम तीन वर्ष की अवधि के लिए धरित किया गया है; और

(iii) (क) धारा 2 के खंड (13क) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट किसी कारबार न्यास में किया गया है; या

(ख) धारा 80झक की उपधारा (4) के खंड (i) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित विकास, प्रचालन और रखरखाव या किसी अवसंरचना सुविधा के विकास, प्रचालन और रखरखाव का कारबार कर रही किसी कंपनी या उद्यम या किसी अस्तित्व में या ऐसे अन्य कारबार में, जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे, किया गया है; और

(ग) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (अनुकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 के अधीन विनियमित 40[मद (ख) या मद (घ) या मद (ड़) में या धारा 2 के खंड (13क) के उपखंड (i) में निर्दिष्ट कोई अवसंरचना विनिधान न्यास; या] निर्दिष्ट एक या अधिक अस्तित्व या अस्तित्वों में 41[न्यूनतम पचास प्रतिशत] विनिधान करने वाली प्रवर्ग 1 या प्रवर्ग 2 अनुकल्पिक विनिधान निधि में किया गया है]

42 [(घ) 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् गठित और रजिस्ट्रीकृत देशी कंपनी, जिसे विशेष रूप से इस खंड के अधीन छूट के लिए पात्र विनिधान करने के प्रयोजन के लिए विरचित किया गया है और जिसका न्यूनतम पचहत्तर प्रतिशत विनिधान मद (ख) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में है; या

(ड़) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी अधिसूचना सं. आरबीआई/2009-10/316 के अधीन परिभाषित "गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी, जो किसी अवसंरचना वित्तीय कंपनी के रूप में रजिस्ट्रीकृत है" या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी मास्टर परिपत्र - "अवसंरचना ऋण निधि-गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी (रिजर्व बैंक) निदेश, 2011" के अधीन परिभाषित "अवसंरचना ऋण निधि गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी", जिसका न्यूनतम नब्बे प्रतिशत विनिधान मद (ख) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में है; या]

परंतु यदि इस खंड के उपबंध के निर्वचन या कार्यान्वयन के संबंध में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो, बोर्ड केन्द्रीय सरकार अनुमोदन से कठिनाई को दूर करने के प्रयोजन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत जारी करेगा:

परंतु यह और कि पहले परंतुक के अधीन जारी मार्गदर्शक सिद्धांत संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाएगा और वह आय-कर प्राधिकारियों तथा विनिर्दिष्ट व्यक्ति पर बाध्यकर होगा:

परंतु यह भी कि इस खंड के उपबंधों के मुद्दे, जहां कोई आय विनिर्दिष्ट व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित नहीं की गई है और तत्पश्चात् किसी पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान विनिर्दिष्ट व्यक्ति इस खंड की किन्हीं शर्तों का समाधान करने में इस प्रकार असफल होता है कि उक्त आय ऐसे सम्मिलित न किए जाने के लिए पात्र नहीं होती, तो ऐसी आय, उस पूर्ववर्ती वर्ष की विनिर्दिष्ट व्यक्ति की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगी:

42[परन्तु यह भी कि उपखंड (iii) की मद (ग) में निर्दिष्ट श्रेणी-1 या श्रेणी-2 में वैकल्पिक विनिधान निधि में उपखंड की मद (ख) या मद (घ) या मद (ड़) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में या उपखंड की मद (ग) में निर्दिष्ट अवसंरचना विनिधान निधि में सौ प्रतिशत से कम विनिधान किया है, ऐसे विनिधान के मद्दे, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, उद्भूत या हुई या प्राप्त आय, जो इस खंड के अधीन छूट प्राप्त है, की संगणना उपखंड की मद (ख) या मद (घ) या मद (ड़) में निर्दिष्ट कंपनियों या उद्यमों या निकायों या उपखंड की मद (ग) में निर्दिष्ट अवसंरचना विनिधान निधि में किए गए विनिधान के अनुपात में उस रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए:

परन्तु यह भी कि उपखंड (iii) की मद (घ) में निर्दिष्ट देशी कंपनी की दशा में, उपखंड की मद (ख) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में सौ प्रतिशत से कम विनिधान किया है, ऐसे विनिधानों के मद्दे, प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: उद्भूत या हुई या प्राप्त आय इस खंड के अधीन छूट प्राप्त है, की संगणना उपखंड की मद (ख) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में किए गए विनिधान के अनुपात में उस रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए:

परन्तु यह भी कि उपखंड (iii) की मद (ड़) में निर्दिष्ट अवसंरचना वित्तीय कंपनी के रूप में रजिस्ट्रीकृत गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी, या अवसंरचना ऋण निधि गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी ने उपखंड की मद (ख) में निर्दिष्ट एक या अधिक कंपनियों या उद्यमों या निकायों में सौ प्रतिशत से कम विनिधान किया है, ऐसे विनिधान के मद्दे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उद्भूत या हुई या प्राप्त आय, जो इस खंड के अधीन छूट प्राप्त है, की संगणना उपखंड की मद (ख) में निर्दिष्ट कंपनियों या उद्यमों या निकायों में किए गए विनिधान के अनुपात में ऐसी रीति में की जाएगी जो विहित की जाए:

परन्तु यह भी कि स्वयंभू धन निधि या पेंशन निधि में प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: भारत में विनिधान करने के लिए ऋण या उधार हैं, तो ऐसी निधि को इस खंड के अधीन छूट का पात्र नहीं समझा जाएगा।]

43[स्पष्टीकरण 1]—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''विनिर्दिष्ट व्यक्ति'' से निम्नलिखित अभिप्रेत है,—

(क) आबू धाबी विनिधान प्राधिकरण की पूर्णत: स्वामित्वाधीन समनुषंगी, जो—

(i) संयुक्त अरब अमीरात का निवासी है; और

(ii) जो 44[अबू धाबी] की सरकार के स्वामित्वाधीन निधि से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान करता है;

(ख) ऐसी संप्रभु धन निधि, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात:—

(i) यह विदेशी सरकार के प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: पूर्णत: स्वामित्वाधीन और नियंत्रणाधीन है;

(ii) इसे ऐसी विदेशी विधि के अधीन स्थापित किया गया है और विनियमित किया गया है;

(iii) निधि के अर्जन या तो विदेशी सरकार के लेखे में या उस सरकार द्वारा पदाभिहित किसी अन्य लेखे में जमा किए जाते हैं की अर्जनों का कोई भाग किसी निजी व्यक्ति के फायदे को लागू नहीं होता है;

(iv) उक्त निधि की आस्ति, विघटन पर विदेशी सरकार में निहित हो जाती है;

45[परन्तु उपखंड (iii) और उपखंड (iv) के उपखंड भारत में विनिधान करने से भिन्न प्रयोजनों के लिए ऋण या उधार देने हेतु उधारकर्ताओं या विनिधानकर्ताओं को किए गए किसी संदाय को लागू नहीं होंगे;]

(v) यह कोई 46[वह विनिधानकर्ता के दिन-प्रतिदिन के प्रचालनों में भाग लेता है, किंतु विनिधान प्राप्तकर्ता के विनिधान के संरक्षण के लिए मानीटरी क्रियाविधि, जिसके अंतर्गत निदेशकों या कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति भी है, विनिधान प्राप्तकर्ता के दिन-प्रतिदिन के प्रचालनों में भाग लेना नहीं माना जाएगा;]

(vi) इसे केन्द्रीय सरकार द्वारा 47[और ऐसी अधिसूचना मे विनिर्दिष्ट शर्तो को पूरा करने के लिए] राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किया गया है;';

(ग) कोई पेंशन निधि, जो—

(i) किसी दूसरे देश की विधि, जिसके अंतर्गत उसके राजनैतिक घटकों द्वारा, जो कोई प्रांत, राज्य या स्थानीय निकाय है, चाहे किसी भी नाम से ज्ञात हों, द्वारा बनाई गई विधियां हैं, के अधीन सृजित या स्थापित है;

(ii) ऐसे दूसरे देश में कर की दायी नहीं है; 48[या यदि कर का दायी है तो उसकी सभी आय के लिए कर से छूट का ऐसे दूसरे देश द्वारा उपबंध किया गया है;]

(iii) ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करती है, 49[जो विहित किया जाएं;]

48[(iiiक) वह विनिधान प्राप्तकर्ता के दिन-प्रतिदिन के प्रचालनों में भाग लेता है, किंतु विनिधान प्राप्तकर्ता के विनिधान के संरक्षण के लिए मानीटरी क्रियाविधि, जिसके अंतर्गत निदेशकों या कार्यकारी निदिशक की नियुक्ति भी है, विनिधान प्राप्तकर्ता के दिन-प्रतिदिन के प्रचालनों में भाग लेना नहीं माना जाएगा; और];

(iv) केन्द्रीय सरकार द्वारा, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, 50[इस प्रयोजन के लिए और ऐसी अधिसूचना मे विनिर्दिष्ट शर्तो को पूरा करने के लिए] विनिर्दिष्ट है;

48[स्पष्टीकरण 2- इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

   (i) "विनिधान प्राप्तकर्ता" से उपखंड (iii) की मद (ड़) में निर्दिष्ट कोई कारबार न्यास या कंपनी या उद्यम या निकाय या श्रेणी-1 या श्रेणी-2 वैकल्पिक विनिधान निधि या कोई अवसंरचना विनिधान न्यास या देशी कंपनी या अवसंरचना वित्तीय कंपनी या अवसंरचना ऋण निधि अभिप्रेत है जिसमें, यथास्थिति, स्वयंभू धन निधि या पेंशन निधि ने इस खंड के उपबंधों के अधीन प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान किया है;

   (ii) "ऋण और उधार" से,—

(क) किसी स्वयंभू धन निधि द्वारा लिया गया ऋण या उधार या किसी स्वयंभू धन निधि में उस देश की सरकार, जिसमें स्वयंभू निधि स्थापित की गई है, से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति, द्वारा, किया गया निक्षेप या विनिधान अभिप्रेत है;

(ख) किसी पेंशन निधि व्यक्ति से लिया गया ऋण या लिया गया उधार अथवा किसी व्यक्ति द्वारा किसी पेंशन निधि में किया गया विनिधान अभिप्रेत है किन्तु इसके अंतर्गत कोई ऐसा निक्षेप या विनिधान सम्मिलित नहीं है जो एक या अधिक निधियों की कानूनी बाध्यताओं और या सेवानिवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा, नियोजन, नि:शक्तता, मृत्यु फायदों या, यथास्थिति, सहभागियों या ऐसी निधियों या योजनाओं के फायदाग्रहियों को वैसे ही किसी प्रतिकार के लिए सी योजना का उपबंध करने के लिए परिभाषित अंशदान का प्रतिनिधित्व करता है।

स्पष्टीकरण 3- इस खंड के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सरकार यह विहित कर सकेगी कि उपखंड (iii) की मद (ग) में निर्दिष्ट "पचास प्रतिशत" या मद (घ) में निर्दिष्ट "पचहत्तर प्रतिशत" या मद (ड़) में निर्दिष्ट "नब्बे प्रतिशत" की संगणना ऐसी रीति में की जाएगी, जो विहित की जाए];

48क[(23चच) पूंजी अभिलाभ की प्रकृति की कोई आय जो किसी अनिवासी को उद्भूत होती है या उसके द्वारा या विनिर्दिष्ट निधि द्वारा प्राप्त की जाती है, जो भारत में निवासी किसी कंपनी के शेयरों को परिणामी निधि या विनिर्दिष्ट निधि में अंतरण के मद्दे उस सीमा तक प्राप्त होती है, जो ऐसी रीति में, जो विहित की जाए, अनिवासी द्वारा धारित यूनिटों के कारण मानी जा सकती है, और ऐसे शेयर पुन:स्थापन में मूल निधि से या पूर्णत: स्वामित्व वाले विशेष प्रयोजन यान (यानों) से अंतरित किए गए थे, और जहां ऐसे शेयरों पर पूंजी अभिलाभ कर से प्रभार्य शेयर तब नहीं होते, यदि ऐसा पुन:स्थापन नहीं हुआ होता।

स्पष्टीकरण- इस खंड के प्रयोजन के लिए,

() "मूल निधि", "पुन:स्थापन" और "परिणामी निधि" पदों का वही अर्थ होगा, जो उनका क्रमश: धारा 47 के खंड (viiकग) और खंड (viiकघ) के स्पष्टीकरण में है;

() "विनिर्दिष्ट निधि" पद का वही अर्थ होगा, जो उसका धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) में है;

(23छ) [वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2007 से लोप किया गया]

(24) कोई आय जो निम्नलिखित ''गृह सम्पत्ति से आय'' और ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्षकों के अंतर्गत प्रभार्य हो—

() व्यवसाय संघ अधिनियम, 1926 (1926 का 16) के अर्थ में ऐसी किसी पंजीकृत संघ की, जो मुख्यत: कर्मकारों और नियोजकों या कर्मकारों के बीच के संबंधों को विनियमित करने के प्रयोजन के लिए बनाया गया है;

() उपखंड () में निर्दिष्ट पंजीकृत संघों का संगम;

