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नियम संख्या. 10फ

धारा 9क के लागू होने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

नियम संख्या.

10फ

दस्तावेज़ अपलोड की तिथि

13/12/2025

धारा 9क के लागू होने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

धारा 9क के लागू होने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

10फ. (1) जहां निधि में विनिधान किसी संस्थानिक निकाय द्वारा प्रत्यक्षत: किया गया है, निधि में सदस्यों की संख्या और सहभागी हित का अवधारण उस निकाय के माध्यम से यह देखकर किया जाएगा कि,—

(क) वह धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ग), खंड (ड.), खंड (च) और खंड (छ) में वर्णित शर्तों को पूरा करता है;

(ख) उसकी स्थापना उसकी निधियों और विनिधान को एकत्रित करने के एकमात्र प्रयोजन के लिए की गई है; और

(ग) वह उस देश या किसी विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र का निवासी है, जिसके साथ धारा 90 की उपधारा (1) या धारा 90क की उपधारा (1) में निर्दिष्ट करार किया गया है या वह केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित किसी देश या विनिर्दिष्ट राज्यक्षेत्र में स्थापित, निगमित या रजिस्ट्रीकृत है।

(2) धारा 9 की उपधारा (3) के खंड (ग) के प्रयोजनों के लिए, जहां निधि में प्रत्यक्षत: विनिधानकर्ता प्राकृतिक व्यक्ति से भिन्न कोई व्यक्ति है तो निधि यह पता लगाने के लिए सम्यक् तत्परता बरतेगी कि भारत में निवासी व्यक्ति की कोई अप्रत्यक्ष भागीदारी, यदि कोई हो, है और उसका परिमाण:

परंतु जहां ऐसा सीधा विनिधानकर्ता सरकार है या केन्द्रीय बैंक है या कोई स्वयंभू निधि है या कोई बहुपक्षीय अभिकरण है या पेंशन निधि या विश्वविद्यालय निधि या कोई बैंक या सामुहिक विनिधान तंत्र जैसे पारस्परिक निधियों के रूप में समुचित रूप से विनियमित निवेशक है तो निधि सहभागिता, यदि कोई हो, के संबंध में भारत में निवासी व्यक्ति की सहभागिता, यदि कोई हो, के संबंध में लिखित में एक घोषणा अभिप्राप्त करेगी और भारत में निवासी व्यक्ति की निधि में सहभागिता का अवधारण निधि द्वारा ऐसी घोषणा के आधार पर किया जाएगा।

स्पष्टीकरण - इस उपनियम के प्रयोजनों के लिए किसी विनिधानकर्ता को समुचित रूप से विनियमित माना जाएगा यदि उसको प्रतिभूति बाजार विनियामक या भारत से बाहर, जिसमें वह निवासी है, के बैंककारी विनियामक द्वारा उसी क्षमता में, जिसमें उसने निधि में विनिधान किया है, विनियमित या पर्यवेक्षित किया जाता है।

(3) किसी निधि को धारा 9क के प्रयोजनों के लिए पात्र निधि होने के फायदे से इंकार नहीं किया जाएगा, यदि,—

(क) यदि धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ग), खंड (घ) और खंड (ड.) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा नहीं करना,—

   (i) निधि के नियंत्रण से परे के कारण से है और वह 90 दिन की अवधि से अधिक नहीं है;

  (ii) उस तारीख से जिसको निधि की स्थापना की गई थी, से प्रारंभ होने वाली 18 मास से अधिक अवधि से अधिक नहीं होता है या निधि को अंतिम रूप से बंद करने से परे नहीं हैं, इसमें से जो भी पूर्वत्तर हो और धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ग), खंड (घ) और खंड (ड.) में विनिर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के लिए सदभावपूर्वक प्रयास किए गए हैं;

 (iii) इस कारण से कि निधि का परिसमापन किया जा रहा है और यह उस तारीख से, जिसको परिसमापन की प्रक्रिया आरंभ हुई थी, से आरंभ होने वाले एक वर्ष की अवधि से अधिक नहीं होता है; या

