केवल अनिवासी व्यक्ति को उपलब्ध लाभ
अस्वीकरण: इस दस्तोवज में मौजूद विषय केवल जानकारी के लिए है। इसका उद्देश्य जनता तक सूचना को जल्द और आसानी से पहुंचाना है और इसे कानूनी दस्तोवजों के तौर पर नही समझा जाना चाहिए।
जनता को सलाह दी जाती है कि विषय का सत्यापन सरकारी अधिनियमों/नियमों/अधिसूचनाओं आदि से करें। |
गैर निवासियों के लिए उपलब्ध लाभ [निर्धारण वर्ष 2026-27]
1. एक अनिवासी कौन है
धारा 2 (30), एक व्यक्ति के रूप में अनिवासी को परिभाषित करती है,जो निवासी नहीं है। धारा 6 निम्नानुसार विभिन्न करदाताओं के लिए निवास की कसौटी को निर्धारित करता है:
क. व्यक्ति
एक व्यक्ति को भारत में अनिवासी के तौर पर कहा जाएगा, यदि वह भारत में निवासी नहीं है।
एक व्यक्ति की आवासीय स्थिति को निर्धारित करने के लिए, पहला कदम यह सुनिश्चित करना है कि वह निवासी व्यक्ति है या अनिवासी। यदि वह निवासी है तो उससे अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि वह निवासी है या साधारण रूप से निवासी या निवासी तो है लेकिन साधारण निवासी नही।
नीचे दिया गया चरण 1 सुनिश्चित करेगा कि क्या एक व्यक्ति निवासी है या अनिवासी और चरण 2 सुनिश्चित करेगा कि वह साधारण निवासी है या साधारण निवासी नही है। चरण 2 को केवल तभी प्रयोग किया जा सकता है यदि व्यक्ति भारत में निवास करता हो।
चरण 1 : निवासी या अनिवासी को निर्धारित करना
आयकर कानून के अंतर्गत, एक व्यक्ति को भारत में एक वर्ष के लिए निवासी के तौर पर तभी कहा जाएगा यदि वह निम्नलिखित में से कोई भी शर्त को पूरी करता हो (यानी वह किसी एक या दोनों शर्तों को पूरा कर सकता है)
1) वह उस वर्ष में 182 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए भारत में रहा हो या
2) वह वर्ष में 60 दिनों या उससे अधिक की अवधि के लिए भारत में रहा हो और तुरंत पहले के 4 वर्षों में 365 दिनों या उससे अधिक दिनों के लिए रहा हो।
हालांकि, एक भारतीय नागरिक के संदर्भ में और भारतीय मूल के व्यक्ति के संदर्भ में जो वर्ष के दौरान भारत आता है, उक्त (2) में निर्दिष्टानुसार 60 दिनों की अवधि को 182 दिनों से प्रतिस्थापित किया जाएगा। यही रियायत उन भारतीय नागरिकों को भी दी जाएगी जो एक क्रू सदस्य के तौर पर किसी पिछले वर्ष में या भारत के बाहर रोजगार के सिलसिले में भारत छोड़ता हो।
वित्त अधिनियम, 2020, प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 से, के माध्यम से यह मुहैया कराने के लिए उक्त अपवाद को संशोधित किया गया है कि उक्त (2) में निर्दिष्टानुसार 60 दिनों की अवधि को 120 दिनों की अवधि के साथ प्रतिस्थापित किया जाएगा यदि भारतीय नागरिक या भारतीय मूल का एक व्यक्ति जिसकी कुल आय, विदेशी स्त्रोतों से आय को छोड़कर, पिछले वर्ष के दौरान रू. 15 लाख से अधिक हो। विदेशी स्त्रोतों से आय का अर्थ वह आय जो भारत के बाहर अर्जित या उपार्जित होती है (भारत में स्थापित क पेशे या नियंत्रित व्यापार से प्राप्त आय को छोड़कर)
टिप्पणी : वित्त अधिनियम, 2020, आयकर अधिनियम, 1961 हेतु नई धारा 6(1क) को प्रस्तुत करता है। नया प्रावधान बताता है कि एक भारतीय नागरिक को भारत में केवल तभी निवासी समझा जाएगा यदि उसकी कुल आय, विदेशी स्त्रोतों से आय को छोड़कर, पिछले वर्ष के दौरान रू. 15 लाख से अधिक हो। इस प्रावधान के लिए, विदेशी स्त्रोतों से आय का अर्थ वह आय जो भारत के बाहर अर्जित या उपार्जित होती है (भारत में स्थापित एक पेशे या नियंत्रित व्यापार से प्राप्त आय को छोड़कर)
हालांकि, ऐसे व्यक्ति को केवल तभी निवासी के तौर पर समझा जाएगा जब वह अपने निवास या रहने या इसी प्रकार की अन्य किसी मापदंड के कारण द्वारा किसी राष्ट्र या क्षेत्राधिकार में कर देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
इसलिए, निर्धारण वर्ष 2021-22 से, रू. 15 लाख (विदेशी स्त्रोतों को छोड़कर) से अधिक की कुल आय अर्जित करने वाले एक भारतीय नागरिक को केवल तभी भारत में निवासी समझा जाएगा यदि वह किसी राष्ट्र में कर देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
यदि एक व्यक्ति उक्त शर्तों में से किसी को भी पूरी नहीं करता है तो उसे भारत में अनिवासी के तौर पर समझा जाएगा।
चरण 2 : निर्धारित करना कि वह निवासी है या साधारण निवासी या निवासी है या लेकिन असाधारण निवासी
एक घरेलू व्यक्ति को निवासी के तौर पर समझा जाएगा और वर्ष के दौरान भारत में साधारण निवासी के तौर पर समझा जाएगा यदि निम्नलिखित शर्तों को पूरा करता हो :
1) वह प्रासंगिक वर्ष के तुरंत पहले के 10 वषों में से कम से कम 2 वर्षों के लिए भारत का निवासी हो या
2) प्रासंगिक वर्ष के तुरंत पहले के 7 वर्षों के दौरान 730 दिनों या उससे अधिक के लिए भारत में रहता हो
हालांकि, प्रभावी निर्धारण वर्ष 2021-22 से, वित्त अधिनियम, 2020 के माध्यम से निम्नलिखित दो शर्तों को शामिल किया गया है जिसमें एक व्यक्ति को भारत में 'असाधारण निवासी' के तौर पर समझा जाता है :
क) एक भारतीय नागरिक या एक भारतीय मूल का एक नागरिक जिसकी कुल आय (विदेशी स्त्रोतों से आय को छोड़कर) पिछले वर्ष के दौरान रू. 15 लाख से अधिक है और जो 120 दिनों या उससे अधिक अवधि के लिए या 182 दिनों से कम के लिए भारत में रहा हो
ख) एक भारतीय नागरिक जिसको नई धारा 6(1क) के अनुसार भारत में निवासी समझा जाता है।
एक घरेलू व्यक्ति जो उक्त कथित शतों में से किसी को भी पूरा नहीं करता या उक्तकथित शतों में से केवल एक को ही पूरा करता है तो उसे निवासी के तौर पर समझा जाएगा लेकिन साधारण निवासी के तौर पर नही।
संक्षेप में, निम्नलिखित परीक्षा एक व्यक्ति की आवासी स्थिति को निर्धारित करेगा :
1. यदि व्यक्ति चरण 1 में निर्दिष्ट किसी एक या दोनों शर्तों को पूरा करता हो और चरण 2 में निर्दिष्ट किसी भी शर्त को पूरा करता हो तो उसे भारत में निवासी और साधारण निवासी समझा जाएगा
2. यदि व्यक्ति चरण 1 में निर्दिष्ट किसी एक या दोनों शर्तों को पूरा करता हो और चरण 2 में निर्दिष्ट किसी भी या एक भी शर्त को पूरा नही करता हो तो उसे भारत में निवासी समझा जाएगा लेकिन असाधारण निवासी नहीं।
3. यदि व्यक्ति चरण एक में निर्दिष्ट किसी भी शर्त को पूरा नहीं करता हो तो उसे अनिवासी समझा जाएगा।
ख. भागीदारी फर्म
एक सांझेदार फर्म को भारत में गैर-निवासी के तौर पर समझा जाएगा यदि उसके मामलों का नियंत्रण व प्रबंधन पूर्णता भारत से बाहर स्थित है
ग. कंपनी
