आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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नियम संख्या. 114ख

वे संव्यवहार, जिनके संबंध में धारा 139क की उपधारा (5) के खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए सभी दस्तावेजों में स्थायी लेखा संख्यांक को कोट किया जाएगा

विषय

स्थायी लेखा संख्या

नियम संख्या.

114ख

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/12/2025

वे संव्यवहार, जिनके संबंध में धारा 139क की उपधारा (5) के खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए सभी दस्तावेजों में स्थायी लेखा संख्यांक को कोट किया जाएगा

वे संव्यवहार, जिनके संबंध में धारा 139क की उपधारा (5) के खंड () के प्रयोजनों के लिए सभी दस्तावेजों में स्थायी लेखा संख्यांक को कोट किया जाएगा।

114ख. प्रत्येक व्यक्ति नीचे दी गई सारणी में विनिर्दिष्ट संव्यवहारों से संबंधित सभी दस्तावेजों में अपने स्थायी लेखा संख्यांक को कोट करेगा, अर्थात्:–

सारणी
क्र. सं. संव्यवहार की प्रकृति संव्यवहार का मूल्य
(1) (2) (3)
1. दुपहिया यानों से भिन्न किसी मोटरयान या मोटरयान अधिनियम, 1988 97(1988 का 59) की धारा 2 के खंड (28) में यथापरिभाषित मोटरयान का क्रय या विक्रय, जिसका उस अधिनियम के अध्याय 4 के अधीन किसी रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी द्वारा रजिस्ट्रीकरण अपेक्षित है। ऐसे सभी संव्यवहार।
2. किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट) कोई बैंक या बैंककारी संस्था है), के पास खाता (क्रम सं. 12 में निर्दिष्ट सावधिक जमा और आधारभूत बैंक जमा बचत खाता से भिन्न) खोलना। ऐसे सभी संव्यवहार।
3. किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक को जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था है) या किसी अन्य कंपनी या संस्था को क्रेडिट या डेबिट कार्ड जारी करने के लिए आवेदन करना। ऐसे सभी संव्यवहार।
4. किसी निक्षेपागार सहभागी, प्रतिभूति अभिरक्षक या भारत का प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 12 की उपधारा (1क) के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी अन्य व्यक्ति के पास डीमैट खाता खोलना। ऐसे सभी संव्यवहार।
5. किसी एक समय किसी होटल या रेस्टोरेंट को किसी बीजक या बीजकों के लिए संदाय करना। पचास हजार रूपए से अधिक किसी रकम का नकद संदाय।
6. किसी विदेश यात्रा के संबंध में संदाय या किसी समय किसी विदेशी मुद्रा के क्रय के लिए संदाय। पचास हजार रूपए से अधिक किसी रकम का नकद संदाय।
7. किसी पारस्परिक निधि को उसकी यूनिटों के क्रय के लिए संदाय। पचास हजार रुपए से अधिक रकम।
8. किसी कंपनी या संस्था को उसके द्वारा जारी डिबेंचरों या बंधपत्रों का अर्जन करने के लिए संदाय। पचास हजार रुपए से अधिक रकम।
9. भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय रिजर्व बैंक को उसके द्वारा जारी बंधपत्रों का अर्जन करने के लिए संदाय। पचास हजार रुपए से अधिक रकम।
[10.

निम्नलिखित के पास जमा,–

(i) कोई बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक, जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत) उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था सम्मिलित है);

(ii) डाकघर

नकद जमा,–

(i) किसी एक दिन के दौरान पचास हजार रुपए से अधिक; या

(ii) 9 नवम्बर, 2016 से 30 दिसंबर, 2016 की कालावधि के दौरान कुल मिलाकर दो लाख पचास हजार रुपए; या]

11. किसी बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था है) से बैंक ड्राफ्ट, पे-आर्डर या बैंकर्स चेकों का क्रय। किसी एक दिन के दौरान पचास हजार रुपए से अधिक नकद जमा।
12.

निम्नलिखित के पास सावधिक जमा,–

(i) कोई बैंककारी कंपनी या सहकारी बैंक, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था है);

(ii) डाकघर;

(iii) कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 406 में निर्दिष्ट कोई निधि98; या

(iv) कोई गैर बैंककारी वित्तीय कंपनी, जिसके पास भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45झक के अधीन जनता से जमा रखने या स्वीकार करने के रजिस्ट्रीकरण का प्रमाणपत्र है।

पचास हजार रूपए से अधिक की रकम या किसी वित्तीय वर्ष के दौरान पांच लाख रुपए से अधिक की कुल रकम।
13. किसी बैंककारी कंपनी या किसी सहकारी बैंक को, जिसे बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) लागू होता है (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था है) या किसी अन्य कंपनी या संस्था को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संदाय और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (2007 का 51) की धारा 18 के अधीन जारी पूर्व संदत्त संदाय लिखतों को जारी और उनका प्रवर्तन करने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांतों में यथापरिभाषित एक या अधिक पूर्व संदत्त लिखतों के लिए संदाय। किसी वित्तीय वर्ष में पचास हजार रूपए से अधिक कुल रकम का नकद या बैंक ड्राफ्ट या पे-आर्डर या बैंकर्स चेक के माध्यम से संदाय।
14. बीमा अधिनियम, 1938 (1938 का 4) की धारा 2 के खंड (9) में यथापरिभाषित किसी बीमाकर्ता98 को जीवन बीमा प्रीमियम का संदाय। किसी वित्तीय वर्ष में पचास हजार रूपए से अधिक की कुल रकम।
15. प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड (ज) में यथापरिभाषित प्रतिभूतियों98 (शेयरों से भिन्न) का विक्रय या क्रय करने के लिए संविदा। प्रति संव्यवहार एक लाख रुपए से अधिक रकम।
16. किसी व्यक्ति द्वारा किसी कंपनी के, जो किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है, के शेयरों का क्रय या विक्रय। प्रति संव्यवहार एक लाख रूपए से अधिक रकम।
17. किसी स्थावर संपत्ति का क्रय या विक्रय। दस लाख रुपए से अधिक रकम या अधिनियम की धारा 50ग में निर्दिष्ट स्टांप मूल्यांकन प्राधिकारी द्वारा मूल्यांकित दस लाख रूपए से अधिक कोई रकम।
18. इस सारणी के क्रम सं. 1 से 17 में विनिर्दिष्ट से भिन्न वस्तुओं या सेवाओं का किसी व्यक्ति द्वारा क्रय या विक्रय। प्रति संव्यवहार दो लाख रुपए से अधिक रकम :

