आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 8कक

कतिपय मामलों में पूंजी आस्तियों के धारण की अवधि का अवधारण की पद्धति

नियम संख्या.

8कक

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/12/2025

कतिपय मामलों में पूंजी आस्तियों के धारण की अवधि का अवधारण की पद्धति

कतिपय मामलों में पूंजी आस्तियों के धारण की अवधि का अवधारण की पद्धति

8कक. (1) वह अवधि जिसके लिए अधिनियम की धारा 2 के खंड (42क) के स्पष्टीकरण के खंड (i) में उल्लिखित पूंजी आस्तियों से भिन्न कोर्इ पूंजी आस्ति किसी निर्धारिती द्वारा धारण किया हुआ है, इस नियम के उपबंधों के अनुसरण में अवधारण किया जाएगा।

(2) पूंजी आस्ति की दशा में, जो कंपनी के शेयर या डिबेंचर हैं अधिनियम की धारा 47 के खंड (भ) में उल्लिखित परिस्थितियों में निर्धारिती की संपत्ति हो जाती है, वहां वह अवधि सम्मिलित की जाएगी जिसके लिए यथास्थिति, बंधपत्र, डिबेंचर, डिबेंचर-स्टॉक या निक्षेप प्रमाणपत्र संपरिवर्तन से पूर्व निर्धारिती द्वारा धारित किए गए थे।

(3) आयकर घोषणा स्कीम, 2016 के अधीन घोषित पूंजी आस्तियों की दशा में,–

 (i)  स्थावर सम्पत्ति होते हुए, वह अवधि जिसके लिए ऐसी सम्पत्ति धारण की जाती है की गणना उस तारीख, यदि अर्जन की तारीख का साक्ष्य राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी के साथ रजिस्ट्रीकृत विलेख द्वारा दिया जाता है से की जाएगी जिसको ऐसी सम्पत्ति अर्जित की जाती है; और

(ii)  किसी अन्य मामले में, उस अवधि जिसके लिए ऐसी आस्ति धारण की जाती है की गणना 1 जून, 2016 से की जाएगी।

7क[(4) ऐसी पूंजी आस्ति की दशा में, जो धारा 115ञछ की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी विदेशी कंपनी की शाखा के संपरिवर्तन के परिणामस्वरूप भारतीय समनुषंगी कंपनी की संपत्ति बन गर्इ है, ऐसी अवधि को सम्मिलित किया जाएगा, जिसमें आस्ति, विदेशी कंपनी की उक्त शाखा द्वारा और ऐसे पूर्ववर्ती स्वामी, यदि कोर्इ हो, द्वारा धारित की गर्इ थी, जिसने उक्त पूंजी आस्ति, धारा 49 की उपधारा (1) के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) या खंड (iv) या धारा 115ञछ की उपधारा (1) में निर्दिष्ट अर्जन की रीति द्वारा अर्जित की थी।;]

7कक[(5) उस रकम के मामले में जिसे शीर्ष "पूंजी लाभ" के अधीन धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन विनिर्दिष्ट अस्तित्व की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य किया जाता है,

  (i) रकम या उसका एक भाग लघु अवधि पूंजी आस्ति के अंतरण से समझा जाएगा, यदि यह निम्नलिखित से हुआ माना जा सकता है,--

  (क) पूंजी आस्ति जो धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन रकम के कराधान के समय लघु अवधि पूंजी आस्ति है; या

  (ख) आस्ति के खंड का हिस्सा बनने वाली पूंजी आस्ति; या

  (ग) धारा 45 के खंड (4) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में यथा परिभाषित पूंजी आस्ति जो स्व-सृजित आस्ति या स्व-सृजित गुडविल है; और

  (ii) रकम या उसका एक भाग दीर्घ अवधि पूंजी आस्ति या आस्तियों के अंतरण से समझा जाएगा, यदि वह उस पूंजी आस्ति से हुआ माना जा सकता हो जो खंड (i) के अंतर्गत नहीं आती तथा धारा 45 की उपधारा (4) के अधीन रकम के कराधान के समय दीर्घ अवधि पूंजी आस्ति है।]

 

7क. आय-कर (तेरहवां संशोधन) नियम, 2018 द्वारा 6.12.2018 से अंत:स्थापित।

7कक. आय-कर (अठारहवाँ संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 2.7.2021 से अंत:स्थापित।

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