आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा दूसरी अनुसूची

कर वसूली की प्रक्रिया

धारा

धारा संख्या

दूसरी अनुसूची

अध्याय शीर्षक

अनुसूची - अनुसूची

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

कर वसूली की प्रक्रिया

कर वसूली की प्रक्रिया

दूसरी अनुसूची

कर वसूली की प्रक्रिया

[धारा 222 और धारा 276 देखिए]

भाग 1

साधारण उपबंध

परिभाषाएं

1. इस अनुसूची में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–

() ''प्रमाणपत्र'' से नियम 7, नियम 44, नियम 65 और नियम 66 के उपनियम (2) के सिवाय धारा 222 में उल्लिखित किसी निर्धारिती के संबंध में उस धारा के अधीन कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार किया गया प्रमाणपत्र अभिप्रेत है;

() ''व्यतिक्रमी'' से प्रमाणपत्र में वर्णित निर्धारिती अभिप्रेत है;

() प्रमाणपत्र के संबंध में "निष्पादन" से, प्रमाणपत्र के अनुसरण में बकाया की वसूली अभिप्रेत है;

() ''जंगम सम्पत्ति'' के अंतर्गत फसल भी है।

() ''अधिकारी'' से इस अनुसूची के अधीन कुर्की या विक्रय करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति अभिप्रेत है;

() ''नियम'' से इस अनुसूची में अन्तर्विष्ट नियम अभिप्रेत है; और

() "निगम में के शेयर" के अंतर्गत स्टाक, डिबेंचर-स्टाक, डिबेंचर या बंधपत्र भी हैं।

सूचना जारी करना

2. इस अनुसूची के अधीन बकाया की वसूली के लिए जब कर वसूली अधिकारी द्वारा कोर्इ प्रमाणपत्र तैयार किया गया हो तो वह कर-वसूली अधिकारी, व्यतिक्रमी पर सूचना की तामील करवाएगा जिसमें व्यतिक्रमी से प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रकम सूचना की तामील से पंद्रह दिनों के भीतर अदा करने की अपेक्षा और यह प्रज्ञापना होगी कि व्यतिक्रम होने की दशा में, इस अनुसूची के अधीन रकम की वसूली के लिए कदम उठाये जाएंगे।

प्रमाणपत्र कब निष्पादित किया जा सकेगा

3. प्रमाणपत्र के निष्पादन के लिए कोर्इ कार्रवार्इ तब तक नहीं की जाएगी जब तक कि पूर्व नियम द्वारा अपेक्षित सूचना की तामील की तारीख से पंद्रह दिन की अवधि न बीत जाए :

परन्तु यदि कर वसूली अधिकारी का समाधान हो जाता है कि व्यतिक्रमी द्वारा अपनी ऐसी सम्पूर्ण जंगम सम्पत्ति या उसके किसी भाग को, जो सिविल न्यायालय की डिक्री के निष्पादन मंन कुर्की के दायित्वाधीन होगी, छुपाना, हटाना या उसका व्ययन करना संभाव्य है और प्रमाणपत्र की रकम की वसूली इसके परिणामस्वरूप विलम्बित या बाधित होगी तो वह लेखबद्ध किए जाने वाले कारणों से किसी भी समय ऐसी संपूर्ण संपत्ति या उसके किसी भाग की कुर्की का निदेश दे सकेगा :

परन्तु यह और कि यदि ऐसा व्यतिक्रमी, जिसकी संपत्ति इस प्रकार कुर्क की गर्इ है, कर वसूली अधिकारी के समाधानप्रद रूप में प्रतिभूति दे देता है तो ऐसी कुर्की, कर वसूली अधिकारी द्वारा ऐसी प्रतिभूति प्राप्त किए जाने की तारीख से रद्द कर दी जाएगी।

वसूली का ढंग

4. यदि सूचना में वर्णित रकम उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर, जैसा कर वसूली अधिकारी स्वविवेक से मंजूर करें अदा नहीं की जाती है तो कर वसूली अधिकारी निम्नलिखित में से किसी एक या अधिक ढंग से उस रकम को वसूल करने के लिए अग्रसर होगा–

() व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय करके;

() व्यतिक्रमी की स्थावर सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय करके;

() व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी और उसका कारागार में निरोध करके;

() व्यतिक्रमी की जंगम और स्थावर सम्पत्तियों के प्रबंध के लिए रिसीवर की नियुक्ति करके।

वसूलीय ब्याज, खर्चे और प्रभार

5. प्रत्येक प्रमाणपत्र के निष्पादन की कार्यवाहियों में निम्नलिखित वसूलीय होंगे--

() कर या शास्ति की रकम या ऐसी अन्य राशि पर, जिससे प्रमाणपत्र सम्बद्ध है, ऐसा ब्याज, जो धारा 220 की उपधारा (2) के अनुसार संदेय है, और

() ऐसे सब प्रभार, जो--

(i) बकाया अदा करने के लिए व्यतिक्रमी पर सूचना की तामील तथा वारंटों और अन्य आदेशिकाओं की बाबत, खर्च किए गए हों और

(ii) बकाया वसूली करने के लिए की गर्इ सभी अन्य कार्यवाहियों की बाबत खर्च किए गए हों।

क्रेता का हक

6. (1) जहां प्रमाणपत्र के निष्पादन में सम्पत्ति बेची जाए वहां क्रेता में विक्रय के समय व्यतिक्रमी का अधिकार, हक और हित ही निहित होगा, चाहे सम्पत्ति स्वयं ही विनिर्दिष्ट की गर्इ हो।

(2) जहां प्रमाणपत्र के निष्पादन में स्थावर सम्पत्ति बेची जाए और विक्रय अंतिम हो गया है, वहां क्रेता के अधिकार, हक और हित के बारे में यह समझा जाएगा कि वे उसमें उस समय से विहित हुए हैं जब सम्पत्ति बेची जाए न कि उस समय से जब विक्रय अंतिम हो जाए।

क्रेता के विरुद्ध कोर्इ भी वाद इस आधार पर नहीं लाया जा सकेगा कि क्रयवादी की ओर से किया गया था

7. (1) कोर्इ भी वाद, किसी ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध, जो इस अनुसूची में अधिकथित रीति से कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणित किए गए क्रय के अधीन हक का दावा करता है, इस आधार पर नहीं होगा कि क्रयवादी की ओर से या किसी ऐसे व्यक्ति की ओर से, जिसके द्वारा वादी दावा करता है, किया गया था।

(2) इस धारा की कोर्इ बात यह घोषणा प्राप्त करने के लिए कि उक्त रूप में प्रमाणित किसी क्रेता का नाम प्रमाणपत्र में कपटपूर्वक या असली क्रेता की सहमति के बिना दर्ज किया गया था, किसी वाद का वर्जन नहीं करेगी या किसी तीसरे पक्षकार के उस सम्पत्ति के विरुद्ध भले ही वह प्रकटत: प्रमाणित क्रेता को बेची गर्इ हो, इस आधार पर कार्यवाही करने के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं करेगी कि वह असली स्वामी के विरुद्ध ऐसे तृतीय पक्षकार के दावे की तुष्टि करने के दायित्वाधीन है।

निष्पादन के आगमों का व्ययन

8. (1) जब कभी आस्तियां किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में विक्रय द्वारा या अन्यथा प्राप्त की जाएं तो आगमों का व्ययन निम्नलिखित रीति से किया जाएगा, अर्थात् :–

() सबसे पहले उनका समायोजन ऐसे प्रमाणपत्र के अधीन देय रकम, जिसके निष्पादन में आस्तियां प्राप्त की गर्इ थीं, और ऐसे निष्पादन के अनुक्रम में उपगत किए गए खर्चे में किया जाएगा;

() यदि खंड () में उल्लिखित समायोजन के पश्चात् कुछ शेष रह जाता है तो उसका उपयोग इस अधिनियम के अधीन निर्धारिती से वसूलीय ऐसी किसी अन्य रकम को चुकाने में किया जाएगा, जो उस तारीख को देय हो जिसको आस्तियां प्राप्त की गर्इ थीं; और

() खंड () और खंड () के अधीन समायोजनों के पश्चात् बची राशि, यदि कोर्इ हो, व्यतिक्रमी को दे दी जाएगी।

(2) यदि व्यतिक्रमी उपनियम (1) के खंड () के अधीन किसी समायोजन पर विवाद करता है तो कर वसूली अधिकारी उस विवाद को तय करेगा।

सिविल न्यायालयों की अधिकारिता का साधारण वर्जन वहां के सिवाय जहां कपट अभिकथित हो

9. इस अधिनियम में अन्यथा अभिव्यक्त रूप से उपबंधित के सिवाय यह है कि कर वसूली अधिकारी और व्यतिक्रमी या उनके प्रतिनिधियों के बीच हर ऐसा प्रश्न जो प्रमाणपत्र के निष्पादन, उन्मोचन या तुष्टि के संबंध में अथवा ऐसे प्रमाणपत्र के निष्पादन में किए गए विक्रय के इस अधिनियम के अधीन आदेश द्वारा पुष्ट या अपास्त करने के संबंध में उत्पन्न होता है, वाद द्वारा अवधारित नहीं किया जाएगा बल्कि उस कर वसूली अधिकारी के आदेश द्वारा अवधारित किया जाएगा जिसके समक्ष ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है :

परन्तु कपट के आधार पर ऐसे किसी प्रश्न की बाबत वाद सिविल न्यायालय में लाया जा सकेगा।

कुर्की से छूट प्राप्त सम्पत्ति

10. (1) ऐसी समस्त सम्पत्ति जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) द्वारा सिविल न्यायालयों की डिक्री के निष्पादन में कुर्की और विक्रय से छूट प्राप्त है, इस अनुसूची के अधीन कुर्की और विक्रय से छूट प्राप्त होगी।

(2) कौनसी सम्पत्ति इस प्रकार छूट की हकदार है, इस बारे में कर वसूली अधिकारी का विनिश्चय निश्चायक होगा।

कर वसूली अधिकारी द्वारा अन्वेषण

11. (1) जहां प्रमाणपत्र के निष्पादन में किसी सम्पत्ति पर कोर्इ दावा या उसकी कुर्की या विक्रय के बारे में कोर्इ आक्षेप इस आधार पर किया जाता है कि ऐसी सम्पत्ति ऐसी कुर्की या बेचे जाने के दायित्व के अधीन नहीं है, वहां कर वसूली अधिकारी उस दावे या आक्षेप का अन्वेषण करने के लिए अग्रसर होगा:

परन्तु जहां कर वसूली अधिकारी यह समझता है कि दावा या आक्षेप करने में जानबूझकर या बेकार विलम्ब किया गया है वहां ऐसा कोर्इ भी अन्वेषण नहीं किया जाएगा।

(2) जहां वह सम्पत्ति, जिसके बारे में दावा या आक्षेप है, विक्रय के लिए विज्ञापित की जा चुकी है, वहां विक्रय का आदेश देने वाला कर वसूली अधिकारी उस दावे या आक्षेप के अन्वेषण के लम्बित रहने तक, उसे प्रतिभूति विषयक ऐसी शर्तों पर या अन्यथा मुल्तवी कर सकेगा, जो कर वसूली अधिकारी उचित समझे।

(3) दावेदार या आक्षेपकर्ता को यह दर्शाने के लिए साक्ष्य पेश करना होगा कि–

() (स्थावर सम्पत्ति की दशा में) बकाया चुकाने के लिए इस अनुसूची के अधीन जारी की गर्इ सूचना की तामील की तारीख को, अथवा

() (जंगम सम्पत्ति की दशा में) कुर्की की तारीख को,

प्रश्नगत सम्पत्ति में उसका कोर्इ हित था, या वह उसके कब्जे में थी।

(4) जहां उक्त अन्वेषण पर कर वसूली अधिकारी का समाधान हो जाता है कि दावे या आक्षेप में कथित कारण से वह सम्पत्ति उक्त तारीख को व्यतिक्रमी के या उसके लिए न्यास में: किसी व्यक्ति के कब्जे में या किसी किराएदार या अन्य व्यक्ति के, जो उसे किराया दे रहा है, अधिभोग में नहीं थी, अथवा उक्त तारीख को व्यतिक्रमी के कब्जे में होते हुए वह उसके कब्जे में अपने स्वयं के लेखे अथवा अपनी संपत्ति के रूप में नहीं थी, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के लेखे या उसके न्यास में थी या भागत: उसके अपने स्वयं के लेखे और भागत: किसी अन्य व्यक्ति के लेखे थी, वहां कर वसूली अधिकारी उस सम्पत्ति को कुर्की या विक्रय से पूर्णत: या उस सीमा तक, जिस तक वह ठीक समझे, निर्मुक्त करने वाला आदेश देगा।

(5) जहां कर वसूली अधिकारी का समाधान हो जाता है कि सम्पत्ति उक्त तारीख को व्यतिक्रमी के कब्जे में स्वयं अपनी सम्पत्ति के रूप में थी, और किसी अन्य व्यक्ति के लेखे नहीं थी अथवा उसके न्यास में किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में या किराएदार या अन्य व्यक्ति के, जो उसे किराया दे रहा है, अधिभोग में थी, वहां कर वसूली अधिकारी दावे को नामंजूर करेगा।

(6) जहां कोर्इ दावा या आक्षेप किया जाता है वहां पक्षकार, जिसके विरुद्ध आदेश किया जाता है ऐसे अधिकार को सिद्ध करने के लिए, जिसका वह विवादास्पद सम्पत्ति में दावा करता है, सिविल न्यायालय में वाद संस्थित कर सकेगा, किंतु ऐसे वाद के (यदि कोर्इ हो) परिणाम के अधीन रहते हुए कर वसूली अधिकारी का आदेश निश्चायक होगा।

प्रमाणपत्र की तुष्टि या रद्द होने पर कुर्की का उठाया जाना

12. जहां–

() देय रकम, खर्चों और किसी सम्पत्ति की कुर्की के पारिणामिक अथवा विक्रय करने के लिए उपगत सभी प्रभारों और व्ययों सहित कर वसूली अधिकारी को संदत्त की जाती है; अथवा

() प्रमाणपत्र रद्द कर दिया जाता है।

वहां कुर्की वापस ली गर्इ समझी जाएगी और स्थावर सम्पत्ति की दशा में यदि व्यतिक्रमी ऐसा चाहे तो वापसी उसके खर्चे पर घोषित की जाएगी और घोषणा की एक प्रति इस अनुसूची द्वारा स्थावर सम्पत्ति के विक्रय की घोषणा के लिए उपबंधित रीति से लगार्इ जाएगी।

कुर्की और विक्रय करने का हकदार अधिकारी

13. जंगम सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय तथा स्थावर सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा जिन्हें कर वसूली अधिकारी समय-समय पर निदेश दे।

व्यतिक्रमी क्रेता का पुनर्विक्रय में हुर्इ हानि के लिए उत्तरदायी होना

14. क्रेता के व्यतिक्रम के कारण कीमत में जो भी कमी पुनर्विक्रय पर हो और ऐसे पुनर्विक्रय के संबंध में सभी व्यय, उस अधिकारी द्वारा जो विक्रय करता है, कर वसूली अधिकारी को प्रमाणित किए जाएंगे और वह कर वसूली अधिकारी की या व्यतिक्रमी की प्रेरणा पर इस अनुसूची में दी गर्इ प्रक्रिया के अधीन व्यतिक्रमी क्रेता से वसूलीय होंगे :

परन्तु ऐसा कोर्इ आवेदन तब तक ग्रहण नहीं किया जाएगा जब तक कि वह पुनर्विक्रय की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर दाखिल न किया गया हो।

विक्रय का स्थगन या रोका जाना

15. (1) कर वसूली अधिकारी, किसी विक्रय को किसी भी बताए गए दिन या समय के लिए स्वविवेकानुसार स्थगित कर सकेगा और ऐसे किसी विक्रय का संचालन करने वाला अधिकारी, ऐसे स्थगन के अपने कारणों को लेखबद्ध करते हुए, विक्रय को स्वविवेकानुसार स्थगित कर सकेगा :

परन्तु जहां विक्रय, कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में या उसकी प्रसीमाओं के भीतर आता है वहां ऐसा कोर्इ स्थगन कर वसूली अधिकारी की इजाजत के बिना नहीं किया जाएगा।

(2) जहां स्थावर सम्पत्ति का विक्रय उपनियम (1) के अधीन एक कलैंडर मास से लंबी अवधि के लिए स्थगित कर दिया जाता है, वहां इस अनुसूची के अधीन विक्रय की नर्इ उद्घोषणा की जाएगी जब तक कि व्यतिक्रमी उसके अधित्यजन के लिए सहमति न दे दे।

(3) यदि लाट के लिए बोली खत्म होने से पूर्व बकाया और खर्च (जिसके अंतर्गत विक्रय का खर्च भी है) विक्रय का संचालन करने वाले अधिकारी को दे दिए जाते हैं या उसके समाधानप्रद रूप में यह सबूत दे दिया जाता है कि ऐसी बकाया और खर्चों की रकम उस कर वसूली अधिकारी को दे दी गर्इ है जिसने विक्रय का आदेश दिया था, तो ऐसा हर विक्रय रोक दिया जाएगा।

कुछ दशाओं में प्राइवेट अन्यसंक्रामण का शून्य होना

16. (1) जहां व्यतिक्रमी पर नियम 2 के अधीन सूचना की तामील की गर्इ है, वहां व्यतिक्रमी या उसका हित प्रतिनिधि उसकी किसी सम्पत्ति को बंधक रखने, भारित करने, पट्टे पर देने या उसके संबंध में अन्यथा कार्रवार्इ करने के लिए कर वसूली अधिकारी की अनुज्ञा के बिना सक्षम नहीं होगा, और न कोर्इ सिविल न्यायालय धन के संदाय के लिए किसी बिक्री के निष्पादन में ऐसी सम्पत्ति के विरुद्ध कोर्इ आदेशिका निकालेगा।

(2) जहां इस अनुसूची के अधीन कोर्इ कुर्की की गर्इ है वहां कुर्क सम्पत्ति का या उसमें किसी हित का कोर्इ प्राइवेट अन्तरण या परिदान तथा किसी ऋण, लाभांश या अन्य धनों का व्यतिक्रमी को ऐसी कुर्की के प्रतिकूल कोर्इ भुगतान कुर्की के अधीन प्रवर्तनीय सभी दावों के मुकाबले शून्य होगा।

अधिकारी द्वारा बोली लगाने या क्रय करने पर प्रतिषेध

17. कोर्इ भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति जिसे इस अनुसूची के अधीन किसी विक्रय के संबंध में किसी कर्तव्य का पालन करना हो, बेची गर्इ सम्पत्ति में किसी हित के लिए प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: न तो बोली लगाएगा और न उसे अर्जित करेगा और न अर्जित करने का प्रयत्न करेगा।

छुट्टियों के दिन विक्रय का प्रतिषेध

18. इस अनुसूची के अधीन कोर्इ विक्रय, रविवार को या राज्य सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त अन्य साधारण अवकाश दिन को या किसी ऐसे दिन जो राज्य सरकार द्वारा उस क्षेत्र के लिए जिसमें विक्रय किया जाना है, स्थानीय छुट्टी के दिन के रूप में अधिसूचित किया गया है, नहीं किया जाएगा।

पुलिस सहायता

19. कोर्इ अधिकारी, जो किसी सम्पत्ति को, कुर्क करने या बेचने के लिए या व्यतिक्रमी को गिरफ्तार करने के लिए प्राधिकृत है या जिसे इस अनुसूची के अधीन किसी कर्तव्य का पालन करने का भार सौंपा गया है, निकटतम पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को ऐसी सहायता के लिए आवेदन कर सकेगा जो उसके कर्तव्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक हों और वह प्राधिकारी जिसे ऐसा आवेदन किया जाए ऐसी सहायता देने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस अधिकारी तैनात करेगा।

कर वसूली अधिकारी द्वारा कुछ कृत्यों का सौंपा जाना

19क. कर-वसूली अधिकारी संयुक्त आयुक्त के पूर्व अनुमोदन से कर वसूली अधिकारी के रूप में अपने कृत्यों में से किसी को अपने से निचली पंक्ति के किसी अन्य अधिकारी को (जो आय-कर निरीक्षक से निचली पंक्ति का नहीं है) सौंप सकेगा और ऐसा अधिकारी इस प्रकार सौंपे गए कृत्यों के संबंध में कर वसूली अधिकारी समझा जाएगा।

भाग 2

जंगम सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय

कुर्की

वारंट

20. इस अनुसूची में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, जब किसी जंगम सम्पत्ति को कुर्क किया जाना हो तो उस अधिकारी को कर वसूली अधिकारी (या उसके द्वारा इस निमित्त सशक्त अन्य अधिकारी) द्वारा एक वारंट दिया जाएगा जो लिखित रूप में और उसके नाम सहित हस्ताक्षरित होगा जिसमें व्यतिक्रमी का नाम और वसूल की जाने वाली रकम विनिर्दिष्ट होगी।

वारंट की प्रति की तामील

21. वह अधिकारी वारंट की एक प्रति की तामील व्यतिक्रमी पर करवायेगा।

कुर्की

22. यदि वारंट की प्रति की तामील के पश्चात् रकम तत्काल नहीं दी जाती है तो वह अधिकारी, व्यतिक्रमी की जंगम सम्पत्ति की कुर्की करने के लिए अग्रसर होगा।

व्यतिक्रमी के कब्जे में सम्पत्ति

23. जहां कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति (कृषि उपज से भिन्न) जंगम सम्पत्ति है, जो व्यतिक्रमी के कब्जे में है, वहां कुर्की वास्तविक अधिग्रहण द्वारा की जाएगी और वह अधिकारी सम्पत्ति को स्वयं अपनी अभिरक्षा में या अपने अधीनस्थों में से किसी एक की अभिरक्षा में रखेगा और उसकी ठीक अभिरक्षा के लिए उत्तरदायी होगा :

परन्तु जब अभिगृहीत सम्पत्ति शीघ्र और प्रकृति से क्षयशील हो या जब उसको अभिरक्षा में रखने का व्यय उसके मूल्य से अधिक होना संभाव्य हो तब वह अधिकारी उसको तुरन्त बेच सकेगा।