परंतु जहां कोई व्यक्ति इस नियम में निर्दिष्ट संव्यवहार में प्रविष्ट होता है, जो अवयस्क है और जिसके पास आयकर से प्रभार्य कोई आय नहीं है, वह उक्त संव्यवहार से संबंधित दस्तावेज में यथास्थिति, अपने पिता या माता या अभिभावक के स्थायी लेखा संख्यांक को कोट करेगा:

98क[परन्तु यह और कि कोई व्यक्ति, जो कंपनी या फर्म नहीं है] जिसके पास स्थायी लेखा संख्यांक नहीं है और जो इस नियम में विनिर्दिष्ट किसी संव्यवहार में प्रविष्ट होता है, वह प्ररूप 60 में ऐसे संव्यवहार की विशिष्टियों को देते हुए 99[या तो कागज-पत्र प्ररूप में अथवा प्रक्रियाओं के अनुसार इलैक्ट्रानिक सत्यापन संकेतकी के अधीन इलैक्ट्रिकली, आंकड़ा सरंचनाएं और प्रधान महानिदेशक के आय-कर (प्रणाली) या महानिदेशक के (प्रणाली)] एक घोषणा करेगा:

98ख[परन्तु यह भी कि एक विदेश कंपनी,

  (i) जिसके पास भारत में कर से प्रभार्य कोई आय नहीं है; और

  (ii) जिसके पास स्थायी खाता संख्या नहीं है,

और जो आईएफएससी बैंककारी इकाई में सारणी की क्र. सं. 2 या 12 में निर्दिष्ट कोई संव्यवहार करती है, प्ररूप सं. 60 में घोषणा करेगी]

परंतु यह भी कि इस नियम के उपबंध व्यक्तियों के निम्नलिखित वर्ग या वर्गों को लागू नहीं होंगे, अर्थात–

(i) केंद्रीय सरकार, राज्य सरकारें और कंसुलर कार्यालय;

(ii) सारणी के क्रम सं. 1 या 2 या 4 या 7 या 8 या 10 या 12 या 14 या 15 या 16 या 17 में निर्दिष्ट संव्यवहारों के संबंध में अधिनियम की धारा 2 के खंड (30) में निर्दिष्ट अनिवासी :

1[परंतु यह भी कि ऐसा कोई व्यक्ति जिसका किसी बैंककारी कंपनी या किसी सहकारी बैंक में रखा गया खाता (सारणी के क्रम संख्यांक 12 में निर्दिष्ट सावधी जमा और मूल बचत बैंक जमा खाता से भिन्न) है, जिसको बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) (जिसके अंतर्गत उस अधिनियम की धारा 51 में निर्दिष्ट कोई बैंक या बैंककारी संस्था भी है) लागू होता है और जिसने ऐसा खाता खोलने के समय या बाद में, यथास्थिति, अपना स्थायी लेखा संख्यांक का उल्लेख नहीं किया है या प्ररूप सं. 60 प्रस्तुत नहीं किया है, वह 2[30 जून], 2017 को या उससे पहले नियम 114ग के उपनियम (1) के खंड (ग) में विनिर्दिष्ट व्यक्ति को, यथास्थिति, अपना स्थायी लेखा संख्यांक या प्ररूप सं. 60 प्रस्तुत करेगा।]

स्पष्टीकरण–इस नियम के प्रयोजनों के लिए,–

98ख[(1) "आईएफएससी बैंककारी इकाई" से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केन्द्र प्राधिकरण अधिनियम, 2019 (2019 का 50) कीधारा 3 की उपधारा (1) के खंड (ग) के अधीन परिभाषित, वित्तीय संख्या अभिप्रेत है, जिसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केन्द्र प्राधिकरण द्वारा, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केन्द्र प्राधिकरण (बैंककारी) विनियम, 2020 के अधीन अनुज्ञेय क्रियाकलाप करने के लिए अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा दी गई है]

98ग[(1क)] "यात्रा के संबंध में संदाय" के अंतर्गत किराए या यात्रा अभिकर्ता या टूर आपरेटर या विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 23 के खंड () में यथापरिभाषित किसी प्राधिकृत व्यक्ति को संदाय सम्मिलित है;

(2) "यात्रा अभिकर्ता या टूर आपरेटर" के अंतर्गत कोई व्यक्ति सम्मिलित है, जो वायु, भूतल या समुद्री यात्रा के लिए इंतजाम करता है या आवास, टूर, मनोरंजन, पासपोर्ट, वीजा, विदेशी मुद्रा, यात्रा से संबंधित बीमा या यात्रा से संबंधित अन्य सेवाओं के लिए पृथकत: या किसी पैकेज में सेवाएं उपलब्ध कराता है;

(3) "सावधिक जमा" से कोई अभिप्रेत है, जिसका नियत अवधि के अवसान पर पुनर्संदाय किया जाना है।

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