(ख) धारा 9क की उपधारा (5) में निर्दिष्ट विवरण प्रस्तुत करने में विलंब है और ऐसा विलंब 90 दिन की अवधि से अधिक नहीं होता है।

(4) धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ट) के प्रयोजनों के लिए किसी निधि को किसी निकाय द्वारा चलाए जा रहे कारबार को नियंत्रित या उसका प्रबंध करने वाली निधि कहा जाएगा यदि निधि प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: निकाय में या उसके संबंध में ऐसे अधिकार रखती है या उसमें कुल मतदान करने की शक्ति या निकाय में मत देने की शक्ति या यथास्थिति, कुल शेयर पूंजी का 25 प्रतिशत से अधिक हित रखती है।

(5) धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ड) में निर्दिष्ट किसी पात्र निधि प्रबंधक को पात्र विनिधानकर्ता द्वारा संदत्त किसी पारिश्रमिक के संबंध में संनिकट कीमत का अवधारण करने के प्रयोजनों के लिए उपनियम (6), उपनियम (7) और उपनियम (8) के उपबंधों के अधीन रहते हुए अधिनियम के उपबंध ऐसे लागू होंगे मानो कि,—

  (i) पात्र विनिधान निधि और पात्र विनिधान प्रबंधक के बीच संव्यवहार कोई अंतर्राष्ट्रीय संव्यवहार है; और

 (ii) पात्र विनिधान निधि और पात्र विनिधान प्रबंधक सहयुक्त उपक्रम है।

(6) निधि प्रबंधक धारा 92घ और उसके तदधीन बनाए गए नियमों द्वारा यथाअपेक्षित सूचना और दस्तावेजों को रखेगी।

(7) निधि प्रबंधक उसके द्वारा धारा 92ड. के अधीन प्रस्तुत करने के लिए अपेक्षित किसी रिपोर्ट के अतिरिक्त निधि के लिए किए गए किसी कार्यकलाप के संबंध में लेखापाल से रिपोर्ट अभिप्राप्त करेगा और ऐसी रिपोर्ट को ऐसे लेखापाल द्वारा सम्यकत: सत्यापित प्ररूप सं. 3गडञ में विनिर्दिष्ट तारीख को या उसके पूर्व उसमें इंगित रीति में प्रस्तुत करेगा तथा अधिनियम के सभी उपबंध ऐसे लागू होंगे मानो यह धारा 92ड. के अधीन प्रस्तुत की गई रिपोर्ट है।

स्पष्टीकरण - इस उपनियम के प्रयोजनों के लिए "विनिर्दिष्ट तारीख" का वही अर्थ होगा जो धारा 139 की उपधारा (1) के स्पष्टीकरण 2 में, "नियत तारीख" का है।

(8) जहां निधि प्रबंधक ने धारा 92घ और उसके तदधीन बनाए गए नियमों के अधीन अपेक्षित दस्तावेज या सूचना नहीं रखी है या यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या अंतरण कीमत अधिकारी के समक्ष दस्तावेज या सूचना प्रस्तुत नहीं की है, तो यथास्थिति, निर्धारण अधिकारी या अंतरण कीमत अधिकारी धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ड) के प्रयोजनों के लिए संनिकट कीमत का अवधारण करने से पूर्व निधि को संनिकट कीमत का अवधारण करने के लिए आवश्यक सूचना और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा तथा संनिकट कीमत का अवधारण निधि द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों या सूचना, यदि कोई हों, पर विचार करने के पश्चात् किया जाएगा।

(9) यदि किसी पूर्व वर्ष में यह अवधारित किया जाता है कि निधि प्रबंधक निधि द्वारा संदत्त या संदेय पारिश्रमिक धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ड) के उपबंधों के अनुसार नहीं है तब निधि को धारा 9क के फायदों से इंकार नहीं किया जाएगा, जो अन्यथा धारा 9क में विनिर्दिष्ट अन्य सभी शर्तों को पूरा करती है।

(10) उपनियम (9) में अंतर्विष्ट कोई बात किसी निधि को लागू नहीं होगी,—

(क) लगातार पूर्व तीन वर्षों की अवधि के लिए; या

(ख) पूर्ववर्ती चार वर्षों में से किन्ही तीन के लिए,

यदि निधि प्रबंधक को संदत्त या संदेय पारिश्रमिक का अवधारण इस रूप में किया गया है कि वह संनिकट कीमत नहीं है।

1[(11) उपनियम (5) से उपनियम (10) के उपबंध 1 अप्रैल, 2019 को या उसके पश्चात लागू नहीं होंगे।

(12) निधि प्रबंधक को निधि द्वारा संदत्त की जाने वाली पारिश्रमिक की ऐसी रकम, जिसे धारा 9क की उपधारा (3) के खंड (ड) में निर्दिष्ट की गई है, निम्नलिखित रीति से गणना की जाएगी, अर्थात्:-

(i) ऐसी दशा में, जहां निधि श्रेणी-1 विदेशी पोर्टफोलियों निवेशक है जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक) विनियम, 2019 के विनियम 5 के खंड (क) के मद (i), मद (ii) या मद (iii) और मद (iv) के उपमद III में निर्दिष्ट की गई है, पारिश्रमिक की रकम प्रबंधन के अधीन आस्ति का 0.10 प्रतिशत होगी।

(ii) अन्य दशा में, पारिश्रमिक की रकम निम्नलिखित होगी,—

(क) प्रबंधन के अधीन आस्ति का 0.30 प्रतिशत, या

(ख) निधि प्रबंधक द्वारा किए गए निधि प्रबंधन कार्यकलाप से विनिर्दिष्ट बाधा दर से अधिक निधि द्वारा प्राप्त लाभों का 10 प्रतिशत, जहां यह केवल निधि द्वारा प्राप्त आय या लाभों से जुड़े पारिश्रमिक का हकदार है; या

(ग) प्रबंधन फीस का 50 प्रतिशत, चाहे वह नियत भार की प्रकृति में हो या निधि प्रबंधक द्वारा किए गए प्रबंधन कार्यकलाप से निधि द्वारा प्राप्त आय या लाभों से जुड़ा हो या निधि प्रबंधक द्वारा किए गए प्रबंधन कार्यकलाप की बाबत ऐसी निधि द्वारा संदत्त जो परिचालन व्यय, जिसके अंतर्गत विवरण व्यय, यदि कोई हो, से उद्भूत रकम द्वारा कम किया गया हो:

परंतु इस उपखंड के उपबंध केवल तभी लागू होंगे जब निधि का किसी अन्य निधि प्रबंधक को प्रबंधन फीस का संदाय कर रही है:

परंतु यह और कि उस दशा में जहां पारिश्रमिक की रकम खंड (i) या खंड (ii) के अधीन प्राप्त रकम से कम है वहां निधि अपने विकल्प पर 10फक के उपनियम (2) में निर्दिष्ट सदस्य केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को पारिश्रमिक की रकम के रूप में उस कम रकम के लिए उक्त नियम के अधीन बोर्ड के अनुमोदन की ईप्सा करते हुए आवेदन कर सकेगा और ऐसे आवेदन की प्राप्ति पर, बोर्ड सुसंगत तथ्यों पर विचार करते हुए स्वयं का समाधान हो जाने के पश्चात् ऐसी कम रकम को पारिश्रमिक की रकम के रूप अनुमोदित कर सकेगा:

1a[परंतु यह भी कि नियम 10फक के उपनियम (3) से उपनियम (12) के उपबंध, दूसरे परंतुक के अधीन किए गए आवेदन पर , यथा आवश्यक परिवर्तन सहित वैसे ही लागू होंगे जैसे कि उक्त नियम के उपनियम (2) के अधीन किए गए आवेदन पर लागू होते है:

परंतु यह भी की दूसरे परंतुक के अधीन किए गए ऐसे आवेदन पर, जो 1 अप्रैल, 2021 से शुरू होने वाले पिछले वर्ष के लिए किए गए हैं और 1 फरवरी, 2021 को या उससे पहले किए गए हैं, नियम 10फक के उपनियम (3) के उपबंध लागू नहीं होंगे।]

स्पष्टीकरण:-इस नियम के प्रयोजनों के लिए,-

(क) "प्रबंधन के अधीन आस्ति" से निधि के ऐसे हिस्से के मूल्य के आरंभिक और अंतिम अतिशेष के मासिक औसत का वार्षिक अभिप्रेत है जो निधि प्रबंधक द्वारा प्रबंधित किया जाता है;

(ख) "प्रबंधन फीस" से एक लेखाकार से अभिप्राप्त प्रमाणपत्र में यथा-उल्लिखित रकम अभिप्रेत है जो इस प्रयोजन के लिए नियम 11पख के स्पष्टीकरण के खंड (i) में यथापरिभाषित है;

(ग) "विनिर्दिष्ट बाधा दर" से ऐसी पूर्व परिभाषित अवसीमा अभिप्रेत है जिससे परे निधि प्रबंधक द्वारा किए गए निधि प्रबंधन कार्यकलाप से निधि द्वारा अर्जित लाभों के किसी शेयर का संदाय करने के लिए सहमत है।

(13) निधि प्रबंधक, धारा 9ड़ के अधीन उसके द्वारा प्रस्तुत किए जाने के लिए अपेक्षित किसी रिपोर्ट के अतिरिक्त, निधि के लिए किए गए कार्यकलाप की बाबत लेखाकार से एक रिपोर्ट प्राप्त करेगा और ऐसी रिपोर्ट को ऐसे लेखाकार द्वारा सम्यकरूप से सत्यापित प्ररूप सं. 3गड़ञक में विनिर्दिष्ट तारीख को या उससे पहले उसमें उपदर्शित-रीति में प्रस्तुत करेगा और अधिनियम के सभी उपबंध इस प्रकार लागू होंगे मानों यह धारा 92ड़ के अधीन प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट हो।]

2[(14)] धारा 9क की उपधारा (4) के खंड () के प्रयोजनों के लिए किसी निधि प्रबंधक को केवल इस कारण के लिए कि निधि प्रबंधक उक्त निधि के निधि प्रबंधक से संबंधित क्रियाकलाप कर रहा है, निधि से संबंधित व्यक्ति नहीं समझा जाएगा।

2[(15)] धारा 9क की उपधारा (4) के खंड () के प्रयोजन के लिए, निधि द्वारा किसी निधि प्रबंधक को संदत्त ऐसे पारिश्रमिक को, जो नियत प्रभार की प्रकृति का है और निधि प्रबंधक द्वारा निधि प्रबंधन संबंधी क्रियाकलाप से निधि द्वारा व्युत्पन्न आय या लाभों पर निर्भर नहीं है, उस समय उक्त खंड में विनिर्दिष्ट लाभों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा, यदि धारा 9क की उपधारा (3) के खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तें पूरी हो जाती हैं ऐसे नियत प्रभार के संबंध में निधि प्रबंधक द्वारा सुसंगत निधि प्रबंधन क्रियाकलाप के आरंभ पर लिखित में सहमति दी गई है।

 

  1. आय-कर (दसवां संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 27.5.2020 से अंत:स्थापित।

1a. आय-कर (दुसरा संशोधन) नियम, 2021 द्वारा 9.3.2021 से अंत:स्थापित।

  2. आय-कर (दसवां संशोधन) नियम, 2020 द्वारा 27.5.2020 से उपनियम (11) और (12) को क्रमश: उपनियम (14) और उपनियम (15) के रूप् में पुनर्सख्यांकित किया गया।

 

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