कृषि उपज

24. जहां कुर्क की जाने वाली सम्पत्ति कृषि उपज है, वहां कुर्की के वारंट की एक प्रति--

() उस दशा में जिसमें ऐसी उपज उगती फसल है उस भूमि पर जिसमें ऐसी फसल उगी हुर्इ है; अथवा

() उस दशा में जिसमें ऐसी उपज काटी जा चुकी है, या इकट्ठी की जा चुकी है, खलिहान में या अनाज गहाने के स्थान में या तदरूप स्थान में या चारे के ढेर पर, जिस पर या जिसमें वह जमा की गर्इ है,

लगाकर और अन्य प्रति उस घर के जिसमें व्यतिक्रमी मामूली तौर से रहता है, बाहरी द्वार पर या किसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर या कर वसूली अधिकारी की इजाजत से उस भवन के, जिसमें वह कारबार करता है, या अभिलाभ के लिए स्वयं काम करता है या जिसके बारे में यह ज्ञात है कि वहां वह अंतिम बार निवास करता था, या कारबार करता था या अभिलाभ के लिए स्वयं काम करता था, बाहरी द्वार पर या उसके किसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगा कर कुर्क की जाएगी। उस पर यह समझा जाएगा, कि उपज कर वसूली अधिकारी के कब्जे में आ गर्इ है।

कुर्की के अधीन कृषि उपज के बारे में उपबंध

25. (1) जहां कृषि उपज की कुर्की की गर्इ है वहां कर वसूली अधिकारी उसकी अभिरक्षा, निगरानी, देखभाल, कटार्इ और इकट्ठा करने के लिए ऐसा इंतजाम करेगा जैसा वह पर्याप्त समझें; और उसे ऐसे इन्तजाम के खर्च उठाने की शक्ति होगी।

(2) ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जो कुर्की के आदेश में या किसी पश्चात्वर्ती आदेश में कर वसूली अधिकारी द्वारा इस निमित्त अधिरोपित की जाएं, व्यतिक्रमी उपज की देखभाल कर सकेगा, उसे काट सकेगा, इकट्ठा कर सकेगा, भंडार में रख सकेगा, और उसके पकाने या परिरक्षण के लिए आवश्यक कोर्इ अन्य कार्य कर सकेगा और यदि व्यतिक्रमी ऐसे सब कार्यों को या उसमें किसी को करने में असफल रहे तो कर वसूली अधिकारी द्वारा इस निमित्त नियुक्त कोर्इ व्यक्ति ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए सब कार्यों या उनमें से किसी को करेगा और ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए खर्च व्यतिक्रमी से ऐसे वसूलीय होंगे मानो वे प्रमाणपत्र में सम्मिलित हों।

(3) उगती फसल के रूप में कुर्क की गर्इ कृषि उपज के बारे में केवल इस कारण कि वह काटकर जमीन से अलग कर ली गर्इ है, यह न समझा जाएगा कि वह कुर्की के अधीन नहीं रह गर्इ है या उसकी पुन: कुर्की करना अपेक्षित है।

(4) जहां उगती फसल की कुर्की का आदेश फसल काटे जाने या इकट्ठा किए जाने के लायक होने की संभावना से बहुत समय पूर्व दिया गया है वहां कर वसूली अधिकारी आदेश का निष्पादन ऐसे समय के लिए निलंबित कर सकेगा जैसा वह ठीक समझे और कुर्की के आदेश के लंबित रहने तक फसल हटाने को प्रतिषिद्ध करने वाला और आदेश अपने विवेकानुसार कर सकेगा।

(5) ऐसी उगती फसल जो अपनी प्रकृति के कारण संग्रह कर के रखने योग्य नहीं है, इस नियम के अधीन उस समय से बीस दिन से कम समय से पहले जिस समय उसके काटे जाने या इकट्ठी किए जाने लायक होने की संभावना है, कुर्क नहीं की जाएगी।

ऋण और शेयर आदि

26. (1) ऐसे ऋण की दशा में,–

() जो परक्राम्य लिखत के द्वारा प्रतिभूत नहीं है,

() किसी निगम की पूंजी में शेयर की दशा में, या

() किसी न्यायालय में जमा या उसकी अभिरक्षा में की सम्पत्ति के सिवाय किसी अन्य ऐसी जंगम सम्पत्ति की दशा में, जो व्यतिक्रमी के कब्जे में नहीं है,

कुर्की, लिखित आदेश द्वारा की जाएगी जिसके द्वारा–

(i) ऋण की दशा में–जब तक कर वसूली अधिकारी का अगला आदेश न हो, लेनदार को ऋण की वसूली करने से और ऋणी को उस ऋण को चुकाने से,

(ii) शेयर की दशा में–उस व्यक्ति को, जिसके नाम में शेयर उस समय दर्ज है, उसे अन्तरित करने से या उस पर लाभांश प्राप्त करने से,

(iii) (पूर्वोक्त को छोड़कर) अन्य जंगम संपत्ति की दशा में,–उस पर कब्जा रखने वाले व्यक्ति को उसे व्यतिक्रमी को देने से,

प्रतिषिद्ध किया जाएगा।

(2) ऐसे आदेश की एक प्रति कर-वसूली अधिकारी के कार्यालय के किसी सहजदृश्य भाग पर लगार्इ जाएगी और दूसरी प्रति, ऋण की दशा में ऋणी को, शेयर की दशा में निगम के उचित अधिकारी को और (पूर्वोक्त को छोड़कर) अन्य जंगम सम्पत्ति की दशा में उस पर काबिज व्यक्ति को, भेजी जाएगी।

(3) उपनियम (1) के खंड (i) के अधीन प्रतिषिद्ध ऋणी अपने ऋण की रकम कर वसूली अधिकारी को अदा कर सकेगा और ऐसे देने से वह उससे उसी प्रकार उन्मोचित हो जाएगा जैसे वह उसे पाने के हकदार पक्षकार को देने से होता।

डिक्री की कुर्की

27. (1) सिविल न्यायालय की, धन के भुगतान की या बंधक या भार के प्रवर्तन में विक्रय की डिक्री की कुर्की सिविल न्यायालय को यह अनुरोध करने वाली सूचना देने के बाद की जाएगी कि सिविल न्यायालय डिक्री का निष्पादन तब तक के लिए रोक दे जब तक कि–

(i) कर वसूली अधिकारी सूचना को रद्द न कर दे, अथवा

(ii) कर वसूली अधिकारी या व्यतिक्रमी ऐसी सूचना प्राप्त करने वाले न्यायालय से डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन न करे।

(2) जहां कोर्इ सिविल न्यायालय उपनियम (1) के खंड (ii) के अधीन आवेदन प्राप्त करता है, वहां कर-वसूली अधिकारी या व्यतिक्रमी के आवेदन पर और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कुर्क की गर्इ डिक्री के निष्पादन के लिए अग्रसर होगा और शुद्ध आगमों को प्रमाणपत्र की तुष्टि में लगाएगा।

(3) कर-वसूली अधिकारी को कुर्क की गर्इ डिक्री के धारक का प्रतिनिधि समझा जाएगा और ऐसी कुर्क की गर्इ डिक्री का निष्पादन किसी ऐसी रीति से कराने के लिए हकदार समझा जाएगा जो उसके धारक के लिए विधिपूर्ण हो।

जंगम संपत्ति में अंश

28. जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति, जंगम सम्पत्ति में व्यतिक्रमी के अंश या हित के रूप में है जो सहस्वामियों के रूप में उसकी और किसी अन्य की है, वहां कुर्की व्यतिक्रमी को, अपने अंश या हित का अन्तरण करने से या उसे किसी भी रूप में भारित करने से प्रतिषिद्ध करने वाली सूचना द्वारा की जाएगी।

सरकारी सेवकों का वेतन

29. सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के सेवकों के वेतन या भत्तों की कुर्की, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की प्रथम अनुसूची के आदेश 21 के नियम 48 द्वारा उपबंधित रीति में की जा सकेगी और उक्त नियम के उपबंध इस नियम के प्रयोजनों के लिए ऐसे उपांतरणों के अधीन रहते हुए लागू होंगे, जो आवश्यक हों।

परक्राम्य लिखत की कुर्की

30. जहां संपत्ति ऐसी परक्राम्य लिखत है जो न तो न्यायालय में जमा है और न लोक अधिकारी की अभिरक्षा में है, वहां कुर्की वास्तविक अधिग्रहण द्वारा की जाएगी और लिखत कर वसूली अधिकारी के समक्ष लार्इ जाएगी तथा उसके आदेशों के अधीन धारित रहेगी।

न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में संपत्ति की कुर्की

31. जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति किसी न्यायालय या लोक अधिकारी की अभिरक्षा में है वहां वह कुर्की ऐसे न्यायालय या अधिकारी से यह अनुरोध करने वाली सूचना द्वारा की जाएगी कि ऐसी संपत्ति और उस पर संदेय होने वाले किसी ब्याज या लाभांश उस कर वसूली अधिकारी के जिसने वह सूचना जारी की है, अतिरिक्त आदेशों के अधीन रहते हुए, धारित रखा जाए :

परन्तु जहां ऐसी संपत्ति किसी न्यायालय की अभिरक्षा में है, वहां हक या पूर्विकता के बारे में कोर्इ ऐसा प्रश्न, जो कर-वसूली अधिकारी के और किसी समुनदेशन या कुर्की के आधार पर या अन्यथा ऐसी सम्पत्ति में हितबद्ध होने का दावा करने वाले किसी ऐसे अन्य व्यक्ति के बीच पैदा हो, जो व्यतिक्रमी नहीं है, उस न्यायालय द्वारा तय किया जाएगा।

भागीदारों की संपत्ति की कुर्की

32. (1) जहां कुर्क की जाने वाली संपत्ति उस व्यतिक्रमी का हित है, जो भागीदारी संपत्ति में भागीदार है, वहां कर वसूली अधिकारी आदेश कर सकेगा कि प्रमाणपत्र के अधीन देय रकम देने का भार भागीदारी सम्पत्ति में ऐसे भागीदार के अंश और लाभ पर डाल दिया जाए और उसी या पश्चात्वर्ती आदेश से उन लाभों में, चाहे वे पहले ही घोषित किए जा चुके हों या प्रोद्भूत हो रहे हों, ऐसे भागीदार के अंश का और ऐसे किसी अन्य धन का, जो भागीदारी मद्दे उसे देय हो जाए रिसीवर नियुक्त कर सकेगा और लेखाओं तथा जांचों के लिए निदेश दे सकेगा और ऐसे हित के विक्रय के लिए आदेश कर सकेगा या ऐसे अन्य आदेश कर सकेगा जैसे मामले की परिस्थितियों में अपेक्षित हों।

(2) अन्य व्यक्तियों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे किसी भी समय भारित हित का मोचन कर लें या विक्रय का निदेश किए जाने की दशा में उसे खरीद लें।

तालिका

33. वास्तविक अभिग्रहण द्वारा जंगम सम्पत्ति की कुर्की की दशा में, वह अधिकारी, सम्पत्ति की कुर्की के पश्चात् कुर्क की गर्इ सारी सम्पत्ति की तालिका तैयार करेगा जिसमें वह स्थान विनिर्दिष्ट होगा जहां वह जमा की गर्इ है या रखी गर्इ है और उसे कर वसूली अधिकारी के पास भेजेगा और तालिका की एक प्रति अधिकारी द्वारा व्यतिक्रमी को दी जाएगी।