एक भारतीय कंपनी हमेशा भारत में निवासी है। एक विदेशी कंपनी को निवासी के रूप में व्यवहार किया जाता है। यदि पिछले वर्ष के दौरान, उसके मामलों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत में पूरी तरह स्थित है, दूसरे शब्दों में, यदि उसके मामलों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत के बाहर पूरी तरह या आंशिक रूप से स्थित है, तो एक विदेशी कंपनी को निवासी के रूप में व्यवहार किया जाता है।
प्रभावी वर्ष 2017-18 से, एक कंपनी को किसी पिछले वर्ष में भारत में निवासी होना कहा जाता हैं यदि :
(i) यह एक भारतीय कंपनी हो अथवा
(ii) उस वर्ष में किसी भी समय प्रभावी प्रबंधन का स्थान भारत में हो
इस प्रयोजन के लिए, "प्रभावी प्रबंधन का स्थान" वह स्थान हैं जहां प्रमुख प्रबंधन तथा वाणिज्यिक निर्णय, जो समग्र के तौर पर एक उद्यम के व्यापार आयोजित करने के लिए आवश्यक हैं, अर्थ रूप में किया जाता है
2. कुल आय का कार्यक्षेत्र
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 5 के अनुसार, एक निवासी व्यक्ति जो अपनी वैश्विक आय पर कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, के विपरीत, एक अनिवासी केवल निम्न आय के संबंध में भारत में कर के लिए उत्तरदायी होगा:
1) ऐसे वर्ष में भारत में प्राप्त आय या प्राप्त होने के तौर पर समझी जाती है; या
2) ऐसे वर्ष के दौरान भारत में उसके लिए उत्पन्न अथवा उपार्जित आय अथवा उत्पन्न अथवा उपार्जित के तौर पर समझी जाती है
3. भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति का अप्रत्यक्ष स्थानांतरण
धारा 9(1)(i) के अनुसार, भारत में स्थित पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के माध्यम से उत्पन्न अथवा एकत्रित, चाहे प्रत्यक्ष हो अथवा अप्रत्यक्ष भारत में उत्पन्न होने के तौर पर समझी जाएगी।
वित्त अधिनियम, 2012 में यह स्पष्ट करने के लिए धारा 9(1)(i) प्रभावी तिथि 01.04.1962 हेतु स्पष्टीकरण 5 को शामिल किया है कि एक परिसंपत्ति अथवा पूंजीगत परिसंपत्ति, भारत के बाहर पंजीकृत अथवा निगमित एक कंपनी अथवा उद्यम में किसी शेयर अथवा हित के तौर पर, भारत में स्थित होना समझी जाएगी यदि प्राप्त शेयर अथवा हित, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, इसकी राशि को भारत में स्थित परिसंपत्ति से वास्तविक रूप में प्राप्त करते हो
हालांकि, वित्त अधिनियम, 2017 में यह मुहैया कराने के लिए प्रावधान शामिल किया गया है कि स्पष्टीकरण 5 एक परिसंपत्ति या पूंजीगत परिसंपत्ति के लिए लागू होगा जिसे 1 अप्रैल 2012 को या उसके बाद लेकिन 1 अप्रैल 2015 से पहले प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष के लिए धारा 115कघ के लिए स्पष्टीकरण के वाक्यांश (क) में संदर्भित एक विदेशी संस्थागत निवेशक में निवेश, चाहे प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष, के तौर पर अनिवासी द्वारा संघटित किया जाता है।
एक नई व्याख्या 6 शब्द "मूलत:" को परिभाषित करने के लिए वित्त अधिनियम, 2015, प्रभावी तिथि 01.04.2016 द्वारा धारा 9(1)(i) हेतु अन्तर्निविष्ट हैं। यह मुहैया कराता हैं कि भारत से बाहर निगमित अथवा पंजीकृत कंपनी अथवा उद्यम में किसी शेयर अथवा हित भारत में स्थित परिसंपत्ति से इसकी वस्तुत: राशि व्युत्पन्न समझी जाएगी यदि निर्दिष्ट तिथि पर, ऐसी परिसंपत्ति की राशि :
(i) रू. 10 करोड़ से अधिक हो तथा
(ii) कंपनी अथवा उद्यम, जो भी स्थिति हो, द्वारा स्वामित्व वाली समस्त परिसंपत्तियों की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत को दर्शाता हो
इसके अतिरिक्त एक नई व्याख्या 7 प्रदान कराने के लिए अन्तर्निविष्ट की गई हैं कि कोई आय धारा 5 में संदर्भित भारत से बाहर पंजीकृत अथवा निगमित एक कंपनी अथवा एक उद्यम में किसी शेयर अथवा हित के भारत से बाहर स्थानांतरण से गैर-निवासियों हेतु उत्पन्न अथवा अर्जित समझा जाएगा।
(i) यदि ऐसी कंपनी अथवा उद्यम प्रत्यक्ष रूप से भारत में स्थित परिसंपत्ति का स्वामित्व रखता है तथा हस्तांररणकर्ता (चाहे व्यक्तिगत रूप से अथवा उसके संबद्ध उद्यमों द्वारा), स्थानांतरण की तिथि से पूर्ववर्ती बारह माह में किसी समय, न तो ऐसी कंपनी के संबंध में प्रबंधन अथवा नियंत्रण का अधिकार रखता हैं न ही ऐसी कंपनी अथवा उद्यम के कुल वोटिंग अधिकार अथवा कुल शेयर पूंजी अथवा कुल ब्याज, जो भी स्थिति हो, के पांच प्रतिशत से अधिक के वोटिंग अधिकार अथवा शेयर पूंजी अथवा ब्याज का अधिकार रखता हैं।
(ii) यदि ऐसी कंपनी अथवा उद्यम अप्रत्यक्ष रूप से भारत में स्थित परिसंपत्ति का स्वामित्व रखता है तथा हस्तांररणकर्ता (चाहे व्यक्तिगत रूप से अथवा उसके संबद्ध उद्यमों द्वारा), स्थानांतरण की तिथि से पूर्ववर्ती बारह माह में किसी समय, न तो ऐसी कंपनी के संबंध में प्रबंधन अथवा नियंत्रण का अधिकार रखता हैं न ही ऐसी कंपनी अथवा उद्यम जो उसको कंपनी अथवा उद्यम में प्रबंधन अथवा नियंत्रण के अधिकार हेतु पात्र बनाती हैं जो प्रत्यक्ष रूप से भारत में स्थित परिसंपत्ति को प्रत्यक्ष रूप से स्वामित्व रखती हैं, के संबध में अथवा उसमें कोई अधिकार रखता हैं, न ही ऐसी कंपनी अथवा उद्यम में वोटिंग अधिकार अथवा शेयर पूंजी अथवा ब्याज का ऐसा प्रतिशत रखता हैं जिसका परिणाम कंपनी अथवा उद्यम के कुल वोटिंग अधिकार अथवा कुल शेयर पूंजी अथवा कुल ब्याज, जो भी स्थिति हो, के पांच प्रतिशत से अधिक के वोटिंग अधिकार अथवा शेयर पूंजी अथवा ब्याज का अधिकार (या तो व्यक्तिगत रूप से अथवा संबंद्ध उद्यमों सहित) का स्वामित्व हो।
यदि जहां एक कंपनी द्वारा, जो भी स्थिति हो, खरीदी गई समस्त परिसंपत्तियां, प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष, स्पष्टीकरण 5 में संदर्भित एक उद्यम, भारत में स्थित नहीं है तो गैर-निवासी स्थानांतरणकर्ता की आय, ऐसी कंपनी अथवा उद्यम के शेयर अथवा में हित के भारत से बाहर स्थानांतरण से, इस वाक्यांश के अंतर्गत भारत में प्राप्त अथवा अर्जित समझे जाने पर, केवल ऐसी आय का ही भाग होगी जैसा भारत में स्थित परिसंपत्ति हेतु उपयुक्त रूप से संबंधित है तथा उसी तरीके में निर्धारित की जाएगी जिसे निर्धारित किया जा सके।
4. कुछ गतिविधियां भारत में व्यपारिक संबंधो को संस्थापित नहीं करती
वित्त अधिनियम के माध्यम से शब्द श्व्यपारिक संबंधश् को विस्तृत रूप से स्पष्ट करने के लिए प्रभावी तिथि 01.04.2004 से धारा 9(1)(ii) हेतु स्पष्टीकरण 2 को शामिल किया गया है।
वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 9(1)(i) हेतु स्पष्टीकरण 2 के वाक्यांश (क) को प्रतिस्थापित करने के बाद शब्द श्व्यापारिक संबंधश् में उन व्यक्ति के माध्यम से की गई किसी व्यापारिक गतिविधि को शामिल किया जाएगा जो अनिवासी की ओर से कार्य करता है।
(क) भारत में हो और आदतन रहता हो, अनिवासी की ओर से अनुबंध करने का अधिकार हो या आदतन अनुबंध करता हो या अनिवासी द्वारा अनुबंध का प्रमुख कारण बनता है और अनुबंध
(i) अनिवासी के नाम पर या
(ii) उस अनिवासी द्वारा खरीदी गई संपत्ति के प्रयोग करने के अधिकार की अनुमति देने के लिए स्वामित्व को स्थानांतरित करने के लिए या उस अनिवासी के पास प्रयोग का अधिकार रखता हो
(iii) अनिवासी द्वारा सेवाओं के प्रावधान के लिए या
(ख) ऐसा कोई अधिकार न हो लेकिन करोबारी माल या व्यापार भारत में आदतन अनुरक्षित रखता हो जिससे वह नियमित तौर पर अनिवासी की ओर से उत्पाद या कारोबारी माल नियमित तौर पर भेज सकता हो
(ग) आदतन भारत में आर्डर सुरक्षित रखता हो, मुख्यत या पूरी तरह से या उस अनिवासी और नियंत्रक, नियंत्रणकर्ता अनिवासी के लिए या अन्य उसी सामान्य नियंत्रण के अनुसार जैसा उस अनिवासी द्वारा
आगे, स्पष्टीकरण 2 के बाद निम्नलिखित स्पष्टीकरण को भी शामिल किया गया है, अर्थात् :-
स्पष्टीकरण 2क - संदेह हटाने के लिए, एतद्द्वारा यह स्पष्ट किया जाता है कि भारत में अनिवासी की महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति भारत में “व्यापारिक संबंध” को और इस उद्देश्य के लिए “महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति” को संस्थापित करेगा जिसक अर्थ होगा :
(क) भारत में डाटा या सॉफ्टवेयर के डाउनलोड के प्रावधान सहित भारत में अनिवासी द्वारा किए गए किसी उत्पाद, सेवा या संपत्ति के संबंध में लेनदेन यदि पिछले वर्ष के दौरान ऐसे लेनदेन या लेनदेनों से उत्पन्न कुल भुगतान ऐसी राशि से अधिक होता है जिसे निर्धारित किया जा सके या
(ख) भारत में डिजिटल माध्यम के रूप से व्यापार गतिविधि की प्रणालीबद्ध और निरंतर मांग या ऐसे प्रयोगकर्ताओं, जिसे निर्धारित किया जा सके, के साथ लेनदेन में संलग्न हो
लेनदेन या गतिविधि भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति को संस्थापित करेगा चाहे ऐसे लेनदेन के लिए समझौता भारत में किया गया हो या नहीं या अनिवासी भारत में व्यापारिक स्थान या निवास हो या भारत में सेवाएं प्राप्त करता हो।
इसके अतिरिक्त, भारत में किसी अनिवासी के ऐसे लेन-देन या गतिविधियाँ, जो केवल निर्यात के उद्देश्य से भारत में माल की खरीद तक सीमित हैं, उन्हें भारत में उस अनिवासी की महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति के तौर पर नहीं माना जाएगा।
एक नई धारा 9क वित्त अधिनियम, 2015 द्वारा अन्तनिर्विष्ट होती हैं। यह मुहैया कराती हैं कि एक पात्र निवेशगत कोष की स्थिति में, ऐसे कोष की ओर से कार्यकारी पात्र कोष प्रबंधक के माध्यम से निष्पादित कोष प्रबंधन गतिविधि कथित कोष (कुछ शर्तो के अनुसार) के भारत में व्यापारिक संबंध को संस्थापित नहीं करेगी।
यह आगे प्रदान कराती हैं कि एक पात्र निवेशगत कोष केवल धारा 6 के प्रयोजन के लिए भारत में निवासी नहीं कहा जाएगा क्योंकि उसकी ओर से पात्र कोष प्रबंधक, कारोबार कोष प्रबंधन गतिविधि भारत में स्थित है।
('पात्र निवेशगत कोष', 'पात्र कोष प्रबंधक' तथा अन्य शर्तों के अर्थ के लिए धारा 9क को संदर्भित करें)
5. गैर-निवासियों के लिए धारा 206कक की प्रयोज्यता से छूट
धारा 206कक मुहैया कराती है कि जहां करदाता कर कटौती करने वाले उत्तरदायी व्यक्ति को पैन प्रस्तुत नहीं करता, कर निम्नलिखित उच्चतर दरों पर स्रोत पर काटा जाएगा
(क) इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधान में निर्दिष्ट दर
(ख) प्रभावी दर अथवा दरें अथवा
(ग) 20 प्रतिशत
हालांकि, धारा 206कक के प्रावधान निम्न के संबंध में गैर-निवासी, कंपनी के तौर पर नहीं, अथवा विदेशी कंपनी पर लागू नहीं होंगे
(i) दीर्घकालीन बांड पर ब्याज का भुगतान जैसा धारा 194ठग हेतु संदर्भित है तथा
(ii) अन्य कोई भुगतान ऐसी शर्तों के अनुसार जिसे निर्धारित किया जा सके
नियम 37खग के अनुसार, यदि डिडक्टी एक अनिवासी है या एक विदेशी कंपनी है, उसे डिडक्टर को अपना पैन प्रस्तुत करना आवश्यक नही है यदि वह निम्नलिखित आय प्राप्त करता है
1. ब्याज
2. रॉयल्टी
3. तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क
4. किसी पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण के लिए भुगतान
हालांकि, डिडक्टी को डिडक्टर को निम्नलिखित ब्यौरा और दस्तावेज प्रस्तुत करना आवश्यक है :
1. नाम, ई-मेल आईडी और संपर्क संख्या
2. उस राष्ट्र का पता जिसका वह निवासी है
3. उसके गृह निवासी की सरकार द्वारा निवास प्रमाणपत्र यदि उस राष्ट्र के कानून ऐसे प्रमाणपत्र को जारी करने के लिए बनाए गए हो
4. अपने गृह राष्ट्र में आवंटित कर पहचान संख्या और यदि संख्या उपलब्ध न हो तो उस आधार पर विशिष्ट संख्या जिसके आधार पर उसके गृह राष्ट्र की सरकार द्वारा पहचान की जा सकती है
6. पहली बार की घरेलू विदेशी कंपनियों के लिए छूट
धारा 115ञज कुछ अनुपालनों से विदेशी कंपनियों को छूट मुहैया कराती है यदि ऐसी कंपनी पहली बार भारत में घरेलू होने के लिए संघटित है। यह मुहैया कराया जाता है कि आय की गणना से संबंधित प्रावधान, अनवशोषित मूल्यह्रास का उपचार, हानि का पृथकीकरण अथवा अग्रेषण, अग्रिम कर, टीडीएस अथवा स्थानांतरण मूल्यनिर्धारण ऐसे संशोधनों अथवा अपवादों के अनुसार कथित कंपनी के लिए भी लागू होगी जिसे सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
7. अंतर्राष्ट्रीय वित्त सेवा केंद्र में स्थित इकाई हेतु कर प्रोत्साहन
एमएटी और एएमटी की दर 9 प्रतिशत होगी यदि इकाई अंतर्राष्ट्रीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में स्थित है, बशर्ते कि ऐसी इकाई केवल परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में ही अपनी आय को प्राप्त करती है। आईएफएससी में स्थित एक ईकाई, केवल परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त आय, इसकी वर्तमान आय में से लाभांश की घोषणा पर लाभांश वितरण कर के अनुसार नहीं होगी।
प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और वस्तु लेनदेन कर एफआईएसी में स्थित एक मान्यताप्राप्त शेयर बाजार में किए गए लेनदेन पर कोई कर नही लगाया जाएगा यदि प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया जाता है या देययोग्य है।
7क. धारा 112क के अंतर्गत करयोग्य पूंजी प्राप्तियों की स्थिति में आईएफएससी द्वारा एसटीटी के भुगतान की शर्तों से छूट
