लेखे ।
294. (1) भविष्य निधि के लेखे बारह मास से अनधिक के अंतराल पर तैयार किए जाएंगे।
(2) निधि के प्रत्येक अभिदाता के लिए एक लेखा रखा जाएगा और उसमें प्ररूप संख्या 185 के भाग- क में दर्शायी गई विशिष्टियां भी सम्मिलित होंगी।
(3) जहां भविष्य निधि के लेखे भारत के बाहर रखे जाते हैं, वहां लेखाओं की प्रमाणित प्रतियां प्रत्येक वर्ष 15 जून या निर्धारण अधिकारी द्वारा नियत किसी अन्य पश्चात्वर्ती तारीख तक भारत में नियोक्ता के स्थानीय प्रतिनिधि को प्रदाय कराई जाएंगी।
(4) भविष्य निधि में भाग लेने वाले प्रत्येक कर्मचारी के कर वर्ष के व्यक्तिगत लेखा का सारांश न्यासियों द्वारा प्ररूप संख्या 185 के भाग ख में निम्नानुसार-
| (क) | उस क्षेत्र के निर्धारण अधिकारी को जिसमें निधि के लेखा रखे जाते हैं, या यदि लेखा भारत के बाहर रखे जाते हैं, तो उस क्षेत्र के निर्धारण अधिकारी को जिसमें नियोक्ता का स्थानीय मुख्यालय स्थित हैं, और | |
| (ख) | प्रत्येक वर्ष 15 जून तक या निर्धारण अधिकारी द्वारा नियत किसी अन्य पश्चात्वर्ती तारीख तक । |
प्रस्तुत किया जाएगा।
(5) अधिनियम की अनुसूची 11 के भाग क के पैरा 11 (1) के उपबंधों के अधीन बनाए जाने वाले लेखाओं में प्रत्येक कर्मचारी के संबंध में निम्नलिखित को दर्शाया जाएगा:
| (क) | भविष्य निधि में कर्मचारी की भागीदारी की अवधि के दौरान उसे संदत्त कुल वेतन, | |
| (ख) | कुल अभिदाय | |
| (ग) | उस पर उपार्जित कुल ब्याज, और | |
| (घ) | जहां तक संभव हो, कर्मचारी के वेतन का वह प्रतिशत जिसके अनुसार नियोक्ता और कर्मचारी द्वारा अभिदाय किया गया है। |
(6) प्रत्येक नियोक्ता प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात् यथाशीघ्र निधि में उसके खाते का विवरण निम्नलिखित विवरणों के साथ प्रत्येक सदस्य को भेजेगा:
| (क) | अवधि के प्रारंभ में प्रारंभिक अतिशेषः | |
| (ख) | वर्ष के दौरान अभिदाय की गई रकम | |
| (ग) | अवधि के अंत में प्रत्यय किया गया या अवधि के दौरान विकलन किया गया कुल ब्याज; और | |
| (घ) | अवधि के अंत में अंतिम अतिशेष । |