(25)(i) उन प्रतिभूतियों पर ब्याज जो किसी ऐसी भविष्य निधि द्वारा जिसको भविष्य निधि अधिनियम, 1925 (1925 का 19) लागू होता है धारित है या उसकी सम्पत्ति है या उस निधि के ऐसे कोई पूंजी अभिलाभ, जो ऐसी प्रतिभूतियों के विक्रय, विनिमय या अन्तरण से उत्पन्न हो;

(ii) कोई ऐसी आय जो किसी मान्यताप्राप्त भविष्य निधि की ओर से न्यासियों द्वारा प्राप्त की गई हो;

(iii) कोई ऐसी आय जो किसी अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि की ओर से न्यासियों द्वारा प्राप्त की गई हो;

(iv) कोई ऐसी आय जो किसी अनुमोदित उपदान निधि की ओर से न्यासियों द्वारा प्राप्त की गई हो;

(v) कोई आय जो–

() कोयला खान भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1948 (1948 का 46) के अंतर्गत गठित न्यासी बोर्ड द्वारा उस अधिनियम की धारा 3छ के अधीन स्थापित निक्षेप सहबद्ध बीमा निधि की ओर से प्राप्त की गई हो; या

() कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 (1952 का 19) के अंतर्गत गठित न्यासी बोर्ड द्वारा उस अधिनियम की धारा 6ग के अंतर्गत स्थापित निक्षेप सहबद्ध बीमा निधि की ओर से प्राप्त की गई हो;

(25क) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (1948 का 34) के उपबंधों के अंतर्गत स्थापित कर्मचारी राज्य बीमा निधि की कोई आय;

(26) संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (25) में यथा परिभाषित अनुसूचित जनजाति के ऐसे सदस्य की दशा में जो संविधान की छठी अनुसूची के पैरा 20 से संलग्न सारणी के भाग 1 या भाग 2 में विनिर्दिष्ट उल्लिखित किसी क्षेत्रा में या अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा राज्यों में जैसा कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्रा (पुनर्गठन) अधिनियम, 1971 के प्रारंभ होने के ठीक पूर्व विधान था के अधीन असम के राज्यपाल द्वारा जारी की गई अधिसूचना सं. टीएडी/आर/35/50/109, तारीख 23 फरवरी, 1951 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में निवास कर रहा है या जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्रा में कोई ऐसी आय जो उसको–

() पूर्वोक्त क्षेत्रों या राज्यों में किसी स्रोत से प्रोदभूत या उदभूत होती है; या

() प्रतिभूतियों पर लाभांश या ब्याज के रूप में प्रोदभूत या उदभूत होती है;

(26क) 48खख[***]

(26कक)[* * *]

48गगग[(26ककक) किसी व्यष्टि की दशा में, जो सिक्किमी है,—

(क) जिसे सिक्किम राज्य में किसी स्रोत से ; या

(ख) प्रतिभूतियों पर लाभांश या ब्याज के माध्यम से,

कोई आय उद्भूत या उत्पन्न होती है ।

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "सिक्किमी" से—

 (i)  कोई व्यष्टि, जिसके नाम को 26 अप्रैल, 1975 के तुरंत पूर्व सिक्किम नागरिक नियम, 1961 के साथ पठित सिक्किम नागरिक विनियम, 1961 के अधीन रखे गए रजिस्टर (जिसे इसमें इसके पश्चात् "सिक्किम के नागरिकों का रजिस्टर" कहा गया है) में अभिलिखित किया गया है ; या

(ii)  कोई व्यष्टि, जिसके नाम को तारीख 7 अगस्त, 1990 के भारत सरकार के आदेश सं. 26030/36/90-आई.सी.आई. और तारीख 8 अप्रैल, 1991 के समसंख्यक आदेश द्वारा सिक्किम के नागरिकों के रजिस्टर में सम्मिलित किया गया है ; या

(iii) कोई अन्य व्यष्टि, जिसका नाम सिक्किम के नागरिकों के रजिस्टर में नहीं है किंतु यह संदेह से परे साबित कर दिया गया है कि ऐसे व्यष्टि के पिता या पति या पितामह दादा या उसी पिता से भाई का नाम उस रजिस्टर में अभिलिखित किया गया है ; या

(iv) कोई अन्य व्यष्टि, जिसका नाम सिक्किम के नागरिकों के रजिस्टर में नहीं है किंतु यह साबित कर दिया जाता है कि ऐसा व्यष्टि 26 अप्रैल, 1975 को या उससे पूर्व सिक्किम में अधिवास कर रहा था ; या

(v) कोई अन्य व्यष्टि, जो 26 अप्रैल, 1975 को या उससे पूर्व सिक्किम में अधिवास नहीं कर रहा था किंतु यह संदेह से परे साबित कर दिया गया है कि ऐसे व्यष्टि के पिता या पति या पितामह दादा या उसी पिता से भाई 26 अप्रैल, 1975 को या उससे पूर्व सिक्किम में अधिवास कर रहा था,

अभिप्रेत होगा ;]

(26ककख) कृषि उत्पाद के विपणन को विनियमित करने के प्रयोजनार्थ तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन गठित किसी कृषि उत्पाद विपणन समिति या बोर्ड की आय;

(26ख) किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम की या किसी अन्य निकाय, संस्था या संगम की आय (जो सरकार द्वारा पूर्णतया वित्तपोषित निकाय, संस्था या संगम है) जहां ऐसा निगम या अन्य निकाय या संस्था या संगम अनुसूचित जातियों या अनुसूचित जनजातियों या पिछड़े वर्गों के या उनमें से किन्हीं दो के या सभी के सदस्यों के हितों के प्रोन्नयन के लिए संस्थापित किया गया है, या बनाया गया है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() ''अनुसूचित जातियां'' और ''अनुसूचित जनजातियां'' का वही अर्थ है जो संविधान के अनुच्छेद 366 के खंड (24) और खंड (25) में है;

() ''पिछड़े वर्गों'' से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों से भिन्न, नागरिकों के ऐसे वर्ग अभिप्रेत हैं, जो यथास्थिति,–

(i) केन्द्रीय सरकार द्वारा; या

(ii) किसी राज्य सरकार द्वारा,

समय-समय पर, अधिसूचित किए जाएं;

(26खख) किसी अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के हितों के प्रोन्नयन करने के लिए केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा स्थापित किसी निगम की आय।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजन के लिए ''अल्पसंख्यक समुदाय'' से ऐसा अल्पसंख्यक समुदाय अभिप्रेत है जो इस संबंध में राजपत्रा में केन्द्रीय सरकार द्वारा उस रूप में अधिसूचित है;

