दूरसंचार सेवाओं के लिए स्पैक्ट्रम का उपयोग करने का अधिकार अभिप्राप्त करने के लिए व्यय
6क. (1) धारा 35कखक के प्रयोजन के लिए ''वास्तविक रूप में संदाय किया गया है'' पद से निम्नलिखित अभिप्रेत है,-
(क) जहां निर्धारिती ने स्पैक्ट्रम फीस का पूर्ण अग्रिम रूप में संदाय करने का विकल्प लिया है और दूरसंचार विभाग, भारत सरकार ने उसे अनुज्ञात कर दिया है वहां उस पूर्व वर्ष, जिसमें व्यय के लिए दायित्व निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से नियोजित लेखा पद्धति के अनुसार उपगत किया गया था, को ध्यान में न रखते हुए व्यय, का वास्तविक संदाय;
(ख) जहां निर्धारिती ने आस्थगित संदाय करने का विकल्प लिया है और दूरसंचार विभाग, भारत सरकार ने उसे अनुज्ञात कर दिया है वहां वह रकम, जो निर्धारिती द्वारा तब संदेय हुर्इ होती यदि उसने उस पूर्व वर्ष, जिसमें व्यय के लिए दायित्व निर्धारिती द्वारा नियमित रूप से नियोजित लेखा पद्धति के अनुसार उपगत किया गया था, को ध्यान में न रखते हुए स्पैक्ट्रम फीस का पूर्ण अग्रिम रूप में संदाय के लिए विकल्प लिया होता।
(2) उपनियम (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट आस्थगित संदाय के मामले में, जहां दूरसंचार विभाग, भारत सरकार की स्कीम द्वारा विनिर्दिष्ट शर्तों में से किसी शर्त का अनुपालन करने में निर्धारिती असफल रहता है और दूरसंचार विभाग स्पैक्ट्रम के आवंटन या समनुदेशन को समाप्त कर देता है, वहां निर्धारिती अधिकारी, धारा 35कखक की उपधारा (3) के अधीन उसमें निहित शक्ति का प्रयोग करते हुए उस पूर्ण वर्ष, जिसमें कटौती का दावा किया गया है और यह समझ कर उसे प्रदत्त किया गया है कि,-
(i) पर्यवसान की तारीख तक संदत्त स्पैक्ट्रम फीस की कुल रकम ''वास्तव में किए गए संदाय'' की रकम है;
(ii) ''सुसंगत पूर्व वर्ष'' की संगणना करने के प्रयोजन के लिए उसे पर्यवसान की तारीख तक स्पैक्ट्रम प्रवृत्त था,
के लिए निर्धारिती की कुल आय की पुन:संगणना करेगा

