आय संगणना और प्रकटीकरण मानक
अधिसूचना संख्या एसओ 3079(ई) [सं.87/2016 (एफ.सं.133/23/2015-टीपीएल)], दिनांक 29-9-2016
आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 145 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय सरकार इसके द्वारा इस अधिसूचना के अनुलग्नक में निर्दिष्ट आय संगणना और प्रकटीकरण मानकों को अधिसूचित करती है, जिनका पालन सभी निर्धारिती (किसी व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार के अलावा, जिन्हें पिछले वर्ष के अपने खातों का अंकेक्षण कराने की आवश्यकता नहीं है) द्वारा लेखांकन की व्यापारिक प्रणाली का पालन करते हुए, "व्यवसाय या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" शीर्षक के तहत आय-कर के लिए प्रभार्य आय की संगणना के प्रयोजनों के लिए किया जाना है।
2.यह अधिसूचना कर निर्धारण वर्ष 2017-18 और उसके बाद के कर निर्धारण वर्षों पर लागू होगी।
अनुलग्नक
आईसीडीएस I लेखांकन नीतियों से संबंधित आय संगणना और प्रकटीकरण मानक I
प्रस्तावना
यह आय संगणना और प्रकटीकरण खाता बही के रखरखाव के प्रयोजन के लिए नहीं बल्कि मानक "व्यवसाय या पेशे के लाभ और प्राप्ति" या "अन्य स्रोतों से आय" शीर्षक के अंतर्गत प्रभार्य आय की संगणना के लिए लागू है।
आय-कर अधिनियम, 1961 ('अधिनियम') और इस आय संगणना और प्रकटीकरण मानक के प्रावधानों के बीच संघर्ष के मामले में, अधिनियम के प्रावधान उस सीमा तक प्रभावी होंगे।
दायरा
1.यह आय संगणना और प्रकटीकरण मानक महत्वपूर्ण लेखांकन नीतियों से संबंधित है।
मौलिक लेखांकन धारणाएं
2.निम्नलिखित मौलिक लेखांकन मान्यताएँ हैं, अर्थात:—
| (क) | चालू व्यवसाय | |
| "चालू व्यवसाय" इस धारणा को संदर्भित करता है कि व्यक्ति का न तो परिसमापन करने का इरादा है और न ही कारोबार, पेशे या व्यवसाय के पैमाने को भौतिक रूप से कम करने की आवश्यकता है, और वह निकट भविष्य में अपने कारोबार, पेशे या व्यवसाय को जारी रखने का इरादा रखता है। | ||
| (ख) | निरंतरता | |
| निरंतरता इस धारणा को संदर्भित करती है कि लेखांकन नीतियाँ एक अवधि से दूसरी अवधि में सुसंगत होती हैं; | ||
| (ग) | उपार्जन | |
| "उपार्जन" इस धारणा को संदर्भित करता है कि राजस्व और लागतें अर्जित की जाती हैं, यानी, उन्हें अर्जित या व्यय के रूप में पहचाना जाता है (और धन प्राप्त या भुगतान के रूप में नहीं) और पिछला वर्ष में दर्ज किया जाता है जिससे वे संबंधित हैं। |
लेखांकन नीतियाँ
3.लेखांकन नीतियाँ विशिष्ट लेखांकन सिद्धांतों और उन सिद्धांतों को लागू करने के तरीकों को संदर्भित करती हैं जो किसी व्यक्ति द्वारा अपनाए गए हैं।
लेखांकन नीतियों के चयन और परिवर्तन में विचार
4.किसी व्यक्ति द्वारा अपनाई गई लेखांकन नीतियाँ ऐसी होंगी जो कारोबार, पेशे या व्यवसाय की स्थिति और आय का सही और निष्पक्ष चित्रण प्रस्तुत करें। इस उद्देश्य के लिए,
| (i) | लेन-देन और घटनाओं का उपचार और प्रस्तुति उनके सार से नियंत्रित होगी न कि केवल कानूनी रूप से; और | |
| (ii) | बाजार हानि के अनुसार चिह्नित या अपेक्षित नुकसान को तब तक मान्यता नहीं दी जाएगी जब तक कि इस तरह के नुकसान की मान्यता किसी अन्य आय संगणना और प्रकटीकरण मानक के प्रावधानों के अनुसार न हो। |
5.बिना उचित कारण के लेखांकन नीति में परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
लेखांकन नीतियों का प्रकटीकरण
6.किसी व्यक्ति द्वारा अपनाई गई सभी महत्वपूर्ण लेखांकन नीतियों का खुलासा किया जाएगा।
7.किसी लेखांकन नीति में कोई भी परिवर्तन जिसका भौतिक प्रभाव होता है, उसका खुलासा किया जाएगा। जिस राशि से कोई भी वस्तु इस तरह के परिवर्तन से प्रभावित होती है, उसका खुलासा भी किया जाना चाहिए। जहाँ ऐसी राशि का पूर्ण या आंशिक रूप से पता नहीं लगाया जा सकता है, वहाँ तथ्य को इंगित किया जाएगा: यदि लेखांकन नीतियों में कोई परिवर्तन किया जाता है जिसका वर्तमान पिछले वर्ष के लिए कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन जिसके बाद के पिछले वर्षों में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की उचित उम्मीद है, तो इस तरह के परिवर्तन के तथ्य को पिछले वर्ष में उचित रूप से प्रकट किया जाएगा जिसमें परिवर्तन अपनाया गया है और पिछले वर्ष में भी जिसमें इस तरह के परिवर्तन का पहली बार महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।
8.लेखांकन नीतियों या उसमें परिवर्तन के प्रकटीकरण से किसी गलत या अनुचित तरीके से पेश किए गए वस्तु की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती है।
9.यदि चालू व्यवसाय, स्थिरता और उपार्जन की मूलभूत लेखांकन मान्यताओं का पालन किया जाता है, तो विशिष्ट प्रकटीकरण की आवश्यकता नहीं हैः यदि एक मौलिक लेखांकन धारणा का पालन नहीं किया जाता है, तो तथ्य का खुलासा किया जाएगा।
संक्रमणकालीन प्रावधान
10.अप्रैल 1, 2016 को या उससे पहले मौजूद या उसमें दर्ज किए गए सभी अनुबंध या लेनदेन का कारोबार, पिछले वर्ष के लिए 31 मार्च, 2016 को या उससे पहले समाप्त होने वाले उक्त अनुबंध या लेनदेन के संबंध में मान्यता प्राप्त आय, व्यय या हानि को ध्यान में रखते हुए इस मानक के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