(26खखख) ऐसे भूतपूर्व सैनिकों के, जो भारत के नागरिक हैं, कल्याण और आर्थिक उत्थान के लिए किसी केंद्रीय, राज्य या प्रान्तीय अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगम की कोई आय।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''भूतपूर्व सैनिक'' से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने संविधान के प्रारंभ से पूर्व संघ के सशस्त्रा बलों या भारतीय राज्यों के सशस्त्रा बलों में (किन्तु असम राइफल्स, रक्षा सुरक्षा कोर, सामान्य रिजर्व इंजीनियरिंग बल, लोक सहायक सेना, जम्मू-कश्मीर मिलिशिया और राज्यक्षेत्रीय सेना को छोड़कर) किसी भी पंक्ति में, चाहे योधक या गैर-योधक रूप में, अनुप्रमाणन के पश्चात् कम से कम छह मास की निरंतर अवधि के लिए सेवा की है और उसे कदाचार या अदक्षता के कारण पदच्युति या सेवोन्मुक्ति से भिन्न किसी रूप में निर्मुक्त किया गया है और किसी मृत या असमर्थ भूतपूर्व सैनिक की दशा में जिसके अंतर्गत उसकी पत्नी, बच्चे, पिता, माता, अवयस्क भाई, विधवा पुत्री और विधवा बहन भी है, जो ऐसे भूतपूर्व सैनिक की मृत्यु या असमर्थता से ठीक पूर्व उस पर पूरी तरह आश्रित हो;

(27) खंड (26ख) में उल्लिखित अनुसूचित जातियों के या अनुसूचित जनजातियों के या दोनों के सदस्यों के हितों का प्रोन्नयन करने के लिए बनाई किसी सहकारी सोसाइटी की कोई आय :

परन्तु यह तब जबकि सहकारी सोसाइटी के सदस्य वैसे ही प्रयोजनों के लिए बनाई गई अन्य सहकारी सोसाइटियां ही हों, और सोसाइटी का वित्त, सरकार और ऐसी अन्य सोसाइटियों द्वारा उपलब्ध कराया जाता है;

(28) [* * *]

(29) [वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से लोप किया गया]।

(29क) निम्नलिखित को प्रोदभूत या उद्भूत कोई आय–

() 1 अप्रैल, 1962 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में कॉफी अधिनियम, 1942 (1942 का 7) की धारा 4 के अधीन गठित कॉफी बोर्ड या किसी ऐसे पूर्ववर्ष जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() 1 अप्रैल, 1962 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में रबड़ बोर्ड अधिनियम, 1947 (1947 का 24) की धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन गठित रबड़ बोर्ड या किसी ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष में जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() 1 अप्रैल, 1962 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) की धारा 4 के अधीन स्थापित चाय बोर्ड या किसी ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष में जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() 1 अप्रैल, 1975 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ती वर्ष में तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 (1975 का 4) के अधीन गठित तम्बाकू बोर्ड या ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() 1 अप्रैल, 1972 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ष में सामुद्रिक उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1972 (1972 का 13) की धारा 4 के अधीन स्थापित सामुद्रिक उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण या ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

()1 अप्रैल, 1985 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ती वर्ष में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास अधिनियम, 1985 (1986 का 2) की धारा 4 के अधीन स्थापित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण या ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष जिसमें प्राधिकरण का गठन किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() 1 अप्रैल, 1986 को या इसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत किसी पूर्ववर्ती वर्ष में मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986 (1986 का 10) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन गठित मसाला बोर्ड या ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष में जिसमें ऐसा बोर्ड गठित किया गया था, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो;

() कयर उद्योग अधिनियम, 1953 (1953 का 45) की धारा 4 के अधीन स्थापित कयर बोर्ड;

(30) ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो भारत में चाय उत्पादन या इसके निर्माण में लगा हुआ है चाय की झाड़ियों के पुन:रोपण या प्रतिस्थापन अथवा चाय की खेती के लिए प्रयुक्त क्षेत्रों को पुनरुज्जीवित या समेकित करने की ऐसी स्कीम के अधीन जो केन्द्रीय सरकार राजपत्रा में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट चाय बोर्ड से या उसके माध्यम से प्राप्त सहायिकी की रकम :

परन्तु जब तक जबकि निर्धारिती संबंधित निर्धारण वर्ष की आय की अपनी विवरणी के साथ, या ऐसी अतिरिक्त कालावधि के भीतर जो निर्धारण अधिकारी अनुज्ञात करे पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती को दी गई ऐसी सहायिकी की रकम की बाबत चाय बोर्ड का प्रमाणपत्रा निर्धारण अधिकारी को प्रस्तुत करता है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड में ''चाय बोर्ड'' से चाय अधिनियम, 1953 (1953 का 29) की धारा 4 के अधीन स्थापित चाय बोर्ड अभिप्रेत है;

(31) ऐसे निर्धारिती की दशा में जो भारत के रबड़, कॉफी, इलायची या ऐसी अन्य वस्तु के, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विशेषत: उल्लेख करे, उत्पादन और निर्माण का कारबार करता है, रबड़ के पौधों, कॉफी के पौधों, इलायची के पौधों या ऐसी अन्य वस्तु का उत्पादन करने के लिए पौधों के पुन:रोपण या प्रतिस्थापन की अथवा रबड़, कॉफी, इलायची या ऐसी अन्य वस्तु की खेती करने के लिए प्रयुक्त क्षेत्रों को पुनरुज्जीवित या समेकित करने की ऐसी स्कीम के अंतर्गत जो केन्द्रीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, विशेष रूप से उल्लेख करे, सम्बद्ध बोर्ड या किसी माध्यम से प्राप्त साहायिकी की रकम :

परन्तु यह तब जबकि निर्धारिती, संबंधित निर्धारण वर्ष की आय की अपनी विवरणी के साथ या ऐसी अतिरिक्त अवधि के भीतर जो निर्धारण अधिकारी अनुज्ञात करे, पूर्ववर्ष के दौरान निर्धारिती को दी गई ऐसी सहायिकी की रकम के बारे में संबद्ध बोर्ड का प्रमाण पत्र निर्धारण अधिकारी को प्रस्तुत करता है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड में, ''संबद्ध बोर्ड'' से निम्नलिखित अभिप्रेत है :–

(i) रबड़ के संबंध में रबड़ अधिनियम, 1947 (1947 का 24) की धारा 4 के अंतर्गत गठित बोर्ड,

(ii) कॉफी के संबंध में, कॉफी अधिनियम, 1942 (1942 का 7) की धारा 4 के अंतर्गत गठित कॉफी बोर्ड,

(iii) इलायची के संबंध में, मसाला बोर्ड अधिनियम, 1986 (1986 का 10) की धारा 3 के अधीन गठित मसाला बोर्ड,

