बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016
रिलीज़ दिनांक
28/10/2016
Document Content
भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
राजस्व विभाग
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
नर्इ दिल्ली, 28 अक्टूबर, 2016
प्रेस विज्ञप्ति
विषय : बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 पर रोक - संबंधी
बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 को बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016 (बीटीपी संशोधन अधिनियम) द्वारा संशोधित किया गया है। बीटीपी संशोधन अधिनियम के समस्त प्रावधान 1 नवंबर, 2016 को प्रभावी हुए। बीटीपी संशोधन अधिनियम के प्रभावी होने के पश्चात्, मौजूदा बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 को बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 (पीबीपीटी अधिनियम) की रोक के तौर पर पुन: नाम दिया गया है।
2. पीबीपीटी अधिनियम बेनामी लेनदेनों को परिभाषित करता है उन पर रोक लगाता है और आगे मुहैया कराता है कि पीबीपीटी अधिनियम का उल्लंघन कारावास और जुर्माने के साथ दंडनीय है। पीबीपीटी अधिनियम वास्तविक खरीदार द्वारा बेनामीदार से बेनामी से पार्इ गर्इ संपत्ति की वसूली पर रोक लगाता है। संघटित बेनामी संपत्तियां मुआवजे के भुगतान के बिना सरकार द्वारा जब्ती के लिए उत्तरदायी है।
3. न्यायिक निर्णय प्राधिकरण और अपीलीय न्यायाधिकरण के रूप में पीबीपीटी अधिनियम के अंतर्गत एक अपीलीय तंत्र को मुहैया कराया गया है। धनशोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 6(1) में संदर्भित निर्णायक प्राधिकारी तथा पीएमएलए की धारा 25 में संदर्भित अपीलीय न्यायाधिकरण को पीबीपीटी अधिनियम के उद्देश्य के लिए क्रमश: निर्णायक प्राधिकरण तथा अपीलीय न्यायाधिकरण के तौर पर अधिसूचित किया गया है।
4. संयुक्त/अपर आयकर आयुक्त, सहायक/उप आयकर आयुक्त तथा प्रत्येक प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त क्षेत्र में कर वसूली अधिकारी को पीबीपीटी अधिनियम के अंतर्गत क्रमश: अनुमोदन प्राधिकारी, सूत्रपात अधिकारी के कार्य तथा अधिकारों का प्रयोग करने के लिए अधिसूचित किया गया है।
5. समस्त अधिसूचनाओं को विभाग की वेबसाइट www.incometaxindia.gov.in की वेबसाइट पर अपलोडिड किया गया है।
(मीनाक्षी गोस्वामी)
आयकर आयुक्त
(मीडिया व तकनीकी नीति)
आधिकारिक प्रवक्ता, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड

