आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा अनुसूची वी

केन्द्र सरकार की मंजूरी के बिना एक प्रबंध या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक की नियुक्ति के लिए पूरी होने की शर्तें

धारा

धारा संख्या

अनुसूची वी

अध्याय शीर्षक

अनुसूची - अनुसूची

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

केन्द्र सरकार की मंजूरी के बिना एक प्रबंध या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक की नियुक्ति के लिए पूरी होने की शर्तें

केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक की नियुक्ति के लिए पूरी की जाने वाली शर्तें

अनुसूची V

( धारा 196 और 197 देखें )

भाग I

केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना प्रबंध निदेशक या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक की नियुक्ति के लिए पूरी की जाने वाली शर्तें

नियुक्तियां

कोई भी व्यक्ति किसी कंपनी के प्रबंध या पूर्णकालिक निदेशक या प्रबंधक (इसके बाद प्रबंधकीय व्यक्ति के रूप में संदर्भित) के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा, जब तक कि वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा नहीं करता है, अर्थात: -

(क)   उसे निम्नलिखित अधिनियमों में से किसी के तहत अपराध के दोषसिद्धि के लिए किसी भी अवधि के लिए कारावास, या एक हजार रुपये से अधिक के जुर्माने की सजा नहीं दी गई है, अर्थात: -
(i)   भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (1899 का 2);
(ii)   केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 (1944 का 1);
(iii)   उद्योग (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1951 (1951 का 65);
(iv)   खाद्य मिलावट रोकथाम अधिनियम, 1954 (1954 का 37);
(v)   आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10);
[( vi )   कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) या कोई पूर्व कंपनी कानून;]
(vii)   प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42);
(viii)   संपत्ति-कर अधिनियम, 1957 (1957 का 27);
(ix)   आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43);
( x )   सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52);
(xi)   प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 (2003 का 12);
(xii)   विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (1999 का 42);
(xiii)   बीमार औद्योगिक कंपनी (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1985 (1986 का 1);
(xiv)   भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15);
(xv)   विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 (1992 का 22);
(xvi)   धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (2003 का 15);
[ ( xvii )   दिवाला और धन शोधन संहिता, 2016 (2016 का 31)
( xviii )   वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 (2017 का 12)
( xix )   भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (2018 का 17) ]
(ख)   उसे विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियां निवारण अधिनियम, 1974 (1974 का 52) के अंतर्गत किसी भी अवधि के लिए हिरासत में नहीं रखा गया था:
  बशर्ते कि जहां केन्द्रीय सरकार ने उप-पैरा ( क ) या उप-पैरा ( ख ) के अधीन दोषसिद्ध या निरुद्ध किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए अपना अनुमोदन दे दिया है, वहां उस व्यक्ति की पश्चातवर्ती नियुक्ति के लिए केन्द्रीय सरकार का कोई और अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा, यदि वह ऐसे अनुमोदन के पश्चात दोषसिद्ध या निरुद्ध नहीं हुआ है।
(ग)   उसने इक्कीस वर्ष की आयु पूरी कर ली है और सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त नहीं की है:
  बशर्ते कि जहां उसने सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त कर ली है; और जहां उसकी नियुक्ति कंपनी द्वारा आम बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित की गई है, ऐसी नियुक्ति के लिए केंद्रीय सरकार का कोई और अनुमोदन आवश्यक नहीं होगा;
(घ)   [***]
(ड़)   वह भारत का निवासी है।

स्पष्टीकरण 1 - इस अनुसूची के प्रयोजन के लिए, भारत में निवासी के अंतर्गत ऐसा व्यक्ति आता है जो प्रबंधकीय व्यक्ति के रूप में अपनी नियुक्ति की तारीख से ठीक पहले कम से कम बारह मास की निरंतर अवधि के लिए भारत में रहा है और जो भारत में रहने आया है,-

(i)   भारत में रोजगार प्राप्त करने के लिए; या
(ii)   भारत में व्यवसाय या छुट्टी मनाने के लिए।

स्पष्टीकरण II .- यह शर्त वाणिज्य विभाग द्वारा समय-समय पर अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्रों की कंपनियों पर लागू नहीं होगी:

बशर्ते कि कोई व्यक्ति, जो भारत में अनिवासी है, विदेश में संबंधित भारतीय मिशन से उचित रोजगार वीज़ा प्राप्त करने के बाद ही भारत में प्रवेश करेगा। इस प्रयोजन के लिए, ऐसे व्यक्ति को वीज़ा आवेदन पत्र के साथ कंपनी का विवरण, मुख्य नियोक्ता तथा ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति की शर्तें एवं नियम प्रस्तुत करने होंगे।

भाग II

पारिश्रमिक

अनुभाग I

लाभ कमाने वाली कंपनियों द्वारा देय पारिश्रमिक

धारा 197 के प्रावधानों के अधीन, एक वित्तीय वर्ष में लाभ कमाने वाली कंपनी किसी प्रबंधकीय व्यक्ति या व्यक्तियों [ या अन्य निदेशक या निदेशकों ] को ऐसे खंड में निर्दिष्ट सीमाओं से अधिक पारिश्रमिक का भुगतान कर सकती है।

[धारा II

बिना किसी लाभ या अपर्याप्त लाभ वाली कंपनियों द्वारा देय पारिश्रमिक [ * * * ]

जहां किसी वित्तीय वर्ष में किसी प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] के कार्यकाल के दौरान, किसी कंपनी को कोई लाभ नहीं होता है या उसका लाभ अपर्याप्त है, वह [ *** ] प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] को नीचे दी गई तालिका ( क ) और ( ख ) के तहत सीमाओं से अधिक नहीं पारिश्रमिक का भुगतान कर सकती है: -

[ तालिका ( क )

  (1) (2) (3)
क्रमांक जहां प्रभावी पूंजी (रुपये में) है प्रबंधकीय व्यक्ति के मामले में देय वार्षिक पारिश्रमिक की सीमा (रुपये में) से अधिक नहीं होगी अन्य निदेशक के मामले में देय वार्षिक पारिश्रमिक की सीमा (रुपये में) से अधिक नहीं होगी
(i) नकारात्मक या 5 करोड़ से कम। 60 लाख 12 लाख
(ii) 5 करोड़ और उससे अधिक लेकिन 100 करोड़ से कम 84 लाख 17 लाख
(iii) 100 करोड़ और उससे अधिक लेकिन 250 करोड़ से कम 120 लाख 24 लाख
(iv) 250 करोड़ और उससे अधिक 120 लाख रुपये से अधिक तथा 250 करोड़ रुपये से अधिक की प्रभावी पूंजी का 0.01%: 24 लाख रुपये से अधिक तथा 250 करोड़ रुपये से अधिक की प्रभावी पूंजी का 0.01%: ]

[बशर्ते कि उपर्युक्त सीमाओं से अधिक पारिश्रमिक का भुगतान किया जा सकता है ] यदि शेयरधारकों द्वारा पारित प्रस्ताव एक विशेष प्रस्ताव है।

स्पष्टीकरण. --इसके द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि एक वर्ष से कम अवधि के लिए सीमाएं आनुपातिक होंगी।

( ख ) प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] जो पेशेवर क्षमता में कार्य कर रहा है, के मामले में [ मद (क) के अनुसार पारिश्रमिक का भुगतान किया जा सकता है ] ,यदि ऐसे प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] का कंपनी या उसकी होल्डिंग कंपनी या उसकी किसी सहायक कंपनी की पूंजी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से या किसी अन्य वैधानिक संरचना के माध्यम से कोई हित नहीं है और नियुक्ति की तारीख से पहले या उसके बाद पिछले दो वर्षों के दौरान किसी भी समय कंपनी या उसकी होल्डिंग कंपनी या उसकी किसी सहायक कंपनी के निदेशकों या प्रमोटरों से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हित या संबंध नहीं है और जिस क्षेत्र में कंपनी काम करती है, उसमें विशेषज्ञता और विशेष ज्ञान के साथ स्नातक स्तर की योग्यता रखता है:

बशर्ते कि किसी कंपनी का कोई कर्मचारी, जो कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना या अर्हता के माध्यम से ऐसे कर्मचारियों को शेयरों के आवंटन के लिए तैयार की गई किसी योजना के तहत कंपनी के प्रदत्त शेयर पूंजी के 0.5% से अधिक शेयर नहीं रखता है, उसे ऐसा व्यक्ति माना जाएगा जिसका कंपनी की पूंजी में कोई हित नहीं है:

आगे प्रदान किया गया कि इस धारा के मद (क) और (ख) के अंतर्गत निर्दिष्ट सीमाएं लागू होंगी, यदि-

(i)   पारिश्रमिक का भुगतान बोर्ड द्वारा पारित प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाता है और धारा 178 की उपधारा (1) के तहत आने वाली कंपनी के मामले में नामांकन और पारिश्रमिक समिति द्वारा भी;
[ (ii)   कंपनी ने किसी बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्थान या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या किसी अन्य सुरक्षित ऋणदाता को देय राशि के भुगतान में कोई चूक नहीं की है, और चूक के मामले में, सामान्य बैठक में अनुमोदन प्राप्त करने से पहले कंपनी द्वारा संबंधित बैंक या सार्वजनिक वित्तीय संस्थान या गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर धारकों या अन्य सुरक्षित ऋणदाता, जैसा भी मामला हो, का पूर्व अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा। ]
(iii)   कंपनी की आम बैठक में तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए, यथास्थिति, [ *** ] मद ( क ) के अनुसार पारिश्रमिक के भुगतान के लिए साधारण प्रस्ताव या विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है या मद ( ख ) के अनुसार पारिश्रमिक के भुगतान के लिए विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है;
(iv)   खंड ( iii ) में निर्दिष्ट आम बैठक बुलाने की सूचना के साथ एक विवरण शेयरधारकों को दिया जाता है, जिसमें निम्नलिखित जानकारी होती है, अर्थात्:—
I.   सामान्य जानकारीः
(1)   उद्योग की प्रकृति
(2)   वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की तिथि या अपेक्षित तिथि
(3)   नई कंपनियों के मामले में, विवरणिका में दिखाई देने वाले वित्तीय संस्थानों द्वारा अनुमोदित परियोजना के अनुसार गतिविधियों के शुरू होने की अपेक्षित तिथि
(4)   दिए गए संकेतकों के आधार पर वित्तीय प्रदर्शन
(5)   विदेशी निवेश या सहयोग, यदि कोई हो.
ii.   नियुक्त व्यक्ति के बारे में जानकारीः
(1)   पृष्ठभूमि विवरण
(2)   पिछला पारिश्रमिक
(3)   मान्यता या पुरस्कार
(4)   जॉब प्रोफ़ाइल और उसकी उपयुक्तता
(5)   पारिश्रमिक प्रस्तावित
(6)   उद्योग, कंपनी के आकार, पद और व्यक्ति की प्रोफ़ाइल के संबंध में तुलनात्मक पारिश्रमिक प्रोफ़ाइल (प्रवासी के मामले में प्रासंगिक विवरण उसके मूल देश के संबंध में होगा)
(7)   प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी के साथ आर्थिक संबंध, या प्रबंधकीय कर्मियों के साथ संबंध, यदि कोई हो।
iii.   अन्य जानकारीः
(1)   हानि या अपर्याप्त लाभ के कारण
(2)   सुधार के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदम
(3)   मापने योग्य शब्दों में उत्पादकता और लाभ में अपेक्षित वृद्धि
iv.   प्रकटीकरण
  वित्तीय विवरण से संलग्न "निगम से संबंधित शासन प्रणाली" शीर्षक के अंतर्गत निदेशक मंडल की रिपोर्ट में निम्नलिखित खुलासे का उल्लेख किया जाएगा, यदि कोई हो:
(i)   सभी निदेशकों के पारिश्रमिक पैकेज के सभी तत्व जैसे वेतन, लाभ, बोनस, स्टॉक विकल्प, पेंशन आदि;
(ii)   प्रदर्शन मानदंडों के साथ निश्चित घटक और प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहनों का विवरण;
(iii)   सेवा अनुबंध, नोटिस अवधि, पृथक्करण शुल्क; और
(iv)   स्टॉक विकल्प विवरण, यदि कोई हो, और क्या इसे छूट पर जारी किया गया है और साथ ही वह अवधि, जिस पर अर्जित किया गया है और जिस पर प्रयोग किया जा सकता है।

