आयकर कानून के तहत करदाता द्वारा प्रतिबद्ध विभिन्न चूकों के लिये जुर्माने लगाये जाते हैं। कुछ जुर्माने आवश्यक है और कुछ कर अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर है। इस भाग के, आप आयकर कानून के तहत लगाये जाने वाले विभिन्न जुर्मानों से सम्बन्धित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अस्वीकरण:

इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।

 

जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें।

 

 

“इस दस्तावेज़ में वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा संशोधित आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधान शामिल हैं।”

 

 

 

आयकर कानून के तहत दंड

 

प्रस्तावना

आयकर कानून के तहत, दंड करदाता द्वारा की गई विभिन्न चूक के लिए दंड लगाया जाता है। कुछ दंड अनिवार्य है और कुछ दंड अधिकारियों के विवेक पर निर्भर करते है। इस भाग में, आप आयकर अधिनियम के तहत लगाए गए विभिन्न दंड से सम्बंधित प्रावधानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आत्म मूल्यांकन कर का भुगतान करने हेतू विफलता के लिए दंड

धारा 140क(1) के अनुसार, ब्याज और शुल्क सहित बकाया कर (टीडीएस के लिए उधार की अनुमति के बाद, अग्रिम कर, आदि), धारा 234क, 234ख और 234ग (अगर है तो) के तहत ब्याज के साथ, आय के मुनाफा को भरने से पहले भुगतान किया जाना चाहिये। धारा 140क(1) के रूप में कर भुगतान, ''आत्म-मूल्यांकन कर'' कहलाता है।

धारा 140क(3) के अनुसार, अगर एक व्यक्ति पूरी तरह से या आंशिक रूप से आत्म-मूल्यांकन कर या ब्याज का भुगतान करने में विफल हो जाता है, तो उसे अवैतनिक राशि के सम्बंध में चूक होने में निर्धारती के रूप में देखा जाएगा। धारा 221(1) के अनुसार, अगर एक करदाता, चूक होने में एक मूल्यांकनकर्ता के रूप में देखा जाता है, तो उसे मूल्यांकन अधिकारी द्वारा लगाई गई राशि के दंड भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। हालांकि, दंड की बकाया राशि, बकाया में कर की राशि से अधिक नहीं हो सकती है।

धारा 221(1) के तहत दंड लगाने से पहले, कर अधिकारियों को, करदाता को सुनवाई का उचित अवसर देना होगा। संहिता भी जुर्माना नहीं लगाया जाएगा, अगर करदाता साबित कर देता है और कर अधिकारियों को संतुष्ट कर देता है कि चूक होने सही था और उसके होने के पीछे संहिता कारण था।

टिप्पणी : एक निर्धारिती केवल इसलिए धारा 221(1) के अंतर्गत किसी जुर्माने के लिए उत्तरदायी नही होगा कि उसने ऐसे जुर्माने के उदग्रहण से पहले कर का भुगतान कर दिया था।

*प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19 से, यदि निर्धारिती धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारितानुसार नियत तिथि के अंदर आय की विवरणी प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो धारा 234च के अनुसार उसे निम्न का शुल्क देने की आवश्यकता है

क) रू. 5000 यदि विवरणी निर्धारण वर्ष के 31 दिसंबर को या उससे पहले प्रस्तुत किया जाता है

ख) अन्य मामले में रू. 10,000। हालांकि, व्यक्ति की कुल आय रू. 5 लाख से अधिक नहीं होती तो देययोग्य शुल्क रू. 1000 होगी।

कर का भुगतान करने हेतू विफलता के लिए दंड

धारा 220(1) के अनुसार, जब धारा 156 के तहत एक मांग नोटिस, कर के भुगतान के लिए करदाता को जारी किया जाता है (अग्रिम कर के भुगतान के लिए नोटिस के अलावा अन्य), तो कुछ राशि, स्थान पर नोटिस की सेवा के 30 दिनों की अवधि के भीतर ही भुगतान करनी होगा और नोटिस में उल्लेखित व्यक्ति के लिए करनी होगी। कुछ निश्चित मामलों में, 30 दिनों की उक्त अवधि को नामित अधिकारियों के अनुमोदन के साथ कर अधिकारियों के द्वारा कम किया जा सकता है। अगर करदाता की ओर से कर में भुगतान को लेकर संहिता चूक होती है, तो दंडात्मक प्रावधानों के अलावा, चूक होने में एक मूल्यांकनकर्ता के रूप में उसे समझा जाएगा।

धारा 221(1) के अनुसार, अगर एक करदाता, चूक होने में एक मूल्यांकनकर्ता के रूप में देखा जाता है, तो उसे मूल्यांकन अधिकारी द्वारा लगाई गई राशि के दंड भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है। हालांकि, दंड की बकाया राशि, बकाया में कर की राशि से अधिक नहीं हो सकती है। इस प्रकार, धारा 221(1) के तहत दंड, एक सामान्य दंड है और बाकी मामलों में जुर्माना लगाया जा सकता है जो कि कर दाता, चूक होने में एक मूल्यांकनकर्ता के रूप में माना जाता है।

उक्त चर्चितानुसार दंड देने से पहले, कर अधिकारियों को करदाता को सुनवाई का उचित अवसर देना होगा। दंड नहीं लगाया जाएगा, अगर करदाता साबित कर देता है और कर अधिकारियों को संतुष्ट कर देता है कि चूक होने का संहिता सटीक कारण था।

टिप्पणी : एक निर्धारिती केवल इसलिए धारा 221(1) के अंतर्गत किसी जुर्माने के लिए उत्तरदायी नही होगा कि उसने ऐसे जुर्माने के उदग्रहण से पहले कर का भुगतान कर दिया था।

टीडीएस/टीसीएस बयान दाखिल करने में देरी के लिए देर से दाखिल की जाने वाली फीस

धारा 200(3) के अनुसार, स्रोत पर कर कटौती करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, टीडीएस मुनाफा यानि उसके द्वारा कर कटौती के संदर्भ में बयान दाखिल करने के लिए उत्तरदायी है। इसके अलावा, धारा 206C(3) के अनुसार, स्रोत पर कर जमा करने के लिए उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति, टीडीएस मुनाफा यानि उसके द्वारा कर एकत्रित करने के लिए संदर्भ में बयान प्रस्तुत करने के लिए है। धारा 234ड, टीडीएस/टीसीएस मुनाफा भरने में देरी के लिए देरी से जमा होने वाली फीस की वसूली के लिए प्रदान करता है।

धारा 243ड के अनुसार, जहां एक व्यक्ति, टीडीएस/टीसीएस मुनाफा दाखिल करने में विफल हो जाता है या इस संदर्भ में निर्धारित तिथि तक भर नहीं पाता है, तो वह भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, उसे विफल होने पर प्रतिदिन 200 रूपए के हिसाब से फीस अदा करनी होगी। देरी से भरी जाने वाले शुल्क, टीडीएस/टीसीएस की राशि से ज्यादा नहीं होनी चाहिये। टीडीएस/टीसीएस मुनाफा, ऊपर दिए गए विचारों के रूप में देरी से भरी जाने वाले शुल्क के भुगतान के बिना दाखिल नहीं जा सकती है।

आय की विवरणी को प्रस्तुत करने में गलती के लिए शुल्क

प्रभावी निर्धारण वर्ष 2018-19, यदि निर्धारिती, जिसे धारा 139 के अंतर्गत आय की विवरणी प्रस्तुत करना आवश्यक है, धारा 139(1) के अंतर्गत निर्धारितानुसार नियत तिथि के अंदर आय की विवरणी को प्रस्तुत नहीं कर पाता तो उसे निम्न शुल्क देना होगा

क) रू. 5000 यदि विवरणी निर्धारण वर्ष के 31 दिसंबर को या उससे पहले प्रस्तुत की जाती है

ख) रू. 10,000 अन्य किसी मामले में

हालांकि, यदि व्यक्ति की कुल आय रू. 5 लाख से अधिक नहीं होती तो देययोग्य शुल्क रू. 1000 होगा

धारा 142(1) या 143(2) के तहत जारी किए गए नोटिस का अनुपालन करने में विफलता के लिए दंड या धारा 142(2क) के तहत अंकेक्षण के निर्देश

धारा 272क के तहत दंड, जुर्माना लगता है अगर एक करदाता, धारा 143(2) या धारा 142(1) के तहत उसके लिए जारी नोटिस का अनुपालन करने में विफल रहता है या धारा 142(2क) के तहत जारी निर्देश का अनुपालन करने में विफल रहता है। धारा 272क के दंड प्रावधान को समझने से पहले, हमें धारा 142(1), 142(2क) और धारा 143(2) के प्रावधान का संक्षिप्त प्रारूप देखना होगा।

धारा 142(1) के तहत, मूल्यांकन अधिकारी, करदाता से निम्न के बारे में पूछने के लिए नोटिस जारी कर सकता है

• अगर उसने आय का मुनाफा नहीं भरा होगा या अपनी जरूरत के हिसाब से उत्पादित कुछ खातों और दस्तावेजों के लिए कारण पूछ सकता है,

• निर्धारित तरीके से सत्यापित और लेखन को प्रस्तुत कर सकता है, कुछ मुद्दों और प्रपत्र के रूप में सूचना (करदाता के उत्तरदायित्व और मूल्यांकन के बयान सहित, चाहे खाते में शामिल हो या नहीं), जो कि उसके लिए आवश्यक हो सकती है।

धारा 142(2क), विशेष अंकेक्षण के साथ सम्बंधित है। धारा 142(2क) के अनुसार, अगर धारा 142(2क) में दिए गए विशेष अंकेक्षण को न्यायोचित शर्तो से संतुष्ट है तो मूल्यांकन अधिकारी, कमिश्नर या मुख्य कमिश्नर के द्वारा नामित एक चार्टर्ड एकाउंटेंट से उसके खातों को अंकेक्षणे या पुनः अंकेक्षण करवाने के लिए करदाता को निर्देश दे सकता है।

धारा 143(2), धारा 143(3) के तहत सूक्ष्म परीक्षण मूल्यांकन आयोजन से पहले नोटिस के जारी होने के लिए सम्बंधित प्रावधानों के साथ व्यवहार करता है।

अगर करदाता, धारा 142(1) अथवा 143(2) के तहत उसके लिए नोटिस जारी करने के अनुपालन के लिए विफल हो जाता है या धारा 142(2क) के तहत जारी निर्देशों के साथ अनुपालन करने में विफल हो जाता है, तो धारा 271(1)(ख) के अनुसार, वह प्रत्येक विफलता के लिए 10,000 रूपए का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा।

आय को छुपाने या आय का गलत विवरण प्रस्तुत करने के लिए जुर्माना

कई बार, एक करदाता आय को कम बताकर या आय का गलत विवरण देकर अपनी करदेयता को कम करने का प्रयास करता है। ऐसे मामले में, धारा 270क के कारण से, करदाता जुर्माने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जुर्माने की दर आय को कम बताने पर देययोग्य कर का 50 प्रतिशत होगी। हालांकि, यदि जहां आय की गलत सूचना का नतीजा कम बताना हो तो करदाता ऐसी गलत सूचित आय पर देययोग्य कर के दो सौ प्रतिशत की दर पर जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा।

कम आय बताना

एक व्यक्ति को निम्नलिखित मामलों में अपनी आय को कम बताने वाला समझा जाएगा :

मामले सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत मूल्यांकित आय एमएटी/एएमटी प्रावधानों के अंतर्गत मूल्यांकित आय
आय की विवरणी दाखिल की गई हो मूल्यांकित आय धारा 143(1)(क) के अंतर्गत संसाधित विवरणी में निर्धारित आय से अधिक हो धारा 115´ख/115´ग के प्रावधानों के अनुसार मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित विचारित कुल आय धारा 143(1)(क) के अंतर्गत मूल्यांकित विवरणी में निर्धारित विचारित कुल आय से अधिक है
धारा 148 के अंतर्गत पहली बार के लिए आय की विवरणी दाखिल या विवरणी दाखिल नहीं की जाती मूल्यांकित आय अधिकतम छूट सीमा से अधिक है धारा 115´ख/115´ग के प्रावधानों के अनुसार मूल्यांकित विचारित कुल आय अधिकतम छूट सीमा से अधिक है
पुर्नमूल्यांकन के मामले पुर्नमूल्यांकित आय ऐसे पुर्नमूल्यांकन से तुरंत पहले निर्धारित या पुर्ननिर्धारित आय से अधिक है धारा 115´ख/115´ग के प्रावधानों के अनुसार पुर्नमूल्यांकित विचारित कुल आय ऐसे पुर्नमूल्यांकन से तुरंत पहले निर्धारित या पुर्ननिर्धारित विचारित कुल आय से अधिक है
मूल्यांकित हानि मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित, हानि को कम करने या ऐसी हानि को आय में परिवर्तित करने पर प्रभावी हो मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित, हानि को कम करने या ऐसी हानि को आय में परिवर्तित करने पर प्रभावी हो

आय की गलत सूचना

निम्नलिखित मामलों को आय की गलत सूचना के तौर पर समझा जाएगा :

1. तथ्यों की गलत सूचना या उनको छुपाना

2. बही खातों में निवेश को रिकॉर्ड न कर पाना

3. व्यय का दावा किसी प्रमाण द्वारा प्रमाणित न होती हो

4. बही खातों में किसी गलत एंट्री को दर्ज किया हो

5. कुल आय धारक वाले बही खाते में किसी प्राप्ति का रिकॉर्ड न दे पाए और

6. किसी अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन या एक अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन समझे जाने वाला लेनदेन या कोई निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन जिस पर अध्याय X लागू होते हैं को रिकॉर्ड करने में विफलता

यदि एक एकाधारिवत कंपनी अपने शेयरों को इसकी उचित बाजार कीमत (एफएमवी) से अधिक मूल्य पर जारी करती है तो यह आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(viiख) के अनुसार शेयरों के निर्गम मूल्य और एफएमवी के बीच के अंतर पर कर देने के लिए उत्तरदायी होगी। ऐसे कर को साधारण भाषा में "ऐंजल टैक्स" का नाम दिया जाता है। हालांकि, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) ने अधिसूचना सं. 127(ई), दिनांक 19-02-2019 को जारी किया है जिससे एक योग्य स्टार्ट-अप को ऐंजल टैक्स से छूट मिलेगी यदि वह ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करती हो

अधिसूचना में निर्दिष्ट शर्तों के अनुपालन को सुनिश्चित करने को देखते हुए, वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 इस बात पर जोर देता है कि अधिसूचना में निर्दिष्ट शर्तों का अनुपालन न करने पर शेयरों के निगर्मन पर प्राप्त प्रतिफल जैसा ऐसे शेयरों की उचित बाजार कीमत से अधिक है, उस पिछले वर्ष के लिए कर हेतु वसूलनीय कंपनी की आय के तौर पर समझी जाएगी जिसमें ऐसी चूक की गई थी। आगे, यह समझा जाएगा कि कंपनी ने कथित आय की गलत सूचना दी और तद्नुसार, गलत बताई गई आय (यानी शेयरो के निगर्मन मूल्य और उचित बाजार कीमत के बीच का अंतर) पर देययोग्य कर के 200 प्रतिशत के बराबर की राशि का जुर्माना धारा 270क के अनुसार लगाया जाएगा।

कम बताई गई आय की गणना

कम बताई गई आय की राशि की गणना निम्नानुसार की जाएगी :

1. जहां आय को पहली बार मूल्यांकित किया जाता है और आय की विवरणी को निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया हो तो मूल्यांकित आय की राशि और धारा 143(1) के अंतर्गत विवरणी के प्रसंस्करण के बाद निर्धारित आय की राशि के बीच के अंतर को कम बताई गई आय के तौर पर समझा जाएगा

2. जहां आय को पहली बार मूल्यांकित किया जाता है और निर्धारिती की ओर से किसी आय की विवरणी को प्रस्तुत नहीं किया गया हो या विवरणी को धारा 148 के अंतर्गत पहली बार निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत किया गया था तो मूल्यांकित आय की राशि और निर्धारिती के मामले में लागू होने वाली मूल छूट की सीमा के बीच के अंतर को कम बताई गई आय के तौर पर समझा जाएगा

3. जहां आय को पहली बार मूल्यांकित न किया गया हो तो मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित आय की राशि और मूल्यांकित, पुर्नमूल्यांकित या पूर्ववर्ती क्रम में दुबारा आंकी गई आय की राशि के बीच के अंतर को कम बताई गई आय के तौर पर समझा जाएगा।

4. यदि एक मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित का विवरणी में बताई गई हानि को कम करने या उस हानि को आय में रूपांतरित करने पर प्रभावी हो तो कम बताई गई आय की राशि को दावा की गई हानि और आय या हानि, जो भी मामला हो, के बीच के अंतर को मूल्यांकित या पुर्नमूल्यांकित किया जाएगा

5. जहां न्यूनतम वैकल्पिक कर (एमएटी) या वैकल्पिक न्यूनतम कर (एएमटी) के प्रावधानों के अनुसार आय को मूल्यांकित किया जाता हो तो कम बताई गई आय को निम्नलिखित सूत्र के द्वारा आंका जाएगा

(ए-बी) + (सी-डी) जहां,

ए = धारा 115ञख या धारा 115ञग में शामिल प्रावधानों को छोड़कर प्रावधानों के अनुसार मूल्यांकित कुल आय (यहां इसे सामान्य प्रावधान कहा गया)

बी = कुल आय जो प्रभार्य होती सामान्य प्रावधानों के अनुसार निर्धारित कुल आय को कम बताई गई आय की राशि द्वारा कम किया गया था

सी = धारा 115ञख या 115ञग में शामिल प्रावधानों के अनुसार निर्धारित कुल आय

डी = कुल आय जो प्रभार्य होती धारा 115ञख या धारा 115ञग में शामिल प्रावधानों के अनुसार निर्धारित कुल आय को कम बताई गई आय की राशि द्वारा कम किया गया था

यदि किसी मुद्दे पर कम बताई गई आय की राशि पर दोनों धारा 115ञख या धारा 115ञग में शामिल प्रावधानों और सामान्य प्रावधानों के अंतर्गत विचार किया जाता है तो ऐसी राशि को मद घ के अंतर्गत राशि को निर्धारित करने के दौरान निर्धारित कुल आय से कम नहीं किया जाएगा।

नोट : वित्त अधिनियम, 2026 द्वारा, 01-03-2026 से प्रभावी, धारा 270क के अंतर्गत एक नई उपधारा (11क) जोड़ी गई है, जिसके अनुसार धारा 148 के अंतर्गत जारी नोटिस के अनुपालन में दाखिल की गई अद्यतन विवरणी में घोषित अतिरिक्त आय, धारा 270क के अंतर्गत दंड अधिरोपित किए जाने का आधार नहीं बनेगी।

 

धारा 44कक के तहत आवश्यकतानुसार, रखरखाव या खाते की किताबों, दस्तावेजों ,आदि ,के प्रबंधन में विफलता के लिए दंड

आयकर अधिनियम के उद्देश्य के लिए, एक करदाता को धारा 44कक में प्रदान के रूप में खाते की पुस्तकों को बनाएं रखने के लिए आवश्यक है। अगर करदाता, धारा 44कक के प्रावधान के अनुसार, खाते की किताबों का रखरखाव करने में विफल है, तो उसे धारा 271कक के तहत जुर्माना भरना पड़ सकता है। धारा 271क के तहत जुर्माना राशि 25,000 रू. है।

अतंर्राष्ट्रीय लेनदेन अथवा निर्दिष्ट घरेलू लेनदेन के संबंध में जानकारी तथा दस्तावेजों आदि को सुरक्षित व बनाए रखने के लिए जुर्माना

धारा 92घ प्रदान करता है कि अंतरराष्ट्रीय लेन-देन या विशिष्टि घरेलू लेन-देन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नियम 10घ के तहत इस संदर्भ में निर्धारित किया जा सकता है। आगे एक व्यक्ति, एक अंतर्राष्ट्रीय समूह की घटक ईकाई के तौर पर, एक अंतर्राष्ट्रीय समूह के संबंध में ऐसी सूचना और दस्तावेजों, जिसे निर्धारित किया जा सकता है, को सुरक्षित रखेगा। आयकर प्राधिकरण, इन दस्तावेजों को बनाने के लिए करदाताओं की आवश्यकता हो सकती है। करदाता आयकर प्राधिकरण के द्वारा मांग पर, 30 दिनों या बढ़ी हुई अवधि के दौरान इन दस्तावेजों को प्रदान करने के लिए, कर अधिकारियों के द्वारा अनुमति दी जाती है। यह किसी दस्तावेज, मूल्यांकन वर्ष के अंत में 8 सालों की अवधि के लिए बनाएं रखे जाने चाहिये।

विशिष्ट घरेलू लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के संदर्भ में दस्तावेजों और जानकारी को प्रबंधित करने और रखने के लिए विफलता के लिए दंड हेतू सम्बंधित प्रावधान, धारा 271कक में दिया गया है। धारा 271कक के तहत दंड, निम्मलिखित विफलताओं में से किसी एक मामले में दिया जाता है:

1) अगर व्यक्ति नियम 10घ के साथ पठित धारा 92घ में प्रदान के रूप में विशिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के संदर्भ में दस्तावेजों और जानकारी को प्रबंधित करने और रखने के लिए विफल हो जाता है।

2) अगर एक व्यक्ति विशिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को रिपोर्ट करने के लिए विफल हो जाता हो, जो करने के लिए आवश्यक हो।

3) अगर एक व्यक्ति, विशिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में गलत दस्तावेजों या जानकारियों को प्रस्तुत या प्रबंधित करता है।

दंड करदाता के द्वारा प्रत्येक विशिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन प्रवेश के मूल्य के 2 प्रतिशत के लिए कुल बराबर होगा।

यदि कोई व्यक्ति, अंतर्राष्ट्रीय समूह के संबंध में सूचना तथा दस्तावेज को प्रस्तुत करने में विफल रहने वाले अंतर्राष्ट्रीय समूह की संघटक उद्यम के तौर पर (जैसा धारा 92घ में संदर्भित है), वह रू. 5,00,000 का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी हो सकता है।

खोज के मामले में दंड

अघोषित आय का पता लगाने के लिए, कर प्राधिकरण, अक्सर करदाता के परिसर में खोज का संचालन करते है। धारा 132 वह स्थितियां प्रदान करती है जिसमें कर अधिकारी, एक खोज को आरम्भ कर सकते है। अगर एक खोज कर ली जाती है और इस खोज में अघोषित आय का पता लगा लिया जाता है, तो दंड, धारा 271ककख के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है।

धारा 271ककख के तहत दंड की मात्रा, निम्न प्रकार निर्धारित होगी

1) जहां खोज 01.07.2012 को या उसके बाद प्रारंभ की गई हो लेकिन तिथि जिस पर करदाधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली हो (यानी 16.12.2016) से पहले

क) निर्दिष्ट पूर्व वर्ष की अघोषित आय का 10 प्रतिशत, यदि निर्धारिती अघोषित आय को स्वीकार करता है उस तरीके को सिद्ध करते हुए जिसमें यह प्राप्त हुई और कर देने की निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले, उसपर ब्याज सहित और ऐसी अघोषित आय की घोषणा करने के पिछले निर्दिष्ट वर्ष के लिए आय की विवरणी को प्रस्तुत करता है।

ख) निर्दिष्ट पूर्व वर्ष की अघोषित आय का 20 प्रतिशत, यदि निर्धारिती अघोषित आय को नहीं स्वीकारता और निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले पिछले निर्दिष्ट वर्ष के लिए आय की विवरणी में ऐसी आय की घोषणा करता है और उसके ब्याज सहित कर भुगतान करता है ।

ग) निर्दिष्ट पिछले वर्ष की अघोषित आय का 60 प्रतिशत, अगर वह उक्त (क) और (ख) के द्वारा कवर नहीं हो पाता है।

2) यदि खोज उस तिथि को या उसके बाद की गई हो जिस पर कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती हो (यानी 01.09.2024 से पहले)

क) निर्दिष्ट पिछले वर्ष की अधोषित आय का 30 प्रतिशत यदि निर्धारिती अघोषित आय को स्वीकार करता है उस तरीके को सिद्ध करते हुए जिसमें यह प्राप्त हुई और कर देने की निर्दिष्ट तिथि को या उससे पहले, उसपर ब्याज सहित और ऐसी अघोषित आय की घोषणा करने के पिछले निर्दिष्ट वर्ष के लिए आय की विवरणी को प्रस्तुत करता है

ख) निर्दिष्ट पिछले वर्ष की अघोषित आय का 60 प्रतिशत यदि यह उक्त प्रावधानों में कवर न हो

बही खाते में 'गलत एंट्री' के लिए जुर्माना

वित्त अधिनियम 2020 ने एक व्यकित पर जुर्माने को लगाने के लिए अधिनियम के अंर्तगत एक नई धारा 271ककघ को शामिल किया है यदि अधिनियम के अंतर्गत किसी कार्यवाही के दौरान यह पाया जाता है कि उसके बही खातों में :

क) एक गलत एंट्री हो या

ख) ऐसे व्यक्ति की कुल आय की गणना के लिए कोई प्रासंगिक एंट्री कर देने से बचने के लिए की गई हो

ऐसे व्यक्ति द्वारा देययोग्य जुर्माना गलत एंट्री या की छोड़ी गई एंट्री के कुल राशि के बराबर होगी।

यह भी बताया जाता है कि कोई अन्य व्यक्ति, जो किसी भी कारण से गलत एंट्री करता है या करने का प्रयास करता है या किसी एंट्री को छोड़ता है या छोड़ने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माने के तौर पर ऐसी गलत एंट्री या छोड़ी गई एंट्री के लिए कुल राशि के बराबर जुर्माना देना होगा।

धारा 271ककघ के लिए, निम्न को शामिल करने या शामिल करने के इरादे से गलत एंट्री :

क) गलत या झूठे दस्तावेज जैसे गलत रसीद या सामान्य रूप से गलत दस्तावेजी प्रमाण

ख) उत्पादों या सेवाओं की आपूर्ति या प्राप्ति या ऐसे उत्पादों या सेवाओं या दोनों की वास्तविक आपूर्ति या प्राप्ति के बिना व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिए गए उत्पाद या सेवाएं या दोनों के संदर्भ में रसीद या

एक व्यक्ति जो मौजूद नही है से उत्पाद या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति या प्राप्ति के संदर्भ में रसीद

धारा 35/धारा 80छ के अंतर्गत निर्धारित ब्यौरे/प्रमाणपत्र को जमा करने में गलती के परिणाम

वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा यह बताने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 35 को संशोधित किया गया है कि इस धारा के अंतर्गत उपलब्ध कटौती अनुसंधान संघ, विश्वविद्यालय, कॉलेज या अन्य संस्थान या कंपनी को उपलब्ध होगी यदि निर्धारिती दान का ब्यौरा देता हो, जैसाकि बोर्ड द्वारा निर्धारित है और दानकर्ताओं के दान की राशि का प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करता है। इसी प्रकार के संशोधन यह मुहैया कराने के लिए धारा 80छ मे भी किए गए है कि उद्यम जो दान प्राप्त करते है उनको प्राप्त दान का ब्यौरा देना आवश्यक है और दानकर्ता को प्रमाणपत्र जारी करेगा।

प्रावधान के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए, वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा एक नई धारा 234छ को शामिल किया जा चुकाहै जो प्रतिदिन रू. 200 के हिसाब से उदग्रहण मुहैया कराता है यदि करादाता निर्धारित समय के अंदर ऐसा ब्यौरा या प्रमाणपत्र जमा करने में विफल होता है। हालांकि, शुल्क उस राशि से अधिक नही होगा जिसके संदर्भ में विफलता हुई है। ऐसा शुल्क प्रमाणपत्र की प्रस्तुति से पहले या ऐसे ब्यौरे को जमा करन से पहले, जो भी मामला हो, दिया जाएगा।

तद्नुसार, एक नई धारा 271ट को अधिनियम में शामिल किया गया है जो निर्धारिती को रू. 10,000 से रू. 1 लाख के जुर्माने को लगाने के लिए निर्धारण अधिकारी को अधिकार प्रदान करती है यदि निर्धारिती ब्यौरे को प्रस्तुत करने में विफल होता है या एक प्रमाणपत्र को प्रस्तुत करने में विफल होता हैे।

फेसलेस ई-जुर्माना

ऐसे मामलों में मानवीय दखलअंदाजी को कम करने के उद्देश्य से ई-निर्धारण योजना के लिए ई-जुर्माना योजना को लागू किया गया है।

आयकर अधिनियम की धारा 274 निर्धारिती पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया को निर्धारित करता है। वित्त अधिनियम, 2020 में केंद्र सरकार को जुर्माना लगाने के लिए एक ई-योजना को अधिसूचित करने के लिए प्राधिकृत करने हेतु धारा 274 में एक नई उप-धारा 2(क) को शामिल किया जा चुका है ताकि निम्न द्वारा उपयुक्त दक्षता, पारदर्शिता और जबावदेही को लागू किया जा सके :

क) उस सीमा तक जहां यह तकनीकी रूप से संभव हो सके कि कार्यवाही के दौरान निर्धारण अधिकारी और निर्धारिती के बीच इंटरफेस को समाप्त किया जा सके

ख) मापक और कार्यत्मक विश्ोषज्ञता की सुव्यवस्था के माध्यम से संसाधनों का अधिक से अधिक प्रयोग

ग) सक्रिय क्षेत्राधिकार जिसमें जुर्माना एक या एक से अधिक कर प्राधिकारियों द्वारा अधिरोपित किया जाता है, में जुर्माने के अधिरोपण के तंत्र को आंरभ करना

इस संदर्भ में केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक निर्देश 31.03.2022 तक दिए जा सकते हैं। निर्देशों द्वारा यह निर्दिष्ट किया जा सकता है कि क्षेत्राधिकार से संबंधित इस अधिनियम के कोई प्रावधान और जुर्माना लगाने की प्रक्रिया लागू नही होंगे या ऐसे अपवाद, संशोधन और रूपांतरों के साथ लागू होंगे।

अघोषित स्त्रोत से आय की स्थिति में जुर्माना

निर्धारण अधिकारी धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग या धारा 69घ के अंतर्गत एक निर्धारिती की आय हेतु वृद्धि कर सकता है यदि निर्धारिती उसकी आय के स्त्रोत और रूप को स्पष्ट नहीं कर पाता।

आयकर अधिनियम (कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2016 के मार्फत प्रभावी निर्धारण वर्ष 2017-18 से शामिल) की धारा 271ककग निर्धारण अधिकारी को धारा 115खखड़ के अंतर्गत देययोग्य कर के 10 प्रतिशत की दर पर जुर्माना वसूलने का अधिकार देती है यदि कोई भी वृद्धि धारा 68, धारा 69, धारा 69क, धारा 69ख, धारा 69ग, धारा 69घ को सशक्त करता है। हालांकि, कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा यदि ऐसी आय आय की विवरणी में घोषित की जाती है और ऐसी आय पर कर प्रासंगित निर्धारण वर्ष की समाप्ति को या उससे पहले धारा 115खखड़ के अंतर्गत दिया जाता है।

धारा 44कख के तहत आवश्यकतानुसार अंकेक्षण की एक रिपोर्ट को समाप्त करने या खाते का अंकेक्षण करने के लिए विफलता

जब करदाता के खाते को अंकेक्षण किया जाता है तो धारा 44कख निर्धारित होती है। अगर एक करदाता, धारा 44कख की आवश्यकता के बावजूद, अपने खातों का अंकेक्षण करने में विफल हो जाता है, तो वह धारा 271ख के तहत दंड के लिए उत्तरदायी हो सकता है। धारा 271ख के तहत दंड, धारा 44कख के तहत आवश्यकतानुसार जरूरत के रूप् में अंकेक्षण की रिपोर्ट को प्रस्तुत करने के लिए खाते का अंकेक्षण या विफलता को प्राप्त करने के लिए विफलता हेतू उत्तरदायी होगा। दंड, कुल ब्रिकी, खरीद ब्रिकी दर या सकल प्राप्ति, आदि या 1,50,000 रूपए, जो भी कम होगा, उसका आधा प्रतिशत होगा।

धारा 92ड के तहत आवश्यकतानुसार अंकेक्षण की एक रिपोर्ट को प्रस्तुत करने या खाते का अंकेक्षण करने के लिए विफलता

धारा 92ड प्रदान करता है कि प्रत्येक व्यक्ति, एक अंतरराष्ट्रीय लेन - देन या निर्दिष्ट घरेलू लेन - देन में प्रवेशित होने पर, इस संदर्भ में निर्धारित तिथि से पूर्व या उसी पर संदर्भित प्रपत्र में एक चार्टर्ड एकांउटेंट से एक रिर्पोट प्राप्त कर सकता है। अगर एक करदाता ऐसा करने में विफल हो जाता है, तो उसे धारा 271खक के तहत दंड का भगुतान करने के लिए उत्तरदायी होना पड़ सकता है। धारा 271खक के तहत दंड, धारा 92ड के द्वारा आवश्यकतानुसार एक चार्टर्ड एकाउंटेंड से एक रिर्पोट पेश करने में विफलता के लिए 1,00,000 रूपए है।

स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहने पर जुर्माना

यदि कोई व्यक्ति स्रोत पर कर कटौती करने में विफल रहता है जैसा कि अध्याय XVII-ख के प्रावधानों के तहत आवश्यक है या कर कटौती करने में विफल रहता है, तो उसे धारा 271ग के तहत दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

इसके अलावा, जुर्माना भी लगाया जाएगा यदि कोई व्यक्ति धारा 115ण(2), धारा 194द(1) के पहले प्रावधान, धारा 194ध(1) के प्रावधान या धारा 194खक(2) के अनुसार आवश्यक कर का भुगतान करने या भुगतान सुनिश्चित करने में विफल रहता है।

लॉटरी अथवा वर्ग पहेली से जीत के संबंध में कर भुगतान में असफलता के लिए जुर्माना

धारा 194ख उपलब्ध कराता है कि (दस हजार रूपए) से अधिक की राशि के किसी लॉटरी अथवा वर्ग पहेली अथवा कॉर्ड खेल तथा किसी भी प्रकार का अन्य खेल से जीत के रूप में किसी व्यक्ति को किसी आय को भुगतान करने वाले उत्तरदायी व्यक्ति को उसके भुगतान के समय बाध्य रूप से उस पर दरों के अनुसार आयकर कटौती करानी होगी

धारा 194ख का दूसरा प्रावधान उपलब्ध कराता है कि जीत पूर्ण प्रकार से अथवा कोई भाग नकद के रूप अथवा भाग के रूप में हो लेकिन भाग नकद के रूप में हो जो जीत की पूर्णता के संबंध में कर की कटौती की देयता को उचित प्रकार से पूरा न करता हो तो भुगतान के उत्तरदायी व्यक्ति, जीत की प्रस्तुति से पूर्व, सुनिश्चित करना होगा कि कर को जीत के संबंध में भुगतान किया गया है

यदि कोई व्यक्ति धारा 194ख के दूसरे प्रावधान के अंतर्गत आपेक्षितानुसार कर के पूरे अथवा किसी भाग के भुगतान में असफल रहता है तो ऐसे व्यक्ति को भुगतान न किए गए कर के समान राशि के जुर्माने का भुगतान धारा 271ग के अनुसार करना होगा

स्रोत पर कर जमा करने हेतु विफलता के लिए दंड

स्रोत पर कर कटौती के प्रावधान के समान ही, धारा 206ग इसी संदर्भ में निश्चित मदों को प्रदान करती है जो कि कर, निश्चित निर्दिष्ट मदों के संदर्भ में व्यक्ति को प्राप्त भुगतान के द्वारा स्रोत पर एकत्रित किया जाता है। अगर व्यक्ति, कर को एकत्रित करने के लिए स्रोत विफलता पर करने के लिए आवश्यक है, तो उस पर धारा 271गक के तहत दंड का भुगतान करने का उत्तरदायित्व होगा। दंड, गैर-एकत्रित कर के बराबर राशि पर लगाया जाएगा।

धारा 269धध के उपबंधों के उल्लंघन में निर्दिष्ट राशि अथवा कुछ ऋण और जमा करना या स्वीकार करना

धारा 269धध मुहैया कराता है कि कोई व्यक्ति एक बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग सिस्टम का प्रयोग करते अथवा खाते मे देय चेक अथवा खाते मे देय डिमांड ड्राफ्ट को छोड़कर किसी अन्य विधि द्वारा या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके के द्वारा जिसको निर्धारित किया जा सके रू. 20,000 से अधिक की निर्दिष्ट राशि को अथवा ऋण अथवा जमा को नहीं लेगा अथवा स्वीकृत नहीं करेगा

निर्दिष्ट राशि का अर्थ कोई प्राप्तनीय राशि, चाहे उधार हो अथवा अन्यथा, एक अचल संपत्ति के स्थानांतरण के संबंध में, चाहे स्थानांतरण हुआ हो अथवा नहीं

धारा 269धध के प्रावधानों का उल्लंघन धारा 271घ के अंतर्गत जुर्माने का कारण होगा। धारा 271घ के अंतर्गत जुर्माना लिए अथवा स्वीकृत ऋण अथवा जमा के समान राशि पर लगाया जाएगा।

नकद में रू. 2 लाख की राशि की प्राप्ति पर जुर्माना

धारा 269धन (प्रभावी तिथि 01/04/2017 से वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा शामिल) मुहैया कराता है कि कोई व्यक्ति रू. 2,00,000 या उससे अधिक की राशि प्राप्त नहीं करेगा -

(क) एक दिन में एक व्यक्ति द्वारा कुल राशि

(ख) एकल लेनदेन के संदर्भ में या

(ग) एक व्यक्ति से एक घटना या अवसर से संबंधित लेनदेन के संदर्भ में

एक बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली का प्रयोग या अकाउंट में देय चेक या अकाउंट में देय बैंक ड्राफ्ट को छोड़कर या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके के द्वारा जिसको निर्धारित किया जा सके

हालांकि, कथित सीमितता सरकारी, किसी बैंकिंग, डाकघर बचत बैंक, सहरकारी बैंक या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित एक व्यक्ति के लिए लागू नहीं होगा

हालांकि, 271घक को उस एक व्यक्ति पर जुर्माना लगाने के लिए मुहैया कराया गया है जो धारा 269धन के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए राशि प्राप्त करता है। जुर्माना ऐसी प्राप्ति की राशि के बराबर होगा। हालांकि, जुर्माना नहीं लगाया जाएगा अगर व्यक्ति यह सिद्ध कर देता है कि ऐसा उल्लंघन करने का सही और उपयुक्त कारण था।

भुगतान की निर्धारित इलैक्ट्रानिक विधियों के माध्यम से उसे स्वीकृत करने की सुविधा न देने पर जुर्माना

वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा प्रभावी तिथि 1नवंबर, 2019 से आयकर अधिनियम में नई धारा 269धप को शामिल किया जा चुका है। धारा बताती है कि व्यापार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से निर्धारित इलैक्ट्रानिक विधियों के माध्यम से भुगतान को स्वीकृत करने की सुविधा देनी चाहिए यदि ऐसे व्यापार की कुल प्राप्तियां तुरंत पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान रू. 50 करोड़ से अधिक होती है

अहम जुर्माना प्रावधानों को भी धारा 271घख में शामिल किया गया है जो हर दिन की गलती के लिए रू. 5,000 के जुर्माना को मुहैया कराती है यदि व्यक्ति अधिसूचित डिजिटल विधियों के माध्यम से भुगतान को स्वीकृत नहीं करता। धारा को जुर्माने से बचने के लिए भी मुहैया कराया गया है यदि व्यक्ति प्रमाणित करता है कि ऐसी गलती करने के उचित और उपयुक्त कारण थे।

धारा 269न के प्रावधानों के उल्लंघन में निर्दिष्ट अग्रिम ऋण या जमा चुकाना

धारा 269न मुहैया कराती है कि कोई व्यक्ति, उस व्यक्ति के नाम पर खाते में देय चेक अथवा खाते में देय डिमांड ड्राफ्ट के अलावा किसी अन्य विधि के द्वारा रू. 20,000 से अधिक कोई ऋण अथवा जमा अथवा निर्दिष्ट उधार का पुर्नभुगतान नहीं करेगा जिसने बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक क्लीयरिंग प्रणाली का प्रयोग करते हुए या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके के द्वारा जिसको निर्धारित किया जा सके अथवा निर्दिष्ट उधार को ऋण अथवा जमा अथवा भुगतान किया है।

"निर्दिष्ट उधार" का अर्थ अचल संपत्ति के स्थानांतरण के संबंध में, चाहे स्थानांतरण हुआ हो अथवा नहीं, उधार के रूप में राशि, चाहे जिस भी नाम से बुलाया जाए, के रूप मे कोई राशि।

धारा 269न के प्रावधानों का उल्लंघन धारा 271ड़ के अंतर्गत जुर्माने का कारण होगा। धारा 271ड़ के अंतर्गत जुर्माना ऐसे चुकाए गए ऋण अथवा जमा अथवा निर्दिष्ट राशि के समान होगा।

धारा 285खक (1) के अंतर्गत आपेक्षितानुसार वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाता (पहले 'वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर)' के तौर पर प्रसिद्ध) के विवरण की प्रस्तुति में विफलता

वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाते के विवरण की गैर-प्रस्तुति धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना आकर्षित करेगा। डिफाल्ट के लिए रू. 500 प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा

हालांकि धारा 285खक(5) (पूर्व में चर्चितानुसार) कर प्राधिकरण को व्यक्ति को नोटिस जारी करने का निर्देश देता है जिसके द्वारा ऐसे नोटिस में निर्दिष्ट के तामील होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर विवरण को दाखिल करने का निर्देश दे सकते हैं तथा ऐसी स्थिति में व्यक्ति को नोटिस में निर्दिष्ट समय के भीतर विवरण प्रस्तुत करना होगा। यदि व्यक्ति निर्दिष्ट समय के भीतर विवरण दाखिल करने में असफल होता है तो रू. 1,000 प्रतिदिन का जुर्माना तुरंत अगले दिन जिस पर विवरण को प्रस्तुत करने के लिए ऐसे नोटिस में निर्दिष्ट समय समाप्त होता है के दिन से लगाया जाएगा

वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाते के असत्य विवरण की प्रस्तुति के लिए जुर्माना

धारा 271चकक के माध्यम से वित्तीय लेनदेन या प्रतिवेदन खाते के गलत विवरण की प्रस्तुति के लिए जुर्माना वसूला जाता है।

यदि एक निर्धारित वित्तीय संस्थान जैसा धारा 285खक(1) में संदर्भित है जिसे वित्तीय लेनदेन या प्रतिवेदन खाते के विवरण प्रस्तुत करना आवश्यक है :

(क) विवरण में गलत सूचना प्रस्तुत करता हो या निर्दिष्ट अवधि के अंदर सही सूचना प्रस्तुत न करता हो

(ख) निर्धारित उचित जांच-पड़ताल की आवश्यकताओं का पालन नहीं करता हो

तो निर्धारित आयकर प्राधिकरण ऐसे व्यक्ति को जुर्माने के रूप में पचास हजार रूपए देने का निर्देश दे सकते हैं

इसके अलावा, निर्धारण वर्ष 2023-24 से, रिपोर्ट देने वाले वित्तीय संस्थान पर रू. 5,000 का जुर्माना लगाया जाएगा यदि एसएफटी में कोई अशुद्धि है और ऐसी अशुद्धि रिपोर्ट करने योग्य खातों के धारक द्वारा प्रस्तुत झूठी या गलत जानकारी के कारण है। प्रतिवेदी वित्तीय संस्थान प्रतिवेदी खाते के धारक से ऐसी दंड राशि की वसूली भी कर सकता है।

पात्र निवेशगत कोष द्वारा विवरण अथवा सूचना अथवा दस्तावेज की प्रस्तुति के लिए जुर्माना

एक नई धारा 9क को मुहैया कराने के लिए वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा शामिल किया गया है कि ऐसे कोष के लिए योग्य कोष प्रंबंधक के माध्यम से योग्य विदेशी निवेश कोष द्वारा की गई कोष प्रबंधन गतिविधि भारत में व्यापारिक संबंध को संस्थापित नहीं करेगी (कुछ शर्तों के अनुसार)।

एक शर्त है कि प्रत्येक पात्र निवेश कोष, वित्त वर्ष में इसकी गतिविधि के संबंध में, वित्त वर्ष की समाप्ति से 90 दिनों के भीतर एक विवरण को निर्दिष्ट शर्त अथवा किसी सूचना अथवा दस्तावेज, जिसे निर्दिष्ट किया जा सकता है, को पूरा करने से सबंधित सूचना सहित निर्धारित आयकर प्राधिकारी को निर्धारित प्रारूप में एक विवरण प्रस्तुत करेगा। इस शर्त के अनुसार विफलता का कारण रू. 5,00,000 का जुर्माना होगा।

धारा 92घ(3) के तहत आवश्यकतानुसार किसी सूचना या दस्तावेज को प्रस्तुत करने में विफलता

धारा 92घ(3) के अनुसार, कर अधिकारियों को किसी व्यक्ति की आवश्यकता हो सकती है तो अधिनियम के तहत किसी प्रक्रिया के पाठ़यक्रम में हो सकता है जो किसी सूचना या दस्तावेज (नियम 10घ के साथ धारा 92घ पठित में प्रदत्त है) को प्रस्तुत करने के लिए निर्दिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में प्रवेश करते है। इस तरह की जानकारी या दस्तावेज इस संबंध में जारी नोटिस की प्राप्ति की तारीख से 10 दिनों की अवधि के भीतर प्रस्तुत किया जाना है (कर अधिकारियों द्वारा इस अवधि को और 30 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकता है) इन प्रावधानों के साथ अनुपालन में विफलता, धारा 271छ के तहत दंड आकर्षित कर सकता है।

धारा 271छ के अनुसार, अगर संहिता व्यक्ति, जो निर्दिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में प्रवेश कर चुका हो, ऊपर बताए गए किसी सूचना या दस्तावेज को प्रस्तुत करने में विफल हुआ है, तो कर अधिकारी, उस व्यक्ति पर प्रत्यक्ष रूप से इस प्रकार की विफलता के लिए निर्दिष्ट लेन-देन या अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के मूल्य के 2 प्रतिशत के बराबर दंड लगा सकता है।

धारा 286 के अंतर्गत गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अथवा रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफलता के लिए धारा 271छख के अंतर्गत जुर्माना

यदि कोई प्रतिवेदन उद्यम अंतर्राष्ट्रीय समूह के संबंध में रिपोर्ट (जैसा धारा 286(2) में संदर्भित है) को प्रस्तुत करने में विफल रहता है तो वह निम्न के जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा -

क) रू 5,000 प्रति दिन जिसके लिए विफलता जारी रहती है, यदि विफलता की अवधि एक महीने से अधिक नहीं होती अथवा

ख) रू 15,000 प्रति दिन जिसके लिए विफलता जारी रहती है, यदि विफलता की अवधि एक महीने से अधिक नहीं होती अथवा

जहां एक प्रतिवेदी उद्यम रिपोर्ट (जैसा धारा 286(2) में संदर्भित है) में सही सूचना मुहैया कराता हो, तो यह रू. 5,00,000 का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है, शर्तों को पूरा करने के अनुसार

धारा 285क के अंतर्गत सूचना और दस्तावेज की प्रस्तुति के लिए विफलता हेतु जुर्माना

एक नई धारा 285क को भारतीय कंपनी जिसमें अथवा के माध्यम से भारतीय परिसंपत्ति विदेशी कंपनी अथवा उद्यम द्वारा संघटित है, पर प्रतिवेदी कार्य के लिए मुहैया कराने के लिए वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा शामिल किया गया है।

भारतीय उद्यम भारतीय कंपनी अथवा उद्यम के नियंत्रण अथवा स्वामित्व ढ़ांचे को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावी करते हुए विदेशी लेनदेन से संबंधित सूचना की प्रस्तुति के लिए बाध्य होगा।

भारतीय कंपनी के किसी भाग पर किसी विफलता की स्थिति में, इसे जुर्माने के रूप में दिया जाएगा -

(क) लेनदेन की राशि के 2 प्रतिशत के समान राशि इसके बावजूद कि ऐसी विफलता उस मामले में हुई जहां ऐसा लेनदेन का भारतीय कंपनी के संबंध में नियंत्रण अथवा प्रबंधन के अधिकार को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से स्थानांतरित करने के लिए प्रभावी किया गया था तथा

(ख) किसी अन्य मामले में कुल रू. 5,000

टीडीएस/टीसीएस विवरणी दाखिल करने में विफलता के लिए दंड

धारा 271ज के अनुसार, जहां व्यक्ति स्रोत अर्थात् इस संबंध में निर्धारित नियत तिथि को अथवा इससे पूर्व टीडीएस/टीसीएस पर कर कटौती/एकत्रीकरण के विवरण को दाखिल करने में असफल रहता है तो वह धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा। न्यूनतम जुर्माना रू. 10,000 रूपए का होगा जो रू. 1,00,000 तक जा सकता है। धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माना धारा 234ड के अंतर्गत निर्धारित विलंब दाखिल शुल्क के अतिरिक्त होगा।

टीडीएस/टीसीएस को दाखिल करने मे देरी के अलावा धारा 271ज असत्य टीडीएस/टीसीएस रिटर्न को दाखिल करने के मामलों को भी कवर करता है। धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माना लगाया जाएगा यदि कटौतीकर्ता/संग्राहक असत्य टीडीएस/टीसीएस रिटर्न को दाखिल करता है।

टीडीएस/टीसीएस को दाखिल करने में विफलता के लिए, धारा 271ज के तहत संहिता भी जुर्माना नहीं लगेगा, अगर व्यक्ति साबित कर देता है कि केन्द्रीय सरकार के ऋण के लिए, फीस और ब्याज को साथ (अगर कोई है तो), उसके द्वारा कर कटौती/एकत्रित भुगतान करने के बाद, उसने टीडीएस/टीसीएस को नियत तिथि से एक साल की अवधि के निकलने से पहले ही भर दिया था। दूसरे शब्दों में, धारा 271एच के तहत संहिता भी दंड, टीडीएस/टीसीएस मुनाफा भरने में देरी के मामले पर जुर्माना लगाएगी, अगर निम्मिलिखित स्थितियां है:

(1) सरकार के ऋण के लिए भुगतान, स्रोत पर कर कटौती/एकत्रित है।

(2) देरी से भरी गई फीस और ब्याज (अगर है तो), सरकार के ऋण के लिए भुगतान होता है।

(3) टीडीएस/टीसीएस मुनाफा, इस संदर्भ में नियत तिथि से एक वर्ष की अवधि की समाप्ति से पहले भरी जाती है।

यह ध्यान रखना चाहिये कि ऊपर दी गई छूट, सिर्फ टीडीएस/टीसीएस रिटर्न के भरने में देरी के लिए, धारा 271ज के तहत जुर्माना के रूप में दिए गए दंड के मामले में सिर्फ लागू होती है और टीडीएस/टीसीएस रिटर्न गलत भरने के लिए लागू नहीं होती है।

सांविधिक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र में गलत सूचना की प्रस्तुति के लिए पेशे पर जुर्माना

हाल के दिनों में सरकारी न्यास स्वैच्छिक अनुपालन कर रही है। योग्य पेशेवर व्यक्ति द्वारा विभिन्न रिपोर्ट और प्रामणपत्रों का प्रमाणीकरण यह सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम में मुहैया कराया गया है कि अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत एक निर्धारिती द्वारा प्राप्त सूचना सही है। विभिन्न प्रावधान गलत सूचना की प्रस्तुति की स्थिति में चूक करने वाले निर्धारिती को दंडित करने के लिए अधिनियम में मौजूद है। हालांकि, उस व्यक्ति द्वारा गलत सूचना की प्रस्तुति के लिए जुर्माने लगाने पर कोई पैनल प्रावधान नहीं है जो इसके प्रमारणी करण के लिए उत्तरदायी है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि रिपोर्ट या प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति ने ऐसे प्रमाणीकरण करने से पहले उचित प्रयास किया हो, एक नई धारा 271ञ को प्रभावी तिथि 01/04/2017 से आयकर अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है जिससे मुहैया कराया जा सके कि एक अकाउंटेंट या एक मर्चेंड बैंकर या एक पंजीकृत मूल्यनिर्धारक अधिनियम के किसी प्रावधान या उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अंतर्गत एक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र में गलत सूचना प्रस्तुत करता हो तो निर्धारण अधिकारी या आयुक्त (अपील) जुर्माने के रूप में ऐसी प्रत्येक रिपोर्ट या प्रमाणपत्र के लिए कुल रू. 10,000 देने के लिए से निर्देश दे सकता है।

धारा 195 के अंतर्गत गलत सूचना की प्रस्तुति अथवा सूचना की प्रस्तुति में विफलता के लिए जुर्माना

अधिनियम की धारा 195(6) के अनुसार, किसी विदेशी कंपनी को अथवा एक गैर-निवासी को (कंपनी के तौर पर नहीं) भुगतान करने के लिए उत्तरदायी कोई व्यक्ति, कोई राशि (चाहे कर हेतु देय हो अथवा नहीं), प्रपत्र 15गक और 15गख में ऐसी राशि के भुगतान से संबंधित सूचना को प्रस्तुत करेगा।

इस संबंध में किसी विफलता की स्थिति में रू. 1,00,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

कर प्राधिकारियों के साथ सहयोग करने में विफलता

कई बार, कर आधिकारियों को एक व्यक्ति से संहिता सूचना की आवश्यकता पड़ती है, ऐसे मामलों में, कर अधिकारी उस व्यक्ति से अपने द्वारा पूछे जाने वाले सवालों के जवाब देने के लिए अनुरोध कर सकते हैं या विवरण पर हस्ताक्षर करने या उस व्याक्ति से उपस्थित के लिए समन दे सकते हैं। कर प्राधिकारी धारा 142(1)/धारा 143(2) के अन्तर्गत नोटिस भी जारी कर सकते हैं अथवा धारा 142(2क) के अन्तर्गत विशेष अंकेक्षण के लिए निर्देश जारी कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, धारा 272क(1) के तहत दंड, लगाया जा सकता है यदि व्यक्ति निम्न में विफल होता है।

♦ सवालों के जवाब

♦ बयान पर हस्ताक्षर करने में

धारा 131(1) के तहत समन के साथ अनुपालन में खातों की किताबों के उत्पादन या सबूत देने के लिए कार्यालय जाना।

धारा 142(2क) के अंतर्गत जारी निर्देशों के अनुसार अनुपालन करने में बिफल धारा 142(1)/ 143(2) के अंतर्गत नोटिस का अनुपालन

धारा 272क(1) के तहत जुर्माना दिया गया दंड, प्रत्येक विफलता के 10,000 रूपए है।

धारा 272क(2) के तहत दंड

धारा 272क(2) के तहत दंड, निम्मलिखित चूक के सम्बंध में दिया जाएगा:

1. धारा 94(6) के तहत आवश्यकता के अनुसार, प्रतिभूतियों के संदर्भ में अपेक्षित जानकारी को प्रस्तुत करने में विफलता। धारा 94(6) के अनुसार, कर अधिकारी, वर्ष के दौरान उसके द्वारा स्वामित्व वाली प्रतिभूतियों के विवरण प्रस्तुत करने के लिए करदाता से जारी नोटिस को पूछ सकता है।

2. धारा 176(3) के तहत आवश्यकनुसार व्यवसाय या व्यापार के लगातार न रहने के नोटिस देने के लिए विफलता (15 दिनों के भीतर व्यवसाय या व्यापार के लगातार न रहना)

3. धारा 133, 134, 139(4क), 139(4ग), 192(2ग), 197क, 203,206, 206ग, 206ग(1क) और 258ख के तहत, निर्धारित समय में मुनाफा, बयान या प्रमाणपत्र, घोषणापत्र प्रस्तुत करने, निरीक्षण करने आदि को प्रस्तुत करने में विफलता।

4. धारा 226(2) के तहत कर अदा और कटौती के लिए विफलता।

5. धारा 206ग(3) (1-7-2012 तक) के लिए प्रावधान या धारा 200(3) में निर्धारित समय में निर्धारित बयान की प्रति को दाखिल करने में विफलता।

6. धारा 206क(1) में विशेष समय के भीतर निर्धारित बयान को दाखिल करने में विफलता। धारा 206क(1), कर की कटौती के बिना निवासियों के लिए ब्याज के भुगतान के संदर्भ में बैंक, सहकारी समाज के द्वारा त्रैमासिक मुनाफा दाखिल करने से सम्बंधित है।

7. निर्धारित सीमा के अंतर्गत धारा 200(2क) अथवा धारा 206ग(3क) के अंतर्गत विवरण को सुपुर्द किए जाने का कारण अथवा सुपुर्द किए जाने में विफलता। प्रभावी तिथि 01/06/2015 से, यह अनिवार्य किया गया है कि टीडीएस अथवा टीसीएस, जो भी स्थिति हो, का भुगतान करने वाले सरकारी कार्यालय, निर्धारित प्राधिकारी को सुपुर्द करने के लिए चालान की प्रस्तुति के बिना, ऐसे तरीके में विवरण प्रस्तुत करें जिसे निर्धारित किया जा सके।

ऊपर मामलों में दंड, गलतियों के लगातार होने पर प्रतिदिन 100 रूपए का जुर्माना लग सकता है। विफलता के लिए दंड के सदंर्भ में, धारा 197क में उल्लेखित घोषणा के लिए सम्बंध में, धारा 203 के द्वारा एक प्रमाणपत्र आवश्यक होता है और धारा 200(2क), धारा 200(3), 206 और 206(ग), 206ग(3) और 206ग(3क) के तहत चूक होने के लिए है, दंड की मात्रा, कर कटौती या कर एकत्रित करने की राशि से ज्यादा नहीं होनी चाहिये।

धारा 133ख के प्रावधानों का अनुपालन करने के लिए दंड

धारा 133ख, कर अधिकारियों को, अधिकारियों के द्वारा आवश्यक जानकारी एकत्रित करने के लिए करदाताओं के व्यापार के स्थान पर प्रवेश करने के लिए बढ़ावा देता है जो कि कानून के तहत उपयोगी होगा। अगर करदाता, धारा 133ख के प्रावधान के साथ अनुपालन करने के लिए विफल हो जाता है, तो दंड, धारा 272कक(1) के 1000 रूपए के तहत जुर्माना हो सकता है।

भुगतान की निर्धारित इलैक्ट्रानिक विधियों के माध्यम से उसे स्वीकृत करने की सुविधा न देने पर जुर्माना

वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा प्रभावी तिथि 1नवंबर, 2019 से आयकर अधिनियम में नई धारा 269धप को शामिल किया जा चुका है। धारा बताती है कि व्यापार करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य रूप से निर्धारित इलैक्ट्रानिक विधियों के माध्यम से भुगतान को स्वीकृत करने की सुविधा देनी चाहिए यदि ऐसे व्यापार की कुल प्राप्तियां तुरंत पूर्ववर्ती पिछले वर्ष के दौरान रू. 50 करोड़ से अधिक होती है

अहम जुर्माना प्रावधानों को भी धारा 271घख में शामिल किया गया है जो हर दिन की गलती के लिए रू. 5,000 के जुर्माना को मुहैया कराती है यदि व्यक्ति अधिसूचित डिजिटल विधियों के माध्यम से भुगतान को स्वीकृत नहीं करता। धारा को जुर्माने से बचने के लिए भी मुहैया कराया गया है यदि व्यक्ति प्रमाणित करता है कि ऐसी गलती करने के उचित और उपयुक्त कारण थे।

कर कटौती खाता संख्या या कर संग्रहण खाता संख्या से संबंधित प्रावधानों का पालन करने में विफलता

धारा 203क के अनुसार, स्रोत पर प्रत्येक व्यक्ति कर कटौती करता है या स्रोत पर कर को एकत्रित करने के लिए, कर एकत्रित खाता संख्या (जिस प्रकार का मामला हो) या कर कटौती खाता संख्या को प्राप्त करने के लिए है।

धारा 203क(2) प्रदान करता है कि कर की कटौती या एकत्रित करना, स्रोत पर, टीडीएस/टीसीएस के लिए अन्य सम्बंधित दस्तावेजों और चालान, प्रमाणपत्रों, बयानों में कर एकत्रित खाता संख्या (जैसा भी मामला हो) या कर कटौती खाता संख्या को उल्लेखित करना चाहिये। कर एकत्रित खाता संख्या (जैसा भी मामला हो) या कर कटौती खाता संख्या को पाने के लिए विफलता के लिए दंड हेतू प्रदान धारा 272खख(1) और धारा 272खख(2), कर एकत्रित खाता संख्या (जैसा भी मामला हो) या कर कटौती खाता संख्या को पाने के लिए दंड प्रदान करने के लिए है। धारा 272खख के तहत दंड, 10,000 रूपए है।

दंड से राहत

दंड प्रावधान बनाने के अलावा, आयकर अधिनियम, वास्तविक/योग्य मामलों में दंड से राहत देने के लिए प्रावधान भी है। राहत निम्नलिखित तरीके से दी जा सकती है:

1. धारा 273क(4) के तहत प्रधान आयुक्त अथवा आयकर आयुक्त, आयकर अधिनियम के तहत दंड में जुर्माना कम करने या माफ करने का अधिकार रखता है। दंड को आयकर आयुक्त के द्वारा कम या माफ किया जा सकता है, अगर धारा 273क(4) में स्थितियां विशेष होती है और इस संदर्भ में संतुष्ट होती है।

2. पहले की गई चर्चा के अनुसार धारा 273क(4) के आश्रय के अलावा, धारा 273ख, वास्तविक मामलों में दंड से राहत भी प्रदान करता है। धारा 273ख के अनुसार, धारा 271क, 271कक, 271ख, 271खक, 271खख, 271ग, 271गक, 271घ, 271ड, 271च, 271चक, 271चकख, 271चख, 271छ, 271छक, 271छख, 271छग, 271ज, 271-झ, 271ञ, 272क(1)(ग) या (घ), 272क(2), 272कक(1), 272ख, 272खख(1), 272खख(1क), 272खखख(1) या 273(2)(ख) या (ग) के तहत कोई जुर्माना नहीं दिया जाएगा, अगर करदाता साबित कर देता है कि इस विफलता के लिए कारण तार्किक थे।

न्यासी या निर्दिष्ट व्यक्ति को अनुचित लाभ देने के लिए जुर्माना

वित्त अधिनियम, 2022 ने न्यासों या संस्थानों पर जुर्माना लगाने के लिए आयकर अधिनियम में एक नई धारा 271ककङ जोड़ी है। धारा 271ककङ को निम्नानुसार प्रदान करने के लिए सम्मिलित किया गया हैः

(क) धारा 11 से 13 के अंतर्गत आने वाली संस्था धारा 13(1)(ग) के उल्लंघन के संबंध में दंड के लिए उत्तरदायी होगी।

(ख) धारा 10(23ग)(iv)/(v)/(vi)/(viक) द्वारा कवर किया गया एक संस्थान धारा 10(23ग) के इक्कीसवें परंतुक के उल्लंघन के संबंध में दंड के लिए उत्तरदायी होगा (जो कि संबंधित है धारा 13(1)(ख)) के लिए।

दंड की गणना इस प्रकार की जानी हैः

(क) पहले उल्लंघन के लिएः धारा 13(3) में संदर्भित किसी भी इच्छुक पार्टी के लाभ के लिए संस्था द्वारा लागू आय की सीमा तक;

(ख) बाद के वर्षों में किसी भी उल्लंघन के लिएः इस तरह की आय की दोगुनी राशि ("दोहरा जुर्माना") लागू होती है।

यह धारा निर्धारण वर्ष 2023-24 से लागू है।

 

आयकर अधिनियम के अंतर्गत जुर्माने पर एमसीक्यू

 

प्रश्न 1. धारा 140क(1) के अनुसार धारा 234क, 234ख तथा 234ग (यदि हो) के अंतर्गत ब्याज सहित देय कोई कर (टीडीएस, अग्रिम कर आदि के लिए क्रेटिड की स्वीकृति के पश्चात) आय के रिटर्न को दाखिल करने से पूर्व दिया जाना चाहिए। धारा 140क(1) के अनुसार देय कर को..........................कहा जाता है

(क) अग्रिम कर (ख) स्वमूल्यांकन कर

(ग) स्रोत पर दिया गया कर (घ) निगमित कर

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 140क(1) के अनुसार धारा 234क, 234ख तथा 234ग (यदि हो) के अंतर्गत ब्याज सहित देय कोई कर (टीडीएस, अग्रिम कर आदि के लिए क्रेटिड की स्वीकृति के पश्चात) आय के रिटर्न को दाखिल करने से पूर्व दिया जाना चाहिए। धारा 140क(1) के अनुसार देय कर को स्वमूल्यांकन कर कहा जाता है

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 2. धारा 234ड ................. को दाखिल करने में देरी के लिए विलंब दाखिल शुल्क के उदग्रहण उपलब्ध कराता है

(क) आय की विवरणी (ख) टीडीएस रिटर्न

(ग) टीसीएस रिटर्न (घ) टीडीएस/टीसीएस रिटर्न

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 234ड टीडीएस/टीसीएस रिटर्न को दाखिल करने में देरी के लिए विलंब दाखिल शुल्क के उदग्रहण उपलब्ध कराता है

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 3. यदि करदाता धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार बही खातों को सुरक्षित रखने में विफल रहता है तो वह धारा .................... के अंतर्गत रू. 25,000 का जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा

(क) 271ख (ख) 271क

(ग) 271कक (घ) 271कख

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

यदि करदाता धारा 44कक के प्रावधानों के अनुसार बही खातों को सुरक्षित रखने में विफल रहता है तो वह धारा 271 क के अंतर्गत जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी होगा। धारा 271क के अंतर्गत जुर्माना रू. 25,000 है

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 4. यदि एक करदाता धारा 44कख की अनिवार्यता के बावजूद अपने खातों को अंकेक्षित करने में असफल होता है तो वह धारा 271ख के अंतर्गत जुर्माने के लिए उत्तरदायी होगा जोकि कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति आदि अथवा ....................... जो भी कम हो का आधा प्रतिशत होगा

(क) रू. 2,00,000 (ख) रू. 1,50,000

(ग) रू. 1,00,000 (घ) रू. 50,000

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 44कख निर्धारित करती है कि जब करदाताओं के खाते अंकेक्षित होने होते है यदि एक करदाता, धारा 44कख की अनिवार्यता के बावजूद अंकेक्षित कराने में असफल होता है तो वह धारा 271ख के अंतर्गत जुर्माने का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगां। धारा 271ख के अंतर्गत जुर्माना खातों के अंकेक्षण की विफलता अथवा अंकेक्षित धारा 44कख के अंतर्गत आपेक्षितानुसार, रिपोर्ट की प्रस्तुति की विफलता पर, लगाया जाता है। जुर्माना कुल बिक्री, कारोबार अथवा सकल प्राप्ति आदि अथवा रू. 1,50,000 जो भी कम हो का आधा प्रतिशत होगा।

इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 5. धारा 269धध उपलब्ध कराता है कि कोई व्यक्ति बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रीसिटी क्लीयरिंग सिस्टम का प्रयोग द्वारा अथवा डिमांड ड्राफ्ट अथवा अकांउट पेयी चेक को छोड़कर या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके के द्वारा जिसको निर्धारित किया जा सके किसी विधि द्वारा रू. 50,000 से अधिक की जमा अथवा ऋण की स्वीकृति अथवा प्राप्त नही करेगा। धारा 269धध के प्रावधान का उल्लंघन धारा 271घ के अंतर्गत जुर्मानो को आकर्षित करेगा जो लिए गए अथवा स्वीकृत ऋण के समान की राशि होगी।

(क) सही (ख) गलत

सही उत्तर : (ख)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 269धध उपलब्ध कराता है कि कोई व्यक्ति बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रीसिटी क्लीयरिंग सिस्टम का प्रयोग द्वारा अथवा डिमांड ड्राफ्ट अथवा अकांउट पेयी चेक को छोड़कर या ऐसे अन्य इलेक्ट्रॉनिक तरीके के द्वारा जिसको निर्धारित किया जा सके किसी विधि द्वारा रू. 20,000 से अधिक की जमा अथवा ऋण की स्वीकृति अथवा प्राप्त नही करेगा। धारा 269धध के प्रावधान का उल्लंघन धारा 271घ के अंतर्गत जुर्मानों को आकर्षित करेगा। धारा 271घ के अंतर्गत जुर्माना ऋण अथवा जमा लिए गए अथवा स्वीकृत किए गए ऋण के अनुसार होनी चाहिए

चूंकि प्रश्न में दिया गया विवरण गलत है तथा इसलिए विकल्प (ख) सही विकल्प है

प्रश्न 6. धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाते (पहले वार्षिक सूचना रिटर्न के तौर पर प्रसिद्ध) के विवरण को दाखिल करने में विफलता के लिए लगाया जाता है। धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना प्रतिदिन के लिए रू................. है जब तक विफलता जारी रहती है

(क) 500 (ख) 250

(ग) 100 (घ) 50

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता:

धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना वित्तीय लेनदेन अथवा रिपोर्टयोग्य खाते (पहले वार्षिक सूचना रिटर्न के तौर पर प्रसिद्ध) के विवरण को दाखिल करने में विफलता के लिए लगाया जाता है। धारा 271चक के अंतर्गत जुर्माना प्रतिदिन के लिए रू. 500 है जब तक विफलता जारी रहती है

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 7. धारा 270क के अंतर्गत आय की सूचना देने में विफल होने के लिए जुर्माने की दर क्या है ?

(क) 100 % (ख) 200 %

(ग) 300 % (घ) 50 %

प्रश्न 8. धारा 271ज के अनुसार, जहां व्यक्ति स्रोत अर्थात् इस संबंध में निर्धारित नियत तिथियों पर अथवा पूर्व टीडीएस/टीसीएस रिटर्न, पर कर कटौती/संग्रहण का विवरण दाखिल करने में विफल रहता है तो वह धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माने का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। न्यूनतम जुर्माना रू. 10,000 है जो .............. तक जा सकता है

(क) 1,00,000 (ख) 2,00,000

(ग) 3,00,000 (घ) 3,00,000

सही उत्तर : (क)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 271ज के अनुसार, जहां व्यक्ति स्रोत अर्थात् इस संबंध में निर्धारित नियत तिथियों पर अथवा पूर्व टीडीएस/टीसीएस रिटर्न, पर कर कटौती/संग्रहण का विवरण दाखिल करने में विफल रहता है तो वह धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माने का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। न्यूनतम जुर्माना रू. 10,000 है जो 1,00,000 तक जा सकता है। धारा 271ज के अंतर्गत जुर्माना धारा 234ड के अंतर्गत निर्धारित विलंब दाखिल शुल्क के अतिरिक्त होगा

इसलिए विकल्प (क) सही विकल्प है

प्रश्न 9. 272 ख, धारा 139क के प्रावधानों के अनुसार करदाता द्वारा डिफाल्ट की स्थिति में अथवा धारा 139क(5ग) में संदर्भित किसी दस्तावेज में जानबूझकर असत्य पैन या आधार संख्या को उद्धृत करने अथवा धारा 139क(5क)/(5ग) के उद्देश्य के लिए असत्य पैनं या आधार संख्या की सूचना की स्थिति में जुर्माना उपलब्ध कराता है। धारा 272ख के अंतर्गत प्रत्येक जुर्माने के लिए रू................ है

(क) 1,00,000 (ख) 50,000

(ग) 50,000 (घ) 10,000

सही उत्तर : (घ)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 272ख को पैन, यानी, प्राप्त करने में विफलता, पैन को उद्धृत या प्रमाणिकृत करने मे विफलता, से संबंधित प्रावधानों का अनुपालन करने में गलती की स्थिति में जुर्माने के लिए मुहैया कराई गई है। जुर्माने की राशि हर गलती के लिए रू. 10000 होगी।

वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 के अनुसार जैसा कि पैन के साथ आधार के विनिमयशीलता के लिए मुहैया कराई गई है, परिणामी संशोधनों को धारा 272ख के पैनल प्रावधानों में किया गया है ताकि निम्नलिखित मामलों में हर गलती के लिए रू. 10,000 का जुर्माना लगाया जा सके :

क) यदि निर्धारिती अपने पैन या आधार को उद्धृत या सूचित करने में विफल रहता है या गलत पैन या आधार बताता है

ख) यदि निर्धारिती निर्दिष्ट लेनदेनों में अपने पैन या आधार को उद्धृत या प्रमाणित करने में विफल रहता है

ग) यदि निर्दिष्ट लेनदेन के संदर्भ में दस्तावेजों के प्राप्तकर्ता (यानी बैंक, वित्तीय संस्थान आदि) यह सुनिश्चित करने में असफल रहते है कि पैन या आधार को विधिवत रूप से उद्धृत और प्रमाणिकृत किया गया है

इसलिए विकल्प (घ) सही विकल्प है

प्रश्न 10. धारा 272खख (1क) असत्य कर कटौती खाता संख्या अथवा कर संग्रहण संख्या (जो भी स्थिति हो) उद्धृत करने के लिए जुर्माना उपलब्ध कराता है। धारा 272खख के अंतर्गत जुर्माना रू............. है

(क) 75,000 (ख) 50,000

(ग) 10,000 (घ) 5,000

सही उत्तर : (ग)

सही उत्तर की प्रमाणिकता :

धारा 203क(2) उपलब्ध कराता है कि स्रोत पर कर के कटौतीकर्ता अथवा संग्रहकर्ता को टीडीएस/टीसीएस से संबंधित चालान, प्रमाणपत्रों, विवरणों तथा अन्य दस्तावेजों में कर कटौती खाता संख्या अथवा कर एकत्रीकरण खाता संख्या (जो भी स्थिति हो) उद्धृत करनी चाहिए। धारा 272खख(1) कर कटौती खाता संख्या अथवा कर संग्रहण खाता संख्या (जो भी स्थिति हो) को प्राप्त करने में विफलता के लिए उपलब्ध कराया गया है तथा धारा 272खख(1क) असत्य कर कटौती खाता संख्या अथवा कर संग्रहण संख्या (जो भी स्थिति हो) उद्धृत करने के लिए जुर्माना उपलब्ध कराया गया है। धारा 272खख के अंतर्गत जुर्माना रू. 10,000 है

इसलिए विकल्प (ग) सही विकल्प है