निर्दिष्ट वित्तीय संस्था के खराब और संदिग्ध ऋण पर ब्याज के संबंध में विशेष उपबंध ।
42. (1) धारा 56 के उपबंध प्रत्येक सार्वजनिक वित्तीय संस्था, अनुसूचित बैंक, राज्य वित्तीय निगम और राज्य औद्योगिक विनिधान निगम के मामले में लागू होंगे, यदि ब्याज से उसकी आय खराब या संदिग्ध ऋणों की निम्नलिखित श्रेणियों से संबंधित है, --
| (क) | | किसी ऋण या अग्रिम रकम के संबंध में, जहां- |
| (i) | | ब्याज या मूलधन की किस्त एक सौ अस्सी दिन से अधिक समय से बकाया है: या |
| (ii) | | ओवरड्राफ्ट या नकद प्रत्यय के कारण लेखा खराब रहता है; या |
| (iii) | | खरीदे और छूट किए गए बिलों के मामले में बिल एक सौ अस्सी दिन से अधिक समय से ओवरड्यू है; या |
| (iv) | | कम समय की फसलों के लिए मूलधन या उस पर ब्याज की किस्त दो फसल मौसमों से बकाया है; या |
| (v) | | लंबे समय की फसलों के लिए मूलधन या उस पर ब्याज की किस्त एक फसल सीजन के लिए बकाया रह गई हो; या |
| (vi) | | भारतीय रिज़र्व बैंक (स्टैंडर्ड आस्तियों का सिक्योरिटाइज़ेशन) निर्देश, 2021 के अनुसार किए गए सिक्योरिटाइज़ेशन संव्यवहार के लिए लिक्विडिटी सुविधा की रकम एक सौ अस्सी दिनों से अधिक समय तक बकाया रहती हैं; या |
| (vii) | | व्युत्पन्न संव्यवहार के मामले में, व्युत्पन्न कॉन्ट्रैक्ट की पॉज़िटिव मार्क-टू-बाजार मूल्य दिखाने वाले ओवरड्यू रिसीवेबल्स, यदि संदाय की अवधारित दिनांक से एक सौ अस्सी दिन के समय तक इनका संदाय नहीं किया जाता है: और |
| (ख) | | किसी खाते के संबंध में, जहां, |
| (i) | | एक वर्किंग पूंजी बॉरोअल लेखा जिसमें लगातार 180 दिनों तक इर्रेगुलर ड्रॉइंग हो, भले ही यूनिट कार्य कर रही हो या बॉरोअर की वित्तीय हालत ठीक हो और इस मकसद के लिए, छह महीने से पुराने स्टॉक स्टेटमेंट से संगणित की गई ड्रॉइंग पावर के आधार पर लेखा में बकाया को इर्रेगुलर माना जाएगा, या |
| (ii) | | रेगुलर या एड हॉक प्रत्यय सीमा को ड्यू डेट या एड हॉक मंजूरी की दिनांक से एक सौ अस्सी दिनों के अंदर रिव्यू या रिन्यू नहीं किया गया है; या |
| (iii) | | सिक्योरिटी का मूल्य में कमी आई हैं और सिक्योरिटी की मिलने वाली मूल्य बैंक द्वारा अवधारित की गई या पिछले इंस्पेक्शन के समय रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा मानी गई मूल्य के 50% से कम है; या |
| (iv) | | बैंक या अनुमोदित निर्धारितीओं या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मूल्यांकित प्रतिभूति का वसूली योग्य मूल्य उधार खातों में बकाया रकम के 10% से कम है। |
(2) धारा 56 के उपबंध प्रत्येक पब्लिक कंपनी के मामले में लागू होंगे, जहां ब्याज के रूप में उसकी आय खराब और संदिग्ध ऋणों की निम्नलिखित श्रेणी से संबंधित है: -
| (क) | | (i) संदिग्ध संपत्ति, अर्थात ऐसा ऋण जो दो वर्ष से अधिक अवधि के लिए उपखण्ड (ii) में विनिर्दिष्ट प्रकृति की गैर-निष्पादित संपत्ति बना रहा हो; |
| | (ii) उप- खण्ड (i) में निर्दिष्ट गैर-निष्पादित संपत्ति निम्नलिखित होगी:--- |
| (अ) | | एक संपत्ति, जिसके संबंध में ब्याज एक सौ अस्सी दिनों से अधिक की अवधि के लिए बकाया है; |
| (आ) | | एक अवधि ऋण (किसी कृषक या ऐसे व्यक्ति को दिए गए ऋण से भिन्न जिसकी आय फसलों की कटाई पर निर्भर है) अवैतनिक ब्याज सहित जब किस्त एक सौ अस्सी दिन या उससे अधिक की अवधि के लिए बकाया है या जिस पर ब्याज रकम एक सौ अस्सी दिनों से अधिक की अवधि के लिए बकाया |
| (इ) | | मांग या मांग ऋण, जो मांग या मांग की दिनांक से एक सौ अस्सी दिन से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय रहा हो या जिस पर ब्याज रकम एक सौ अस्सी दिन से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय रही हो; |
| (ई) | | ऐसा बिल जो एक सौ अस्सी दिन से अधिक की अवधि से अतिदेय हो; |
| (उ) | | अल्पकालिक ऋण या अग्रिम की प्रकृति में अन्य चालू आस्तियों शीर्षक के अधीन ऋण के संबंध में ब्याज या प्राप्य रकम पर आय, जो सुविधा एक सौ अस्सी दिनों से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय रही |
| (ऊ) | | आस्तियों की विक्रय या प्रदान की गई सेवाओं या किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति के कारण कोई बकाया रकम, जो एक सौ अस्सी दिनों से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय रही हो, |
| (ऋ) | | पट्टा किराया और किराया क्रय किस्त जो एक सौ अस्सी दिन से अधिक की अवधि के लिए अतिदेय हो गई हैं: |
| (ए) | | किसी कृषक या ऐसे व्यक्ति को संदत्त सावधि ऋण, जिसकी आय फसलों की कटाई पर निर्भर करती है, यदि मूलधन या उस पर ब्याज की किस्त का भुगतान नहीं किया गया है - |
| (i) | | ड्यू डेट के पश्चात् दो क्रॉप सीज़न के लिए यदि बॉरोअर की आय कम समय की फसलों पर निर्भर या |
| (ii) | | देय दिनांक के पश्चात् एक फसल मौसम के लिए, यदि उधारकर्ता की आय दीर्घकालिक फसल पर निर्भर है: |
| (ऐ) | | लोन, एडवांस और दूसरी प्रत्यय सुविधाओं (खरीदे और छूट किए गए बिलों सहित) के मामले में, प्रत्यय सुविधाओं के अधीन बकाया अतिशेष (जमा हुआ ब्याज सहित) जो उसी कर्जदार या बेनिफिशियरी को दिया जाता है, जब ऊपर विनिर्दिष्ट कोई भी प्रत्यय सुविधा नॉन परफॉर्मिंग आस्ति बन जाती है; और |
| (ख) | | हानि संपत्ति, अर्थात ऐसी संपत्ति जिसकी पहचान हानि संपत्ति के रूप में की गई है तथा जिसे वसूली योग्य नहीं माना गया है, परंतु निर्धारिती द्वारा उसे बट्टे खाते में नहीं डाला गया है। |
(3) इस नियम के प्रयोजनों के लिए--
| (क) | | ओवरड्राफ्ट या नकद प्रत्यय खाता "आउट ऑफ ऑर्डर" माना जाएगा, यदि -- |
| (i) | | ओवरड्राफ्ट या नकद प्रत्यय लेखा में बकाया अतिशेष, मंजूर सीमा या ड्रॉइंग पावर से लगातार एक सौ अस्सी दिनों तक अधिक रहता है; या |
| (ii) | | ओवरड्राफ्ट या नकद प्रत्यय खाते में बकाया रकम स्वीकृत सीमा या आहरण शक्ति से कम है, लेकिन एक सौ अस्सी दिनों तक लगातार कोई प्रत्यय नहीं है, या ओवरड्राफ्ट या नकद प्रत्यय खाते में बकाया रकम स्वीकृत सीमा या आहरण शक्ति से कम है, लेकिन प्रत्यय पिछले एक सौ अस्सी दिनों की अवधि के दौरान डेबिट किए गए ब्याज को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं है; |
| (ख) | | "दीर्घ अवधि की फसल से एक वर्ष से अधिक लंबे फसल मौसम वाली फसल अभिप्रेत है; |
| (ग) | | "पब्लिक कंपनी से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है. |
| (i) | | जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2(71) के अर्थान्तर्गत एक पब्लिक कंपनी |
| (ii) | | जिसका मुख्य मकसद भारत में रहने के मकसद से घर बनाने या क्रय करने के लिए लंबे समय का फाइनेंस देने का कारबार करना है; और |
| (iii) | | जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 29ए के अधीन या स्थानीय सरकार द्वारा जारी आवास वित्त कंपनी (एनएचबी) निर्देश, 1989 या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - आवास वित्त कंपनी (रिज़र्व बैंक) निर्देश, 2021 के अनुसार रजिस्ट्रीकृत है। |
| (घ) | | "अल्प अवधि की फसल से ऐसी फसल अभिप्रेत है जो दीर्घकालिक फसल नहीं है; |
| (ङ) | | "प्रत्येक फसल के लिए फसल मौसम से फसलों की कटाई तक की अवधि अभिप्रेत है, जैसा कि प्रत्येक राज्य में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा अवधारित किया जा सकता है; |