कुर्की का अत्यधिक न होना

34. अभिग्रहण द्वारा कुर्की अत्यधिक नहीं होगी, अर्थात् कुर्क की गर्इ सम्पत्ति वारंट में विनिर्दिष्ट रकम के यथासम्भव निकट अनुपात में होगी।

सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच अभिग्रहण

35. अभिग्रहण द्वारा कुर्की सूर्योदय के पश्चात् और सूर्यास्त से पूर्व की जाएगी, न कि अन्यथा।

दरवाजों, आदि को तोड़कर खोलने की शक्ति

36. वह अधिकारी किसी जंगम सम्पत्ति को अभिगृहीत करने के लिए किसी भवन के भीतर या बाहरी दरवाजे या खिड़की तोड़कर खोल सकेगा और उसमें प्रवेश कर सकेगा यदि उस अधिकारी के पास यह विश्वास करने के लिए युक्तियुक्त आधार है कि उस भवन में ऐसी सम्पत्ति है, जो वारण्ट के अधीन अभिगृहीत की जानी है, और अधिकारी ने अपना प्राधिकार और यह आशय कि यदि प्रवेश न दिया गया तो वह तोड़ कर खोलेगा अधिसूचित कर दिया है, किंतु वह महिलाओं को वहां से हट जाने का पूरा युक्तियुक्त अवसर देगा।

विक्रय

विक्रय

37. कर वसूली अधिकारी निदेश दे सकेगा कि इस अनुसूची के अधीन कुर्क की गर्इ किसी जंगम सम्पत्ति का या उसके ऐसे भाग का, जो प्रमाणपत्र की तुष्टि के लिए आवश्यक प्रतीत हो, विक्रय किया जाएगा।

उद्घोषणा करना

38. जब कर वसूली अधिकारी द्वारा जंगम सम्पत्ति बेचे जाने का आदेश किया गया हो तब कर वसूली अधिकारी विक्रय का समय और स्थान और यह कि विक्रय पुष्टि के अधीन है या नहीं बताते हुए आशयित जिले की भाषा में विक्रय की उद्घोषणा करेगा।

उद्घोषणा कैसे की जाएगी

39. (1) ऐसी उद्घोषणा डोंडी पिटवाकर या अन्य रूढ़िगत ढंग से--

() वास्तविक अभिग्रहण द्वारा, कुर्क की गर्इ सम्पत्ति की दशा में,--

(i) उस ग्राम में की जाएगी जिसमें सम्पत्ति का अभिग्रहण किया गया था अथवा यदि सम्पत्ति किसी शहर या नगर में अभिगृहीत की गर्इ थी, तो उस स्थानीय क्षेत्र में की जाएगी जिसमें वह अभिगृहीत की गर्इ थी; और

(ii) ऐसे अन्य स्थानों पर की जाएगी जिसे कर वसूली अधिकारी विनिर्दिष्ट करे;

() वास्तविक अभिग्रहण से भिन्न रूप में कुर्क की गर्इ सम्पत्ति की दशा में ऐसे स्थानों में, यदि कोर्इ हो, की जाएगी जिसे कर वसूली अधिकारी विनिर्दिष्ट करे।

(2) उद्घोषणा की एक प्रति कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के किसी सहजदृश्य भाग में भी लगार्इ जाएगी।

पन्द्रह दिनों के पश्चात् विक्रय

40. वहां के सिवाय जहां सम्पत्ति शीघ्र और प्रकृति से क्षयशील है, या जब उसे अभिरक्षा में रखने का व्यय उसके मूल्य से अधिक होना सम्भाव्य हो तब इस अनुसूची के अधीन जंगम सम्पत्ति का कोर्इ विक्रय व्यतिक्रमी की लिखित सहमति के बिना तब तक न होगा जब तक कि उस तारीख से, जिसको विक्रय उद्घोषणा की प्रति कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में लगार्इ गर्इ थी, कम से कम पंद्रह दिन न बीत जाएं।

कृषि उपज का विक्रय

41. (1) जहां बेची जाने वाली सम्पत्ति कृषि उपज है, वहां विक्रय–

() यदि ऐसी उपज फसल है तो उस भूमि पर या उसके पास किया जाएगा जिसमें ऐसी फसल उगी हुर्इ है, अथवा

() यदि ऐसी उपज काटी या इकट्ठी की जा चुकी है, तो उस खलिहान में या अनाज गाहने के स्थान या उस जैसे स्थान, या चारे के ढेर पर जिस पर या जिसमें वह जमा की गर्इ है या उसके पास किया जाएगा:

परन्तु यदि कर वसूली अधिकारी की यह राय हो कि वैसा करने से उपज अधिक फायदे से बेची जा सकती है, तो वह यह निदेश दे सकेगा कि विक्रय निकटतम सार्वजनिक स्थान पर किया जाए।

(2) जहां उपज विक्रय के लिए रखे जाने पर–

() विक्रय करने वाले व्यक्ति के अनुमान से उसके लिए उचित मूल्य की बोली नहीं लगार्इ गर्इ है, तथा

() उस उपज का स्वामी या उसकी ओर से कार्य करने के लिए प्राधिकृत व्यक्ति विक्रय अगले दिन तक था यदि विक्रय के स्थान पर कोर्इ बाजार लगता है, तो बाजार लगने के अगले दिन तक मुल्तवी करने के लिए आवेदन करता है;

वहां विक्रय तदनुसार मुल्तवी कर दिया जाएगा, और तत्पश्चात्, उपज के लिए कोर्इ भी कीमत लगे, वह पूरा कर दिया जाएगा।

उगती फसलों के संबंध में विशेष उपबंध

42. (1) जहां बेची जाने वाली सम्पत्ति उगती फसल है और फसल की प्रकृति से ऐसी है, जो भंडार में रखी जानी चाहिए किंतु अब तक भण्डार में नहीं रखी गर्इ है, वहां विक्रय का दिन ऐसे नियत किया जाएगा कि उस दिन के आने से पहले वह भण्डार में रखने के योग्य हो जाए और विक्रय तब तक नहीं किया जाएगा जब तक फसल काटी न जाए या इकट्ठी न कर ली जाए और भंडार में रखने के योग्य न हो जाए।

(2) जहां फसल अपनी प्रकृति से ऐसी नहीं है, जो भण्डार में रखने योग्य हो या अपरिपक्व दशा में (उदाहरणार्थ हरा गेहूं) अधिक लाभप्रद रूप में बेची जा सके, वहां वह काटी जाने और इकट्ठी की जाने से पहले बेची जा सकेगी और क्रेता भूमि पर प्रवेश करने और देखभाल करने या काटने या इकट्ठी करने के प्रयोजन से सब आवश्यक बातें करने का हकदार होगा।

विक्रय नीलामी द्वारा किया जाना

43. सम्पत्ति लोक नीलामी द्वारा एक या अधिक लाटों में, जैसी अधिकारी उचित समझे, बेची जाएगी और यदि विक्रय से वसूल की जाने वाली रकम की पूर्ति सम्पत्ति के किसी भाग के विक्रय से हो जाती है, तो बाकी लाटों का विक्रय तुरंत रोक दिया जाएगा।

लोक नीलामी द्वारा विक्रय

44. (1) जहां जंगम सम्पत्ति लोक नीलामी द्वारा बेची जाती है, वहां प्रत्येक लाट का मूल्य विक्रय के समय संदत्त किया जाएगा या उसके पश्चात् शीघ्र ही उस समय किया जाएगा जिस समय वह अधिकारी निदेश दे, जो विक्रय करा रहा है, और मूल्य देने में व्यतिक्रम होने पर सम्पत्ति उसी क्षण फिर बेच दी जाएगी।

(2) क्रय-धन दिए जाने पर विक्रय कराने वाला अधिकारी एक प्रमाणपत्र देगा जिसमें खरीदी गर्इ सम्पत्ति, संदत्त की गर्इ कीमत और क्रेता का नाम लिखा होगा तथा विक्रय अंतिम हो जाएगा।

(3) जहां बेची जाने वाली जंगम सम्पत्ति ऐसे माल में एक अंश है, जो व्यतिक्रमी और सह-स्वामी है व्यक्तियों का और दो या अधिक जिनमें से एक ऐसा सह-स्वामी है, क्रमश: ऐसी सम्पत्ति या उसके किसी लाट के लिए एक ही राशि की बोली लगाते हैं, वहां बोली उस सह-स्वामी की बोली समझी जाएगी।

अनियमितता विक्रय को दूषित नहीं करेगी किंतु कोर्इ व्यक्ति जिसे क्षति हुर्इ है, वाद ला सकेगा

45. जंगम सम्पत्ति के विक्रय के प्रकाशन या संचालन की कोर्इ अनियमितता विक्रय को दूषित नहीं करेगी किंतु जिस व्यक्ति को कोर्इ सारवान् क्षति ऐसी अनियमितता के कारण किसी अन्य व्यक्ति द्वारा हुर्इ है, वह उसके विरुद्ध प्रतिकर के लिए या (यदि ऐसा अन्य व्यक्ति क्रेता है, तो) उसी सम्पत्ति की वसूली के लिए और ऐसी वसूली में व्यतिक्रम होने पर प्रतिकर के लिए वाद ला सकेगा।

परक्राम्य लिखत और निगम में शेयर

46. इस अनुसूची में किसी बात के होते हुए भी, जहां बेची जाने वाली सम्पत्ति परक्राम्य लिखत है या निगम में शेयर है वहां कर वसूली अधिकारी लोक नीलामी द्वारा विक्रय का निदेश देने के स्थान पर, ऐसी लिखत या शेयर का विक्रय दलाल के माध्यम से प्राधिकृत कर सकेगा।

निर्धारण अधिकारी को सिक्के या करेंसी नोट दिए जाने का आदेश

47. जहां कुर्क की गर्इ सम्पत्ति, चालू सिक्का या करेंसी नोट हैं वहां कर वसूली अधिकारी कुर्की के जारी रहने के दौरान किसी भी समय यह निदेश दे सकेगा कि ऐसे सिक्के या ऐसे नोट केन्द्रीय सरकार के नाम से जमा किए जायेंगे और इस प्रकार जमा की गर्इ रकम के बारे में नियम 8 में दी गर्इ रीति से कार्यवाही की जाएगी।

भाग 3

स्थावर सम्पत्ति की कुर्की और विक्रय

कुर्की

कुर्की

48. व्यतिक्रमी की स्थावर संपत्ति की कुर्की ऐसे आदेश द्वारा की जाएगी जो संपत्ति को किसी प्रकार से अन्तरित या प्रभारित करने से व्यतिक्रमी को प्रतिषिद्ध करता है, और ऐसे अन्तरण या प्रभार से कोर्इ भी फायदा उठाने से सब व्यक्तियों को प्रतिषिद्ध करता है।

कुर्की की सूचना की तामील

49. कुर्की के आदेश की एक प्रति व्यतिक्रमी पर तामील की जाएगी।

कुर्की की उद्घोषणा

50. कुर्की का आदेश, कुर्क की गर्इ संपत्ति में या उसके पास के स्थान पर डोंडी पिटवाकर या अन्य रूढ़िगत ढंग से उद्घोषित किया जाएगा और आदेश की एक प्रति संपत्ति के किसी सहजदृश्य भाग पर और कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगायी जाएगी।

