1[धारा 48 के अधीन विनिर्दिष्ट आस्ति की शेष पूंजी आस्तियों से धारा 48 की उपधारा (4) के अधीन कराधेय आय माना जा सकना
8कख. (1) धारा 48 के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए, जहां धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन विनिर्दिष्ट अस्तित्व की आय के रूप में रकम आय-कर से प्रभार्य है, वहां विनिर्दिष्ट अस्तित्व ऐसी रकम को इस नियम में उपबंधित रीति में विनिर्दिष्ट अस्तित्व की शेष पूंजी आस्तित्व की शेष पूंजी आस्ति से हुआ मानेगा।
(2) जहां धन के मूल्य का कुल योग और विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त पूंजी आस्ति का ऋजु बाजार मूल्य, उसके पूंजी खाते के बकाया के आधिक्य में, धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभार्य होकर, विनिर्दिष्ट अस्तित्व की किसी पूंजी आस्ति पुनर्मूल्यांकन या स्व-सृजित आस्ति या स्व-सृजित गुडविल के मूल्यांकन से संबंधित है, तो धारा 48 के खंड (iii) के प्रयोजन के लिए विनिर्दिष्ट अस्तित्व की शेष पूंजी आस्ति से मानी जा सकने वाली रकम वह रकम होगी जो धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन भारित रकम का उसी अनुपात में वहन करती है जो पुन:मूल्यांकन या मूल्यांकन के कारण उस आस्ति के मूल्य में बढ़ोतरी या मान्यता अथवा पुन:मूल्यांकन या मूल्यांकन के कारण सभी आस्तियों के मूल्य में बढ़ोतरी या मान्यता के कुल योग का वहन करती है।
(3) जहां धन के मूल्य का कुल योग और विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त पूंजी आस्ति का ऋजु बाजार मूल्य, उसके पूंजी खाते के बकाया के आधिक्य में धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभारित होकर, विनिर्दिष्ट अस्तित्व की किसी पूंजी आस्ति के पुनर्मूल्यांकन या स्व-सृजित या स्व-सृजित गुडविल के मूल्यांकन से संबंधित नहीं है, तो धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभारित रकम धारा 48 के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए किसी पूंजी आस्ति से नहीं मानी जाएगी।
(4) उपनियम (2) या उपनियम (3) में किसी बात के होते हुए भी, जहां धन के मूल्य का कुल योग और विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त पूंजी अस्ति का ऋजु बाजार मूल्य, उसके पूंजी खाते के बकाया के आधिक्य में, धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभारित होकर केवल विनिर्दिष्ट अस्तित्व से विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त पूंजी आस्ति से संबंधित है, तो धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभारित रकम धारा 48 के खंड (iii) के प्रयोजनों के लिए किसी पूंजी आस्ति से नहीं मानी जाएगी।
(5) विनिर्दिष्ट अस्तित्व प्ररुप सं. 5ग विनिर्दिष्ट अस्तित्व की शेष पूंजी, आस्ति से मानी जा सकने वाली रकम के ब्यौरे प्रस्तुत करेगा।
(6) प्ररुप सं. 5ग को इलैक्ट्रॉनिक ढंग से या तो डिजिटल हस्ताक्षर करके या इलैक्ट्रॉनिक सत्यापन कूट के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा तथा उस व्यक्ति द्वारा सत्यापित किया जाएगा जो धारा 140 के अधीन विनिर्दिष्ट अस्तित्व के आय की विवरणी का सत्यापन करने के लिए प्राधिकृत हैं।
(7) प्ररुप सं. 5ग को उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसमें रकम धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन कर से प्रभार्य है, धारा 139 की उपधारा (1) के नीचे स्पष्टीकरण 2 में निर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व प्रस्तुत किया जाएगा।
(8) यथास्थित, आय-कर (प्रणाली) का प्रधान महानिदेशक या आय-कर (प्रणाली) का महानिदेशक करेगा-
(i) प्ररुप सं. 5ग फाइल करने के लिए प्रक्रिया विनिर्दिष्ट करना;
(ii) प्रक्रिया, रूप विधान, आंकड़ा सरंचना, मानकों और उक्त प्ररुप करने के लिए किसी व्यक्ति के सत्यापन के लिए उप-नियम 6 में निर्दिष्ट इलैक्ट्रानिक सत्यापन कोड के सृजन की रीति को विनिर्दिष्ट करना; और
(iii) इस प्रकार प्रस्तुत प्ररुप सं. 5ग के संबंध में नीतियों को पुन:प्राप्ति और क्रियान्वयन समुचित सुरक्षा और पुरालेखीय और प्रतिपादन के लिए उत्तदायी होना।
स्पष्टीकरण 1: इस नियम के प्रयोजनों के लिए धारा 45 की उप-धारा (4) के अधीन कर के लिए प्रभार्य रकम विनिर्दिष्ट असितत्व का कोई पूंजी आस्ति या स्वय सृजित आस्ति पुनर्मन्यन या स्वयं सृजित गुडविल के पुनर्मूल्यन के लिए संबंद्ध होगा यदि नियम 11प में यथापरिभाषित रजिस्ट्रीकृत मूल्यांकक से अभिप्राप्त मूल्यांकन रिपोर्ट पर आधारित पुनर्मूल्यन है।
स्पष्टीकरण 2: संदेह हटाने के लिए स्पष्ट किया जाता है कि कोई आस्ति का पुनर्मूल्यन या स्वयं सृजित मूल्यांकन या स्वयं सृजित गुडविल इसके मूल्यांकन के कारण स्वयं सृजित आस्ति के मूल्य की मान्यता या इसके पुनर्मुल्यन कारण से उस आस्ति के मूल्य बढ़ोत्तरी के अवक्षयण के लिए पात्र नहीं होता है।
स्पष्टीकरण 3: इस नियम के प्रयोजनों के लिए पद "स्वयं सृजित आस्ति" या "स्वयं सृजित गुडविल" का अर्थ वही होगा जो धारा 45 की उप-धारा (4) में उनको समनुदेशित किया गया है।]
1. आय-कर (अठारहवाँ संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 2.7.2021 से अंत:स्थापित।

