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वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 274

नियम संख्या.

274

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

अधिनियम की अनुसूची 1 के साथ पठित धारा 9 (12) के अधीन फायदा प्राप्त करने के लिए विनिधान निधि की प्रक्रिया ।

274. (1) जहां किसी निधि में विनिधान प्रत्यक्षतः संस्थागत इकाई द्वारा किया गया है, ऐसी निधि में सदस्यों की संख्या और भागीदारी हित का अवधारण उक्त इकाई को देखकर किया जाएगा, यदि वह, -

(क) स्वतंत्र रूप से अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 1(1) (ग), पैरा 1(ङ), पैरा 1(च) और पैरा 1 (छ) में उल्लिखित शर्तों को पूरा करता है,
(ख) केवल निधियों को एकत्रित करने और उसके विनिधान के प्रयोजनों से स्थापित किया गया है, और
(ग) एक ऐसे देश या निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र का निवासी है जिसके साथ धारा 159 में निर्दिष्ट कोई करार किया गया है या स्थापित किया गया है, निगमित किया गया है, या किसी एक ऐसे देश या निर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में रजिस्ट्रीकृत है जिसे केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में अधिसूचित किया गया है।

(2) किसी निधि को अधिनियम की अनुसूची 1 के प्रयोजनों के लिए कोई पात्र निधि होने के फायदे को मना नहीं किया जाएगा, यदि, —

(क) अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 1(1) (ग), पैरा 1 (1) (घ) और पैरा 1 (1) (ङ) में निर्दिष्ट शर्तों में से किसी का भी पूरा न होना,—
(i) निधि के नियंत्रण से परे कारणों से है और यह नब्बे दिनों की अवधि से अधिक नहीं है; या
(ii) अठारह मास की अवधि से अधिक नहीं है, जो उस तारीख से शुरू होती है जिसको निधि स्थापित किया गया है या निधि के अंतिम समापन से अधिक नहीं है, जो भी पूर्वतर हो, और अधिनियम की अनुसूची की पैरा 1(1) (ग), पैरा 1(1) (घ) और पैरा 1(1) (ङ) में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के लिए वास्तविक रूप से प्रयास किए गये हैं; या
(iii) इस कारण से है कि निधि परिसमापन होने की प्रक्रिया में है और यह उस तारीख से शुरू होने वाले एक वर्ष से अधिक नहीं है जिसको परिसमापन की प्रक्रिया शुरू हुई है, या
(ख) अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 1 (4) में निर्दिष्ट विवरण प्रस्तुत करने में देरी हुई है और ऐसी देरी नब्बे दिनों से अधिक नहीं है।

(3) अधिनियम की अनुसूची के पैरा 1(1) (ट) के प्रयोजनों के लिए, किसी निधि को किसी इकाई द्वारा किये जा रहे कारबार को नियंत्रित या प्रबंधित करना कहा जाएगा, यदि वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसे अधिकार रखती है जिसके परिणामस्वरूप इकाई में निधि धारण, यथास्थिति, कुल शेयर पूंजी या मतदान शक्ति या हित का 26% से अधिक हो जाता है।

(4) अधिनियम की अनुसूची 1 की धारा 1(1)(ड) में निर्दिष्ट किसी निधि प्रबंधक को निधि द्वारा संदत्त की जाने वाली पारिश्रमिक की रकम निम्नलिखित रीति से संगणित की गई रकम से कम नहीं होगी:

(क) जहां निधि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानक) विनियम, 2019 के विनियम (क) की मद (1) या मद (11) या मद (iii) और उपमद (iii) में निर्दिष्ट प्रवर्ग विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता है, पारिश्रमिक की रकम प्रबंधन के अधीन आस्ति का 0.10% होगी, और
(ख) अन्य मामलों में, पारिश्रमिक की रकम—
(i) प्रबंधन के अधीन आस्ति का 0.30% होगी, या
(ii) निधि प्रबंधक द्वारा किये गए निधि प्रबंधन क्रियाकलाप से विनिर्दिष्ट बाधा दर से अधिक निधि द्वारा व्युत्पन्न लाभ का 10% होगी,
 जहां यह केवल निधि द्वारा व्युत्पन्न आय या लाभ से जुड़े पारिश्रमिक का हकदार है, या
(iii) जहां निधि किसी अन्य निधि प्रबंधक को प्रबंधन फीस का संदाय भी कर रहा है, वह ऐसे प्रबंधन शुल्क का 50%, चाहे वह निश्चित प्रभार की प्रकृति में हो या निधि प्रबंधक द्वारा किये गये प्रबंधन क्रियाकलाप से व्युत्पन्न आय या लाभ से जुड़ा हो, जिसका संदाय निधि प्रबंधक द्वारा किए गए निधि प्रबंधन क्रियाकलाप के संबंध में ऐसे निधि द्वारा वितरण संबंधी व्ययों सहित प्रचालन व्ययों के लिए उपगत की गई रकम यदि कोई हो, को कम करके किया गया है

