आय की विवरणी
करदाता को आयकर विभाग को उसकी कर योग्य आय। हानि के ब्यौरे का संवाद करना होगा। ये ब्यौरे आयकर विभाग को आय की विवरणी के रूप में संवादित हैं। इस भाग में, आप आय की विवरणी से सम्बंधित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आय की विवरणी
प्रत्येक करदाता को अपनी आय का ब्यौरा आयकर विभाग को देना अनिवार्य है। यह विवरण विधिवत प्रपत्र में प्रस्तुत किया जाना है जो आय की विवरणी के तौर पर जाना जाता है। इस भाग में आप आय विवरणी से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
व्यक्ति जिसे आय की विवरणी दाखिल करनी है
आय विवरणी दाखिल करने में सम्बन्धित प्रावधान करदाता स्थिति पर निर्भर है। इसमें सम्बन्धित स्थिति नीचे दी गई है:
कम्पनियों के मामले में :
प्रत्येक व्यक्ति, जो कि कंपनी है को आय का विवरण दाखिल करना अनिवार्य है। चाहें उसकी आय लाभ हो या हानि। अन्य शब्दों में प्रत्येक कंपनी हेतु अनिवार्य है कि वह आय की विवरणी दाखिल करे चाहे लाभ हो या हानि।
साझेदारों व्यवसायों के मामले में :
हर व्यक्ति, जो कि एक साझेदारी फर्म है (सीमित देयता भागीदारी सहित), को आय विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है। चाहे इसकी आय लाभ हो या हानि। अन्य शब्दों में प्रत्येक साझेदार व्यवसायों हेतु अनिवार्य है कि वह आय की विवरणी दाखिल करें चाहे लाभ हो या हानि।
व्यक्ति/एचयूएफ/एओपी/बीओआई/कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति की स्थिति में
हर व्यक्ति/एचयूएफ/एओपी/बी ओ आई/कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति को आय विवरणी दाखिल करती है। अगर उसकी कुल आय (अन्य किसी व्यक्ति आय सहित जिसके सम्बन्ध में यह है निर्धारणीय है) धारा 10(38, )धारा 10क, 10ख, 10खक, 54, 54ख, 54घ, 54ङग, 54च, 54ज, 54जक या 54जख या अध्याय VIक (अर्थात धारा 80ग से 80प के तहत कटौती) के प्रावधानो के प्रभाव को बिना, कर के दायरे से मुक्त अधिकतम राशि से अधिक है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है।
धर्मार्थ या धार्मिक ट्रस्टो के मामले में:
हर व्यक्ति जो धर्मार्थ या धार्मिक न्यायो/कानूनी दाखिले के अंतर्गत धरित संपत्ति को व्युत्पद या स्वैच्छिक योगदान से आय धारण करता है जो धारा 2 (24)(iiक) में संदर्भित है को आय विवरणी दाखिल करनी है यदि उसकी कुल आय धारा 11 और 12 को प्रावधानों को प्रभाव में लाए विना कर मुक्त अधिकतम आय से अधिक है।
राजनैतिक संघों के मामले में:
हर राजनीतिक दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्टी को आय विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है यदि अनुभाग 13क के प्रावधानों को लागू किए बिना पार्टी की कुल आय आयकर के दायरे में नहीं अधिकतम राशि से अधिक है।
कुछ संघ के मामले में:
निम्नलिखित संस्थाओ को आय विवरणी दाखिल करनी है यदि उनकी कुल आय धारा 10 प्रावधानो को लागू किए विना कर मुक्त अधिकतम आय से अधिक है:
• धारा 10 (21) में सदर्भित अनुसंधान संघ
• धारा 10 (22ख) में सदर्भित समाचार एजेन्सी
• धारा 10 (23क) में सदर्भित संघ या संस्थान
• धारा 10 के वाक्यांश (ककक) में संदर्भित व्यक्ति
• धारा 10 (23ख) में सदर्भित संस्थान
• धारा 10(23ग) के उपखंड (iiiकग), (iiiकख), (iiiकघ), (iiiकड़), (iv), (v), (vi) या (viक) के संदर्भित कोष/संस्था/ट्रस्ट/विश्वविद्यालय/अन्य शैक्षिक संस्था/ कोई भी अस्पताल/चिकित्सा संस्था
• धारा 10 के वाक्यांश (23 घ) में संदर्भित म्यूचल फंड
• धारा 10 के वाक्यांश (23 घक) में संदर्भित प्रतिभूतिकरण न्यास
• धारा 10 के वाक्यांश (23ड़ग) या वाक्यांश (23ड़घ) में संदर्भित निवेश संरक्षण कोष
• धारा 10 के वाक्यांश (23ड़ड़) में संदर्भित मूल निपटान गारंटी कोष
• धारा 10 के वाक्यांश (23 चख) में संदर्भित उद्यम पूंजी राशि अथवा उद्यम पूंजी कंपनी
• धारा 10(24) के उपखंड क या ख में निर्दिष्ट व्यापार संघ/एसोसिएशन
• धारा 10 के वाक्यांश (29क) में संदर्भित बोर्ड या प्राधिकारी
• धारा 10(46) में निर्दिष्ट बॉडी/प्राधिकरण/बोर्ड/ट्रस्ट/आयोग
• धारा 10(47) में निर्दिष्ट बुनियादी ढॉचा ऋण फंड
कुछ निश्चित विश्वविद्यालय, महाविद्यालय या अन्य संस्था के मामले में:
• धारा 35(1) खंड (ii) और खंड (iii) में निर्दिष्ट हर विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और अन्य संस्था, जो कि किसी अन्य कानून के प्रावधान के तहत आय विवरणी या हानि दर्शाना जरूरी नही है, को लाभ या हानि प्रवाह किए बिना हर वर्ष आय विवरणी दाखिल करना है।
व्यापारिक न्यास के मामले में
व्यापार न्यास के मामले में प्रत्येक व्यापार न्यास, जिसे अधिनियम के किसी अन्य प्रावधानों के अंतर्गत आय की विवरणी अथवा हानि को प्रस्तुत करना आपेक्षित नहीं है, को प्रत्येक वर्ष आय की विवरणी प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा चाहे आय (अथवा) हानि हो
धारा 115पख में संदर्भित निवेशगत कोष की स्थिति में
धारा 115पख में संदर्भित प्रत्येक निवेशगत कोष, जिसे किसी अन्य प्रावधानों के अंतर्गत लाभ अथवा हानि की विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित नहीं है, आय (अथवा) हानि के बावजूद प्रत्येक वर्ष की हानि अथवा अपनी आय के संबंध में आय की विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित है।
भारत के बाहर स्थित संपत्ति धारण व्यक्तियों के मामले में :
एक व्यक्ति, भारत में निवासी के तौर पर (अनिवासी व्यक्ति के तौर पर नहीं), जिसे उक्त में से किसी के अंतर्गत तथा जिसे पिछले वर्ष के दौरान किसी भी विवरणी को प्रस्तुत करना आपेक्षित नहीं है
(क) लाभार्थी मालिक (*) के तौर पर अथवा अन्यथा, भारत से बाहर स्थित किसी संपत्ति का अधिकार रखता हो (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित) अथवा भारत से बाहर स्थित किसी खाते में हस्ताक्षरित प्राधिकारी हो अथवा
(ख) भारत से बाहर स्थित किसी संपत्ति का लाभार्थी हो (*) (किसी उद्यम में किसी वित्तीय हित सहित)
को ऐसे प्रारूप में तथा ऐसे तरीके में पिछले वर्ष के लिए उसकी आय अथवा हानि के संबंध में विवरणी को नियत तिथि को अथवा उससे पहले प्रस्तुत करना होगा तथा ऐसे अन्य विवरण को निर्धारित करना होगा जिसे निर्धारित किया जा सकता है। हालांकि, चर्चित प्रावधान भारत से बाहर स्थित किसी परिसंपत्ति के लाभार्थी के तौर पर एक व्यक्ति के लिए लागू नहीं होगी (किसी उद्यम में किसी वित्तीय ब्याज सहित) जहां, ऐसी परिसंपत्ति से आय, यदि हो, उक्त (क) में संदर्भित व्यक्ति की आय में शामिल करने योग्य हो।
(*) एक के संबंध में " लाभार्थी स्वामी" का अर्थ एक व्यक्ति है जिसने अपने अथवा अन्य किसी व्यक्ति के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भविष्यगत लाभ अथवा तुरंत लाभ के लिए परिसंपत्ति के प्रतिफल के लिए, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से मुहैया कराया गया है।
