डीए.— सामान्य एंटी अवॉइडेंस नियम का अनुप्रयोग
कुछ मामलों में चैप्टर XA लागू नहीं होगा।
10प. (1) अध्याय 10ए के प्रावधान निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे-
| (क) | ऐसा प्रबंध, जिसमें प्रासंगिक कर निर्धारण वर्ष में व्यवस्था के सभी पक्षकारों को कुल मिलाकर मिलने वाला कर लाभ तीन करोड़ रूपये से अधिक नहीं होता है ; | |
| (ख) | विदेशी संस्थागत निवेशक,— |
| (i) | जो अधिनियम के अन्तर्गत करदाता है; | |
| (ii) | जिसने धारा 90 या धारा 90ए में निर्दिष्ट किसी समझौते का लाभ नहीं लिया है, जैसा भी मामला हो; और | |
| (iii) | जिसने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी संस्थागत निवेशक) विनियमन, 1995 तथा ऐसे निवेशों के संबंध में लागू होने वाले अन्य विनियमों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से सूचीबद्ध प्रतिभूतियों, अथवा गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश किया हो; |
| (ग) | कोई व्यक्ति, जो अनिवासी हो, उसके द्वारा अपतटीय व्युत्पन्न उपकरणों के माध्यम से या अन्यथा, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से किसी विदेशी संस्थागत निवेशक में किए गए निवेश के संबंध में; | |
| 54[ (घ) | कोई आय जो किसी व्यक्ति को ऐसे निवेशों के अन्तरण से उपार्जित हुई हो या उपार्जित मानी गई हो या उसके द्वारा प्राप्त हुई हो या प्राप्त मानी गई हो, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा 1 अप्रैल, 2017 के पूर्व किए गए हों । ] |
55[ (2) अध्याय XA के प्रावधान किसी भी व्यवस्था पर लागू होंगे, चाहे वह किसी भी तारीख को की गई हो, 1 अप्रैल, 2017 को या उसके बाद व्यवस्था से प्राप्त कर लाभ के संबंध में, उस आय को छोड़कर जो किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे निवेशों के हस्तांतरण से उपार्जित होती है, या उपार्जित या उत्पन्न मानी जाती है, या प्राप्त होती है या प्राप्त मानी जाती है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा 1 अप्रैल, 2017 के पहले किए गए थे । ]
(3) इस नियम के प्रयोजनों के लिए,-
| (i) | "विदेशी संस्थागत निवेशक" का वही अर्थ होगा, जो धारा 115एजी के स्पष्टीकरण में दिया गया है ; | |
| (ii) | "ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट" का वही अर्थ होगा, जो उसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अंतर्गत जारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी संस्थागत निवेशक) विनियम, 1995 में दिया गया है; | |
| (iii) | ''भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड'' का वही अर्थ होगा, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (क) में है; | |
| (iv) | धारा 102 के खंड (10) में परिभाषित और अध्याय 10ए के अनुसार संगणित "कर लाभ" निम्नलिखित के संदर्भ में होगा- |
| (क) | उक्त खण्ड के उपखण्ड (क) से (ङ) के अन्तर्गत कर की राशि; और | |
| (ख) | उक्त खण्ड की उपधारा (एफ) के अनुसार वह कर देय होता यदि उसमें निर्दिष्ट हानि में वृद्धि कुल आय होती। |

