आयकर कानून के तहत सीमा की अवधियाँ
इस भाग में आप आयकर कानून के तहत निर्धारित सीमा की अवधि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है।
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अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
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आयकर कानून के तहत निर्धारित परिसीमन अवधि
आयकर अधिनियम में विभिन्न प्रक्रिया, आवेदन आदि (जैसे आयकर आयुक्त) (अपील) को अपील दाखिल करने के लिए समय-सीमा, घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर को जमा, आय की विवरणी का दाखिलीकरण, आय आदि की लंबित विवरणी का दाखिलीकरण) के संबंध में समय-सीमा को निर्धारित किया है। इस भाग में आप आयकर कानून के तहत विभिन्न प्रक्रियाओं, आवेदन, आदि के लिए निर्धारित सीमा की अवधि के बारे में जानकारी प्राप्त करेगें।
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धारा 2(48) |
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डसके द्वारा जारी किए जाने वाले प्रतावित किसी जीरो कूपन बांड के धारा 2 के वाक्यांश (48) के अंतर्गत अधिसूचना के लिए अवसंरचना पूंजीगत कंपनी अथवा अवसंरचना पूंजी अथवा एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी द्वारा आवेदन |
ऐसे बांड के निगर्मन की तिथि से कम से कम तीन माह पूर्व हालांकि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि वित्त वर्ष जिसमें आवेदन किया है के उत्तरगामी दो वित्त वर्ष के पश्चात् जारी किए जाने वाले बांड की अधिसूचना के लिए आवेदन नहीं किया जाएगा |
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जीरो कूपन बांड की स्थिति में लेखांकित प्रत्येक वर्ष में निवेशित राशि को निर्दिष्ट करते हुए चार्टर्ड द्वारा विवरण की प्रस्तुति |
प्रत्येक वित्त वर्ष की समाप्ति से दो माह की अवधि के भीतर |
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धारा 9(1) |
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एक विदेशी कंपनी/उद्यम में शेयर या ब्याज के किसी स्थानांतरण से संबंधित प्रपत्र सं. 94घ में सूचना की इलैक्ट्रानिक प्रस्तुति |
वित्त वर्ष, जिसमें ऐसा कोई स्थानांतरण होता है, की समाप्ति से 90 दिनों के अंदर (लेनदेन के 90 दिनों के अंदर जहां लेनदेन का भारतीय उद्यम के संबंध में प्रबंधन के अधिकार को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्थानांतरण को प्रभावित करता है) |
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धारा 9क |
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योग्य निवेश फंड से संबंधित डिजिटल हस्ताक्षर के साथ प्रपत्र 3गङट की अपलोडिंग |
वित्त वर्ष की समाप्ति से 90 दिनों की अवधि के भीतर |
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योग्य निवेश फंड द्वारा फंड प्रबंधक को दिए गए पारिश्रमिक के संदर्भ में एएलपी से संबंधित प्रपत्र सं. 3गङ´ में चार्टड अकांटेंट की ओर से रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि को या उससे पहले |
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धारा 10(21) |
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प्रपत्र सं. 10 को अपलोड करते हुए भविष्य के आवेदन के लिए संचित/पृथक आय के ब्यौरे की प्रस्तुति (एक अनुसंधान संघ द्वारा) |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति के लिए अनुमत समय की समाप्ति से पहले |
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धारा 10 (23 ग) धारा 10 ¼23ग(iv)/(v)/(vi)/(viक) में संदर्भित उद्यमों द्वारा अनुमति देने के लिए आवेदन करना |
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यदि उद्यम को 31.03.2021 को या उससे पहले अनुमोदित किया गया हो |
25.11.2022 को या उससे पहले |
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यदि उद्यम अनुमोदित हो और ऐसी अनुमति की अवधि समाप्त होने वाली हो |
कथित अवधि की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले |
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यदि उद्यम को अनंतिम तौर पर अनुमति दी गई हो |
अनंतिम अनुमति की अवधि की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले या इसकी गतिविधियों के प्रारंभ होने के 6 महीनों के अंदर |
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अन्य किसी मामले में (30.09.2023 तक लागू) |
निर्धारण वर्ष जहां से कथित अनुमति मांगी गई है, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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कोई अन्य मामला (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
निर्धारण वर्ष जहां से कथित अनुमति मांगी गई है, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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कोई भी अन्य मामला (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी इकाई की गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसे आवेदन की तारीख को या उससे पहले समाप्त होने किसी वर्ष के लिए धारा 10(23ग) या धारा 11 की प्रयोज्यता के कारण किसी भी आय (या भाग) को बाहर नहीं किया गया है। |
गतिविधियों के शुरू होने के बाद किसी भी समय |
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धारा 10 (23 ग) स्वीकृति प्रदान करने का आदेश पारित करना |
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यदि उद्यम को 31.03.2021 को या उससे पहले अनुमोदित किया गया हो |
उस महीने के अंत से 3 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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यदि उद्यम अनुमोदित हो और ऐसी अनुमति की अवधि समाप्त होने वाली हो |
उस महीने के अंत से 6 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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यदि उद्यम को अनंतिम तौर पर अनुमति दी गई हो |
उस महीने के अंत से 6 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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अन्य किसी मामले में (30.09.2023 तक लागू ) |
उस महीने के अंत से 1 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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कोई अन्य मामला (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
उस महीने के अंत से 1 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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कोई भी अन्य मामला (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी इकाई की गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसे आवेदन की तारीख को या उससे पहले समाप्त होने किसी वर्ष के लिए धारा 10(23ग) या धारा 11 की प्रयोज्यता के कारण किसी भी आय (या भाग) को बाहर नहीं किया गया है। |
उस महीने के अंत से 6 महीने के भीतर जिसमें आवेदन प्राप्त होता है |
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धारा 10 (23 ग) |
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खातों का अंकेक्षण करवाना और अंकेक्षण रिपोर्ट प्रपत्र सं. 10खख में अपलोड करना |
धारा 139(1) के तहत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि से एक महीने पहले |
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प्रपत्र सं. 10 अपलोड करना - धारा 10(23ग) के तीसरे परंतुक के स्पष्टीकरण 3(क) के तहत उपलब्ध विकल्प का प्रयोग |
धारा 139(1) के तहत निर्दिष्ट देय तिथि से 2 महीने पहले |
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धारा 10क |
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धारा 10क के अंतर्गत किए गए कटौती संबंधी को प्रमाणित करते हुए अंकेक्षण रिपोर्ट |
धारा 44कख में सदंर्भित निर्दिष्ट तिथि से पहले |
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धारा 10क के तहत कर छूट का लाभ न उठाने के लिए किसी भी मुक्त व्यापार क्षेत्र में स्थित औद्योगिक उपक्रम के संबंध में करदाता द्वारा घोषणा प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के तहत आयकर विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से पहले |
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धारा 10 ख(8) धारा 139(1) के तहत निर्दिष्ट देय तिथि से 2 महीने पहले |
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100 फीसदी निर्यात उन्मुखी उपक्रम के संबंध में धारा 10 ख के तहत कर छूट का लाभ न उठाने के लिए, करदाता द्वारा घोषणा प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के तहत आयकर विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि से पहले |
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धारा 11(1), स्पष्टीकरण |
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प्रपत्र सं. 9क को अपलोडिंग करते हुए धारा 11(1) के स्पष्टीकरण के अंतर्गत उपलब्ध विकल्प का प्रयोग |
धारा 139(1) के तहत निर्दिष्ट देय तिथि से 2 महीने पहले |
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धारा 11(2) |
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प्रपत्र सं. 10 को अपलोडिंग करते हुए भविष्य के आवेदन के लिए संचित/पृथक आय के ब्यौरे की प्रस्तुति |
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धारा 12क धारा 11/12 के अंतर्गत छूट का दावा करने के लिए पंजीकरण हेतु आवेदन करना |
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न्यास या संस्थान जो 31.03.2021 को या उससे पहले धारा 12क/12कक के अंतर्गत पंजीकृत है |
25.11.2022 को या उससे पहले |
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न्यास या संस्थान जो धारा 12कख के अंतर्गत पंजीकृत है और कथित पंजीकरण की अवधि समाप्त होने वाली है |
उक्त अवधि की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले |
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न्यास या संस्थान जो धारा 12कख के अंतर्गत अनंतिम तौर पर पंजीकृत है और उक्त पंजीकरण की अवधि समाप्त होने वाली है |
निम्न मे से जो पहले हो : अनंतिम अनुमति की अवधि की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले या • इसकी गतिविधियों के प्रारंभ होने के 6 महीनों के अंदर |
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न्यास या संस्थान जो धारा 11(7) के पहले परंतुक के कारण निष्क्रिय हो चुका हो |
निर्धारण जहां से कथित पंजीकरण सक्रिय करने के लिए मांगा गया है, के प्रारंभ होने से कम से कम 6 महीने पहले |
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अन्य किसी मामले में (30.09.2023 तक लागू) |
निर्धारण वर्ष जहां से पंजीकरण की मांग की गई हो, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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किसी अन्य मामले में (01-10-2023 से लागू) जहां ट्रस्ट/संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
निर्धारण वर्ष जहां से पंजीकरण की मांग की गई हो, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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किसी अन्य मामले में (01-10-2023 से लागू) जहां ट्रस्ट/संस्था की गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसे आवेदन की तिथि को या उससे पहले समाप्त होने वाले किसी पिछले वर्ष के लिए धारा 11/12 की प्रयोज्यता के कारण कोई आय (या भाग) बाहर नहीं की गई है। |
किसी भी समय इसकी गतिविधियों की शुरुआत के बाद |
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खातो की लेखा परीक्षा करना और प्रपत्र सं. 10ख/10खख में लेखा परीक्षा रिपोर्ट को अपलोड करना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय विवरणी प्रस्तुति की देय तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 12कख - आयकर आयुक्त या प्रधान आयकर आयुक्त द्वारा आदेश पारित करना |
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न्यास या संस्थान जो 31.03.2021 को या उससे पहले धारा 12क/12कक के अंतर्गत पंजीकृत है |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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न्यास या संस्थान जो धारा 12कख के अंतर्गत पंजीकृत है और कथित पंजीकरण की अवधि समाप्त होने वाली है। |
तिमाही जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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न्यास या संस्थान जो धारा 12कख के अंतर्गत अनंतिम तौर पर पंजीकृत है |
तिमाही जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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न्यास या संस्थान जो धारा 11(7) के पहले परंतुक के कारण निष्क्रिय हो चुका हो |
तिमाही जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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न्यास या संस्थान ने उन संशोधनों को अपनाया हो या संशोधन किए हो जो पंजीकरण की शर्तों की पुष्टि न करता हो |
तिमाही जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ है, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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किसी अन्य मामले में (01-10-2023 से लागू) जहां ट्रस्ट/संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 1 महीने के अंदर |
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किसी अन्य मामले में (01-10-2023 से लागू) जहां ट्रस्ट/संस्था की गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसे आवेदन की तिथि को या उससे पहले समाप्त होने वाले किसी पिछले वर्ष के लिए धारा 11/12 की प्रयोज्यता के कारण कोई आय (या भाग) बाहर नहीं की गई है। |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 6 महीने के अंदर |
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धारा 33कख |
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खातों का अंकेक्षण कराना और अंकेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 33कख |
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खातों का अंकेक्षण कराना और अंकेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 35 |
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धारा 35 (1) के अंतर्गत स्वीकृति देने के लिए धारा 35 (1) के प्रथम प्रावधान के अंतर्गत किया गया आदेश को स्वीकृत/निरस्त करने का आवेदन |
महीने के जिसमें ऐसा आवेदन प्राप्त हुआ था की समाप्ति से 12 महीने के भीतर |
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धारा 35(2कक) |
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राष्ट्रीय प्रयोगशाला आदि द्वारा प्रत्येक अनुमोदित कार्यक्रम के लिए वार्षिक अंकेक्षित खातों की प्रस्तुति |
प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर |
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अनुमोदित कार्यक्रमों के लिए खातों के अंकेक्षित ब्यौरे की प्रति प्रस्तुत करना |
समाप्ति के 6 महीनों के अंदर |
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प्रपत्र 3गज में निर्धारित प्राधिकारी द्वारा आदेश पारित करना |
आवेदन की प्राप्ति के 2 महीनों के अंदर |
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धारा 35(2कख) |
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प्रपत्र सं. 3गठ के भाग क में घरेलू अनुसंधान सुविधा के संबंध में निर्धारित प्राधिकारी द्वारा रिपोर्ट की इलैक्ट्रानिक प्रस्तुति |
अनुमति देने के 120 दिनों के अंदर |
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सचिव, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभागके प्रपत्र सं. 3गठक में अंकेक्षित खातों की प्रति जमा करना |
आय की विवरणी को जमा करने की देय तिथि को या उससे पहले |
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प्रपत्र सं. 3 गठ के भाग ख में भारित कटौती के लिए योग्य और घरेलू अनुसंधान पर किए गए व्यय के योग्य निर्धारित प्राधिकारी द्वारा रिपोर्ट की इलैक्ट्रानिक प्रस्तुति |
अंकेक्षण रिपोर्ट को जमा करने के 120 दिनों के अंदर |
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धारा 35कखक(3) |
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धारा 35कखक के अंतर्गत निर्धारिती को दी गई और दावा की गई कटौती की निरस्ती यदि तत्पश्चात् कथित धारा में निर्दिष्ट प्रावधानों का अनुपालन न कर पाया हो |
पिछले वर्ष जिसमें धारा 35कखक में संदर्भित शर्तों के अनुपालन की विफलता हुई हो, की समाप्ति से 4 वर्षों के अंदर |
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धारा 35घ/35ङ |
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खातों की लेखा परीक्षा करना और प्रपत्र सं. 3कङ में लेखापरीक्षा रिपोर्ट अपलोड करना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करने की देय तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 43(5) |
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ऐसे लेनदेन के संदर्भ में स्टाक एक्सचेंज द्वारा प्रपत्र 3खख में मासिक विवरण प्रस्तुत करना जिसमें पद्धति में पंजीकरण के बाद क्लाइंट कोड संशोधित किया गया हो |
प्रत्येक महीने के अंतिम दि से 15 दिनों के अंदर |
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धारा 44कख |
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लेखाकार द्वारा लेखों का अंकेक्षण कराना और रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
धारा 139(1) के तहत आयकर विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तिथि |
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धारा 44घक |
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धारा 44घक के रॉयल्टी प्रावधानों द्वारा गिनी गई आय को प्रमाणित करते हुए अंकेक्षण रिपोर्ट |
धारा 139(1) के अंतग्रत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 45(4) |
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प्रपत्र सं. 5ग अपलोड करते हुए निर्दिष्ट उद्यम के साथ शेष पूंजीगत परिसंपत्ति से संबंधित आय के विवरण के ब्यौरे को प्रस्तुत करना |
आय की विवरणी को प्रस्तुत करने की देय तिथि को या उससे पहले |
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धारा 50ख |
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धारा 44घक के रॉयल्टी प्रावधानों द्वारा गिनी गई आय को प्रमाणित करते हुए अंकेक्षण रिपोर्ट |
धारा 139(1) के अंतग्रत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 80छ(5) के अंतर्गत अनुमति के लिए आवेदन करना |
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यदि उद्यम को 31.03.2021 को या उससे पहले अनुमोदित किया गया हो |
25.11.2022 को या उससे पहले |
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अनुमोदन का नवीनीकरण यदि इकाई नई अनुमोदन योजना के तहत अनुमोदित है और ऐसी स्वीकृति की अवधि समाप्त होने वाली है |
इस तरह की अनुमति की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले |
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अनंतिम अनुमोदन का नियमित अनुमोदन में परिवर्तन |
निम्न मे से जो पहले हो : अनंतिम अनुमति की अवधि की समाप्ति से कम से कम 6 महीने पहले या इसकी गतिविधियों के प्रारंभ होने के 6 महीनों के अंदर |
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अनंतिम स्वीकृति (30-09-2023 तक लागू) |
निर्धारण वर्ष जहां से कथित अनुमति मांगी गई है, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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अनंतिम अनुमोदन (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
निर्धारण वर्ष जहां से कथित अनुमति मांगी गई है, के प्रासंगिक पिछले वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम 1 महीने पहले |
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प्रत्यक्ष नियमित अनुमति (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसे उद्यम की गतिविधियां शुरू हो गई हैं और ऐसे आवेदन की तिथि को या उससे पहले समाप्त होने वाले किसी पिछले वर्ष के लिए धारा 11/12 की प्रयोज्यता के कारण कोई आय (या भाग) बाहर नहीं की गई है। |
किसी भी समय इसकी गतिविधियों की शुरुआत के बाद |
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आयकर आयुक्त या मुख्य आयकर आयुक्त द्वारा आदेश को पारित करना |
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यदि उद्यम को 31.03.2021 को या उससे पहले अनुमोदित किया गया हो |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 3 महीनों के अंदर |
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अनुमोदन का नवीनीकरण यदि इकाई नई अनुमोदन योजना के तहत अनुमोदित है और ऐसी स्वीकृति की अवधि समाप्त होने वाली है |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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अनंतिम अनुमोदन का नियमित अनुमोदन में परिवर्तन |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 6 महीनों के अंदर |
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अनंतिम अनुमोदन (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसी संस्था की गतिविधियां शुरू नहीं हुई हैं |
महीने जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 1 महीने के अंदर |
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प्रत्यक्ष नियमित अनुमति (01-10-2023 से लागू) जहां ऐसे उद्यम की गतिविधियां शुरू हो गई हैं । |
तिमाही जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से गिने गए 6 महीने के अंदर |
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धारा 80छ(5) |
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प्रपत्र 10खघ में दान के ब्यौरे या प्रपत्र 10खङ में दान के प्रमाणपत्र की प्रस्तुति |
वर्ष जिसमें उद्यम द्वारा दान प्राप्त है, के बाद के तुरंत बाद के 31 मई को या उसके बाद |
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धारा 80ञञकक |
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कटौती का दावा करने के लिए प्रपत्र सं. 10घक में रिपोर्ट की प्रस्तुति |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि से एक महीने पहले |
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धारा 80ननख |
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भारत के बाहर अर्जित परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा, रॉयल्टी या कॉपीराइट फीस के माध्यम से होने वाली आय को भारत में प्राप्त करना अथवा लाना |
उस वर्ष के अंत से 6 माह के भीतर या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर जैसा कि इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमति दी जाए। |
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धारा 80ददख |
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भारत के बाहर अर्जित परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा, पेटेंट पर रॉयल्टी के माध्यम से होने वाली आय को भारत में प्राप्त करना अथवा लाना |
उस वर्ष के अंत से 6 माह के भीतर या ऐसी विस्तारित अवधि के भीतर जैसा कि इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमति दी जाए। |
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धारा 90/90क/91 |
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विदेशी कर क्रेडिट के संदर्भ में नियम 128 में संदर्भित ब्यौरे या प्रमाणपत्र और प्रपत्र सं. 67 की प्रस्तुति |
धारा 139(1) या धारा 139(4) के अंतर्गत दाखिल की गई विवरणी : • प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले धारा 139(1) या धारा 139(8क) के अंतर्गत दाखिल की गई विवरणी : • प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति पर या उससे पहले |
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धारा 92गक(3क) |
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हस्तांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी द्वारा धारा 92गक(3) के तहत आदेश पारित करना |
धारा 153 या धारा 153ख, जैसी भी स्थिति हो, में निर्दिष्ट परिसीमन अवधि से कम से कम साठ दिन पूर्व निर्धारण या पुनर्निर्धारण या पुन:गणना या नये सिरे से निर्धारण के लिये आदेश जारी करने की अवधि समाप्त हो रही हो। नोट 1 यदि आदेश देने के लिए टीपीओ के पास उपलब्ध समय निम्न सम को छोड़कर साठ दिनों से कम है- जिसके लिए निर्धारण कार्यवाही स्थगित रही हो; अथवा - विदेशी क्षेत्राधिकार से सूचना प्राप्त करने में लगा समय,साठ दिनों से कम हो, तो ऐसी शेष अवधि को 60 दिनों तक बढ़ा दिया जाएगा। [वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा, 1-6-2016 से प्रभावी, अंतःस्थापित] नोट 2 : किसी न्यायालय के निर्णय अथवा आदेश के होते हुए भी, आदेश पारित करने की साठ-दिवसीय अवधि की गणना निम्न प्रकार से की जाएगी : (क) जहाँ परिसीमा अवधि किसी गैर-अधिवर्ष में 31 मार्च को समाप्त होती है, वहाँ आदेश उस वर्ष के 30 जनवरी तक पारित किया जा सकेगा; (ख) जहाँ परिसीमा अवधि किसी अधिवर्ष में 31 मार्च को समाप्त होती है, वहाँ आदेश 31 जनवरी तक पारित किया जा सकेगा; तथा (ग) जहाँ परिसीमा अवधि किसी वर्ष के 31 दिसंबर को समाप्त होती है, वहाँ आदेश उस वर्ष के 1 नवंबर तक पारित किया जा सकेगा।
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धारा 92गघ(1) |
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मूल्य निर्धारण समझौते (1-7-2012 से लागू) के अनुसार और उस तक सीमित संशोधित विवरणी प्रस्तुत करना |
उस माह की समाप्ति से 3 माह के भीतर जिसमें अग्रिम कीमत समझौता किया गया था |
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धारा 92गघ(5)(क) |
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धारा 92गघ(3) के तहत संशोधित विवरणी (1-7-2012 से लागू) के संबंध में आदेश पारित करना |
जिस वित्तीय वर्ष में संशोधित विवरणी प्रस्तुत की गयी है उसकी समाप्ति से 1 वर्ष के भीतर |
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धारा 92घ |
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राजस्व अधिकारियों द्वारा आवश्यक जानकारी/ दस्तावेज प्रस्तुत करना |
इस संबंध में जारी नोटिस के प्राप्त होने की तिथि से 10 दिनों की अवधि के भीतर, और ऐसी अवधि को 30 दिनों से अधिक की अवधि के लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है |
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धारा 92ड़ |
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लेखाकार की रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के 31 अक्टूबर को |
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धारा 115खक |
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कुछ घरेलू कंपनियों द्वारा 25 प्रतिशत की रियायती दर पर चुने जाने वाला विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की पहली विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खकक |
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कुछ घरेलू कंपनियों द्वारा 22 प्रतिशत की रियायती दर पर चुने जाने वाला विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खकख |
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नए विनिर्माण घरेलू कंपनियों द्वारा 15 प्रतिशत की रियायती कर दर को चुनने का विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की पहली विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खकग(6) |
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व्यक्ति, एचयूएफ, एओपी, बीओआई, कृत्रिम न्यायिक व्यक्ति द्वारा पुरानी कर व्यवस्था को चुनने का विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खकघ |
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घरेलू सहकारी-संस्था द्वारा 22 प्रतिशत की रियायती कर की दर को चुनने का विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खकड |
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नए विनिर्माण, एक निवासी सहकारी समिति द्वारा 15 % रियायती कर दर का विकल्प चुनने का विकल्प |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की पहली विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115खखच(3) |
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धारा 115खखच(1) के प्रावधानों के अनुसार किसी पिछले वर्ष के लिए भारत में विकसित और पंजीकृत पेटेंट के संबंध में रॉयल्टी आय के कराधान का विकल्प चुनना |
धारा 139(1) के अंतर्गत आय की विवरणी की प्रस्तुति की अंतिम तिथि को या उससे पहले |
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धारा 115ञख(4) |
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एक कंपनी के मामले में बही लाभ की गणना से संबंधित प्रपत्र सं. 29ख में एक चार्टेड अकाउंटेंट से एक प्रमाणपत्र की प्राप्ति |
धारा 44कख में सदंर्भित निर्दिष्ट तिथि से पहले |
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धारा 115-ण(3) |
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घरेलू कंपनियों के वितरित लाभ पर कर जमा करना |
लाभांश की घोषणा, वितरण या भुगतान जो भी पहले हो, की तिथि से 14 दिनों के भीतर |
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धारा 115ञछ(3) |
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भारतीय रिजर्व बैंक की योजना या सरकार की अधिसूचना (कर निर्धारण वर्ष 2013-14 से लागू) की शर्तों का पालन न करने की स्थिति में धारा 115ञछ(1) के तहत दावा किए गए लाभ, छूट या राहत को वापस लेने के लिए आय की पुनर्गणना करना। |
पिछले वर्ष जिसमें शर्तों के साथ विफलता का अनुपालन हुआ, की समाप्ति से 4 वर्षों के अंदर |
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धारा 115द (3) |
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यूटीआई/म्यूचुअल फंड की वितरित आय पर कर को जमा करना |
वितरण अथवा आय के भुगतान की तिथि से 14 दिनों के भीतर, जो भी पहले हो |
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धारा 115द (3क) (प्रभावी निर्धारण वर्ष 2015-16 से हटाना) |
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यूनिट धारकों को वितरित आय का विवरण देते हुए निर्धारित आयकर प्राधिकरण को निर्धारित प्रपत्र में विवरण प्रस्तुत करना, उस पर आदि का भुगतान |
प्रत्येक वर्ष में 15 सितम्बर को अथवा पहले |
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धारा 115नक (2) (1/06/2013 से) |
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प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट द्वारा वितरित आय की स्थिति में सरकार के क्रेटिड हेतु कर को जमा करना |
वितरण अथवा आय के भुगतान की तिथि से 14 दिनों के भीतर, जो भी पहले हो |
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धारा 115नक (3) (प्रभावी निर्धारण वर्ष 2015-16 से समाप्त) |
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निर्धारिती आयकर प्राधिकरण को प्रस्तुत करने हेतु प्रतिभूतिकरण ट्रस्ट द्वारा वितरित आय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति, निर्धारित प्रपत्र में विवरण तथा वर्ष के दौरान निवेशकों हेतु वितरित आय की राशि का ब्यौरा देते हुए निर्धारित प्रारूप में स्थापित, उस पर दिया गया कर तथा अन्य प्रासंगिक विवरण |
प्रत्येक वर्ष में 15 सितम्बर को अथवा पहले |
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धारा 115प(2) |
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जोखिम पूंजी कंपनी/निधि की ओर से आय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी व्यक्ति और जोखिम पूंजी कंपनी/निधि द्वारा ऐसी आय प्राप्त करने वाले व्यक्ति को व निर्धारित आयकर प्राधिकरी को, निर्धारित फार्म में विवरण एवं निर्धारित तरीके से सत्यापित करते हुये, वर्ष के दौरान आय की प्रकृति का विवरण व अन्य विवरण जैसा कि निर्दिष्ट किया जा सकेगा, प्रस्तुत किया जाना। |
जिस वर्ष ऐसी आय वितरित की जाती है, के बाद आने वाले वित्तीय वर्ष का नवम्बर 30 |
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धारा 115पक |
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यूनिट धारक को व्यापार न्यास की ओर से वितरित आय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी कोई व्यक्ति को यूनिट धारक तथा निर्धारित आयकर प्राधिकरण को विवरण प्रस्तुत करना होगा, निर्धारितानुसार ऐसे प्रारूप तथा ढ़ंग में, वर्ष के दौरान दी गई आय के प्रकार का विवरण तथा निर्धारितानुसार अन्य प्रासंगिक विवरण देते हुए |
निर्धारित किया जाना है |
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धारा 115फत |
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टन भार कर प्रणाली (टीटीएस) अपनाना |
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- मौजूदा अर्हता प्राप्त कंपनी |
1-10-2004 और 31-12-2004 के बीच |
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- 1-1-2005 के बाद निगमित कंपनी और निगमित किये जाने के बाद |
3 माह के भीतर पात्र होने वाली कंपनी |
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- मौजूदा कंपनी जो 1-1-2005 के बाद एक पात्र कंपनी बन जाती है |
उसके पात्र कंपनी बनने के बाद 3 माह के भीतर |
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आईएफएससी की एक इकाई, जिसने धारा 80ठक के तहत कटौती का लाभ उठाया है |
उस तिथि से तीन महीनों के अंदर जहां से धारा 80ठक के अंतर्गत कटौती बंद हो जाती है |
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धारा 115फत(4) |
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धारा 115फत की उप-धारा (4) के तहत संयुक्त आयुक्त द्वारा आदेश पारित किया जाना |
उस माह के अंत से एक माह के भीतर जिसमें धारा 115फत(1) के तहत आवेदन प्राप्त किया गया था टिप्पणी : यदि धारा 115फत(1) के अंतर्गत आवेदन 1 अप्रैल, 2025 को या उसके बाद प्राप्त होता है, तो आदेश उस तिमाही के अंत से तीन महीने के भीतर जारी किया जाना चाहिए जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ था। |
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धारा 124(3) |
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कर निर्धारण अधिकारी के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देना |
क) जहां विवरणी धारा 139(1) के तहत दाखिल की जाती है, धारा 142(1) या 143(2) के तहत नोटिस जारी किये जाने की तिथि से एक माह की समाप्ति के भीतर या निर्धारण पूर्ण किये जाने से पूर्व, जो भी पहले हो ख) जहां कोई विवरणी दाखिल नहीं की जाती है धारा 142(1) के तहत जारी नोटिस या धारा 148 के तहत विवरणी दाखिल किये जाने या धारा 144 के तहत कारण बताने कि क्यों सबसे अच्छा निर्णीत निर्धारण न किया जाय, जो भी पहले हो में अनुमन्य समय की समाप्ति से पहले |
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धारा 131 (3) |
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प्रधान मुख्य आयुक्त अथवा मुख्य आयुक्त अथवा प्रधान महानिदेशक/महानिदेशक प्रधान आयुक्त अथवा/आयुक्त/अथवा प्रधान निदेशक/निदेशक का अनुमोदन प्राप्त किए बिना निर्धारण अधिकारी/सहायक निदेशक द्वारा जब्त लेखों या दस्तावेजों का अवधारण |
15 दिन से अनधिक (छुट्टियों के अनन्य) |
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धारा 132(8) |
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मुख्य आयुक्त/आयुक्त/महानिदेशक या निदेशक/ प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान महानिदेशक/प्रधान महानिदेशक/प्रधान आयुक्त/प्रधान निदेशक की अनुमति के बिना प्राधिकृत अधिकारी द्वारा धारा 132(1) या 132(1क) के अंतर्गत जब्त किए गए बही खता या अन्य खातों को बनाए रखना |
तिमाही के अंत से 1 महीने जिसमें धारा 143(3) या धारा 144 धारा 147 या धारा 153क या धारा 158खग(ख) के तहत मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन या पुनर्गणना का आदेश दिया जाता है |
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धारा 132 (8क) |
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अवधि जिसके लिये धारा 132 के तहत पारित आदेश लागू है |
आदेश की तिथि से 60 दिन |
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धारा 132(9क) |
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क्षेत्राधिकार रखने वाले आईटीओ को, बही आदि सौंपना |
तलाश के लिए अंतिम प्राधिकरण निष्पादित किये जाने की तिथि से 60 दिन |
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धारा 132(9ग) |
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धारा 132(9ख) के अंतर्गत दिए गए अनंतिम अटेचमेंट आदेश की समाप्ति |
ऐसे आदेश की तिथि से 6 महीनों की समाप्ति के बाद |
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धारा 132(9घ) |
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संपत्ति की उचित बाजार कीमत के अनुमान के लिए मूल्यांकन अधिकारी को संदर्भ करना |
अंतिम तलाशी का प्रमाणीकरण किए जाने की तिथि से 60 दिनों के अंदर |
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धारा 132ख(1) द्वितीय परंतुक |
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मौजूदा देयताओं की वसूली के बाद जब्त संपत्ति को मुक्त करना |
धारा 132/132क के तहत प्राधिकरण/मांग निष्पादित किये जाने की तिथि से 120 दिनों के भीतर |
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धारा 132ख (1) का पहला परंतुक |
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संपत्ति के अधिग्रहण का स्रोत व संपत्ति की प्रकृति को समझाते हुये संपत्ति को मुक्त करने के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन करना |
जिस माह में संपत्ति जब्त की गयी थी, उसकी समाप्ति से 30 दिनों के भीतर |
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धारा 133क(3) |
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प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान महानिदेशक/मुख्य आयुक्त/महानिदेशक प्रधान आयुक्त/प्रधान निदेशक/आयुक्त/निदेशक के अनुमोदन के बिना जब्त बही लेखों, दस्तावेजों को आयकर प्राधिकरी द्वारा धारित किया जाना |
15 दिन से अनधिक (छुट्टियों के अनन्य) |
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धारा 139(1) |
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निर्धारिती, जिसमें फर्म के साझेदार अथवा ऐसे साझेदार का पति/पत्नी (यदि धारा 5क ऐसे पति/पत्नी पर लागू होती है) शामिल हैं। नोट : यदि धारा 92ङ के उपबंध लागू होते हैं। |
30 नवंबर |
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(i) कंपनी (ii) निर्धारिती (एक कंपनी को छोड़कर) जिसके खाते इस अधिनियम या वर्तमान में प्रभावी किसी अन्य कानून के अंतर्गत लेखापरीक्षित किए जाने आवश्यक हो या(iii) ऐसी फर्म का साझेदार जिसके खाते इस अधिनियम अथवा वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन लेखापरीक्षित किए जाने अपेक्षित हों; अथवा ऐसे साझेदार का पति/पत्नी (यदि धारा 5क ऐसे पति/पत्नी पर लागू होती है)। नोट : यदि धारा 92ङ के प्रावधान लागू न हो
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31 अक्टूबर |
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(i) ऐसा निर्धारिती जिसकी आय व्यवसाय अथवा पेशे के लाभ एवं प्राप्ति से हो तथा जिसके खाते इस अधिनियम अथवा वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंर्तगत लेखापरीक्षित किए जाने अपेक्षित न हो |
31 अगस्त |
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(ii) ऐसी फर्म का साझेदार जिसके खाते इस अधिनियम अथवा वर्तमान में प्रवृत्त किसी अन्य कानून के अंर्तगत लेखापरीक्षित किए जाने अपेक्षित न हों अथवा ऐसे साझेदार का पति/पत्नी (यदि धारा 5क ऐसे पति/पत्नी पर लागू होती है)। |
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नोट : यदि धारा 92ङ के प्रावधान लागू न हो |
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अन्य कोई निर्धारिती |
31 जुलाई |
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धारा 139(3) |
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हानि की विवरणी दाखिल करना |
धारा 139(1) के तहत अनुमन्य समय के भीतर |
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धारा 139 (4) |
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आय की विलम्बित विवरणी दाखिल करना |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 1 वर्ष के भीतर या निर्धारण पूरा किये जाने से पूर्व, जो भी पहले हो |
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धारा 139 (4क) |
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पूर्ण या आंशिक रूप से धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों आदि, के लिए न्यास/कानूनी बाध्यता के तहत किसी व्यक्ति द्वारा धारित संपत्ति जिसके संबंध में आय प्राप्त करने के लिए के एक प्रतिनिधि निर्धारिती के रूप में निर्धारणीय है और यदि कुल आय कर के दायरे में न वाली अधिकतम राशि से अधिक है ऐसे प्रत्येक व्यक्ति द्वारा विवरणी दाखिल किया जाना |
धारा 139(1) के तहत अनुमन्य समय के भीतर |
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धारा 139 (4ख) |
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प्रत्येक राजनैतिक दल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा विवरणी दाखिल किया जाना |
धारा 139(1) के तहत अनुमन्य समय के भीतर |
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धारा 139 (4ग) |
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निम्न प्रत्येक द्वारा विवरणी दाखिल किया जाना-(क) धारा 10(21) में निर्दिष्ट अनुसंधान संगठन, (ख) धारा 10(22ख) में निर्दिष्ट समाचार एजेंसी (ग) धारा 10(23क) में निर्दिष्ट संघ या संस्था (घ) धारा 10(23ख) में निर्दिष्ट संस्थान (ड़) धारा 10(23ग) के उप-खंड (iiiad), (iiiae), (iv), (v), (vi) या (via) में निर्दिष्ट निधि/संस्था/न्यास/ विश्वविद्यालय/ अन्य शैक्षणिक संस्थान/चिकित्सा संस्थान (च) धारा 10(24) के उप-खंड (क) या (ख) में निर्दिष्ट, ट्रेड यूनियन/एसोसिएशन (छ) धारा 10(46) में निर्दिष्ट को भी निकाय/न्यास/ प्राधिकरण और (ज) धारा 10(47) में निर्दिष्ट अवसंरचना ऋण निधि, यदि कुल आय धारा 10 के प्रावधानों को लागू किए बिना कुल आय कर के दायरे में न वाली अधिकतम राशि से अधिक है। |
धारा 139(1) के तहत अनुमन्य समय के भीतर |
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धारा 139 (4घ) |
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धारा 35(1)(ii) और 35(1)(iii) में निर्दिष्ट प्रत्येक विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्था द्वारा विवरणी दाखिल किया जाना जिनके लिये किसी अन्य प्रावधान के तहत आय या हानि की विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है। |
धारा 139(1) के तहत अनुमन्य समय के भीतर |
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धारा 139(4ड़) |
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प्रत्येक व्यापार न्यास द्वारा आय के रिटर्न को भरना जिसे किसी अन्य प्रावधान के अंतर्गत हानि अथवा आय के रिटर्न को वापिस करना आपेक्षित नहीं है |
धारा 139(1) के अंतर्गत स्वीकृत समय के भीतर |
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धारा 139 (5) |
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संशोधित विवरणी दाखिल करना |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले किसी भी समय या निर्धारण पूरा किये जाने से पूर्व, जो भी पहले हो |
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धारा 139(8क) |
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अपडेटिड विवरणी की प्रस्तुति |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 24 महीनों के अंदर नोट : प्रभावी तिथि 01.04.2025 से, अद्यतित विवरणी की प्रस्तुति के लिए समय सीमा प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीने होगी |
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धारा 139(9) |
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आय के रिटर्न में त्रुटि का सुधार |
निर्धारण अधिकारी द्वारा सूचना देने की तिथि के 15 दिनों के भीतर अथवा विस्तारित समय |
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धारा 139 क |
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स्थायी खाता संख्या के आवंटन के लिए आवेदन दाखिल करना |
नियम 114 (3) देखें |
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नियम 114ककख के साथ पठित धारा 139 क |
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नियम 114ककख के अंतर्गत निर्दिष्ट फंड द्वारा प्राप्त सूचना के त्रैमासिक विवरण की प्रस्तुति |
प्रत्येक तिमाही की समाप्ति से 15 दिनों के अंदर |
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नियम 114घ के साथ पठित धारा 139 क |
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30 सितंबर और 31 मार्च को समाप्त होने वाले अर्द्व वर्ष के दौरान प्रपत्र सं. 60 में प्राप्त घोषणा के ब्यौरे वाले प्रपत्र सं. 61 में अर्द्ध वार्षिक विवरण अपलोड करना |
30 सितंबर और 31 मार्च को समाप्त होने वाले अर्द्ध वर्ष से 1 महीने के अंदर |
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नियम 114घ के साथ पठित धारा 139 क |
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नियम 114ककख द्वारा धारा 1369क के परिचालन से छूट प्राप्त गैर-निवासियों (अर्थात पैन रखने वाले) से संबंधित निर्दिष्ट फंड/स्टॉक ब्रोकर द्वारा प्रपत्र संख्या 49खक में तिमाही विवरण प्रस्तुत करना |
प्रत्येक तिमाही की समाप्ति से 15 दिनों के अंदर |
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धारा 140क(1) |
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(i) आत्म-निर्धारण पर आयकर का भुगतान |
आयकर विवरणी प्रस्तुत करने से पहले |
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(ii) लंबित रिटर्न को भरने के लिए देय कर पर ब्याज का भुगतान अथवा अग्रिम कर के भुगतान में डिफाल्ट अथवा देरी |
आयकर विवरणी प्रस्तुत करने से पहले |
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धारा 142क (6) |
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निर्धारण आधिकारी को आंकलन आधिकारी द्वारा रिपोर्ट भेजना |
माह जिसमें धारा 142क (1) के अंतर्गत निर्धारण आधिकारी द्वारा संदर्भ दिया जाता है, की समाप्ति से 6 महीने के भीतर |
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धारा 143 (1) |
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धारा 143(1) के तहत सूचना भेजना |
उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 1वर्ष पूर्व जिसमें रिटर्न किया जाता है |
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धारा 143 (2)(ii) |
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नियमित निर्धारण/ सीमित संवीक्षा निर्धारण की सुनवाई के लिए कर के भुगतान के अंतर्गत अथवा आय के विवरण के अंतर्गत नोटिस तामिल करना नोटिस प्रदान करना |
विवरणी प्रस्तुत किये जाने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से 6 माह की समाप्ति से पहले |
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धारा 144खक(2) |
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आयुक्त द्वारा गार प्रावधान को लागू करने की सूचना पर करदाता द्वारा आपत्ति प्रस्तुत किया जाना (1-4-2016 से लागू) |
ऐसी अवधि के भीतर जैसा कि नोटिस में निर्दिष्ट किया गया हो (लेकिन 60 दिन से अधिक नहीं) |
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धारा 144खक(13) |
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अध्याय X-क के तहत एक गैर अनुमन्य परिहार व्यवस्था के एक समझौते की घोषणा के संबंध में धारा 144खक (6) के तहत दंड स्वीकृति पैनल द्वारा निर्देश पारित किया जाना |
उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें धारा 144खक(4) के तहत आयुक्त से संदर्भ प्राप्त किया गया था। |
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धारा 144ग (2) |
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निम्न के द्वारा पात्र करदाता द्वारा प्रतिक्रिया दाखिल किया जाना-(क) निर्धारण अधिकारी को भिन्नता की स्वीकृति, या (ख) ऐसी भिन्नता पर अपनी आपत्ति, यदि कोई हो विवाद समाधान पैनल और निर्धारण अधिकारी के समक्ष दाखिल करना |
करदाता द्वारा मसौदा आदेश प्राप्त किये जाने के 30 दिनों के भीतर |
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धारा 144ग(4) |
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धारा 144ग(3) के तहत निर्धारण के आदेश पारित किया जाना |
जिस माह में स्वीकृति प्राप्त की गयी है उसकी समाप्ति से एक माह के भीतर या धारा 144ग(2) के तहत आपत्ति दाखिल किये जाने की अवधि समाप्त होने पर |
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धारा 144ग(12) |
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धारा 144ग(5) के तहत निर्देश जारी करना |
उस माह के अंत से 9 महीनों के भीतर जिसमें मसौदा आदेश पात्र करदाता को भेजा गया है |
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धारा 144ग(13) |
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धारा 144ग(5) के तहत जारी किए गए निर्देशों की प्राप्ति पर निर्धारण पूर्ण किया जाना |
उस माह के अंत से एक माह के भीतर जिसमें इस तरह का निर्देश प्राप्त हुआ था |
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धारा 148 |
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एक निर्धारिती को आय की विवरणी प्रस्तुत करने की आवश्यकता जहां आय निर्धारण से बच गई हो |
उस महीने की समाप्ति से 3 महीने के भीतर जिसमें धारा 147 के तहत नोटिस जारी किया गया है नोट: इस अवधि को एओ द्वारा बढ़ाया जा सकता है |
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धारा 148क |
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जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के प्रतिउत्तर का उत्तर देना |
नोटिस को जारी करने की तिथि से कम से कम 7 दिन लेकिन अधिक से अधिक 30 दिन |
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निर्धारण अधिकारी द्वारा आदेश देना चाहे यह धारा 148 के अंतर्गत नोटिस जारी करने का फिट केस हो या नही |
महीने जिसमें धारा 148क(ग) में संदर्भित प्रतिउत्तर निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त होता है, की समाप्ति से 1 महीने के अंदर यदि कोई प्रतिउत्तर प्रस्तुत नही किया जाता तो ऐसा आदेश उस महीने की समाप्ति से 2 महीनों के अंदर पारित किया जा सकता है जिसमें धारा 148क(ख) के अनुसार प्रतिउत्तर देने के लिए दिया गया समय सा अतिरिक्त समय समाप्त होता हो |
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धारा 149 (1) (31.08.2024 से लागू ) |
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धारा 148 के तहत नोटिस जारी करना : |
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यदि अपवंचित आय निम्न है या हो सकती है |
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(i) 50,00,000 रुपये से कम है। |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 3 साल के भीतर |
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(ii) 50,00,000 रुपये या उससे अधिक |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 10 साल के भीतर |
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धारा 149 (1) (01.09.2024 से लागू ) |
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धारा 148 के तहत नोटिस जारी करना : |
|
|
यदि अपवंचित आय निम्न है या हो सकती है |
|
|
(i) 50,00,000 रुपये से कम है। |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 3 साल के भीतर |
|
(ii) 50,00,000 रुपये या उससे अधिक |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 5 साल के भीतर |
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धारा 149 (2) (01.09.2024 से लागू ) |
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धारा 148क के अंतर्गत नोटिस जारी करना : |
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यदि अपवंचित आय निम्न है या हो सकती है |
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(i) 50,00,000 रुपये से कम है। |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 3 साल के भीतर |
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(ii) 50,00,000 रुपये या उससे अधिक |
प्रासंगिक निर्धारण वर्ष के अंत से 5 साल के भीतर |
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धारा 150 |
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किसी पारित आदेश में किसी भी निष्कर्ष या निर्देश के अनुसरण में निर्धारण/ पुनर्निर्धारण/पुनरूगणना के लिए धारा 148 के तहत नोटिस जारी करना: |
कोई समय सीमा नहीं |
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(i) आयकर अधिनियम के तहत अपील/संदर्भ/संशोधन में किसी भी कार्यवाही में किसी भी अधिकारी द्वारा |
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(ii) किसी अन्य कानून के तहत किसी भी कार्यवाही में एक अदालत द्वारा |
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धारा 153 (1) |
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धारा 143 या 144 के तहत निर्धारण आदेश पारित करना |
क) निर्धारण वर्ष जिसमें आय पहली बार निर्धारणीय थी की समाप्ति से 21 महीनों के अंदर (निर्धारण वर्ष 2017-18 या उससे पहले के लिए लागू) ख) निर्धारण वर्ष, जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया, की समाप्ति से 18 महीने के अंदर (निर्धारण वर्ष 2018-19 के लिए लागू) ग) निर्धारण वर्ष, जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया, की समाप्ति से 12 महीने के अंदर (निर्धारण वर्ष 2019-20 और उसके बाद के लिए लागू) घ) निर्धारण वर्ष, जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया, की समाप्ति से 18 महीने के अंदर (निर्धारण वर्ष 2020-21 और उसके बाद के लिए लागू) ङ) निर्धारण वर्ष, जिसमें आय को पहली बार मूल्यांकित किया गया, की समाप्ति से 9 महीने के अंदर (निर्धारण वर्ष 2021-22 और उसके बाद के लिए लागू) च) उस निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों के भीतर जिसमें आय पहले निर्धारण योग्य थी। [आकलन वर्ष 2022-23 और उसके बाद के लिए लागू] नोट : • यदि संदर्भ टीपीओ को किया गया हो तो मूल्यांकन के लिए उपलब्ध अवधि 12 महीनों तक विस्तारित की जाएगी • जहां धारा 132 के तहत तलाशी शुरू करने या धारा 132क के तहत अधिग्रहण करने की तिथि पर मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन लंबित है, वहां मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन पूरा करने के लिए उपलब्ध अवधि 12 महीने तक बढ़ा दी जाएगी। (01.04.2023 से लागू) • यदि विवरणी धारा 139(8क) के अंतर्गत प्रस्तुत की गई हो तो निर्धारण आदेश उस वित्त वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर पारित किया जाएगा जिसमें ऐसी विवरणी प्रस्तुत की गई है। |
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धारा 153(1ख) |
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धारा 143/144 के अंतर्गत आदेश पारित करना यदि आय की विवरणी धारा 119(2)(ख) के अंतर्गत आदेश के परिणामस्वरूप प्रस्तुत की जाती है |
• वित्त वर्ष जिसमें विवरणी प्रस्तुत होती है, की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर |
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धारा 153(2) |
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धारा 147 के अंतर्गत मूल्यांकन/पुन: मूल्यांकन करना |
क) वित्त वर्ष जिसमें धारा 148 के अंतर्गत नोटिस तामील किया गया है, की समाप्ति से 9 महीनों के अदर (यदि नोटिस 01.04.2019 से पहले जारी किया गया है) ख) वित्त वर्ष जिसमें धारा 148 के अंतर्गत नोटिस तामील किया गया है, की समाप्ति से 12 महीनों के अदर (यदि नोटिस 01.04.2019 से पहले जारी किया गया है) • नोट : यदि संदर्भ टीपीओ को किया जाता है तो पुर्नमूल्यांकन के लिए उपलब्ध अवधि को 12 महीनों तक बढ़ाया जाएगा। • जहां धारा 132 के तहत तलाशी शुरू करने या धारा 132क के तहत अधिग्रहण करने की तिथि पर मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन लंबित है, वहां मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन पूरा करने के लिए उपलब्ध अवधि 12 महीने तक बढ़ा दी जाएगी। (01.04.2023 से लागू) |
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धारा 153 (3) |
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धारा 254, 263 या 264 के अंतर्गत आदेश के अनुसार नए निर्धारण (या धारा 92गक के अंतर्गत नया आदेश) का एक आदेश जो निर्धारण को समायोजित या निरस्त करे (या धारा 92गक के अंतर्गत एक आदेश) |
क) वित्त वर्ष, जिसमें धारा 254 के अंतर्गत आदेश - प्रधान मुख्य आयुक्त या - मुख्य आयुक्त - प्रधान आयुक्त या - आयुक्त या द्वारा प्राप्त होता है, की समाप्ति से 9 महीनों के अंदर - जो भी मामला हो धारा 263/264 के अंर्तगत एक आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा परित हो ख) वित्त वर्ष, जिसमें धारा 254 के अंतर्गत आदेश प्राप्त होता है या धारा 263 या 264 के अंतर्गत आदेश प्राधिकारी द्वारा पारित होता है (यदि आदेश वित्त वर्ष 2019-20 को या उसके बाद पारित होता है), की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर • नोट : यदि संदर्भ टीपीओ को किया गया हो तो मूल्यांकन की अवधि 12 महीनों तक विस्तारित की जाएगी • जहां धारा 132 के तहत तलाशी शुरू करने या धारा 132क के तहत अधिग्रहण करने की तिथि पर मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन लंबित है, वहां मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन पूरा करने के लिए उपलब्ध अवधि 12 महीने तक बढ़ा दी जाएगी। (01.04.2023 से लागू) |
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धारा 153 (5) |
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एओ द्वारा आंशिक या पूर्ण तौर पर एक आदेश को प्रभावी करना (धारा 250/254/260/262/263/264 के अंर्तगत), एक नया मूल्यांकन या पुर्नमूल्यांकन को छोड़कर |
महीने, जिसमें आदेश - प्रधान मुख्य आयुक्त या - मुख्य आयुक्त - प्रधान आयुक्त या - आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है, की समाप्ति से 3 महीनों की अवधि के अंदर - जो भी मामला हो धारा 263/264 के अंर्तगत एक आदेश प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा परित हो नोट : 1) यदि उक्तकथित अवधि के अंदर ऐसे आदेश को प्रभावी करना संभव न हो तो प्रधान आयुक्त या आयुक्त एओ को 6 महीनों की अतिरिक्त अवधि की अनुमति दे सकते हैं 2) यदि ऐसे किसी मुद्दे पर सत्यापन किसी दस्तावेज को जमा करने के माध्यम से आवष्यक था या जहां निर्धारिती को सुनवाई का अवसर दिया गया हो तो आदेश 153(3) में निर्दिष्ट समय के अंदर किया जाएगा (वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा शामिल प्रभावी तिथि 01.06.2017) |
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धारा 153(5क) |
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धारा 263/92गक के अंतर्गत एक आदेश/निर्देश को प्रभावी करते हुए टीपीओ के आदेश की पुष्टि करते हुए निर्धारण/पुर्ननिर्धाश्रण के आदेश की निर्धारण अधिकारी द्वारा संशोधन |
महीने जिसमें टीपीओ का ऐसा आदेश निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त होता है, की समाप्ति से 2 महीनों के अंदर |
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धारा 153(6)(i) |
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निम्न में शामिल किसी अनुसंधान या निर्देश को प्रभावी करने या इसके परिणामस्वरूप निर्धारिती या किसी व्यक्ति पर मूल्यांकन, पुर्नमूल्यांकन या पुर्नगणना का एक आदेश - धारा 250/254/260/262/263/264 के अंतर्गत एक आदेश या - संदर्भ या अपील के रूप को छोड़कर एक कार्यवाही में किसी न्यायलय का एक आदेश |
महीने, जिसमें ऐसा आदेश प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, जो भी मामला हो, द्वारा प्राप्त या पारित किया जाता है, की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर |
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धारा 153(6)(ii) |
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धारा 147 के अंतर्गत फर्म पर किए गए मूल्यांकन के परिणामस्वरूप फर्म में एक सहभागी पर निर्धारण का एक आदेश |
महीनें जिसमें फर्म की स्थिति में निर्धारण आदेश पारित हुआ, की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर |
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धारा 153 |
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निर्धारण या पुर्ननिर्धारण करना जहां निर्धारिती ने धारा 245ड के अंतर्गत निपटान आयोग के समक्ष लंबित आवेदन को निरस्त करने के विकल्प को चुना हो |
धारा 245ड(5) के अंतर्गत अवधि को बाहर रखने के बाद एक वर्ष और जहां सीमितता की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम हो तो इसे एक वर्ष तक बढ़ाया गया है समझा जाएगा |
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धारा 153ख |
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धारा 153क के अंतर्गत निर्धारण आदेश देना (लागू नही यदि तलाशी धारा 132 के अंतर्गत की गई है या मांग 1 अप्रैल, 2021 को या उसके बाद धारा 132क के अंतर्गत की गई है) |
क) वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 21 महीनों की अवधि के भीतर जिसमें धारा 132/132क के तहत तलाश/मांग के लिए अंतिम प्राधिकरण निष्पादित किया गया था। यह अवधि उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 9 महीन से कम नहीं हो सकती जिसमें धारा 153ग के तहत बही लेखों को, संबंधित निर्धारण अधिकारी सौंपा गया था (यदि जांच वित्त वर्ष 2018-19 में की गई थी) ख) वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों की अवधि के भीतर जिसमें धारा 132/132क के तहत तलाश/मांग के लिए अंतिम प्राधिकरण निष्पादित किया गया था। यह अवधि उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 12 महीन से कम नहीं हो सकती जिसमें धारा 153ग के तहत बही लेखों को, संबंधित निर्धारण अधिकारी सौंपा गया था (यदि जांच वित्त वर्ष 2019-20 या उसके बाद में की गई थी) ग) वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों की अवधि के भीतर जिसमें धारा 132/132क के तहत तलाश/मांग के लिए अंतिम प्राधिकरण निष्पादित किया गया था। (यदि खोज वित्त वर्ष 2019-20 या 2020-21 में की गई थी) नोट : निर्धारण वर्ष 2021-22 के लिए निर्धारण 30 सितंबर, 2022 को या उससे पहले किया जा सकता है। |
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निर्धारण आदेश को पारित करना जहां एक कार्यवाही धारा 245जक के अंतर्गत निपटान आयोग रोकथाम के समक्ष हो |
धारा 245जक(4) के अंतर्गत अवधि के बाहर रखने के बाद एक वर्ष और जहां सूचना की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम हो, इसे एक वर्ष तक बढ़ाने के तौर पर समझा जाएगा |
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निर्धारण, पुर्ननिर्धारण या पुर्नगणना आदेश देना जहां निर्धारिती धारा 245ड के अंतर्गत निपटान आयोग के समक्ष लिंबत आवेदन को निरस्त करने का विकल्प चुनता हो |
धारा 245ड(5) के अंतर्गत अवधि के बाहर रखने के बाद एक वर्ष और जहां सूचना की ऐसी अवधि एक वर्ष से कम हो, इसे एक वर्ष तक बढ़ाने के तौर पर समझा जाएगा |
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धारा 154 |
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आयकर प्राधिकरी द्वारा धारा 116 में निर्दिष्ट रिकॉर्ड से स्पष्ट किसी भी गलती में सुधार करना- |
उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 4 वर्ष के भीतर जिसमें संशोधन किये जाने के लिये आदेश पारित किया गया था, या उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें आयकर प्राधिकरी द्वारा आवेदन प्राप्त किया गया है, जो भी पहले हो। |
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(i) इसके द्वारा पारित किसी आदेश में संशोधन |
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(ii) धारा 143(1) के तहत किसी सूचना को या सूचना समझे जाने में संशोधन |
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(iii) धारा 200क(1) के तहत किसी सूचना में संशोधन |
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धारा 155 (1)/(2) |
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फर्म/एओपी/बीओआई से सही हिस्सा शामिल किए जाने के लिए एओपी/बीओआई की फर्म के भागीदार या सदस्य निर्धारण आदेश में संशोधन |
जिस वित्तीय वर्ष में फर्म/एओपी/बीओआई के मामले में अंतिम आदेश पारित किया गया था, उसकी समाप्ति से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (1क) |
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धारा 40 (ख) कटौती के योग्य न होने की सीमा तक फर्म से होने वाली आय के समायोजन के लिए भागीदार के निर्धारण आदेश में संशोधन |
फर्म के मामले में जिस वित्तीय वर्ष में अंतिम आदेश पारित किया गया था, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (4) |
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धारा 147 के तहत हानि या मूल्यह्रास की पुन: गणना के संबंध में आगामी वर्षों के लिए कुल आय की पुन: गणना |
जिस वित्तीय वर्ष में धारा 147 के तहत आदेश पारित किया गया है, के अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (4क) |
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धारा 32क के तहत अनुमन्य निवेश वापस लेना- यदि |
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(क) जिस वर्ष परिसंपत्ति का अधिग्रहण किया गया था उसके 8 वर्ष के भीतर परिसंपत्ति की बिक्री/स्थानांतरण |
उस वर्ष की समाप्ति से 4 साल के भीतर जिसमें बिक्री या अधिग्रहण किया गया था, |
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(ख) संपत्ति अधिग्रहण के वर्ष के अंत के 10 वर्षों के भीतर नई संपत्ति प्राप्त करने के लिए अनुमन्य निवेश रिजर्व का उपयोग नहीं होने पर |
उक्त 10 वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर |
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(ग) जिस वर्ष परिसंपत्ति का अधिग्रहण किया गया था उसके अंत से 10 वर्ष की समाप्ति से पूर्व आरक्षित राशि का दुरुपयोग किये जाने पर |
उस वर्ष की समाप्ति से 4 वर्ष के भीतर जिसमें राशि का इस प्रकार दुरुपयोग किया गया है |
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धारा 155 (5क) |
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यदि 8 वर्ष के भीतर जमीन बेची जाती है या रिजर्व का दुरुपयोग किया जाता है तो धारा 33क के तहत विकास भत्ता वापस लेना |
यदि वर्ष के भीतर जमीन बेची जाती है या रिजर्व का दुरुपयोग किया जाता है |
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धारा 155 (5ख) |
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धारा 35(2ख) के तहत वैज्ञानिक अनुसंधान पर व्यय के संबंध में जहां अनुमन्य भारित कटौती गलत तरीके से की गयी है, कुल आय की पुन: गणना करना |
उस वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यक्रम के पूरा होने के लिए अनुमन्य अवधि समाप्त हो रही है, |
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धारा 155 (7) |
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धारा 104 के तहत वितरण योग्य आय और अतिरिक्त कर देयता की पुन: गणना |
जिस वित्तीय वर्ष में अंतिम आदेश पारित किया गया था, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (7ख) |
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धारा 47क के तहत समझे जाने वाले पूंजीगत अभिलाभ की गणना |
उस वर्ष के अंत से 4 वर्ष के भीतर जिसमें पूंजी परिसंपत्ति बिक्रेय माल में बदल जाती है या जिसमें मूल कंपनी/धारक कंपनी सहायक कंपनी में 100 फीसदी शेयर हिस्सेदारी रखना बंद कर देती है |
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धारा 155 (10क) |
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धारा 54ड़(1) के तहत अप्रभार्य दीर्घावधि पूंजीगत परिसंपत्ति पर पूंजीगत अभिलाभ की असमायोजित राशि को बाहर करने के लिए निर्धारण आदेश में संशोधन |
जिस वित्तीय वर्ष में मूल निर्धारण किया जाता है, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (11) |
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धारा 54ज के अंतर्गत अप्रभार्य पूंजीगत अभिलाभ को बाहर करने के लिये निर्धारण आदेश में संशोधन |
जिस वित्तीय वर्ष में क्षतिपूर्ति प्राप्त की गयी थी, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (11क) |
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भारत में प्राप्त या भारत में लायी जाने वाली आय के संबंध में धारा 10क,10कक,10ख या 10खक के तहत अनुमन्य कटौती के लिये निर्धारण आदेश में संशोधन |
उस वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर जिसमें ऐसी आय प्राप्त की गयी है, या भारत में लायी गयी है |
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धारा 155 (13) |
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परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा आय के संबंध में जिसे प्रारंभ में भारत में नहीं लाया जाता है लेकिन बाद में भारत में लाया जाता है, के संबंध में धारा 80जजख, 80जजग, 80जजघ, 80जजड़, 80-ण, 80द, 80दद या 80ददक के तहत कटौती की अनमति देने के लिये निर्धारण आदेश में संशोधन करना |
उस वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर जिसमें ऐसी आय प्राप्त की गयी है, या भारत में लायी गयी है |
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धारा 155 (14) |
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कर कटौती/कर संग्रह प्रमाण पत्र के साथ विवरणी के साथ दाखिल नहीं किये जाने के आधार पर न दिये गये कर कटौती/संग्रह का क्रेडिट देने के लिए धारा 143(1) के तहत निर्धारण आदेश/सूचना में संशोधन |
जिस वर्ष में आय निर्धारणीय है उसके अंत से 2 साल के भीतर निर्धारण अधिकारी के समक्ष प्रासंगिक कर कटौती/संग्रह प्रमाण पत्र पेश किया जाना चाहिए |
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धारा 155 (14क) |
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निर्धारण आदेश या सूचना या काल्पनिक सूचना को संशोधित करना ताकि धारा 90/90क/91 के अंतर्गत विदेशी कर क्रेडिट (पहले यह नही दिया गया था क्योंकि विदेशी कर की मात्रा संदेहास्पद थी) |
महीने जिसमें विवाद का निपटान किया गया, की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर (1 अप्रैल, 2018 से लागू) |
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धारा 155 (15) |
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स्टांप शुल्क प्राधिकारियों द्वारा(धारा 50ग) निर्धारण में अपनाये गये मूल्य निर्धारण के लिए प्रतिफल का पूरा मूल्य मानने के द्वारा पूंजीगत लाभ की गणना करने के लिए निर्धारण आदेश में संशोधन |
उस वर्ष के अंत से 4 साल के भीतर जिसमें उस अपील/संशोधन/संदर्भ के मूल्य में संशोधन का आदेश पारित किया गया था। |
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धारा 155 (16) |
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किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल या अन्य प्राधिकारी द्वारा कम किये गये मुआवजे/प्रतिफल को पूर्ण मूल्य प्रतिफल लेने के द्वारा, अनिवार्य अधिग्रहण, आदि पर पूंजीगत लाभ की गणना करने के लिए निर्धारण आदेश में संशोधन |
जिस वित्तीय वर्ष में मुवावजा कम करने का आदेश पारित किया गया था, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (17) |
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जहाँ नियंत्रक/ उच्च न्यायालय द्वारा पेटेंट को समाप्त करने का आदेश पारित किया गया था या करदाता का नाम पेटेंट से पेटेंट धारक के रूप में पेटेंट रजिस्टर से बाहर कर दिया जाता है ऐसे मामले में धारा 80ददख के तहत अनुमन्य कटौती |
वापस लेने के लिए निर्धारण आदेश में संशोधन करना जिस वर्ष में नियंत्रक/उच्च न्यायालय का आदेश पारित किया गया था, उसके अंत से 4 साल के भीतर |
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धारा 155 (19) |
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पिछले वर्ष 2014-15 (या किसी भी पूर्व वर्ष) के लिए एक सहकारी समिति (चीनी के निर्माण के व्यवसाय में लगी हुई) की कुल आय की पुनर्गणना ताकि ऐसे व्यय की कटौती की अनुमति दी जा सके (जो शुरू में अस्वीकृत थी) जो ऐसी कीमत पर किया गया हो जो उस वर्ष के लिए सरकार द्वारा निर्धारित/अनुमोदित मूल्य के बराबर या उससे कम है। |
31 मार्च 2027 को या उससे पहले |
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धारा 155 (20) |
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एक ऐसे निर्धारिती द्वारा आवेदन जमा करना जिसने उपार्जन के आधार पर आय की सूचना दी है लेकिन बाद के वित्तीय वर्ष में कटौतीकर्ता द्वारा कर की कटौती और भुगतान किया जाता है |
उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर जिसमें ऐसा कर काटा गया था |
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प्रासंगिक निर्धारण वर्ष में स्रोत पर कर कटौती के क्रेडिट की अनुमति देने के लिए पूर्वोक्त मामले में मूल्यांकन/सूचना के आदेश में संशोधन |
जिस वित्तीय वर्ष में कर काटा गया है, उसकी समाप्ति से 4 वर्षों के भीतर |
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धारा 155(21) |
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जिस पूर्व वर्ष के लिए असन्निकट कीमत निर्धारित किया गया है, उसके तुरंत बाद के दो लगातार पूर्व वर्षों के लिए बहु-वर्षीय असन्निकट कीमत निर्धारण करने हेतु कुल आय का पुनः गणना करना |
निर्धारिती के मामले में, ऐसे पिछले वर्ष के लिए मूल्यांकन पूरा होने वाले महीने की समाप्ति से 3 महीने के भीतर। यदि ऐसे दो लगातार पिछले वर्षों का मूल्यांकन/सूचना नहीं दी गई है, तो ऐसे दो लगातार पिछले वर्षों का मूल्यांकन/सूचना करने वाले महीने की समाप्ति से 3 महीने के भीतर पुनर्गणना की जाएगी। (01.04.26 से लागू) |
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धारा 156 |
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धारा 17(2)(v) में निर्दिष्ट प्रकृति के अनुलाभ पर कर का भुगतान [अर्थात, एक नियोक्ता, जो पात्र स्टार्ट-अप है, द्वारा आवंटित/हस्तांतरित ईएसओपी (धारा 80-झकग)] |
14 दिनों के भीतर - क. प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीने की समाप्ति के बाद, या ख. कर्मचारी द्वारा ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर की बिक्री की तिथि से; या ग. कर्मचारी के उस नियोक्ता का कर्मचारी न रहने की तिथि से जिसने उसे ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर आवंटित या हस्तांतरित किया था, जो भी पहले हो (निर्धारण वर्ष 2021-22 से लागू) |
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धारा 158कक(1) |
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धारा 158कक(1) के अंतर्गत निर्धारित मामले के लिए अपीलीय न्यायाधिकारी को निर्धारण अधिकारी द्वारा आवदेन का दाखिलीकरण |
आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश की प्राप्ति की तिथि से 60 दिनों की अवधि के भीतर |
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धारा 158कक(4) |
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उस स्थिति में अपीलीय न्यायाधिकरण को अपील का दाखिलीकरण जहां धारा 158कक(1) के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) का आदेश अन्य मामले में कानूनी प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय के अनुपालन में नहीं होता |
अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के संप्रेषण की तिथि से 60 दिनों की अवधि के भीतर |
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धारा 158कख(2) |
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अपीलीय न्यायधिकरण/क्षेत्राधिकारी उच्च न्यायलय को आवेदन करना |
आयुक्त (अपील)/अपीलीय न्यायधिकरण के आदेश के मिलने की तिथि से 120 दिनों के अंदर |
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धारा 158कख(5) |
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न्यायधिकरण/क्षेत्राधिकार उच्च न्यायलय को अपील करना |
तिथि जिस पर उच्च न्यायलय/उच्चतम न्यायलय (अन्य मामले में) का आदेश प्रधान आयुक्त/आयुक्त को दिया गया, से न्यायधिकरण को 60 दिनों के अंदर (या उच्च न्यायलय को 120 दिन) |
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धारा 158खड़(1) |
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धारा 158खग के अंतर्गत आदेश को पारित करना |
उस महीने के अंत से 12 महीनों के भीतर जिसमें खोज के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था। नोट : 01.02.2025 से, समय सीमा उस तिमाही के अंत से 12 महीने होगी जिसमें खोज के लिए अंतिम प्राधिकार निष्पादित किया गया था। नोट : यदि स्थानांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी को संदर्भित किया जाता है, तो सीमा अवधि 24 महीने होगी। |
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धारा 158खड़(2) |
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धारा 185खड़ में संदर्भित अन्य व्यक्ति की स्थिति में ब्लॉक मूल्यांकन के आदेश की समाप्ति |
प्रासंगिक माह जिसमें अध्याय XIV-ख के अंतर्गत नोटिस को तामील किया गया था (खोज अथवा मांग की स्थिति में जो 1-1-1997 को अथवा उसके पश्चात् हुई हैं), की समाप्ति से 2 वर्षों की अवधि के भीतर |
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धारा 158खड़(3) |
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अन्य व्यक्ति के मामलों में खंड निर्धारण आदेश पारित करने के लिए सीमितता अवधि |
उस महीने के अंत से 12 महीनों के भीतर जिसमें धारा 158खघ के अनुसरण में धारा 115खघ के तहत ऐसे अन्य व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया था। नोट 1: 01.02.2025 से, समय सीमा उस तिमाही के अंत से 12 महीने होगी जिसमें धारा 158खघ के अनुसरण में धारा 115खघ के तहत ऐसे अन्य व्यक्ति को नोटिस जारी किया गया था। नोट 2: यदि स्थानांतरण मूल्य निर्धारण अधिकारी को संदर्भ दिया जाता है तो सीमा अवधि 24 महीने होगी। |
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धारा 185खचक(2) के अंतर्गत जुर्माने के अधिरोपण के लिए आदेश पारित |
उस स्थिति में जहां मूल्यांकन धारा 246 अथवा धारा 246क के अंतर्गत आयकर आयुक्त (अपील) को अपील अथवा धारा 253 के अंतर्गत अपीलीय न्यायाधिकरण को अपील का विषयगत मामला है, वित्त वर्ष जिसमें कार्यवाही, उसकी अवधि के दौरान जुर्माने के अधिरोपण के लिए कार्यवाही प्रारंभ की गई हो, की समाप्ति के पश्चात् परिपूरित की गई है अथवा माह जिसमें आयकर आयुक्त (अपील) के आदेश की समाप्ति से छह माह अथवा जैसी भी स्थिति हो, अपीलीय न्यायाधिकरण प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान मुख्य/ आयुक्त आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती है उस मामले में जहां मूल्यांकन माह जिसमें ऐसा आदेश पारित होता है, की समाप्ति से छह माह की समाप्ति के पश्चात् धारा 263 के अंतर्गत संशोधन का विषयगत मामला है उक्त को छोड़कर किसी अन्य मामले में, वित्त वर्ष जिसमें जुर्माने के अधिरोपण के लिए कार्यवाही उसकी अवधि के दौरान कार्यवाही परिपूरित की गई है, की समाप्ति के पश्चात् अथवा माह जिसमें जुर्माने के अधिरोपण के लिए कार्यवाही की समाप्ति से छह माह, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो |
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धारा 160 (1), स्पष्टीकरण 1 |
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'मौखिक न्यास' को 'एक लिखित में एक विधिवत निष्पादित विलेख द्वारा घोषित न्यास' में परिवर्तित करने के लिए न्यासियों द्वारा घोषणापत्र दाखिल करना |
'मौखिक न्यास' की घोषणा की तिथि से 3 माह के भीतर |
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धारा 170क |
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व्यापारिक पुर्नसंगठन के मामले में संशोधित विवरणी की प्रस्तुति जहां उच्च न्यायलय/न्यायधिकरण/न्यायनिर्णायक प्राधिकारी के आदेश से पहले आय की विवरणी धारा 139 के अंतर्गत उत्तराधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई थी |
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धारा 172 (3) |
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यात्री किराया, माल भाड़ा आदि के सापेक्ष अनिवासी स्वामी या जहाज के चार्टरर को अदा की गयी या आदेय पूर्ण राशि की वापसी के लिये जहाज के मालिक द्वारा कर निर्धारण अधिकारी को प्रस्तुत किया जाना |
भारत में किसी भी बंदरगाह से जहाज के प्रस्थान से पहले, या उसके बाद निर्धारण अधिकारी द्वारा अनुमति दिये जाने पर 30 दिनों के भीतर |
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धारा 172 (4क) |
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धारा 172(4) के तहत, आदेश पारित करना, आय निर्धारण करना और उस पर देय कर का निर्धारण |
उस वित्तीय वर्ष के अंत से 9 महीनों के भीतर जिसमें धारा 172(3) विवरणी (जहां 1-4-2007 से पहले विवरणी प्रस्तुत की गयी है 31-12-2008 तक) प्रस्तुत की गयी है |
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धारा 172 (7) |
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जहाज के मालिक या चार्टरर द्वारा उसके द्वारा देय कर अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार निर्धारित किये जाने के लिये दावे का प्रस्तुत किया जाना |
जिस वर्ष जहाज भारतीय बंदरगाह से रवाना होती है के प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से पहले |
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धारा 176 (3) |
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निर्धारण अधिकारी को व्यापार/पेशे की समाप्ति की नोटिस देना |
समाप्ति के 15 दिनों के भीतर |
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धारा 178 (1) |
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निर्धारण अधिकारी को परिसमापक के रूप में नियुक्ति की नोटिस देना |
नियुक्ति के 30 दिनों के भीतर |
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धारा 178 (2) |
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कंपनी द्वारा देय कर की राशि के बारे में परिसमापक को अधिसूचित करना |
निर्धारण अधिकारी द्वारा परिसमापक की नियुक्ति की सूचना प्राप्त किये जाने की तिथि से 3 माह के भीतर |
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धारा 184 |
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साझेदारी विलेख की प्रमाणित प्रतिलिपि दाखिल करना |
फर्म के तौर पर मूल्यांकन मांगने के संबंध में निर्धारण वर्ष के संबंधित पिछले वर्ष की फर्म की आय की विवरणी के साथ |
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धारा 191(2) |
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धारा 17(2)(vi) में निर्दिष्ट प्रकृति के अनुलाभ पर धारा 191(1) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा सीधे कर का भुगतान [अर्थात, एक नियोक्ता, जो पात्र स्टार्ट-अप है, द्वारा आवंटित/हस्तांतरित ईएसओपी (धारा 80-झकग)] |
14 दिनों के भीतर - क. प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीने की समाप्ति के बाद, या ख. कर्मचारी द्वारा ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर की बिक्री की तिथि से; या ग. कर्मचारी के उस नियोक्ता का कर्मचारी न रहने की तिथि से जिसने उसे ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर आवंटित या हस्तांतरित किया था, जो भी पहले हो (निर्धारण वर्ष 2021-22 से लागू) |
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धारा 191(1ग) |
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धारा 17(2)(vi) में निर्दिष्ट प्रकृति के अनुलाभ पर धारा 191(1) के अंतर्गत निर्धारिती द्वारा सीधे कर का भुगतान [अर्थात, एक नियोक्ता द्वारा आवंटित/हस्तांतरित ईएसओपी) |
14 दिनों के भीतर - क. प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की समाप्ति से 48 महीने की समाप्ति के बाद, या ख. कर्मचारी द्वारा ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर की बिक्री की तिथि से; या ग. कर्मचारी के उस नियोक्ता का कर्मचारी न रहने की तिथि से जिसने उसे ऐसी निर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट इक्विटी शेयर आवंटित या हस्तांतरित किया था, जो भी पहले हो (निर्धारण वर्ष 2021-22 से लागू) |
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धारा 192 |
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एक अनुमोदित सेवानिवृत्ति कोष के न्यासियों द्वारा योगदान में भुगतान से कर की कटौती की विवरणी दाखिल करना |
वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 2 माह के भीतर |
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धारा 197क(2) |
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ई-दाखिलीकरण साइट (www.incometaxindiaefiling.gov.in) पर डिडक्टी की ओर से प्रपत्र सं. 15छ/15ज में डिडक्टर द्वारा प्राप्त घोषणा की अपलोडिंग |
पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही से 15 दिन चौथी तिमाही की समाप्ति से 30 दिन |
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धारा 200 (1) |
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धारा 192 से 196घ तक के तहत स्रोत पर कटौती किये गये कर का भुगतान |
नियम 30 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के भीतर |
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धारा 200 (3) |
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30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए कर कटौती का निर्दिष्ट विवरण तैयार करना और दाखिल करना |
30 जून, 30 सितंबर और 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली तिमाही के संबंध में वित्त वर्ष की 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, 31 जनवरी और 31 मार्च को समाप्त होने वाली तिमाही के संदर्भ में, वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई, के तुरंत बाद के वित्त वर्ष के 31 मई को या उससे पहले जहां कटौती धारा 194-झक/194-झख/194ड के अंतर्गत की जाती है : महीने जिसमें कटौती की जाती है, की समाप्ति से 30 दिनों के अंदर |
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धारा 200क |
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धारा 200क(1) के तहत सूचना |
जिस वित्तीय वर्ष में विवरणी दाखिल की गयी है, की समाप्ति से 7 वर्ष या वित्त वर्ष जिसमें संशोधन विवरण दिया जाता है, जो बाद में डाला गया, की समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर |
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धारा 201(3) |
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भारत में निवासी व्यक्ति से कर के किसी भाग को या पूर्ण रूप कटौती करने में विफलता पर चूककर्ता निर्धारिती माने जाने के लिए एक व्यक्ति |
उस वित्तीय वर्ष के अंत से 7 साल के भीतर जिसमें धारा 200 के तहत विवरण दायर किया गया है चाहे विवरण भरा है अथवा नहीं |
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धारा 203 |
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स्रोत पर कर कटौती का प्रमाण पत्र जारी करना |
प्रपत्र सं. 16 : वित्त वर्ष जिसमें आय का भुगतान किया गया और कर कटौती की गई, के तुरंत बाद के वित्त वर्ष का 15 जून प्रपत्र सं. 16क : वित्त वर्ष के संबंध में 30 जून, 30 सितंबर व 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली तिमाही के संदर्भ में वित्त वर्ष के 15 अगस्त, 15 नवंबर, 15 फरवरी को या उससे पहले। वित्त वर्ष जिसमें कटौती की गई, के तुरंत बाद के वित्त वर्ष के 31 मार्च को, 15 जून को या उससे पहले प्रपत्र सं. 16ख (धारा 194झक) : प्रपत्र सं. 26थख में चालान सह विवरण की प्रस्तुति के लिए अंतिम तिथि से 15 दिनों के अंदर (यानी उस महीने की समाप्ति से 30 दिनों के अंदर जिसमें कटौती की गई है) प्रपत्र सं. 16ग (धारा 194झक) : प्रपत्र सं. 26थख में चालान सह विवरण की प्रस्तुति के लिए अंतिम तिथि से 15 दिनों के अंदर (यानी उस महीने की समाप्ति से 30 दिनों के अंदर जिसमें कटौती की गई है) प्रपत्र सं. 16घ (धारा 194झक) : प्रपत्र सं. 26थख में चालान सह विवरण की प्रस्तुति के लिए अंतिम तिथि से 15 दिनों के अंदर (यानी उस महीने की समाप्ति से 30 दिनों के अंदर जिसमें कटौती की गई है) |
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धारा 203क |
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कर कटौती और संग्रह खाता संख्या के आवंटन के लिए अदाता द्वारा कर निर्धारण अधिकारी को आवेदन किया जाना |
उस माह के अंत से एक माह के भीतर जिसमें, कर कटौती या संग्रह किया गया था, जैसा भी मामला हो |
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धारा 203क |
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कर कटौती और संग्रह खाता संख्या के आवंटन के लिए कर निर्धारण अधिकारी को आवेदन किया जाना |
महीने जिसमें कर कटौती या एकत्रीकरण किया गया, की समाप्ति से एक महीने |
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धारा 206क(1) |
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धारा 194क(3)(प) के पंरतुक में संदर्भित बैंकिंग कंपनी, सहकारी संस्था या सार्वजनिक कंपनी द्वारा टीडीएस के बिना निवासियों को ब्याज के भुगतान के संदर्भ में निर्धारित ब्यौरे की प्रस्तुति |
वित्त वर्ष की संबंधित तिमाही के बाद के 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, 31 जनवरी और 30 जून को या उससे पहले |
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धारा 206ग(3) |
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धारा 206ग(1) के तहत निर्दिष्ट वस्तुओं के संबंधित खरीदारों से एकत्र कर के भुगतान केन्द्रीय सरकार के नामे या जैसा बोर्ड निर्दिष्ट करे, किया जाना |
नियम 37गक में निर्धारित समय सीमा के भीतर |
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धारा 206ग(3) (परंतुक) |
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30 जून, 30 सितंबर, 31 दिसंबर और 31 मार्च को समाप्त होने वाली अवधि के लिए कर संग्रह का निर्दिष्ट विवरण तैयार करना और दाखिल करना |
वित्तीय वर्ष की 30 जून, 30 सितम्बर, और 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाली तिमाही के संबंध में 15 जुलाई, 15 अक्टूबर, 15 जनवरी को या उससे पहले। 31 मार्च को समाप्त तिमाही के संबंध में जिस वर्ष कटौती की गयी है उसके तुरंत बाद आने वाले वित्तीय वर्ष की 15 मई को या उससे पहले (फार्म सं 27ड़थ) |
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धारा 206ग(5) |
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धारा 206ग(1) के तहत कर संग्रह करने वाले व्यक्ति द्वारा संबंधित खरीदारों से एकत्र कर की राशि और दर, आदि के बारे में उन्हें फार्म 27घ में प्रमाण पत्र निर्गत करना |
वित्तीय वर्ष की 30 जून, 30 सितम्बर, और 31 दिसम्बर को समाप्त होने वाली तिमाही के संबंध में 31 जुलाई, 31 अक्टूबर, 31 जनवरी को या उससे पहले। 31 मार्च को समाप्त तिमाही के संबंध में जिस वर्ष कटौती की गयी है उसके तुरंत बाद आने वाले वित्तीय वर्ष की 15 मई को या उससे पहले |
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धारा 206ग(5) (दूसरा परंतुक) |
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निर्धारित आयकर प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी द्वारा अधिकृत व्यक्ति द्वारा 1-4-2008 को या उसके बाद शुरु होने वाले वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद क्रेता/लाइसेंस धारक/पट्टेदार द्वारा संग्रह किये गये कर या अदा किये गये कर की राशि को निर्दिष्ट करते हुये निर्धारित प्रारूप में विवरण तैयार करना और प्रस्तुत करना |
जिस वर्ष के दौरान कर संग्रह या अदायगी की गयी है उसके बाद आने वाले वित्तीय वर्ष की 31 जुलाई (फार्म सं 26कध) |
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धारा 206ग(5घ) |
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आयकर विवरणी में दोष सुधार |
निर्धारण अधिकारी द्वारा सूचना की तिथि से 15 दिनों के भीतर या विस्तारित समय में |
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धारा 206गख(1) |
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धारा 206गख(1)(घ) के अंतर्गत देययोग्य/प्रतिदाय राशि को निर्दिष्ट करते हुए सूचना का प्रेषण |
वित्त वर्ष जिसमें धारा 206ग के अंतर्गत विवरण दाखिल होता है, की समाप्ति से एक वर्ष की अवधि के भीतर |
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धारा 211 (1) |
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निर्दिष्ट किस्तों में अग्रिम कर का भुगतान: |
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(क) कॉर्पोरेट करदाताओं के मामले में- |
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(i) कम से कम 15 फीसदी |
15 जून को या उससे पहले |
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(ii) कम से कम 45 फीसदी |
15 सितंबर को या उससे पहले |
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(iii) कम से कम 75 फीसदी |
15 दिसंबर को या उससे पहले |
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(iv) कम से कम 100 फीसदी |
15 मार्च को या उससे पहले |
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(ख) अन्य करदाताओं के मामले में- |
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(i) 30 फीसदी तक |
15 सितंबर को या उससे पहले |
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(ii) 60 फीसदी तक |
15 दिसंबर को या उससे पहले |
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(iii) 100 फीसदी तक |
15 मार्च को या उससे पहले |
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नोट: 31 मार्च को या उससे पहले किए गए अग्रिम कर के भुगतान को वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान किया गया अग्रिम कर माना जाएगा. |
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धारा 211(2) |
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धारा 210(3) और (4) के तहत आवश्यक, किस्त की नियत तिथि के बाद अग्रिम कर का उचित हिस्सा या पूरी राशि का भुगतान |
मांग नोटिस दिये जाने की तिथि के बाद धारा 211 (1) में निर्दिष्ट आने वाली प्रत्येक तिथि को या उससे पहले |
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धारा 220(1) |
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धारा 156 के तहत नोटिस के प्रत्युत्तर में अग्रिम कर के अलावा अन्य राशि का भुगतान करना |
मांग नोटिस दिये जाने के 30 दिनों के भीतर या अनुरोध पर राजस्व हित में विस्तारित तिथि के भीतर |
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धारा 220(2क) |
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धारा 220(2) के अंतर्गत देययोग्य ब्याज की छूट के लिए निर्धारिती के आवेदन को स्वीकार/निरस्त करने का आदेश |
उस महीने की समाप्ति से 12 महीनों के अंदर जिसमें आवेदन प्राप्त हुआ (1 जून, 2016 से लागू) नोट : 1 जून, 2016 को लंबित आवेदन से संबंधित आदेश 31 मई, 2017 को या उससे पहले पारित किया जा सकता है |
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धारा 239क(1) |
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धारा 195 के अंतर्गत स्त्रोत पर कर कटौती के प्रतिदाय के लिए निर्धारण अधिकारी के समक्ष डिडक्टर द्वारा आवदेन की प्रस्तुति |
केंद्र सरकार को टीडीएस के भुगतान से 30 दिनों के अंदर (प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022) |
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धारा 239क(4) |
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निर्धारण अधिकारी द्वारा आवेदन से संबंधित आदेश को पारित करना |
उस महीने की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर जिसमें आवेदन निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त हुआ (प्रभावी तिथि 1 अप्रैल, 2022) |
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धारा 245ग(1ड़) |
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जहाँ बही खातों, दस्तावेजों आदि को जब्त किया गया है, उप-धारा (1) के तहत निपटान आयोग के समक्ष निपटान के लिए आवेदन |
जब्ती के 120 दिन से पूर्व नहीं |
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धारा 245घ(1) |
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निपटान के लिए आवेदन की स्वीकृति/अस्वीकृति |
7 दिनों के भीतर, आवेदन प्राप्त होने के 14 दिनों के भीतर आवेदन किये जाने का औचित्य साबित करने के लिए आवेदक को नोटिस जारी किया जाएगा आवेदन से संबंधित स्वीकृत/अस्वीकृत करने का आदेश निर्गत किया जायेगा |
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धारा 245घ(2ख) |
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प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त से निपटान आयोग द्वारा रिपोर्ट मंगाया जाना |
आवेदन की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर |
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निपटान आयोग के समक्ष प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाना |
निपटान आयोग से संचार की तिथि से 30 दिनों के भीतर |
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धारा 245घ (2ग) |
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निपटान आयोग द्वारा आवेदन को अमान्य घोषित किया जाना |
प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त से रिपोर्ट प्राप्त होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर |
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धारा 245घ(3) |
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प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा आवेदन में शामिल किये गये मामलों में निपटान आयोग को एक रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाना |
निपटान आयोग से संचार की प्राप्ति की तिथि से 90 दिनों के भीतर |
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धारा 245घ(4क) |
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निपटान का आदेश पारित किया जाना |
जिस माह में आवेदन किया गया था उस माह के अंत से 18 माह के भीतर, यदि आवेदन 1-6-2010 को या उसके बाद किया जाता है (यदि आवेदन 1-6-2007 और 31-5-2010 के बीच किया जाता है, तो 12 माह) (धारा 245घ(2क) से (2घ) तक में निर्दिष्ट आवेदन के संबंध में: 31-3-2008 को या पहले) |
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धारा 245घ(6ख) |
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निपटान आयोग को प्रधान आयुक्त/आयुक्त/आवेदक द्वारा संशोधन आवेदन |
माह जिसमें धारा 245घ(4) के अंतर्गत आदेश पारित हुआ हैं, की समाप्ति से छह माह की अवधि के भीतर |
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रिकार्ड में उत्पन्न किसी त्रुटि के संशोधन के लिए निपटान आयोग के किसी आदेश का संशोधन |
तिथि, जिस पर धारा 245घ(4) के अंतर्गत आदेश पारित हुआ है, से छह माह की अवधि के भीतर अथवा माह जिसमें रिकॉर्ड से उत्पन्न किसी त्रुटि के संशोधन के लिए आवेदन प्रधान आयुक्त/आयुक्त/आवेदक द्वारा किया गया है, की समाप्ति से छह माह की अवधि के भीतर |
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धारा 245घ(7) |
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धारा 245घ(6) में प्रदत्त निपटान शून्य हो जाता है, कार्यवाही का समापन किया जाना |
जिस वित्तीय वर्ष में निपटान शून्य हो जाता है उस वित्तीय वर्ष के अंत से 2 साल के भीतर |
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धारा 245ड़, परंतुक |
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यदि 1-6-2007 से पूर्व आवेदन किया जाता है तो निपटान आयोग द्वारा पूर्ण कार्यवाही को दोबारा खोला जाना |
उन मामलों में कार्यवाहियों को पुन: खोला जाना संभव नहीं है जहां कार्यावही से संबंधित निर्धारण वर्ष के अंत से और धारा 245ग के तहत निपटान के लिए आवेदन की तिथि के बीच की अवधि 9 साल से अधिक है। |
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धारा 245ड़ |
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आयकर निपटान आयोग के समक्ष दाखिल लंबित आवेदन की निरस्ती |
वित्त अधिनियम, 2021 के प्रारंभ होने की तिथि से 3 महीनों के अंदर |
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धारा 245ड़क(2क) |
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विवाद समाधान आयोग के आदेश में दिए गए निर्देशों की पुष्टि करते हुए निर्धारण अधिकारी द्वारा दिया गया आदेश |
उस महीने की समाप्ति से 1 महीने के अंदर जिसमें विवाद समाधान आयोग का आदेश निर्धारण अधिकारी द्वारा प्राप्त हुआ है |
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धारा 245थ(3) |
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अग्रिम निर्णय के लिए आवेदन वापस लेना |
आवेदन की तिथि से 30 दिनों के भीतर |
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धारा 245द(6) |
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प्राधिकरण द्वारा अग्रिम निर्णय सुनाया जाना |
आवेदन प्राप्त होने के 6 माह के भीतर |
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धारा 245ब(1) |
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अग्रिम निर्णय बोर्ड के निर्णय या आदेश के विरूद्ध उच्च न्यायलय को अपीलार्थी या आयुक्त द्वारा अपील करना |
अग्रिम निर्णय बोर्ड के निर्णय या आदेश के संप्रेषण की तिथि से 60 दिनों के अंदर (इसे उच्च न्यायलय द्वारा 30 दिनों की अवधि के लिए बढ़ाया जा सकता है) |
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धारा 249 (2)/(3) |
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संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) को अपील दाखिल करना- |
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(क) धारा 195 के तहत स्रोत पर कर कटौती के संबंध में |
कर के भुगतान की तिथि से 30 दिनों के भीतर या विस्तारित समय के भीतर |
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(ख) किसी भी निर्धारण अथवा जुर्माने के संबंध में मांग |
नोटिस दिये जाने की तिथि से 30 दिनों के भीतर या विस्तारित समय के भीतर |
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(ग) किसी भी अन्य मामले में |
आदेश के संचार की तिथि से 30 दिनों के भीतर या विस्तारित समय के भीतर |
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धारा 250 (6क) |
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आयुक्त(अपील) द्वारा अपील का निपटान |
जिस वित्तीय वर्ष में अपील दाखिल की गयी है, की समाप्ति से एक वर्ष के भीतर (जहाँ यह संभव हो) |
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धारा 253 (3)/(5) |
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ट्रिब्यूनल को अपील दायर करना |
जिस आदेश के खिलाफ अपील की जानी है उसके संचार की तिथि से 60 दिनों के भीतर या विस्तारित समय के भीतर [धारा 158खग(ग) के तहत आदेश के विरूद्ध अफील के मामले में 30 दिनों के भीतर, धारा 132 के तहत शुरू की गयी तलाश या धारा 132क तहत की गयी मांग के संबंध में 30-6-1995 के बाद, लेकिन 1-1-1997 से पहले,] |
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धारा 253 (3क) |
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विवाद निस्तारण पैनल द्वारा जारी किए गए किसी भी निर्देश पर आपत्ति होने पर आयुक्त द्वारा ट्रिब्यूनल को अपील किया जाना |
क्रम विवाद समाधान पैनल के निर्देशों के अनुसरण में निर्धारण अधिकारी द्वारा पारित कर दिया है के खिलाफ अपील करने की मांग की जिस पर तिथि के 60 दिनों के भीतर |
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धारा 253 (4)/(5) |
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ट्रिब्यूनल को पार आपत्तियों का ज्ञापन दाखिल |
दाखिल अपील की सूचना प्राप्त होने की या विस्तारित समय के भीतर 30 दिनों के भीतर |
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धारा 254 (2) |
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न्यायाधिकरण द्वारा स्पष्ट गलती में सुधार |
निरस्तीकरण आदेश की तिथि से 4 साल के भीतर |
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धारा 254 (2क) |
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अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा धारा 253 की उपधारा (1)/(2) के तहत दायर अपील का निपटान करना |
जिस वित्तीय वर्ष में अपील दाखिल की गई की है, के अंत से 4 साल के भीतर (जहां संभव हो) जहाँ धारा 253(1) के तहत, दायर अपील से संबंधित कार्यवाही के स्थगन का आदेश दिया गया है, वहां न्यायाधिकरण ऐसे आदेश की तिथि से, 180 दिनों के भीतर अपील का निस्तारण करेगा या विस्तारित समय के भीतर जो 180 दिनों की मूल अवधि सहित 365 दिन से अधिक नहीं होगा, जिसके विफल होने पर स्थगन आदेश शून्य होगाय ऐसा उस स्थिति में भी होगा यदि अपील के निपटान में देरी करदाता के कारण नहीं है। |
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धारा 256(1) |
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(i) न्यायधिकरण को आवेदन प्रस्तुत करना जिसकी इसे किसी कानूनी प्रश्न के लिए उच्च न्यायलय को संदर्भित करने की आवश्यकता हो |
न्यायधिकरण के आदेश देने के 60 दिनों के अंदर या अधिक से अधिक 30 दिनों की बढ़ाई गई अवधि के अंदर |
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(ii) मामले का ब्यौरा तैयार करना और न्यायधिकरण को उच्च न्यायलय को संदर्भित करना |
आवेदन की प्राप्ति के 120 दिनों के अंदर |
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धारा 256(2) |
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उच्च न्यायलय को आवेदन करना यदि न्यायधिकरण मामले को निर्दिष्ट करने से मना करे |
मामले को निर्दिष्ट करने से मना करने के नेटिस को तामील करने की तिथि से 6 महीनों के अंदर |
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धारा 256(3) |
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न्यायधिकरण के मामले को निर्दिष्ट करने से मना करने के बाद शुल्क के प्रतिदाय का दावा करने के लिए निर्धारिती द्वारा आवेदन |
निरस्ती नोटिस की प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों के अंदर |
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धारा 260क |
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ट्रिब्यूनल के आदेश के विरूद्ध उच्च न्यायालय को अपील दाखिल करना |
आदेश के सम्प्रेषण की तिथि से 120 दिनों के भीतर |
नोट : उच्च न्यायालय 120 दिनों की कथित अवधि की समाप्ति के बाद अपील दाखिल कर सकता है यदि यह संतुष्ट करें कि कथित अवधि के भीतर दाखिल न करने के पीछे उचित कारण था
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धारा 263(2) |
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प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा राजस्व के प्रतिकूल आदेश में संशोधन किया जाना |
जिस वित्तीय वर्ष में संशोधित किये जाने की मांग करने वाला आदेश पारित किया गया था उसकी समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर |
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धारा 263 (3) |
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न्यायाधिकरण, राष्ट्रीय कर न्यायाधिकरण, उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा किसी भी तथ्य या निर्देश के अनुसार पारित आदेशों का प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा संशोधन |
कोई समय सीमा नहीं |
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धारा 264 (2) |
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अपने ही प्रस्ताव पर प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा आदेश में संशोधन (करदाता के प्रतिकूल नहीं) |
संशोधित किए जाने वाले आदेश के 1 वर्ष के भीतर |
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धारा 264 (3) |
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प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त को पुनरीक्षण याचिका दाखिल करना (आदेश करदाता के प्रतिकूल नहीं) |
संशोधित किए जाने की मांग करने वाले आदेश के संचार की तिथि से 1 वर्ष के भीतर या उसके संज्ञान की तिथि के भीतर या विस्तारित समय के भीतर |
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धारा 264 (6) |
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1-10-1998 को या उसके बाद करदाता द्वारा किए गए संशोधन के आवेदन पर आदेश पारित करना |
जिस वित्तीय वर्ष में आवेदन किया गया है उसकी समाप्ति से 1 वर्ष के भीतर |
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धारा 270कक(2) |
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धारा 270क के अंतर्गत जुर्माना लगाने से रोकने की अनुमति देने के लिए निर्धारण अधिकारी को आवेदन और धारा 276ग या धारा 276गग के अंतर्गत कार्यवाही करना |
महीने जिसमें ऐसा आदेश प्राप्त हुआ की समाप्ति से एक महीने के अंदर |
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धारा 270कक(4) |
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धारा 270कक(3) के अंतर्गत जुर्माने आदि लगाने से रोकने की अनुमति देने वाले निर्धारण अधिकारी द्वारा आदेश देना |
महीने जिसमें धारा 270कक(1) के अंतर्गत आवेदन प्राप्त हुआ, की समाप्ति से एक महीने के अंदर नोट : प्रभावी तिथि 01.04.2025 से, समय सीमा उस महीने की समाप्ति से तीन महीने होगी जिसमें धारा 270कक(1) के अंतर्गत आवेदन प्राप्त हुआ |
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धारा 271छख(4)(ख) |
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धारा 286 के अंतर्गत प्रस्तुत रिपोर्ट में गलती की सूचना देने और जुर्माना लगाने से बचने के लिए निर्धारित प्राधिकारी को सही रिपोर्ट करना |
गलती मिलने के 15 दिनों की अवधि के अंदर |
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धारा 273 क(4)( क) |
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जुर्माने को कम करने या छूट देने के लिए धारा 273क(4), पूर्ण रूप से या आंशिक तौर पर, के अंतर्गत दिए गए आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत करने के लिए आदेश देना |
उस महीने की समाप्ति से बारह महीनों के अंदर जिसमें आवेदन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त हुआ (ऐसा आदेश 1 जून, 2016 को लंबित आवेदन के मामले में 31 मई, 2017 को या उससे पहले पारित किया जा सकता है) |
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धारा 273 कक(3क) |
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जुर्माने से बचाने के लिए धारा 273कक(1) के अंतर्गत दाखिल किए गए गए आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत करने के लिए प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा आदेश देना |
उस महीने की समाप्ति से बारह महीनों के अंदर जिसमें आवेदन प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त हुआ (ऐसा आदेश 1 जून, 2016 को लंबित आवेदन के मामले में 31 मई, 2017 को या उससे पहले पारित किया जा सकता है) |
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धारा 275 (31.03.2025 तक) |
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अध्याय XXI के तहत जुर्माना लगाना: |
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(क) यदि जहां अपील संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) को की जाती है, और संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) द्वारा कोई आदेश पारित नही होता है |
वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले जिसमें कार्यवाही जो जुर्माने को बढाती हैं, कार्यवाही पूरी हो जाती है, या उस महीने की समाप्ति से 6 महीनों के भीतर जिसमें संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) का आदेश प्रधान आयुक्त/आयुक्त, जो भी अवधि बाद में समाप्त हो, द्वारा प्राप्त होता है। |
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(ख) यदि जहां अपील संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) को की जाती है, और संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) 01-06-2003 को या उसके बाद आदेश पारित करता है |
वित्त वर्ष जिसमें निर्धारण कार्यवाही पूरी होती है की समाप्ति से पहले या वित्त वर्ष की समाप्ति से 1 वर्ष के अंदर जिसमें संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) का आदेश प्रधान आयुक्त/आयुक्त, जो भी अवधि बाद में समाप्त होती हो, द्वारा प्राप्त होता है |
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(ग) उस मामले में जहाँ अपील न्यायाधिकरण को दायर की गयी है, |
वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले जिसमें कार्यवाही जो जुर्माने को बढाती हैं, कार्यवाही पूरी हो जाती है, या उस महीने की समाप्ति से 6 महीनों के भीतर जिसमें आयुक्त (अपील)/न्यायधिकरण का आदेश प्रधान मुख्य आयुक्त या मुख्य आयुक्त या प्रधान आयुक्त या आयुक्त, जो भी अवधि बाद में समाप्त हो, द्वारा प्राप्त होता है। |
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(घ) उस मामले में जहां प्रासंगिक निर्धारण या अन्य कोई आदेश धारा 263 (या धारा 264) के तहत संशोधन की विषय - वस्तु है। |
उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें संशोधन आदेश पारित किया गया है, |
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(ङ) किसी भी अन्य मामले में |
उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले जिसमें कार्यवाही (जिसके दौरान जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू की गई है) पूर्ण की गयी है या उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें, दंडात्मक कार्रवाई शुरू की गयी है, जो भी बाद में हो, |
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धारा 275 (01.04.2025 को या उसके बाद ) |
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अध्याय XXI के तहत जुर्माना लगाना: |
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(क) यदि जहां संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील)/न्यायधिकरण को कोई अपील न की गई हो |
तिमाही की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर जिसमें कार्यवाही जो जुर्माने को बढाती हैं, पूरी हो जाती है |
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(ख) यदि जहां अपील संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) को की जाती है, और न्यायधिकरण को कोई और अपील नही की जाती |
उस तिमाही की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर जिसमें संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील) का आदेश क्षेत्राधिकारी प्रधान आयुक्त/आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है |
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(ग) यदि जहां अपील न्यायधिकरण को की जाती है |
उस तिमाही की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर जिसमें न्यायधिकरण का आदेश क्षेत्राधिकारी प्रधान आयुक्त/आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है |
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(घ) उस मामले में जहां प्रासंगिक निर्धारण या अन्य कोई आदेश धारा 263 (या धारा 264) के तहत संशोधन की विषय - वस्तु है। |
उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें संशोधन आदेश पारित किया गया है |
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(ङ) किसी भी अन्य मामले में |
उस तिमाही की समाप्ति से 6 महीनों के अंदर जिसमें जुर्माने के अधिरोपण के लिए नोटिस जारी किया गया है |
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धारा 275(1क) (31.04.2025 तक ) |
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जुर्माना आरोपित करने/बढ़ाने/कम करने/रद्द करने या उन मामलों में जहाँ प्रासंगिक आदेश आयुक्त (अपील)/न्यायाधिकरण/ उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के लिए अपील का विषय है, अपीलीय/ न्यायालयी/संशोधन आदेश को प्रभावी करने के बाद संशोधित निर्धारण के आधार पर जुर्माने की कार्यवाही छोड़ना या संशोधन और जुर्माने को बढ़ाने या कम करने या जुर्माना रद्द करने या जुर्माना आरोपित करने की कार्यवाही को रोके जाने का आदेश, आदेश प्राप्त करने से पूर्व पारित हो जाने या संशोधन का आदेश पारित हो जाने, के पूर्व पारित किया जाना उस माह के अंत से 6 माह के भीतर जिसमें संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील)/ न्यायाधिकरण/ उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय का आदेश प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या संशोधन आदेश पारित हो जाता है |
इस महीने के अंत से 6 महीने के भीतर संयुक्त आयुक्त (अपील)/ आयुक्त (अपील)/न्यायधिकरण/उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय के आदेश प्रधान आयुक्त अथवा आयुक्त द्वारा प्राप्त होता है या संशोधन के आदेश पारित कर दिया है |
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धारा 275(2) (01.04.2025 को या उसके बाद ) |
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धारा 2 के अंतर्गत जुर्मान लगाने के लिए जुर्माना लगाना/बढ़ाना/कम करना/निरस्त करना या हटाना |
उस तिमाही के अंत से 6 महीने के भीतर जिसमें संयुक्त आयुक्त (अपील)/आयुक्त (अपील)/न्यायाधिकरण/उच्च न्यायालय/सर्वोच्च न्यायालय का आदेश क्षेत्राधिकार प्राप्त प्रधान आयुक्त या आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है या पुनरीक्षण आदेश पारित किया जाता है। |
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धारा 281ख(2) |
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करदाता की संपत्ति की अनंतिम संलग्नता |
संलग्नता, आदेश की तिथि से छह माह (जिसे 2 साल अथवा 60 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है मूल्यांकन अथवा पुन: मूल्यांकन की तिथि के पश्चात् जो भी बाद में हो) की समाप्ति के बाद प्रभावी नहीं रहेगी |
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धारा 281ख(4) |
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निर्धारण अधिकारी द्वारा अनंतिम तौर पर संलग्न संपत्ति की उचित बाजार कीमत को निर्धारित करने के लिए मूल्यांकन अधिकारी द्वारा रिपोर्ट देना |
ऐसे संदर्भ मिलने की तिथि से 30 दिनों की अवधि के अंदर |
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धारा 281ख(5) |
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बैंक गारंटी की प्रस्तुति पर संपत्ति की अनंतिम संलग्नता को हटाने के लिए एक आदेश (शर्तों के अनुसार) |
- बैंक गारंटी की प्राप्ति की तिथि से 45 दिनों के अंदर जहां मूल्यांकन अधिकारी को संदर्भ किया गया हो या - किसी अन्य मामले में बैंक गारंटी मिलने की तिथि से 15 दिनों के अंदर |
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धारा 281ख(7) |
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निर्धारण अधिकारी द्वारा बैंक गारंटी मांगना यदि निर्धारिती गारंटी को रिन्यू करने या नई गारंटी को प्रस्तुत करने में विफल रहता है |
गारंटी की समाप्ति से 15 दिन पहले |
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धारा 285 |
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फेमा-1999 के तहत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार, एक अनिवासी जिसका संपर्क कार्यालय भारत में है, द्वारा निर्धारित विवरण निर्धारित प्रपत्र में तैयार करना और सुपुर्द करना |
उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से 60 दिनों के भीतर |
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धारा 285ख |
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फिल्म निर्माताओं द्वारा विवरण प्रस्तुत किया जाना |
पिछले वर्ष की समाप्ति से 60 दिनों के अंदर |
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धारा 285खक |
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वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाता को दाखिल करना पहले वार्षिक सूचना विवरणी के तौर पर प्रसिद्ध |
वित्त वर्ष जिसमें लेनदेन पंजीकृत या रिकॉर्ड होता है के तुरंत बाद की 31 मई को या उससे पहले |
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धारा 285खक (4) |
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निर्धारित आयकर प्राधिकारी द्वारा आवश्यक के रूप में धारा 285खक के तहत दाखिल की गयी विवरणी में दोष सुधार किया जाना |
त्रुटि को सूचित करने की तिथि से 60 दिनों (अथवा ऐसा विस्तारित समय आवेदन पर स्वीकृत किया जा सकता है) के भीतर |
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धारा 285खक (5) |
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उस व्यक्ति द्वारा समय के भीतर विवरणी प्रस्तुत किया जाना जो निर्धारित आयकर प्राधिकरी के नोटिस के प्रत्युत्तर में धारा 285खक के तहत विवरणी प्रस्तुत करने में विफल रहा है |
नोटिस दिये जाने की तिथि से 30 दिन से अनधिक अवधि के भीतर |
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धारा 285खकक1 |
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सूचना देने वाले उद्यम द्वारा क्रिप्टो परिसंपत्ति के लेनदेन के संदर्भ में विवरण की प्रस्तुति |
ऐसे समय के अंदर जैसा निर्धारित है |
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धारा 286(2) |
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अंतर्राष्ट्रीय समूह जिसकी यह घटक कंपनी है, के संबंध में निर्धारित प्राधिकारी को वैकल्पिक रिर्पोंटिंग उद्यम, भारत में घरेलू, या मूल उद्यम द्वारा प्रत्येक रिर्पोटिंग लेखांकन वर्ष के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करना |
कथित रिर्पोटिंग लेखांकन वर्ष की समाप्ति से 12 महीनों की अवधि के अंदर |
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धारा 286(4) |
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किसी अंतर्राष्ट्रीय समूह (भारत में निवासी) की घटक इकाई [धारा 286(2) के अंतर्गत आने वाली इकाई के अलावा] के लिए की सूचना देने के लिए लेखा वर्ष के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करना, यदि मूल इकाई धारा 286(2) के अंतर्गत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए बाध्य नहीं है या मूल इकाई किसी ऐसे देश की निवासी है जिसके साथ भारत का रिपोर्ट के आदान-प्रदान आदि के लिए कोई समझौता नहीं है। |
आय की विवरणी की प्रस्तुति की देय तिथि को या उससे पहले जैसा धारा 139(1) में निर्दिष्ट है |
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धारा 286(6) |
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किसी सूचना देने वाले उद्यम द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की सत्यता को जांचने के िलिए निर्धारित प्राधिकारी को सूचना/दस्तावेज प्रस्तुत करना |
नोटिस के प्राप्ति की तिथि से 30 दिनों कें अदर (सूचना देने वाले उद्यम द्वारा दिए गए आवेदन के लिए निर्धारित प्राधिकारी अधिक से अधिक तीस दिनों की अग्रिम अवधि को तीस दिनों की अवध तक बढ़ा सकते हैं) |
प्रतिभूति लेनदेन कर [वित्त (सं. 2)] अधिनियम, 2004
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प्राधिकृत शेयर बाजार या म्यूचुयल फंड द्वारा विवरणी को प्रस्तुत करना |
वित्त वर्ष की समाप्ति के बाद 30 जून को या उससे पहले |
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मूल्यांकन करना |
प्रासंगिक वित्त वर्ष की समाप्ति से 2 वर्षों के अंदर |
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धारा 103 |
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गलती का संशोधन |
वित्त वर्ष जिसमें संशोधन किए जाने के आदेश को पारित किया गया था, की समाप्ति से एक वर्ष के अंदर |
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आयुक्त (अपील) को अपील करना |
निर्धारण अधिकारी के आदेश मिलने की तिथि से 30 दिनों के अंदर |
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न्यायधिकरण को अपील करना |
तिथि जिस पर अपील किए जाने के लिए आदेश की सूचना दी गई, से 60 दिनों के अंदर |
आयकर अधिनियम के अन्तर्गत निर्धारित परिमितता की अवधि पर एमसीक्यू
प्रश्न 1. लेखापाल से रिपोर्ट, जिसे, प्रत्येक व्यक्ति जो पिछले वर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन में दाखिल होता है द्वारा धारा 92ड़ के अंतर्गत प्रस्तुत करना आपेक्षित हैं, प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर को अथवा इससे पहले प्रस्तुत करना होगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
लेखापाल से रिपोर्ट, जिसे, प्रत्येक व्यक्ति जो पिछले वर्ष के दौरान अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन में दाखिल होता है द्वारा धारा 92ड के अंतर्गत प्रस्तुत करना आपेक्षित है, प्रासंगिक निर्धारण वर्ष की 30 नवंबर को अथवा इससे पहले प्रस्तुत करना होगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 2. धारा 115थक (3) के अनुसार शेयरों को वापस खरीदने के लिए घरेलू कंपनी की वितरित आय की स्थिति में सरकार के क्रेडिट हेतु कर शेयरों की वापसी खरीद पर शेयरधारकों हेतु किसी विचार के भुगतान की तिथि से ....................के भीतर जमा किया जाएगा
(क) 7 दिन (ख) 10 दिन
(ग) 14 दिन (घ) 30 दिन
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 115थक (3) के अनुसार शेयरों को वापस खरीदने के लिए घरेलू कंपनी की वितरित आय की स्थिति में सरकार के क्रेडिट हेतु कर शेयरों की वापसी खरीद पर शेयरधारकों हेतु किसी विचार के भुगतान की तिथि से 14 दिन के भीतर जमा किया जाएगा
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 3. धारा 285ख के अनुसार फिल्म निर्माता को वित्त वर्ष की समाप्ति से 30 दिनों के भीतर अथवा फिल्म की समाप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर, जो भी कम हो, विवरण प्रस्तुत करना चाहिए
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 285ख के अनुसार फिल्म निर्माता को वित्त वर्ष की समाप्ति से 30 दिनों के भीतर अथवा फिल्म की समाप्ति की तिथि से 30 दिनों के भीतर, जो भी कम हो, विवरण प्रस्तुत करना चाहिए
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 4. धारा 133क(3) के अनुसार आयकर प्राधिकरण कम से कम 15 दिनों (अवकाश को छोड़कर) के लिए प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान महानिदेशक/मुख्य आयुक्त/महानिदेशक/प्रधान आयुक्त/प्रधान निदेशक/आयुक्त/निदेशक की सहमति के बिना बही खातों, दस्तावेजों को जब्त कर सकते हैं
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (क)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 133क(3) के अनुसार आयकर प्राधिकरण कम से कम 15 दिनों (अवकाश को छोड़कर) के लिए प्रधान मुख्य आयुक्त/प्रधान महानिदेशक/मुख्य आयुक्त/महानिदेशक/प्रधान आयुक्त/प्रधान निदेशक/आयुक्त/निदेशक की सहमति के बिना बही खातों, दस्तावेजों को जब्त कर सकते हैं
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण सही है तथा इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है
प्रश्न 5. धारा 142क(6) के अनुसार महीने जिसमें धारा 142क(1) के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी द्वारा संदर्भ दिया जाता है, की समाप्ति से ...................... के भीतर निर्धारण अधिकारी को एक रिपोर्ट भेजनी चाहिए
(क) 12 माह (ख) 8 माह
(ग) 6 माह (घ) 2 माह
सही उत्तर : (ग)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 142क(6) के अनुसार महीने जिसमें धारा 142क(1) के अंतर्गत निर्धारण अधिकारी द्वारा संदर्भ दिया जाता है, की समाप्ति से 6 माह के भीतर निर्धारण अधिकारी को एक रिपोर्ट भेजनी चाहिए
इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है
प्रश्न 6. धारा 201(3) के अनुसार भारत में निवासी व्यक्ति से कर का पूर्ण अथवा कोई भाग कटौती करने में विफल रहने में व्यक्ति को डिफाल्ट निर्धारिती के तौर पर समझा जाने वाला आदेश चाहे विवरण भरा गया हो अथवा नहीं, वित्त वर्ष जिसमें भुगतान किया गया अथवा क्रेटिड दिया गया की समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर या वित्त वर्ष जिसमें संशोधन विवरण दिया जाता है, जो भी बाद में हो, की समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर पारित किया जाएगा
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 201(3) के अनुसार भारत में निवासी व्यक्ति से कर का पूर्ण अथवा कोई भाग कटौती करने में विफल रहने में व्यक्ति को डिफाल्ट निर्धारिती के तौर पर समझा जाने वाला आदेश वित्त वर्ष जिसमें भुगतान किया गया अथवा क्रेटिड दिया गया की समाप्ति से 7 वर्ष के भीतर या वित्त वर्ष जिसमें संशोधन विवरण दिया जाता है, जो भी बाद में हो, की समाप्ति से 2 वर्ष के भीतर पारित किया जाएगा
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है
प्रश्न 7. धारा 211(1) के अनुसार ..................को अथवा इससे पहले अग्रिम कर का भुगतान वित्त वर्ष के दौरान देय अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा
(क) 30 जून (ख) 30 सितम्बर
(ग) 31 दिसंबर (घ) 31 मार्च
सही उत्तर : (घ)
सही उत्तर की प्रमाणिकता :
धारा 211(1) के अनुसार 31 मार्च को अथवा इससे पहले अग्रिम कर का भुगतान वित्त वर्ष के दौरान देय अग्रिम कर के तौर पर समझा जाएगा
इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है
प्रश्न 8. धारा 281 ख के अंतर्गत करदाता की संपत्ति का अनंतिम संबंद्धता पर छह माह के पश्चात् तक समाप्ति प्रभाव होगा जिसे आदेश की तिथि से 2 साल तक बढ़ाया जा सकता है
(क) सही (ख) गलत
सही उत्तर : (ख)
सही उत्तर की प्रमाणिकता:
धारा 281 ख के अंतर्गत करदाता की संपत्ति का अनंतिम संबंद्धता पर छह माह (मूल्यांकन अथवा पुन: मूल्यांकन की तिथि के पश्चात् 2 वर्ष तक अथवा 2 वर्ष तक विस्तारनीय, जो भी कम हो) के पश्चात् तक समाप्ति प्रभाव होगा जिसे आदेश की तिथि से 2 साल तक बढ़ाया जा सकता है
चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