(*) एक के संबंध में " लाभार्थी " का अर्थ एक व्यक्ति है जिसने पिछले वर्ष के दौरान परिसंपत्ति से लाभ प्राप्त किया हो तथा ऐसी परिसंपत्ति के लिए प्रतिफल को लाभार्थी के अलावा किसी व्यक्ति द्वारा मुहैया कराया गया हो।
कुछ मामलों में विवरणी को अनिवार्य रूप से दाखिल करना
प्रभावी निर्धारण वर्ष 2020-21 से प्रत्येक व्यक्ति (एक कंपनी या फर्म को छोड़कर) जिनको धारा 139(1) के किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत आय की विवरणी को प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है, उसके लिए यह अनिवार्य है कि वह आय की विवरणी को दाखिल करें यदि पिछले वर्ष के दौरान उसने —
1. एक बैंक या सहकारी बैंक में एक या एक से अधिक चालू खाते में रू. 1 करोड़ से अधिक की राशि (या कुल राशि) जमा की हो
2. विदेश में यात्रा करने के लिए अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए रू. 2 लाख से अधिक का कुल व्यय किया हो
3. विद्युत बिल के भुगतान के लिए रू. 1 लाख से अधिक का कुल व्यय किया हो
4. ऐसी अन्य शर्तों को पूरा किया हो जिनको निर्धारित किया जा सके
सीबीडीटी ने अधिसूचना सं. 37/2022, दिनांक 21.04.2022 के द्वारा धारा 139(1) के सांतवें परंतुक, जिसके तहत प्रस्तुति को अनिवार्य बनाया गया है, के अंतर्गत अतिरिक्त षर्तों को अधिसूचित किया है। यह अतिरिक्त शर्तें इस प्रकार हैं :
1) यदि व्यापार की कुल बिक्री, कारोबार या कुल प्राप्ति पिछले वर्ष के दौरान रू. 60 लाख से अधिक है या
2) यदि पेशे की कुल प्राप्तियां पिछले वर्ष के दौरान रू. 10 लाख से अधिक है या
3) यदि पिछले वर्ष के दौरान एक व्यक्ति के मामले में काटा गया या एकत्रित किया गया कुल कर रू. 25,000 या उससे अधिक है। 60 वर्ष या उससे अधिक की आयु के घरेलू व्यक्ति के मामले में प्रारंभिक सीमा रू. 50,000 होगी या
4) यदि व्यक्ति के एक या एक से अधिक बचत बैंक खातों में कुल जमा पिछले वर्ष के दौरान रू. 50 लाख या उससे अधिक है।
आय की विवरणी दाखिल करने की 'अंतिम तिथियां'
| क्रम सं. | करदाता की स्थिति | अंतिम तिथि |
| 1 | निर्धारिती, फर्म के साझेदार अथवा ऐसे साझेदार का जीवनसाथी (यदि धारा 5क ऐसे जीवनसाथी पर लागू होती है) शामिल हैं। | |
| नोट: यदि धारा 92ङ के प्रावधान लागू होते हो | 30 नवंबर | |
| 2 | (i) कंपनी | 31 अक्टूबर |
| (ii) ऐसा निर्धारिती (कंपनी के अतिरिक्त) जिसके खाते इस अधिनियम या वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षित किया जाना अपेक्षित हों; | ||
| (iii) ऐसी फर्म का साझेदार जिसके खाते इस अधिनियम या वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षित किया जाना अपेक्षित हों; अथवा ऐसे साझेदार का जीवनसाथी (यदि धारा 5क ऐसे जीवनसाथी पर लागू होती है) | ||
| टिप्पणी : यदि धारा 92ङ के प्रावधान लागू नहीं होते हैं | ||
| 3 | (i)ऐसा निर्धारिती जिसकी आय व्यापार या पेशे के लाभ एवं प्राप्ति से हो तथा जिसके खाते इस अधिनियम या वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षित किया जाना अपेक्षित न हों; | 31 अगस्त |
| (ii) ऐसी फर्म का साझेदार जिसके खाते इस अधिनियम या वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षित किया जाना अपेक्षित न हों अथवा ऐसे साझेदार का जीवनसाथी (यदि धारा 5क ऐसे जीवनसाथी पर लागू होती है) | ||
| 4 | कोई अन्य निर्धारिती | 31 जुलाई |
उदाहरण
श्रीमती सरोज एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं। गत वर्ष 2025-26 में उनकी आय 8,40,000 रु. है। (वह अन्य कोई आय प्राप्त नही करती है) वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए श्रीमती सरोज के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या होगी?
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इस मामले में, श्रीमती सरोज ऊपर चर्चित तालिका के क्रम संख्या 4 के तहत आएगी अत: वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 होगी।
उदाहरण
श्री रूपेन एक डॉक्टर हैं । श्री रूपेन को वर्ष 2025-26 की सकल रसीदों का कुल 18,40,000 रुपये आया। श्री रूपेन के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या होगी?
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वर्ष के लिए सकल प्राप्ति रु. 50,00,000 से कम है तथा इसलिए श्री रुपेन अपने खातों के अंकेक्षण के लिए उत्तरदायी नहीं है अर्थात् वह लेखा द्वारा कवर्ड नहीं होते। इस मामले में वह पहले चर्चा की गई तालिका में क्रम संख्या 3 के अंतर्गत आएंगे अत: वित्त वर्ष 2025-26 में आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि 31 अगस्त, 2026 होगी।
उदाहरण
श्री राहुल एक कपड़ों का कारखाना चलाते हैं। पिछले वर्ष 2025-26 में उन्होंने अपने व्यापार में 1,84,00,000 रुपये का कारोबार किया। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए श्री राहुल द्वारा आय की विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि क्या होगी?
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वर्ष के लिए कारोबार रु. 2,00,00,000 से कम है तथा इसलिए श्री राहुल को अपने खाते अंकेक्षित करना आपेक्षित नहीं है अर्थात् वह लेखा द्वारा कवर्ड होते हैं क्योंकि धारा 44कघ की प्रकल्पित कराधान योजना को नहीं चुना है। तथा इस मामले में भी राहुल पहले चर्चित तालिका में क्रम संख्या 3 के अन्तर्गत आते हैं। इसलिए वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि 31अगस्त, 2026 है।
उदाहरण
श्री कौशल एसम ट्रेडिंग कंपनी में भागीदार हैं। कंपनी के वित्त वर्ष 2025-26 का कुल कारोबार 2,84,00,000 रुपये का है। श्री कौशल का कंपनी से पारिश्रमिक, ब्याज और फर्म के लाभांश के अलावा आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। श्री कौशल और साझा कंपनी के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि क्या है?
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कम्पनी का कुल कारोबार 2,00,00,000 रुपये से अधिक है इसलिए यह अपने खातों का लेखा परीक्षा करवाने के लिए उत्तरदायी है। इसलिए फर्म धारा 44कघ के अंतर्गत प्रकल्पित कराधान योजना के योग्य नहीं है। इसलिए श्री कौशल तथा कंपनी पहले चर्चित तालिका की क्रम संख्या 2 के अन्तर्गत आते हैं। अत: वर्ष 2025-26 के लिए (कंपनी तथा श्री कौशल के मामले में) आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि 31 अक्टूबर, 2026 है।
उदाहरण
श्री किरण एस एम उद्यम में भागीदार है। कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कारोबार 1,84,00,000 रुपये है। कंपनी ने अधिनियम की धारा 44कघ के तहत प्रकलित आधार पर आय @ 8% की पेशकश की है। श्री किरण की फर्म से प्राप्त पारिश्रमिक, ब्याज और कंपनी से लाभांश के अलावा आय का कोई स्रोत नहीं है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए साझा कंपनी श्री किरण के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि क्या है?
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फर्म का कुल कारोबार 2,00,00,000 से कम है और, इसलिए, यह अपने खातों की लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी नहीं है। अत: कंपनी तथा श्री किरण पहले चर्चित तालिका के क्रम संख्या 3 के अंर्तगत आते हैं। और, इसलिए, वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी (कंपनी तथा श्री किरण दोनों के मामले में) आय विवरणी दाखिल करने की अंतिम तिथि 31अगस्त 2026 होगी।
उदाहरण
एसम खनिज प्रा. लि. कंपनी खनिजों का व्यापार करती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि क्या होगी?
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इस मामले में एसम लि. पहले चर्चित तालिका की क्रम संख्या 2 के अन्तर्गत आयेगी। और, इसलिए, वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अंन्तिम तिथि 31 अक्टूबर, 2026 होगी।
उदाहरण
एसम खनिज प्रा. लि. कंपनी खनिजों का व्यापार करती है तथा धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गड़ख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना उत्तरदायी है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आय की विवरणी हेतु नियत तिथि क्या होगी?
इस मामले में एसम लि. पूर्व चर्चित तालिका की क्रम सं. 1 के अंतर्गत आएगी तथा इसलिए वर्ष 2025-26 के आय की विवरणी हेतु अंतिम तिथि 30 नवम्बर 2026 होगी।
बिलम्बित विवरणी
यदि कोई व्यक्ति इस सम्बन्ध में निर्धारित समय सीमा के भीतर आय की विवरणी दाखिल करने में विफल, रहता है तो वह धारा 139(4) के अनुसार बिलम्बित विवरणी दाखिल कर सकता है। जो इनमें से पहले हो, प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अन्त से एक वर्ष के भीतर या मूल्यांकन के पूरा होने से पहले, बिलम्बित विवरणी दाखिल की जा सकती है।
उदाहरण
श्री राजा एक कृषि उपज के व्यापारी हैं। उनके व्यापार का पिछले वर्ष 2025-26 का कुल कारोवार 84,00,000 रुपये रहा। उन्होंने धारा 44कघ के तहत निर्धारित बिक्री का 8% आय के लिए नहीं चुना। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि क्या होगी? यदि वह अन्तिम तिथि के अन्दर आय विवरणी दाखिल करने में विफल होते हैं तो वह किस स्थिति तक बिलम्बित विवरणी दाखिल कर सकते हैं?
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इस मामले में श्री राजा ने धारा 44कघ की सम्भावित कराधान योजना को नहीं चुना था और घोषित आय बिक्री के 8% से कम है, उन्हें धारा 44कख के तहत अपने खातों का लेखा परीक्षण करवाना होगा इसलिए वह पहले चर्चित तालिका की क्रम संख्या 3 के अन्तर्गत आते हैं। अत: वर्ष 2025-26 के लिए आय विवरणी दाखिल करने की अन्तिम तिथि 31 अगस्त, 2026 है।
यदि वह देय तिथि अर्थात 31 अगस्त, 2026, को आय की विवरणी दाखिल नहीं कर सकता, तब वह सम्बन्धित निर्धारण वर्ष के अंत से एक वर्ष या निर्धारण वर्ष पूरा होने की अवधि, जो भी पहले हो के भीतर बिलम्बित आय विवरणी दाखिल कर सकता है।
दूसरे शब्दों में, वह 31-12-2025 तक बिलम्बित दाखिल कर सकता है। यदि मूल्यांकन 31-12-2026 से पहले पूर्ण है, तब वह मूल्यांकन पूर्ण होने से पहले किसी भी समय पर बिलम्बित विवरणी दाखिल कर सकता है।
उदाहरण
श्रीमती गुप्ता एक गृहिणी है और उनके पास आय का कोई स्त्रोत नहीं है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उन्होंने अपने घर के बिजली के बिल का भुगतान किया। बैंक खाते के माध्यम से रू. 1,50,000 का कुल भुगतान किया गया। क्या श्रीमती गुप्ता आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होंगी ?
एक व्यक्ति आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होगा यदि उसने बिजली के बिल के भुगतान के लिए रू. 1 लाख से अधिक का कुल व्यय किया हो। इस मामले में उन्होंने बिजली के बिल के लिए रू. 1,50,000 का भुगतान किया है। इसलिए, वह 31 जुलाई, 2026 तक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होंगी।
उदाहरण
श्री राघव एक वेतनभोगी कर्मचारी है। उन्होंने अपने भाई को दुबाई का हॉलिडे पैकेज उपहार में दिया। श्री राघव ने हॉलिडे पैकेज के लिए टूर ऑपरेटर को रू. 2.5 लाख की कुल राशि का भुगतान किया। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उनकी वेतन आय रू. 2,00,000 है और कोई अन्य आय नहीं है। क्या श्री राघव आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होंगे ?
यदि कोई व्यक्ति कुल मिलाकर रु. 2 लाख से अधिक खर्च करता है तो वह आय का रिटर्न दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होगा। स्वयं या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा के लिए 2 लाख रु. इसलिए चाहे किसी व्यक्ति ने स्वयं के लिए खर्च किया हो या किसी अन्य व्यक्ति के लिए, यदि विदेश यात्रा पर खर्च रुपये से अधिक है तो रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
इस मामले में, श्री राघव ने रू. 2.5 लाख की कीमत का हॉलिडे पैकेज खरीदा। इसलिए, वह 31 जुलाई, 2026 तक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आय की विवरणी को दाखिल करने के लिए उत्तरदायी होगा भले ही कर हेतु वसूले न जाने वाली उसकी कुल आय अधिकतम राशि से अधिक न हो
आय की विवरणी दाखिल करने में देरी के परिणाम
आय की विवरणी दाखिल करने में देरी कुछ प्रतिकूल परिणामों को आकर्षित कर सकती है। आय की विवरणी दाखिल करने में देरी के निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं।
• हानि (''मकान परिसम्पत्ति से आय'' के शीर्ष के तहत हानि के अलावा) आगे नहीं ले जायी जा सकती।
• धारा 234क के तहत ब्याज की वसूली।
• धारा 234च* के अंतर्गत शुल्क की वसूली।
• धारा 10क, 10ख के तहत छूट उपलब्ध नहीं हैं ।
• अध्याय VI-क के भाग-ग के अंतर्गत कटौती उपलब्ध नही होगी।
* यदि निर्धारिती नियत तिथि के अंदर आय की विवरणी को प्रस्तुत नहीं कर पता जैसा कि धारा 139(1) में निर्धारित है तो उसे निम्न का भुगतान करना होता है :-
क) रू. 5000 यदि विवरणी निर्धारण वर्ष के 31 दिसंबर को या उससे पहले प्रस्तुत की जाती है
ख) किसी अन्य मामले में रू. 10,000
हालांकि, व्यक्ति की कुल आय रू. 5 लाख से अधिक नहीं होती तो देययोग्य शुल्क रू. 1000 होगा।
टिप्पणी :
वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा आय की विवरणी को प्रस्तुत करने में चूक के लिए शुल्क को संशेाधित किया जा चुका है। प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 से आय की विवरणी को प्रस्तुत करने में गलती के लिए शुल्क रू. 5,000 होगा यदि विवरणी धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारिती नियत तिथि के बाद प्रस्तुत की गई हो। हालांकि, यह रू. 1,000 होगी यदि एक निर्धारिती की कुल आय रू. 5 लाख से अधिक न हो।
विवरणी का पुनरीक्षण
कभी-कभी करदाता आय की विवरणी दाखिल करते समय एक या अधिक त्रुटियां प्रतिबद्ध करता है। इस प्रकार के मामले में आय की विवरणी दाखिल करने में अनजाने में गलती या त्रुटि या चूक एक पुनरीक्षित विवरणी दाखिल करने से ठीक की जा सकती है।
एक विवरणी को निर्धारण की समाप्ति से पहले या प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले, जो भी पहले हो, किसी भी समय संशोधित किया जा सकता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि धारा 139(4) के अंतर्गत दाखिल की गई लंबित विवरणी या धारा 139(1) के अंतर्गत दाखिल विवरण को ही संशोधित किया जा सकता है।
