धारा 533(2)(प) के अधीन ब्याज की संगणना करने में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ।
269. अधिनियम के किसी उपबंध के अधीन निर्धारिती द्वारा संदेय ब्याज या निर्धारिती को केंद्र सरकार द्वारा संदेय ब्याज की संगणना करने में.—
| (क) | जहां ब्याज की संगणना वार्षिक आधार पर की जानी है, उस अवधि के लिए जिसके लिए ऐसे ब्याज की संगणना की जानी है, उसे पूरे मास या मासों में पूर्णांकित किया जाएगा और इस प्रयोजन के लिए महीने के किसी भी अंश को नजरअंदाज कर दिया जाएगा; और इस प्रकार पूर्णांकित अवधि को वह अवधि माना जाएगा जिसके संबंध में ब्याज की संगणना की जानी है; | |
| (ख) | जहां ब्याज की संगणना प्रत्येक मास या अवधि में शामिल मास के किसी भाग के लिए की जानी है, तो महीने के किसी भी अंश को एक पूर्ण मास माना जाएगा और ब्याज की संगणना इस प्रकार की जाएगी; और | |
| (ग) | कर, शास्ति या अन्य राशि की वह रकम, जिसके संबंध में ऐसा ब्याज संगणित किया जाना 100 रुपये के निकटतम गुणज में पूर्णांकित किया जाएगा और इस प्रयोजन के लिए 100 रुपये के किसी भी भिन्न को नजरअंदाज किया जाएगा और इस प्रकार पूर्णांकित रकम को वह रकम माना जाएगा जिसके संबंध में ब्याज की संगणना की जानी है। |