कुर्की सूचना की तामील की तारीख से हुर्इ मानी जानी

51. जहां इस अनुसूची के अधीन कोर्इ स्थावर संपत्ति कुर्क की जाती है वहां कुर्की उस तारीख को हुर्इ मानी जाएगी और प्रभावी होगी जिसको इस अनुसूची के अधीन बकाया देने के लिए निकाली गयी सूचना की व्यतिक्रमी पर तामील हुर्इ थी।

विक्रय

विक्रय और विक्रय उद्घोषणा

52. (1) कर वसूली अधिकारी निदेश दे सकेगा कि ऐसी कोर्इ स्थावर संपत्ति, जिसकी कुर्की की गर्इ है या उसका ऐसा भाग जो प्रमाणपत्र की तुष्टि के लिए आवश्यक प्रतीत हो, बेची जाएगी।

(2) जहां किसी स्थावर संपत्ति को बेचने का आदेश किया गया है, वहां कर वसूली अधिकारी आशयित विक्रय की उद्घोषणा जिले की भाषा में कराएगा।

उद्घोषणा की विषय-वस्तु

53. स्थावर संपत्ति के विक्रय की उद्घोषणा व्यतिक्रमी को सूचना के पश्चात् लेखबद्ध की जाएगी और उसमें विक्रय का समय और स्थान विनिर्दिष्ट होगा, और निम्नलिखित बातें यथासंभव साफ-साफ और सही-सही विनिर्दिष्ट होंगी,–

() वह सम्पत्ति जो बेची जानी है;

() संपत्ति या उसके किसी भाग पर निर्धारित राजस्व, यदि कोर्इ हो;

() वह रकम जिसकी वसूली के लिए विक्रय का आदेश किया गया है;

(गग) वह आरक्षित कीमत, यदि कोर्इ हो, जिससे कम पर संपत्ति बेची नहीं जा सकेगी; तथा

() कोर्इ अन्य बात, जिसके बारे में कर वसूली अधिकारी का विचार हो कि संपत्ति की प्रकृति और मूल्य आंकने के लिए उसकी जानकारी क्रेता के लिए तात्विक है।

उद्घोषणा करने का ढंग

54. (1) स्थावर संपत्ति के विक्रय के लिए हर उद्घोषणा ऐसी संपत्ति में के या उसके समीप किसी स्थान पर डोंडी पिटवाकर या अन्य रूढ़िगत ढंग से की जाएगी तथा उद्घोषणा की एक प्रति ऐसी संपत्ति के किसी सहज दृश्य भाग पर और कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के भी किसी सहजदृश्य भाग पर लगार्इ जाएगी।

(2) जहां कर वसूली अधिकारी ऐसा निदेश देता है, वहां ऐसी उद्घोषणा राजपत्र में या स्थानीय समाचार-पत्र में, या दोनों में, प्रकाशित भी की जाएगी तथा ऐसे प्रकाशन के खर्च विक्रय के खर्च समझे जाएंगे।

(3) जहां संपत्ति पृथक् रूप से बेचे जाने के प्रयोजन से लाटों में विभाजित की गर्इ है, वहां हर एक लाट के लिए पृथक् उद्घोषणा करना आवश्यक नहीं होगा जब तक कि कर वसूली अधिकारी की यह राय न हों कि विक्रय की उचित सूचना अन्यथा नहीं दी जा सकती।

विक्रय का समय

55. स्थावर संपत्ति का इस अनुसूची के अधीन कोर्इ भी विक्रय, व्यतिक्रमी की लिखित सम्मति के बिना तब तक नहीं होगा जब तक कि उस तारीख से जिसको उद्घोषणा की प्रति संपत्ति पर या कर वसूली अधिकारी के कार्यालय में लगायी गयी हो इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, उससे परिकलित कम से कम तीस दिन न बीत गए हों।

विक्रय नीलामी द्वारा किया जाना

56. विक्रय लोक नीलामी द्वारा सबसे ऊंची बोली लगाने वाले के पक्ष में किया जाएगा और कर वसूली अधिकारी द्वारा पुष्टि के अधीन होगा :

परन्तु इस नियम के अधीन कोर्इ विक्रय नहीं किया जाएगा यदि अधिकतम बोली लगाने वाले द्वारा लगार्इ गर्इ बोली नियम 53 के खंड (गग) के अधीन आरक्षित कीमत से, यदि कोर्इ हो, कम है।

क्रेता द्वारा निक्षेप और उसके व्यतिक्रम होने पर पुन: विक्रय

57. (1) स्थावर संपत्ति के हर विक्रय पर, वह व्यक्ति जो क्रेता घोषित किया गया है, अपने क्रय धन के पच्चीस प्रतिशत का निक्षेप विक्रय का संचालन करने वाले अधिकारी की ऐसी घोषणा के तुरंत पश्चात् देगा और ऐसा निक्षेप करने में व्यतिक्रम होने पर वह संपत्ति तत्क्षण पुन: बेची जाएगी।

(2) क्रय-धन की देय पूरी रकम क्रेता द्वारा संपत्ति के विक्रय की तारीख के पंद्रहवें दिन या उसके पूर्व कर वसूली अधिकारी को दी जाएगी।

संदाय में व्यतिक्रम होने पर प्रक्रिया

58. पूर्ववर्ती नियम में वर्णित अवधि के भीतर संदाय करने में व्यतिक्रम होने पर निक्षेप, यदि कर वसूली अधिकारी ठीक समझे, विक्रय खर्च की कटौती करने के पश्चात् सरकार को समपहृत हो सकेगा और सम्पत्ति फिर से बेची जाएगी और उस सम्पत्ति पर या जिस राशि के लिए वह तत्पश्चात् बेची जाए उसके किसी भाग पर व्यतिक्रम करने वाले क्रेता के सब दावे समपहृत हो जाएंगे।

बोली लगाने का प्राधिकार

59. (1) जहां उस संपत्ति का, जिसके लिए नियम 53 के खंड (गग) के अधीन आरक्षित कीमत विनिर्दिष्ट की गर्इ है, विक्रय ऐसी आरक्षित कीमत से अन्यून रकम की बोली के अभाव में स्थगित किया गया है, वहां यदि प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए तो, निर्धारण अधिकारी के लिए यह विधिपूर्ण होगा कि वह किसी पश्चात्वर्ती विक्रय में केन्द्रीय सरकार की ओर से संपत्ति के लिए बोली लगाए।

(2) ऐसे सब व्यक्तियों से जो किसी विक्रय पर बोली लगा रहे हैं, यह घोषित करने की अपेक्षा की जाएगी कि क्या वे अपनी ओर से या अपने प्रधानों की ओर से बोली लगा रहे हैं। पश्चात् कथित दशा में, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वह अपना प्राधिकार पत्र जमा करें, और उसके अभाव में, उनकी बोलियों को नामंजूर कर दिया जाएगा।

(3) जहां उपनियम (1) में निर्दिष्ट निर्धारण अधिकारी किसी पश्चात्वर्ती विक्रय में सम्पत्ति का क्रेता घोषित किया जाता है, वहां नियम 57 की कोर्इ बात उस मामले में लागू नहीं होगी और क्रय कीमत की रकम प्रमाणपत्र में विनिर्दिष्ट रकम में समायोजित की जाएगी।

निक्षेप करने पर स्थावर संपत्ति के विक्रय को अपास्त करने के लिए आवेदन

60. (1) जहां स्थावर संपत्ति किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में विक्रीत की गयी है, वहां व्यतिक्रमी या कोर्इ ऐसा व्यक्ति, जिसके हितों पर विक्रय से प्रभाव पड़ता है, विक्रय की तारीख से तीस दिन के भीतर किसी भी समय, कर-वसूली अधिकारी को आवेदन कर सकेगा कि उसके निम्नलिखित जमा कर दिए जाने पर विक्रय अपास्त कर दिया जाएगा–

() विक्रय की उद्घोषणा में ऐसी रकम के रूप में, जिसकी वसूली के लिए विक्रय का आदेश दिया गया था, विनिर्दिष्ट रकम, उस पर विक्रय की उद्घोषणा की तारीख से उस तारीख तक जब तक कि निक्षेप किया गया, प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए एक सही एक बटा चार प्रतिशत की दर से परिकलित ब्याज सहित; तथा

() क्रय धन के पांच प्रतिशत के बराबर किन्तु एक रुपए से कम न होने वाली राशि शास्ति के रूप में, क्रेता को देने के लिए।

(2) जहां कोर्इ व्यक्ति अपनी स्थावर सम्पत्ति के विक्रय को अपास्त कराने के लिए आवेदन नियम 61 के अधीन करता है, वहां जब तक कि वह उस आवेदन को वापस न ले, वह इस नियम के अधीन आवेदन देने का या उसे आगे चलाने का हकदार नहीं होगा।

स्थावर संपत्ति के विक्रय की सूचना की तामील न होने या अनियमितता के आधार पर अपास्त कराने के लिए आवेदन

61. जहां कोर्इ स्थावर सम्पत्ति किसी प्रमाणपत्र के निष्पादन में बेची गयी है, वहां ऐसा आय-कर अधिकारी जो प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, व्यतिक्रमी या कोर्इ ऐसा व्यक्ति, जिसके हितों पर विक्रय से प्रभाव पड़ता है, विक्रय की तारीख से तीस दिन के भीतर किसी भी समय, स्थावर सम्पत्ति के विक्रय को इस आधार पर कि बकाया देने के लिए व्यतिक्रमी पर इस अनुसूची द्वारा अपेक्षित सूचना की तामील नहीं हुर्इ थी, या इस आधार पर कि विक्रय के प्रकाशन या संचालन में तात्विक अनियमितता हुर्इ है, अपास्त कराने के लिए कर वसूली अधिकारी को आवेदन कर सकेगा :

परन्तु

() कोर्इ विक्रय किसी ऐसे आधार पर अपास्त नहीं किया जाएगा जब तक कि कर वसूली अधिकारी का समाधान नहीं हो जाता है कि तामील न होने या अनियमितता के कारण आवेदक को सारवान क्षति हुर्इ है; और

() इस नियम के अधीन व्यतिक्रमी द्वारा किया आवेदन तब तक मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक कि आवेदक प्रमाणपत्र के निष्पादन में उससे वसूलीय रकम जमा नहीं कर देता है।

विक्रय अपास्त किया जाना जहां व्यतिक्रमी का कोर्इ विक्रय हित नहीं है

62. विक्रय के तीस दिन के भीतर किसी भी समय क्रेता इस आधार पर कि बेची गर्इ संपत्ति में व्यतिक्रमी का कोर्इ विक्रय हित नहीं था, विक्रय को अपास्त कराने के लिए कर-वसूली अधिकारी को आवेदन कर सकेगा।

विक्रय की पुष्टि

63. (1) जहां पूर्वगामी नियमों के अधीन विक्रय को अपास्त कराने के लिए कोर्इ आवेदन नहीं किया गया है, यहां ऐसा आवेदन किया गया है, और कर वसूली अधिकारी द्वारा उसे नामंजूर किया गया है, वहां कर वसूली अधिकारी (यदि क्रय-धन की पूरी रकम दे दी गर्इ है), विक्रय को पुष्ट करने वाला आदेश करेगा और तब विक्रय अन्तिम हो जाएगा।

(2) जहां ऐसा आवेदन किया गया है और मंजूर किया गया है और जहां, उस दशा में, जिसमें रकम के तथा शास्ति और प्रभारों के निक्षेप पर विक्रय अपास्त कराने के लिए आवेदन किया गया है, निक्षेप, विक्रय की तारीख से तीस दिन के भीतर कर दिया गया है, वहां कर-वसूली अधिकारी विक्रय को अपास्त करने वाला आदेश करेगा :

परन्तु जब तक आवेदन की सूचना उससे प्रभावित व्यक्तियों को न दे दी जाए ऐसा कोर्इ आदेश नहीं किया जाएगा।

कुछ दशाओं में क्रय धन की वापसी

64. जहां स्थावर संपत्ति का विक्रय अपास्त कर दिया गया है, वहां क्रय के लेखे क्रेता द्वारा अदा या जमा कोर्इ धन, ऐसी शास्ति, यदि कोर्इ हो, जो क्रेता को संदत्त की जाने के लिए जमा की गयी हो तथा ऐसे ब्याज सहित, जो कर-वसूली अधिकारी मंजूर करे, क्रेता को दिया जाएगा।

विक्रय प्रमाणपत्र

65. (1) जहां स्थावर सम्पत्ति का विक्रय अंतिम हो गया हो वहां कर वसूली अधिकारी बेची गर्इ संपत्ति को और विक्रय के समय, जिस व्यक्ति को क्रेता घोषित किया गया है, उसके नाम को विनिर्दिष्ट करने वाला प्रमाणपत्र देगा।

(2) ऐसे प्रमाणपत्र में यह तारीख लिखी होगी जिसको विक्रय अंतिम हुआ है।

व्यतिक्रमी को प्रमाणपत्र के अधीन देय रकम जुटाने में समर्थ बनाने के लिए विक्रय मुल्तवी किया जाना

66. (1) जहां स्थावर सम्पत्ति के विक्रय के लिए आदेश किया जा चुका है वहां यदि व्यतिक्रमी कर वसूली अधिकारी का समाधान कर दे कि यह विश्वास करने के लिए कारण है कि प्रमाणपत्र की रकम ऐसी संपत्ति या उसके किसी भाग के या व्यतिक्रमी किसी अन्य स्थावर सम्पत्ति के बंधक या पट्टे या प्राइवेट विक्रय द्वारा जुटार्इ जा सकती है, तो उसके आवेदन करने पर कर वसूली अधिकारी, विक्रय के आदेश में समाविष्ट संपत्ति के विक्रय को ऐसी शर्तों पर और ऐसी अवधि के लिए, जो वह उचित समझे, इसलिए मुल्तवी कर सकेगा कि, वह उस रकम को जुटाने में समर्थ हो सके।

(2) ऐसी दशा में, कर वसूली अधिकारी व्यतिक्रमी को ऐसा प्रमाणपत्र देगा जो उसमें वर्णित अवधि के भीतर और इस अनुसूची में किसी बात के होते हुए भी प्रस्तावित बंधक, पट्टा या विक्रय करने के लिए उसे प्राधिकृत करता है :

परन्तु ऐसे बंधक, पट्टे या विक्रय के अधीन संदेय समस्त धन, कर वसूली अधिकारी को न कि व्यतिक्रमी को दिया जाएगा :

परन्तुयह भी कि इस नियम के अधीन कोर्इ बंधक, पट्टा या विक्रय तब तक अंतिम नहीं होगा जब तक वह कर वसूली अधिकारी द्वारा पुष्ट न कर दिया जाए।

पुनर्विक्रय के पूर्व नर्इ उद्घोषणा

67. स्थावर सम्पत्ति का हर पुनर्विक्रय, जो क्रय धन का भुगतान उस समय के भीतर करने में, जो ऐसे भुगतान के लिए अनुज्ञात है, व्यतिक्रम के कारण होता है, ऐसी रीति से और ऐसी अवधि के लिए जो इसके पूर्व उपबंधित है, नर्इ उद्घोषणा निकालने के पश्चात् किया जाएगा।

सह-अंशधारी की बोली को अधिमान प्राप्त होना

68. जहां बेची जाने वाली संपत्ति अविभक्त स्थावर संपत्ति का अंश है, और दो या अधिक व्यक्ति, जिनमें एक सह-अंशधारी है क्रमश: ऐसी संपत्ति या उसके किसी लाट के लिए एक ही राशि की बोली लगाते हैं, वहां वह बोली उस सह-अंशधारी की बोली समझी जाएगी।

व्यतिक्रमी से शोध्य रकम की तुष्टि में सम्पत्ति को स्वीकार करना

68क. (1) इस भाग के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इस निमित्त प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा सम्यक्त: प्राधिकृत निर्धारण अधिकारी सम्पत्ति के व्यतिक्रमी से शोध्य सम्पूर्ण रकम या उसके किसी भाग की तुष्टि में वह सम्पत्ति, जिसका विक्रय नियम 59 के उपनियम (1) में उपवर्णित कारण से स्थगित किया गया है, ऐसी कीमत पर प्राप्त कर सकता है, जो निर्धारण अधिकारी और व्यतिक्रमी के बीच करार पार्इ जाए।

(2) जहां उपनियम (1) के अधीन कोर्इ सम्पत्ति स्वीकार की जाती है और व्यतिक्रमी ऐसी सम्पत्ति का कब्जा निर्धारण अधिकारी को दे देता है वहां उस तारीख को, जिसको संपत्ति का कब्जा निर्धारण अधिकारी को दिया जाता है, वह सम्पत्ति केन्द्रीय सरकार में निहित हो जाएगी और केन्द्रीय सरकार, जहां आवश्यक हो, वहां रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का 16) के अधीन नियुक्त संबंधित रजिस्ट्रीकर्ता अधिकारी को तदनुसार संसूचित करेगी।

(3) जहां उपनियम (1) के अधीन सम्पत्ति की करार पार्इ गर्इ कीमत व्यतिक्रमी से शोध्य रकम से अधिक है, वहां निर्धारण अधिकारी द्वारा ऐसा आधिक्य व्यतिक्रमी को संपत्ति के कब्जे के परिदान की तारीख से तीन मास की अवधि के भीतर अदा किया जाएगा और जहां निर्धारण अधिकारी पूर्वोक्त अवधि के भीतर ऐसे आधिक्य को अदा करने में असफल रहता है वहां केन्द्रीय सरकार, ऐसी अवधि की समाप्ति से प्रारम्भ होने वाली और बाकी रकम देने की तारीख को समाप्त होने वाली अवधि के लिए ऐसी रकम पर व्यतिक्रमी को प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए आधा प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज देगी।

कुर्क की गर्इ स्थावर सम्पत्ति के विक्रय के लिए समय-सीमा

68ख. (1) स्थावर सम्पत्ति का, इस भाग के अधीन, कोर्इ भी विक्रय उस वित्तीय वर्ष के अंत से तीन वर्ष की समाप्ति के पश्चात् नहीं किया जाएगा, जिसमें वह आदेश, जिसमें किसी ऐसे कर, ब्याज, जुर्माने, शास्ति या किसी अन्य राशि की, जिसकी वसूली के लिए स्थावर सम्पत्ति कुर्क की गर्इ है, मांग पैदा होती है, धारा 245झ के उपबंधों के अधीन निश्चायक हो गया है या अध्याय 20 के उपबंधों के अनुसार अंतिम हो गया है :

परन्तु जहां स्थावर सम्पत्ति का, अधिकतम बोली की रकम के आरक्षित कीमत से कम होने के कारण अथवा नियम 57 या नियम 58 में उल्लिखित परिस्थितियों में पुन: विक्रय किया जाना अपेक्षित है अथवा जहां ऐसा विक्रय नियम 61 के अधीन अपास्त कर दिया जाता है, वहां स्थावर सम्पत्ति के विक्रय के लिए पूर्वोक्त समय सीमा एक वर्ष बढ़ जाएगी।

(2) उपनियम (1) के अधीन परिसीमाकाल की गणना करने में, वह अवधि छोड़ दी जाएगी–

(i) जिसके दौरान पूर्वोक्त कर, ब्याज, जुर्माने, शास्ति या किसी अन्य राशि का उद्ग्रहण किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश से रोक दिया जाता है; या

(ii) जिसके दौरान स्थावर सम्पत्ति की कुर्की या विक्रय की कार्यवाहियां किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश से रोक दी जाती है; या

(iii) जो कर वसूली अधिकारी द्वारा इस अनुसूची के अधीन पारित आदेश के विरुद्ध कोर्इ अपील प्रस्तुत करने की तारीख से प्रारम्भ होती है और अपील का विनिश्चय किए जाने की तारीख को समाप्त होती है :

परन्तु जहां पूर्वोक्त अवधि अलग करने के ठीक पश्चात् स्थावर सम्पत्ति के विक्रय के लिए परिसीमा काल 180 दिन से कम है, वहां ऐसी शेष अवधि बढ़ाकर 180 दिन कर दी जाएगी और पूर्वोक्त परिसीमा काल के बारे में यह समझा जाएगा कि वह तद्नुसार बढ़ा दिया गया है।

(3) जहां कोर्इ स्थावर सम्पत्ति 1 जून, 1992 के पूर्व इस भाग के अधीन कुर्क की गर्इ है और यह आदेश, जिससे किसी कर, ब्याज, जुर्माने, शास्ति या किसी अन्य राशि की, जिसकी वसूली के लिए स्थावर सम्पत्ति कुर्क की गर्इ है, मांग पैदा होती है, उक्त तारीख के पूर्व निश्चायक या अंतिम भी हो गया है, वहां उस तारीख के बारे में यह समझा जाएगा कि वह ऐसी तारीख है, जिसको उक्त आदेश, यथास्थिति, निश्चायक या अन्तिम बन गया है।

(4) जहां स्थावर संपत्ति का विक्रय उपनियम (1) के उपबंधों के अनुसार नहीं किया जाता है, वहां उक्त संपत्ति से संबंधित कुर्की आदेश के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस नियम में विनिर्दिष्ट परिसीमाकाल की समाप्ति पर रद्द हो गया है।

भाग 4

रिसीवर की नियुक्ति

कारबार के लिए रिसीवर की नियुक्ति

69. (1) जहां व्यतिक्रमी की संपत्ति कारबार के रूप में है, वहां कर वसूली अधिकारी ऐसे कारबार की कुर्की कर सकेगा और उस कारबार का प्रबंध करने के लिए किसी व्यक्ति को रिसीवर नियुक्त कर सकेगा।

(2) इस नियम के अधीन किसी कारबार की कुर्की ऐसे आदेश द्वारा की जाएगी जो व्यतिक्रमी को ऐसे कारबार को किसी भी प्रकार अन्तरित करने या प्रभारित करने से प्रतिषिद्ध करता है और सब व्यक्तियों को ऐसे अंतरण या प्रभार के अधीन कोर्इ फायदा लेने से प्रतिषिद्ध करता है, तथा यह प्रज्ञापित करता है कि उस कारबार की उस नियम के अधीन कुर्की कर ली गयी है कुर्की आदेश की एक प्रति व्यतिक्रमी पर तामील की जाएगी और एक और प्रति उस परिसर के, जिसमें वह कारबार चलाया जाता है, किसी सहजदृश्य भाग में तथा कर वसूली अधिकारी के कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर लगा दी जाएगी।