(iv) इस खंड के अंतर्गत विनिर्दिष्ट किसी अन्य वस्तु के संबंध में, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अंतर्गत स्थापित कोई बोर्ड या अन्य प्राधिकरण जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे;

(32) धारा 64 की उपधारा (1क) में उल्लिखित किसी निर्धारिती की दशा में, उस उपधारा के अंतर्गत उसकी कुल आय में सम्मिलित किए जाने योग्य कोई आय, उस सीमा तक जिस तक ऐसी आय ऐसी प्रत्येक अवयस्क संतान के बारे में, जिसकी आय इस प्रकार सम्मिलित किए जाने योग्य है, एक हजार पांच सौ रुपए से अधिक नहीं;

(33) किसी पूंजी आस्ति के अंतरण से, जो भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की अनुसूची 1 में निर्दिष्ट स्कीम, 1964 की एक यूनिट है और जहां ऐसी आस्ति का अंतरण 1 अप्रैल, 2002 को या उसके पश्चात् हुआ हैं, उद्भूत कोई आय ;

(34) धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों के रूप में कोई आय:

परंतु इस खंड की कोई बात धारा 115खखघक के उपबंधों के अनुसार कर से प्रभार्य लाभांश द्वारा किसी आय को लागू नहीं होगी।

39[परंतु यह और कि इस खंड की कोई बात, धारा 115ण और धारा 115खखघक, जहां लागू होती है, के अधीन लाभांश से भिन्न लाभांश के माध्यम से, 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात्, प्राप्त किसी आय को लागू नहीं होगी;

(34क) धारा 115थक में यथानिर्दिष्ट कंपनी द्वारा, शेयरों के 51[***] क्रय द्वारा वापस लेने के मद्दे किसी निर्धारिती को, जो शेयर धारक है, उद्भूत कोई आय;

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (34क़) के पश्चात् खंड (34ख) अंत:स्थापित किया जाएगा

(34ख) किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की कोई इकाई, जो मुख्यत: किसी वायुयान को पट्टे पर देने के कारबार में लगी हुई है, की किसी कंपनी की, जो किसी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र की कोई इकाई है, जो मुख्यत: किसी वायुयान को पट्टे पर देने के कारबार में लगी हुई है, की लाभांश के माध्यम से कोई आय ।

स्पष्टीकरण—इस खंड के प्रयोजनों के लिए "अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र" का वही अर्थ होगा, जो उसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (थ) में है;।

(35) () खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि की यूनिटों की बाबत प्राप्त आय ; या

() विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रशासक से यूनिटों की बाबत प्राप्त आय ; या

() विनिर्दिष्ट कंपनी से यूनिटों की बाबत प्राप्त आय,

के रूप में कोई आय :

परंतु यह खंड, यथास्थिति, विनिर्दिष्ट उपक्रम के प्रशासक या विनिर्दिष्ट कंपनी या पारस्परिक निधि की यूनिटों के अंतरण से उद्भूत किसी आय को लागू नहीं होगा।

39[परंतु यह और कि इस खंड की कोई बात, 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् यूनिटों के संबंध में प्राप्त किसी आय को लागू नहीं होगी;

स्पष्टीकरण– इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–

() "प्रशासक" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड () में निर्दिष्ट प्रशासक अभिप्रेत है ;

() "विनिर्दिष्ट कंपनी" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट (उपक्रम का अंतरण और निरसन) अधिनियम, 2002 (2002 का 58) की धारा 2 के खंड () में निर्दिष्ट कोई कंपनी अभिप्रेत है]

(35क) किसी प्रतिभूतिकरण न्यास से किसी व्यक्ति द्वारा, जो उक्त न्यास का विनिधानकर्ता है, धारा 115नक में निर्दिष्ट वितरित आय के रूप में प्राप्त कोई आय :

परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, उक्त धारा में निर्दिष्ट वितरित आय के माध्यम से, 1 जून, 2016 को या उसके पश्चात्, प्राप्त किसी आय को लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण– इस खंड के प्रयोजनों के लिए "विनिधानकर्ता" और "प्रतिभूतिकरण न्यास" पदों का वही अर्थ होगा जो धारा 115नगक के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में क्रमश: उनका है;

(36) किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो 1 मार्च, 2003 को या उसके पश्चात् और 1 मार्च, 2004 से पूर्व क्रय की गई कंपनी में कोई पात्र साधारण शेयर हैं, और जो बारह मास या उससे अधिक की अवधि के लिए धारित की गई है, अंतरण से उद्भूत कोई आय।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए "पात्र साधारण शेयर" से अभिप्रेत है–

(i) किसी कंपनी में कोई साधारण शेयर जो 1 मार्च, 2003 को स्टाक एक्सचेंज, मुंबई के बी.एस.ई. सूचकांक-500 का एक संघटक है और ऐसे साधारण शेयर के क्रय और विक्रय के संव्यवहारों को भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में किया गया है;

(ii) किसी कंपनी में कोई साधारण शेयर जो 1 मार्च, 2003 को या उसके पश्चात् जारी पब्लिक इश्यू के माध्यम से आबंटित किया गया है और भारत में 1 मार्च, 2004 से पूर्व किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और ऐसे शेयर के विक्रय के संव्यवहार को भारत में मान्यताप्राप्त किसी स्टाक एक्सचेंज में किया गया है;

(37) किसी निर्धारिती की दशा में, जो कोई व्यष्टि या कोई हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, कृषि भूमि के अंतरण से उद्भूत 'पूंजी अभिलाभ' शीर्ष के अधीन प्रभार्य कोई आय, जहां–

(i) ऐसी भूमि धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (iii) की मद (क) या मद (ख) में निर्दिष्ट किसी क्षेत्र में स्थित है;

(ii) ऐसी भूमि, अंतरण की तारीख के ठीक पहले के दो वर्ष की अवधि के दौरान ऐसे हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यष्टि या उसके माता-पिता में से किसी के द्वारा कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही थी;

(iii) ऐसा अंतरण किसी विधि के अधीन अनिवार्य अर्जन के रूप में है या ऐसा कोई अंतरण है जिसके लिए प्रतिफल का अवधारण या अनुमोदन केन्द्रीय सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया गया है;

(iv) ऐसी आय ऐसे अंतरण के लिए प्रतिकर या प्रतिफल से हुई है, जो ऐसे निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 2004 को या उसके पश्चात् प्राप्त किया गया है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "प्रतिकर या प्रतिफल" पद के अंतर्गत किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा बढ़ाया गया या और बढ़ाया गया प्रतिकर या प्रतिफल भी आता है ;

52[(37क) किसी निर्धारिती, जो एक व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है और जो 2 जून, 2014 को ऐसी विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति का स्वामी है और आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2014 (2014 का आंध्र प्रदेश अधिनियम 11) और उक्त अधिनियम के अधीन बनाए गए नियमों, विनियमों और स्कीमों के उपबंधों के अधीन बनाई गई आंध्र प्रदेश राजधानी नगर लैंड पूलिंग स्कीम (तैयार करना और कार्यान्वयन) नियम, 2015 के अंतर्गत आने वाली लैंड पूलिंग स्कीम (जिसे इसमें इसके पश्चात् "स्कीम" कहा गया है) के अधीन ऐसी विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति का अंतरण करता है, को विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अंतरण की बाबत उद्भूत होने वाली कोई आय जो "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य है।

स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति" से अभिप्रेत है,–

() 2 जून, 2014 को निर्धारिती के स्वामित्वाधीन भूमि या भवन या दोनों और जिसे स्कीम के अधीन अंतरित कर दिया गया है; या

() खंड (क) में निर्दिष्ट भूमि या भवन या दोनों की बाबत निर्धारिती को स्कीम के अधीन जारी लैंड पूलिंग स्वामित्व प्रमाणपत्र; या

() स्कीम के अनुसार उपखंड (क) में निर्दिष्ट भूमि या भवन या दोनों के बदले में निर्धारिती द्वारा प्राप्त, यथास्थिति, पुन:गठित भूखंड या भूमि, यदि इस प्रकार प्राप्त, यथास्थिति, ऐसा भूखंड या भूमि का उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष के भीतर अंतरण कर दिया जाता है, जिसमें ऐसे भूखंड या भूमि का कब्जा उसे सौंपा गया था;]

(38) किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो किसी कंपनी में कोई साधारण शेयर या किसी साधारण शेयरोन्मुख निधि की कोई यूनिट या किसी कारबार न्यास की कोई यूनिट है, अंतरण से होने वाली आय, जहां–

() किसी साधारण शेयर या यूनिट के विक्रय का संव्यवहार उस तारीख को या उसके पश्चात् होता है, जिसको वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 का अध्याय 7 प्रवृत्त होता; और

() ऐसा संव्यवहार उस अध्याय के अधीन प्रतिभूति संव्यवहार कर से प्रभार्य है:

परंतु किसी कंपनी के दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ के रूप में हुई आय को धारा 115ञख के अधीन बही लाभ और संदेय आय-कर की संगणना करने के लिए हिसाब में लिया जाएगा:

परंतु यह भी कि उपखंड () में अंतर्विष्ट कोई बात किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र में अवस्थित किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में किए गए संव्यवहार को और जहां ऐसे संव्यवहार के लिए प्रतिफल विदेशी मुद्रा में संदत्त किया जाता है या संदेय है, लागू नहीं होगी।

53[परंतु यह भी कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी में साधारण शेयर है, के अंतरण से उद्भूत होने वाली किसी आय को लागू नहीं होगी यदि ऐसे साधारण शेयर का, इस निमित्त केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित अर्जन से भिन्न अर्जन का संव्यवहार, 1 अक्तूबर, 2004 को या उसके पश्चात् किया गया है और ऐसा संव्यवहार वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 (2004 का 23) के अध्याय 7 के अधीन प्रतिभूति संव्यवहार कर से प्रभार्य नहीं है।]

54[परंतु यह भी कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात, ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो किसी कंपनी या किसी साधारण शेयरोन्मुख निधि की किसी यूनिट या किसी कारबार न्यास की किसी यूनिट में इक्विटी शेयर है, 1 अप्रैल, 2018 को या उसके पश्चात् किए गए अंतरण से होने वाली किसी आय को लागू नहीं होंगी।]

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए,

() "साम्य उन्मुख निधि" से कोई निधि अभिप्रेत है–

(i) जहां विनिधानीय निधियों में देशी कंपनियों के साम्य शेयरों के माध्यम से ऐसी निधि के कुल आगमों के पैंसठ प्रतिशत से अधिक के विस्तार तक विनिधान किया गया है; और

(ii) जिसकी स्थापना खंड (23घ) के अधीन विनिर्दिष्ट पारस्परिक निधि के अधीन की गई है:

परंतु निधि साधारण शेयरधृति की प्रतिशतता की संगणना आरंभिक और अंतिम संख्या के मासिक औसत की वार्षिक औसत के प्रति निर्देश से की जाएगी;

() "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्र" का वही अर्थ होगा जो उसका विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड () में है;

() "मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज" का वही अर्थ होगा जो उसका धारा 43 की उपधारा **(5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में है ।

(39) केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित व्यक्ति या व्यक्तियों को भारत में हुई किसी अंतरराष्ट्रीय खेल कूद प्रतियोगिता से होने वाली विनिर्दिष्ट आय, यदि ऐसी अंतरराष्ट्रीय खेल कूद प्रतियोगिता–

() ऐसी प्रतियोगिता से संबंधित अंतरराष्ट्रीय खेल कूद को विनियमित करने वाले अंतरराष्ट्रीय निकाय द्वारा अनुमोदित हो;

() दो से अधिक देशों में खेली गई हो;

() इस खंड के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित हो।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनार्थ, "विनिर्दिष्ट आय" से अंतरराष्ट्रीय खेल कूद प्रतियोगिता से होने वाली ऐसी प्रकृति की और उस सीमा तक की आय अभिप्रेत है जो केन्द्रीय सरकार इस निमित्त अधिसूचित करे।

(40) ऐसी किसी भारतीय कंपनी से, जो विद्युत के उत्पादन, पारेषण या वितरण के कारबार में लगी हुई उसकी नियंत्री कंपनी है, किसी समनुंषगी कंपनी की अनुदान के रूप में या अन्यथा प्राप्त कोई आय, यदि ऐसी प्राप्ति विद्युत उत्पादन के विद्यमान कारबार की पुन:संचना या पुनरुज्जीवन के संबंध में शोध्य राशियों के निपटारे के लिए है :

परन्तु इस खंड के उपबंध उस दशा में लागू होंगे यदि विद्युत उत्पादन के किसी विद्यमान कारबार की पुन:संचना या पुनरुज्जीवन धारा 80झक की उपधारा (4) के खंड (v) के उपखंड () के अधीन अधिसूचित भारतीय कंपनी को कारबार के अंतरण के रूप में हुआ है;

(41) 53कक[***]

(42) किसी ऐसे निकाय या प्राधिकरण को, जिसे–

() केंद्रीय सरकार द्वारा दो या अधिक देशों के साथ की गई किसी संधि या किए गए किसी करार या केंद्रीय सरकार द्वारा हस्ताक्षरित किसी कन्वेशन के अधीन स्थापित या गठित या नियुक्त किया गया है;

() लाभ के प्रयोजनों के लिए स्थापित या गठित या नियुक्त नहीं किया गया है;

() केंद्रीय सरकार द्वारा इस खंड के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचित किया गया है,

उद्भूत होने वाली कोई विनिर्दिष्ट आय।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट आय" से, इस खंड में निर्दिष्ट निकाय या प्राधिकरण को उद्भूत होने वाली ऐसी प्रकृति की और ऐसी सीमा तक की, जो केंद्रीय सरकार इस निमित्त अधिसूचित करे, आय अभिप्रेत है;

(43) किसी व्यष्टि को धारा 47 के खंड (xvi) में निर्दिष्ट प्रतिवर्ती बंधक के संव्यवहार में ऋण के रूप में, चाहे वह एकमुश्त हो या किस्त में हो, प्राप्त कोई राशि;

(44) किसी व्यक्ति को भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 (1882 का 2) के उपबंधों के अधीन 27 फरवरी, 2008 को स्थापित नई पेंशन प्रणाली न्यास के लिए या उसकी ओर से प्राप्त कोई आय;

(45) 55[***]

(46) ऐसे किसी निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) 56क[या उसके किसी वर्ग] को-

() जो सर्वसाधारण के फायदे के लिए किसी क्रियाकलाप को विनियमित या प्रशासित करने के उद्देश्य से किसी केन्द्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या गठित किया गया है या केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा गठित किया गया है ;

() जो किसी वाणिज्यिक क्रियाकलाप में नहीं लगा हुआ है ; और

() जो इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है, प्रोद्भूत होने वाली कोई विनिर्दिष्ट आय ।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट आय" से इस खंड में निर्दिष्ट किसी निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग (चाहे वह किसी भी नाम से ज्ञात हो) 56[ 56क[या उसका कोई वर्ग]] को ऐसी प्रकृति की और उस सीमा तक प्रोद्भूत होने वाली आय अभिप्रेत है, जो केंद्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे ;

वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 10 के खंड (46) के पश्चात खंड (46क) और खंड (46ख) अंत:स्थापित किया जाएगा

(46क) किसी निकाय या प्राधिकरण या बोर्ड या न्यास या आयोग (जो कंपनी नहीं है), जिसे—

(क) निम्नलिखित एक या अधिक प्रयोजनों के लिए किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित या गठित किया गया है, अर्थात् :—

 (i)  जो गृह आवासन की आवश्यकता से संबंधित है और उसको पूरा करना ;

(ii)  शहरों, नगरों और ग्रामों की योजना, विकास या सुधार ;

(iii) जन साधारण के फायदे के लिए किसी कार्यकलाप का विनियमन या विनियमन और विकास ; या

(iv) उस उद्देश्य, जिसके लिए उसका सृजन किया गया है, के कारण उदभूत होने वाले जन साधारण के फायदे के लिए किसी मामले का विनियमन,

को प्रोद्भूत होने वाली कोई आय ; और

(ख) जिसे इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है ;

(46ख) निम्नलिखित को उद्भूत या उत्पन्न कोई आय,—

 (i)  राष्ट्रीय प्रत्यय प्रतिभूति न्यासी कंपनी लिमिटेड, जो केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित और पूर्णतया वित्तपोषित प्रत्यय प्रतिभूति निधियों के प्रचालन के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित और पूर्णतया वित्तपोषित कंपनी है ; या

(ii)  केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित और पूर्णतया वित्तपोषित और कोई प्रत्यय प्रतिभूति निधि, जिनका प्रबंधन राष्ट्रीय प्रत्यय प्रतिभूति न्यासी कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जाता है ; या

(iii)  सूक्ष्म और लघु उपक्रमों के लिए प्रत्यय प्रतिभूति निधि न्यास, जो भारत सरकार और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 (1989 का 39) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा सृजित न्यास है;

(47) ऐसे दिशानिर्देशों के अनुसार, जो विहित किए जाएं, स्थापित किसी अवसंरचना ऋण निधि की कोई आय जिसे केंद्रीय सरकार द्वारा इस खंड के प्रयोजनों के लिए राजपत्र में अधिसूचित किया जाए

(48) भारत में किसी व्यक्ति को कच्चे तेल के या किसी ऐसे अन्य माल के विक्रय अथवा ऐसी सेवाएं प्रदान करने के मद्दे, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित की जाएं, किसी विदेशी कंपनी द्वारा भारतीय करेंसी में भारत में प्राप्त कोई आय :

परंतु

(i) विदेशी कंपनी द्वारा भारत में ऐसी आय, केंद्रीय सरकार द्वारा किए गए या केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित किसी करार या ठहराव के अनुसरण में प्राप्त हुई है;

(ii) राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, विदेशी कंपनी को और करार या ठहराव को केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किया गया है; और

(iii) विदेशी कंपनी भारत में ऐसी आय को प्राप्त करने से भिन्न किसी क्रियाकलाप में नहीं लगी हुई है।

(48क) भारत में किसी सुविधा में अपरिष्कृत तेल के भंडारण या भारत में किसी निवासी व्यक्ति को उससे परिष्कृत तेल के विक्रय के मद्दे किसी विदेशी कंपनी को प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली कोई आय :

परंतु यह तब जब,–

(i) विदेशी कंपनी द्वारा भंडारण और विक्रय केंद्रीय सरकार द्वारा किए गए या केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार या ठहराव के अनुसरण में हैं;

(ii) राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, इस निमित्त विदेशी कंपनी और करार या व्यवस्था केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाते हैं।

57[(48ख) किसी विदेशी कंपनी को, 58[खंड (48क) में, यथास्थिति, निर्दिष्ट करार या ठहराव के अवसान के पश्चात् या उसमें उल्लिखित निबंधनो के अनुसार उक्त करार या ठहराव के पर्यवसान पर] भारत में सुविधा से ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित की जाएं, अपरिष्कृत तेल के बचे हुए स्टाक, यदि कोई हो, के विक्रय के मद्दे प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली कोई आय;]

59[(48ग) इस निमित्त केन्द्रीय सरकार के निदेशों के अनुसरण में इसकी भंडारण प्रसुविधा में भंडारित कच्चे तेल की पुन: पूर्ति हेतु ठहराव के परिणामस्वरूप भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम निक्षेप लिमिटेड को प्रोदभूत या उद्भूत होने वाली कोई आय, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन तेल उद्योग विकास बोर्ड के पूर्ण स्वामित्व वाली समनुषंगी है:

परंतु इस खंड में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ठहराव को लागू नहीं होगी, यदि भंडारण प्रसुविधा में कच्चे तेल की पुन: पूर्ति उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से तीन वर्ष के भीतर, जिसमें कच्चा तेल पहली बार भंडारण प्रसुविधा से हटाया गया था, नहीं की जाती है;]

59क[(48घ) संसद् के अधिनियम के अधीन स्थापित और इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित अवसंरचना और विकास के वित्तपोषण के लिए स्थापित किसी संस्था को, उस पूर्व वर्ष, जिसमें ऐसी संस्था स्थापित की गई है, के सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले दस क्रमिक निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए, प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली कोई आय;

(48ड़) खंड (48घ) में निर्दिष्ट, संसद् के अधिनियम के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुज्ञप्त और इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित विकासात्मक वित्तपोषण संस्था को, उस पूर्व वर्ष, जिसमें ऐसी संस्था स्थापित की गई है, के सुसंगत निर्धारण वर्ष से आरंभ होने वाले पांच क्रमिक निर्धारण वर्षों की अवधि के लिए, प्रोद्भूत या उद्भूत होने वाली कोई आय:

परंतु केंद्रीय सरकार, इस खंड के अधीन अधिसूचना जारी करके, ऐसी और अवधि के लिए, जो उक्त अधिसूचना में विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों के पूरा करने के अधीन रहते हुए, पांच अधिक क्रमिक निर्धारण वर्षों से अनधिक की अवधि के लिए, इस खंड के अधीन छूट की अवधि बढ़ा सकेगी;]

(49) 60कक[***]

(50) उस तारीख को या उसके पश्चात् जिसको वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय 8 के उपबंध प्रवृत होते हैं, 60[या अप्रैल, 61[2020] को या उसके पश्चात् किसी ई-वाणिज्य पूर्ती या प्रदत्त सेवाओं से उद्भूत होते हैं] किसी विनिर्दिष्ट सेवा से उद्भूत कोई आय और इस अध्याय के अधीन समकरण उद्ग्रहण से प्रभार्य।

62 [स्पष्टीकरण 1- शंकाओं को दूर करने के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि इस खंड में निर्दिष्ट आय में, ऐसी आय, जो धारा 90 या धारा 90क के अधीन केंन्द्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित करार के साथ पठित इस अधिनियम के अधीन भारत में तकनीकी सेवाओं के लिए स्वामिस्व या फीस के रूप में कर से प्रभार्य है, सम्मिलित नहीं होगी और न ही कभी सम्मिलित समझी जाएगी।

स्पष्टीकरण 2- इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

  (i) "ई-वाणिज्य पूर्ति या सेवाएं" का वही अर्थ होगा, जो वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) की धारा 164 के खंड (गख) में उसका है;

 (ii) "विनिर्दिष्ट सेवा" का वही अर्थ होगा, जो वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) की धारा 164 के खंड (i) में उनका है।]

 

"परंतु यह भी कि केन्‍द्रीय सरकार द्वारा उस तारीख के पूर्व जिसको कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2006 राष्‍ट्रपति की अनुमति प्राप्‍त करता है, उपखण्‍ड (iv) या उपखण्‍ड (v) के अधीन जारी की गई कोई अधिसूचना, किसी एक समय पर, तीन निर्धारण वर्षों से अनधिक ऐसे निर्धारण वर्ष या वर्षों के लिए (जिसके अंतर्गत उस तारीख जिसको ऐसी अधिसूचना जारी की जाती है, के पूर्व आरंभ होने वाला/वाले निर्धारण वर्ष भी है/हैं) प्रभावी होगी, जैसा अधिसूचना में विनिर्दिष्‍ट किया जाए:

परन्‍तु यह भी कि जहां पहले परन्‍तुक के अधीन कोई आवेदन उस तारीख को या उसके पश्‍चात् जिसको कराधान विधि (संशोधन) विधेयक, 2006 राष्‍ट्रपति की अनुमति प्राप्‍त करता है, किया जाता है तो उपखण्‍ड (iv) या उपखण्‍ड (v) के अधीन प्रत्‍येक अधिसूचना जारी की जाएगी या उपखण्‍ड (iv) या उपखण्‍ड (v) या उपखण्‍ड (vi) अथवा उपखण्‍ड (viक) के अधीन अनुमोदन अनुदत्‍त किया जाएगा अथवा आवेदन को निरस्‍त करने वाला आदेश उस मास के अंत से जिसमें ऐसा आवेदन प्राप्‍त हुआ था, बारह मास की अवधि के भीतर पारित किया जाएगा:"

"() "विनिर्दिष्ट निधि" पद से किसी न्यास या कंपनी या सीमित दायित्व भागीदारी या किसी निगम निकाय के रूप में भारत में स्थापित या निगमित ऐसी निधि अभिप्रेत है,—

  (i) जिसे प्रवर्ग 3 की वैकल्पिक विनिधान निधि के रूप में रजिस्ट्रीकरण प्रमाणपत्र मंजूर किया गया है और जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड़ (वैकल्पिक विनिधान निधि) विनियम, 2012 के अधीन विनियमित है;

(ii) जो किसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में अवस्थित है;

(iii) जिसके किसी प्रायोजक या प्रबंधक द्वारा धारित यूनिटों से भिन्न सभी यूनिट अनिवासियों द्वारा धारण किए जा रहे हैं;"

"स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट सेवा" का वही अर्थ होगा जो उसका वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय 8 की धारा 161 के खंड (i) में है।"

"परन्तु यह भी कि सभी लंबित आवेदन जिन पर 1 जून, 2007 के पूर्व उपखण्ड (iv) या उपखण्ड (v) के अधीन कोई अधिसूचना जारी नही की गई है, उस दिन को विहित प्राधिकारी को अंतरित हो जाएंगे और विहित प्राधिकारी उन आवेदनों पर उन उपखण्डों के अधीन उस प्रक्रम से जिस पर वे उस दिन थे कार्यवाही कर सकेगा:"

"परन्तु यह भी कि जहां उपखंड (iv) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या उपखंड (v) में निर्दिष्ट न्यास या संस्था को, यथास्थिति, केंद्रीय सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है या विहित प्राधिकारी द्वारा विहित किया गया है अथवा उपखंड (vi) में निर्दिष्ट किसी विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट किसी अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था को विहित प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित किया गया है और वह अधिसूचना या अनुमोदन किसी पूर्ववर्ष के लिए प्रवृत्त है, वहां इस धारा के [उसके उपखंड (1) से भिन्न] किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट कोई बात, यथास्थिति, उस निधि या न्यास या संस्था या विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षिक संस्था या अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था की ओर से उस पूर्ववर्ष के लिए प्राप्त किसी आय को उसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति की कुल आय से अपवर्जित करने के लिए प्रवर्तित होगी।" 

 

  

 

[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

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