धारा 17 (1) (i) में निर्दिष्ट वार्षिक अभिवृद्धि ।
16. (1) धारा 17 (1)(i) के प्रयोजनों के लिए, कर वर्ष (जिसे इसमें इसके पश्चात् चालू कर वर्ष कहा गया है) के दौरान धारा 17(1)(h) में निर्दिष्ट निधि या स्कीम के जमा शेष में ब्याज, लाभांश या इसी प्रकार की किसी अन्य रकम के रूप में वार्षिक अभिवृद्धि निम्नलिखित सूत्र के अनुसार संगणित रकम या रकमों का कुल योग होगी: -
नत = (तग/2) द + (तगा + नत 1) × द
जहाँ,-
नत = चालू कर वर्ष के लिए धारा 17 (1) (i) के अधीन कर योग्य परिलब्धि;
चालू कर वर्ष से भिन्न 1 अप्रैल, 2020 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले कर वर्ष या वर्षों के लिए धारा 17(1)(i) के अधीन कर योग्य परिलब्धि का कुल योग ;
तग = कर वर्ष के दौरान निर्दिष्ट निधि या स्कीम में नियोक्ता द्वारा किए गए मूल अभिदाय की कुल रकम Rs. 75 लाख से अधिक:
को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले कर वर्ष या वर्षों के लिए निर्दिष्ट निधि या स्कीम में नियोक्ता द्वारा किए गए मूल अभिदाय की कुल रकम 7.5 लाख रुपये से अधिक, चालू कर वर्ष से भिन्नः
द = झ/ च (औसत);
झ = निर्दिष्ट निधि या स्कीम खाते में चालू कर वर्ष के दौरान अर्जित आय की कुल रकम;
च = विद्यमान कर वर्ष के पहले दिन विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम के प्रत्यय में कुल अतिशेष रकम और विद्यमान कर वर्ष के अंतिम दिन विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम के प्रत्यय में कुल अतिशेष रकम, जिसे दो से भाग दिया जाता है।
(2) इस नियम के प्रयोजनों के लिए-
| (क) | "विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम से धारा 17(1) (च) में विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम अभिप्रेत है ; | |
| (ख) | जहां नत] और नगा की कुल रकम, चालू कर वर्ष के पहले दिन विनिर्दिष्ट निधि या स्कीम के प्रत्यय में जमा अतिशेष की कुल रकम से अधिक हो, तो नता और नगा की कुल रकम का अनुसार लगाने के लिए अधिक रकम को नज़रअंदाज़ कर दिया जाएगा। |