स्थावर सम्पत्ति के लिए रिसीवर की नियुक्ति

70. जहां स्थावर सम्पत्ति की कुर्की की जाती है, वहां कर वसूली अधिकारी, ऐसी सम्पत्ति बेचने का निदेश करने के बजाय, ऐसी सम्पत्ति का प्रबंध करने के लिए किसी व्यक्ति को रिसीवर नियुक्त कर सकेगा।

रिसीवर की शक्तियां

71. (1) जहां पूर्वगामी नियमों के अधीन किसी कारबार या अन्य सम्पत्ति की कुर्की की जाती है और उसका प्रबंध ले लिया जाता है, वहां रिसीवर को, कर वसूली अधिकारी के नियंत्रण के अधीन रहते हुए, ऐसी शक्तियां होंगी जैसी उस सम्पत्ति के समुचित प्रबंध और उसके लाभों अथवा किराए और लाभों की वसूली के लिए आवश्यक हों।

(2) ऐसे कारबार या अन्य सम्पत्ति के लाभों अथवा किराए और लाभों के प्रबंधन के व्यय चुकाने के पश्चात् बकाया के उन्मोचन के लिए समायोजन किया जाएगा, और शेष, यदि कोर्इ हों, का संदाय व्यतिक्रमी को किया जाएगा।

प्रबंध वापस लिया जाना

72. पूर्वगामी नियमों के अधीन कुर्की और प्रबंध को, कर वसूली अधिकारी के विवेकानुसार अथवा यदि बकाया का, ऐसे लाभ और किराए की प्राप्ति द्वारा उन्मोचन हो गया हो या अन्यथा संदाय कर दिया गया हो किसी भी समय वापस किया जा सकेगा।

भाग 5

व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी और उसका निरोध

कारण बताओ सूचना

73. (1) किसी व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी और सिविल कारगार में निरोध के लिए कोर्इ भी आदेश तब तक नहीं किया जाएगा जब तक कि कर-वसूली अधिकारी ने उससे कहते हुए सूचना जारी न कर दी हो और व्यतिक्रमी पर उसकी तामील न करा दी गर्इ हो कि वह सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को उसके समक्ष उपस्थित हो और कारण बताए कि उसे सिविल कारगार में क्यों न भेज दिया जाए, तथा जब तक कि कर-वसूली अधिकारी का लेखन द्वारा लेखबद्ध कारणों से यह समाधान न हो गया हो कि–

() व्यतिक्रमी ने इस उद्देश्य या आशय से कि प्रमाणपत्र के निष्पादन में व्यवधान हो, कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र तैयार करने के पश्चात् अपनी सम्पत्ति के किसी भाग को बेर्इमानी से अन्तरित किया है, छिपाया या हटाया है, अथवा

() व्यतिक्रमी के पास बकाया या उसके कुछ सारवान भाग का संदाय करने के साधन हैं, या कर वसूली अधिकारी द्वारा प्रमाणपत्र तैयार करने के पश्चात् थे और वह उनका संदाय करने से इन्कार या संदाय करने की बाबत उपेक्षा बरतता है या उसने इस बाबत इन्कार या उपेक्षा की है।

(2) उपनियम (1) में दी गर्इ किसी बात के होते हुए भी, व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी के लिए वारंट कर वसूली अधिकारी द्वारा निकाला जा सकेगा यदि कर वसूली अधिकारी का, शपथ द्वारा या अन्य प्रकार से यह समाधान हो गया हो कि इस बात की संभावना है कि व्यतिक्रमी इस उद्देश्य या आशय से कि प्रमाणपत्र निष्पादन में विलम्ब हो, फरार हो जाए या कर वसूली अधिकारी की अधिकारिता की स्थानीय सीमा छोड़ दे।

(3) जहां उपनियम (1) के अधीन निकाली गर्इ और तामील की गर्इ सूचना के अनुपालन में उपस्थिति नहीं होती हैं, वहां अधिकारी व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाल सकेगा।

(3क) उपनियम (2) या उपनियम (3) के अधीन कर वसूली अधिकारी द्वारा निकाला गया गिरफ्तारी का वारंट किसी ऐसे अन्य कर वसूली अधिकारी द्वारा भी निष्पादित किया जा सकता है, जिसकी अधिकारिता के भीतर व्यतिक्रमी उस समय पाया जाए।

(4) ऐसा हर व्यक्ति जो इस नियम के अधीन गिरफ्तारी के वारंट के अनुसरण में गिरफ्तार किया गया हो यथाशीघ्र और किसी भी स्थिति में उसकी गिरफ्तारी के चौबीस घंटे के भीतर (यात्रा के लिए अपेक्षित समय को छोड़कर) वारंट निकालने वाले कर वसूली अधिकारी के समक्ष लाया जाएगा :

परन्तु यदि व्यतिक्रमी वह रकम जो गिरफ्तारी के वारंट में देय रकम के रूप में दर्ज है और गिरफ्तारी का खर्च उस अधिकारी को दे देता है जिसने उसे गिरफ्तार किया है, तो ऐसा अधिकारी उसे तुरंत छोड़ देगा।

स्पष्टीकरण.–इस नियम के प्रयोजनों के लिए जहां ऐसा व्यतिक्रमी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, वहां उसका कर्ता व्यतिक्रमी समझा जाएगा।

सुनवार्इ

74. जब कोर्इ व्यतिक्रमी कारण बताओ सूचना के पालन में कर वसूली अधिकारी के समक्ष उपस्थित होता है या नियम 73 के अधीन कर वसूली अधिकारी के समक्ष लाया जाता है, तो कर वसूली अधिकारी व्यतिक्रमी को यह कारण बताने का अवसर देगा कि उसे सिविल कारागार में क्यों न भेज दिया जाए।

सुनवार्इ के लम्बित रहने तक अभिरक्षा

75. जांच की समाप्ति के लंबित रहने तक, कर वसूली अधिकारी अपने विवेकानुसार, व्यतिक्रमी को ऐसे अधिकारी की अभिरक्षा में निरुद्ध किए जाने के लिए आदेश कर सकेगा, जैसा कर वसूली अधिकारी ठीक समझे या अपेक्षा किए जाने पर उपस्थित होने के लिए कर वसूली अधिकारी को समाधानप्रद रूप में उसके द्वारा प्रतिभूति देने पर उसे रिहा कर सकेगा।

निरोध का आदेश

76. (1) जांच की समाप्ति पर, कर वसूली अधिकारी व्यतिक्रमी को सिविल कारागार में निरुद्ध किए जाने के लिए आदेश दे सकेगा और उस दशा में यदि वह पहले से ही गिरफ्तार नहीं है तो उसे गिरफ्तार कराएगा :

परन्तु व्यतिक्रमी को बकाया की पूर्ति करने का अवसर देने की दृष्टि से कर वसूली अधिकारी निरोध का आदेश करने के पूर्व उसे 15 दिन से अनधिक की अवधि के लिए, गिरफ्तार करने वाले अधिकारी की या किसी अन्य अधिकारी की अभिरक्षा में भेज सकेगा या कर वसूली अधिकारी को समाधानप्रद रूप में व्यतिक्रमी द्वारा यह प्रतिभूति देने पर कि यदि बकाया की पूर्ति इस प्रकार नहीं की गर्इ तो वह विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर उपस्थित हो जाएगा, उसे रिहा कर सकेगा।

(2) जब कर वसूली अधिकारी उपनियम (1) के अधीन निरोध का आदेश नहीं करता है, तब यदि व्यतिक्रमी गिरफ्तार है तो वह उसकी रिहार्इ का निदेश देगा।

कारागार में निरोध और वहां से रिहा किया जाना

77. (1) प्रमाणपत्र के निष्पादन में सिविल कारागार में निरुद्ध प्रत्येक व्यक्ति–

() जहां प्रमाणपत्र दो सौ पचास रुपए से अधिक रकम की मांग के लिए है–छह मास की अवधि के लिए, और

(ख) किसी अन्य दशा में–छह सप्ताह की अवधि के लिए;

इस प्रकार निरुद्ध किया जाएगा :

परन्तु उसे ऐसे निरोध से–

(i) उसके निरोध के वारंट में वर्णित रकम के सिविल कारागार के भारसाधक को संदाय कर दिए जाने पर, अथवा

(ii) नियम 78 और नियम 79 में उल्लिखित आधारों से भिन्न, किसी आधार पर, कर वसूली अधिकारी के अनुरोध पर,

रिहा कर दिया जाएगा।

(2) इस नियम के अधीन निरोध में से रिहा कोर्इ व्यतिक्रमी अपनी रिहार्इ के कारण ही बकाया के अपने दायित्व से उन्मोचित नहीं हो जाएगा; किंतु वह जिस प्रमाणपत्र के निष्पादन में सिविल कारागार में निरुद्ध किया गया था, उसके अधीन पुन: गिरफ्तार किए जाने का दायी नहीं होगा।

निर्मुक्ति (रिहार्इ)

78. (1) कर वसूली अधिकारी ऐसे व्यतिक्रमी को, जो प्रमाणपत्र के निष्पादन में गिरफ्तार किया गया है इस बात का समाधान होने पर कि उसने अपनी संपूर्ण संपत्ति का प्रकट न कर दिया है और उसे कर वसूली अधिकारी के व्ययनाधीन कर दिया है और उसने कोर्इ असद्भावपूर्ण कार्य नहीं किया है रिहा करने का आदेश कर सकेगा।

(2) यदि कर वसूली अधिकारी के पास यह विश्वास करने का आधार है कि उपनियम (1) के अधीन व्यतिक्रमी द्वारा किया गया प्रकटन असत्य है, तो वह प्रमाणपत्र के निष्पादन में व्यतिक्रमी की पुन: गिरफ्तारी का आदेश कर सकेगा किंतु सिविल कारागार में उसके निरोध की अवधि कुल मिलाकर उससे अधिक नहीं होगी जो नियम 77 द्वारा प्राधिकृत है।

बीमारी के आधार पर रिहार्इ

79. (1) कर वसूली अधिकारी, व्यतिक्रमी की गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाले जाने के पश्चात् किसी भी समय उसकी गंभीर बीमारी के आधार पर उस वारंट को रद्द कर सकेगा।

(2) जहां व्यतिक्रमी गिरफ्तार किया जा चुका है, वहां यदि कर-वसूली अधिकारी की राय है कि उसका स्वास्थ्य इतना अच्छा नहीं है कि उसे सिविल कारागार में निरुद्ध किया जाए, तो कर वसूली अधिकारी उसे रिहा कर सकेगा।

(3) जहां व्यतिक्रमी को सिविल कारागार के सुपुर्द कर दिया गया है, वहां कर-वसूली अधिकारी उसकी वहां से निर्मुक्ति किसी संक्रामक या स्पर्शजन्य रोग के आधार पर या उसे कोर्इ गम्भीर बीमारी होने के आधार पर कर सकेगा।