स्पष्टीकरण।- इस भाग की धारा II के प्रयोजनों के लिए, "सांविधिक संरचना" का अर्थ है कोई भी संस्था जो किसी भी कानून के तहत गठित किसी भी कंपनी में शेयर रखने की हकदार है।]

धारा III

कुछ विशेष परिस्थितियों में बिना किसी लाभ या अपर्याप्त लाभ वाली कंपनियों द्वारा देय पारिश्रमिक [ * * * ]

निम्नलिखित परिस्थितियों में कोई कंपनी, [ *** ] , किसी प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] को उपरोक्त धारा II में प्रदान की गई राशि से अधिक पारिश्रमिक का भुगतान कर सकती है: -

(क)   जहां धारा 1 या धारा 2 में निर्दिष्ट सीमाओं से अधिक पारिश्रमिक किसी अन्य कंपनी द्वारा दिया जाता है और वह अन्य कंपनी या तो विदेशी कंपनी है या उसने ऐसा भुगतान करने के लिए आम बैठक में अपने शेयरधारकों का अनुमोदन प्राप्त कर लिया है, और इस राशि को धारा 197 के प्रयोजन के लिए प्रबंधकीय पारिश्रमिक के रूप में माना जाता है और ऐसी अन्य कंपनी द्वारा अपने प्रबंधकीय व्यक्तियों [ या अन्य निदेशकों ] को देय कुल प्रबंधकीय पारिश्रमिक, ऐसी राशि या राशियों सहित, धारा 197 के तहत स्वीकार्य सीमाओं के भीतर है।
[ ( ख )   जहां कंपनी—
(i)   एक नव निगमित कंपनी है, उसके निगमन की तारीख से सात वर्ष की अवधि के लिए, या
(ii)   एक बीमार कंपनी है, जिसके लिए पुनरुद्धार या पुनर्वास की योजना को औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड द्वारा पुनरुद्धार की योजना की मंजूरी की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के लिए आदेश दिया गया है, या
(iii)   एक ऐसी कंपनी है जिसके संबंध में एक समाधान योजना को दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण द्वारा इस तरह के अनुमोदन की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए अनुमोदित किया गया है,
  वह [ अपने प्रबंधकीय व्यक्तियों [ या अन्य निदेशक ] को कोई पारिश्रमिक] दे सकता है। ]
(ग)   जहां किसी प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] का पारिश्रमिक धारा II में सीमाओं से अधिक है, लेकिन पारिश्रमिक औद्योगिक और वित्तीय पुनर्निर्माण बोर्ड या राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारित किया गया है:
  बशर्ते कि इस धारा के अंतर्गत सीमाएं धारा 2 के अंतर्गत निर्दिष्ट सभी शर्तों और निम्नलिखित अतिरिक्त शर्तों को पूरा करने के अधीन लागू होंगी:—
(i)   इस धारा के पैरा ( क ) में दिए गए प्रावधान को छोड़कर, प्रबंधकीय व्यक्ति किसी अन्य कंपनी से पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहा है;
(ii)   कंपनी का लेखा परीक्षक या कंपनी सचिव या जहां कंपनी ने सचिव नियुक्त नहीं किया है, वहां पूर्णकालिक अभ्यास में सचिव, यह प्रमाणित करता है कि सभी सुरक्षित लेनदारों और सावधि उधारदाताओं ने लिखित रूप में कहा है कि उन्हें प्रबंधकीय व्यक्ति [ या अन्य निदेशक ] की नियुक्ति के साथ-साथ पारिश्रमिक की मात्रा पर कोई आपत्ति नहीं है और ऐसा प्रमाण पत्र धारा 196 की उपधारा (4) के तहत निर्धारित रिटर्न के साथ दायर किया जाता है।
(iii)   लेखा परीक्षक या कंपनी सचिव या जहां कंपनी ने सचिव नियुक्त नहीं किया है, वहां पूर्णकालिक अभ्यास करने वाला सचिव यह प्रमाणित करता है कि किसी भी लेनदार को भुगतान में कोई चूक नहीं हुई है, और जमा धारकों को सभी बकाया राशि का समय पर भुगतान किया जा रहा है।
(घ)   [***]

