1[भविष्य निधि या मान्यताप्राप्त उपबंधित निधि में अंशदान से संबंधित कराधेय ब्याज की गणना विनिर्दिष्ट सीमा से अधिक होना
9घ. (1) धारा 10 के खंड (11) और (12) के पहले और दूसरे परन्तुक के प्रयोजन के लिए पूर्ववर्ती वर्ष (जिसे इसके पश्चात् इस नियम में चालू पूर्ववर्ती वर्ष कहा गया है) के दौरान प्रोद्भूत ब्याज के द्वारा आय की, जिसमें उक्त खंड के अधीन किसी व्यक्ति की कुल आय में सम्मिलित होने से छूट प्राप्त नहीं है, कराधेय अंशदान खाते में पूर्ववर्ती वर्ष के दौरान प्रोद्भूत ब्याज के रूप में संगणना की जाएगी।
(2) उपनियम (1) के अधीन कराधेय की ब्याज की गणना के प्रयोजन के लिए भविष्य निधि खाते में पृथक् खाते पूर्ववर्ती वर्ष 2021-2022 और व्यक्ति द्वारा किए गए कराधेय अंशदान और गैर-कराधेय अंशदान के लिए सभी पश्चात्वर्ती पिछले वर्षों के दौरान रखे जाएंगें।
स्पष्टीकरण:- इस नियम के प्रयोजन के लिए,—
(क) गैर-कराधेय अंशदान खाता निम्नलिखित का संकलित होगा, अर्थात्:—
(i) 31 मार्च, 2021 को खाते में अंतिम अतिशेष;
(ii) पूर्व वर्ष 2021-2022 और पश्चात्वर्ती वर्ष के दौरान खाते में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई अंशदान जिसमें कराधेय अंशदान खाता शामिल नहीं है; और
(iii) उपखंड (i) और उपखंड (ii) पर प्रौद्भूत ब्याज;
जो ऐसे खाते से निकासी द्वारा घटा दिया गया, यदि कोई हो
(ख) कराधेय अंशदान खाता निम्नलिखित का संकलित होगा, अर्थात्:—
(i) पूर्ववर्ती वर्ष 2021-22 और पश्चात्वर्ती वर्ष के दौरान खाते में किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कोई अंशदान जिसमें अवसीमा का अधिक्य है; और
(ii) उपखंड (i) पर प्रौद्भूत ब्याज;
जो ऐसे खाते से निकासी द्वारा घटा दिया गया, यदि कोई हो; और
(ग) अवसीमा से अभिप्रेत है:
(i) पांच लाख रूपए, यदि धारा 10 का खंड (10) या (12) का दूसरा परन्तुक लागू होता है; और
(ii) अन्य मामले में दो लाख पचास हजार रूपए]
1. आय-कर (पचीसवाँ संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 1.4.2022 से अंतस्थापित।

