ख.-गृह सम्पत्ति से आय
वसूल न किया गया किराया
4. धारा 23 की उपधारा (1) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण के प्रयोजनों के लिए, किराए की वह रकम, जिसे स्वामी वसूल नहीं कर सकता, किराए की उस रकम के बराबर होगी जो निर्धारिती के किराएदार (अभिधारी) द्वारा संदेय है किन्तु उसका उसके द्वारा संदाय नहीं किया गया है और जिसके बारे में यह साबित किया गया है कि उसकी इस प्रकार हानि हुर्इ है और वह वसूलनीय नहीं है, जहां-
(क) किराएदारी सद्भाविक है;
(ख) व्यतिक्रमी किराएदार ने संपत्ति खाली कर दी है या संपत्ति खाली करने के लिए उसे बाध्य करने की कार्रवार्इ की गर्इ है;
(ग) निर्धारिती की कोर्इ अन्य संपत्ति व्यतिक्रमी किराएदार के अधिभोग में नहीं है;
(घ) निर्धारिती ने असंदत्त किराए की वसूली के लिए विधिक कार्यवाहियां संस्थित करने संबंधी सभी उचित कार्रवार्इ की है या उसने निर्धारण अधिकारी का यह समाधान कर दिया है कि विधिक कार्यवाहियां निरर्थक होंगी।

