धारा 80घघख के अधीन कटौती के प्रयोजनों के लिये विनिर्दिष्ट रोग तथा व्याधियाँ
11घघ. (1) धारा 80घघख के प्रयोजनों के लिए पात्र रोग या व्याधियां निम्नलिखित होंगी :--
(i) न्यूरोलाजी रोग, जहां नि:शक्तता का स्तर 40 प्रतिशत और उससे अधिक प्रमाणित किया गया है :
(क) डिमेन्सिया
(ख) डिस्टोनिया मसकूलोरम डिफोरमेन्स
(ग) मोटर न्यूरोन रोग
(घ) अटैक्सिआ
(ड़) कोरिआ
(च) हेमिबेलिसमस
(छ) अफासिआ
(ज) पार्किन्सन्स रोग
(ii) दुर्दम्य कैंसर
(iii) फुल ब्लोन एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएन्सी सिन्ड्रोम (एड्स)
(iv) क्रोनिक रेनल फेलियर
(v) हेमेटोलोजिकल डिसआर्डर्स
(i) हेमोफिलिआ
(ii) थैलिसेमिआ
(2) उपनियम (1) में विनिर्दिष्ट रोगों या व्याधियों के संबंध में, निम्नलिखित विशेषज्ञों द्वारा नुस्खा जारी किया जाएगा:--
(क) उपनियम (1) के खंड (i) में वर्णित रोगों या व्याधियों के लिए - किसी न्यूरोलोजिस्ट द्वारा, जिसके पास न्यूरोलोजी में डाक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डी.एम.) डिग्री या ऐसी कोर्इ समतुल्य डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो;
(ख) उपनियम (1) के खंड (ii) में वर्णित रोगों या व्याधियों के लिए - किसी आंकोलोजिस्ट द्वारा, जिसके पास आंकोलोजी में डाक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डी.एम.) डिग्री या ऐसी कोर्इ समतुल्य डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो;
(ग) उपनियम (1) के खंड (iii) में वर्णित रोगों या व्याधियों के लिए - किसी विशेषज्ञ द्वारा, जिसके पास साधारण या आंतरिक मेडिसिन में स्नात्तकोतर डिग्री या ऐसी कोर्इ समतुल्य डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो;
(घ) उपनियम (1) के खंड (iv) में वर्णित रोगों या व्याधियों के लिए - किसी नेफ्रोलोजिस्ट द्वारा, जिसके पास नेफ्रोलोजी में डाक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डी.एम.) की डिग्री हो या यूरोलोजिस्ट, जिसके पास यूरोलेाजी में मास्टर ऑफ चाइरूरगेर्इ (एम.सीएच) की डिग्री हो या ऐसी कोर्इ समतुल्य डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो;
(ड़) उपनियम (1) के खंड (v) में वर्णित रोगों या व्याधियों के लिए - किसी विशेषज्ञ द्वारा, जिसके पास हेमेटोलोजी में डाक्टरेट ऑफ मेडिसिन (डी.एम.) या ऐसी कोर्इ समतुल्य डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो:
परन्तु जहां उपनियम (1) में विनिर्दिष्ट रोगों या व्याधियों में से किसी के संबंध में रोगी सरकारी अस्पताल में उपचार प्राप्त कर रहा है, वहां उस अस्पताल में पूर्णकालिक रूप में कार्यरत किसी विशेषज्ञ द्वारा, जिसके पास साधारण या आंतरिक मेडिसन में स्नातकोतर डिग्री है, जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद् द्वारा मान्यताप्राप्त हो, नुस्खा जारी किया जा सकेगा।
(3) उपनियम (2) में निर्दिष्ट नुस्खे में रोगी का नाम और आयु, नुस्खा जारी करने वाले विशेषज्ञ का नाम, पता, रजिस्ट्रीकरण संख्या और अर्हता सहित रोग या व्याधि का नाम अंतर्विष्ट होगा:
परंतु जहां रोगी किसी सरकारी अस्पताल में उपचार प्राप्त कर रहा है, वहां नुस्खे में सरकारी अस्पताल का नाम और पता भी अंतर्विष्ट होगा।