(4) इस नियम के अधीन रिहा व्यतिक्रमी को पुन: गिरफ्तार किया जा सकेगा, किंतु सिविल कारागार में उसके निरोध की अवधि, कुल मिलाकर, उससे अधिक नहीं होगी जो नियम 77 द्वारा प्राधिकृत है।

निवास-गृह में प्रवेश

80. इस अनुसूची के अधीन गिरफ्तार करने के प्रयोजन के लिए–

() किसी भी निवास-गृह में सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय के पूर्व प्रवेश नहीं किया जाएगा;

() निवास-गृह का कोर्इ भी बाहरी दरवाजा तब तक तोड़कर न खोला जाएगा जब तक कि ऐसा निवास-गृह या उसका कोर्इ भाग व्यतिक्रमी के अधिभोग में न हो और वह या उस गृह का अधिभोग करने वाले अन्य व्यक्ति उस तक पहुंचने देने में बाधक न हों या पहुंचना देना किसी भांति निवारित न करते हों, किंतु जब वारंट का निष्पादन करने वाले व्यक्ति ने किसी निवास-गृह में सम्यक् रूप से पहुंच प्राप्त कर ली है, तब वह किसी कमरे या कोठरी का दरवाजा तोड़कर खोल सकेगा यदि उसके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि व्यतिक्रमी का वहां पाया जाना संभव है;

() किसी ऐसे कमरे में, जो किसी ऐसी स्त्री के वास्तविक अधिभोग में है जो देश की रूढ़ियों के अनुसार सार्वजनिक रूप में सामने नहीं आती तब तक प्रवेश नहीं किया जाएगा जब तक कि उस अधिकारी ने जो गिरफ्तारी करने के लिए प्राधिकृत है, उसे यह सूचना न दे दी हो कि वह हट जाने के लिए स्वतंत्र है और उसे हट जाने के लिए युक्तियुक्त समय और सुविधा न दे दी हो।

स्त्रियों या अवयस्कों आदि की गिरफ्तारी पर प्रतिषेध

81. कर वसूली अधिकारी–

() किसी स्त्री को, या

() किसी ऐसे व्यक्ति को जो, उसकी राय में, अवयस्क या विकृत-चित है,

गिरफ्तार और सिविल कारागार में निरुद्ध करने का आदेश नहीं करेगा।

भाग 6

प्रकीर्ण

अधिकारियों को न्यायिक रूप से कार्य करने वाला माना जाना

82. प्रत्येक ऐसे प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त कर वसूली अधिकारी या अन्य अधिकारी के बारे में जो इस अनुसूची के अधीन कार्य कर रहा है, इस अनुसूची के अधीन कृत्यों के निर्वहन में यह समझा जाएगा कि वह न्यायिक अधिकारी संरक्षण अधिनियम, 1850 (1850 का 18) के अर्थ में न्यायिक रूप से कार्य कर रहा है।

साक्ष्य लेने की शक्ति

83. प्रत्येक ऐसे प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, कर वसूली अधिकारी या अन्य अधिकारी को जो इस अनुसूची के उपबंधों के अधीन कार्य कर रहा है, साक्ष्य प्राप्त करने, शपथ दिलवाने, साक्षियों की हाजिरी सुनिश्चित कराने और दस्तावेजों को पेश करने की बाबत विवश करने के प्रयोजनों के लिए वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी।

प्रमाणपत्र का प्रभावी बने रहना

84. कोर्इ भी प्रमाणपत्र व्यतिक्रमी की मृत्यु के कारण निष्प्रभाव न होगा।

व्यतिक्रमी की मृत्यु पर प्रक्रिया

85. यदि कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार किए प्रमाणपत्र के पश्चात् किसी समय व्यतिक्रमी मर जाता है, तो इस अनुसूची के अधीन (गिरफ्तारी और निरोध को छोड़कर) कार्यवाहियां व्यतिक्रम के विधिक प्रतिनिधि के विरुद्ध जारी रखी जा सकेंगी और इस अनुसूची के उपबंध वैसे ही लागू होंगे मानो विधिक प्रतिनिधि व्यतिक्रमी हो।

अपीलें

86. (1) इस अनुसूची के अधीन कर-वसूली अधिकारी द्वारा पारित किसी मूल आदेश की, जो निश्चायक आदेश नहीं है, अपील प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त को होगी।

(2) इस नियम के अधीन हर अपील, उस आदेश की तारीख से जिसके विरुद्ध अपील की जानी हो तीस दिन के भीतर पेश करनी होगी।

(3) किसी अपील के विनिश्चय के लम्बित रहने तक, प्रमाणपत्र के निष्पादन को रोका जा सकेगा यदि अपील प्राधिकारी ऐसा निर्दिष्ट करे किंतु अन्यथा नहीं।

(4) उपनियम (1) में की किसी बात के होते हुए भी, जहां प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त उस रूप में किसी क्षेत्र के संबंध में शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत हैं, वहां ऐसे प्राधिकरण की तारीख से पूर्व किसी कर-वसूली अधिकारी द्वारा, जो उस क्षेत्र के या, उस क्षेत्र में सम्मिलित किए गए किसी क्षेत्र की बाबत उस रूप में शक्तियों का प्रयोग करने के लिए प्राधिकृत है, पारित आदेशों के विरुद्ध सभी अपीलें ऐसे प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त को होंगी।

पुनर्विलोकन

87. इस अनुसूची के अधीन पारित किसी आदेश का अभिलेख से प्रकट किसी भूल के कारण पुनर्विलोकन, सभी हितबद्ध व्यक्तियों को नोटिस देने के पश्चात् ऐसे प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, कर वसूली अधिकारी या अन्य अधिकारी द्वारा जिसने आदेश किया था, या उसके पद में उत्तरवर्ती द्वारा किया जा सकेगा।

प्रतिभू से वसूली

88. जहां कोर्इ व्यक्ति व्यतिक्रमी द्वारा देय रकम के लिए इस अनुसूची के अधीन प्रतिभू बना है, वहां इस अनुसूची के अधीन उसके विरुद्ध कार्यवाही ऐसे की जा सकेगी मानो वह व्यतिक्रमी हो।

शास्तियां

89. [प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया।]

जीवन-निर्वाह भत्ता

90. (1) जब कोर्इ व्यतिक्रमी गिरफ्तार किया जाता है, या सिविल कारागार में निरुद्ध किया जाता है, तो गिरफ्तारी के समय से लेकर ऐसे व्यतिक्रमी के रिहा होने तक उसे जीवन-निर्वाह के लिए संदेय राशि की पूर्ति कर वसूली अधिकारी द्वारा की जाएगी।

(2) ऐसी राशि की गणना सिविल न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में गिरफ्तार किए गए निण्र्ाीत-ऋणियों के जीवन-निर्वाह के लिए राज्य सरकार द्वारा नियत मापदंड के अनुसार की जाएगी।

(3) इस नियम के अधीन संदेय राशियों के बारे में यह समझा जाएगा कि वे कार्यवाहियों के खर्चे हैं:

परन्तु इस प्रकार संदेय किसी राशि के लिए व्यतिक्रमी न तो सिविल कारागार में निरुद्ध किया जाएगा और न ही गिरफ्तार किया जाएगा।

प्ररूप (फार्म)

91. बोर्ड इस अनुसूची के अधीन जारी किए जाने वाले किसी आदेश, सूचना (नोटिस), वारंट या प्रमाणपत्र हेतु उपयोग में लाए जाने वाला प्ररूप विहित कर सकेगा।

नियम बनाने की शक्ति

92. (1) बोर्ड प्रधान मुख्य आयुक्तों या मुख्य आयुक्तों, प्रधान आयुक्तों या आयुक्तों, कर वसूली अधिकारियों और इस अनुसूची के अधीन कार्यरत अन्य अधिकारियों द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया विनियमित करने वाले ऐसे नियम बना सकेगा जो इस अधिनियम के उपबंधों से सुसंगत हों।

(2) विशिष्टतया और उपनियम (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सब विषयों या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्:–

() वह क्षेत्र जिसके भीतर प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त, प्रधान आयुक्त या आयुक्त या कर वसूली अधिकारी अपनी अधिकारिता का प्रयोग कर सकेंगे;

() वह रीति जिसमें इस अनुसूची के अधीन बेची गर्इ कोर्इ संपत्ति दी जा सकेगी;

() कर वसूली अधिकारी द्वारा या उसकी ओर से दस्तावेज का निष्पादन या परक्राम्य लिखत या निगम के शेयर का पृष्ठांकन जहां ऐसी परक्राम्य लिखत या शेयर का ऐसे व्यक्ति को, जिसने इस अनुसूची के अधीन किसी विक्रय के अधीन उसे खरीदा है, अन्तरण करने के लिए ऐसा निष्पादन या पृष्ठांकन अपेक्षित है;

() इस अनुसूची के अधीन बेची गर्इ किसी स्थावर संपत्ति के क्रेता को उस सम्पत्ति का कब्जा अभिप्राप्त करने में किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिरोध करने या बाधा डालने के संबंध में कार्यवाही करने के लिए प्रक्रिया;

() इस अनुसूची के अधीन निकाली गर्इ किसी आदेशिका के लिए ली जाने वाली फीस;

() इस अनुसूची के अधीन की गर्इ किसी अन्य कार्यवाही की बाबत वसूल किए जाने वाले प्रभारों का मापमान;

() पौंडेज फीस की वसूली;

() जब पशुधन या अन्य जंगम संपत्ति कुर्की के अधीन हो, तब उसका अनुरक्षण और अभिरक्षा, ऐसे अनुरक्षण और अभिरक्षा के लिए ली जाने वाली फीसें, ऐसे पशुधन या सम्पत्ति का विक्रय, तथा ऐसे विक्रय के आगमों का व्ययन;

() कारबार की कुर्की का ढंग।

प्रभार के बारे में व्यावृत्ति

93. इस अनुसूची की कोर्इ बात इस अधिनियम के ऐसे किसी उपबंध पर प्रभाव नहीं डालेगी जिसके अधीन किसी आस्ति पर कर प्रथम प्रभार है।

कुछ लंबित कार्यवाहियों का बने रहना और कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति

94. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा इस अनुसूची के संशोधनों के प्रवर्तन में आने के ठीक पूर्व लंबित कर वसूली की सभी कार्यवाहियां उस प्रक्रम से, जहां वे पहुंची हैं, उस अधिनियम द्वारा संशोधित इस अनुसूची के अधीन बनाए रखी जाएंगी और इस प्रयोजन के लिए, ऐसे संशोधन के पूर्व धारा 222 के अधीन निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी किया गया प्रत्येक प्रमाणपत्र, ऐसे संशोधन के पश्चात्, उस धारा के अधीन कर वसूली अधिकारी द्वारा तैयार किया गया प्रमाणपत्र समझा जाएगा और यदि उक्त कार्यवाहियों को चालू रखने में कोर्इ कठिनार्इ उत्पन्न होती है, तो बोर्ड (चाहे इस अनुसूची में किसी नियम के ऐसे उपांतरण के रूप में जिससे सार पर प्रभाव नहीं पड़ता है या अन्यथा), साधारण या विशेष आदेश जारी कर सकेगा जो उस कठिनार्इ को दूर करने के प्रयोजन के लिए आवश्यक या समीचीन प्रतीत हों।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट