अधिनियम की अनुसूची 7 [सारणी: क्रम संख्या 46] के अधीन छूट के प्रयोजन हेतु किसी अवसंरचना ऋण निधि की स्थापना के लिए प्रक्रिया ।
288. (1) इस नियम के अधीन प्रत्येक अवसंरचना ऋण निधि को भारतीय रिज़र्व बैंक उपबंधित नियामक ढांचे में अधिकथित शर्तों के अनुरूप और उनका समाधान करने वाली किसी गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी के रूप में स्थापित किया जाएगा।
(2) अवसंरचना ऋण निधि की निधियों का विनिधान केवल निम्नलिखित में किया जाएगा:-
| (क) | प्रचालन के प्रारंभ की तारीख के पश्चात् अवसंरचना परियोजनाएं जिन्होंने कम से कम एक वर्ष का समाधानप्रद वाणिज्यिक प्रचालन पूरा कर लिया हो, या | |
| (ख) | प्रत्यक्ष ऋणदाता के रूप में टोल प्रचालन- अंतरण परियोजनाएं | |
(3) अवसंरचना ऋण निधि निम्नलिखित सारणीके स्तंभ ख में विनिर्दिष्ट रीति निधि एकत्रित करेगी, जो कि उसके स्तंभ ग में उल्लिखित शर्तों के अध्यधीन होगी:
सारणी
क्रम संख्या | निधि एकत्रित करने की रीति | शर्तें |
क | ख | ग |
1. | रुपये मूल्यवर्ग के बंधपत्र या विदेशी मुद्रा बंधपत्र का जारी किया जाना। | (क) ऐसे बंधपत्र भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशों और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (1999 का 42) के अधीन बनाए गए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (भारत के बाहर निवासी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण या निर्गमन) विनियम, 2000 के अधीन संबंधित विनियमों के अनुरूप होने चाहिए; और |
2. | शून्य कूपन बंधपत्र का जारी किया जाना | (क) ऐसे बंधपत्र नियम 7 के अनुसार, और (ख) क्रम संख्या 1 के खंड (ख) स्तंभ ग में यथाउल्लिखित। |
3. | बाह्य वाणिज्यिक उधार के अधीन ऋण मार्ग के माध्यम से धन एकत्रित करना । | (क) ऐसी बाह्य वाणिज्यिक उधारी, भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा विनिमय विभाग के निदेशों के अनुसार होगी; और |
(4) किसी भी समय अवसंरचना ऋण निधि द्वारा किसी व्यक्तिगत परियोजना या समूह से संबंधित परियोजना में किया गया विनिधान, समग्र निधि के 20% से अधिक नहीं होगा।
(5) अवसंरचना ऋण निधि द्वारा किसी ऐसी परियोजना में विनिधान नहीं किया जाएगा जिसमें उसके विनिर्दिष्ट शेयरधारक या संबद्ध उद्यम या ऐसे विनिर्दिष्ट शेयरधारक के समूह का सारवान् हित हो।
(6) अवसंरचना ऋण निधि धारा 263 (1) (क) द्वारा यथाअपेक्षित अपनी आय की विवरणी धारा 263(1)(ग) में विनिर्दिष्ट नियत तारीख को या उससे पहले फाईल करेगी।
(7) यदि अवसंरचना ऋण निधि इस नियम में दी गई किसी भी शर्त या भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देशों को पूरा नहीं करती है, तो अधिनियम के सभी उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो वह अधिनियम की अनुसूची 7 [सारणी: क्रम संख्या 46] में निर्दिष्ट अवसंरचना ऋण निधि न हो।
(8) इस नियम में,-
| (क) | "संबद्ध उद्यम" का वही अर्थ होगा जो धारा 162 में उसका है, | |
| (ख) | "स्थापन' का वही अर्थ होगा जो धारा 2(40) में उसका | |
| (ग) | "समग्र निधि" से विनिधान के प्रयोजन से एकत्रित की गई अवसंरचना ऋण निधि की कुल निधियां अभिप्रेत हैं; | |
| (घ) | "समूह" से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (पारस्परिक निधि) विनियम, 1996 की धारा 2 (इड) में परिभाषित समूह अभिप्रेत है, | |
| (ङ) | किसी व्यक्ति को निम्नलिखित में सारवान् रूप से हित रखने वाला माना जाएगा: |
| (i) | किसी कंपनी, यदि वह शेयरों (वे शेयर नहीं जो निश्चित दर पर लाभांश के हकदार हैं, चाहे लाभ में हिस्सेदारी का अधिकार हो या न हो) का फायदाग्राही स्वामी है (जिसमें उसके एक या अधिक नातेदारों द्वारा धारित फायदाग्राही स्वामित्व भी सम्मिलित है, यदि वह व्यक्ति कोई व्यष्टि है) और उसके पास कम से कम 10% का मताधिकार है; या | |
| (ii) | कंपनी के सिवाय कोई समुत्थान, यदि वह कर वर्ष के दौरान किसी भी समय, ऐसे समुत्थान की आय के कम से कम 20% का फायदाग्राही हकदार है; |
| (च) | किसी व्यक्ति के संबंध में "नातेदार" से निम्नलिखित अभिप्रेत है— |
| (i) | उस व्यक्ति का पति या पत्नी या | |
| (ii) | उस व्यक्ति का भाई या बहन; या | |
| (iii) | उस व्यक्ति के पति या पत्नी का भाई या बहन, या | |
| (iv) | व्यक्ति के माता-पिता में से किसी एक का भाई या बहन, या | |
| (v) | उस व्यक्ति का कोई भी वंशज या पूर्वज या | |
| (vi) | उस व्यक्ति के पति या पत्नी का कोई भी वंशज या पूर्वज; या | |
| (vii) | उपखंड (ii) से उपखंड (vi) में निर्दिष्ट व्यक्तियों के पति या पत्नी; या | |
| (viii) | किसी व्यक्ति या उसके पति या पत्नी के भाई या बहन का कोई भी वंशज; और |
| (छ) | "विनिर्दिष्ट शेयरधारक" से कोई ऐसी गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी, या बैंक, या किसी अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है जो अवसंरचना ऋण निधि में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, मताधिकार के कम से कम 30% धारित करता है। |

