धारा 506 के अधीन प्रस्तुत की जाने वाली सूचनाएँ या दस्तावेज ।
235. (1) धारा 506 में विनिर्दिष्ट प्रत्येक भारतीय हितधारक उक्त धारा के प्रयोजनों के लिए इस नियम के अनुसार सूचनाएँ और दस्तावेज रखेगा और प्रस्तुत करेगा।
(2) सूचना प्ररूप संख्या 163 में डिजिटल हस्ताक्षर के अधीन इलेक्ट्रॉनिक रूप से उस निर्धारण अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी जिसका अधिकारिता भारतीय हितधारक पर हैं, यह सूचना उस वित्तीय वर्ष, जिसमें धारा 9(10)(क) में विनिर्दिष्ट विदेशी कंपनी या इकाई के शेयर या हित का कोई हस्तांतरण हुआ है, की समाप्ति से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर प्रस्तुत की जाएगी, और जहां शेयर या हित के संबंध में ऐसे लेनदेन का भारतीय हितधारक के संबंध में प्रबंधन या नियंत्रण के अधिकारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित करने का प्रभाव है, तो सूचना उक्त प्ररूप में उस लेनदेन के नब्बे दिनों के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।
(3) भारतीय हितधारक को निम्नलिखित जानकारी, अपेक्षिततानुसार उसके अंग्रेजी अनुवाद सहित, रखनी होगी और उप-नियम (2) के अधीन दी गई जानकारी को प्रमाणित करने के लिए किसी भी आयकर प्राधिकारी द्वारा कार्यवाही के दौरान मांगे जाने पर उसे प्रस्तुत करना होगा:—
| (क) | भारतीय हितधारक की आसन्न होल्डिंग कंपनी या इकाई, मध्यवर्ती होल्डिंग कंपनी या कंपनियों या इकाई या इकाइयों और अंतिम होल्डिंग कंपनी या इकाई का विवरण; | |
| (ख) | भारत में उन अन्य इकाइयों का विवरण जिनके समूह का भारतीय हितधारक एक घटक है; | |
| (ग) | हस्तांतरण से पहले और पश्चात में विदेशी कंपनी या इकाई के शेयरों या हित की होल्डिंग संरचना; | |
| (घ) | किसी भी विदेशी कंपनी या इकाई के शेयर या हित के संबंध में किया गया कोई भी हस्तांतरण संविदा या समझौता, जो भारतीय हितधारक के माध्यम से या उसमें भारत में कोई संपत्ति रखती है; | |
| (ड) | विदेशी कंपनी या इकाई के वित्तीय और लेखा विवरण, जो शेयर या हित के हस्तांतरण की तारीख से दो वर्ष पहले तक भारतीय हितधारक के माध्यम से या उसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत में संपत्ति रखती है; | |
| (च) | हस्तांतरण की समग्र व्यवस्था के निर्णय या कार्यान्वयन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी; | |
| (छ) | विदेशी कंपनी या इकाई और उसकी अनुषंगी कंपनियों के संबंध में निम्नलिखित से संबंधित जानकारी: |
| (i) | कारबार परिचालन: | |
| (ii) | कार्मिक: | |
| (iii) | वित्त और संपत्तियां: | |
| (iv) | आंतरिक और बाह्य लेखापरीक्षा या मूल्यांकन रिपोर्ट, यदि कोई हो, जो शेयर या हित के संबंध में प्रतिफल का आधार बनती है; |
| (ज) | हस्तांतरित किए जा रहे शेयर या हित के स्थान का निर्धारण करने के लिए आस्ति मूल्यांकन रिपोर्ट और अन्य सहायक साक्ष्य; | |
| (झ) | भारत के बाहर कर संदाय का विवरण, जो शेयर या हित के हस्तांतरण से संबंधित है; | |
| (ञ) | धारा 515(3)(ख) में यथा - परिभाषित व्यापारी बैंकर या लेखाकार द्वारा विधिवत प्रमाणित भारतीय आस्ति और कुल आस्तियों के संबंध में मूल्यांकन रिपोर्ट, सहायक साक्ष्य सहित; और | |
| (ट) | लेखांकन प्रथाओं के अधीन लेनदेन के संबंध में जारी किए गए दस्तावेज । |
(4) यदि किसी समूह में एक से अधिक भारतीय हितधारक शामिल हैं, तो सूचना किसी एक भारतीय हितधारक द्वारा दी जा सकती है, यदि —
| (क) | समूह ने ऐसे भारतीय हितधारक को समूह के सभी अन्य भारतीय हितधारकों की ओर से सूचना देने के लिए नामित किया हो; और | |
| (ख) | नामित भारतीय हितधारक के संबंध में सूचना समूह की ओर से लिखित रूप में निर्धारण अधिकारी को दी गई हो। |
(5) इस नियम में अंतर्विष्ट कोई भी बात तब प्रभावी नहीं होगी, जब नामित भारतीय हितधारक इस नियम के उपबंधों के अनुसार सूचना प्रस्तुत करने में विफल रहता है।
(6) आयकर महानिदेशक (प्रणाली) प्ररूप संख्या 163 की एक प्रति उस निर्धारण अधिकारी को भेजेगा, जिसकी अधिकारिता में उसमें उल्लिखित हस्तांतरणकर्ता आता है, जिसकी आय धारा 9(10) के अनुसार कर योग्य है।
(7) उप-नियम (3) में विनिर्दिष्ट सूचना एवं दस्तावेज संबंधित कर वर्ष की समाप्ति से आठ वर्ष की अवधि तक रखे और संरक्षित किए जाएंगे।
(8) इस नियम के प्रयोजनों के लिए, —
| (क) | "घटक इकाई" का वही अर्थ होगा जो धारा 511(10)(घ) में दिया गया है; | |
| (ख) | "समूह" का वही अर्थ होगा जो धारा 511(10)(ङ) में दिया गया है; | |
| (ग) | "आसन्न होल्डिंग कंपनी या इकाई" से वह कंपनी या इकाई अभिप्रेत है जो भारतीय हितधारक में प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रक हित रखती है; | |
| (घ) | "मध्यवर्ती होल्डिंग कंपनी या इकाई" से ऐसी कंपनी या इकाई अभिप्रेत है जिसका किसी अन्य कंपनी या इकाई में नियंत्रक हित हो और जो स्वयं किसी अन्य कंपनी या इकाई द्वारा नियंत्रित हो या उसकी अनुषंगी कंपनी हो; और | |
| (ङ) | "अंतिम होल्डिंग कंपनी या इकाई" से ऐसी कंपनी या इकाई अभिप्रेत है जिसका भारतीय प्रतिष्ठान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अंतिम नियंत्रण हो और ऐसी कंपनी या इकाई स्वयं किसी अन्य कंपनी या इकाई द्वारा नियंत्रित न हो या उसकी अनुषंगी कंपनी न हो। |