धारा 112क के अनुसार, दीर्घकालीन पूंजी परिसंपत्तियां, जिसे ईक्विटी शेयरों पर सूचीबद्ध किया जा रहा है, के स्थानांतरण से उत्पन्नन पूंजी प्राप्तियां, ईक्विटी ओरिएंटिड की यूनिट या व्यापारिक ट्रस्ट की व्यापारिक ईकाई, जो रू. 1.25 लाख से अधिक हो, 12.5 प्रतिशत की दर पर कर हेतु वसूलनीय होगी।
पूंजी प्राप्ति धारा 112क के अंतर्गत करयोग्य होगा यदि प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) सूचीबद्ध ईक्विटी शेयरों के अधिग्रहण और स्थानांतरण पर दिया जाता है। चूंकि ईक्विटी ओरिएंटिड फंड या व्यापारिक न्यास की स्थिति में एसटीटी ऐसी पूंजी परिसंपत्ति के स्थानांतरण के समय दिया जाना है। हालांकि एसटीटी के भुगतान की यह शर्त आईएफएससी में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर किए गए स्थानांतरण पर लागू नहीं होती और ऐसे स्थानांतरण का प्रतिफल विदेशी मुद्रा में प्राप्त या प्राप्तनीय होता है।
7ख. मैट से छूट प्रकल्पित कराधान योजना को चुनने वाली विदेशी कंपनियां
वित्त अधिनियम, 2018 विदेशी कंपनी की स्थिति में मैट प्रावधानों की प्रयोज्यता से छूट मुहैया कराने के लिए धारा 115ञख हेतु नए स्पष्टीकरण 4क को शामिल करती है यदि इसकी कुल आय में धारा 44ख, 44खख, 44खखक या 44खखख में संदभ्रित व्यापार से लाभ ही शामिल है और ऐसी आय उन धाराओं में निर्दिष्ट दरों पर कर हेतु प्रस्तुत की जा रही हो।
8. गैर निवासियों की कर देयता के लिए प्रावधान
क्र. सं. |
धारा |
विवरण |
छूट या कटौती या आय की गणना की सीमा |
निम्न के लिए उपलब्ध |
क. आय के कर प्रभार्य नहीं है |
||||
1. |
बांड या प्रतिभूतियों पर ब्याज को ऐसे बांड के मोचन पर प्रीमियम सहित केन्द्र सरकार द्वारा 01/06/2002 से पहले अधिसूचित किया गया है। |
ब्याज की राशि |
अनिवासी |
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2. |
भारत में एक अनिवासी (बाहरी) खाते में ऋण के लिए शेष राशि पर ब्याज |
ब्याज की राशि |
भारत के बाहर निवासी व्यक्ति (फेमा कानून के तहत) और व्यक्ति जिसको भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कथित खाता बनाए रखने के लिए अनुमति दी गई है, |
|
3. |
परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अंशदान तथा केंद्र सरकार द्वारा 01-06-2002 से पूर्व जारी अधिसूचित बचत प्रमाण पत्र पर ब्याज |
ब्याज की राशि |
व्यक्ति, भारत का नागरिक होने के नाते या एक गैर निवासी जो भारतीय मूल का एक व्यक्ति है। |
|
3क. |
एक भारतीय कंपनी/व्यापारिक न्यास द्वारा 17.09.2018 से 31.03.2019 की अवधि के दौरान भारत से बाहर जारी रूपए वाले बांड (धारा 194ठग में संदर्भित) पर ब्याज |
ब्याज राशि |
अनिवासी व्यक्ति या विदेशी कंपनी |
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3ख. |
निर्दिष्ट फंड द्वारा अर्जित या उपार्जित या प्राप्त आय जो एक अनिवासी (भारत में एक पीई के तौर पर नही) या विदेशी बैंकिंग यूनिट की निवेश ईकाई से संबंधित है। ऐसी छूट निम्नलिखित आय के संदर्भ में स्वीकार्य है। (क) एक पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के आय जैसा आईएफएससी में स्थित एक मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज पर धारा 47(viiकख) में संदर्भित है और राशि “परिवर्तनीय विदेशी विनिमय” में दी गई हो या दी जानी हो (ख) प्रतिभूतियों के स्थानांतरण से अर्जित आय (भारत में निवासी कंपनी में शेयरों को छोड़कर) (ग) अनिवासी (भारत में एक अनिवासी के पीई के तौर पर नही) द्वारा जारी प्रतिभूतियों से आय और जहां ऐसी आय भारत में अन्यथा अर्जित या उपार्र्जित न हो या (घ) प्रतिभूतिकरण न्यास जो शीर्षक “व्यापार या पेशे से लाभ और प्राप्ति” के अंतर्गत वसूलनीय है, से आय उस सीमा तक जहां ऐसी आय अर्जित या उपार्जित या प्राप्त होती है अनिवासी (एनआर के स्थाइ्र प्रतिष्ठानों के तौर पर नही) द्वारा रखी गई यूनिटों हेतु निर्दिष्ट या विदेशी बैंकिंग यूनिट के निवेश डिविजन हेतु निर्दिष्ट है |
पूंजी प्राप्ति/पीजीबीपी |
निर्दिष्ट किए गए फंड |
|
3ग. |
आईएफएससी की ऑफशोर बैंकिंग इकाई के साथ किए गए नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड अनुबंधों, ऑफशोर डेरिवेटिव साधनों, या ओवर-द-काउंटर डेरिवेटिव्स का अंतरण, अथवा ऑफशोर डेरिवेटिव साधनों या ओवर-द-काउंटर डेरिवेटिव्स पर, जैसा धारा 80ठक (1क) में उल्लिखित है या किसी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के साथ वितरित की गई आय, जो आईएफएससी की इकाई हो और निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो। |
पूरी आय |
अनिवासी |
|
3घ. |
पिछले वर्ष में वायुयान या एक समुद्री जहाज को पट्टे पर देने से आय, धारा 80ठ(1क) में संदर्भित एक आईएफएससी की यूनिट द्वारा भुगतान, यदि यूनिट ने 31 मार्च, 2030 को या उससे पहले संचालन शुरू किया हो |
रॉयल्टी या ब्याज आय |
अनिवासी |
|
3ड़. |
प्रतिभूतियों या वित्तीय उत्पादों या फंड जिसे एक आईएफएससी में एक विदेशी बैंकिंग यूनिट के साथ अनुरक्षित खाते में एक पोर्टफोलियो प्रबंधक द्वारा प्रबंधित है, के पोर्टफोलियों के रूप में आय |
पोर्टफोलियो सेवाओं से आय |
अनिवासी |
|
3च. |
धारा 80ठक(1A) में निर्दिष्ट किसी अनिवासी या आईएफएससी की इकाई द्वारा अर्जित आय। छूट निम्नलिखित शर्तों के अधीन दी जाएगी: (क) अनिवासी या आईएफएससी की इकाई को मुख्य रूप से विमान या समुद्री जहाज के पट्टे के व्यवसाय में संलग्न होना चाहिए; (ख) आय किसी घरेलू कंपनी के इक्विटी शेयरों के हस्तांतरण से उत्पन्न पूंजीगत लाभ की प्रकृति में होनी चाहिए; (ग) घरेलू कंपनी को धारा 80ठक(1क) में निर्दिष्ट अनुसार आईएफएससी की एक इकाई होनी चाहिए; (घ) घरेलू कंपनी को मुख्य रूप से विमान को पट्टे पर देने के व्यवसाय में संलग्न होना चाहिए; (ड़) घरेलू कंपनी को 31-03-2030 को या उससे पहले अपना परिचालन शुरू करना होगा; (च) घरेलू कंपनी के इक्विटी शेयरों को उसके परिचालन शुरू होने के 10 साल के भीतर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। हालाँकि, यदि घरेलू कंपनी ने 01-04-2024 के बाद अपना परिचालन शुरू किया, तो 10 साल की समय सीमा 01-04-2024 से गिनी जाएगी। उपरोक्त उद्देश्यों के लिए "विमान" का अर्थ है एक विमान, हेलीकॉप्टर, एक इंजन या विमान का हिस्सा या एक हेलीकॉप्टर या उसका कोई हिस्सा और समुद्री जहाज का अर्थ है एक समुद्री जहाज या महासागरीय जलयान या समुद्री जहाज या महासागरीय जलयान का एक इंजन या उसका कोई हिस्सा। |
पूंजीगत लाभ से आय (घरेलू कंपनी के इक्विटी शेयरों का हस्तांतरण) या पीजीबीपी (विमान को पट्टे पर देने के व्यवसाय में संलग्न) |
अनिवासी या आईएफएससी की एक इकाई |
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4. |
विदेशी राजनयिकों/वाणिज्य दूतावास और उनके कर्मचारियों द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक (शर्तों के अधीन) |
पारिश्रमिक |
व्यक्ति (भारत का नागरिक न होने पर) |
|
5. |
भारत में अपने प्रवास के दौरान उसके द्वारा दी गई सेवाओं के लिए एक विदेशी उद्यम के कर्मचारी के रूप में गैर भारतीय नागरिक द्वारा प्राप्त पारिश्रमिक, यदि: क) विदेशी उद्यम भारत में किसी भी व्यापार या व्यवसाय में लगे हुए नहीं है ख) भारत में अपने प्रवास ऐसी पिछले वर्ष में कुल 90 दिनों की अवधि में अधिक नहीं है ग) इस तरह के पारिश्रमिक इस अधिनियम के तहत प्रभार्य नियोक्ता की आय से कटौती की के लिए उत्तरदायी नहीं है |
पारिश्रमिक |
व्यक्ति - वेतनभोगी कर्मचारी (भारत का नागरिक नहीं होने पर) |
|
6. |
गैर निवासी द्वारा प्राप्त वेतन एक विदेशी जहाज पर अपने रोजगार के सिलसिले में दी गई सेवाओं के लिए यदि भारत में उसकी कुल प्रवास पिछले वर्ष में 90 दिन से अधिक नहीं है |
वेतन |
अनिवासी व्यक्ति - वेतनभोगी कर्मचारी (भारत का नागरिक न होने पर) |
|
7. |
व्यक्ति, जो भारत का नागरिक नहीं है द्वारा प्राप्त मेहनताना किसी भी सरकार के कार्यालय/वैधानिक उपक्रम आदि में उसके प्रशिक्षण के सिलसिले में भारत में अपने प्रवास के दौरान एक विदेशी राष्ट्र सरकार के एक कर्मचारी के रूप में |
पारिश्रमिक |
व्यक्ति - वेतनभोगी कर्मचारी (भारत का नागरिक न होने पर) |
|
8. |
01/06/2002 से पहले किया समझौते के तहत सरकार या भारत से सम्बन्धी से एफटीएस या रायल्टी पर भारत सम्बन्धी या सरकार द्वारा कर का भुगतान किया गया है जो या तो भारत सरकार के औद्योगिक नीति में शामिल एक मामले से संबंधित हो और उस नीति के अनुसार हो, अथवा जिसकी केन्द्र सरकार द्वारा मंजूरी दी गयी हो |
विदेशी कंपनी की कर देयता का करदाता द्वारा वहन |
विदेशी कंपनी |
|
9. |
वेतन, रॉयल्टी या तकनीकी सेवाओं के लिए शुल्क के माध्यम से आय के अलावा विदेशी राज्य की सरकार के साथ केंद्र सरकार, या सरकार या भारत सम्बन्धी से व्युत्पन्न आय पर अंतरराष्ट्रीय संगठन द्वारा 01/06/2002 से पहले समझौते की शर्तों में प्रवेश के तहत सरकार या भारत सम्बन्धी द्वारा कर का भुगतान किया गया है |
अनिवासी की कर देयता का करदाता द्वारा वहन |
अनिवासी |
|
10. |
अनुबंध किराये/आय पर 31/3/1997 और 01/04/1999 के बीच में या 31/3/2007 के बाद किए गए एक अनुमोदित (केन्द्र सरकार द्वारा) समझौता के तहत किया है, जिसने एक विमान या उसका इंजन अनुबंध पर अधिग्रहण किया है जो विमान के संचालन के कारोबार में लगे भारतीय कंपनी द्वारा कर का भुगतान किया गया है |
भारतीय कंपनी द्वारा कर देनदारी का वहन |
विदेशी राज्य या विदेशी उद्यम की सरकार |
|
11. |
केंद्र सरकार के साथ समझौते के अनुसार भारत की सुरक्षा से संबंधित परियोजनाओं में भारत अथवा विदेश में प्रतिपादित तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टी अथवा शुल्क के रूप में आय |
तकनीकी सेवाओं के लिए रायल्टी और शुल्क |
अधिसूचित विदेशी कंपनी |
|
11क. |
10(6घ) | राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन को भारत से बाहर या भारत में दी गई सेवाओं के लिए रायल्टी या एफटीएस के रूप में आय | पूरी राशि | अनिवासी या विदेशी कंपनी |
12. |
विदेशी मुद्रा में खरीदा गया अधिसूचित बॉन्ड पर ब्याज (01/06/2002 के पूर्व लिए अधिसूचित) (कुछ शर्तों के अधीन) |
ब्याज की राशि |
व्यक्ति, होने के नाते: क) एनआरआई या नामित व्यक्ति या एनआरआई की उत्तरजीवीय ख) व्यक्ति जिसे बांड एनआरआई द्वारा उपहार में दिया गया है| |
|
प्रतिभूतियों पर ब्याज |
ब्याज की राशि |
सीलोन के केंद्रीय बैंक का निर्गम विभाग |
||
भारतीय रिजर्व बैंक की मंजूरी के साथ अनुसूचित बैंक के साथ किए गए जमा पर ब्याज |
ब्याज की राशि |
विदेशों में स्थापित बैंक |
||
नॉर्डिक निवेश बैंक को देय ब्याज |
ब्याज की राशि |
नॉर्डिक निवेश बैंक |
||
उस बैंक और केन्द्र सरकार के बीच वित्तीय निगम के लिए दिनांक 25/11/1993 के समझौते के ढाचां के अनुसरण द्वारा दिए गए ऋण पर यूरोपीय निवेश बैंक को देय ब्याज |
ब्याज की राशि |
यूरोपीय निवेश बैंक |
||
01-06-2001 से पूर्व किए गए ऋण समझौते के अंतर्गत उसे दी गई राशि पर भारत में औद्योगिक उपक्रम द्वारा प्राप्त ब्याज |
ब्याज की राशि |
स्वीकृत विदेशी वित्तीय संस्थान |
||
विदेशी मुद्रा में जमा राशियों पर अनुसूचित बैंक द्वारा देय ब्याज, जहाँ बैंक द्वारा इस तरह जमा की स्वीकृति विधिवत रूप से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुमोदित है |
ब्याज की राशि |
क) अनिवासी ख) व्यक्तिगत या एचयूएफ एक निवासी है, लेकिन साधारण निवासी नहीं है |
||
विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 की धारा 2 (प) में निर्दिष्ट, एक विदेशी बैंकिंग इकाई में 01/04/2005 को या उसके बाद की गई जमा पर ब्याज। |
ब्याज की राशि |
व्यक्ति जो एक अनिवासी या साधारण निवासी नहीं है |
||
1 सितंबर, 2019 को या उसके बाद आईएफएससी में स्थित एक यूनिट द्वारा उधार ली गई राशि के संदर्भ में देययोग्य कोई ब्याज |
ब्याज राशि |
अनिवासी |
||
| 12क | 10(15ख) | भारत में संचालन करने वाले क्रूज जहाज से प्राप्त पट्टेदारी किराए से आय | पट्टेदारी किराया आय | विदेशी आय |
13. |
निर्दिष्ट योजना के तहत धन का निवेश से ब्याज, लाभांश या पूंजीगत लाभ से यूरोपीय आर्थिक समुदाय की आय |
निर्दिष्ट ब्याज, लाभांश या पूंजीगत लाभ |
यूरोपीय आर्थिक समुदाय |
|
14. |
21-12-1991 को जारी कोलंबो घोषणा द्वारा स्थापित क्षेत्रीय परियोजनाओं के लिए सार्क निधि की आय |
पूरी राशि |
क्षेत्रीय परियोजनाओं के लिए सार्क कोष |
|
14क |
निर्दिष्ट फंड में यूनिट के स्थानांतरण या निर्दिष्ट फंड से आय टिप्पणी : निर्दिष्ट फंड का अर्थ फंड जैसा धारा 10(4घ) में संदर्भित है |
पूरी आय |
ईकाईधारक |
|
14ख |
एक निर्दिष्ट व्यक्ति की आय टिप्पणी : 'निर्दिष्ट व्यक्ति' का अर्थ क) अबू धाबी निवेश प्राधिकरण, जो यूएई की घरेलू कंपनी है, की पूर्णता नियंत्रित सहायक कंपनी और जो यूएई सरकार द्वारा नियंत्रित कोष में से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर निवेश करती है ख) स्वायत्त संपत्ति फंड और पेंशन फंड जो निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं |
लाभांश, ब्याज कोई राशि जो धारा 56(2) के वाक्यांश में संदर्भित है या दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्ति (चाहे ऐसी पूंजीगत प्राप्ति धारा 50कक के अंतर्गत अल्पकालीन पूजीगत प्राप्तिके तौर पर समझी जाती हो या नही) जो भारत में किए गए निवेश से अर्जित हुई हो |
निर्दिष्ट व्यक्ति |
|
14ग. |
भारत में घरेलू कंपनी के शेयरों के स्थानांतरण पर आय, परिणामी फंड या निर्दिष्ट फंड द्वारा यदि निर्धारित शर्तें पूरी होती हैं |
पूंजीगत प्राप्ति |
अनिवासी |
|
| 14घ | 10(34ख) | एक आईएफएससी इकाई द्वारा अर्जित लाभांश आय जो मुख्य रूप से विमान पट्टे या समुद्री जहाज का व्यवसाय करती है। हालांकि, छूट इस शर्त पर है कि लाभांश का भुगतान करने वाली कंपनी भी एक आईएफएससी इकाई होनी चाहिए और विमान पट्टे या समुद्री जहाज के व्यवसाय में लगी होनी चाहिए | लाभांश आय | विमान पट्टे का व्यवसाय करने वाले आईएफएससी |
15. |
एक अनुमोदित और अधिसूचित समझौता या व्यवस्था के तहत भारत में किसी भी व्यक्ति के लिए, केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है के रूप में कच्चे तेल या किसी भी अन्य वस्तुओं या सेवाओं का प्रतिपादन की बिक्री के कारण एक विदेशी कंपनी द्वारा भारतीय मुद्रा में भारत में प्राप्त कोई भी आय (कुछ शर्तों के अधीन) |
निर्दिष्ट आय |
विदेशी कंपनी |
|
16 |
भारत में एक कच्चे तेल के भंडारण की सुविधा के कारण विदेशी कंपनी हेतु अर्जित अथवा प्राप्त कोई आय तथा भारत में किसी निवासी व्यक्ति को वहां से कच्चे तेल की बिक्री (कुछ शर्तों के अनुसार) |
पूर्ण राशि |
विदेशी कंपनी |
|
| 16क | समझौते की समाप्ति या 10(48क) में सदंर्भित व्यवस्था के बाद भारत में सुविधा से बचे हुए कच्चे तेल के बचे हुए स्टॉक की बिक्री के कारण विदेशी कंपनी द्वारा भारत में प्राप्त कोई राशि से उत्पन्न कोई राशि (कुछ शर्तों के अनुसार) |
पूरी राशि |
विदेशी कंपनी |
|
17 |
कोई राशि जो वित्त अधिनियम, 2016 के अध्याय VIII के अंतर्गत आरोपित होने वाले समकरण हेतु वसूलनीय है टिप्पणी : इस वाक्यांश के प्रावधान प्रभावी निर्धारण वर्ष 2026-27 से लागू नही होंगे। |
पूर्ण राशि |
गैर निवासी |
|
ख. व्यवसाय या पेशे से मुख्य लाभ और मुनाफे के तहत आय |
||||
1. |
नौवहन व्यापार से आय की संभावित आधार (कुछ शर्तों के अधीन) पर गणना की जाएगी। |
निर्दिष्ट राशि का 7.5% संभावित आय के तौर पर समझी जाएगी |
शिपिंग कारोबार में लगे हुए अनिवासी |
|
2. |
खनिज तेल के निष्कर्षण अथवा उत्पादन अथवा किराए पर प्रयोग अथवा प्रयोग किए जाने हेतु, पूर्वेक्षण में, संयंत्र तथा मशीनरी की अपूर्ति करने अथवा के संबंध में सेवा अथवा सुविधा उपलब्ध कराने वाले व्यापार में संलग्न एक गैर-निवासी की आय (कुछ शर्तों के अनुसार) | निर्दिष्ट राशि का 10% संभावित आय के तौर पर माना जाएगा |
खनिज तेल की खोज की गतिविधियों में लगे हुए अनिवासी |
|
3. |
विमान का संचालन के कारोबार में लगे एक अनिवासी की आय की संभावित आधार (कुछ शर्तों के अधीन) पर गणना की जाएगी। |
निर्दिष्ट राशि का 5% संभावित आय होना माना जाएगा |
एयरक्राप्ट के संचालन के व्यापार में संलग्न गैर-निवासी |
|
4. |
परियोजना से संबंधित उसको प्रर्वतन अथवा परीक्षण अथवा मशीनरी अथवा संयत्र के निर्माण के व्यापार अथवा सिविल निर्माण पॉवर टर्नकी के व्यापर में संलग्न एक विदेशी कंपनी की आय संभावित आधार पर आंकी जाएगी (कुछ शर्तों के अनुसार) |
निर्दिष्ट राशि का 10% संभावित आय होना माना जाएगा |
विदेशी कंपनी |
|
| 4क | 44खखग | अनिवासियों द्वारा क्रूज जहाज के संचालन के व्यापार से अनुमानित कराधान योजना | निर्दिष्ट राशियों का 20 प्रतिशत अनुमानित आय मानी जाएगी | अनिवासी |
| 4ख | 44खखघ | इलैक्ट्रानिक विनिर्माण सुविधा या विनिर्माण/उत्पादक इलैक्ट्रानिक उत्पादों को स्थापित करने के लिए भारत में एक घरेलू कंपनी को सेवा या तकनीक देने वाले अनिवासी हेतु काल्पनिक कर योजना | ऐसी सेवा या तकनीक हेतु अनिवासी को दी गई या दी जाने वाली कुल राशि का 25 प्रतिशत काल्पनिक आय के तौर पर समझी जाएगी | अनिवासी |
5. |
प्रधान कार्यालय व्यय के लिए कटौती (कुछ शर्तों और सीमाओं के अधीन) |
प्रधान कार्यालय व्यय के लिए कटौती निम्नलिखित के कम से कम तक सीमित की जाएगी क) समायोजित कुल आय का 5%*; या ख) प्रधान कार्यालय व्यय भारत में करदाता के व्यापार या पेशे के रूप में *जहाँ निर्धारिती की समायोजित कुल आय एक नुकसान है, समायोजित कुल आय औसत समायोजित कुल आय द्वारा प्रतिस्थापित की जाएगी। ** समायोजित कुल आय अथवा औसत समायोजित कुल आय निर्धारित समायोजित अर्थात् अनवशोषित धारा, बढ़ाए गए घाटे आदि के पश्चात् आंकी जाएगी। |
अनिवासी |
|
6. |
31-03-2003 के बाद किए गए एक समझौते के तहत प्राप्त, जो रायल्टी और एफटीएस से व्यय की कटौती प्रभावी ढंग से भारत में अनिवासी के पीई से जुड़ा है (कुछ शर्तों के अधीन)। |
भारत में व्यवसाय की पीई या नियत जगह के व्यापार के लिए पूरी तरह से और विशेष रूप से किए गए व्यय कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी। |
अनिवासी |
|
ग. प्रमुख पूंजी लाभ के तहत आय |
||||
1. |
एकीकृत विदेशी कंपनी (एकीकरण की योजना में) को मिलाकर एकीकृत विदेशी कंपनी द्वारा एक भारतीय कंपनी के शेयरों में किया है एक पूंजीगत परिसंपत्ति का हस्तांतरण 'स्थानांतरण' (कुछ शर्तों के अधीन) के रूप में माना नहीं किया जाएगा। |
कोई पूंजीगत लाभ, पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के कारण विदेशी मिश्रित कंपनी के हाथों अर्जित होगा। |
विदेश कम्पनियों को मिलाकर |
|
| 2. | 47(viकख) | समामेलन की योजना के अंतर्गत विदेशी कंपनी द्वारा संघटित विदेशी कंपनी (जो भारतीय कंपनी के शेयर अथवा शेयरों से वस्तुत: इसकी राशि प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से व्युत्पन्न होती हैं) के शेयरों का अन्य विदेशी कंपनी को स्थानांतरण स्थानांतरण के तौर पर नहीं समझा जाएगा (कुछ शर्तों के अनुसार) | कोई पूंजीगत प्राप्ति विदेशी समामेलन कंपनी के हाथो उत्पन्न नहीं होगी | विदेशी समामेलन कंपनी |
| 2क | 47(viiकख) | धारा 115कग(1) में संदर्भितानुसार बांड या भारतीय कंपनी के रूपए में बांड या जीडीआर का स्थानांतरण या किसी आईएफएससी में स्थित प्राधिकृत शेयर बाजार पर अनिवासी द्वारा व्युत्पन्न और जहां प्रतिफल विदेशी मुद्रा में दिया जाता है | गैर पूंजी प्राप्ति अनिवासी के हाथों उत्पन्न होगी | अनिवासी |
3. |
विदेशी कंपनी के (विघटन की योजना में) परिणामस्वरूप का, विदेशी कंपनी विघटन, द्वारा एक भारतीय कंपनी में शेयरों के तौर पर एक पूंजी परिसंपत्ति हस्तांतरण 'स्थानांतरण' (कुछ शर्तों के अधीन) के रूप में नहीं समझा जाएगा। |