धारा 142(1) के अंतर्गत नोटिस के अनुसार दाखिल आय की विवरणी को धारा 139(5) के अंतर्गत संसोधित नहीं किया जा सकता।
नोट : यदि संशोधित विवरणी संबंधित वित्तीय वर्ष की समाप्ति के नौ माह पश्चात प्रस्तुत की जाती है, तो धारा 234-झ के अधीन निम्नानुसार शुल्क लगाया जाएगा :
(क) ₹1,000, जहाँ कुल आय ₹5 लाख से अधिक न हो; तथा
(ख) ₹5,000, अन्य मामलों में
दोषपूर्ण विवरणी
धारा 139(9) स्थितियों की सूची प्रदान करती है जिसमें करदाता द्वारा दाखिल की गयी आय की विवरणियों को दोषपूर्ण विवरणी के रूप में माना जा सकता है। यदि मूल्यांकन अधिकारी धारा 139(9) के तहत दाखिल की गयी दोषपूर्ण वितरणी प्राप्त है, तो वह ऐसे दोष के लिये करदाता को सूचित कर सकता है और ऐसे दोष को सुधारने का एक मौका उसे दे सकता है।
करदाता इस प्रकार की सूचना प्राप्त होने की 15 दिनों की अवधि के भीतर या मूल्यांकन अधिकारी द्वारा अनुमति दी गयी अतिरिक्त अवधि के भीतर आय की विवरणी में इस प्रकार के दोष को सुधारेगा।
यदि दोष 15 दिनों की अवधि या इसके लिये अनुमति अतिरिक्त अवधि (जैसा भी मान्य हो), के भीतर नहीं सुधारा जाता, तब अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान में कुछ भी निहित होने के बावजूद, विवरणी एक अवैध विवरणी के रूप में माना जायेगा और अधिनियम के प्रावधान, यदि करदाता विवरणी प्रस्तुत करने में असफल होता है कि तरह लागू होंगे।
एक आय की विवरणी को दोषपूर्ण माना जायेगा, जब तक कि निम्नलिखित शर्तें पूरी नहीं होती।
• आय के प्रत्येक शीर्ष के तहत आय प्राभार्य की गणना से सम्बन्धित आय की विवरणी में अनुबंधों, ब्यौरे और स्तम्भों, सकल कुल आय, की गणना और कुल को विधिवत रूप में भरा जायेगा।
• विवरणी को विवरणी के आधार पर देययोग्य कर की गणना को दर्शाते हुए विवरण द्वारा संलग्न किया जाना है
• धारा 44कख, में संदर्भित सम्परीक्षा की रिपोर्ट से विवरणी साथ है, या, रिपोर्ट सुसज्जित करने के सबूत के साथ ऐसी रिपोर्ट की एक प्रति से जहाँ विवरणी को प्रस्तुत करने के लिए पहले से सुसज्जित किया गया है।
• दावा किया गया कर, यदि कोई हो, स्रोत पर काटा गया या संग्रहित किया गया या दावा किये गये अग्रिम कर और स्वमूल्यांकन पर कर, यदि कोई है, का भुगतान किया जा चुका है। जहाँ दावा किये गये कर यदि कोई है स्रोत पर काटा गया या संग्रहित किया गया है, के सबूत के साथ विवरणी नहीं है, यदि आय की विवरणी को दोषपूर्ण के रूप में नहीं माना जायेगा।
(1) व्यक्ति को उसकी आय की विवरणी सुसज्जित करते हुये धारा 203 या धारा 206ग के तहत काटे गये कर या संग्रहित कर के लिये एक प्रमाण पत्र सुसज्जित नहीं था।
(2) इस प्रकार का प्रमाण पत्र धारा 155 की उपधारा (14) के तहत निर्दिष्ट 2 वर्षों की अवधि के भीतर उत्पादित है।
• जहाँ करदाता द्वारा खाते को किताबों की नियमित रूप से बनाये रखा है विवरणी साथ है प्रतियों के:
(1) विनिर्माण खाता, व्यापार खाता, लाभ और हानि खाता या, जैसा भी मामला हो सकता है, आय और व्यय खाता या कोई अन्य इसी तरह का खाता और बैलेंस सीट।
(2) एक मालिकाना व्यापार या पेशा के मामले में, मालिक के व्यक्तिगत खाता, एक फर्म के मामले में, व्यक्तियों का संघ या स्वायत्त बॉडी, साझेदारों या सदस्यों के व्यक्तिगत खाते और फर्म के एक साझेदार या सदस्य के मामले में या फार्म के सदस्य, व्यक्तियों का संघ या व्यक्तियों की निकाय साथ ही, फर्म में उसका व्यक्तिगत खाता भी, व्यक्तियों का संघ, या स्वायत्त बॉड़ी।
• जहाँ करदाता के खाते संपरीक्षित है, विवरणी संपरीक्षित लाभ और हानि खाता और बैलेंस सीट और लेखा परीक्षण की रिपोर्ट संलग्न है और जहाँ कम्पनी अधिनियम 1956 [अब कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 148] की धारा 233ख के तहत करदाता के लागत खाता का एक समपरीक्षण संचालित किया गया है, उस धारा के तहत रिपोर्ट भी किया गया है, के साथ है।
• जहाँ करदाता द्वारा बही खतों को नियमित रूप से न रखा गया हो, कारोबार की राशि दर्शाते हुये एक ब्यौरा या, जैसा भी मामला हो सकता है, सकल रसीदें, सकल लाभ व्यय और व्यापार या पेशे का शुद्ध लाभ और उस राशि के आधार पर जिसकी गणना की गयी है और कुल विविध देनदार की मात्रा का भी खुलासा किया गया है, विविध लेनदारों व्यापार में स्टॉक और पूर्व वर्ष के अन्त पर नगदी संतुलन से विवरणी साथ है।
नोट: आय की विवरणी दाखिल करने के लिये सी बी डी टी के आयकर नियम, 1962 द्वारा निर्धारित मौजूदा, नियमों के अनुसार आय की विवरणी के साथ कोई दस्तावेज संलग्न नहीं होंगे। अत: दस्तावेजों जैसे आय की गणना, बैलेंस सीट और खाते, समपरीक्षा रिपोर्ट, पी डी एस प्रमाण पत्र, कर भुगतान चालान, निवेश का सबूत, इत्यादि नई आय की विवरणी के साथ संलग्न नहीं हैं। इन दस्तावेजों को प्रस्तुत न करने के लिए कोई जुर्माना नहीं लगाया जायेगा और पूर्वोक्ति दस्तावेजों, ब्यौरो, इत्यादि के संलग्न न करने के कारण विवरणी दोषपूर्ण नहीं मानी जायेगी। \
किसके द्वारा विवरणी सत्यापित होगी
धारा 140 के अनुसार आय की विवरणी निम्न द्वारा सत्यापित होगी:
(क) व्यक्तिगत करदाता के मामले में,
i. स्वयं करदाता द्वारा
ii. किसी अपरिहार्य कारण से, व्यक्ति के लिए आवेदन पर हस्ताक्षर करना संभव न हो, आवेदन उसकी ओर से विधिवत किसी प्राधिकृत व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर कर सकता है।
iii. जहां वह अपने कार्यों को करने में मानसिक रूप से अक्षम हो तो उसकी ओर से उसका अविभावक अथवा कार्य करने के लिए अन्य कोई सक्षम व्यक्ति तथा
iv. जहां किसी अन्य कारण से, विवरणी को व्यक्ति द्वारा सत्यापित करना संभव न हो तो, इस संबंध में उसके द्वारा विधिवत रूप से प्राधिकृत कोई व्यक्ति
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उक्त (ii) अथवा (iv) हेतु संदर्भित मामले में, विवरणी को सत्यापित करने वाला व्यक्ति ऐसे करने वाले व्यक्ति से मुख्तारनामा होना चाहिए, जिसे विवरणी के साथ संलग्न करना होगा।
(ख) एक हिन्दू अविभाजित परिवार के मामले में, कर्त्ता द्वारा। जहाँ किसी कारण से कर्त्ता भारत में उपस्थित नहीं है अथवा अपने कार्य करने में मानसिक रूप से अक्षम है परिवार के किसी अन्य वयस्क सदस्य द्वारा हस्ताक्षर की जा सकती है।
(ग) एक कम्पनी के मामले में, प्रबन्ध निदेशक द्वारा जहाँ अपरिहार्य कारण से कोई मैनेजिंग डायरेक्टर विवरणी कम्पनी हस्ताक्षरित न की जा सकती हो।, अथवा उसके किसी निदेशक द्वारा कोई प्रबंध निदेशक न हो।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि जहां कंपनी भारत में निवासी नहीं है, विवरणी को उस व्यक्ति द्वारा सत्यापित किया जा सकता है जो ऐसा करने के लिए ऐसी कंपनी से वैध मुख्तारनामा रखता हो जिसे विवरणी के साथ संलग्न किया जाएगा। इस संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए :
♦ जहां कंपनी को समाप्त किया जा रहा हो, चाहे न्यायालय के आदेशों के अंतर्गत अथवा अन्यथा, अथवा जहां किसी व्यक्ति को कंपनी की किसी परिसंपत्ति के प्राप्तकर्ता के तौर पर नियुक्ति किया गया हो, विवरणी धारा 178(1) में संदर्भित परिसमापक द्वारा सत्यापित होगी।
♦ जहां कंपनी का प्रबंधन किसी कानून के अंतर्गत केंद्र सरकार अथवा किसी राज्य सरकार द्वारा लिया गया हो तो कंपनी की विवरणी को उसके प्रमुख अधिकारी द्वारा सत्यापित किया जाएगा।
♦ प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, जहां कार्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया के लिए आवेदन को ऋणशोधनक्षमता और दिवालियापन संहिंता, 2016 की धारा 7 या 9 या 10 के अंतर्गत निर्णयन प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत किया गया हो तो विवरणी ऐसे निर्णयन प्राधिकारी द्वारा नियुक्त किए गए दिवालीयापन पेशेवर द्वारा सत्यापित होगी।
(गग) फर्म की स्थिति में, उसके प्रबंध सहभागी द्वारा अथवा जहां किसी अपरिहार्य कारण के लिए ऐसा प्रबंध सहभागी विवरणी को सत्यापित करने में सक्षम न हो अथवा जहां उसके किसी सहभागी द्वारा, नाबालिग के तौर पर नहीं, ऐसा कोई प्रबंध सहभागी न हो
(गघ) सीमित देयता सहभागिता की स्थिति में, उसके नामित सहभागी द्वारा अथवा जहां किसी अपरिहार्य कारण से ऐसा नामित सहभागी विवरणी को सत्यापित करने में सक्षम न हो अथवा जहां ऐसा कोई नामित सहभागी न हो, उसके किसी सहभागी द्वारा
(घ) स्थानीय प्राधिकारी की स्थिति मे, उसके प्रधान अधिकारी द्वारा
(घघ) धारा 139(4ख) हेतु संदर्भित एक राजनीतिक दल की स्थिति में, ऐसे दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा (चाहे ऐसा मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिव अथवा अन्य किसी पद के तौर पर जाना जाता हो)
(ङ) किसी अन्य संघ की स्थिति में, संघ के किसी सदस्य द्वारा अथवा उसके प्रमुख अधिकारी द्वारा तथा
(च) किसी अन्य व्यक्ति की स्थिति में, उस व्यक्ति द्वारा अथवा इस संबंध में कार्य करने के लिए कुछ सक्षम व्यक्ति द्वारा
नोट:
प्रभावी निर्धारण वर्ष 2020-21 से, वित्त अधिनियम, 2020 की मदद से किसी अन्य व्यक्ति को सक्षम करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को सशक्त किया गया है जैसा कि एक कंपनी या एक एलएलपी के मामले में आय की विवरणी को सत्यापित करने के लिए निर्धारित किया जा सकता है।
ऐसी शक्ति का प्रयोग करते हुए, सीबीडीटी ने दूसरे व्यक्ति को निर्धारित करने के लिए एक नया नियम 12एए डाला है जो कंपनी के विवरणी और एलएलपी को सत्यापित कर सकता है। यह नियम प्रदान करता है कि कोई अन्य व्यक्ति राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा नियुक्त व्यक्ति होगा, जो एक अंतरिम समाधान पेशेवर, एक समाधान पेशेवर, या एक परिसमापक, जैसा भी मामला हो, के कर्तव्यों और कार्यों का निर्वहन करेगा। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 और उसके तहत बनाए गए नियम और विनियम।
अपडेटेड विवरणी
वित्त अधिनियम 2022 ने अद्यतन विवरणी दाखिल करने में सक्षम बनाने के लिए धारा 139 में उपधारा (8ए) सम्मिलित की है। यह खंड प्रदान करता है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा इस तथ्य के बावजूद एक अद्यतन विवरणी दाखिल किया जा सकता है कि ऐसे व्यक्ति ने पहले से ही संबंधित मूल्यांकन वर्ष के लिए मूल, विलंबित या संशोधित विवरणी दाखिल किया है या नहीं।
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 24 महीनों के भीतर किसी भी समय अपडेटेड विवरणी दाखिल किया जा सकता है। हालाँकि, निम्नलिखित तीन स्थितियों में एक अद्यतन विवरणी दाखिल नहीं किया जा सकता है:
नोट : वित्त अधिनियम, 2025 के माध्यम से प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों तक एक अद्यतित विवरणी की समयसीमा बढ़ाई गई है। यह संशोधन निर्धारण वर्ष 2026-27 से प्रभावी होंगे।
हालांकि, एक अद्यतित विवरणी को निम्नलिखित तीन स्थितियों में दाखिल नही किया जा सकता :
स्थिति 1: एक अपडेटेड विवरणी फाइल नहीं किया जा सकता है यदि इस तरह की अपडेटेड विवरणी:
क) नुकसान की वापसी है; या
ख) निर्धारिती द्वारा दायर मूल, संशोधित या विलंबित विवरणी के आधार पर निर्धारित कम कर देयता के परिणाम; या
ग) निर्धारिती द्वारा दायर मूल, संशोधित या विलंबित विवरणी के आधार पर देय रिफंड में वृद्धि या परिणाम।
स्थिति 2: एक व्यक्ति अपडेटेड विवरणी फाइल नहीं कर सकता है जिसमें:
क) धारा 132 के तहत एक खोज शुरू की गई है या खाते की किताबें या अन्य दस्तावेज या ऐसे व्यक्ति के मामले में धारा 132क के तहत किसी संपत्ति की मांग की गई है; या
ख) ऐसे व्यक्ति के मामले में धारा 133क(2क) के अलावा धारा 133क के तहत एक सर्वेक्षण किया गया है; या
ग) इस आशय का एक नोटिस जारी किया गया है कि किसी अन्य व्यक्ति के मामले में धारा 132 या धारा 132क के तहत जब्त या अपेक्षित कोई भी पैसा, सोना-चांदी, आभूषण या मूल्यवान वस्तु या वस्तु ऐसे व्यक्ति की है; या
घ) इस आशय का एक नोटिस जारी किया गया है कि धारा 132 या धारा 132क के तहत किसी भी अन्य व्यक्ति के मामले में जब्त या मांगे गए खाते या दस्तावेजों की कोई भी किताब, संबंधित है या उससे संबंधित है, या उसमें निहित कोई अन्य जानकारी, से संबंधित है, ऐसा व्यक्ति।
इस स्थिति में, पिछले वर्ष के लिए प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए एक अद्यतन विवरणी दाखिल नहीं किया जा सकता है जिसमें इस तरह की खोज शुरू की गई है या सर्वेक्षण किया गया है या मांग की गई है और ऐसे आंकलन वर्ष से पहले का कोई आंकलन वर्ष है।
स्थिति 3: प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए एक अद्यतन विवरणी दाखिल नहीं किया जा सकता है जिसमें:
क) प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए उसके द्वारा एक अद्यतन विवरणी प्रस्तुत किया गया है;
ख) आय के निर्धारण या पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना या संशोधन के लिए कोई कार्यवाही लंबित है या पूरी हो चुकी है। हालांकि, धारा 148 के अंतर्गत जारी नोटिस के अनुपालन में, उक्त नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए किसी व्यक्ति द्वारा अद्यतन विवरणी प्रस्तुत की जा सकती है, और ऐसे मामले में निर्धारिती उक्त नोटिस के अनुपालन में किसी अन्य प्रकार से विवरणी दाखिल करने से वंचित रहेगा।
नोट : धारा 148 के अंतर्गत जारी नोटिस के अनुपालन में दाखिल की गई अद्यतन विवरणी में घोषित अतिरिक्त आय, धारा 270क के अंतर्गत दंड अधिरोपित किए जाने का आधार नहीं बनेगी।
ग) निर्धारण अधिकारी के पास ऐसे व्यक्ति के संबंध में सूचना है:
• द स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स (संपत्ति की जब्ती) अधिनियम, 1976;
• बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 का निषेध;
• धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002; या
• काला धन (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) और कर अधिनियम, 2015 का अधिरोपण।
और अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने की तिथि से पहले ही उसे सूचित कर दिया गया है
घ) ऐसे व्यक्ति के संबंध में धारा 90 या धारा 90क में संदर्भित एक समझौते के तहत जानकारी प्राप्त की गई है और अद्यतन विवरणी की वापसी प्रस्तुत करने की तिथि से पहले उसे सूचित किया गया है;
ङ) ऐसे व्यक्ति के संबंध में कोई भी अभियोजन कार्यवाही अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने की तिथि से पहले शुरू की गई है।
च) निर्धारिती ऐसा व्यक्ति है या व्यक्तियों के ऐसे वर्ग से संबंधित है, जिसे बोर्ड द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है।
स्थिति 4 : एक अद्यतित विवरणी को प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए दाखिल नही किया जा सकता जहां : ?
