करार का पुनरीक्षण
10थ. (1) किसी करार में प्रविष्ट होने के पश्चात् किसी करार का इस नियम के अनुसरण में बोर्ड द्वारा पुनरीक्षण किया जा सकेगा, यदि,—
(क) महत्वपूर्ण अवधारणा में कोर्इ परिवर्तन है या ऐसी किसी शर्त को पूरा करने में असफलता जिसके अधीन रहते हुए करार किया गया है;
(ख) विधि में कोर्इ परिवर्तन जो करार द्वारा समाविष्ट किसी मामले को उपांतरित करता है किन्तु ऐसी प्रकृति का नहीं है जो करार को आबद्धकर नहीं बनाता है; या
(ग) द्विपक्षीय या बहुपक्षीय करार की दशा में किसी अन्य देश के सक्षम प्राधिकारी से करार के पुनरीक्षण का अनुरोध है।
(2) किसी करार का बोर्ड द्वारा स्वप्रेरणा से या निर्धारिती या भारत में सक्षम प्राधिकारी या महानिदेशक आयकर (अंतरराष्ट्रीय कराधान) के अनुरोध पर पुनरीक्षण किया जा सकेगा।
(3) निर्धारिती के अनुरोध पर करार के पुनरीक्षण के प्रस्ताव के सिवाए, करार का तब तक पुनरीक्षण नहीं किया जाएगा जब तक निर्धारिती को सुने जाने का अवसर प्रदान नहीं कर दिया जाता है और निर्धारिती प्रस्तावित पुनरीक्षण से सहमत है।
(4) कर दाता के प्रस्तावित पुनरीक्षण से सहमत न होने की दशा में करार को नियम 10द के अनुसरण में रद्द किया जा सकेगा।
(5) बोर्ड के निर्धारिती के करार के पुनरीक्षण के अनुरोध से सहमत न होने की दशा में, बोर्ड अनुरोध को रद्द करने के कारण लिखित में देते हुए रद्द कर देगा।
(6) प्रस्तावित पुनरीक्षण के लिए सहमति के प्रयोजन के लिए नियम 10ठ में उपबंधित प्रक्रिया को, जहां तक हो सके, लागू किया जाएगा।
(7) पुनरीक्षित करार में उस तारीख को शामिल किया जाएगा जिस तक मूल करार को लागू होना है और वह तारीख जिससे पुनराक्षित करार को लागू होना है।