कोई पूंजीगत लाभ पूंजीगत परिसंपत्ति के स्थानांतरण के कारण विदेशी मिश्रित कंपनी के हाथों उपार्जित नहीं होगा |
विदेशी कंपनी का विघटन |
|
| 4. | 47(viगग) | विघटन के अनुसारी परिणामी विदेशी कंपनी को डिमर्ज विदेशी कंपनी द्वारा धारित विदेशी कंपनी के शेयरों का स्थानांतरण (जो भारतीय कंपनी के शेयर अथवा शेयरों से वस्तुत: इसकी राशि प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से व्युुत्पन्न होती हैं) को स्थानांतरण के तौर पर नहीं समझा जाएगा (कुछ शर्तों के अनुसार) | कोई पूंजीगत प्राप्ति विदेशी डिमर्ज कंपनी के हाथो उत्पन्न नहीं होगी | विदेशी डिमर्ज कंपनी |
5. |
एक गैर-निवासी द्वारा अन्य गैर-निवासी को भारत से बाहर बांड अथवा जीडीआर [ धारा 115कग (1) में संदर्भित ] के तौर पर पूंजीगत परिसंपत्ति का हस्तांतरण 'स्थानांतरण' के तौर पर नहीं समझा जाएगा |
कोई पूंजीगत लाभ अनिवासी अंतरणकर्ता के हाथों अर्जित नहीं होगा |
अनिवासी |
|
5क |
एक अनिवासी द्वारा अन्य अनिवासी को भारत से बाहर कोई जारी भारतीय कंपनी के रूपए वाले बांड के तौर पर पूंजीगत परिसंपत्ति का स्थानांतरण ‘स्थानांतरण’ के तौर पर नहीं समझा जाएगा |
पूंजीगत प्राप्ति अनिवासी स्थानांतरणकर्ता के हाथों उत्पन्न नहीं होगी |
अनिवासी |
|
5ख |
स्थानांतरण में मूल फंड द्वारा पूंजीगत परिसंपत्ति के परिणामी फंड में स्थानांतरण को पूंजीगत प्राप्ति कर उद्देश्य के लिए स्थानांतरण के तौर पर नही समझा जाएगा टिप्पणी : मूल फंड, स्थानांतरण व परिणाम फंड के अर्थ के लिए धारा 47(viiकघ) हेतु स्पष्टीकरण |
पूंजीगत प्राप्ति की राशि |
अनिवासी |
|
5ग |
परिणामी फंड में शेयर या यूनिट या ब्याज पर विचार करते हुए मूल फंड में शेयरधारक या यूनिटधारक द्वारा रखे गए शेयर या यूनिट या ब्याज (स्थानांतरण में) शेयर के तौर पर पूंजीगत परिसंपत्ति का स्थानांतरण टिप्पणी : मूल फंड, स्थानांतरण व परिणामी फंड के अर्थ के लिए धारा 47(viiकघ) के स्पष्टीकरण को संदर्भित करें |
पूंजीगत प्राप्ति की राशि |
अनिवासी |
|
6. |
एक पूंजी परिसंपत्ति का हस्तांतरण, एक अनिवासी द्वारा अनिवासी को (प्रतिभूति के निपटारे में एक मध्यस्थ के व्यवहार के माध्यम से) भारत के बाहर किए गए ब्याज की एक आवधिक भुगतान, ले जाने के लिए एक सरकारी प्रतिभूति के तौर पर 'स्थानांतरण' (कुछ शर्तों के अनुसार) के तौर पर नहीं समझा जाएगा । (वित्त अधिनियम, 2014 (सं. 2) द्वारा निवेशन)। |
कोई पूंजीगत लाभ अनिवासी अंतरणकर्ता के हाथों अर्जित नहीं होगा |
अनिवासी |
|
7. |
48 के लिए पहला परंतुक |
पूंजीगत लाभ की गणना जब भारतीय कंपनी में शेयर अथवा डिबैंचर स्थानांतरित हुए जिसे विदेशी मुद्रा में अधिग्रहित किया गया (कुछ शर्तों के अधीन) |
पूंजीगत लाभ उसी विदेशी मुद्रा (शेयर अथवा डिबेंचर के अधिग्रहण हेतु प्रयोग की गई) में आंका जाएगा जिसे भारतीय मुद्रा में पुनः परिवर्तित की जाएगी |
अनिवासी |
8. |
निर्दिष्ट विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति के स्थानांतरण से उपार्जित दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ कर से मुक्त होगा यदि शुद्ध प्रतिफल अधिसूचित बचत प्रमाण पत्र में जमा की गई अथवा किसी निर्दिष्ट परिसंपत्ति में स्थानांतरण की तिथि के पश्चात् छह माह के भीतर निवेशित किया जाता है (कुछ शर्तों के अनुसार) |
छूट की राशि निम्नलिखित तरीके से गणना की जाएगी: नई परिसंपत्ति एक्स पूंजी लाभ में निवेश की गई राशि/कुल बिक्री विचार |
भारतीय अनिवासी |
|
घ. अन्य प्रावधान |
||||
1. |
एक गैर-निवासी अधिनियम या प्रासंगिक डीटीएए के प्रावधानों का (भारत समकक्ष विदेशी देश के साथ में प्रवेश किया है), आवेदन कर सकते हैं जो भी एक अनिवासी के किए अधिक फायदेमंद है। |
डीटीएए के लाभकारी प्रावधान या आयकर अधिनियम |
अनिवासी |
|
| 2. | 95 | गार के प्रावधान 1 अप्रैल, 2018 को अथवा उसके पश्चात् आरंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में लागू होंगे | - | - |
3. |
यदि निविल कर योग्य आय (रोजगार से आय होने के नाते) अधिकतम राशि जो कर (रु. 2,50,000) हेतु वसूलनीय नहीं है, से कम है तो स्रोत पर कोई कर कटौती नहीं होगी |
वेतन से स्रोत पर कर की कोई कटौती नहीं होगी |
अनिवासी - व्यक्ति |
|
4. |
एक गैर-निवासी आवेदक कर देयता के निर्धारण हेतु प्राधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकता है जो भारत में किए गए व्यापार में से अर्जित हो सकता है (कुछ शर्तों के अनुसार) |
अनिवासी अग्रिम फैसले के लिए आवेदन दाखिल कर सकते हैं |
अनिवासी |
|
4क |
केंद्र सरकार को अधिसूचित तिथि को और के बाद अग्रिम निर्णय देने के लिए एक या एक से अधिक अग्रिम निर्णय बोर्ड का गठन करना है |
अनिवासी अग्रिम निर्णय के लिए आवेदन कर सकते हैं |
अनिवासी |
|
5. |
एक गैर-निवासी भारतीय को आय की विवरणी दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है यदि उसकी कुल आय में केवल निम्नलिखित आय शामिल है तथा वहां से कर कटौती की गई हो क) विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में निवेश से आय ख) विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों के हस्तांतरण से अर्जित होने वाले दीर्घ अवधि के पूंजी प्राप्ति। |
आय की विवरणी को भरने से छूट |
अनिवासी व्यक्ति |
|
* विस्तृत शर्तों, के लिए आयकर अधिनियम 1961 देखें
नोट:
क) "विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति" का अर्थ है कोई "निर्दिष्ट परिसंपत्ति" जिसे निर्धारिती ने परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अंशदान अथवा प्राप्त अथवा खरीदा हो [धारा 115ग(ख)]।
ख) धारा 115(च) के विचार में, "निर्दिष्ट परिसंपत्ति" अर्थात् निम्नलिखित संपत्ति के कोई भी अर्थ है:
(i) एक भारतीय कंपनी में शेयर
(ii) किसी भारतीय कंपनी जो एक निजी कंपनी नहीं है द्वारा जारी डिबेचर ;
(iii) एक भारतीय कंपनी जो एक निजी कंपनी नहीं है के साथ जमा ;
(iv) केन्द्रीय सरकार की कोई प्रतिभूति;
(v) अन्य अधिसूचित संपत्ति
ग) 'गैर-निवासी भारतीय' का अर्थ एक व्यक्ति, भारत का निवासी अथवा भारतीय मूल का व्यक्ति होने के नाते, "जो एक निवासी नहीं है" [धारा 115(ड़)]
9. अनिवासी के लिए करों के विशेष दरें
क्र. सं. |
` | विवरण |
दरें |
1. |
दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभ |
12.50% |
|
2. |
असूचीबद्ध प्रतिभूतियों, के तौर पर के एक पूंजी परिसंपत्ति के हस्तांतरण से उत्पन्न होने जा रहा, दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ |
12.50% |
|
3. |
कर की रियायती दर यदि सूचीबद्ध प्रतिभूतियों या इकाइयों या जीरो कूपन बांड के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाले दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभ, सूचीकरण का लाभ लेने के बिना गणना की जाती है। |
12.5% |
|
4. |
यदि कर की रियायती दर अल्पावधि पूंजी लाभ ईक्विटी शेयर या ईक्विटी उन्मुखी फंड की इकाइयों, या व्यापार न्यास का एक इकाई के हस्तांतरण से उत्पन्न होने वाली प्रतिभूति लेनदेन कर के दायरे में है। |
20% |
|
| 5 | 112क | पूंजी प्राप्तियों, सूचीबद्ध ईक्विटी शेयर के तौर पर, ईक्विटी ओरिएंटिड फंड की यूनिट या व्यापारिक ट्रस्ट के स्थांनातरण के उत्पन दीघ्रकालीन पूंजीगत प्राप्तिी |
12.50% |
| 5क | 115कघ | निर्दिष्ट फंड द्वारा या सरकार द्वारा निर्दिष्ट विदेशी संस्थागत निवेशक द्वारा प्राप्त प्रतिभूतियों के संदर्भ में आय • धारा 111क द्वारा शामिल अल्पकालीन पूंजीगत प्राप्ति • अन्य कोई अल्पकालीन पूंजीगत प्राप्ति • दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्ति • रू. 1.25 लाख से अधिक की दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्ति (धारा 112क में संदर्भित) (यदि स्थानांतरण 23.07.2024 को या उसके बाद हुआ हो) • धारा 194ठघ में संदर्भित ब्याज • एफआईआई के मामले में अन्य आय • निर्दिष्ट फंड के मामले में अन्य आय |
20% 30% 12.5% 12. 5% 5% 20% 10 % |
6. |
लाभांश |
20% |
|
| 6क | 115क(1)(क)(i) | आईएफएससी में स्थित एक ईकाई से लाभांश (जैसा धारा 80ठक(1क) में संदर्भित है) | 10 % |
7. |
विदेशी मुद्रा में किए गए उधार राशि या ऋण पर सरकार अथवा एक भारतीय संबधित से प्राप्त ब्याज |
20% |
|
8. |
धारा 10(47) में निर्दिष्टानुसार अधिसूचित बुनियादी ढांचा ऋण निधि से ब्याज |
5% |
|
9. |
धारा 194ठग (कुछ शर्तों के अधीन) में निर्दिष्टानुसार किसी दीर्घ-अवधि बांड के निगमन द्वारा ऋण समझौते के अंतर्गत भारत से बाहर स्रोत से विदेशी मुद्रा में उसके द्वारा उधार ली गई राशि पर भारतीय कंपनी द्वारा प्राप्त ब्याज। |
5% या 4% या 9% |
|
10. |
धारा 194ठघ में संदर्भित प्रकार का और उस सीमा का ब्याज |
5% | |
11. |
धारा 194ठखक में संदर्भित ब्याज के तौर पर लाभांश आय |
5% या 10% या 30% |
|
12. |
विदेशी मुद्रा में एक की खरीदी इकाइयों के संबंध में आय [धारा 10 (23घ) यू टी आई म्यूचुअल फंड के तहत अन्योन्य निधि निर्दिष्ट] |
20% |
|
13. |
31-03-1976 के पश्चात् किसी भी समय किए गए समझौते के अनुसार प्राप्त रायल्टी अथवा एफटीएस (धारा 44घक में संदर्भित आय को छोड़कर) के रूप में आय। |
20% |
|
14. |
दीर्घ अवधि पूंजीगत प्राप्ति के तौर पर विदेशी मुद्रा में खरीदी गई इकाईयों के स्थानांतरण पर विदेशी वित्त संस्थान की आय |
12.5% |
|
| 14क | 115कख | विदेशी मुद्रा में खरीदी गई इकाइयों के संबंध में एक विदेशी वित्तीय संगठन की आय | 10 % |
| 14ख | 115कख | सरकार द्वारा बेचे गई और विदेशी मुद्रा में खरीदी गई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के बांड या जीडीआर से आय | 10% |
| 15 | 115कग | बांड या जीडीआर के स्थानांतरण से अर्जित दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्तियों से आय | 12.5% |
16. |
धारा 111क में निर्दिष्टानुसार निर्दिष्ट फंड या एफआईआई द्वारा अर्जित लघु अवधि के पूंजीगत लाभ |
15% |
|
| 16क | 115कग(1)(ख) | धारा 111क में संदर्भित एफआईआई या निर्दिष्ट फंड द्वारा अर्जित अल्पकालीन पूंजीगत प्राप्ति | 15% |
17. |
एफआईआई या निर्दिष्ट फंड द्वारा अर्जित कोई अन्य अल्पावधि पूंजी लाभ (धारा 111क में निर्दिष्टानुसार के अलावा) |
30% |
|
18. |
निर्दिष्ट फंड या एफआईआई द्वारा अर्जित दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ |
12.5% |
|
19. |
निर्दिष्ट फंड या एफआईआई द्वारा अर्जित धारा 194ठघ में संदर्भित ब्याज |
5% |
|
20. |
निर्दिष्ट फंड या एफआईआई द्वारा अर्जित अन्य आय |
एफआईआई के लिए निर्दिष्ट फंड 20% व निर्दिष्ट फंड के लिए 10 % |
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21. |
भारत में किसी भी खेल में भाग लेने के लिए एक अनिवासी विदेशी नागरिक खिलाड़ी की आय या विज्ञापन के माध्यम से अथवा भारत में किसी खेल अथवा क्रीडा से संबंधित वस्तु के योगदान से आय अथवा गारंटी राशि के रूप में एक अनिवासी खेल संघ आय। |
20% |
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22. |
भारत में प्रदर्शन के लिए अनिवासी विदेशी नागरिक (एक मनोरंजक के तौर पर) की आय |
20% |
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23. |
अनिवासी भारतीय का विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति से आय। |
20% |
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24. |
अनिवासी भारतीय द्वारा विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति का हस्तांतरण से दीर्घ अवधि के पूंजी लाभ |
10% |
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| 25 | 115ड़ | निर्दिष्ट परिसंपत्ति को छोड़कर किसी अन्य परिसंपित्त की दीर्घकालीन पूंजीगत प्राप्तियों से आय | 20% |
7. विदेशी कंपनियों पर न्यूनतम वैक्लिपिक कर (मैट) की प्रयोज्नीयता
विदेशी कंपनी में संबंध में ऐसी विदेशी कंपनी हेतु प्राप्त अथवा अर्जित तकनीकी सेवा के लिए प्रतिभूति, ब्याज, रायल्टी तथा शुल्क के स्थानांतरण से प्राप्त पूंजीगत प्राप्ति मैट शुल्क के प्रयोजन के लिए बही लाभ से बाहर होगा। यदि ऐसी आय पर विदेशी कंपनी द्वारा देय योग्य आयकर 15% से काम होता है। इसके अतिरिक्त, ऐसी आय के संबंध में लाभ हानि खाते हेतु जमा व्यय, यदि कोई हो, भी मैट की गणना के प्रयोजन के लिए बही लाभ में पुन जोड दिया जाएगा।
हालांकि, धारा 115ञख के प्रावधान विदेशी कंपनी के लिए 1 अप्रैल, 2001 से प्रभावी नहीं होंगे यदि -
(i) निर्धारिती एक राष्ट्र अथवा उस निर्दिष्ट क्षेत्र का निवासी हो जिसके साथ भारत ने दोहरा कराधान परिहार समझौता ('डीटीएए') किया है अथवा केंद्र सरकार ने धारा 90क की उप-धारा (1) के अंतर्गत किसी समझौता किया है तथा निर्धारिती के पास भारत में स्थाई प्रतिष्ठान नहीं है अथवा
(ii) निर्धारिती उस राष्ट्र का निवासी हो जिसके साथ भारत ने दोहरा कराधान परिहार समझौता न किया हो तथा निर्धारिती को कंपनियों से संबंधित थोड़े समय के लिए प्रभावी किसी कानून के अंतर्गत पंजीकरण करने की आवश्यकता न हो।
[वित्त अधिनियम, 2025 द्वारा संशोधित]

