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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 82

नियम संख्या.

82

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

एक ही कार्यवाही में अनेक वर्षों के लिए आसन्निकट कीमत अवधारित करने हेतु विकल्प का प्रयोग ।

82. (1) धारा 166(9)(क) के अनुसार विकल्प का प्रयोग निर्धारिती द्वारा एक ही कार्यवाही में

अनेक वर्षों के लिए आसन्निकट कीमत अवधारण हेतु प्ररूप संख्या 46 प्रस्तुत करके किया जा सकेगा। यह प्ररूप उस कर वर्ष (प्रथम कर वर्ष) के तुरंत पश्चात् आने वाले दो निरंतर कर वर्षों (द्वितीय कर वर्ष और तृतीय कर वर्ष) के लिए होगा, जिसके संबंध में उक्त धारा के अंतर्गत उसकी दशा में संदर्भ दिया गया है ।

(2) अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार के संबंध में प्ररूप संख्या 46 तृतीय कर वर्ष की समाप्ति से प्रारंभ होकर तृतीय कर वर्ष के उत्तरोत्तर 30 जून को समाप्त होने वाली अवधि के भीतर प्रस्तुत किया जाएगा।

(3) उपनियम (2) में प्रस्तुत प्ररूप संख्या 46 के साथ धारा 515 (3) (ख) में परिभाषित लेखाकार द्वारा प्ररूप संख्या 47 में दिया गया प्रमाण पत्र संलग्न होना चाहिए।

(4) यदि अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार उपनियम (5) में विहित शर्तों को पूरा करते हैं, तो अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी, उस मास के अंत से एक मास के भीतर, जिसमें ऐसे विकल्प का प्रयोग किया गया है, एक लिखित आदेश द्वारा घोषणा करेगा, कि प्ररूप संख्या 46 में प्रयोग किए गए विकल्प विधिमान्य हैं या विधिमान्य ।

(5) उपनियम (4) के प्रयोजनों के लिए विहित शर्तें इस प्रकार हैं:

(क) द्वितीय और तृतीय कर वर्ष में वे अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार, जिनके लिए प्ररूप संख्या 46 में विकल्प का प्रयोग किया गया है, प्रथम कर वर्ष में हुए अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार या विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार के समान होने चाहिए ;
(ख) संबंधित संव्यवहार को समान समझा जाएगा, यदि वे निम्नलिखित शर्तों को पूरा करते हैं:
(i) संबंधित संव्यवहार के लिए उचित मूल्य निर्धारित करने की विधि में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है;
(ii) संबंधित संव्यवहार के संबंध में पक्षकारों द्वारा प्रयुक्त परिसंपत्तियों और ग्रहण किए गए जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किए गए कार्य मूल रूप से सुसंगत बने रहते हैं,
(iii) संबंधित संव्यवहार के संबंध में, व्यावसायिक गतिविधियाँ, संबंधित वित्तीय, कर और लेखांकन पद्धतियां ; और कंपनी की दशा में निर्धारिती का वर्गीकरण मूल रूप से समान बना रहता है,
(iv) संबद्ध उद्यम के व्यावसायिक परिणाम या होल्डिंग संरचना में परिवर्तन होने पर भी, या संबद्ध उद्यम में परिवर्तन होने पर भी विकल्प या विकल्पों का प्रयोग लागू होगा, परंतु संबंधित संव्यवहार में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन न हो और नियोजित परिसंपत्तियों और उठाए गए जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, निष्पादित कार्यों में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन न हो; और
(v) संबंधित संव्यवहार की संविदात्मक शर्तों (चाहे वे औपचारिक हो या लिखित में) में कोई परिवर्तन न हो, जिनमें स्पष्ट या अप्रत्यक्ष रूप से यह निर्धारित किया गया हो कि संबंधित संव्यवहार के पक्षकारों के बीच उत्तरदायित्वों, जोखिमों और लाभों को कैसे विभाजित किया जाना है।
(ग) निर्धारिती ने प्रथम और द्वितीय कर वर्ष में निम्नलिखित प्रस्तुत किया है: —
(i) धारा 172 के अंतर्गत लेखाकार से निर्दिष्ट तारीख तक रिपोर्ट और
(ii) धारा 263(1) में निर्दिष्ट तारीख तक आय विवरण;
(घ) निर्धारिती तृतीय कर वर्ष के लिए निम्नलिखित प्रस्तुत करने का वचन देगा:
(i) धारा 515(3)(ख) में परिभाषित लेखाकार से धारा 172 के अंतर्गत निर्दिष्ट तारीख तक रिपोर्ट: और
(ii) धारा 263(1) में निर्दिष्ट तारीख तक आय विवरण;
(ङ) प्रथम, द्वितीय और तृतीय कर वर्ष के लिए निर्धारिती का मामला अध्याय 16-ख के उपबंधों के अधीन नहीं आता है; और
(च) संव्यवहार से संबंधित कोई भी संबद्ध उद्यम धारा 176 के अधीन अधिसूचित क्षेत्राधिकार का निवासी नहीं है।

(6) यदि निर्धारिती उपनियम (4) के अंतर्गत अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी के उस आदेश पर आपत्ति करता है, जिसमें विकल्प को अमान्य घोषित किया गया है, तो वह अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी के आदेश की प्राप्ति के पंद्रह दिनों के भीतर आयुक्त के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिसके अधीन अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी है।

(7) उपनियम (6) में निर्दिष्ट आपत्ति प्राप्त होने पर, आयुक्त निर्धारिती को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात्, निर्धारिती द्वारा प्रयोग किए गए विकल्प की विधिमान्यता या अविधिमान्यता के संबंध में उचित आदेश पारित करेगा और उक्त आदेश की एक प्रति निर्धारिती और अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी को तामील कराएगा।

(8) यदि धारा 166 के अधीन कार्यवाही के दौरान यह पाया जाता है कि निर्धारिती द्वारा प्ररूप संख्या 46 में दी गई जानकारी गलत या असत्य है, या धारा 515 (3) (ख) में परिभाषित लेखाकार द्वारा प्ररूप संख्या 47 में उसी आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है, या उपनियम (5) में निर्दिष्ट शर्तें पूरी नहीं हुई हैं, तो उपनियम (4) के अधीन पारित आदेश रद्द कर दिया जाएगा।

(9) उपनियम (4) के अधीन पारित आदेश को रद्द करने से पूर्व, अंतर मूल्य निर्धारण अधिकारी

निर्धारिती को सुनवाई का उचित अवसर देगा और आदेश रद्द करने से पहले आयुक्त से अनुमोदन प्राप्त करेगा।

(10) जहां निर्धारिती द्वारा प्रयोग किए गए विकल्प या विकल्पों को उपनियम (4) के अधीन अमान्य घोषित किया जाता है या उक्त उपनियम के अधीन पारित आदेश को अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया जाता है, तो अंतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी पहले कर वर्ष के लिए आसन्निकट कीमत निर्धारित करने के लिए कार्यवाही करेगा, जिसके लिए धारा 166(1) के अधीन निदेश प्राप्त हुआ है।

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