आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 181

नियम संख्या.

181

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

08/01/2026

गैर-लाभकारी संगठन के पंजीकरण के लिए या धारा 133 (1) (ख) (II) के अधीन कटौती के प्रयोजनों के लिए अनुमोदन के लिए सामान्य आवेदन ।

181. (1) धारा 332 के अधीन पंजीकरण के लिए एक आवेदन या धारा 354 के अधीन अनुमोदन, ऐसे मामलों में जैसा कि निम्नलिखित सारणी के स्तंभ ख में निर्दिष्ट किया गया है, उसके स्तंभ घ में निर्दिष्ट प्राधिकारी को, स्तंभ ग में निर्दिष्ट प्ररूप में किया जाएगा।

सारणी

क्र. सं.कारकप्ररूप सं.प्राधिकारी
(क)(ख)(ग)(घ)
1.अनंतिम पंजीकरण या अनुमोदन के लिए आवेदन निम्नवत किया जाता है:
(क)धारा 332(3) (सारणी: क्रम संख्या 1); या
(ख)धारा 354(2) (सारणी: क्रम संख्या 1)
104आयकर आयुक्त (सीपीसी) होने के नाते आयुक्त।
2.पंजीकरण या अनुमोदन के लिए आवेदन निम्नानुसार किया जाता है:
(क)धारा 332(3) (सारणी: क्रम संख्या 2 से 7); या
(ख)धारा 354(2) (सारणी: क्रम संख्या 2 से 5)
105प्रधान आयुक्त या आयुक्त जिसका अधिकार क्षेत्र आवेदक पर हो।

(2) आवेदन के साथ ऐसे आवेदन से संबंधित प्ररूप में निर्दिष्ट दस्तावेज, सूचना और वचनबंध शामिल होंगे।

(3) आवेदन निम्नवत प्रस्तुत किया जाएगा -

(क)  इलेक्ट्रॉनिक रूप से -
(i)  डिजिटल हस्ताक्षर के अधीन, यदि आय की विवरणी डिजिटल हस्ताक्षर के अधीन प्रस्तुत किया जाना अपेक्षित है;
(ii)  इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन कोड के माध्यम से, ऐसे मामले में जो उप-खंड (i) के अंतर्गत नहीं आता है; और
(ख)  उस व्यक्ति द्वारा सत्यापित किया गया है जो आवेदक पर यथा लागू धारा 265 के अधीन आय की विवरणी को सत्यापित करने के लिए प्राधिकृत है।

(4) प्ररूप संख्या 104 में एक आवेदन प्राप्त होने पर आयकर आयुक्त (सीपीसी), 16 अंकों की अक्षरांकीय विशिष्ट रजिस्ट्रेशन संख्या (यूआरएन) जारी करके और धारा 332 (8) के अधीन पंजीकरण प्रदान करके या धारा 354 (4) के अधीन अनुमोदन प्रदान करके, या दोनों प्ररूप संख्या 106 में लिखित रूप में एक आदेश पारित करेगा।

(5) प्ररूप 104 को नामंजूर माना जाएगा और आगे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा जहां गतिविधियां शुरू हो गई हैं या इसे किसी निर्दिष्ट उपबंध के अधीन पंजीकृत किया गया है।

(6) उप-नियम (4) के अधीन जारी किए गए प्ररूप संख्या 106 और विशिष्ट रजिस्ट्रेशन संख्या (यूआरएन) में दिए गए पंजीकरण या अनुमोदन, प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा रद्द किया जा सकता है, जैसा कि उप-नियम (1) [सारणी: क्रम संख्या 2] में निर्दिष्ट है, आवेदक को सुनवाई अवसर प्रदान करने के बाद, यदि किसी भी समय यह देखा जाता है कि प्ररूप संख्या 104,

(क)  में कोई मिथ्या या गलत सूचना है; और
(ख)  उप-नियम (3) की अपेक्षाओं का अनुपालन नहीं करता है।

(7) जहां प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा उप-नियम (4) के अधीन प्रदान किया गया पंजीकरण या अनुमोदन या यूआरएन रद्द कर दिया जाता है, ऐसे पंजीकरण या अनुमोदन या यूआरएन को कभी भी प्रदान या जारी नहीं किया गया माना जाएगा।

(8) आवेदक उप-नियम (4) के अधीन दिए गए पंजीकरण या अनुमोदन को अभ्यर्पित कर सकता है यदि आवेदक —

(क)  ने किसी भी कर वर्ष के लिए आय की अपनी विवरणी में लाभों का दावा नहीं किया है, जिसमें कर वर्ष भी शामिल है जिसमें पंजीकरण या अनुमोदन का ऐसा अभ्यर्पण निम्नलिखित के अधीन किया गया है
(i)  अधिनियम के अध्याय 17 का भाग ख; या
(ii)  आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 10 (23ग) (iv) या (v) या (vi) या (viक), जैसा कि इसके निरसन से पहले अस्तित्व में था; या
(iii)  आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की धारा 11 या धारा 12, जैसा कि इसके निरसन से पहले अस्तित्व में था; और
(ख)  एक वचनबंध देता है कि खंड (क) में निर्दिष्ट उपबंधों के अधीन किसी भी कर वर्ष के लिए आय की विवरणी में लाभ का कोई दावा नहीं किया जाएगा।

(9) जहां आवेदक उप-नियम (8) के उपबंधों के अनुसार पंजीकरण या अनुमोदन को अभ्यर्पित करता है, वहां ऐसा पंजीकरण या अनुमोदन कभी नहीं दिया गया माना जाएगा।

(10) प्ररूप संख्या 105 में आवेदन प्राप्त होने पर, प्रधान आयुक्त या आयुक्त, निम्नलिखित में से किसी के लिए प्ररूप संख्या 107 में लिखित रूप में आदेश पारित करेंगे:—

(क)  16 अंकों की अक्षरांकीय विशिष्ट रजिस्ट्रेशन संख्या (यूआरएन) जारी करना और पंजीकरण या अनुमोदन प्रदान करना; या
(ख)  आवेदन को अस्वीकार करना; या
(ग)  आवेदन को अस्वीकार करना और पंजीकरण या अनुमोदन को रद्द करना; या
(घ)  प्ररूप में उल्लिखित एक धारा कोड के अधीन पंजीकरण या अनुमोदन प्रदान करना और आवेदन में उल्लिखित अन्य धारा कोड के अधीन आवेदन को अस्वीकार करना।

(11) आवेदक को पंजीकरण या अनुमोदन के लिए आवेदन के प्रत्याहरण की अनुमति दी जाएगी यदि आवेदन फाइल करने के सात दिनों के भीतर प्रत्याहरण हेतु अनुरोध किया जाता है।

(12) जहां प्ररूप संख्या 107 (यहां पहले के आदेश के रूप में संदर्भित) में एक आदेश आवेदन को अस्वीकार करके या पंजीकरण या अनुमोदन या दोनों को रद्द करके जारी किया गया है, आवेदक उस महीने के अंत से एक महीने के भीतर प्ररूप संख्या 105 में फिर से आवेदन कर सकता है जिसमें उक्त आदेश पारित किया गया है, यदि निम्नलिखित शर्तें पूरी होती हैं:

(क)  इस तरह की अस्वीकृति या रद्दीकरण निम्नलिखित के कारण होता है —
(i)  धारा 332(7) के अधीन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा मांगे गए सभी या किसी भी दस्तावेज या सूचना को प्रदान करने में आवेदक की विफलता; या
(ii)  सुनवाई के अवसर का लाभ नहीं उठाना; या
(iii)  न्यास विलेख में निहित कतिपय शर्तों के कारण आवेदक की अपात्रता;
(ख)  आवेदक ने निम्नलिखित कारणों का उल्लेख किया है -
(i)  आवश्यक सूचना या दस्तावेज प्रदान करने में विफलता, या
(ii)  सुनवाई के अवसर का लाभ नहीं उठाना; या
(iii)  न्यास विलेख में निहित कुछ शर्तों के कारण आवेदक की अपात्रता, जिसे पुन: आवेदन की तारीख को या उससे पहले संशोधित किया गया है; और
(ग)  आवेदक एक वचनबंध देता है कि वह —
(i)  पहले के आदेश के विरुद्ध कोई अपील नहीं की है या ऐसे आदेश के विरुद्ध किसी अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष फाइल अपील को वापस ले लिया है; तथा
(ii)  पहले के आदेश के विरुद्ध किसी भी अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष कोई अपील फाइल नहीं करेगा।

(13) आवेदक को उप-नियम (12) के अधीन पुनः आवेदन करने का केवल एक बार अवसर दिया जाएगा।

(14) उप-नियम (12) के अधीन किया गया पुन: आवेदन, जहां धारा 332 (7) (ख) या 354 (3)(ख) के अधीन आदेश जारी किया गया था, एक नया आवेदन माना जाएगा और आदेश पारित करने की समय सीमा धारा 332 (3) या 354 (2) के उपबंधों द्वारा शासित होगी, जैसा भी मामला हो, और इस नियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे।

(15) जहां आवेदक नोटिस करता है कि प्ररूप संख्या 105 में आवेदन एक गलत धारा कोड या गतिविधि की गलत प्रकृति प्रस्तुत करके किया गया है जैसा कि उक्त प्ररूप में निर्दिष्ट है, —

(क)  आवेदक प्ररूप संख्या 107 में आदेश पारित करने से पहले किसी भी समय प्रधान आयुक्त या आयुक्त के समक्ष सुधार के लिए अनुरोध प्रस्तुत कर सकता है; तथा
(ख)  प्रधान आयुक्त या आयुक्त इस तरह के अनुरोध की प्राप्ति पर इस तरह के सुधार की अनुमति दे सकते हैं।

(16) इस नियम में, "निर्दिष्ट उपबंध " का अर्थ धारा 355 (ड) में यथा समनुदेशित होगा।

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