[ स्पष्टीकरण। धारा 1, धारा 2 और धारा 3 के प्रयोजनों के लिए, "या अन्य निदेशक" शब्द का अर्थ गैर-कार्यकारी निदेशक या स्वतंत्र निदेशक होगा । ]

धारा IV

भाग -I

प्रबंधकीय पारिश्रमिक में अनुलाभ शामिल नहीं हैं

1.एक प्रबंधकीय व्यक्ति निम्नलिखित अनुलाभों के लिए पात्र होगा जिसे धारा II और धारा III में निर्दिष्ट पारिश्रमिक की सीमा की गणना में शामिल नहीं किया जाएगाः-

(क)   भविष्य निधि, अधिवर्षिता निधि या वार्षिकी निधि में अंशदान, यदि ये अकेले या एक साथ मिलाकर आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अंतर्गत कर योग्य नहीं हैं;
(ख)   सेवा के प्रत्येक पूर्ण वर्ष के लिए आधे महीने के वेतन से अधिक की दर से देय ग्रेच्युटी; तथा
(ग)   कार्यकाल के अंत में छुट्टी का नकदीकरण।

2.इस खंड के पैराग्राफ 1 में निर्दिष्ट परिलब्धियों के अतिरिक्त, एक प्रवासी प्रबंधकीय व्यक्ति (अनिवासी भारतीय सहित) निम्नलिखित परिलब्धियों के लिए पात्र होगा, जिन्हें धारा II या धारा III में निर्दिष्ट पारिश्रमिक की अधिकतम सीमा की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा -

(क)   बच्चों की शिक्षा भत्ता : भारत में या भारत से बाहर पढ़ने वाले बच्चों के मामले में, प्रति बच्चा प्रति माह अधिकतम 12,000 रुपये या वास्तविक व्यय, जो भी कम हो, तक भत्ता दिया जाएगा। इस तरह का भत्ता अधिकतम दो बच्चों तक स्वीकार्य है.
(ख)   भारत से बाहर पढ़ने वाले बच्चों या विदेश में रहने वाले परिवार के लिए अवकाश यात्रा भत्ता: बच्चों और परिवार के सदस्यों को, यदि वे भारत में नहीं रहते हैं, तो उनके अध्ययन या प्रवास के स्थान से भारत आने के लिए अवकाश यात्रा भत्ता प्रबंधकीय व्यक्ति के साथ वर्ष में एक बार इकोनॉमी क्लास में या दो वर्ष में एक बार प्रथम श्रेणी में दिया जाएगा।
(ग)   अवकाश यात्रा रियायत: कंपनी द्वारा निर्दिष्ट नियमों के अनुसार स्वयं और परिवार के लिए वापसी यात्रा, जहां यह प्रस्तावित है कि अवकाश भारत में कहीं भी बिताने के बजाय स्वदेश में बिताया जाए।

पार्ट - II

प्रभावी पूंजी θ

स्पष्टीकरण I .- इस भाग की धारा II के प्रयोजनों के लिए, "प्रभावी पूंजी" से तात्पर्य कुल चुकता शेयर पूंजी (शेयर आवेदन राशि या शेयरों के विरुद्ध अग्रिम को छोड़कर) से है; शेयर प्रीमियम खाते में जमा राशि, यदि कोई हो, तो वह; आरक्षित निधि और अधिशेष (पुनर्मूल्यांकन आरक्षित निधि को छोड़कर); एक वर्ष के बाद चुकाए जाने वाले दीर्घकालिक ऋण और जमा (कार्यशील पूंजी ऋण, ओवरड्राफ्ट, ऋण पर देय ब्याज, जब तक कि वित्त पोषित न हो, बैंक गारंटी आदि और अन्य अल्पकालिक व्यवस्थाओं को छोड़कर) जिसमें से किसी भी निवेश (किसी निवेश कंपनी द्वारा निवेश के मामले को छोड़कर जिसका मुख्य व्यवसाय शेयरों, स्टॉक, डिबेंचर या अन्य प्रतिभूतियों का अधिग्रहण है), संचित हानि और प्रारंभिक व्यय जो बट्टे खाते में नहीं डाले गए हैं, के योग को घटाया गया है।

