करार का पुनरीक्षण ।
115. (1) किसी करार को, उसके किए जाने के पश्चात्, बोर्ड द्वारा संशोधित किया जा सकेगा, यदि, -
| (क) | महत्वपूर्ण अवधारणाओं में परिवर्तन होता है या उस शर्त को पूरा करने में विफलता होती है जिसके अध्यधीन करार किया गया है; या | |
| (ख) | विधि में एक परिवर्तन है जो करार द्वारा कवर किए गए किसी भी मामले को उपांतरित करता है, परंतु उस प्रकृति का नहीं है जो करार को गैर-बाध्यकारी बनाता है, या | |
| (ग) | द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार की दशा में करार में संशोधन का अनुरोध करते हुए दूसरे देश के सक्षम प्राधिकारी से अनुरोध किया जाता है। |
(2) किसी करार को बोर्ड द्वारा स्वप्रेरणा से या निर्धारिती या भारत के सक्षम प्राधिकारी या प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (अंतर्राष्ट्रीय कराधान ) के अनुरोध पर उपांतरित किया जा सकेगा।
(3) सिवाय इसके कि जब निर्धारिती के अनुरोध पर करार को उपांतरित करने का प्रस्ताव है, तब तक करार को तब तक उपांतरित नहीं किया जाएगा जब तक कि निर्धारिती को सुनवाई का अवसर प्रदान नहीं किया गया हो और निर्धारिती प्रस्तावित उपांतरण से सहमत न हो।
(4) यदि निर्धारिती प्रस्तावित उपांतरण से सहमत नहीं हैं, तो नियम 116 के अनुसार करार को रद्द किया जा सकेगा।
(5) यदि बोर्ड करार के उपांतरण के लिए निर्धारिती के अनुरोध से सहमत नहीं है, तो बोर्ड इस तरह की अस्वीकृति का कारण बताते हुए लिखित रूप में अनुरोध को अस्वीकार कर देगा।
(6) प्रस्तावित उपांतरण के लिए करार पर पहुंचने के उद्देश्य से, नियम 109 में प्रदान की गई प्रक्रिया का पालन किया जा सकेगा, जहां तक वे लागू होते हैं।
(7) उपांतरित करार में वह तारीख सम्मिलित होगी जब तक मूल करार लागू होना है और वह तारीख जिससे उपांतरित करार लागू होना है।