(5) जहां पारिश्रमिक की रकम उपनियम (4) के अधीन पहुंची रकम से कम है, तो निधि नियम 275 (2) में निर्दिष्ट केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सदस्य को उक्त नियम के अधीन बोर्ड की मंजूरी की ईप्सा करते हुए उस कम रकम को पारिश्रमिक की रकम के रूप में आवेदन कर सकेगी और ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर यदि सुसंगत तथ्यों पर विचार करते हुए बोर्ड का समाधान हो जाता है, तो वह ऐसी कम रकम को पारिश्रमिक रकम के रूप में अनुमोदित कर सकेगा।

(6) जहां उपनियम (5) के अधीन आवेदन किया जाता है, वहां नियम 275 (3) से नियम 275(12) के उपबंध, यथावश्यक परिवर्तन के साथ, उक्त आवेदन पर उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे उक्त नियम के उपनियम (2) के अधीन किए गए आवेदन पर लागू होते हैं।

(7) निधि प्रबंधक, धारा 172 के अधीन उसके द्वारा प्रस्तुत की जाने के लिए अपेक्षित किसी रिपोर्ट के अतिरिक्त, निधि के लिए किये गये क्रियाकलाप के संबंध में धारा 515 (3) (ख) में यथापरिभाषित लेखाकार से कोई रिपोर्ट प्राप्त करेगा और इसमें इंगित रीति से ऐसे लेखाकार द्वारा सम्यक रूप से सत्यापित ऐसी रिपोर्ट को प्ररूप सं. 172 में विनिर्दिष्ट तारीख पर या उससे पहले प्रस्तुत करेगा, और अधिनियम के सभी उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानो यह धारा 172 के अधीन प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट है।

(8) अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 1 (3) (क) के प्रयोजनों के लिए, एक निधि प्रबंधक को केवल इस कारण से निधि का एक संबद्ध व्यक्ति नहीं माना जाएगा कि निधि प्रबंधक उक्त निधि के निधि प्रबंधन संबंधी क्रियाकलाप कर रहा है।

(9) अधिनियम की अनुसूची के पैरा 1 (3) (घ) के प्रयोजनों के लिए, निधि प्रबंधक द्वारा निधि से व्युत्पन्न आय या लाभ पर निर्भर नहीं होने वाले निश्चित प्रभार की प्रकृति में निधि प्रबंधक को संदत्त किया गया कोई भी पारिश्रमिक, उक्त खंड में निर्दिष्ट लाभों में सम्मिलित नहीं किया जाएगा, यदि—

(क) अधिनियम की अनुसूची 1 के पैरा 1(1) (ड) में विनिर्दिष्ट शर्तें पूरी होती हैं, और
(ख) ऐसा निश्चित प्रभार पर निधि प्रबंधक द्वारा संबंधित निधि प्रबंधन संबंधी क्रियाकलाप के आरंभ में ही में लिखित रूप में सहमति व्यक्त की गई है।

(10) इस नियम के प्रयोजनों के लिए,—

(क) "प्रबंधन के अधीन आस्ति" से निधि प्रबंधक द्वारा यथाप्रबंधित निधि के ऐसे भाग के मूल्य के मासिक औसत के उद्घाटन और समापन अतिशेष रकम का वार्षिक औसत अभिप्रेत है,
(ख) "प्रबंधन शुल्क" से इस प्रयोजन के लिए नियम 10 (क) में परिभाषित लेखाकार से प्राप्त प्रमाण पत्र में उल्लिखित रकम अभिप्रेत है, और
(ग) "विनिर्दिष्ट बाधा दर से एक पूर्व-परिभाषित सीमा अभिप्रेत है जिसके पार निधि, निधि प्रबंधक द्वारा किए गए निधि प्रबंधन क्रियाकलाप से अर्जित लाभ के हिस्से का संदाय करने के लिए सहमत होती है।

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