आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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हस्ताक्षर तिथि

2020

लागू होना

-

संश्लेषित पाठ

आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण (एमएलआई) को रोकने के लिए कर संधि संबधी उपायों को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते का संश्लेषित विषय और आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतांत्रिक सरकार और पुर्तगाली गणतांत्रिक सरकार के बीच समझौता

इस दस्तावेज को भारत और पुर्तगाल के सक्षम प्राधिकारी के द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार किया गया है और यह एमएलआई द्वारा समझौते हेतु किए गए संशोधनों के बारे में उनकी समझ को दर्शाता है।

यह दस्तावेज 11 सितंबर, 1998 को हस्ताक्षरित आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार और पुर्तगाली गणतंत्र के बीच समझौते को लागू करने के लिए संश्लेषित विषय को प्रस्तुत करता है और संशोधित प्रोटोकॉल पर 24 जून, 2017 पर हस्ताक्षर हुए (साथ में इसके बाद "समझौते के तौर पर" संदर्भित) जिसे 7 जून, 2017 (तत्पश्चात् "एमएलआई" के तौर पर संदर्भित) को भारत और पुर्तगाल द्वारा हस्ताक्षर किए गए आधारभूत कटौती और लाभ स्थानांतरण को रोकने के उपायों से संबंधित कर संधि को कार्यान्वित करने के लिए बहुपक्षीय समझौते द्वारा संशोधित किया गया था।

इस दस्तावेज को क्रमश: 25 जून, 2019 को भारत द्वारा और 28 फरवरी, 2020 को पुतर्गाल द्वारा संशोधन पर निक्षेपागार (आर्थिक समन्वय एवं विकास संगठन के महासचिव) को जमा किए गए आरक्षण और अधिसूचना के आधार पर तैयार किया गया था। यह आरक्षण और अधिसूचना एमएलआई की स्थितियां संशोधनों के अनुसार है जैसा एमएलआई में बताया गया है। आरक्षण और अधिसूचनाओं हेतु किए संशोधन इस समझौते पर एमएलआई के प्रभावों को संशोधित कर सकते है।

इस दस्तावेज का मुख्य उद्देश्य समझौते हुए एमएलआई को लागू करने संबंधी समझ को बढ़ाना है और दस्तावेज कानूनी स्रोत को सिद्ध नही करता। समझौते और एमएलआई के प्रमाणिक कानूनी विषय प्रधानता लेंगे और शेष कानूनी विषय लागू रहेगे

एमएलआई के प्रावधान जो समझौते के प्रावधानों के संबंध में लागू होते हैं वह समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के संदर्भ में इस दस्तावेज के संपूर्ण विषय में बॉक्स में शामिल हैं। एमएलआई के प्रावधानों वाले बॉक्स को दोहरे कराधान परिहार समझौते के प्रावधानों के आदेश के अनुसार सामान्य रूप से शामिल किया जा चुका है।

इस दस्तावेज में, एमएलआई के प्रावधानों के विषय में परिवर्तन समझौते (जैसे "अंतर्निहित कर समझौता" से "समझौते", में परिवर्तन और "संविदाकारी क्षेत्राधिकार" का "संविदाकारी राष्ट्र" में परिवर्तन) में प्रयोग की गई शब्दावली हेतु एमएलआई में प्रयुक्त शब्दावली के अनुरूप बनाई गई है। इसी प्रकार, एमएलआई के प्रावधानों के हिस्सो में परिवर्तन किए गए हैं। जो मौजूदा प्रावधानों के अनुच्छेदों और पैराग्राफ नंबरों की ऐसी वर्णनात्मक भाषा प्रतिस्थापित करके समझौते के मौजूदा प्रावधानों का वर्णन करते हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य दस्तावेजों की पठनीयता को बढ़ाना है नाकि एमएलआई के प्रावधानों के अर्थों को परिवर्तित करना।

जबतक संदर्भ द्वारा अन्यथा आवश्यकता न हो, समझौते के प्रावधानों हेतु किए गए संदर्भों को समझौते के प्रावधानें हेतु संदर्भ किया गया है समझा जाना चाहिए जैसे एमएलआई के प्रावधानों द्वारा संशोधित है।

संदर्भ

भारत में

एमएलआई (अंग्रेजी में) के वास्तविक कानूनी विषय निम्नलिखित लिंक पर को एमएलआई निक्षेपागार (ओईसीडी) वेबपेज पर देखा जा सकता है http://www.oecd.org/tax/treaties/multilateral-convention-to-implement-tax-treaty-related-measures-to-prevent-BEPS.pdf

समझौते (अंग्रेजी में) के वास्तविक कानूनी विषय को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

https://www.incometaxindia.gov.in/Pages/international-taxation/dtaa.aspx

पुर्गगाल में

एमएलआई के वास्तविक कानूनी विषय को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

https://data.dre.pt/eli/resolassrep/225/2019/11/14/p/dre

समझौते के वास्तविक कानूनी विषय को निम्नलिखित लिंक पर देखा जा सकता है

https://data.dre.pt/eli/resolassrep/20/2000/03/06/dre/pt/htm

https://data.dre.pt/eli/resolassrep/133/2018/05/25/p/dre/pt/html (24 जून, 2017 को हस्ताक्षरित संशोधित प्रोटोकॉल)

क्रमश: 25 जून, 2019 को भारत द्वारा और 28 फरवरी, 2020 को पुर्तगाल द्वारा संशोधन पर निक्षेपागार को जमा किए गए आरक्षण और अधिसूचना को MLI Depositary (OECD) webpage पर देखा जा सकता है।

प्रभावी और बाध्यकारी एमएलआई के प्रावधान

एमएलआई 1 अक्टूबर, 2019 को भारत में और 1 जून, 2020 को पुर्तगाल में प्रभावी होगा

समझौते हेतु लागू एमएलआई के प्रावधान उसी तिथि को प्रभावी नहीं होगे जिस दिन समझौते के मूल प्रावधान प्रभावी हुए। एमएलआई के प्रत्येक प्रावधान विभिन्न तिथियों पर प्रभावी हो सकता है जो शामिल करों के प्रकार पर (स्रोत पर कर हटाया गया या अन्य कर लगाए गए) और भारत और पुर्तगाल के एमएलआई प्रावधानों में उनके द्वारा की गई विकल्पों पर निर्भर करता है।

जबतक यह इस दस्तावेज में कही अन्यथा निर्दिष्ट न हो एमएलआई के प्रावधान समझौते के संबंध में प्रभावी रहेगा

भारत में

अनिवासी को दी गई या जमा की गई राशि पर स्रोत पर करों पर कटौती करने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 अप्रैल 2021 को या उसके बाद होती हो, और

भारत द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संदर्भ में, 1 अप्रैल, 2021 को या उसके बाद प्रारंभ होने की करयोग्य अवधि के संबंध में लगाए गए अन्य सभी करों के लिए

पुर्तगाल में

अनिवासी को दी गई या जमा की गई राशि पर स्रोत पर करों पर कटौती करने के लिए, जहां ऐसे करों को लगाने की घटना 1 जनवरी 2021 को या उसके बाद होती हो, और

पुर्तगाल द्वारा लगाए गए अन्य सभी करों के संदर्भ में, 1 दिसंबर, 2020 को या उसके बाद प्रारंभ होने की करयोग्य अवधि के संबंध में लगाए गए अन्य सभी करों के लिए

आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार

और

वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए

भारतीय गणतांत्रिक सरकार और पुर्तगाली गणराज्य के बीच समझौता

भारतीय गणतांत्रिक सरकार और पुर्तगाली गणतांत्रिक सरकार आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार और वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए समझौता करने की इच्छुक है।

एमएलआई के अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 1 निर्दिष्ट निम्नलिखित प्रस्तावना को इस समझौते की प्रस्तावना में शामिल किया जाता है :

एमएलआई का अनुच्छेद 6 - एक अंतर्निहित कर समझौते का उद्देश्य

कर परिहार या अपवंचन (तीसरे क्षेत्राधिकार के निवासी के अप्रत्यक्ष लाभ के लिए समझौते में मुहैया कराए गए राहत को प्राप्त के उद्देश्य से ट्रीटी-शॉपिंग व्यवस्था के माध्यम सहित) के माध्यम से कम किए गए कर या गैर-कराधान के लिए अवसर बनाए बिना इस [समझौते]1 द्वारा अंनर्निहित करों के संबंध में दोहरे कराधान को समाप्त करने के लिए

निम्नानुसार सहमत हुए है :

 

अध्याय I

समझौते का कार्यक्षेत्र

अनुच्छेद 1

निजी कार्यक्षेत्र

यह समझौता उन व्यक्तियों पर लागू होगा जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के निवासी हैं

एमएलआई के अनुच्छेद 11 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 लागू होता है और इस समझौते के प्रावधानों को केवल उस सीमा तक समाप्त करता है जहां वह प्रावधान कथित पैराग्राफ 1 के साथ असंगत हो

एमएलआई के अनुच्छेद 11 - अपने स्वयं के निवासियों पर कर लगाने से एक पक्ष के अधिकार को सीमित करने के लिए कर समझौते को लागू करना

[समझौता] एक [संविदाकारी] राष्ट्र द्वारा अपने निवासियों पर कराधान को प्रभावी नहीं करेगा केवल [समझौता के अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 2, और अनुच्छेद 19, 20, 21, 23, 24, 25 और 28 अंतर्गत दिए गए लाभों के संदर्भ को छोड़करे]

अनुच्छेद 2

अंतर्निहित कर

1. यह समझौता एक संविदात्मक राष्ट्र अथवा उसके राजनीतिक उपसंभाग अथवा स्थानीय प्राधिकरण की ओर से आय और पूंजी पर करों के लिए लागू होगा, उस प्रणाली के बावजूद जिसमें यह लगाए गए हैं।

2. माना जाएगा कि आय पर कुल आय पर अथवा आय के हिस्सों या पर अधिरोपित समस्त कर लगेगा जिसमें चल तथा अचल संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति पर कर शामिल हैं और उद्यम द्वारा दिए गए पारिश्रमिक अथवा वेतन की कुल राशि पर कर लगेगा ।

3. मौजूदा कर जिसके लिए समझौता लागू होगा हैं विशेषकर :

क) पुर्तगाली गणराज्य के मामले में :

i) निजी आयकर (Imposto sobre o rendimento das pessoas Singulares - IRS);

ii) कार्पोरेट आयकर (Imposto sobre o rendimento das pessoas Colectivas - IRC)

iii) कार्पोरेट आयकर पर स्थानीय अधिकर (Derrama)

(तत्पश्चात् "पुर्तगाली कर" के तौर पर संदर्भित)

ख) भारतीय गणतंत्र के मामले में :

उस पर किसी अधिकर सहित आयकर कर (तत्पश्चात् "भारतीय कर" के तौर पर संदर्भित)

4. समझौता किसी समान अथवा महत्वपूर्ण समान करों पर भी लागू होगा जो मौजूदा करों के स्थान पर अथवा के अतिरिक्त समझौते के हस्ताक्षर करने की तिथि के पश्चात् लागू होते हैं। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी एक-दूसरे के महत्वपूर्ण परिवर्तनों जो कि संबंधित कराधान कानूनों में किये गए हैं, को अधिसूचित करेंगे।

अध्याय II

परिभाषाएं

अनुच्छेद 3

सामान्य परिभाषाएं

1. इस समझौते के लिए, जबतक संदर्भ अन्यथा आवश्यक न हो :

क) शब्द "पुर्तगाल" का अर्थ यूरोपीयन महाद्वीप में स्थित पुर्तगाली गणराज्य, अजोरेस और मादेइरा द्वीपसमूह, संबंधित प्रादेशिक समुद्र और अन्य कोई क्षेत्र जिसमें, पुर्तगाली और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, पुर्तगाली गणतंत्र को समुद्र तल और अधोभूमि और उपरिवर्ती जलक्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का अन्वेषण और उपयोग करने के संदर्भ में क्षेत्राधिकारी या संप्रभु अधिकार है।

ख) "भारत" शब्द का अर्थ भारतीय क्षेत्र हैं जिसमें उसका क्षेत्रीय समुद्र तथा हवाई क्षेत्र शामिल हैं साथ ही साथ समुद्री कानून पर राष्ट्र संघ समुद्री समझौता, 1982 सहित भारतीय कानून के अनुसार तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, अन्य कोई समुद्री क्षेत्र शामिल हैं जिसमें भारत का स्वायत्त अधिकार, अन्य अधिकार तथा क्षेत्राधिकार शामिल हैं;

ग) शब्द "एक संविदाकारी राष्ट्र" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र" का अर्थ है पुर्तगाल या भारत जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो;

घ) शब्द "कर" का अर्थ पुर्तगाली कर या भारतीय कर जैसा संदर्भ द्वारा आवश्यक हो;

ड़) शब्द "व्यक्ति" में शामिल है एक व्यक्ति, एक कंपनी, व्यक्तियों की एक निकाय और अन्य कोई उद्यम जिसे एक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कराधान कानूरों के अंतर्गत एक करयोग्य यूनिट के तौर पर समझा जाता है

च) शब्द "कंपनी" का अर्थ कोई निकाय निगमित या कोई उद्यम जिसे कर उद्देश्यों के लिए निकाय कार्पोरेट के तौर पर समझा जाता है

छ) शब्द "संविदाकारी राष्ट्र का एक उद्यम" और "अन्य संविदाकारी राष्ट्र का उद्यम" का अर्थ क्रमश: एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा चलाए जा रहे उद्यम से है

ज) शब्द "अंतर्राष्ट्रीय यातायात" का अर्थ एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा संचालित किए गए समुद्री जहाज या वायुयान द्वारा कोई परिवहन है केवल तब छोड़कर जब समुद्री जहाज या वायुयान अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थानों के बीच ही संचालित किया जाता है

झ) शब्द "सक्षम प्राधिकारी" का अर्थ :

i) पुर्तगाल में : वित्त मंत्री या कराधान महानिदेशक (director-geral dos impostos) या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि

ii) भारत में : वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) में केंद्र सरकार या उनके प्राधिकृत प्रतिनिधि

अ) शब्दी "राष्ट्रीय" का अर्थ :

i) कोई व्यक्ति जिसके पास एक संविदाकारी राष्ट्र की राष्ट्रीयता है

ii) कोई कानूनी व्यक्ति, सांझेदार या संघ जो एक संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानूनों से ऐसे अपनी स्थिति को प्राप्त करता है

ट) शब्द "वित्त वर्ष" का अर्थ

i) पुर्तगाल के मामले में, सिविल वर्ष जैसा आईआरएस कोड या कराधान अवधि में निर्दिष्ट है जैसा आईआरएस कोड में निर्दिष्ट है

ii) भारत के मामले में, "पिछला वर्ष" जैसा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 3 के अंतर्गत निर्दिष्ट है

2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा किसी भी समय समझौते को लागू करने के संदर्भ में, उसमें निर्दिष्ट न होने वाला किसी शब्द का वही अर्थ होगा, जबतक संदर्भ के लिए अन्यथा आवश्यकता न हो, जैसा उन करों के लिए उस राष्ट्र के कानून के अंतर्गत उस समय हो जिस पर समझौता लागू होता है, उस राष्ट्र के अन्य कानूनों के अंतर्गत शब्द हेतु दिए गए अर्थ पर प्रचलित उस राष्ट्र के लागू होने वाले कर कानूनों के अंतर्गत कोई भी अर्थ है।

अनुच्छेद 4

निवासी

1. इस करार के लिए शब्द ''एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी'' का अर्थ किसी ऐसे व्यक्ति से है जिस पर उस राष्ट्र के कानूनों के अंतर्गत उसके अधिवास, निवास, प्रबन्ध-स्थान, पंजीकरण स्थान अथवा किसी ऐसे ही अन्य कारण से कर लगाया जा सकता है। इस शब्द में, हालांकि, कोई ऐसा व्यक्ति शामिल नही है जो उस राष्ट्र में ही कर देने के लिए उत्तरदायी है उस राष्ट में स्रोतों से आय के संदर्भ में ही।

2. जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण से दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का एक निवासी एक व्यक्ति है तो उसकी स्थिति निम्नानुसार निर्धारित होगी :

क) उसे केवल उसी राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जहां उसे एक स्थायी निवास-गृह उपलब्ध् हो, यदि उसे दोनों ही राष्ट्रों में कोई स्थायी निवास उपलब्ध हो, तो वह उस राष्ट्र का एक निवासी माना जाएगा, जिसके साथ उसके व्यक्तिगत और आर्थिक संबंध घनिष्ठ हैं (महत्वपूर्ण हितों का केन्द्र)

ख) यदि उस राष्ट्र का जिसमें उसके महत्वपूर्ण हित निहित हैं, निर्धारित नहीं किए जा सकते हो अथवा यदि उसे दोनों राष्ट्रों में से किसी भी राष्ट्र में कोई स्थायी निवास-गृह उपलब्ध नहीं हो, तो वह केवल उस राष्ट्र का एक निवासी माना जाएगा जिसमें वह आदतन रहता हो

ग) यदि उसके पास आदतन दोनों ही राष्ट्रों में आवास हो अथवा उनमें से किसी भी राष्ट्र में आवास नहीं हो, तो वह उस राष्ट्र का निवासी माना जाएगा जिसका वह एक नागरिक है

घ) यदि वह दोनों अथवा किसी भी राष्ट्र का निवासी है, तो संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी आपसी समझौते द्वारा प्रश्न को सुलझाने का प्रयास करेंगे

जहां पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के कारण, एक व्यक्ति को छोड़कर एक इंसान दोनों संविदाकारी राष्ट्रों का निवासी है तो इसे केवल उस राष्ट्र का ही निवासी होना समझा जाएगा जहां इसका प्रभावी प्रबंधन का स्थान मौजूद है। यदि राष्ट्र जिसमें इसका प्रभावी प्रबंधन का स्थान मौजूद को निर्धारित न किया जा सके तो संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारियों को आपसी समझौते द्वारा प्रश्न का निपटान करना होगा

अनुच्छेद 5

स्थायी संस्थापन

1. इस करार के लिए शब्द ''स्थायी संस्थापन'' का अर्थ कारोबार के उस निश्चित स्थान से है, जिसके द्वारा किसी उद्यम का कारोबार पूर्ण अथवा आंशिक रूप से किया जाता है।

2. ''स्थायी संस्थापन'' शब्द में विशेष तौर पर निम्नलिखित शामिल होंगे :

क) प्रबंधन का एक स्थान

ख) एक शाखा

ग) एक कार्यालय

घ) एक कारखाना

ड़) एक कार्यशाला

च) एक बिक्री केन्द्र और

छ) एक खान, एक तेल या गैस का कुआं से, एक खदान या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए अन्य कोई जगह

जिसमें प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण या दोहन के लिए प्रयोग किया गया एक अधिष्ठापन या ढ़ांचा शामिल है केवल तभी यदि इसे एक वित्त वर्ष में 120 दिनों से अधिक की अवधि के लिए प्रयोग किया गया है।

3. कोई भवन-स्थल अथवा निर्माण, प्रस्थापन अथवा संयोजन परियोजना अथवा उससे संबंधित पर्यवेक्षी कार्यकलाप केवल तब स्थाई प्रतिष्ठान बनाती है जब यह नौ से अधिक महीनों के लिए चले

3. इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधान के होते हुए भी ''स्थायी संस्थापन'' शब्द में निम्नलिखित को शामिल नहीं समझा जाएगा ;

क) उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के केवल भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ सुविधाओं का इस्तेमाल करना ;

ख) मात्र भण्डारण अथवा प्रदर्शन के प्रयोजनार्थ उद्यम से संबंधित माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के किसी स्टॉक का रख-रखाव करना ;

ग) किसी अन्य उद्यम द्वारा केवल प्रसंस्करित किए जाने के प्रयोजनार्थ उद्यम के माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं के स्टॉक का रख-रखाव करना ;

घ) उद्यम के लिए माल अथवा व्यापारिक-वस्तुओं को केवल क्रय करने के लिए अथवा सूचना एकत्र करने के लिए कारोबार के किसी निश्चित स्थान का रख-रखाव करना ;

ड़) उद्यम के लिए केवल प्रारम्भिक अथवा सहायक स्वरूप के किसी अन्य कार्यकलाप को चलाने के प्रयोजनार्थ कारोबार के लिए निश्चित स्थान का रख-रखाव करना ;

च) केवल उप-पैराग्राफ (क) से (ड़) में निर्दिष्ट गतिविधियों के किसी संयोजन के लिए व्यापार के निश्चित स्थान का रखरखाव, बशर्ते इस संयोजन के परिणामस्वरूप व्यापार के निश्चित स्थान की समग्र गतिविधि सहायक अथवा प्राथमिक प्रकृति का संयोजन हैं ।

एमएलआई के अनुच्छेद 13 का निम्नलिखित पैराग्राफ 4 इस समझौते के अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 4 के लिए लागू होता है :

एमएलआई का अनुच्छेद 13 - विशेष प्रकार की गतिविधि की छूट के माध्यम से स्थाई प्रतिष्ठापन स्थिति का कृत्रिम परिहार

[इस समझौते का अनुच्छेद 5 का पैराग्राफ 4] उस व्यापार के निश्चित स्थान के लिए लागू नही होगा जिसको एक उद्यम द्वारा प्रयोग या अनुरक्षित किया जाता है यदि वही उद्यम या एक नियत्रंण कंपनी उसी [संविदाकारी राष्ट्र] में उसी स्थान या अन्य किसी स्थान पर व्यापारिक गतिविधियां करती है और

क) [इस समझौते के अनुच्छेद 5] के प्रावधानों के अंतर्गत उद्यम या नियंत्रक उद्यम के लिए एक स्थाई प्रतिष्ठापन के लिए वह स्थान या अन्य स्थान बनाया गया हो

ख) उसी स्थान पर दो उद्यमों द्वारा, या उसी उद्यम द्वारा या दो स्थानों पर नजदीकी उद्यम द्वारा की गई गतिविधियों के संयोजन के परिणामस्वरूप समग्र गतिविधि प्रारंभिक या सहायक प्रकार की नहीं होती

बशर्ते कि उसी स्थान पर दो उद्यमों द्वारा, या उसी उद्यम द्वारा या दो स्थानों पर नजदीकी उद्यम द्वारा की गई व्यापारिक गतिविधियां पूरक कार्य जो एक संयोगशील व्यापारिक गतिविधि का भाग है, संस्थापित करता हो

5 पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधानों के न होते हुए भी, जहां एक व्यक्ति - एक स्वतंत्र स्थिति के एजेंट को छोड़कर जिस पर पैराग्राफ 6 लागू होता है - अन्य संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम की ओर से एक संविदाकारी राष्ट्र में कार्य करता है तो उस उद्यम को प्रथम-निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई प्रतिष्ठापन होने के तौर पर समझा जाता है यदि :

क) उद्यम की ओर से अनुबंध को अंतिम रूप देने के लिए उस संविदाकारी राष्ट्र में अधिकार हो या आदतन कार्य करता हो जबतक उसकी गतिविधियां पैराग्राफ 4 में निर्दिष्ट तक पूर्णता सीमित है ;

ख) उसके पास ऐसा कोई अधिकार न हो लेकिन आदतन प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में वह उत्पाद या करोबारी माल का स्टॉक रखता हो जिसे वह उद्यम की ओर से उस उत्पाद या कारोबार माल की सुपुर्दगी करता हो और उद्यम की ओर से उस राष्ट्र में की गई कुछ अतिरिक्त गतिविधियां उत्पाद या करोबारी माल की बिक्री का अंशदान हो

6 एक उद्यम केवल इसलिए ही एक संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई संस्थापन होने के तौर पर नहीं समझा जाएगा क्योंकि ब्रोकर, साधारण कमीशन एजेंट या अन्य किसी स्वतंत्र स्वरूप के अन्य एजेंट के माध्यम से उस राष्ट्र में व्यापार करता है बशर्ते कि ऐसा व्यक्ति अपना साधारण व्यापार करता हो।

7 इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधनों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र का एक बीमा उद्यम, पुर्नबीमा के संबंध के सिवाय, अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थाई प्रतिष्ठापन के तौर पर समझा जाएगा यदि उस अन्य राष्ट्र के क्षेत्र का प्रीमियम एकत्रित करता हो या बीमा जोखिम एक स्वतंत्र स्थिति के एजेंट को छोड़कर एक व्यक्ति के माध्यम से उसमें स्थित हो जिस पर पैराग्राफ 7 लागू होता है।

8. तथ्य है कि एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है जो नियंत्रण करती है या एक कंपनी द्वारा नियंत्रित होती है जो अन्य संविदाकारी राष्ट की एक घरेलू कपंनी है या जो उस अन्य राष्ट्र (या तो स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से या अन्यथा) में व्यापार करती है तो कोई कंपनी अपनी ओर से वह अन्य स्थाई प्रतिष्ठान गठित नहीं करेगी।

एमएमआई के अनुच्छेद 15 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 इस समझौते के अनुच्छेद 5 प्रावधानों हेतु लागू होते है :

एमएलआई के अनुच्छेद 15 - एक उद्यम से नजदीकी रूप से संबंधित एक व्यक्ति की परिभाषा

इस समझौते के अनुच्छेद 5 के प्रावधानों के लिए जिसे एमएलआई के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4 द्वारा संशोधित किया गया, एक व्यक्ति एक उद्यम से नजदीकी रूप से संबंधित है यदि सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर, उसी व्यक्तियों या उद्यमों के नियंत्रण के अंतर्गत अन्य या दोनों को नियंत्रित करता हो। किसी अन्य मामले में, एक व्यक्ति को एक उद्यम का नजदीकी संबंधी माना जाएगा यदि एक व्यक्ति अन्य (या एक कंपनी के मामले में, कुल वोट के 50 प्रतिशत से अधिक और कंपनी के शेयर के मूल्य या कंपनी में लाभकारी ईक्विटी हित के 50 प्रतिशत से अधिक ) में लाभकारी हित के 50 से अधिक का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अधिकार रखता हो या अन्य व्यक्ति उस व्यक्ति और उद्यम में लाभकारी हित (या एक कंपनी के मामले में, कुल वोट के 50 प्रतिशत से अधिक और कंपनी के शेयर की राशि या कंपनी में लाभकारी ईक्विटी ब्याज के 50 प्रतिशत से अधिक) के 50 प्रतिशत से अधिक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रखता हो|

अध्याय III

आय पर कराधान

अनुच्छेद 6

अचल संपत्ति से आय

1. अन्य संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति (कृषि या वानिकी से आय सहित) से एक संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा प्राप्त आय उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकती है।

2. शब्द "अचल संपत्ति" का अर्थ वही होगा जैसा राष्ट्र जिसमें संपत्ति का सवाल मौजूद है, के कानून के अंतर्गत है। शब्द किसी भी मामले में अचल संपत्ति, पशुधन और कृषि और वानिकी में प्रयोग उपकरण हेतु सहायक संपत्ति, अधिकार जिसके लिए संबंधित भूमि-संपत्ति के सामान्य कानून के प्रावधान लागू होते हैं, अचल संपत्ति का उपभोग और परिवर्तनशील या निश्चित भुगतान के अधिकार जिसे खनिज निक्षेप, स्रोत और अन्य प्राकृतिक संसाधन, समुद्री जहाज, बोट, मोटर वाहन और वायुयान के कार्य करने या कार्य करने के अधिकार को अचल संपत्ति के तौर पर नहीं समझा जाएगा, को शामिल करेगा।

3. पैराग्राफ 1 के प्रावधान अचल संपत्ति के प्रत्यक्ष प्रयोग, या भाड़े पर देने या किसी अन्य रूप में प्रयोग करने से प्राप्त आय के तौर पर लागू होंगे।

4. पैराग्राफ 1 और 3 के प्रावधान भी एक उद्यम की अचल संपत्ति से आय और स्वतंत्र निजी सेवाओं देने के लिए प्रयोग की गई अचल संपत्ति से आय के लिए लागू होंगे।

5. पूर्वगामी प्रावधान उस संविदाकारी राष्ट्र के काराधान कानून के अंतर्गत अचल संपत्ति से आय या अचल संपत्ति के प्रयोग या प्रयोग के अधिकार से संबंधित सेवाओं से प्राप्त आय दोनों में से जो भी हो पर भी लागू होंगे जहां संपत्ति स्थित है, अचल संपत्ति से आय को अर्जित किया जाता है, पर भी लागू होंगे।

अनुच्छेद 7

व्यापारिक लाभ

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ केवल उस राष्ट्र में ही करयोग्य होंगे जबतक उद्यम उसमें स्थित स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है। यदि उद्यम उक्तकथितानुसार व्यापार करता है तो उद्यम का लाभ अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है लेकिन केवल उतना जो

क) उस स्थाई प्रतिष्ठान से संबंधित हो

ख) वही या उसी प्रकार के उत्पाद या कारोबारी माल के उस अन्य राष्ट्र में बिक्री जिसको उस स्थाई प्रतिष्ठान की ओर से बेचा जाता है या

ग) वही या उसी प्रकार के उस अन्य राष्ट्र में की गई अन्य व्यापारिक गतिविधियां जो उस स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से प्रभावित होती हो

2. पैराग्राफ 3 के प्रावधानों के अनुसार, जहां एक संविदाकारी राष्ट्र का एक उद्यम वहां स्थित एक स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता है तो प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान हेतु निर्दिष्ट किए जाने वाले लाभ, जिसे प्राप्त किए जाने की संभावना है निर्दिष्ट होगा यदि यह अलग होता और अलग उद्यम उसी या उसी प्रकार की शर्तों के अंतर्गत उसी या उसी प्रकार की गतिवधियों में संलग्न होता और उस उद्यम के साथ पूर्ण रूप से स्वतंत्र होने के तौर पर व्यावहार करता जिसका वह एक स्थाई प्रतिष्ठापन है।

3. एक स्थायी प्रतिष्ठान के मुनाफे का निर्धारण करने में, कटौती खर्च के रूप में वहाँ की अनुमति दी जाएगी जो स्थायी प्रतिष्ठान के व्यापार के लिए व्यय हुए, जिसमें ऐसे किए गए कार्यपालिका और सामान्य प्रशासनिक व्यय शामिल है, चाहे यह उस राज्य में किए गए हो जहां स्थाई प्रतिष्ठापन स्थित है या कही और, उस राष्ट्र के घरेलू कर कानून की सीमाओं के अनुसार और के मुताबिक।

4. कोई लाभ उद्यम के लिए उत्पाद या व्यापारिक माल उसे स्थायी प्रतिष्ठान द्वारा मात्र खरीद की वजह से एक स्थायी स्थापना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

5. पूर्ववर्ती पैराग्राफ के लिए, स्थाई प्रतिष्ठान हेतु निर्दिष्ट लाभों को वर्ष दर वर्ष उसी विधि द्वारा निर्धारित किया जाएगा जबतक विरोध करने का कोई सही या उचित कारण न हो।

6. जहां लाभ में आय की मद शामिल हो जो इस समझौते के अन्य अनुच्छेद में पृथक रूप से व्यवहारित होती है तो इस अनुच्छेदों के प्रावधान इस अनुच्छेद के प्रावधानों द्वारा प्रभावित नहीं होंगे।

अनुच्छेद 8

नौपरिवहन और हवाई परिवहन

1. अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से लाभ केवल उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगा जिसका उद्यम एक घरेलू उद्यम है।

2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान एक पूल, एक संयुक्त व्यापार अथवा एक अंतर्राष्ट्रीय संचालन एजेंसी में भागीदारी से लाभ हेतु भी लागू होंगे।

3. जबकभी भी विभिन्न राष्ट्रों से कंपनियां एक संघ के रूप में साथ-साथ हवाई परिवहन संबंधी व्यापार करती है तो एक कंपनी द्वारा उस संघ में की गई भागीदारी के अनुरूप पैराग्राफ 1 के प्रावधान संघ के लाभ के उस हिस्से पर लागू होंगे जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है ।

4. इस अनुच्छेद के लिए, अंर्तराष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन से लाभ का अर्थ निम्न से लाभ सहित समुद्री जहाज या वायुयान के मालिक या पट्टेदाता या चार्टर द्वारा यात्रियों, डाक, पशु या उत्पादों के समुद्र या हवाई मार्ग द्वारा परिवहन से प्राप्त लाभ है :

i) अन्य उद्यमों की ओर से ऐसे परिवहन के लिए टिकटों की बिक्री ;

ii) ऐसे परिवहन में प्रयुक्त समुद्री जहाज या वायुयान का महत्वपूर्ण पट्टा; और

iii) ऐसे परिवहन के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संलग्न उद्यम द्वारा कंटेनरों (कंटेनरों के परिवहन के लिए ट्रेलर और संबंधित उपकरण सहित) का प्रयोग, अनुरक्षण या किराया ।

5. अन्य संविदाकारी राष्ट्र में एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम के एक स्थाई प्रतिष्ठान हेतु प्रत्यक्ष तौर पर अर्जित और समुद्री जहाज या वायुयान से अर्जित लाभ समझा जाएगा। यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसा ब्याज निवेश का प्रतिनिधित्व करने वाले फंड पर ब्याज को संदर्भित नहीं करेगा।

अनुच्छेद 9

संबंधित उद्यम

1. जहां ;

क) एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम प्रबंधन, नियंत्रण या अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेता है; या

ख) एक ही व्यक्ति, प्रबंधन, नियंत्रण या एक संविदकारी राष्ट्र के एक उद्यम की पूंजी और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भाग लेते हैं ;

और किसी भी मामले में शर्तें बनाई गई हों या उनके वाणिज्यिक या वित्तीय संबंधों में दो उद्यमों के बीच अधिरोपित होती हो जो उनसे अलग हैं जो स्वतंत्र उद्यमों के बीच बनाई गई हो तो कोई लाभ जो, लेकिन उन शर्तों के लिए, एक उद्यमों हेतु उपार्जित हो जाता लेकिन उन शर्तों की वजह से उपार्जित नही हो सका, उसे उस उद्यम के लाभ में शामिल किया जा सकता है और तद्नुसार करारोपित हो सकती है।

2. जहां एक संविदाकारी राष्ट्र उस राष्ट्र के एक उद्यम के लाभ में शामिल हो और तद्नुसार कर - लाभ जिस पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम को उस अन्य राष्ट्र में कर देना पड़ा हो और ऐसा शामिल लाभ वह लाभ हो जो प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र के उद्यम हेतु प्राप्त किया गया होता यदि दोनों उद्यमों के बीच की गई शर्तें वह थीं जिनको निजी उद्यमों के बीच किया गया होता तो अन्य राष्ट्र उन लाभों पर उसमें लगाए गए करों की राशि का उपयुक्त समायोजन करेगा। ऐसे समायोजन को निर्धारित करने के लिए इस समझौते के अन्य प्रावधानों हेतु यथोचित संबंध होना चाहिए था और संविदाकारी राष्ट्र यदि आवश्यक हो तो सक्षम प्राधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे।

अनुच्छेद 10

लाभांश

1. एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी है द्वारा अन्य संविदाकारी राष्ट्र की दिया गया लाभांश उस अन्य राष्ट्र में करारोपित हो सकता है।

2. हालांकि, ऐसे लाभांश तद्नुसार उस राष्ट्र के कानून के अनुसार उस एक संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकता है जिसकी लाभांश देने वाली कंपनी एक घरेलू कंपनी है लेकिन :

क) जहां लाभांश कंपनी जो पुर्तगाल की घरेलू कंपनी है द्वारा भारत की घरेलू कंपनी को दिया जाता है जो उसकी लाभार्थी मालिक है तो ऐसा वसूला गया पुर्तगाली कर निम्न से अधिक नहीं होगा :

i) लाभांश की कुल राशि का 15 प्रतिशत; या

ii) लाभांश की कुल राशि का 10 प्रतिशत यदि लाभार्थी मालिक एक कंपनी है जो लाभांश के भुगतान से पहले के दो वर्षों की आवधिक अवधि के लिए लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी के पूंजीगत स्टाक (कैपिटल सोसल) का कम से कम 25 प्रतिशत प्रत्यक्ष तौर पर अपने पास रखती हो।

ख) जहां लाभांश कंपनी जो भारत की घरेलू कंपनी है द्वारा पुर्गगाल की घरेलू कंपनी को दिया जाता है जो उसकी लाभार्थी मालिक है तो ऐसा वसूला गया भारतीय कर निम्न से अधिक नही होगा :

i) लाभांश की कुल राशि का 15 प्रतिशत; या

ii) लाभांश की कुल राशि का 10 प्रतिशत यदि लाभार्थी मालिक एक कंपनी है जो लाभांश के भुगतान से पहले के दो वर्षों की आवधिक अवधि के लिए लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी के पूंजीगत स्टाक का कम से कम 25 प्रतिशत प्रत्यक्ष तौर पर अपने पास रखती हो.

यह पैराग्राफ उस लाभ के संदर्भ में कंपनी के कराधान को प्रभावित नही करेगा जिसमें से लाभांश का भुगतान किया जाता है।

3. शब्द "लाभांश" जैसा इस अनुच्छेद में प्रयोग हुआ है का अर्थ शेयर, "jouissance" शेयर "jouissance" अधिकार, खनन शेयर, फाउंडर शेयर या अन्य अधिकार, ऋण-दावे के तौर पर नहीं, भागीदारी लाभ साथ ही साथ आय जो उसी कराधान उपचार के अनुसार है जैसे राष्ट्र जिसकी वितरण करने वाली कंपनी घरेलू हैं, के कानून द्वारा शेयरों से आय है। इस शब्द में लाभ (associacao em participacao) में भागीदारी हेतु व्यवस्था के अंतर्गत निर्दिष्ट लाभ शामिल है।

4. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान लागू नहीं होंगे यदि लाभांश के लाभार्थी स्वामी, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी होने के तौर पर, उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में व्यापार करता हो जिसका लाभांश देने वाली कंपनी निवासी है, वहां स्थित एक स्थाई प्रतिष्ठान के माध्यम से, या वहां स्थित एक निश्चित आधार से उस अन्य राष्ट्र की स्वतंत्र सेवाओं में निष्पादित करता हो और स्वामित्व जिसके संबंध में दिए गए लाभांश ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान से प्रभावी रूप से संबंधित है। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 या अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।

5. जहां एक कंपनी जो एक संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है अन्य संविदाकारी राष्ट्र से आय या लाभ प्राप्त करता है तो वह राष्ट्र कंपनी द्वारा दिए गए लाभांश पर कोई कर अधिरोपित नहीं कर सकता, केवल जहां तक ऐसे लाभांश उस अन्य राष्ट्र के निवासी को दिए गए हों या जहां तक घारण जिसके संबंध में दिए गए लाभांश एक स्थाई प्रतिष्ठापन से प्रभावी रूप से संबंधित हो या उस अन्य राष्ट्र में स्थित निश्चित बेस, ना तो कंपनी के अविभाजित लाभ का विषय है ना ही कंपनी के अविभाजित लाभ पर कर का विषय, भले ही लाभांश दिया गया हो या अवितरित लाभ में ऐसे अन्य राष्ट्र में उत्पन्न आय या लाभ के पूर्ण या आंशिक लाभ शामिल हो।

अनुच्छेद 11

ब्याज

1. एक संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित होने वाले तथा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी को अदा किए गए ब्याज पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।

2. हालांकि, इस प्रकार के ब्याज पर उस संविदाकारी राष्ट्र में भी और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जा सकेगा जिस राष्ट्र में वह उद्भूत होता है, किन्तु यदि ब्याज का लाभार्थी स्वामी अन्य संविदात्मक राज्य का निवासी हैं तो इस प्रकार प्रभारित कर, ब्याज की सकल रकम के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी आपसी समझौते द्वारा इस सीमा को लागू करने की विधि का निपटान करेंगे।

3. पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, एक संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित ब्याज उस राष्ट्र में कर से करमुक्त होगा :

क) यदि ऐसे ब्याज का देनदार वह राष्ट्र, एक राजनीतिक या प्रशासनिक उपप्रभाग या उसका एक स्थानीय प्राधिकारी हो या

ख) यदि ब्याज संविदाकारी राष्ट्रों की सरकारों के बीच एक समझौते के तहत उनके द्वारा दिए गए किसी वित्तपोषण के संबंध में अन्य संविदाकारी राष्ट्र, एक राजनीतिक या एक प्रशासनिक उपप्रभाग या एक उसके एक स्थानीय प्राधिकारी या एक संस्थान (एक वित्तीय संस्थान सहित) को दिया जाता है।

4. इस अनुच्छेद में यथा - प्रयुक्त ''ब्याज'' शब्द से अर्थ है - प्रत्येक प्रकार के ऋण संबंधी दावों से प्राप्त आय, चाहे वह बंधक द्वारा प्रतिभूत हो अथवा नहीं और चाहे उन्हें ऋण-दाता के लाभ में भागीदारी का कोई अधिकार प्राप्त हो अथवा नहीं हो और विशेष रूप से सरकारी प्रतिभूतियों से, प्राप्त आय और जमा, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से प्राप्त आय जिसमें ऐसी प्रतिभूतियों, बंधपत्रों अथवा ऋण-पत्रों से संबंधित प्रीमियम और पुरस्कार के साथ-साथ आय शामिल हो। देरी से अदायगी के लिए अर्थदंड संबंधी प्रभारों को इस अनुच्छेद के प्रयोजन के लिए ब्याज नहीं समझा जाएगा।

5. पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे, यदि ब्याज का हितभागी स्वामी, संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने से दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें ब्याज उद्भूत हुआ हो, उसमें स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता हो तथा जिस ऋण-दावे के बारे में ब्याज अदा किया गया हो वह इस प्रकार के स्थायी संस्थापन प्रभावी रूप से सम्बद्ध हो। ऐसे मामले में, अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।

6. ब्याज किसी संविदाकारी राष्ट्र में अर्जित हुआ माना जाएगा, यदि अदाता उस राष्ट्र का निवासी हो। हालांकि, जहां ब्याज अदा करने वाले व्यक्ति, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं किसी संविदाकारी राष्ट्र में एक स्थायी संस्थापन है और इस संबंध में ऋण जिस पर ब्याज प्रदत्त किया गया था, इस प्रकार का ब्याज इस प्रकार के स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन किया जाता है, तो इस प्रकार का ब्याज उस राष्ट्र में उद्भूत हुआ माना जाएगा जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।

7 जहां, अदा करने वाले और हितभागी स्वामी अथवा उन दोनों के बीच तथा किसी अन्य व्यक्ति के बीच विशेष संबंध होने के कारण अदा की गई ब्याज की रकम, उस ऋणदावे को ध्यान में रखते हुए जिसके लिए यह रकम अदा की गई है, उस रकम से बढ़ जाती है, जिसके संबंध में इस प्रकार के संबंध होने की स्थिति में अदा करने वाले और हितभागी स्वामी के बीच सहमति हो गई होती, वहां इस अनुच्छेद के उपबंध अंतिम रूप से वर्णित रकम पर ही लागू होंगे। ऐसे मामले में अदायगियों के आधिक्य भाग पर इस करार के अन्य प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार कर लगाया जाएगा।

अनुच्छेद 12

शामिल सेवाओं के लिए रॉयल्टी और शुल्क

1. एक संविदाकारी राष्ट्र में ली गई शामिल सेवाओं के लिए रायल्टी और शुल्क और अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को भुगतान उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में ही करारोपित हो सकता है।

2. हालांकि, तकनीकी सेवाओं के लिए ऐसी रॉयल्टी और शुल्क उस संविदाकारी राष्ट्र में भी करारोपित हो सकती हैं जिसमें यह अर्जित होती है और उस राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करारोपित हो सकती हैं लेकिन यदि प्राप्तकर्ता तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या शुल्क का लाभार्थी स्वामी अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी है तो ऐसा वसूला गया कर तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या शुल्क की कुल राशि के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस सीमितता को लागू करने की विधि का आपसी समझौते द्वारा निपटान करेंगे।

3. इस अनुच्छेद में यथा-प्रयुक्त शब्द ''रायल्टियां'' शब्द का अभिप्राय किसी साहित्यिक, कलात्मक अथवा वैज्ञानिक कृति के किसी कापीराइट, जिसमें सिनेमेटोग्राफिक फिल्में और टेलीविजन अथवा रेडियो प्रसारण के लिए प्रयुक्त फिल्में अथवा टेपें या रिप्रोडक्शन के अन्य कोई साधन किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन अथवा मॉडल, प्लान, गुप्त फार्मूला अथवा प्रक्रिया या किसी औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक उपकरण के प्रयोग हेतु अथवा प्रयोगाधिकार हेतु अथवा औद्योगिक, वाणिज्यिक अथवा वैज्ञानिक अनुभव से संबंधित सूचना सहित प्रतिफल के रूप में प्राप्त की गई किसी भी प्रकार की शामिल अदायगियां हैं।

4. इस अनुच्छेद के लिए, "शामिल सेवाओं के लिए शुल्क" का अर्थ है किसी तकनीकी या परामर्श सेवाओं (तकनीकी या अन्य कर्मियों की सेवाओं के प्रावधानों के माध्यम सहित) देने के को ध्यान में रखते हुए किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का भुगतान, इस समझौते के अनुच्छेद 14 और 15 में निर्दिष्ट को छोड़कर, यदि ऐसी सेवाएं :

क) अधिकार, संपत्ति या सूचना जिसके लिए एक भुगतान पैराग्राफ 3 में निर्दिष्ट है, प्राप्त होती है को लागू या प्रयोग करने के लिए अधीनस्थ और सहायक है; और 

ख) तकनीकी जानकारी, अनुभव, कौशलता, तकनीकी जानकारी या प्रक्रियाएं या एक तकनीकी योजना का विकास या स्थानांतरण सहित या तकनीकी डिजाइन जो व्यक्ति को उसमें शामिल तकनीक का लागू करने के लिए सेवाओं को प्राप्त करने में सक्षम करती है, उपलब्ध कराना

5. पैराग्राफ 4 के होते हुए भी, शामिल सेवाओं के लिए शुल्क में दी गई राशि शामिल नहीं होगी:

क) वह सेवाएं जो सहायक या मददगार हों साथ ही साथ संपत्ति की बिक्री हेतु अनिवार्य या आवश्यक रूप से संबंधित हो

ख) वह सेवाएं जो अंतर्राष्ट्रीय यातायात में समुद्री जहाज या वायुयान के संचालन के संबंध में प्रयुक्त समुदी जहाजों, वायुयानों, कंटेनरों या अन्य उपकरण हेतु सहायक या मददगार हों;

(ग) शैक्षणिक संस्थानों में या उसके द्वारा शिक्षण के लिए;

(घ) भुगतान करने के लिए व्यक्ति या इंसान के निजी प्रयोग के लिए सेवाओं हेतु;

(ड़) पेशेवर सेवाओं के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की फर्म (एक कंपनी को छोड़कर) को भुगतान करने वाले व्यक्ति का एक कर्मचारी को अनुच्छेद 14 में परिभाषित हैं

च) अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 2, च) में संदर्भित प्राकृतिक संसाधनों के अन्वेषण या प्रयोग के लिए प्रयुक्त ढ़ांचा या अधिष्ठापन के संबंध में दी गई सेवाओं के लिए

छ) अनुच्छेद 5 के पैराग्राफ 3 में संदर्भित सेवाओं के लिए।

6 पैराग्राफ 1 और 2 के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे यदि शामिल सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियों का हितभागी स्वामी, जो एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के कारण दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में, जिसमें तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियां उद्भूत होती हैं, वहां पर स्थित किसी स्थायी संस्थापन के माध्यम से कारोबार करता है तथा जिस अधिकार, संपत्ति अथवा अनुबंध के संबंध में शामिल अथवा व्यवसायिक सेवाओं के लिए शुल्क या रायल्टियां अदा की जाती हैं, वे ऐसे स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से सम्बद्ध हैं। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के प्रावधान लागू होंगे।

7 एक संविदाकारी राष्ट्र में तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टियां तथा शुल्क तब अर्जित हुई मानी जाएंगी, जब अदाकर्ता स्वयं उस संविदाकारी राष्ट्र की सरकार, एक राजनैतिक उप-प्रभाग, स्थानीय प्राधिकारी अथवा उस राष्ट्र का कोई निवासी हो। तथापि, जहां तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियां अदा करने वाले व्यक्ति का, चाहे वह किसी संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हो अथवा नहीं, उस संविदाकारी राष्ट्र में ऐसा कोई स्थायी संस्थापन हो, जिनके संबंध में तकनीकी सेवाओं के लिए फीस तथा रायल्टियां अदा करने की जिम्मेदारी निभाई गई हो, और ऐसी तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क तथा रायल्टियां उस संविदाकारी राष्ट्र में उद्भूत हुई मानी जाएगी जिसमें वह स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान स्थित है।

8 जहां, अदाता और लाभार्थी मालिक के बीच या दोनों के बीच या कुछ व्यक्तियों के बीच एक विशेष संबंध के कारण तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी या शुल्क की राशि, तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्टी शुल्कों के संबंध में, जिसके लिए इनका भुगतान किया गया, को ध्यान में रखते हुए राशि के उस राशि से अधिक होने पर, जो ऐसे संबंध की अनुपस्थिति में अदाता और लाभार्थी मालिक द्वारा सहमति हो जाती, इस अनुच्छेद के प्रावधान अंतिम निर्दिष्ट राशि के लिए ही लागू होंगे। ऐसे मामले में भुगतान का अतिरिक्त हिस्सा प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों के अनुसार करयोग्य रहेगा, इस समझौते के अन्य प्रावधानों को देखते हुए।

अनुच्छेद 13

पूंजीगत लाभ

1. अनुच्छेद 6 में उल्लिखित और दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित अचल संपत्ति के अंतरण से एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त लाभों पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा।

2. स्थाई संस्थापन की व्यापारिक संपत्ति के भाग से बनी चल संपत्ति के हस्तांरण से प्राप्ति जिसमें संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम अन्य संविदाकारी राष्ट्र में हेैं अथवा निश्चित स्थान से संबंधित चल संपत्ति ऐसे निश्चित स्थान अथवा ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान (अकेले अथवा पूर्ण उद्यम सहित) के हस्तांतरण से ऐसी प्राप्ति सहित स्वतंत्र निजी सेवाओं के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्रों में संविदाकारी राष्ट्र के निवासी हेतु उपलब्ध हैं, उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता हैं।

3. समुद्री जहाजों या वायुयानों के संचालन से संबंधित चल संपत्ति या अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित समुद्री जहाज या वायुयान के हस्तांतरण से प्राप्ति उसी संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका हस्तांतरणकर्ता एक निवासी है।

[एमएलआई के अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 4 द्वारा प्रतिस्थापित][ एक कंपनी जिसकी संपत्ति में संविदाकारी राष्ट्र में स्थिति अचल संपत्ति के मुख्य प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं, के पूंजीगत स्टाक के शेयर के हस्तांतरण से प्राप्ति एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त लाभ उस राष्ट्र में करारोपित हो सकते हैं। एक कंपनी जो संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है, में उक्त निर्दिष्ट को छोड़कर शेयरों के हस्तांतरण से प्राप्ति उस राष्ट्र में करारोपित हो सकती है]

एमएलआई के अनुच्छेद 9 के निम्नलिखित पैराग्राफ 4 इस समझौते के अनुच्छेद 13 के पैराग्राफ 4 को प्रतिस्थापित करता है

एमएलआई का अनुच्छेद 9 - मुख्यत: अचल संपत्ति से उसकी राशि की प्राप्ति वाले उद्यमों के शेयर या ब्याज के हस्तांतरण से पूंजी प्राप्ति

[इस समझौते] के लिए शेयर या तुलनीय ब्याज के हस्तांतरण से एक [संविदाकारी राष्ट्र] के निवासी द्वारा प्राप्ति जैसे एक सहभागी या न्यास, को अन्य [संविदाकारी राष्ट्र] में करारोपित किया जा सकता है यदि, हस्तांतरण के पूर्ववर्ती 365 दिनों के दौरान किसी भी समय, यह शेयर या तुलनीय ब्याज अन्य उस [संविदाकारी राष्ट्र] में स्थित अचल संपत्ति (वास्तविक संपत्ति) से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष राशि के 50 प्रतिशत से अधिक प्राप्त होता हो

5 पैराग्राफ 1, 2, 3 और 4 में संदर्भित को छोड़कर किसी संपत्ति के हस्तांतरण से प्राप्ति केवल उस संविदाकारी राष्ट्र में ही करयोग्य होगी जिसका संक्राता एक निवासी है।

अनुच्छेद 14

स्वतंत्र निजी सेवाएं

1 एक स्वतंत्र प्रकार की पेशेवर सेवाएं या अन्य गतिविधियां करने के संदर्भ में एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा केवल निम्नलिखित को छोड़कर जब ऐसी आय अन्य राष्ट्र में भी करारोपित हो सकती है :

क) यदि वह अपनी गतिविधियों के निष्पादन के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके लिए उपलब्ध निश्चित स्थान रखता हैं तो इस स्थिति में आय का उतना जैसा उस निश्चित स्थान आरोप्य हैं अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकता हैं; अथवा

ख) यदि अन्य राष्ट्रों में उसका निवास संबंधित वित्तीय वर्ष को समाप्त होने वाले अथवा प्रांरभ होने वाली किसी 12 माह की अवधि या अवधियों में कुल 183 दिनों की अवधि अथवा इससे अधिक होती है तो इस स्थिति में केवल उतनी आय जितनी उस अन्य राष्ट्र में निष्पादित गतिविधियों से अर्जित होती हैं उस अन्य राष्ट्र में करयोग्य हो सकती है।

2. शब्द "व्पावसायिक सेवा" में विशेषकर स्वतंत्र वैज्ञानिक, साहित्यिक, कलात्मक, शैक्षिक अथवा शिक्षण गतिविधियां साथ ही साथ चिकित्सक, वकील, अभियंता, वास्तुशास्त्री, शल्य-चिकित्सक, दंत चिकित्सक तथा लेखाकार शामिल हैं

अनुच्छेद 15

आश्रित व्यक्तिगत सेवाएं

1. अनुच्छेद 16, 18, और 19 के प्रावधानों के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त वेतनों, मजदूरियों और इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में कर लगेगा, जब तक कि नियोजन का निष्पादन दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में नहीं किया गया हो। यदि ऐसा नियोजन किया गया है, तो जो पारिश्रमिक वहां से प्राप्त होता है, उस पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लग सकेगा।

2. पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के बावजूद, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में किए गए किसी नियोजन के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर केवल प्रथमोल्लिखित राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा, यदि

क) प्राप्तकर्ता, संबंधित वित्तीय वर्ष में समाप्त अथवा प्रारंभ हुए किसी बारह महीने की ऐसी अवधि अथवा अवधियों के लिए दूसरे राष्ट्र में रह रहा है जो कुल मिलाकर 183 दिनों से अधिक नहीं है; और

ख) पारिश्रमिक ऐसे किसी नियोजक द्वारा अथवा उसकी ओर से अदा किया गया है, जो दूसरे राष्ट्र का निवासी नहीं है, और

ग) पारिश्रमिक ऐसे किसी स्थायी संस्थापन अथवा निश्चित स्थान द्वारा वहन नहीं किया जाता है, जो नियोजक का दूसरे राष्ट्र में हो।

3 इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती प्रावधानों के होते हुए भी अंतर्राष्ट्रीय यातायात में संचालित एक समुद्री जहाज या वायुयान जो विदेश जाता हो में किए गए कार्य के संबंध में प्राप्त पारिश्रमिक पर उस संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है जिसका उद्यम घरेलू उद्यम है।

अनुच्छेद 16

निदेशकों का शुल्क

कंपनी, जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की घरेलू कंपनी है, के निदेशक मंडल या पर्यवेक्षी बोर्ड (पुर्तगाली में conselho fiscal) अथवा कंपनी के उसी सदस्य के तौर पर उसकी क्षमता के अनुसार एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त निदेशक शुल्क तथा अन्य समकक्ष प्रकार के भुगतान उस अन्य राष्ट्र में भी करयोग्य हो सकते हैं।

अनुच्छेद 17

कलाकार और खेलकर्मी

1. अनुच्छेद 14 तथा 15 के प्रावधानों के बावजूद भी, एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी द्वारा प्राप्त आय जैसे कि मनोरंजनकर्ता, कोई थियेटर, चलचित्र, रेडियो या दूरदर्शन कलाकार अथवा किसी संगीतकार अथवा किसी खिलाड़ी के रूप में दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में किए गए इस प्रकार के अपने व्यक्तिगत कार्य-कलापों से प्राप्त आय पर उस दूसरे राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।

2. जहां किसी मनोरंजनकर्ता अथवा किसी खिलाड़ी द्वारा अपने इस प्रकार की हैसियत में किए गए व्यक्तिगत कार्य-कलापों के संबंध में प्राप्त आय स्वयं मनोरंजनकर्ता या खिलाड़ी को प्राप्त नहीं हो, अपितु किसी अन्य व्यक्ति को प्राप्त हो, ऐसी आय पर अनुच्छेद 7, 14 तथा 15 के प्रावधानों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकेगा, जिसमें मनोरंजनकर्ता अथवा खिलाड़ी के कार्य-कलाप किए जाते हो।

3. हालांकि, ऐसी आय पैराग्राफ 1 में निर्दिष्ट राष्ट्र में करारोपित नहीं होगी यदि कथित गतिविधियां अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी द्वारा उस राष्ट्र में जाने के दौरान की जाती है और जब ऐसी यात्रा पूर्णता या महत्वपूर्ण तौर पर अन्य राष्ट्र, एक राजनीतिक या प्रशासनिक उपप्रभाग या उसके स्थानीय प्राधिकारी द्वारा वित्तपोषित की जाती है।

अनुच्छेद 18

पेंशन

अनुच्छेद 19 के पैराग्राफ 2 के प्रावधानों के अनुसार, पिछले रोजगार पर विचार करते हुए एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को दी गई पेंशन या इसी प्रकार का अन्य पारिश्रमिक उस राष्ट्र में ही करयोग्य होगा।

अनुच्छेद 19

सरकारी सेवा

1. (क) किसी संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके किसी राजनैतिक या प्रशासनिक उपप्रभाग अथवा किसी स्थानीय प्राधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को उस राष्ट्र अथवा उप-प्रभाग अथवा प्राधिकरण के लिए की गई सेवाओं के संबंध में अदा किए गए पेंशन से भिन्न इसी प्रकार के अन्य पारिश्रमिक पर केवल उसी राष्ट्र में ही कर लगेगा ।

ख) हालांकि, ऐसे पारिश्रमिक पर केवल दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में तभी कर लग सकेगा, यदि सेवाएं उस राष्ट्र में की जाती हैं, और व्यक्ति उस राष्ट्र का एक निवासी हो, जो;

i) उस राष्ट्र का एक निवासी है; या

ii) सेवाएं देने के एकमात्र उद्देश्य से उस राष्ट्र का निवासी न हो

2. (क) उस राष्ट्र या उपसंभाग या प्राधिकारी को दी गई सेवाओं के संदर्भ में एक व्यक्ति को एक राष्ट्र या एक राजनीतिक उपसंभाग या उसके एक स्थानीय प्राधिकारी द्वारा दी गई कोई पेंशन या उनके द्वारा सृजित कोष में से कोई पेंशन उसी राष्ट्र में करयोग्य होगी।

(ख) हालांकि, ऐसी पेंशन केवल अन्य राष्ट्र में ही करयोग्य होगी यदि व्यक्ति उस राष्ट्र का निवासी और या उस राष्ट्र का नागरिक हो

3. अनुच्छेद 15, 16 17 तथा 18 के प्रावधान संविदाकारी राष्ट्र अथवा उसके एक राजनीतिक या प्रशासनिक उपप्रभाग अथवा स्थानीय प्राधिकारी द्वारा निष्पाादित व्यापार के संबंध में प्रतिपादित सेवाओं के संबंध में पारिश्रमिक तथा पेंशन हेतु लागू होगा।

अनुच्छेद 20

प्राध्यापक, अध्यापक तथा अनुसंधान स्कॉलर

1. कोई पेशेवर, अध्यापक या अनुसंधान स्कॉलर जो उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय अथवा अन्य अनुमोदित संस्थान में अध्यापन में अथवा अनुसंधान में अथवा दोनो के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का दौरा करने के तुरन्त पहले उस संविदाकारी राष्ट्र का एक का निवासी है अथवा था, तो वह उस अन्य राष्ट्र में उसके आने की तिथि से अधिक से अधिक दो वर्षों की अवधि के लिए ऐसे अध्यापन अथवा अनुसंधान के लिए किसी पारिश्रमिक पर उस अन्य राज्य में कर से छूट प्राप्त होगी।

2. यह अनुच्छेद केवल अनुसंधान से आय पर लागू होगा यदि ऐसा अनुसंधान लोक हित में व्यक्ति द्वारा किया जाता हैं तथा नाकि कुछ निजी व्यक्ति अथवा व्यक्तियों के लाभ के लिए।

3. इस अनुच्छेद और अनुच्छेद 21 के लिए, एक व्यक्ति को एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होना समझा जाएगा यदि वह उस वित्त वर्ष में निवासी है जिसमें वह अन्य संविदकारी राष्ट्र में जाता है या वित्त वर्ष से तुरंत पहले जाता है।

4. पैराग्राफ 1 के उद्देश्य के लिए, "अनुमोदित संस्थान" का अर्थ एक संस्थान जिसे संबंधित राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संदर्भ में अनुमोदित किया गया हो।

अनुच्छेद 21

विधार्थी एवं प्रशिक्षु

भुगतान जो एक विधार्थी, व्यापारिक प्रशिक्षु अथवा व्यापारिक शिक्षार्थी जो एक संविदाकारी राष्ट्र जाने से तुरंत पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र का निवासी हैं अथवा था तथा जो अपने अनुरक्षण, शिक्षा अथवा प्रशिक्षण के उद्देश्य से अपनी शिक्षा तथा प्रशिक्षण को प्रापत करने के लिए ही प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में मौजूद हैं प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में करारोपित नहीं होगा, बशर्ते कि ऐसा भुगतान उस राष्ट्र के बाहर स्रोत से उसको दिया जाता है :

क) उस राष्ट्र से बाहर स्रोत से अर्जित

ख) उस अन्य संविदाकारी राष्ट्र में उसके पहले आने की तिथि से अधिक से अधिक दो वर्षों की अवधि के दौरान अधिक से अधिक प्रति वर्ष 3000 अमेरिकी डॉलर में उस अन्य राष्ट्र में रोजगार से पारिश्रामिक हो बशर्ते ऐसा रोजगार उसके शिक्षण से प्रत्यक्ष तौर पर संबंधित हो।

अनुच्छेद 22

अन्य आय

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी निवासी की आय की ऐसी मदें, जहां-कहीं वे अर्जित होती हों, जिन पर इस अनुंबध के पहले अनुच्छेदों में विचार नहीं किया गया है, केवल उस राष्ट्र में कराधेय होंगी।

2. पैराग्राफ 1 के प्रावधान, अनुच्छेद 6 के पैराग्राफ 2 में यथा-परिभाषित अचल संपत्ति से प्राप्त आय से भिन्न आय पर लागू नहीं होंगे, यदि ऐसी आय का प्राप्तकर्ता एक संविदाकारी राष्ट्र का निवासी होने के नाते दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में वहां स्थित किसी स्थायी संस्थापन से प्रभावी रूप से सम्बद्ध है अथवा वहां स्थिति निश्चित स्थान से अन्य राष्ट्रों में स्वतंत्र निजी सेवाओं का निष्पादन रहता हो तथा जिसके संबंध में अधिकार तथा संपत्ति ऐसे स्थाई प्रतिष्ठान अथवा निश्चित स्थान के साथ प्रभावी रूप से संबंधित हो। ऐसे मामले में अनुच्छेद 7 अथवा अनुच्छेद 14, जो भी स्थिति हो, के उपबंध लागू होंगे।

3. पैराग्राफ 1 के प्रावधानों के होते हुए भी, यदि एक संविदाकारी राष्ट्र का एक निवासी घुड़दौड़, कार्ड गेम और अन्य कोई खेल या किसी अन्य प्रकार के या किसी भी प्रकार के जुएं सहित लॉटरी, क्रासवर्ड पहेली, दौड़ के रूप में अन्य संविदाकारी राष्ट्र के अंतर्गत स्रोतों से आय प्राप्त करता है तो ऐसी आय पर अन्य संविदाकारी राष्ट्र में कर लगाया जा सकता है।

अध्याय IV

दोहरे कराधान के निष्काषन की विधियां

अनुच्छेद 23

दोहरे कराधान का निष्काषन

किसी भी संविदाकारी राष्ट्र में प्रभावी कानून संबंधित संविदाकारी राष्ट्र में आय के कराधान लगाया जाएगा केवल वहां छोड़कर जहां प्रतिकूल हेतु अभिव्यक्ति प्रावधान इस समझौते में किए गए हों।

2. पुर्तगाल के मामले में दोहरा कराधान निम्नानुसार हटाया जाएगा :

जहां पुर्तगाल के निवासी पूंजी का अधिकार रखते हैं, जो इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार भारत में करारोपित हो सकते हैं, भारत में दी गई पूंजी के बराबर राशि उस निवासी की पूंजी पर कर से करमुक्त होगी। ऐसी कटौती, हालांकि, आयकर जिसे कटौती करने से पहले आंका गया है, के उस हिस्से से अधिक नहीं होगी जो पूंजी हेतु निर्दिष्ट होती हो जो भारत में करारोपित हो सकती हैं

3. भारत के मामले में दोहरा कराधान निम्नानुसार हटाया जाएगा :

जहां भारत का एक निवासी आय प्राप्त करता हैं, जो, समझौते के प्रावधानों के अनुसार, पुर्तगाल में करारोपित हो सकता हैं, भारत पुर्तगाल में दिए गए आयकर के बराबर राशि को उस निवासी की पूंजी पर कंर से कटौती के तौर पर स्वीकृत करेगा, चाहे प्रत्यक्ष तौर पर हो या स्रोत पर कटौती द्वारा। ऐसी कटौती, हालांकि, आयकर, कटौती के दिए जाने से पूर्व आंके गए अनुसार, के उस हिस्से से अधिक नहीं होगी जो पूंजी हेतु निर्दिष्ट हैं जिस पर पुर्तगाल में कर लगाया जा सकता है।

4. जहां इस समझौते के किसी प्रावधान के अनुसार, एक संविदाकारी राष्ट्र के निवासी द्वारा प्राप्त आय उस राष्ट्र में कर से मुक्त हैं, तो ऐसे राष्ट्र, फिर भी, ऐसे निवासी की शेष आय पर कर की राशि की गणना में, मुक्त आय पर विचार कर सकता हैं।

5. इस अनुच्छेद के पैराग्राफ [2 और 3]2 में निर्दिष्ट एक संविदाकारी राष्ट्र में दिया गया कर शामिल सेवाओं और व्यापारिक लाभ को शामिल करने के लिए लाभांश, ब्याज, रायल्टी और शुल्क पर कर को शामिल किया गया है समझा जाएगा जिसे इस समझौते में निर्दिष्ट किए गए अनुसार दिया गया होता लेकिन वास्तविक निवेश या आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए संविदाकारी राष्ट्रों की कर कटौती या छूट से संबंधित कानूनी प्रावधानों के लिए। इस पैराग्राफ के प्रावधान उन पहले सात वर्षों के लिए लागू होंगे जिसके दौरान यह समझौता लागू होता है। इस अवधि को सक्षम प्राधिकारियों के बीच आपसी समझौता करके आगे बढ़ाया जा सकता है।

अनुच्छेद V

विशेष प्रावधान

अनुच्छेद 24

गैर-भेदभावपूर्ण

1. एक संविदाकारी राष्ट्र के नागरिक किसी कराधान या उससे संबंधित किसी अनिवार्यता के लिए अन्य संविदाकारी राष्ट्र का विषय नहीं हैं, जोकि कराधान और संबंधित अनिवार्यताओं की तुलना में अन्य या और अधिक कष्टदायक है जिसके लिए उसी परिस्थिति में उस अन्य राष्ट्र के नागरिक, निवास के संबंध में विशेषकर, विषय हैं या हो सकते हैं। यह प्रावधान अनुच्छेद 1 के प्रावधान होते हुए भी उन व्यक्तियों के लिए भी लागू होंगे जो एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्र के निवासी नहीं हैं।

2. एक संविदाकारी राष्ट्र के किसी उद्यम के दूसरे संविदाकारी राष्ट्र में स्थित स्थायी संस्थापन पर उस दूसरे राष्ट्र में ऐसा कोई कराधान लागू नहीं किया जाएगा जो उस दूसरे राष्ट्र के उद्यमों पर समरूप कार्यकलापों को करने हेतु लागू होने वाले कराधान से अपेक्षाकृत कम अनुकूल हो। इस प्रावधान की व्याख्या सिविल स्थिति या पारिवारिक उत्तरदायित्वों जो अपने खुद के निवासियों को दी जाती है, के कारण कराधान उद्देश्य के लिए किसी निजी भत्ते, राहत और कटौतियों को अन्य संविदाकारी राष्ट्र के निवासी को देने के लिए संविदाकारी राष्ट्र के दायित्व के तौर पर व्याख्या नहीं की जाएगी।

3. केवल उस स्थिति को छोड़कर जहां अनुच्छेद 9 के पैराग्राफ 1, अनुच्छेद 11 के पैराग्राफ 6 या अनुच्छेद 12 के पैराग्राफ 4 के प्रावधान लागू होते हैं अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक निवासी को एक संविदाकारी राष्ट्र के एक उद्यम द्वारा दिए गए ब्याज, रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क और अन्य अदायगी, ऐसे उद्यम के करयोग्य लाभों को निर्धारित करने के लिए, उन्हीं शर्तों के अंतर्गत कटौतीयोग्य हैं जैसे यह प्रथम-निर्दिष्ट राष्ट्र के निवासी को दिए गए थे।

4. एक संविदाकारी राष्ट्र के उद्यम, जिसकी पूंजी अन्य संविदाकारी राष्ट्र के एक या एक से अधिक निवासियों द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूर्ण या आंशिक तौर पर स्वगत या नियंत्रित है, उससे संबंधित किसी कराधान या किसी अनिवार्यता के लिए प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र का विषय नहीं होंगे जो कराधान की तुलना में अधिक कष्टदापक है और उससे संबंधित अनिवार्यता जिसके प्रथम निर्दिष्ट संविदाकारी राष्ट्र के अन्य वही उद्यम विषय है या हो सकते हैं।

5. इस अनुच्छेद के प्रावधान, अनुच्छेद 2 के प्रावधानों के होते हुए भी, प्रत्येक प्रकार और ब्यौरे के करों पर लागू होगा।

अनुच्छेद 25

आपसी समझौता प्रक्रिया

1. जहां एक व्यक्ति को लगता है कि एक या दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कार्य का परिणाम या कराधान में उसके परिणाम इस समझौते के प्रावधानों के अनुसार नहीं हैं तो वह उन राष्ट्रों के घरेलू कानून द्वारा मुहैया कराए गए उपायों के बावजूद, उस संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी को अपने मामले प्रस्तुत करेगा जिसका वह निवासी है या यदि उसका मामला अनुच्छेद 24 के पैराग्राफ 1 के अंतर्गत आता है तो उस संविदाकारी राष्ट्र को जिसका वह नागरिक है। मामले को समझौते के प्रावधानों के अनुसार कराधान न होने के परिणामस्वरूप कार्य के प्रथम अधिसूचना से तीन वर्षों के अंदर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

2. सक्षम प्राधिकारी, यदि उपस्थित आपत्ति न्यायसंगत हो और यदि यह अपने आप संतोषजनक समाधान पर पहुंच पाने में अक्षम हो, अन्य संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकारी के आपसी समझौते द्वारा कराधान जो समझौते के अनुसार नहीं है, के परिहार को देखते हुए मामले को सुलझाने का प्रयास करेगा। किए गए किसी समझौते को संविदाकारी राष्ट्रों के घरेलू कानून की समय सीमा होते हुए भी कार्यान्वित किया जाएगा।

3. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी समझौते को लागू करने या व्याख्या के कारण उत्पन्न होने वाले संदेहों या किसी परेशानी के लिए आपसी समझौते द्वारा समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। वह दोहरे कराधान को दूर करने के लिए साथ विचार-विमर्श करेंगे यदि समझौते में न दिया गया हो।

4. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद के पूर्ववर्ती पैरग्राफ के अर्थ में एक समझौते पर प्रत्यक्ष पहुंचने के लिए खुद या अपने प्रतिनिधियों वाले संयुक्त आयोग के माध्यम सहित, एक-दूसरे के साथ संपर्क कर सकता है।

अनुच्छेद 263

सूचना का आदान-प्रदान

1. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी ऐसी सूचना (दस्तावेज या दस्तावेज की प्रमाणित प्रतियां सहित) का आदान-प्रदान करेंगे जो इस समझौते के प्रावधानों या संविदाकारी राष्ट्र या उनके राजनीतिक-प्रभाग या स्थानीय प्राधिकारियों की ओर से अधिरोपित प्रत्येक प्रकार के कर और अंकन के विषय में घरेलू कानूनों के प्रशासन या प्रवर्तन के लिए पहले से प्रासंगिक हो जहां तक इस आधार पर कराधान समझौते के विपरीत नहीं है। सूचना का आदान-प्रदान इस समझौते के अनुच्छेद 1 और 2 द्वारा प्रतिबंधित नही है।

2. एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा पैराग्राफ 1 के अंतर्गत प्राप्त किसी सूचना को उसी तरीके से गुप्त समझा जाएगा जैसे सूचना उस संविदाकारी राष्ट्र के घरेलू कानूनों के अंतर्गत प्राप्त की जाती है और इसके निर्धारण या संग्रहण से संबंधित व्यक्तियों या प्राधिकारियों (न्यायालय और प्रशासनिक निकायों सहित) को ही दी जाएगी, पैराग्राफ 1 में संदर्भित करों के संबंध में अपीलों का निर्धारण या अभियोजन, या उक्त की जांच करने वाले को ही दी जाएगी। ऐसे व्यक्ति या प्राधिकारी केवल इस उद्देश्य के लिए ही सूचना का प्रयोग करेंगे। वह सार्वजनिक न्यायालय की कार्यवाहियों या न्यायिक निर्णयों में सूचना को प्रकट कर सकते हैं। पूर्वगामी चीजों के होते हुए भी एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा प्राप्त सूचना को तब अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है जब ऐसी सूचना को दोनों संविदाकारी राष्ट्रों के कानूनों के अंतर्गत ऐसे अन्य उद्देश्यों के लिए प्रयोग की जा सकती है और संविदाकारी राष्ट्रों को देने वाले सक्षम प्राधिकारियों ऐसा प्रयोग कर सकते हैं।

3. किसी भी मामले में पैराग्राफ 1 और के प्रावधान निर्मित नहीं होंगे ताकि एक संविदाकारी राष्ट्र के सक्षम प्राधिकार पर निम्न बाध्यताएं अधिरोपित की जा सके :

क) उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के परिवर्तनशील कानूनों और प्रशासनिक अभ्यास पर प्रशासनिक उपाय

ख) सूचना की आपूर्ति जो कानून के अंतर्गत या उस अथवा अन्य संविदाकारी राष्ट्र के प्रशासन की सामान्य अवधि में प्राप्तनीय नहीं है;

ग) सूचना की आपूर्ति के लिए जो किसी व्यापार, कारोबार, औद्योगिक, वाणिज्यिक या पेशेवर राज या कारोबार प्रक्रिया या सूचना हो उसका प्रकटीकरण लोक नीति (सार्वजनिक अध्यादेश) के विपरीत होगा

4. यदि सूचना इस अनुच्छेद के अनुसार एक संविदाकारी राष्ट्र द्वारा मांगी जाती है तो अन्य संविदाकारी राष्ट्र मांगी गई सूचना को प्राप्त करने के लिए अपनी सूचना एकत्रीकरण उपायों को इस्तेमाल करेगा, भले ही उस संविदाकारी राष्ट्र को अपने स्वयं के कर उद्देश्य के लिए ऐसी सूचना की जरूरत न हो। पूर्ववर्ती वाक्य में शामिल बाध्यता पैराग्राफ 3 की सीमाओं के अनुसार है लेकिन किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि उसका ऐसी सूचना में कोई घरेलू हित नहीं है।

5. किसी भी मामले में ऐसी सीमाओं की व्याख्या केवल इसलिए एक संविदाकारी राष्ट्र को सूचना देने से मना के अधिकार देने के तौर पर नहीं की जाएगी क्योंकि सूचना बैंक, अन्य वित्तीय संस्थान, नामांकित व्यक्ति या एजेंसी के तौर पर कार्य करने वाले व्यक्ति या जिम्मेदार व्यक्ति के पास है या इसलिए क्योंकि यह एक व्यक्ति में स्वामित्व हितों से संबंधित है।

अनुच्छेद 27

संग्रहण सहायता

1. स्ंविदाकारी राष्ट्र अपने संबंधित प्रावधानों और अपने कानूनों और नियामकों के नियमों के अनुसार, इस समझौते द्वारा शामिल करों की वसूली के लिए आपसी सहायता और समर्थन देने के लिए सहमत हुए है जब यह राशियां ऐसी वसूली के लिए सहायता देने वाले संविदाकारी राष्ट्र के कानूनों और नियामकों के अंतर्गत स्पष्ट तौर पर देय है।

2. संविदाकारी राष्ट्रों के सक्षम प्राधिकारी इस अनुच्छेद को लागू करने की विधि को अधिनिर्णित करने के लिए एक-दूसरे के साथ विचार-विमर्श करेंगे यदि उनको लगता है कि करों की वसूली के लिए सहायता देना संभव है।

अनुच्छेद 28

राजनयिक और कौंसुलर पदों के सदस्य

1. इस समझौते में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय कानून के सामान्य नियमों के तहत या विशेष समझौतों के प्रावधानों के तहत राजनयिक मिशन या कौंसुलर पदों के सदस्यों की राजकोषीय विशेषाधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा।

एमएलआई के अनुच्छेद 7 के निम्नलिखित पैराग्राफ 1 एमएलआई को लागू करता है और उस सीमा तक ही समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन करता है जहां वह प्रावधान कथित पैराग्राफ 1 के साथ असंगत होते हैं :

एमएलआई के अनुच्छेद 7 - संधि के दुरूपयोग की रोकथाम

[समझौते] के किसी प्रावधान के होते हुए भी, [समझौते] के अंतर्गत लाभ आय या पूंजी की एक मद के संबंध में नहीं दी जाएगी यदि यह करना उचित हो, सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, कि वह लाभ प्राप्त करना किसी व्यवस्था या लेनदेन का प्रमुख उद्देश्य था जो उस लाभ का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिणाम था, जबतक यह प्रमाणित न हो कि इन परिस्थितियों में उन लाभों को देना उद्देश्य के अनुसार होगा और समझौते के प्रासंगिक प्रावधानों के लिए होगा।

अनुच्छेद 29

प्रभावी होना

1. यह समझौता उस तिथि के बाद 30वें दिन प्रभावी होगा जिस पर इस समझौते के प्रभावी होने के लिए प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र में आवश्यक आंतरिक कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने को इंगित करते हुए राजनायिक टिप्पणियां आदान-प्रदान की गई थीं।

2. यह समझौता लागू होगा :

क) पुर्तगाल में :

i) स्रोत पर कर कटौती के संदर्भ में अगले वर्ष जिसमें यह समझौता प्रभावी हुआ, के बाद के वर्ष में 1 जनवरी को या उसके बाद उपस्थित होते हुए उनको प्रस्तुत करने वाला तथ्य;

ii) अन्य करों के संदर्भ में कि वर्ष जिसमें यह समझौता प्रभावी हुआ के बाद के अगले वर्ष में 1 जनवरी को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले वित्त वर्ष में अर्जित आय;

ख) भारत में :

कैलेंडर वर्ष जिसमें समझौता प्रभावी हुआ, के बाद के 1 अप्रैल को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में

अनुच्छेद 30

समाप्ति

यह समझौता अनिश्चित काल के लिए प्रभावी रहेगा लेकिन कोई भी संविदाकारी राष्ट्र पांचवें वर्ष के बाद जिसमें अधिसूचना दी गई, से किसी कैंलेंडर वर्ष के 30वें जून को या उससे पहले अन्य संविदाकारी राष्ट्र को राजनायिक माध्यमों के जरिए समाप्ति का नोटिस दे सकते हैं और ऐसी स्थिति में यह समझौता प्रभावी नहीं रहेगा

क) पुर्तगाल में :

i) स्रोत पर कर कटौती के संदर्भ में तिथि जिस पर समाप्ति का कथित नोटिस में निर्दिष्ट अवधि समाप्त हुई, के बाद के वर्ष में 1 जनवरी को या उसके बाद उपस्थित होते हुए उनको प्रस्तुत करने वाला तथ्य

ii) अन्य करों के संदर्भ में तिथि जिस पर समाप्ति का कथित नोटिस में निर्दिष्ट अवधि समाप्त हुई, के बाद के बाद के अगले में 1 जनवरी को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले वित्त वर्ष में अर्जित आय

ख) भारत में :

तिथि जिस पर समाप्ति का कथित नोटिस में निर्दिष्ट अवधि समाप्त हुई, के बाद के 1 अप्रैल को या उसके बाद प्रारंभ होने वाले किसी वित्त वर्ष में प्राप्त आय के संदर्भ में

साक्ष्य रूप से जिसके अधोहस्ताक्षरी ने, विधिवत वहां अधिकृत किया, इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं.

11 सितंबर 1998 को हिंदी, पुर्तगाली और अंग्रेजी भाषाओं में प्रतिरूपण किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक है किसी अंतर होने की स्थिति में अंग्रेजी को प्रभावी माना जाएगा।

प्रोटोकाल

आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान के परिहार तथा वित्तीय अपवंचन की रोकथाम के लिए भारतीय गणतंत्र सरकार तथा पुर्तगाली गणतंत्र के बीच समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए, अधोहस्ताक्षरी निम्नलिखित प्रावधानों पर सहमत हुए हैं जो समझौते के अभिन्न अंग होंगे

अनुच्छेद 3 जोड़ें

पैराग्राफ 3 के लिए, समझौते को लागू करते समय संदर्भ का अर्थ वह समय होगा जब आय जो इस समझौते की विषय-वस्तु है, अर्जित होती है।

अनुच्छेद 3 और 23 जोड़ें

पैराग्राफ 1 के लिए, अनुच्छेद 3 और अनुच्छेद 23 का घ), शब्द "कर" में कोई राशि शामिल होगी जो उन करों के संबंध में किसी गलती या चूक के संदर्भ में देययोग्य है जिस पर यह समझौता लागू होता है या जो उन करों के संबंध में अधिरोपित जुर्माने को दर्शाती है।

अनुच्छेद 5 जोड़ें

पैराग्राफ 2 के लिए, अन्यों के लिए भंडारण सुविधा देने वाले एक व्यक्ति के संबंध में वेयरहाउस को एक स्थाई प्रतिष्ठान बनाया गया है, समझा जाएगा।

अनुच्छेद 6 जोड़ें

पैराग्राफ 1 के लिए, यह समझा जाता है कि संविदाकारी राष्ट्र जिसका व्यक्ति संपत्ति से आय प्राप्त कर रहा है, निवासी है वह भी ऐसे आय पर कर का हकदार होगा

अनुच्छेद 7 जोड़ें

पैराग्राफ 3 के लिए, यह सहमति हुई है कि उसमें संदर्भित घरेलू कानूनों के प्रावधान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 44ग से संबंधित है, भारत के मामले में। आगे यह सहमति है कि किसी भी स्थिति में धारा 44ग में संदर्भित शर्तों और सीमाएं इस समझौते के हस्ताक्षर की तिथि को प्रभावी से कम अनुकूल नही होगी।

अनुच्छेद 13 जोड़ें

पैराग्राफ 1 और 4 के लिए, यह सहमति है कि संविदाकारी राष्ट्र जिसका व्यक्ति पूंजीगत प्राप्ति प्राप्त कर रहा है, निवासी है वह ऐसी पूंजीगत प्राप्ति पर कर का हकदार है।

अनुच्छेद 23 जोड़ें

यह समझा जा सकता है कि अनुच्छेद 23 के पैराग्राफ 5 में प्रयुक्त शब्द "आर्थिक विकास" का अर्थ औद्योगिक विकास या आधारिक संरचना का विकास होगा।

अनुच्छेद 24 जोड़ें

1. अनुच्छेद 24 के प्रावधान थोड़ी पूंजीकरण समस्याओं के साथ व्यवहार करने वाले संविदाकारी राष्ट्रों के कर कानूनों के किसी प्रावधान को लागू करने की प्रस्तावना नहीं करते।

2. अनुच्छेद 24 के प्रावधान इस समझ से अर्थ लगाया जाएगा कि जहां तक किए गए वितरण की कटौती का संबंध है प्रत्येक संविदाकारी राष्ट्र प्रमाण के बोझ के संबंध में अपनी प्रक्रिया को लागू कर सकते हैं

3. पैराग्राफ 2 के प्रावधान एक स्थाई प्रतिष्ठान जो अन्य संविदाकारी राष्ट्र की एक कंपनी प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र में उस दर पर जो अधिक से अधिक 10 प्रतिशत की दो दरों के बीच के अंतर की तुलना में प्रथम निर्दिष्ट राष्ट्र की एक ही कंपनी के लाभों पर लगाए गए से अधिक है, के लाभ को वसूलने से एक संविदाकारी राष्ट्र को रोकने के तौर पर नहीं समझा जाएगा।

अनुच्छेद 26 4 को जोड़ें

आपूर्ति और प्राप्तकर्ता एजेंसी अनैतिक प्रवेश, अनैतिक परिवर्तन और अवैध प्रकटीकरण के समक्ष दिए गए निजी डेटा की सुरक्षा हेतु प्रभावी उपाय करने के लिए बाध्य होंगे।

साक्ष्य रूप से जिसके अधोहस्ताक्षरी ने, विधिवत वहां अधिकृत किया, इस प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए हैं.

11 सितंबर 1998 को हिंदी, पुर्तगाली और अंग्रेजी भाषाओं में प्रतिरूपण किया गया, सभी विषय समान रूप से प्रमाणिक है किसी अंतर होने की स्थिति में अंग्रेजी को प्रभावी माना जाएगा।


1. [वर्ग कोष्ठक] और इटैलिक्स के बीच विषय समझौते में प्रयुक्त शब्दावली के साथ संगत किए जाने हेतु एमएलआई के विषय में छोटी शब्दावली को इंगित करता है।

2. अधिसूचना सं. जीएसआर 597(ई), दिनांक 20.09.2005 (भारत के मामले में) द्वारा और Aviso n.231/2005, DR n. 102, I serie-A, de 27 de maio de 2005 (पुर्तगाल के मामले में) द्वारा "1 और 2" के लिए प्रतिस्थापित।

3. अनुच्छेद 26 के विषय को 24 जून, 2017 को हस्ताक्षर किए गए संशोधन प्रोटोकाल के अनुच्छेद I द्वारा संशोधित किया गया था।

4. 24 जून, 2017 को हस्ताक्षर किए गए संशोधित प्रोटोकॉल के अनुच्छेछ II द्वारा शामिल।

फ़ुटनोट