आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 1

संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और अनुप्रयोग

धारा

धारा संख्या

1

अध्याय शीर्षक

I - प्रारंभिक

अधिनियम

ऋणों की वसूली और दिवालियापन अधिनियम, 1993

वर्ष

संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और अनुप्रयोग

संक्षिप्त शीर्षक, विस्तार, प्रारंभ और अनुप्रयोग

ऋणों की पुनःप्राप्ति[और दिवालियापन] अधिनियम, 1993

[1993 का 51]

बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को देय ऋणों के शीघ्र न्यायनिर्णयन और वसूली, [व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के दिवालियेपन समाधान] और दिवालियापन के लिए न्यायाधिकरणों की स्थापना और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम।

भारत गणराज्य के चवालीसवें वर्ष में संसद द्वारा इस प्रकार अधिनियमित किया गयाः-

अध्याय I

(प्रारंभिक)

 संक्षिप्त शीर्षक, क्षेत्र, प्रारंभ और अनुप्रयोग। 

1.(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम ऋण वसूली [एवं दिवालियापन] अधिनियम, 1993 है।

(2) यह जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर पूरे भारत में विस्तारित होता है।

(3) यह 24 जून, 1993 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा।

(4) [जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, इस संहिता के उपबंध] वहां लागू नहीं होंगे जहां किसी बैंक या वित्तीय संस्था या बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के संघ को देय ऋण की राशि दस लाख रुपए से कम है या ऐसी अन्य राशि, जो एक लाख रुपए से कम नहीं होगी, जिसे केन्द्रीय सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे।


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