क) धारा 148क के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 36 महीनों के बाद एक व्यक्ति को जारी किया गया हो । हालांकि, अद्यतित विवरणी को दाखिल किया जा सकता है यदि यह निर्धारित करने के लिए धारा 148क(3) के अंतर्गत एक आदेश पारित किया गया हो कि यह धारा 148 के नोटिस को जारी करने के लिए सही मामला नही है।
नोट:
1.जहां एक व्यक्ति ने धारा 139(3) के तहत हानि की विवरणी प्रस्तुत की है, वह अद्यतन विवरणी प्रस्तुत कर सकता है। हालांकि, इस तरह की अद्यतन वापसी आय की वापसी होनी चाहिए या ऐसी अद्यतन विवरणी का प्रभाव हानि को कम करने वाला हो।। दूसरे शब्दों में, अपडेटेड विवरणी नुकसान का विवरणी नहीं होना चाहिए।
2. यदि किसी पिछले वर्ष के लिए एक अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने के परिणामस्वरूप, निम्नलिखित किसी भी बाद के वर्ष के लिए कम हो जाता है, तो व्यक्ति को ऐसे प्रत्येक बाद के वर्ष के लिए अद्यतन विवरणी दाखिल करने की आवश्यकता होगी:
• हानि या उसका कोई हिस्सा अध्याय VI के तहत आगे बढ़ाया गया; या
• अनवशोषित मूल्यह्रास धारा 32(2) के तहत आगे ले जाया गया; या
• धारा 115ञकक के तहत कर क्रेडिट आगे बढ़ाया गया; या
• कर क्रेडिट धारा 115ञघ के तहत आगे बढ़ाया गया।
धारा 140ख अद्यतन विवरणी पर कर, ब्याज, शुल्क और अतिरिक्त आयकर के भुगतान और गणना के लिए प्रदान करता है। इसमें निम्नलिखित छह प्रावधान शामिल हैं:
(क) अद्यतन विवरणी पर कर की गणना जहां कोई मूल या विलंबित विवरणी दाखिल नहीं किया गया था।
(ख) अद्यतन विवरणी पर कर की गणना जहां मूल, संशोधित या देर से पहले ('पहले विवरणी') दायर किया गया था।
(ग) अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने के समय देय अतिरिक्त कर की गणना।
इस प्रावधान में एक स्पष्टीकरण भी शामिल है जो धारा 234क, धारा 234ग के तहत ब्याज की गणना और अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने के समय देय अतिरिक्त कर पर ब्याज प्रदान करता है।
1.अद्यतन विवरणी पर कर, ब्याज और शुल्क की गणना जहां पहले कोई विवरणी दाखिल नहीं किया गया था
जहां किसी व्यक्ति ने प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए मूल या विलंबित विवरणी दाखिल नहीं किया है, अद्यतन विवरणी (स्व-मूल्यांकन कर) पर देय कर का भुगतान ब्याज और शुल्क के साथ आय और किसी भी वर्ष के लिए ब्याज की विवरणी प्रस्तुत करने में देरी के लिए किया जाएगा। अग्रिम कर के भुगतान में चूक या विलंब।
इसके अलावा, अद्यतन विवरणी दाखिल करने से पहले एक अतिरिक्त आयकर का भुगतान किया जाएगा। इस तरह के कर, ब्याज, शुल्क और अतिरिक्त आयकर की गणना निम्नलिखित तरीके से की जाएगी:
(क) स्व-मूल्यांकन कर
अद्यतन विवरणी में रिपोर्ट की गई आय पर स्व-मूल्यांकन कर की गणना निम्नलिखित को ध्यान में रखकर की जाएगी:
• अग्रिम कर;
• स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस);
• स्रोत पर एकत्र कर (टीसीएस);
• धारा 89 के तहत राहत;
• विदेशी कर क्रेडिट; और
• एमएटी या एएमटी क्रेडिट।
(ख) देर से विवरणी दाखिल करने के लिए धारा 234क के तहत ब्याज
अद्यतन विवरणी की प्रस्तुति के समय, धारा 234क के तहत ब्याज की गणना अद्यतन विवरणी पर देय स्व-मूल्यांकन कर पर की जाएगी।
आय की मूल विवरणी दाखिल करने की देय तिथि के तुरंत बाद की तारीख से शुरू होने वाली अवधि के लिए ब्याज लगाया जाएगा और उस तारीख के साथ समाप्त होगा जिस पर अपडेटेड विवरणी प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि, यह ब्याज अद्यतन विवरणी पर देय अतिरिक्त आयकर की राशि पर नहीं लगाया जाएगा।
(ग) अग्रिम कर किस्तों के भुगतान में चूक के लिए धारा 234ग के तहत ब्याज
धारा 234ग ब्याज की गणना 'लौटाई गई आय पर देय कर' के संदर्भ में की जाती है। इस प्रकार, अपडेटेड विवरणी के मामले में, अपडेटेड विवरणी में रिपोर्ट की गई कुल आय को विवरणी की गई आय माना जाता है। अद्यतन विवरणी में रिपोर्ट की गई कुल आय को उन मामलों में भी विवरणी आय के रूप में माना जाएगा जहां निर्धारिती ने अपडेटेड विवरणी दाखिल करने से पहले संबंधित निर्धारण वर्ष के लिए मूल, विलंबित या संशोधित विवरणी पहले ही दाखिल कर दिया हो।
(घ) विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए धारा 234च के तहत शुल्क
विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए शुल्क विलंबित विवरणी प्रस्तुत करने पर मौजूदा प्रावधानों के अनुसार लगाया जाएगा।
2.अद्यतन विवरणी पर कर, ब्याज और शुल्क की गणना जहां पहले विवरणी दाखिल किया गया था
जहां एक व्यक्ति ने प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए मूल, विलंबित या संशोधित विवरणी पहले ही दाखिल कर दिया है, तो अद्यतन विवरणी (स्व-मूल्यांकन कर) पर देय कर किसी भी चूक या अग्रिम कर के भुगतान में देरी के लिए ब्याज के साथ भुगतान किया जाएगा। पहले के विवरणी में भुगतान किए गए ब्याज की राशि से घटाया गया।
इसके अलावा, अद्यतन विवरणी दाखिल करने से पहले एक अतिरिक्त आयकर का भुगतान भी करना होगा। अद्यतन विवरणी दाखिल करने से पहले भुगतान किए जाने वाले कर, ब्याज और अतिरिक्त आयकर की गणना निम्नलिखित तरीके से की जाएगी:
(क) स्व-मूल्यांकन कर
निम्नलिखित को ध्यान में रखते हुए स्व-मूल्यांकन कर की गणना की जाएगी:
• कर या राहत, जिसका क्रेडिट पहले ही विवरणी में लिया जा चुका है; और
• कर या राहत, जिसका क्रेडिट पहले के विवरणी में दावा नहीं किया गया है।
इसके अलावा, इस तरह से गणना की गई कर की राशि को ऐसे पहले विवरणी के संबंध में जारी किए गए रिफंड की राशि, यदि कोई हो, से बढ़ा दिया जाएगा।
(ख) अग्रिम कर के भुगतान में देरी के लिए धारा 234ख के तहत ब्याज
जहां एक व्यक्ति ने आय की विवरणी पहले ही दाखिल कर दी है, धारा 234ख के तहत अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करने के समय देय ब्याज की गणना निर्धारित कर की राशि पर या उस राशि पर की जाएगी जिसके द्वारा भुगतान किया गया अग्रिम कर निर्धारित कर से कम हो जाता है, जैसा कि मामला हो सकता है। गणना की गई ब्याज की राशि को पहले के विवरणी में भुगतान की गई ब्याज की राशि से कम किया जाएगा।
(ग) अग्रिम कर किस्तों के भुगतान में चूक के लिए धारा 234ग के तहत ब्याज
धारा 234सी के तहत ब्याज की गणना अद्यतन विवरणी में दी गई आय को विवरणी आय के रूप में ध्यान में रखकर की जाएगी। गणना की गई ब्याज की राशि को पहले के विवरणी में भुगतान की गई ब्याज की राशि से कम किया जाएगा।
(ग) विवरणी प्रस्तुत करने में चूक के लिए धारा 234कच के तहत शुल्क
एक व्यक्ति को अद्यतन विवरणी प्रस्तुत करते समय शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी यदि उसने प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के लिए मूल, संशोधित, या विलंबित विवरणी पहले ही दाखिल कर दी है।
3. अपडेटेड विवरणी पर अतिरिक्त कर का भुगतान
अद्यतन विवरणी पर कर का भुगतान ब्याज, शुल्क और अतिरिक्त आयकर के साथ किया जाएगा।
अतिरिक्त कर अद्यतन विवरणी दाखिल करने पर किसी व्यक्ति द्वारा देय कर और ब्याज के कुल योग के 25% के बराबर होगा, जहां इस तरह की विवरणी देर से या संशोधित विवरणी दाखिल करने की नियत तारीख की समाप्ति के बाद प्रस्तुत की जाती है लेकिन पूरा होने से पहले प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से 12 महीने की अवधि।
जहां प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 12 महीने की समाप्ति के बाद अद्यतन विवरणी प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन प्रासंगिक मूल्यांकन वर्ष के अंत से 24 महीने की अवधि पूरी होने से पहले, देय अतिरिक्त कर कुल का 50% होगा देय कर और ब्याज।
जहां अद्यतित विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 24 महीनों की समाप्ति के बाद लेकिन प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 36 महीनों की अवधि के पूरा होने से पहले प्रस्तुत की जाती है तो देययोग्य अतिरिक्त कर कुल कर और देययोग्य ब्याज का 60 प्रतिशत होगा।
जहां अद्यतित विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 36 महीनों की समाप्ति के बाद लेकिन प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों की अवधि के पूरा होने से पहले प्रस्तुत की जाती है तो देययोग्य अतिरिक्त कर कुल कर और देययोग्य ब्याज का 70 प्रतिशत होगा।
नोट : यदि धारा 148 के अधीन जारी नोटिस के अनुपालन में, उक्त नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर अद्यतन विवरणी दाखिल की जाती है, तो ऊपर वर्णित देय अतिरिक्त आयकर में देय कर तथा ब्याज के कुल योग के 10% की अतिरिक्त राशि और जोड़ी जाएगी।
4. भुगतान का प्रमाण
अद्यतन विवरणी कर भुगतान के प्रमाण के साथ होगा, अर्थात, सामान्य कर (यदि कोई हो), धारा 140ख के तहत आवश्यक अतिरिक्त कर, ब्याज और शुल्क; अन्यथा, इसे दोषपूर्ण विवरणी माना जाएगा।
कर विवरणी तैयार करने वाले के माध्यम से विवरणी दाखिल करना
आय की विवरणियों को तैयार करने और सुसज्जित करने में किसी भी निर्दिष्ट वर्ग या व्यक्तियों के वर्गों (*) को सक्षमक रहने के उद्देश्य के लिये, ऐसे व्यक्तियों को जो ऐसी योजना के तहत कार्यवाही करने के लिए अधिकृत कर विवरणी तैयार करने वाले (टीआरपी) के माध्यम से अपनी आय विवरणी सुसज्जित कर सकते हैं, को प्रदान करते हुये,
अन्य शब्दों में निर्दिष्ट व्यक्ति सरकारी प्राधिकृत विवरणी तैयार करने वाले के माध्यम से अपनी विवरणी दाखिल कर सकता है।
* ''कर विवरणी तैयार करने वाला'' का मतलब कोई व्यक्ति [धारा 288 (2) (ii)/(iii)/(iv) में संदर्भित एक व्यक्ति नहीं या "निर्दिष्ट वर्ग या व्यक्तियों के वर्गों"], का एक कर्मचारी जो इस सम्बन्ध में बनायी गयी योजना के तहत एक कर विवरणी तैयार करने वाले के रूप में अधिकृत किया गया है।
** ''निर्दिष्ट वर्ग या व्यक्तियों के वर्गों'' का मतलब कोई व्यक्ति, एक कंपनी या एक व्यक्ति के अलावा, जिसके खाता धारा 44कख के तहत या समयानुसार बल में किसी अन्य नियम के तहत लेखापरीक्षित होना आवश्यक है जो अधिनियम के तहत आय की एक विवरणी सुसज्जित करने के लिये आवश्यक है।
विवरणी का प्रपत्र और विवरणी दाखिल करने की प्रणाली
विवरणी के प्रपत्र और विवरणी दाखिल करने की प्रणाली से सम्बन्धित प्रावधानों की चर्चा ''आय की विवरणी दाखिल करना'' के शीर्षक के तहत अलग विषय में की गई है।
आय की विवरणी पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. प्रत्येक व्यक्ति, कंपनी होने के नाते, को अपनी आय की विवरणी दाखिल करनी होती है केवल यदि जब उसके पास कई वास्तविक आय हो अथवा वह अगले लाभ से घाटा (यदि हो) पूर्ति करना चाहता हो
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
प्रत्येक व्यक्ति, कंपनी होने के नाते, को अपनी आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है, चाहे उसकी आय में लाभ या हानि हो। अन्य शब्दों में, प्रत्येक कंपनी के लिए यह अनिवार्य है कि वह आय की विवरणी को दाखिल करे चाहे लाभ हो या हानि
इस प्रकार, प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है, इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है।
प्रश्न 2. प्रत्येक व्यक्ति, सहभागी फर्म होने के नाते (सीमित उत्तरदायित्व सहित), को अपनी आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है, चाहे उसकी आय में लाभ हो या हानि
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
प्रत्येक व्यक्ति, सहभागी फर्म होने के नाते (सीमित उत्तरदायित्व सहित), को अपनी आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है, चाहे लाभ हो या हानि। अन्य शब्दों में, प्रत्येक फर्म के लिए आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है चाहे लाभ हो या हानि
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सत्य है इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 3. प्रत्येक व्यक्ति/एचयूएफ/एओपी/बीओआई/कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति को आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है यदि उसकी आय (निर्धारणीय के संबध में अन्य व्यक्ति की आय सहित) धारा 10क , 10ख अथवा 10खक , 54 , 54ख , 54घ , 54ड़ग , 54च , 54ज , 54जक या 54जख अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से धारा 80प के अंतर्गत कटौती) के प्रावधानों को प्रभावित किए बिना निम्न से अधिक है ...................................
(क) रू. 2,00,000 (ख) रू. 2,50,000
(ग) रू. 5,00,000 (घ) अधिकतम राशि कर हेतु वसूलनीय नहीं है
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता:
प्रत्येक व्यक्ति/एचयूएफ/एओपी/बीओआई/कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति को आय की विवरणी दाखिल करना अनिवार्य है यदि उसकी आय (निर्धारणीय के संबध में अन्य व्यक्ति की आय सहित) धारा 10क, 10ख अथवा 10खक, 54, 54ख, 54घ, 54ङग, 54च, 54ज, 54जक या 54जख अथवा अध्याय VIक (अर्थात् धारा 80ग से धारा 80प के अंतर्गत कटौती) के प्रावधानों को प्रभावित नही करती है, अधिकतम राशि से अधिक कर हेतु वसूलनीय नहीं है अर्थात् छूट सीमा से अधिक है।
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 4. धारा 2(24)(iiक) में संदर्भित स्वैच्छिक अंशदान से आय की प्राप्ति अथवा धर्मार्थ अथवा धार्मिक न्यास/कानूनी बाध्यता के अंतर्गत संघटित संपत्ति से व्युत्पद आय की प्राप्ति पर प्रत्येक व्यक्ति को आय की विवरणी को दाखिल करना आनिवार्य है यदि धारा 11 तथा 12 के प्रावधानों को प्रभावित करने के पश्चात उसकी कुल आय अधिकतम राशि से अधिक है तो आयकर वसूलेजाने योग्य नही है।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 2(24)(iiक) में संदर्भित स्वैच्छिक अंशदान से आय की प्राप्ति अथवा धर्मार्थ अथवा धार्मिक न्यास/कानूनी बाध्यता के अंतर्गत संघटित संपत्ति से व्युत्पद आय की प्राप्ति पर प्रत्येक व्यक्ति को आय की विवरणी को दाखिल करना आनिवार्य है यदि धारा 11 तथा 12 के प्रावधानों को प्रभावित किए बिना उसकी कुल आय अधिकतम राशि से अधिक है तो आयकर वसूलेजाने योग्य नही है।
इसलिए प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 5. प्रत्येक राजनीतिक दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को दल की आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य है यदि धारा....................के प्रावधानों को प्रभावित किए बिना दल की कुल आय आयकर हेतु वसूलेजाने वाली अधिकतम राशि से अधिक है
(क) 11 (ख) 12
(ग) 13 (घ) 13क
सही उत्तर : (घ)
उत्तर की प्रमाणिकता :
प्रत्येक राजनीतिक दल के कार्यकारी अधिकारी को दल की आय की विवरणी को दाखिल करना अनिवार्य हैं यदि धारा 13क के प्रावधानों को प्रभावित किए बिना दल की कुल आय आयकर हेतु वसूलेजाने वाली अधिकतम राशि से अधिक है
इसलिए, विकल्प (घ) सही विकल्प है।
प्रश्न 6 कंपनी जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है को छोड़कर कंपनी की स्थिति में आय के विवरणी को भरने की नियत तिथि क्या है ?
(क) आंकलन वर्ष का 30 सितम्बर (ख) आंकलन वर्ष का 30 नवम्बर
(ग) आंकलन वर्ष की 31 जुलाई (घ) आंकलन वर्ष का 30 जून
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
कंपनी जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है को छोड़कर कंपनी की स्थिति में आय के विवरणी को दाखिल की नियत तिथि आंकलन वर्ष की 30 सितम्बर है।
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 7 व्यक्ति जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है की स्थिति में आय के विवरणी को दाखिल की नियत तिथि क्या है ?
(क) आंकलन वर्ष का 30 सितम्बर (ख) आंकलन वर्ष का 30 नवम्बर
(ग) आंकलन वर्ष की 31 जुलाई (घ) आंकलन वर्ष का 30 जून
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
व्यक्ति जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है की स्थिति में आय की विवरणी को दाखिल की नियत तिथि 30 नवम्बर है
इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 8 आयकर कानून अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत खाते अंकेक्षित न होने वाली कम्पनी को छोड़कर व्यापार करने वाले व्यक्ति की स्थिति में आय की विवरणी को दाखिल की नियत तिथि क्या हैं ?
(क) निर्धारण वर्ष का 31 अक्टूबर (ख) वर्ष के निर्धारण वर्ष का 30 नवम्बर
(ग) निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई (घ) वर्ष के निर्धारण वर्ष का 30 अगस्त
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर कानून अथवा अन्य किसी कानून के अंतर्गत खाते अंकेक्षित न होने वाली कम्पनी को छोड़कर व्यापार करने वाले व्यक्ति की स्थिति में आय की विवरणी को दाखिल की नियत तिथि निर्धारण वर्ष की 31 अगस्त है
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 9 आयकर कानून अथवा अन्य किसी कानून (व्यक्ति को छोड़कर जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है) के अंतर्गत खाते अंकेक्षित होने वाले व्यक्ति की स्थिति में आय की विवरणी को दाखिल की नियत तिथि क्या है?
(क) निर्धारण वर्ष का 30 सितम्बर (ख) निर्धारण वर्ष का 30 नवम्बर
(ग) निर्धारण वर्ष की 31 जुलाई (घ) निर्धारण वर्ष का 30 जून
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर कानून अथवा अन्य किसी कानून (व्यक्ति को छोड़कर जिसे धारा 92ड के अंतर्गत प्रपत्र सं. 3गडख में रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है) के अंतर्गत खाते अंकेक्षित होने वाले व्यक्ति की स्थिति में आय की विवरणी को दाखिल की नियत तिथि निर्धारण वर्ष की 30 सितम्बर है
इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 10. यदि व्यक्ति इस संबंध में निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत आय की विवरणी को दाखिल करने में विफल रहता है तो धारा 139(4) के अनुसार वह विलंबित विवरणी दाखिल कर सकता है। विलंबित विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से दो वर्षों अथवा निर्धारण वर्ष के पूर्ण होने से पूर्व, जो भी पहले हो, के भीतर दाखिल कर सकता है।
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
यदि व्यक्ति इस संबंध में निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत आय की विवरणी को दाखिल करने में विफल रहता है तो धारा 139(4) के अनुसार वह विलंबित विवरणी दाखिल कर सकता है। विलंबित विवरणी प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 3 महीने पहले अथवा निर्धारण वर्ष के पूर्ण होने से पूर्व, जो भी पहले हो, के भीतर दाखिल कर सकता है
इसलिए इस प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 11. श्री क एक कर्मचारी हैं जिनका वेतन 30,000 रुपये प्रति माह है। उन्होंने आयकर विवरणी दाखिल की और धारा 87क के तहत छूट का दावा करने के बाद उनकी कर देयता शून्य थी। बाद में उन्हें पता चला कि उन्होंने 60,000 रुपये की ब्याज आय का खुलासा नहीं किया था, जिस पर बैंक द्वारा कर काटा गया था। विलंबित विवरणी दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो गई है। क्या करदाता अद्यतन विवरणी दाखिल कर सकता है और ब्याज पर काटे गए कर की विवरणी का दावा कर सकता है?
(क) हाँ (ख) नहीं
सही उत्तर : (ख) सही उत्तर की प्रमाणिकता :
संबंधित कर निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीनों के भीतर किसी भी समय एक अद्यतन विवरणी दाखिल किया जा सकता है। हालाँकि, यदि ऐसे विवरणी के परिणामस्वरूप धनविवरणी होती है तो एक अद्यतन विवरणी दाखिल नहीं की जा सकती है। इस प्रकार, श्री क आयकर की अद्यतन विवरणी दाखिल करने के पात्र नहीं होंगे।

