1[धारा 10 के खंड (4घ) के प्रयोजनों के लिए विनिर्दिष्ट निधि की छूट प्राप्त आय की संगणना
21कझ. (1) धारा 10 के खंड (4घ) के प्रयोजन के लिए, किसी विनिर्दिष्ट निधि में अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित इकाइयों के लिए मानी जा सकने वाली आय की संगणना, निम्नलिखित सूत्र के अनुसार की जाएगी, अर्थात्:—
धारा 10 के खंड (4घ) के अधीन छूट प्राप्त आय=A*C1+B*C2+D*F1+E*F2, जहां—
A= किसी अंतराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में स्थित मान्यताप्राप्त किसी शेयर बाजार को धारा 47 के खंड (viiकख) में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामरूप किसी विनिर्दिष्ट निधि द्वारा प्रोद्भूत या उद्भूत या प्राप्त कोई आय है और जहां ऐसे संव्यवहार के लिए प्रतिफल संपरिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में संदत्त या संदेय है;
B= प्रतिभूतियों (भारत में स्थित किसी कंपनी के शेयरों से भिन्न) के अंतरण के परिणामस्वरूप किसी विनिर्दिष्ट निधि द्वारा प्रोद्भूत या उद्भूत या प्राप्त कोई आय;
C1= अनिवासी इकाई धारक (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित विनिर्दिष्ट निधि के दैनिक 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' के योग को विनिर्दिष्ट निधि के दैनिक कुल 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' के योग का, धारा 47 के खंड (viiकख) में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अर्जन की तारीख से ऐसे पूंजी आस्ति के अंतरण की तारीख तक का अनुपात;
C 2=अनिवासी इकाई धारक (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित विनिर्दिष्ट निधि के दैनिक 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' के योग को विनिर्दिष्ट निधि के दैनिक कुल 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' के योग का, प्रतिभूति (भारत में स्थित किसी कंपनी में शेयरों से भिन्न) के अर्जन की तारीख से ऐसी प्रतिभूति के अंतरण की तारीख तक का अनुपात;
D= किसी अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा जारी की गई प्रतिभूतियों से किसी विनिर्दिष्ट निधि द्वारा प्रोद्भूत या उद्भूत या प्राप्त कोई आय और ऐसी आय से भिन्न आय, भारत में प्रोद्भूत न होती हो;
E= किसी प्रतिभूतिकरण न्यास से किसी विनिर्दिष्ट निधि द्वारा प्रोद्भूत या उद्भूत या प्राप्त कोई आय, जो 'कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है; और
F 1= अनिवासी इकाई धारक (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित विनिर्दिष्ट निधि में 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' का किसी अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा जारी की गई प्रतिभूतियों से ऐसी आय की प्राप्ति की तारीख को विनिर्दिष्ट निधि का कुल 'प्रबंध के अधीन आस्ति' से अनुपात और जहां ऐसी आय से भिन्न आय, भारत में प्रोद्भूत या उद्भूत न होती हो;
F 2= अनिवासी इकाई धारक (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित विनिर्दिष्ट निधि में 'प्रबंध के अधीन आस्तियों' का किसी प्रतिभूतिकरण न्यास, जो 'कारबार या वृत्ति से लाभ और अभिलाभ' शीर्ष के अधीन प्रभार्य है, से ऐसी आय की प्राप्ति की तारीख को विनिर्दिष्ट निधि के कुल 'प्रबंध के अधीन आस्ति' से अनुपात।
(2) विनिर्दिष्ट निधि में नियत तारीख को या उससे पूर्व अंकीय हस्ताक्षर के साथ इलेक्ट्रानिक रूप में प्ररूप सं. 10झछ में छूट प्राप्त आय के किसी वार्षिक विवरण को दिया जाएगा, जिसे उसमें उपदर्शित रीति में सम्यक् रूप से सत्यापित किया गया है।
2[(2क) अनिवासी (जो भारत में किसी अनिवासी का स्थायी स्थापन न हो) द्वारा धारित इकाईयों से होने वाली आय विनिर्दिष्ट निधि में अधिनियम की धारा 10 के खंड (4घ) के अधीन छूट प्राप्त नहीं होगी जब तक कि विनिर्दिष्ट निधि उपनियम 2 के अनुपालन के साथ न हो।]
(3) यथास्थिति, मुख्य महानिदेशक, आय-कर (प्रणाली) या महानिदेशक, आय-कर (प्रणाली) सं. 10झछ को भरने के लिए प्रक्रिया को विनिर्दिष्ट करेगा इस नियम के अधीन इस प्रकार दिए गए विवरण के संबंध में समुचित सुरक्षा, पुरालेखीय और पुन: प्राप्ति नीतियों को विकसित करने और लागू करने के लिए दायी होगा।
स्पष्टीकरण- इस नियम के प्रयोजन के लिए, पद,—
(क) "प्रबंध के अधीन आस्तियां" से किसी विशिष्ट तारीख को विनिर्दिष्ट निधि की आस्तियां या निवेश के मूल्य का अंत अतिशेष अभिप्रेत है;
(ख) "अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र" का वह अर्थ होगा, जो विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 (2005 का 28) की धारा 2 के खंड (थ) में है;
(ग) "स्थायी स्थापन" का वह अर्थ होगा, जो धारा 92च के खंड (iiiक) में है;
(घ) "प्रतिभूति" का वही अर्थ होगा, जो धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (खख) में है;
(ड़) "विनिर्दिष्ट निधि" का वही अर्थ है, जो धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (ग) के उपखंड (i) में है; और
(छ) "इकाई" का वही अर्थ है, जो धारा 10 के खंड (4घ) के स्पष्टीकरण के खंड (च) में है।]