स्पष्टीकरण II .-( क ) जहां प्रबंधकीय व्यक्ति की नियुक्ति उस वर्ष में की जाती है जिसमें कंपनी को शामिल किया गया है, प्रभावी पूंजी की गणना ऐसी नियुक्ति की तारीख के अनुसार की जाएगी;

(ख ) किसी अन्य मामले में प्रभावी पूंजी की गणना उस वित्तीय वर्ष से पहले के वित्तीय वर्ष की अंतिम तारीख के अनुसार की जाएगी जिसमें प्रबंधकीय व्यक्ति की नियुक्ति की गई है।

स्पष्टीकरण III .- इस अनुसूची के प्रयोजनों के लिए, "परिवार" का तात्पर्य प्रबंधकीय व्यक्ति के पति/पत्नी, आश्रित बच्चों और आश्रित माता-पिता से है।

स्पष्टीकरण IV .- नामांकन और पारिश्रमिक समिति धारा II या धारा III के तहत पारिश्रमिक को मंजूरी देते समय,-

(क)   कंपनी की वित्तीय स्थिति, उद्योग में रुझान, नियुक्त व्यक्ति की योग्यता, अनुभव, पिछला प्रदर्शन, पिछला पारिश्रमिक आदि को ध्यान में रखें;
(ख)   कंपनी और शेयरधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाते हुए पारिश्रमिक पैकेज का निर्धारण करने में निष्पक्षता लाने की स्थिति में होना।

स्पष्टीकरण V .- इस अनुसूची के प्रयोजनों के लिए, "नकारात्मक प्रभावी पूंजी" से वह प्रभावी पूंजी अभिप्रेत है जिसकी गणना इस भाग के स्पष्टीकरण 1 में निहित प्रावधानों के अनुसार शून्य से कम की जाती है।

स्पष्टीकरण VI .-इस अनुसूची के उद्देश्यों के लिएः-

(क)   [***]
(ख)   "पारिश्रमिक" से तात्पर्य धारा 2 के खंड ( 78 ) में परिभाषित पारिश्रमिक से है और इसमें प्रबंधकीय व्यक्ति को किसी भी प्रत्यक्ष कर की प्रतिपूर्ति शामिल है।

अनुभाग V

दो कंपनियों में एक प्रबंधकीय व्यक्ति को देय पारिश्रमिक

धारा 1 से 4 के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रबंधकीय व्यक्ति एक या दोनों कम्पनियों से पारिश्रमिक प्राप्त करेगा, बशर्ते कि कम्पनियों से प्राप्त कुल पारिश्रमिक उन कम्पनियों में से किसी एक से स्वीकार्य उच्चतम अधिकतम सीमा से अधिक न हो, जिसका वह प्रबंधकीय व्यक्ति है।

भाग III

इस अनुसूची के भाग I और II पर लागू प्रावधान

1.इस अनुसूची के भाग 1 और भाग 2 में निर्दिष्ट नियुक्ति और पारिश्रमिक सामान्य बैठक में शेयरधारकों के प्रस्ताव द्वारा अनुमोदन के अधीन होंगे।

2.कंपनी का लेखा परीक्षक या सचिव या जहां कंपनी को सचिव नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं है, पूर्णकालिक व्यवसाय में सचिव यह प्रमाणित करेगा कि इस अनुसूची की आवश्यकता का अनुपालन किया गया है और इस तरह के प्रमाण पत्र को धारा 196 की उप-धारा (4) के तहत पंजीयक के साथ दायर विवरणी में शामिल किया जाएगा।

भाग IV

कुछ कंपनियों को छूट

केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी वर्ग या वर्गों की कम्पनियों को इस अनुसूची में अन्तर्विष्ट किसी भी अपेक्षा से छूट दे सकती है।


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