धारा 154 के तहत गलती का सुधार
कभी कभी मूल्यांकन अधिकारी द्वारा जारी किसी आदेश में त्रुटि हो सकती है। ऐसी स्थिति में त्रुटि जो अभिलेख से प्रतीत हुई, धारा 154 के तहत सुधारी जा सकती है, धारा 154 के तहत त्रुटि से सम्बन्धित प्रावधानों की चर्चा इस भाग में की गई है। इस भाग के और धारा 154 के तहत त्रुटि के सुधार से सम्बन्धित विभिन्न प्रावधानों के बारें में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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धारा 154 के तहत भूल का सुधार
परिचय
कभी-कभी निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किसी भी आदेश में कोई भी गलती हो सकती है। एसी स्थिति मे, रिकॉर्ड में दर्ज हुई स्पष्ट गलतियाँ धारा 154 के तहत सुधारी जा सकती है। इस भाग में गलतियों के सुधार धारा 154 से सम्बन्धित प्रावधानों की चर्चा की गई है।
आदेश जिन्हें धारा 154 के तहत सुधारा जा सकता है
किसी भी अभिलेख से स्पष्ट हुई गलती को निम्नलिखित मामलों में आयकर प्राधिकारियों द्वारा सुधारा जा सकता है:
(क) आयकर अधिनियम के किसी प्रावधान के तहत पारित किसी भी आदेश में संशोधन ।
(ख) धारा 143(1) के तहत भेजी गई कोई भी सूचना या मानी गई सूचना का संशोधन ।
(ग) धारा 200 क(1)(*)(धारा 200क स्रोत पर कर कटौती अर्थात टी डी एस विवरणी के ब्यौरे के प्रसंस्करण से संबंधित है) के तहत पारित की गयी कोई भी सूचना का संशोधन।
(घ) धारा 206गख* के अंतर्गत किसी सूचना का संसोधन
(*) धारा 200क के तहत, टीडीएस विवरण को विवरण में किसी सूचना से प्रकट असत्य दावे के संशोधन के पश्चात् अथवा विवरण में कोई अंकगणितीय त्रुटि का संशोधन करने के पश्चात् प्रसंस्करित किया जाता हैं।
इसी प्रकार एक नई धारा 206गख को टीसीएस विवरण के प्रसंस्करण के लिए वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा शामिल किया गया है
यदि सुधार के कारण, बढायी गई कर देयता या वापसी कम हो जाती है, तो करदाता को सुनवाई का एक अवसर दिया जाएगा।
संशोधन का- आदेश जो अपील अथवा संशोधन का विषय है
यदि आदेश किसी अपील अथवा संशोधन विषयागत मामल है, कोई भी मामला, जो ऐसी अपील अथवा संशोधन में निर्णित किया गया है, आंकलन अधिकारी द्वारा संशोधित नहीं किया जाएगा। अन्य शब्दों में यदि आदेश किसी अपील का विषय है तो अभिगमन अधिकारी केवल उन मामलों को संशोधित करेंगे जो ऐसी अपील में निर्णित नहीं है।
किसके द्वारा सुधार की सूचना दी जाएगी
आयकर प्राधिकरण अपने स्वयं के प्रस्ताव में त्रुटियों को सुधारेगा
करदाता गलती को सुधारने के लिए एक आवेदन के द्वारा आयकर प्राधिकरण को गलती सूचित कर सकते है।
यदि आदेश, आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयुक्त (अपील) द्वारा पारित है तो ऐसा आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयुक्त (अपील) गलती के सुधार कर सकता है जो निर्धारण अधिकारी द्वारा या करदाता द्वारा संज्ञान में लायी गयी है।
सुधार के लिए समय-सीमा
वित्तीय वर्ष जिसमें सुधारने का आदेश पारित किया गया था, के अंत से 4 वर्ष की समाप्ति के बाद सुधार का कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। 4 साल की अवधि सुधार करने की मांग के आदेश की तिथि से है और न कि मूल ओदश से 4 वर्ष यदि एक आदेश संशोधित रद्द इत्यादि किया जाता है, तो 4 साल की अवधि को इस तरह के ताजा आदेश की तिथि से और न कि मूल आदेश से गिना जाएगा।
यदि संशोधन के लिए आवेदन करदाता द्वारा किया जाता है, प्राधिकारी आदेश को संशोधित करेगा अथवा माह, जिसमें आवेदन प्राधिकारी द्वारा प्राप्त होता है, की समाप्ति से 6 महीनों के भीतर दावे को मना अथवा स्वीकार कर सकता है।
सुधार का एक आवेदन करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
करदाताओं को कोई भी सुधार करने से पहले निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
• करदाता को कोई भी सुधार का आवेदन पत्र दर्ज करने से पहले आदेश को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना चाहिए जिसके विरूद्ध वह सुधार आवेदन करना चाहता है।
• कई बार करदाता आयकर विभाग द्वारा पारित आदेश में कोई गलती को महसूस कर सकता है, लेकिन वास्तव में करदाता की गणना गलत हो सकती है और सीपीसी इन गलतियों को ठीक कर सकता है, उदाहरण करदाता आयकर विवरणी में गलत ब्याज अभिकलन कर सकता है, और सूचना गणना को सही सही किया जा सकता है।
• इसलिए ऊपर चर्चा के मामलों में सुधार के आवेदन से बचने के लिए करदाता किसी भी आदेश, सूचना में गलती के आस्तित्व की पुष्टि यदि कोई हो करनी चाहिए, अध्ययन करना चाहिए।
• यदि उन्हें आदेश में कोई भी गलती देखने को मिलती है तो केवल धारा 154 के तहत सुधार के लिए एक आवेदन करना चाहिए।
• आगे, उसे पुष्टि कर लेनी चाहिए की गलती एक है जो कि अभिलेखों से स्पष्ट है और जिसमें बहस, विस्तार, जाँच की आवश्यकता है, एक गलती नही है। करदाता त्रुटि के संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकता है संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने से पहले करदाता को http://incometaxindiaefiling.gov.in/ पर निर्धारित सुधार प्रक्रियाओं का उल्लेख करना चाहिए।
• सूचना के सुधार के लिए धारा 200क(1)/206गख के तहत आनलाइन सुधार ब्यौरा दर्ज किया जा रहा है; प्रक्रिया http://contents.tdscpc.gov.in/eu/filing.correction-etutorial.html# पर दिया जाता है।
• एक संशोधन या सुधार जो मूल्यांकन बढ़ने का प्रभाव या एक वापसी को कम या एक करदाता (या कटौती कारक) की जिम्मेदारी अन्य था बढ़ाता है, तब तक नहीं करेगा जब तक कि सम्बंघित अधिकारी करदाता को या कटौती कारक को ऐसा करने के इरादे और करदाता (कटौतीकारक) को सुनवाई के उचित अवसर की अनुमति की सूचना नहीं देता।
धारा 154 के अंतर्गत त्रुटि के संशोधन पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश में रिकॉर्ड से प्रकट किसी त्रुटि को धारा............... के अंतर्गत संशोधित कर सकते हैं
(क) 143 (ख) 147
(ग) 154 (घ) 156
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश में रिकॉर्ड से प्रकट किसी त्रुटि को धारा 154 के अंतर्गत संशोधित कर सकते है
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 2. धारा 200क(1) के अंतर्गत पारित किसी सूचना में रिकॉर्ड से प्रकट किसी त्रुटि को धारा 154 के अंतर्गत आयकर प्राधिकारी द्वारा संशोधित किया जा सकता है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 154 के अनुसार, रिकॉर्ड से प्रकट कोई त्रुटि निम्नलिखित मामलों में आयकर प्राधिकरण द्वारा संशोधित की जा सकती हैं
क) आयकर अधिनियम के किसी प्रावधान के अंतर्गत पारित कोई आदेश
ख) धारा 143(1) के अतर्गत भेजी गई कोई सूचना अथवा विचारनीय सूचना
ग) धारा 200 क(1) के अंतर्गत पारित कोई सूचना (स्रोत पर कर कटौती अर्थात् टीडीएस रिटर्न के विवरण के प्रसंस्करण के साथ व्यवहार करने वाली धारा 200क)
घ) धारा 206खग* के अंतर्गत किसी सूचना का संशोधन
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही हैं तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 3. यदि आदेश किसी अपील अथवा संशोधन का विषयागत मामला है तो कोई मामला जो ऐसी अपील अथवा संशोधन में निर्णित किया है संशोधित नही किया जा सकता
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
यदि आदेश किसी अपील अथवा संशोधन का विषयागत मामला है तो कोई मामला जो ऐसी अपील अथवा संशोधन में निर्णित किया है संशोधित नही किया जा सकता। अन्य शब्दों में आदेश किसी अपील का विषयागत मामला है तो आंकलन अधिकारी उस मामले को संशोधित कर सकते हैं जिसे अपीलीय प्राधिकारी द्वारा निर्णित नही किया गया है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 4. आयकर प्राधिकरण अपने आप त्रुटियों का संशोधन नही कर सकता
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
आयकर प्राधिकरण अपने आप त्रुटियों का संशोधन कर सकता है। करदाता त्रुटि को संशोधित करने के लिए आवेदन करके आयकर प्राधिकरण को त्रुटि की सूचना भी दे सकता हैं। यदि आयुक्त (अपील) या संयुक्त आयुक्त (अपील) द्वारा आदेश पारित होता है तो ऐसा आयुक्त (अपील) संयुक्त आयुक्त (अपील) त्रुटि जिसे करदाता द्वारा अथवा निर्धारण अधिकारी द्वारा ध्यान में लाया गया है को संशोधित कर सकते हैं
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 5. संशोधन का कोई आदेश वित्त वर्ष जिसमें मांगा गया संशोधित पारित किया गया है की समाप्ति से ...................की समाप्ति के पश्चात् पारित नही किया जा सकता
(क) 2 (ख) 3
(ग) 4 (घ) 5
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
संशोधन का कोई आदेश वित्त वर्ष जिसमें मांगा गया संशोधित पारित किया गया है की समाप्ति से 4 वर्षों की समाप्ति के पश्चात् पारित नही किया जा सकता। 4 वर्षों की अवधि मांगे गए संशोधन के आदेश की तिथि से है तथा मूल आदेश की तिथि से 4 वर्ष नही। इसलिए यदि आदेश संशोधित, रद्द होता हैं तो 4 वर्षों की अवधि ऐसे नए आदेश की तिथि से आंकी जाएगी ना कि मूल आदेश की से।
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प हैं
प्रश्न 6. करदाता द्वारा किए गए आवेदन की स्थिति में, प्राधिकरण आदेश को संशोधित/संशोधन को माह जिसमें प्राधिकरण द्वारा आवेदन प्राप्त हुआ की समाप्ति से.................. के भीतर रद्द कर सकती हैं
(क) 4 वर्ष (ख) 2 वर्ष
(ग) 1 वर्ष (घ) 6 माह
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
करदाता द्वारा किए गए आवेदन की स्थिति में, प्राधिकरण आदेश को संशोधित/संशोधन को माह जिसमें प्राधिकरण द्वारा आवेदन प्राप्त हुआ की समाप्ति से 6 माह के भीतर रद्द कर कर सकती हैं
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प हैं
प्रश्न 7. करदाता धारा 154 के अंतर्गत त्रुटि के संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन दाखिल नहीं कर सकता
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता:
करदाता त्रुटि के संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन को दाखिल कर सकता हैं। संशोधन के लिए ऑनलाइन आवेदन करने से पूर्व करदाता को https://incometaxindiaefiling.gov.in पर निर्धारित संशोधन प्रक्रिया को संदर्भित करना चाहिए
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 8. संशोधन अथवा सुधार जिसके पास निर्धारण को बढ़ाने अथवा रिफंड को सीमित करने और अन्यथा करदाता (अथवा कटौतीदाता) की देयता को बढ़ाने का अधिकार है, करदाता (अथवा कटौतीदाता) को सुनवाई का उचित अवसर देने के पश्चात किया जाएगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
संशोधन अथवा सुधार जिसके पास निर्धारण को बढ़ाने अथवा रिफंड को सीमित करने और अन्यथा करदाता (अथवा कटौतीदाता) की देयता को बढ़ाने का अधिकार हैं, तब तक नही किया जाएगा जब तक संबंधित प्राधिकरण करदाता को सूचना देता हैं अथवा कटौतीदाता अपनी ओर से ऐसा न करे तथा करदाता (अथवा कटौतीदाता) को सुनवाई का उचित अवसर स्वीकृत नही किया जाता
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

