धारा 397 (3) (ख) के अधीन स्रोत पर कर कटौती या संग्रहण का विवरण ।
219. (1) अधिनियम के अध्याय 19 ख के अधीन निम्नलिखित सारणी के स्तंभ ख में विनिर्दिष्ट धाराओं के संबंध में स्रोत पर कर कटौती या कर संग्रहण के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, धारा 397(3)(ख) के अनुसार, आयकर महानिदेशक (प्रणाली) या उनके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को, स्तंभ ग में विनिर्दिष्ट प्ररूप में त्रैमासिक विवरण परिदान करेगा, या परिदान करवाएगा:
सारणी
| क्रमाक | वह धारा जिसके अधीन कर की कटौती, संदाय या संग्रहण किया गया है | प्ररूप |
| क | ख | ग |
| 1. | धारा 392 (धारा 392(7) के सिवाय) और धारा 393(1) [सारणी क्रमांक 8(iii)] | 138. |
| 2. | धारा 392(7), 393(2) और 393(3), ऐसे प्राप्तकर्ता के संबंध में जो अनिवासी है, कंपनी या विदेशी कंपनी नहीं है, या निवासी है लेकिन मामूली रूप से निवासी नहीं है। | 144. |
| 3. | धारा 392(7), 393(1) (सारणी: क्रमांक 8(iii) के सिवाय) और 393(3), क्रमांक 2 में विनिर्दिष्ट प्राप्तकर्ता के अलावा अन्य प्राप्तकर्ता के संबंध में। | 140. |
| 4. | धारा 394(1) । | 143. |
(2) जहां धारा 393(1) [सारणी क्रमांक (8)(vi)] के साथ पठित धारा 400(2) के अधीन जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अधीन, एक्सचेंज ने अपने स्वामित्व वाली आभासी डिजिटल आस्ति के अंतरण के लेनदेन के संबंध में, धारा 393(1) [सारणी: क्रमांक (8)(vi)] के अधीन ऐसी आस्ति के क्रेता द्वारा काटे जाने वाले कर के विकल्प के रूप में कर का संदाय करने पर सहमति व्यक्त की है, तो एक्सचेंज ऐसे लेनदेन का त्रैमासिक विवरण प्ररूप संख्या 142 में परिदान करेगा या परिदान करवाएगा।
(3) उप-नियम (2) में विनिर्दिष्ट एक्सचेंज, प्ररूप संख्या 142 में त्रैमासिक विवरण तैयार करते समय, संदाय की गई या जमा की गई ऐसी राशि का विवरण प्रस्तुत करेगा, जिस पर धारा 400(2) के अधीन जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कर नहीं काटा गया था।
(4) उप-नियम (1) और (2) में विनिर्दिष्ट विवरण, वित्तीय वर्ष की उस तिमाही के लिए जो निम्नलिखित सारणी के स्तंभ ख में विनिर्दिष्ट तारीख को समाप्त होती है, उसके स्तंभ ग में तदनुरूप प्रविष्टि में विनिर्दिष्ट नियत तारीख तक प्रस्तुत किए जाएंगे।
सारणी
| क्रमांक | वित्तीय वर्ष की तिमाही की समाप्ति तारीख | नियत तारीख |
| क | ख | ग |
| 1. | 30 जून | वित्तीय वर्ष का 31 जुलाई । |
| 2. | 30 सितम्बर | वित्तीय वर्ष का 31 अक्टूबर। |
| 3. | 31 दिसम्बर | वित्तीय वर्ष का 31 जनवरी। |
| 4. | 31 मार्च | जिस कर वर्ष में यथास्थिति, कटौती या संग्रहण की जानी अपेक्षित है, उसके ठीक पश्चात वाले वित्तीय वर्ष की 31 मई। |
(5) उप-नियम (1) या (2) या (4) में अंतर्विष्ट किसी भी बात के होते हुए, निम्नलिखित धाराओं के अधीन कर कटौती के लिए उत्तरदायी व्यक्ति द्वारा उस माह, जिसमें कटौती की गई है, के अंत से तीस दिनों के भीतर प्ररूप संख्या 141 में चालान- सह - विवरण प्रस्तुत किया जाएगा:
| (क) | धारा 393(1) [सारणी क्रमांक (2)(i)]; | |
| (ख) | धारा 393(1) [सारणी क्रमांक (3)(i)]; | |
| (ग) | धारा 393(1) [सारणी क्रमांक (6)(ii)]; और | |
| (घ) | धारा 393(1) [सारणी क्रमांक (8)(vi)]। |
(6) अधिनियम के अध्याय 19 ख के अधीन केन्द्रीय सरकार के खाते में जमा की गई राशि की वापसी के लिए कटौतीकर्ता द्वारा प्ररूप संख्या 139 में दावा प्रस्तुत किया जाएगा।
(7) ऐसे मामलों में, जहां किसी अनुमोदित सेवानिवृत्ति निधि के न्यासी किसी कर्मचारी को उसके जीवनकाल के दौरान नियोक्ता द्वारा किए गए अंशदान, जिसमें ऐसे अंशदान पर ब्याज भी शामिल है, का संदाय करते हैं, तो वे वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो माह के भीतर आयकर महानिदेशक (प्रणाली) या उनके द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति को निम्नलिखित विवरण देते हुए एक विवरण भेजेंगे:-
| (क) | अधिवर्षिता निधि का नाम; | |
| (ख) | कर्मचारी का नाम और पता; | |
| (ग) | वह अवधि जिसके लिए कर्मचारी ने अधिवर्षिता निधि में अंशदान किया है; | |
| (घ) | मूलधन और ब्याज के मद में पुनर्भुगतान किए गए अंशदान की रकम; | |
| (ङ) | पिछले तीन वर्षों के दौरान कर कटौती की औसत दर; और | |
| (च) | पुनर्भुगतान पर काटे गए कर की रकम । |
(8) उप-नियम (1) में विनिर्दिष्ट विवरण के साथ निम्नलिखित प्ररूप में विधिवत हस्ताक्षरित सत्यापन संलग्न किया जाएगा:
सत्यापन प्ररूप
हम/मैं उपर्युक्त निधि के न्यासी, यह घोषणा करते हैं कि उपर्युक्त विवरण में जो कुछ कहा गया वह हमारी/मेरी जानकारी और विश्वास के अनुसार सत्य है।
(9) उप-नियम (2) के प्रयोजनों के लिए, —
| (क) | "एक्सचेंज" से वह व्यक्ति अभिप्रेत है जो आभासी डिजिटल आस्तियों के अंतरण के लिए एक एप्लिकेशन या प्लेटफॉर्म संचालित करता है, जो खरीद और बिक्री सौदों का मिलान करता है और उन्हें अपने एप्लिकेशन या प्लेटफॉर्म पर निष्पादित करता है, और | |
| (ख) | "आभासी डिजिटल आस्ति" का वही अर्थ होगा जो धारा 2(111) में दिया गया है। |

