आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 7

नियम संख्या.

7

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

शून्य कूपन बंधपत्र की अधिसूचना के लिए प्रक्रिया ।

7. (1) किसी इकाई द्वारा जो कि अवसंरचना पूंजी कंपनी या अवसंरचना पूंजी निधि या अवसंरचना ऋण निधि या धारा 2(112) के अधीन एक पब्लिक सेक्टर की कंपनी है, उसके द्वारा जारी किए जाने वाले प्रस्तावित किसी शून्य कूपन बंधपत्र की अधिसूचना के लिए आवेदन ऐसे बंधपत्र के जारी होने की दिनांक से कम से कम तीन महीने पहले प्ररूप सं. 2 में किया जाएगा ।

(2) उपनियम (1) के अधीन किया गया आवेदन, ऐसे बंधपत्र की अधिसूचना के लिए नहीं किया जाएगा, जो उस वित्तीय वर्ष के पश्चात् दो वित्तीय वर्षों की अवधि के पश्चात जारी किया जाना है, जिसमें ऐसा आवेदन किया गया है।

(3) उपनियम (1) के अधीन प्रस्तुत आवेदन का निपटारा उस माह की समाप्ति से छह माह की अवधि के भीतर किया जाएगा, जिसमें ऐसा आवेदन प्राप्त हुआ हो।

(4) उपनियम (1) के अधीन प्रत्येक आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किए जाएंगे, अर्थात:-

(क) जहां आवेदन किसी अवसंरचना पूंजी कंपनी या अवसंरचना ऋण निधि या किसी पब्लिक सेक्टर की कंपनी द्वारा किया जाता है, जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2(45) के अधीन परिभाषित एक सरकारी कंपनी है. उक्त अधिनियम के अधीन निगमन के प्रमाणपत्र की एक प्रति:
(ख) जहां आवेदन किसी अवसंरचना पूंजी निधि द्वारा किया जाता है, वहां रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 (16 of 1908) के उपबंधों के अधीन रजिस्ट्रीकृत न्यास विलेख की एक कॉपी; और
(ग) जहां आवेदन किसी पब्लिक सेक्टर की कंपनी, जो किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम या प्रांतीय अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित कोई निगम है, द्वारा किया जाता है, सुसंगत अधिनियम की एक प्रति ।

(5) केन्द्रीय सरकार, अधिसूचना द्वारा शून्य कूपन बंधपत्र को विनिर्दिष्ट करते समय स्वयं को यह समाधान कर लेगी कि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं, अर्थात्:—

(क) बंधपत्र की जीवन अवधि दस वर्ष से कम और बीस वर्ष से अधिक नहीं होगी:
(ख) शून्य कूपन बंधपत्र जारी करने का प्रस्ताव करने वाली इकाई के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 12 (1क) के अधीन रजिस्ट्रीकृत कम से कम दो प्रत्यय रेटिंग अभिकरणों से विनिधान ग्रेड रेटिंग प्राप्त है;
(ग) उक्त इकाई द्वारा भारत में किसी मान्यता प्राप्त शेयर बाजार में शून्य कूपन बंधपत्र को सूचीबद्ध करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई है;
(घ) इकाई आवेदन के साथ एक वचनबद्धता प्रस्तुत करेगी कि शून्य कूपन बंधपत्र के जारी होने पर प्राप्त धन को उसके द्वारा निम्नलिखित रीति से विनिधान किया जाएगा, अर्थात्:-
(i) जिस वित्तीय वर्ष में बंधपत्र जारी किया गया हो, उसके तुरंत पश्चात् वाले वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ऐसी वसूली का 25% या उससे अधिक,
(ii) जिस वित्तीय वर्ष में बंधपत्र जारी किया गया है, उसके ठीक पश्चात् के चार वित्तीय वर्ष के समय के अंदर ऐसी आय का अतिशेष और
(ङ) जहां आवेदन किसी आधारिक ढांचा ऋण निधि द्वारा किया जाता है, ऐसी निधि आवेदन के साथ एक वचनबद्धता प्रस्तुत करेगी कि सभी शून्य कूपन बंधपत्रों पर अर्जित ब्याज के लिए एक डूबती निधि बनाए रखी जाएगी और इस तरह के ब्याज को सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 (2006 का 38) की धारा 2 (च) के अधीन परिभाषित सरकारी प्रतिभूति में विनिधान किया जाएगा।

(6) केन्द्रीय सरकार, इस नियम में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के बारे में स्वयं समाधान हो जाने के पश्चात, अधिसूचना द्वारा बंधपत्र को विनिर्दिष्ट करेगी, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित विवरण दिए जाएंगे: -

(क) बंधपत्र का नाम:
(ख) बंधपत्र की जीवन अवधि;
(ग) बंधपत्र जारी करने की समय-सारणी
(घ) बंधपत्र की परिपक्वता या मोचन पर भुगतान की जाने वाली रकम;
(ङ) छूट; और
(च) जारी किये जाने वाले बंधपत्रों की संख्या ।

(7) यदि आवेदक इस नियम में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने में विफल रहता है तो केन्द्रीय सरकार सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात अधिसूचना हेतु आवेदन को अस्वीकृत कर सकती है।

(8) प्रत्येक इकाई उपनियम (5)(घ) में निर्दिष्ट प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो महीने के भीतर धारा 515(3) (ख) में परिभाषित लेखाकार से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेगी, जिसमें प्ररूप संख्या 3 में प्रत्येक वर्ष विनिधान की गई रकम का उल्लेख किया जाएगा।

(9) यदि आवेदक इस नियम में निर्दिष्ट किसी भी शर्त को पूरा करने में विफल रहता है तो केन्द्रीय सरकार को अधिसूचना वापस लेने का अधिकार होगा।

(10) इस नियम के प्रयोजनों के लिए—

(i) " छूट" और "बंधपत्र की जीवन अवधि का वही अर्थ होगा जो उनका धारा 32 (घ) (i) और (11) में है; और
(ii) " अवसंरचना ऋण निधि से अवसंरचना ऋण निधि अभिप्रेत है, जिसे केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुसूची VII [सारणी क्रम संख्या: 46] के अधीन अधिसूचित करे ।

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